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सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा प्रभावी नीति निर्माण का आधार: योगेन्द्र उपाध्याय
- *राज्य स्तरीय AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने डेटा की शुद्धता और समयबद्धता पर दिया जोर*
- *डेटा कलेक्शन को औपचारिकता नहीं, नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी मानें: उच्च शिक्षा मंत्री*

लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रभावी नीति निर्माण, योजनाओं के निर्धारण और उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। डेटा के आधार पर ही तय किया जा सकता है कि कहां नए संस्थानों की आवश्यकता है, कहां शिक्षकों एवं संसाधनों की जरूरत है और विकास के लिए किन क्षेत्रों में विशेष कार्य किए जाने चाहिए। अर्थात भावी कार्यक्रम, योजनाएं और नीतियों का उचित निर्धारण डाटा पर ही निर्भर करता है।
उच्च शिक्षा मंत्री सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE (All India Survey on Higher Education) कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के समन्वय से किया गया। इसमें डेटा संग्रहण, सत्यापन, सबमिशन, विश्लेषण तथा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि डेटा समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था का दर्पण है। भारत सरकार और प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण निर्णय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेती हैं। इसलिए डेटा कलेक्शन को नियमित प्रक्रिया न मानकर नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। यदि डेटा सही होगा तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी।
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के AISHE डेटा को नियमित अपडेट करने पर जोर दिया। कहा कि कई संस्थान AISHE कोड प्राप्त करने के बाद समय पर डेटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। नोडल अधिकारी नियमित समीक्षा करें। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि की प्रतीक्षा की प्रवृत्ति से बचें, समय रहते डेटा प्राप्त कर परीक्षण सुनिश्चित करें। नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रमों, परीक्षा, परिणाम, आधारभूत संरचना की सूचनाएं मूल अभिलेखों से सत्यापित कर ही दर्ज की जाएं। केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं, उसकी शुद्धता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नोडल अधिकारियों की भूमिका केवल कलेक्शन तक सीमित न रहे। अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए, आवश्यकता अनुसार रैंडम वेरिफिकेशन कर अभिलेखों और AISHE डेटा की वास्तविकता जांची जाए और संस्थानों को तकनीकी-प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाए। प्रदेश का प्रयास जीरो पेंडेंसी की दिशा में होना चाहिए। कोई भी पात्र एवं कार्यशील संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सही सूचना, सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। आंकड़ों से भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान कर नए संस्थानों, फैकल्टी और विभागों पर बेहतर योजना बन सकती है। डेटा प्लानिंग को औपचारिकता नहीं, पॉलिसी प्लानिंग की जिम्मेदारी मानना चाहिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि AISHE के लिए डेटा प्रबंधन केवल नोडल अधिकारी की नहीं, पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। डेटा प्रवेश, परीक्षा सहित विभिन्न अनुभागों से आता है, इसलिए विश्वसनीयता के लिए संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और AISHE रिकॉर्ड में एकरूपता, एफिलिएशन सूची के रीकन्सिलिएशन, गलत रिपोर्टिंग और डबल रिपोर्टिंग से बचने के लिए प्रामाणिक अभिलेखों की जांच तथा असामान्य बदलाव पर गहराई से समीक्षा पर जोर दिया। डेटा अपलोड करना प्रक्रिया है, लेकिन उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह ने आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन और गुणवत्ता पर विचार रखे। कार्यशाला में RMLNLU के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह, निदेशक AISHE की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी AISHE प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश के. राजपूत सहित अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्रों में DCF और AISHE पोर्टल से संबंधित जानकारी दी गई और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।
बकाया दुग्ध मूल्य भुगतान में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई : धर्मपाल सिंह
- *लखनऊ, मेरठ और मुरादाबाद के जीएम को जल्द भुगतान के निर्देश, हर माह किसानों को समय से भुगतान सुनिश्चित करने को कहा*

लखनऊ, 28 सितंबर। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने किसानों और पशुपालकों के बकाया दुग्ध मूल्य भुगतान को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए लखनऊ, मेरठ और मुरादाबाद के महाप्रबंधकों (जीएम) को लंबित भुगतान तत्काल कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों को हर माह नियमित रूप से दुग्ध मूल्य का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। भुगतान में लापरवाही या शून्य भुगतान की स्थिति सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पीसीडीएफ सभागार में प्रदेश के सभी दुग्ध संघों के अध्यक्षों और महाप्रबंधकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि शासन से बकाया भुगतान के लिए उपलब्ध कराई जा रही धनराशि का इस्तेमाल किसी अन्य मद में न किया जाए। यह राशि केवल किसानों के दुग्ध मूल्य भुगतान पर ही खर्च की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी योजना के लक्ष्य की प्राप्ति में लापरवाही या अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी का वेतन रोकने की कार्रवाई भी की जाएगी।
- *इस वर्ष 25 हजार ग्राम पंचायतों में गठित होंगी दुग्ध समितियां*
मंत्री ने अधिकारियों को इस वर्ष 25 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक दुग्ध समिति का गठन करने का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ निष्क्रिय समितियों को फिर से सक्रिय किया जाए। वर्तमान में संचालित समितियां किसी भी स्थिति में बंद नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी महाप्रबंधकों को मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि पराग के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रभावी मार्केटिंग रणनीति तैयार की जाए। साथ ही दुग्ध संग्रहण के लिए व्यवस्थित रूट तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि उचित मार्केटिंग के बिना दुग्ध संघों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा।
- *दुग्ध उपार्जन में 13 प्रतिशत की वृद्धि*
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और दुग्ध उपार्जन में प्रगति हुई है। प्रदेश में वर्तमान में 7,667 कार्यरत दुग्ध समितियां हैं। जिला योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 220 समितियों का गठन किया गया है। वहीं, नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत 1,750 के लक्ष्य के सापेक्ष 1,819 समितियां गठित की जा चुकी हैं।
दोनों योजनाओं के तहत कुल 3,748 समितियों के लक्ष्य के सापेक्ष 2,039 समितियों का गठन पूरा किया गया है। इसके अलावा 450 समितियों के पुनर्गठन के लक्ष्य के सापेक्ष 407 समितियों का पुनर्गठन किया जा चुका है।
दुग्ध उपार्जन में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में औसत दुग्ध उपार्जन 4.08 लाख किलोग्राम प्रतिदिन है, जबकि औसत तरल दुग्ध बिक्री में 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 2.12 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है।
- *किसानों का विश्वास बनाए रखना जरूरी*
धर्मपाल सिंह ने कहा कि किसानों का विश्वास आज भी पराग के साथ है। इसे बनाए रखने के लिए दुग्ध समितियों का गठन, किसानों को समय से भुगतान और पशुपालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से संचालित करना होगा। उन्होंने पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन की नई तकनीकों और आधुनिक जानकारी से प्रशिक्षित करने पर जोर दिया, ताकि प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
उन्होंने पशुधन विभाग के अधिकारियों से लम्पी रोग की रोकथाम की तैयारियों की भी जानकारी ली और जनपदों में भेजे गए नोडल अधिकारियों को लगातार स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि पशुओं के लिए वैक्सीन और दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। नकली या प्रभावहीन दवाओं के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- *किसानों और पशुपालकों का हित सरकार की प्राथमिकता : कृष्णा पासवान*
पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री कृष्णा पासवान ने कहा कि किसानों और पशुपालकों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ने से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने पराग के बूथों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि किसानों और पशुपालकों को दुग्ध मूल्य भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर लंबित भुगतान करने और दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश बिंदु, सभी दुग्ध संघों के अध्यक्ष एवं इकाई प्रभारी, पशुपालन निदेशालय की निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित पीसीडीएफ और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रेबीज उन्मूलन के लिए व्यापक जन-जागरूकता जरूरी : मेश्राम
- *रेबीज मुक्त उत्तर प्रदेश की दिशा में अहम पहल, पशुपालन विभाग और Jhpiego ने ‘One Health’ पर किया मंथन*

लखनऊ, 28 सितंबर। विश्व रेबीज दिवस 2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश को रेबीज मुक्त बनाने की दिशा में पशुपालन विभाग और अंतरराष्ट्रीय संस्था Jhpiego की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई। दोनों संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में ‘One Health Consultation on Rabies Prevention and Elimination in Uttar Pradesh’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रेबीज की रोकथाम, प्रभावी टीकाकरण और मानव-पशु स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि मानव और पशु स्वास्थ्य का एक-दूसरे से गहरा संबंध है। रेबीज जैसी घातक बीमारी के उन्मूलन के लिए एकीकृत रणनीति के साथ व्यापक जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग प्रदेश को सुरक्षित और रेबीज मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- *2030 तक रेबीज उन्मूलन की रणनीति पर मंथन*
परामर्श कार्यक्रम में ‘One Health’ दृष्टिकोण के तहत प्रदेश में रेबीज की प्रभावी रोकथाम, श्वानों का शत-प्रतिशत एंटी रेबीज टीकाकरण तथा मानव और पशु स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। वर्ष 2030 तक रेबीज के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक रणनीतियों और कार्ययोजना पर भी विस्तार से विचार किया गया। कार्यक्रम में निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (रोग नियंत्रण एवं फार्म) डॉ. संगीता तिवारी, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ तथा Jhpiego के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
- *प्रदेशभर में लगाए गए निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर*
पशुपालन विभाग की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में विशेष निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर भी आयोजित किए गए। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में श्वानों तथा अन्य पशुओं में रेबीज के संक्रमण को रोकने के साथ आमजन को इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करना रहा। शिविरों में पशुचिकित्सा विभाग की विशेषज्ञ टीमों ने पशुपालकों और स्थानीय नागरिकों के श्वानों का निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया। इस दौरान पशुपालकों को बताया गया कि रेबीज गंभीर और जानलेवा विषाणुजनित बीमारी है, लेकिन समय पर टीकाकरण, सावधानी और उचित प्रबंधन के माध्यम से इसके संक्रमण को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
- *पालतू श्वानों का समय से कराएं टीकाकरण*
पशुपालन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने पालतू श्वानों का समय से नियमित एंटी रेबीज टीकाकरण अवश्य कराएं। किसी पशु के काटने की स्थिति में बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेने की भी अपील की गई है। विभाग ने आवारा श्वानों के संबंध में भी लोगों से जिम्मेदार और सुरक्षित व्यवहार अपनाने को कहा है। अभियान के दौरान विभागीय पशुचिकित्साधिकारी, पैरावेट कर्मचारी और बड़ी संख्या में पशुपालक मौजूद रहे। विभाग की ओर से आगामी दिनों में भी प्रदेशभर में रेबीज की रोकथाम, पशु टीकाकरण और सुरक्षित पशु-व्यवहार को लेकर जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की बात कही गई है।
यूपी के पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों पर प्रदर्शित होंगे सेना के सेवामुक्त हथियार और रक्षा उपकरण

- *सेना के गौरव, शौर्य और पराक्रम से प्रेरणा लेंगे पर्यटक और आमजन : जयवीर सिंह*

लखनऊ, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख पर्यटन एवं सांस्कृतिक स्थलों पर भारतीय सेना से सेवामुक्त रक्षा सामग्री, हथियार और सैन्य उपकरण आम जनता के दर्शनार्थ प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के प्रस्ताव पर भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए शासन से कार्रवाई अपेक्षित की है। संबंधित प्रक्रिया शासन स्तर पर आगे बढ़ाई जा रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि उन्होंने 4 जुलाई 2026 को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजकर पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा विकसित महत्वपूर्ण स्थलों पर भारतीय सेना से सेवामुक्त रक्षा सामग्री, हथियार एवं उपकरण प्रदर्शित किए जाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सैन्य उपकरणों की स्थापना से आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी को भारतीय सेना के गौरव, शौर्य और पराक्रम से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे देशभक्ति की भावना को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
इन पांच स्थानों पर प्रदर्शित करने का प्रस्ताव
मंत्री के अनुसार सेवामुक्त रक्षा सामग्री और सैन्य उपकरणों को निम्नलिखित पांच स्थानों पर प्रदर्शित किए जाने का प्रस्ताव है—

- *समौर बाबा धाम, करहरा, जनपद फिरोजाबाद* 
- *राष्ट्र प्रेरणा स्थल, लखनऊ*
- *वॉर मेमोरियल पार्क, कैंटोनमेंट, वाराणसी*
- *गौरव संग्रहालय, गोरखपुर*
- *सांस्कृतिक केंद्र, जनपद मैनपुरी*
रक्षा मंत्रालय की ओर से उपकरणों की स्थापना के संबंध में कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। इन औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए शासन स्तर से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- *संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश*
शासन ने संयुक्त निदेशक पर्यटन, लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर को संबंधित संस्थाओं एवं पर्यटन स्थलों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई कराकर इसकी सूचना महानिदेशक पर्यटन के माध्यम से शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, आगरा मंडल को भी रक्षा मंत्रालय के पत्र में उठाए गए बिंदुओं के संबंध में संबंधित संस्थाओं और पर्यटन स्थलों पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकार की इस पहल से इन पर्यटन स्थलों पर सैन्य विरासत और राष्ट्रसेवा से जुड़ी सामग्री को आमजन के सामने प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जिससे पर्यटकों को पर्यटन के साथ-साथ भारतीय सेना के इतिहास और योगदान से भी परिचित कराया जा सकेगा।
एआई उत्तर दे सकता है, सवाल करना अच्छी किताब ही सिखाएगी: सीएम योगी

- मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बाल मेला सम्मान समारोह, मुख्यमंत्री योगी ने करीब 70 प्रतिभावान बच्चों को किया सम्मानित

- बोले- अंकों के पीछे उतना ही भागें जितना मानसिक संतुष्टि दे, स्कूल-कॉलेजों में बच्चों के लिए जरूर मंगवाएं समाचार पत्र

- साढ़े नौ वर्ष पहले बदनाम था यूपी, नाम सुनकर चौंकते थे लोग, युवाओं के सामने था पहचान का संकट: मुख्यमंत्री योगी

- 2017 से पहले हर दूसरे दिन होते थे दंगे, महीनों रहता था कर्फ्यू, आज यूपी कर्फ्यू, दंगा और उपद्रव से मुक्त

- यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक पारदर्शी भर्तियां, बोले- इन भर्तियों पर कोई सवाल नहीं उठा सकता

- 2017 से पहले केवल 120 स्टार्टअप, आज 24 हजार से अधिक, नौकरी देने वाला बन रहा यूपी का युवा

- सम्मान पाने में बेटियां रहीं आगे, बोले- अवसर मिले तो अपनी प्रतिभा के बल पर सब कुछ कर सकती हैं बेटियां

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सवालों के जवाब दे सकता है और काम आसान कर सकता है, लेकिन सवाल करना अच्छी किताब ही सिखाएगी। तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर न हों। अच्छी पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ें और नई चीजों को जानने की जिज्ञासा बनाए रखें।

मुख्यमंत्री योगी मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक मीडिया हाउस की ओर से आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विज्ञान मॉडल, चित्रकला, निबंध समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं के करीब 70 विजेता छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

- साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश बदनाम प्रदेश था। यूपी के नाम से लोग चौंकते थे और युवाओं के सामने पहचान का संकट था। अकेले यूपी पुलिस में दो लाख से अधिक पद खाली थे। सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया और प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में विभिन्न विभागों में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। अकेले यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक भर्तियां हुई हैं। इन भर्तियों की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

- पहले दंगे और कर्फ्यू, अब सुरक्षित प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू रहता था। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा और उपद्रव से मुक्त सुरक्षित प्रदेश है। सामर्थ्य पहले भी थी, लेकिन करने की इच्छाशक्ति नहीं थी। आज प्रयास हो रहा है तो परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। आज यह शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है।

- 120 से बढ़कर 24 हजार से अधिक स्टार्टअप

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे। आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। अब यूपी का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि स्टार्टअप के जरिए दूसरों को नौकरी देने वाला भी बन रहा है। गोरखपुर के टेराकोटा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से कारीगरों को बाजार मिला है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं और 90 देशों से 650 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं।

- 550 खिलाड़ियों को नौकरी, अगले सप्ताह 500 और

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार खेलों में करियर बनाने वाले युवाओं को भी सहयोग दे रही है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रदेश के खिलाड़ी को छह करोड़ रुपये के साथ सरकारी नौकरी दी जाती है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और अगले सप्ताह 500 से अधिक खिलाड़ियों को फिर नौकरी दी जाएगी। उन्होंने हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक जीतने के बाद दोनों को सीधे पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया।

- अंकों के दबाव में बच्चों का खेलना न हो बंद

मुख्यमंत्री योगी ने अभिभावकों से बच्चों पर अंकों का अनावश्यक दबाव नहीं बनाने को कहा। बोले कि अंकों के पीछे उतना ही भागें, जितना मानसिक संतुष्टि दे सके। दबाव ऐसा नहीं होना चाहिए कि बच्चे का खेलना, सोना और खाना-पीना प्रभावित हो जाए। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों में समाचार पत्र मंगवाने पर जोर दिया। कहा कि हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्र पढ़ने से भाषा और व्याकरण सुधारने के साथ नई चीजों को जानने का अवसर मिलता है।

- असफलता से सीखें, प्रयास नहीं छोड़ें

मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वह वायुसेना के फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन सफल नहीं हुए। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे चलकर मिसाइल मैन तथा देश के राष्ट्रपति बने। कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती का उल्लेख करते हुए बच्चों से लगातार प्रयास करने को कहा।मुख्यमंत्री ने बच्चों से अपने शहर की विरासत को जानने को भी कहा। गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और रामगढ़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चे वहां की व्यवस्था और इतिहास को समझें।

- सम्मान पाने में बेटियां आगे

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सम्मान पाने वाले बच्चों में बेटियों की संख्या अधिक है। बेटियों को अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा के बल पर सब कुछ कर सकती हैं। उन्होंने सांसद रवि किशन से बच्चों को शूटिंग स्थल पर ले जाकर फिल्म निर्माण की प्रक्रिया दिखाने को भी कहा। सांसद रवि किशन ने कहा कि सम्मान के लिए ऐसे बच्चों को चुना गया है, जिन्होंने कुछ अलग किया है। गोरखपुर में बच्चों को आगे बढ़ने के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध है।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा समेत शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

जब सत्ता में थे तब क्यों नहीं याद आई OPS?', ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर साधा निशाना

- पुरानी पेंशन के मुद्दे पर राजभर का पलटवार, बोले- अब जनता को गुमराह कर वोट लेने की कोशिश

- PDA पर ओम प्रकाश राजभर का तंज, बोले- निषाद और राजभर को मंच पर भी नहीं मिला सम्मान

- 'ये झूठ बोलने वालों का गैंग है', ओम प्रकाश राजभर का विपक्ष पर तीखा हमला

- पुरानी पेंशन से लेकर PDA तक, ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप

- ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला- जनता को गुमराह कर सत्ता हासिल करना चाहती है विपक्षी पार्टी

- पुरानी पेंशन को लेकर ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला, बोले- 5 साल सत्ता में रहे, तब क्यों नहीं की बहाली

लखनऊ। पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब पुरानी पेंशन बहाली की बात कर रहे हैं, वे 5 साल तक सत्ता में रहे, तब उन्होंने इसे बहाल करने के लिए क्या किया। राजभर ने कहा कि जब जनता ने उन्हें सरकार चलाने का अवसर दिया था, तब उन्हें पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में कदम उठाना चाहिए था लेकिन तब वो लुटने खसोटने में लगे थे।

'सत्ता में रहते OPS की याद नहीं आई, अब जनता को गुमराह कर रहे'

राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष अब पुरानी पेंशन के मुद्दे को लेकर लोगों को गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए सामाजिक और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग नीतियां अपनाई गईं, लेकिन उस समय पुरानी पेंशन बहाली की याद नहीं आई। मंत्री राजभर ने कहा कि विपक्ष के नेता झूठ बोलने और समाज को गुमराह कर वोट लेने में माहिर थे लेकिन जनता ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया।

PDA को लेकर राजभर का तंज, निषाद-राजभर समाज के सम्मान पर उठाए सवाल

सपा के PDA अभियान का जिक्र करते हुए राजभर ने शिवपाल यादव के एक कथित बयान और देवरिया की एक घटना का भी उल्लेख किया। राजभर ने आरोप लगाया कि देवरिया में आयोजित कार्यक्रम में निषाद और राजभर समाज से जुड़े सांसदों को मंच पर उचित स्थान नहीं दिया गया और उन्हें भीड़ के बीच नीचे बिठाया गया। राजभर ने सीधे कहा कि PDA की राजनीति दिशाहीन है।

सामाजिक समीकरणों की राजनीति पर भी साधा निशाना

ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सामाजिक वर्गों के नाम पर राजनीति कर वोट हासिल करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनके पास विकास और जनहित से जुड़े ठोस मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति का केंद्र आम जनता के बजाय अपने परिवार तक सीमित है।

सड़क हादसे में घायल सीओ नरेंद्र सिंह बरौला का निधन, पुलिस महकमे में शोक

- बाराबंकी में तैनात थे क्षेत्राधिकारी, नोएडा जाते समय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुआ था हादसा

बाराबंकी/सैफई। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल बाराबंकी में तैनात क्षेत्राधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक) नरेंद्र सिंह बरौला का उपचार के दौरान निधन हो गया। हादसा उस समय हुआ था, जब वह नोएडा जा रहे थे। दुर्घटना के बाद उन्हें सैफई स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

नरेंद्र सिंह बरौला के निधन की खबर से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

पुलिस महानिदेशक ने शोक संदेश में कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई सड़क दुर्घटना में घायल जनपद बाराबंकी में नियुक्त क्षेत्राधिकारी नरेंद्र सिंह के उपचार के दौरान निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका असमय जाना उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

दुर्घटना में घायल आरक्षी योगेंद्र सिंह का भी उपचार चल रहा है। पुलिस मुख्यालय स्तर से उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पुलिस महानिदेशक ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

नियुक्ति पत्र मिला तो छलकी खुशी, अपनी कहानी बताते हुए रुंधा युवाओं का गला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला पत्र

किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद तो किसी को बच्चे के भविष्य की चिंता से मिली राहत

ससुराल की पहली महिला बनीं सरकारी कर्मचारी, श्रुति बोलीं- गर्भावस्था में भविष्य को लेकर थी चिंता, अब मिला भरोसा

किसान परिवार के आदित्य को मिला प्रदेश की सेवा का मौका, ब्यूटी शाही बोलीं- नौकरी से परिवार की परिस्थितियां भी बदलेंगी

मिशन रोजगार के तहत 10 दिन में चार बड़े कार्यक्रम, 6,672 युवाओं को मिले सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र

लखनऊ। सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ में आया तो किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी, किसी को अपने बच्चे के भविष्य की चिंता से राहत मिली। वर्षों की मेहनत के बाद नौकरी मिलने की खुशी साझा करते हुए कुछ अभ्यर्थी भावुक हुए तो बोलते-बोलते गला भी रुंध गया। मौका था सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने 11 नवचयनित अभ्यर्थियों को मंच पर प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी संघर्ष यात्रा और परिवार की परिस्थितियां साझा कीं। उन्होंने चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया।

ससुराल की पहली महिला जिसे मिली सरकारी नौकरी

लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपने ससुराल की पहली महिला हैं, जो सरकारी सेवा में जा रही हैं। गर्भावस्था के दौरान उन्हें भविष्य को लेकर चिंता रहती थी। नियुक्ति मिलने से उन्हें नई उम्मीद और आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

कुशीनगर के आदित्य सिंह किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में चयन से उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही।

गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। सरकारी नौकरी मिलने से वह जनसेवा के साथ परिवार की परिस्थितियों को भी बेहतर कर सकेंगी। अपनी बात रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

इन 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाने वालों में प्रयागराज के आशुतोष त्रिपाठी, आगरा के ओम बघेल, गाजीपुर के प्रवीण कुमार, प्रतापगढ़ की सुधा, कुशीनगर के आदित्य सिंह, हमीरपुर की नेहा देवी, फतेहपुर की रूपाली गुप्ता, लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव, गोरखपुर की ब्यूटी शाही, गाजीपुर के शुभम कुमार और प्रतापगढ़ के अमित कुमार सिंह शामिल रहे।

10 दिन में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र

मिशन रोजगार के तहत पिछले 10 दिनों में यह चौथा बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। 19 सितंबर को लोकभवन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, आयुष, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।

20 सितंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।

शिक्षा विभाग में 3,567 को मिली नियुक्ति

22 सितंबर को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इनमें 1,090 महिलाएं और 2,477 पुरुष शामिल थे। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के पदों पर इनका चयन हुआ।

सोमवार को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ 19 से 28 सितंबर के बीच हुए चार बड़े कार्यक्रमों में कुल 6,672 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: मुख्यमंत्री योगी

- मिशन रोजगार के तहत 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी ने विकसित गांव का दिया मंत्र

- बोले- नौजवानों के हक पर डकैती डालने वाले नए रूप में आ रहे सामने, भ्रम फैलाकर यूपी को फिर अराजकता में धकेलने की करेंगे कोशिश

- मुख्यमंत्री योगी का हमला- सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था, बाकी गांवों और जिलों की नहीं थी चिंता

- बोले- 2017 से पहले हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार, आज यूपी दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त

- छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरी का लक्ष्य, बोले- सपा-कांग्रेस के नेता गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र बांटते रहेंगे

- राजभर बोले- सपा सरकार में नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट, शाही ने कहा- अब बिना घूसखोरी मिल रही सरकारी नौकरी

- ग्राम पंचायत जितनी बढ़ाएगी अपनी आय, सरकार उतनी ही देगी अतिरिक्त धनराशि, आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सरकारी नौकरियों और गांवों के विकास को लेकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नौजवानों के हक पर डकैती डाली, दलितों को योजनाओं से वंचित रखा और पिछड़ों का हक मारा, वही आज नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। मुख्यमंत्री योगी ने सपा-कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। वे गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र वितरित करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री योगी मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि आयोग ने निष्पक्ष और शुचितापूर्ण चयन प्रक्रिया समय सीमा में पूरी की है।

- योग्यता थी, फिर भी नौकरी रहती थी दूर

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी नौकरी का विज्ञापन निकलते ही आशंकाएं खड़ी हो जाती थीं। गरीब और बिना पहुंच वाले परिवार का बच्चा योग्य होने के बावजूद नौकरी से दूर रहता था। इस जकड़न और बेईमानी को समाप्त करने के लिए सरकार ने व्यवस्था बदली। आज साढ़े नौ लाख नौजवान सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश की गिनती देश के पांच पिछड़े राज्यों में होती थी, जबकि आज प्रदेश शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट का दायरा तीन गुना हुआ है।

- सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। प्रदेश के बाकी गांवों और जिलों से उसे कोई मतलब नहीं था। केंद्र सरकार गरीबों को आवास और शौचालय देना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन सरकार योजनाओं को लागू नहीं होने देती थी। गरीबों के आवास की बात आती थी तो सपा अपने कैडर को लाभ देना चाहती थी।

- हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। असलहे लहराते हुए गाड़ियों के काफिले निकलते थे और पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव शुरू हो जाता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने माफिया तंत्र और अराजकता पर प्रभावी कार्रवाई की। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त होकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

- अक्टूबर से फिर बंटेंगे नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा अध्यक्ष नियुक्ति पत्र नहीं बांटे जाने की बात कर रहे थे। सितंबर में यह चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। अक्टूबर के पहले सप्ताह से फिर नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य है। उन्होंने सरदार भगत सिंह की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश के लिए बलिदान दिया। नियुक्ति पत्र पाने वाले बहुत से युवाओं की उम्र भी 20 से 27 वर्ष के बीच है। उन्हें अपनी ऊर्जा और प्रतिभा प्रदेश की समृद्धि में लगानी है।

- पंचायत भवन नहीं, अब ग्राम सचिवालय

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब गांवों में ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं। इनमें ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्यालय के साथ लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरी और कॉन्फ्रेंस रूम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्म, आय और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक और तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। बीसी सखी, पंचायत सहायक, अन्नपूर्णा भवन और उत्सव भवन से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

- अपनी आय बढ़ाने वाली पंचायत को अतिरिक्त धन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ग्राम पंचायतें अपनी भूमि, दुकानों और तालाबों के बेहतर उपयोग से आय बढ़ा सकती हैं। धार्मिक महत्व न रखने वाले तालाबों में मत्स्य पालन कराया जा सकता है। ग्राम पंचायत जितनी अपनी आय अर्जित करेगी, सरकार उतनी ही अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से मॉडल और स्मार्ट ग्राम पंचायत की सोच के साथ काम करने को कहा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना आत्मनिर्भर व विकसित ग्राम पंचायत से पूरा होगा। नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारी इसमें महत्वपूर्ण सारथी हैं।

- नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट: राजभर

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में नौकरी का विज्ञापन निकलते ही गुर्गे सक्रिय हो जाते थे और पद के हिसाब से रकम तय होती थी। आज बिना पैसे सरकारी नौकरी मिल रही है।

- अब बिना घूसखोरी मिल रही नौकरी: शाही

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों से साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना घूसखोरी और भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरी मिली है।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में महापौर सुषमा खड़कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र कुमार और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन सामन उपस्थित रहे।

अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: गिरीश यादव

खेल मंत्री का पलटवार- चार बार सत्ता में रही सपा, अखिलेश बताएं कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया?

पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार योगी सरकार ने दी, पुरस्कार राशि 2.5 गुना तक बढ़ाई

इकाना पीपीपी मॉडल पर बना, हम सिगरा-वाराणसी-गोरखपुर तक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहे हैं

हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर ग्रामीण मिनी स्टेडियम; संभल में पहली बार जिला स्टेडियम

एकलव्य क्रीड़ा कोष से 400 से अधिक खिलाड़ियों को कोचिंग और पौष्टिक आहार, नई खेल नीति-2023 लागू

सात पदक विजेताओं को बिना पीएससी परीक्षा सीधे डीएसपी बनाया; अखिलेश अपनी सरकार का लेखा-जोखा दें

लखनऊ, 27 सितंबर। उत्तर प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में खेल बेहतर व्यवस्था में थे और मौजूदा सरकार में खेल पिछड़ गए हैं और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। इस पर गिरीश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव का आरोप बिल्कुल निराधार है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए कि पिछली सरकार में ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए जो पुरस्कार राशि दी जाती थी, मौजूदा सरकार ने उसे दो गुना से ढाई गुना बढ़ा दिया। सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया जाता है और उन्हें भी पुरस्कार राशि दी जाती है।

- पदक पर सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार

मंत्री ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गारंटी दी है कि एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप जैसे चार वर्ष के अंतराल वाले आयोजनों के साथ ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब तक लगभग 16-17 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है और 5-6 और लोगों को नौकरी दी जा रही है।

उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनके शासन में पदक जीतकर आए खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई हो तो उसकी सूची जारी करें। खेल कोटे के तहत उनकी पांच वर्ष की सरकार में कितनी नौकरियां दी गईं, यह भी बताएं।

- खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां, सात को सीधे डीएसपी

गिरीश यादव ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने खेल कोटे के अंतर्गत एक हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। खेल कोटे से सात खिलाड़ियों को लोक सेवा आयोग की परीक्षा से बाहर निकालकर सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी बनाया गया। इनमें ललित उपाध्याय, अर्जुन देशवाल, अखिल श्योराण, दीप्ति शर्मा और पारुल चौधरी शामिल हैं। इन्हें पदक जीतकर आने के कारण सीधा डीएसपी बनाया गया।

इसी क्रम में जिला युवा कल्याण अधिकारी, माल कर अधिकारी, यात्रीकर अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्री ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनकी पांच वर्ष की सरकार में किसी ऐसे खिलाड़ी को डीएसपी बनाया गया या नहीं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव इकाना स्टेडियम की बात करते हैं, जो पीपीपी मॉडल पर बना। मौजूदा सरकार ने वाराणसी के सिगरा में अत्याधुनिक स्टेडियम बनाकर समर्पित कर दिया है। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। गोरखपुर स्टेडियम का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर दिया है, लागत 400 करोड़ रुपये है। कानपुर स्टेडियम को सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

- हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर मिनी स्टेडियम

हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 18 कमिश्नरियों में से आगरा, बरेली, झांसी और अयोध्या में जमीन मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में चार कमिश्नरी स्तर के स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की योजना लाई गई है। मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह सोचें कि उन्होंने कितने बनाए, उन्होंने क्या किया।

विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल मिनी स्टेडियम के प्रस्ताव आ रहे हैं और सरकार वहां पैसा दे रही है। जिला स्तर की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। जहां एस्ट्रोटर्फ चाहिए वहां एस्ट्रोटर्फ, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक चाहिए तो ट्रैक, तरणताल चाहिए तो तरणताल और बास्केटबॉल कोर्ट चाहिए तो कोर्ट दिए जा रहे हैं। तहसील स्तर पर भी काम शुरू किया गया है।

- संभल में पहली बार जिला स्टेडियम, हापुड़-शामली-चंदौली में भी निर्माण

मंत्री ने कहा कि चार ऐसे स्थान अखिलेश यादव के घर के पास हैं। संभल में जिला स्तर का स्टेडियम नहीं था। सरकार 18 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वहां स्टेडियम बना रही है। हापुड़, शामली और चंदौली में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।

- खेल नीति-2023 और एकलव्य क्रीड़ा कोष

गिरीश यादव ने बताया कि पहली बार नई खेल नीति-2023 बनाई गई। एकलव्य क्रीड़ा कोष के माध्यम से कमजोर और असहाय खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग तथा पौष्टिक आहार के लिए धन दिया जा रहा है। 400 से अधिक खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से कोचिंग और पौष्टिक आहार के लिए सरकार ने धन उपलब्ध कराया है।

- पंचायत से संसद तक प्रतिभा तलाश

प्रतिभा खोज के लिए संसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता के साथ जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजन कर खिलाड़ियों को तलाशा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जब खिलाड़ियों की बात करते हैं तो खिलाड़ियों का चेहरा खिल उठता है। खिलाड़ी खुद कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, खेलने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, इसलिए खेल की दिशा में लोग आगे बढ़ रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी चार बार सत्ता में रही। वे लेखा-जोखा प्रस्तुत करें कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया। केवल एक इकाना स्टेडियम बना, वह भी पीपीपी मॉडल पर। मौजूदा सरकार ग्रामीण स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और तहसील तक स्टेडियम बना रही है और सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तथ्यहीन और निरर्थक बातें करते हैं तथा युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास ठोस सबूत नहीं होते। युवा और खिलाड़ी उनके बहकावे में नहीं आने वाले। साढ़े नौ वर्षों में खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। इसकी किसी भी प्रकार से तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश का युवा, खिलाड़ी और खेल जगत से जुड़े लोग जानते हैं कि सरकार कैसे काम कर रही है।