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एआई उत्तर दे सकता है, सवाल करना अच्छी किताब ही सिखाएगी: सीएम योगी

- मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बाल मेला सम्मान समारोह, मुख्यमंत्री योगी ने करीब 70 प्रतिभावान बच्चों को किया सम्मानित

- बोले- अंकों के पीछे उतना ही भागें जितना मानसिक संतुष्टि दे, स्कूल-कॉलेजों में बच्चों के लिए जरूर मंगवाएं समाचार पत्र

- साढ़े नौ वर्ष पहले बदनाम था यूपी, नाम सुनकर चौंकते थे लोग, युवाओं के सामने था पहचान का संकट: मुख्यमंत्री योगी

- 2017 से पहले हर दूसरे दिन होते थे दंगे, महीनों रहता था कर्फ्यू, आज यूपी कर्फ्यू, दंगा और उपद्रव से मुक्त

- यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक पारदर्शी भर्तियां, बोले- इन भर्तियों पर कोई सवाल नहीं उठा सकता

- 2017 से पहले केवल 120 स्टार्टअप, आज 24 हजार से अधिक, नौकरी देने वाला बन रहा यूपी का युवा

- सम्मान पाने में बेटियां रहीं आगे, बोले- अवसर मिले तो अपनी प्रतिभा के बल पर सब कुछ कर सकती हैं बेटियां

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सवालों के जवाब दे सकता है और काम आसान कर सकता है, लेकिन सवाल करना अच्छी किताब ही सिखाएगी। तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर न हों। अच्छी पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ें और नई चीजों को जानने की जिज्ञासा बनाए रखें।

मुख्यमंत्री योगी मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक मीडिया हाउस की ओर से आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विज्ञान मॉडल, चित्रकला, निबंध समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं के करीब 70 विजेता छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

- साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश बदनाम प्रदेश था। यूपी के नाम से लोग चौंकते थे और युवाओं के सामने पहचान का संकट था। अकेले यूपी पुलिस में दो लाख से अधिक पद खाली थे। सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया और प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में विभिन्न विभागों में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। अकेले यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक भर्तियां हुई हैं। इन भर्तियों की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

- पहले दंगे और कर्फ्यू, अब सुरक्षित प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू रहता था। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा और उपद्रव से मुक्त सुरक्षित प्रदेश है। सामर्थ्य पहले भी थी, लेकिन करने की इच्छाशक्ति नहीं थी। आज प्रयास हो रहा है तो परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। आज यह शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है।

- 120 से बढ़कर 24 हजार से अधिक स्टार्टअप

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे। आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। अब यूपी का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि स्टार्टअप के जरिए दूसरों को नौकरी देने वाला भी बन रहा है। गोरखपुर के टेराकोटा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से कारीगरों को बाजार मिला है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं और 90 देशों से 650 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं।

- 550 खिलाड़ियों को नौकरी, अगले सप्ताह 500 और

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार खेलों में करियर बनाने वाले युवाओं को भी सहयोग दे रही है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रदेश के खिलाड़ी को छह करोड़ रुपये के साथ सरकारी नौकरी दी जाती है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और अगले सप्ताह 500 से अधिक खिलाड़ियों को फिर नौकरी दी जाएगी। उन्होंने हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक जीतने के बाद दोनों को सीधे पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया।

- अंकों के दबाव में बच्चों का खेलना न हो बंद

मुख्यमंत्री योगी ने अभिभावकों से बच्चों पर अंकों का अनावश्यक दबाव नहीं बनाने को कहा। बोले कि अंकों के पीछे उतना ही भागें, जितना मानसिक संतुष्टि दे सके। दबाव ऐसा नहीं होना चाहिए कि बच्चे का खेलना, सोना और खाना-पीना प्रभावित हो जाए। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों में समाचार पत्र मंगवाने पर जोर दिया। कहा कि हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्र पढ़ने से भाषा और व्याकरण सुधारने के साथ नई चीजों को जानने का अवसर मिलता है।

- असफलता से सीखें, प्रयास नहीं छोड़ें

मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वह वायुसेना के फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन सफल नहीं हुए। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे चलकर मिसाइल मैन तथा देश के राष्ट्रपति बने। कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती का उल्लेख करते हुए बच्चों से लगातार प्रयास करने को कहा।मुख्यमंत्री ने बच्चों से अपने शहर की विरासत को जानने को भी कहा। गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और रामगढ़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चे वहां की व्यवस्था और इतिहास को समझें।

- सम्मान पाने में बेटियां आगे

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सम्मान पाने वाले बच्चों में बेटियों की संख्या अधिक है। बेटियों को अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा के बल पर सब कुछ कर सकती हैं। उन्होंने सांसद रवि किशन से बच्चों को शूटिंग स्थल पर ले जाकर फिल्म निर्माण की प्रक्रिया दिखाने को भी कहा। सांसद रवि किशन ने कहा कि सम्मान के लिए ऐसे बच्चों को चुना गया है, जिन्होंने कुछ अलग किया है। गोरखपुर में बच्चों को आगे बढ़ने के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध है।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा समेत शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

जब सत्ता में थे तब क्यों नहीं याद आई OPS?', ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर साधा निशाना

- पुरानी पेंशन के मुद्दे पर राजभर का पलटवार, बोले- अब जनता को गुमराह कर वोट लेने की कोशिश

- PDA पर ओम प्रकाश राजभर का तंज, बोले- निषाद और राजभर को मंच पर भी नहीं मिला सम्मान

- 'ये झूठ बोलने वालों का गैंग है', ओम प्रकाश राजभर का विपक्ष पर तीखा हमला

- पुरानी पेंशन से लेकर PDA तक, ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप

- ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला- जनता को गुमराह कर सत्ता हासिल करना चाहती है विपक्षी पार्टी

- पुरानी पेंशन को लेकर ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला, बोले- 5 साल सत्ता में रहे, तब क्यों नहीं की बहाली

लखनऊ। पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब पुरानी पेंशन बहाली की बात कर रहे हैं, वे 5 साल तक सत्ता में रहे, तब उन्होंने इसे बहाल करने के लिए क्या किया। राजभर ने कहा कि जब जनता ने उन्हें सरकार चलाने का अवसर दिया था, तब उन्हें पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में कदम उठाना चाहिए था लेकिन तब वो लुटने खसोटने में लगे थे।

'सत्ता में रहते OPS की याद नहीं आई, अब जनता को गुमराह कर रहे'

राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष अब पुरानी पेंशन के मुद्दे को लेकर लोगों को गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए सामाजिक और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग नीतियां अपनाई गईं, लेकिन उस समय पुरानी पेंशन बहाली की याद नहीं आई। मंत्री राजभर ने कहा कि विपक्ष के नेता झूठ बोलने और समाज को गुमराह कर वोट लेने में माहिर थे लेकिन जनता ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया।

PDA को लेकर राजभर का तंज, निषाद-राजभर समाज के सम्मान पर उठाए सवाल

सपा के PDA अभियान का जिक्र करते हुए राजभर ने शिवपाल यादव के एक कथित बयान और देवरिया की एक घटना का भी उल्लेख किया। राजभर ने आरोप लगाया कि देवरिया में आयोजित कार्यक्रम में निषाद और राजभर समाज से जुड़े सांसदों को मंच पर उचित स्थान नहीं दिया गया और उन्हें भीड़ के बीच नीचे बिठाया गया। राजभर ने सीधे कहा कि PDA की राजनीति दिशाहीन है।

सामाजिक समीकरणों की राजनीति पर भी साधा निशाना

ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सामाजिक वर्गों के नाम पर राजनीति कर वोट हासिल करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनके पास विकास और जनहित से जुड़े ठोस मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति का केंद्र आम जनता के बजाय अपने परिवार तक सीमित है।

सड़क हादसे में घायल सीओ नरेंद्र सिंह बरौला का निधन, पुलिस महकमे में शोक

- बाराबंकी में तैनात थे क्षेत्राधिकारी, नोएडा जाते समय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुआ था हादसा

बाराबंकी/सैफई। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल बाराबंकी में तैनात क्षेत्राधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक) नरेंद्र सिंह बरौला का उपचार के दौरान निधन हो गया। हादसा उस समय हुआ था, जब वह नोएडा जा रहे थे। दुर्घटना के बाद उन्हें सैफई स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

नरेंद्र सिंह बरौला के निधन की खबर से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

पुलिस महानिदेशक ने शोक संदेश में कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई सड़क दुर्घटना में घायल जनपद बाराबंकी में नियुक्त क्षेत्राधिकारी नरेंद्र सिंह के उपचार के दौरान निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका असमय जाना उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

दुर्घटना में घायल आरक्षी योगेंद्र सिंह का भी उपचार चल रहा है। पुलिस मुख्यालय स्तर से उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पुलिस महानिदेशक ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

नियुक्ति पत्र मिला तो छलकी खुशी, अपनी कहानी बताते हुए रुंधा युवाओं का गला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला पत्र

किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद तो किसी को बच्चे के भविष्य की चिंता से मिली राहत

ससुराल की पहली महिला बनीं सरकारी कर्मचारी, श्रुति बोलीं- गर्भावस्था में भविष्य को लेकर थी चिंता, अब मिला भरोसा

किसान परिवार के आदित्य को मिला प्रदेश की सेवा का मौका, ब्यूटी शाही बोलीं- नौकरी से परिवार की परिस्थितियां भी बदलेंगी

मिशन रोजगार के तहत 10 दिन में चार बड़े कार्यक्रम, 6,672 युवाओं को मिले सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र

लखनऊ। सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ में आया तो किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी, किसी को अपने बच्चे के भविष्य की चिंता से राहत मिली। वर्षों की मेहनत के बाद नौकरी मिलने की खुशी साझा करते हुए कुछ अभ्यर्थी भावुक हुए तो बोलते-बोलते गला भी रुंध गया। मौका था सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने 11 नवचयनित अभ्यर्थियों को मंच पर प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी संघर्ष यात्रा और परिवार की परिस्थितियां साझा कीं। उन्होंने चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया।

ससुराल की पहली महिला जिसे मिली सरकारी नौकरी

लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपने ससुराल की पहली महिला हैं, जो सरकारी सेवा में जा रही हैं। गर्भावस्था के दौरान उन्हें भविष्य को लेकर चिंता रहती थी। नियुक्ति मिलने से उन्हें नई उम्मीद और आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

कुशीनगर के आदित्य सिंह किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में चयन से उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही।

गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। सरकारी नौकरी मिलने से वह जनसेवा के साथ परिवार की परिस्थितियों को भी बेहतर कर सकेंगी। अपनी बात रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

इन 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाने वालों में प्रयागराज के आशुतोष त्रिपाठी, आगरा के ओम बघेल, गाजीपुर के प्रवीण कुमार, प्रतापगढ़ की सुधा, कुशीनगर के आदित्य सिंह, हमीरपुर की नेहा देवी, फतेहपुर की रूपाली गुप्ता, लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव, गोरखपुर की ब्यूटी शाही, गाजीपुर के शुभम कुमार और प्रतापगढ़ के अमित कुमार सिंह शामिल रहे।

10 दिन में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र

मिशन रोजगार के तहत पिछले 10 दिनों में यह चौथा बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। 19 सितंबर को लोकभवन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, आयुष, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।

20 सितंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।

शिक्षा विभाग में 3,567 को मिली नियुक्ति

22 सितंबर को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इनमें 1,090 महिलाएं और 2,477 पुरुष शामिल थे। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के पदों पर इनका चयन हुआ।

सोमवार को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ 19 से 28 सितंबर के बीच हुए चार बड़े कार्यक्रमों में कुल 6,672 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: मुख्यमंत्री योगी

- मिशन रोजगार के तहत 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी ने विकसित गांव का दिया मंत्र

- बोले- नौजवानों के हक पर डकैती डालने वाले नए रूप में आ रहे सामने, भ्रम फैलाकर यूपी को फिर अराजकता में धकेलने की करेंगे कोशिश

- मुख्यमंत्री योगी का हमला- सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था, बाकी गांवों और जिलों की नहीं थी चिंता

- बोले- 2017 से पहले हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार, आज यूपी दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त

- छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरी का लक्ष्य, बोले- सपा-कांग्रेस के नेता गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र बांटते रहेंगे

- राजभर बोले- सपा सरकार में नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट, शाही ने कहा- अब बिना घूसखोरी मिल रही सरकारी नौकरी

- ग्राम पंचायत जितनी बढ़ाएगी अपनी आय, सरकार उतनी ही देगी अतिरिक्त धनराशि, आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सरकारी नौकरियों और गांवों के विकास को लेकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नौजवानों के हक पर डकैती डाली, दलितों को योजनाओं से वंचित रखा और पिछड़ों का हक मारा, वही आज नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। मुख्यमंत्री योगी ने सपा-कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। वे गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र वितरित करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री योगी मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि आयोग ने निष्पक्ष और शुचितापूर्ण चयन प्रक्रिया समय सीमा में पूरी की है।

- योग्यता थी, फिर भी नौकरी रहती थी दूर

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी नौकरी का विज्ञापन निकलते ही आशंकाएं खड़ी हो जाती थीं। गरीब और बिना पहुंच वाले परिवार का बच्चा योग्य होने के बावजूद नौकरी से दूर रहता था। इस जकड़न और बेईमानी को समाप्त करने के लिए सरकार ने व्यवस्था बदली। आज साढ़े नौ लाख नौजवान सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश की गिनती देश के पांच पिछड़े राज्यों में होती थी, जबकि आज प्रदेश शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट का दायरा तीन गुना हुआ है।

- सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। प्रदेश के बाकी गांवों और जिलों से उसे कोई मतलब नहीं था। केंद्र सरकार गरीबों को आवास और शौचालय देना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन सरकार योजनाओं को लागू नहीं होने देती थी। गरीबों के आवास की बात आती थी तो सपा अपने कैडर को लाभ देना चाहती थी।

- हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। असलहे लहराते हुए गाड़ियों के काफिले निकलते थे और पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव शुरू हो जाता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने माफिया तंत्र और अराजकता पर प्रभावी कार्रवाई की। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त होकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

- अक्टूबर से फिर बंटेंगे नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा अध्यक्ष नियुक्ति पत्र नहीं बांटे जाने की बात कर रहे थे। सितंबर में यह चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। अक्टूबर के पहले सप्ताह से फिर नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य है। उन्होंने सरदार भगत सिंह की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश के लिए बलिदान दिया। नियुक्ति पत्र पाने वाले बहुत से युवाओं की उम्र भी 20 से 27 वर्ष के बीच है। उन्हें अपनी ऊर्जा और प्रतिभा प्रदेश की समृद्धि में लगानी है।

- पंचायत भवन नहीं, अब ग्राम सचिवालय

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब गांवों में ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं। इनमें ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्यालय के साथ लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरी और कॉन्फ्रेंस रूम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्म, आय और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक और तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। बीसी सखी, पंचायत सहायक, अन्नपूर्णा भवन और उत्सव भवन से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

- अपनी आय बढ़ाने वाली पंचायत को अतिरिक्त धन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ग्राम पंचायतें अपनी भूमि, दुकानों और तालाबों के बेहतर उपयोग से आय बढ़ा सकती हैं। धार्मिक महत्व न रखने वाले तालाबों में मत्स्य पालन कराया जा सकता है। ग्राम पंचायत जितनी अपनी आय अर्जित करेगी, सरकार उतनी ही अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से मॉडल और स्मार्ट ग्राम पंचायत की सोच के साथ काम करने को कहा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना आत्मनिर्भर व विकसित ग्राम पंचायत से पूरा होगा। नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारी इसमें महत्वपूर्ण सारथी हैं।

- नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट: राजभर

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में नौकरी का विज्ञापन निकलते ही गुर्गे सक्रिय हो जाते थे और पद के हिसाब से रकम तय होती थी। आज बिना पैसे सरकारी नौकरी मिल रही है।

- अब बिना घूसखोरी मिल रही नौकरी: शाही

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों से साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना घूसखोरी और भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरी मिली है।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में महापौर सुषमा खड़कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र कुमार और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन सामन उपस्थित रहे।

अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: गिरीश यादव

खेल मंत्री का पलटवार- चार बार सत्ता में रही सपा, अखिलेश बताएं कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया?

पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार योगी सरकार ने दी, पुरस्कार राशि 2.5 गुना तक बढ़ाई

इकाना पीपीपी मॉडल पर बना, हम सिगरा-वाराणसी-गोरखपुर तक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहे हैं

हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर ग्रामीण मिनी स्टेडियम; संभल में पहली बार जिला स्टेडियम

एकलव्य क्रीड़ा कोष से 400 से अधिक खिलाड़ियों को कोचिंग और पौष्टिक आहार, नई खेल नीति-2023 लागू

सात पदक विजेताओं को बिना पीएससी परीक्षा सीधे डीएसपी बनाया; अखिलेश अपनी सरकार का लेखा-जोखा दें

लखनऊ, 27 सितंबर। उत्तर प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में खेल बेहतर व्यवस्था में थे और मौजूदा सरकार में खेल पिछड़ गए हैं और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। इस पर गिरीश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव का आरोप बिल्कुल निराधार है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए कि पिछली सरकार में ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए जो पुरस्कार राशि दी जाती थी, मौजूदा सरकार ने उसे दो गुना से ढाई गुना बढ़ा दिया। सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया जाता है और उन्हें भी पुरस्कार राशि दी जाती है।

- पदक पर सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार

मंत्री ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गारंटी दी है कि एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप जैसे चार वर्ष के अंतराल वाले आयोजनों के साथ ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब तक लगभग 16-17 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है और 5-6 और लोगों को नौकरी दी जा रही है।

उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनके शासन में पदक जीतकर आए खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई हो तो उसकी सूची जारी करें। खेल कोटे के तहत उनकी पांच वर्ष की सरकार में कितनी नौकरियां दी गईं, यह भी बताएं।

- खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां, सात को सीधे डीएसपी

गिरीश यादव ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने खेल कोटे के अंतर्गत एक हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। खेल कोटे से सात खिलाड़ियों को लोक सेवा आयोग की परीक्षा से बाहर निकालकर सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी बनाया गया। इनमें ललित उपाध्याय, अर्जुन देशवाल, अखिल श्योराण, दीप्ति शर्मा और पारुल चौधरी शामिल हैं। इन्हें पदक जीतकर आने के कारण सीधा डीएसपी बनाया गया।

इसी क्रम में जिला युवा कल्याण अधिकारी, माल कर अधिकारी, यात्रीकर अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्री ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनकी पांच वर्ष की सरकार में किसी ऐसे खिलाड़ी को डीएसपी बनाया गया या नहीं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव इकाना स्टेडियम की बात करते हैं, जो पीपीपी मॉडल पर बना। मौजूदा सरकार ने वाराणसी के सिगरा में अत्याधुनिक स्टेडियम बनाकर समर्पित कर दिया है। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। गोरखपुर स्टेडियम का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर दिया है, लागत 400 करोड़ रुपये है। कानपुर स्टेडियम को सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

- हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर मिनी स्टेडियम

हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 18 कमिश्नरियों में से आगरा, बरेली, झांसी और अयोध्या में जमीन मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में चार कमिश्नरी स्तर के स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की योजना लाई गई है। मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह सोचें कि उन्होंने कितने बनाए, उन्होंने क्या किया।

विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल मिनी स्टेडियम के प्रस्ताव आ रहे हैं और सरकार वहां पैसा दे रही है। जिला स्तर की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। जहां एस्ट्रोटर्फ चाहिए वहां एस्ट्रोटर्फ, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक चाहिए तो ट्रैक, तरणताल चाहिए तो तरणताल और बास्केटबॉल कोर्ट चाहिए तो कोर्ट दिए जा रहे हैं। तहसील स्तर पर भी काम शुरू किया गया है।

- संभल में पहली बार जिला स्टेडियम, हापुड़-शामली-चंदौली में भी निर्माण

मंत्री ने कहा कि चार ऐसे स्थान अखिलेश यादव के घर के पास हैं। संभल में जिला स्तर का स्टेडियम नहीं था। सरकार 18 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वहां स्टेडियम बना रही है। हापुड़, शामली और चंदौली में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।

- खेल नीति-2023 और एकलव्य क्रीड़ा कोष

गिरीश यादव ने बताया कि पहली बार नई खेल नीति-2023 बनाई गई। एकलव्य क्रीड़ा कोष के माध्यम से कमजोर और असहाय खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग तथा पौष्टिक आहार के लिए धन दिया जा रहा है। 400 से अधिक खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से कोचिंग और पौष्टिक आहार के लिए सरकार ने धन उपलब्ध कराया है।

- पंचायत से संसद तक प्रतिभा तलाश

प्रतिभा खोज के लिए संसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता के साथ जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजन कर खिलाड़ियों को तलाशा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जब खिलाड़ियों की बात करते हैं तो खिलाड़ियों का चेहरा खिल उठता है। खिलाड़ी खुद कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, खेलने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, इसलिए खेल की दिशा में लोग आगे बढ़ रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी चार बार सत्ता में रही। वे लेखा-जोखा प्रस्तुत करें कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया। केवल एक इकाना स्टेडियम बना, वह भी पीपीपी मॉडल पर। मौजूदा सरकार ग्रामीण स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और तहसील तक स्टेडियम बना रही है और सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तथ्यहीन और निरर्थक बातें करते हैं तथा युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास ठोस सबूत नहीं होते। युवा और खिलाड़ी उनके बहकावे में नहीं आने वाले। साढ़े नौ वर्षों में खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। इसकी किसी भी प्रकार से तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश का युवा, खिलाड़ी और खेल जगत से जुड़े लोग जानते हैं कि सरकार कैसे काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बजट खर्च में तेजी लाने के दिए निर्देश, अगले दो माह में 60 प्रतिशत व्यय का लक्ष्य

₹9.99 लाख करोड़ के बजट में ₹5.15 लाख करोड़ की स्वीकृतियां जारी

वित्त मंत्री विभागीय मंत्रियों के साथ करें बजट की बिंदुवार समीक्षा, अड़चनों का तत्काल समाधान कराने के निर्देश

पात्र किसानों को केसीसी से जोड़ने के लिए गांवों की मैपिंग और ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ आयोजित करने पर जोर

केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लिए विभागीय मंत्री संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से करें समन्वय

एमएसएमई विभाग जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराए

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजट प्राविधानों के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और व्यय की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त हो रही है, ऐसे में जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षित नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी हों और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री रविवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की उपस्थिति में चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्राविधानों, वित्तीय स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कार्यों और वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं, उसका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करते हुए उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को निर्देश दिए कि विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट खर्च की नियमित और बिंदुवार समीक्षा करें। जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी कारणों से स्वीकृतियों अथवा व्यय में अड़चन आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग भी इसकी नियमित निगरानी करे और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराई जाए, ताकि पात्र किसानों को चिन्हित कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए। स्थानीय उत्पादों और शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग को प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहचान को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्रिगण संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं, ताकि केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति प्रभावित न हो। समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का कुल बजट ₹9,99,056.48 करोड़ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ₹1,58,474.15 करोड़ अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए ₹5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है। अब तक शासन स्तर से ₹5,15,918.44 करोड़, यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित ₹2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।

विभागवार समीक्षा में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग का बजट व्यय के मामले में प्रदर्शन बेहतर रहा। विभाग द्वारा बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग में ₹73,348.56 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक है। बेसिक शिक्षा विभाग में ₹82,245.68 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹65,982.04 करोड़, यानी 80.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹31,718.92 करोड़ का व्यय हुआ है। गृह विभाग के लिए ₹43,891.37 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़, यानी 92.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं और ₹14,712.68 करोड़ का व्यय हुआ है। लोक निर्माण विभाग में ₹45,270.69 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹27,375.91 करोड़, यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹14,178.60 करोड़ का व्यय हुआ है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़, यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं और ₹10,286.50 करोड़ का व्यय हुआ है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए, ताकि धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करें और जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराएं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

"सपा राज में सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे": ओम प्रकाश राजभर

"जब मुजफ्फरनगर दंगे में जल रहा था, तब सैफई में हीरोइनों का डांस देख रहे थे अखिलेश": राजभर का तीखा हमला

"गुंडागर्दी और नौकरियों की नीलामी": अखिलेश यादव के कार्यकाल पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश का प्रहार

कहा - वोटर लिस्ट की सफाई होते ही खुली अखिलेश मॉडल की पोल, बेबुनियाद आरोपों से सच नहीं छिपेगा"

लखनऊ, 27 सितंबर। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'सैफई मॉडल' के विकास के उदाहरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश की सरकार थी तब 24 घंटे बिजली केवल सैफई में मिलती थी। सैफई महोत्सव होता था और सैफई महोत्सव में मुंबई से हीरो-हीरोइन आकर डांस करते थे। आसपास के गांवों में दुष्टता का आतंक हो जाता था और लोग भय ग्रस्त होकर घरों में कैद रहते थे।

अखिलेश राज में सिर्फ सैफई का हुआ विकास

राजभर ने कहा कि अखिलेश ने केवल सैफई का ही विकास किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसे ले जा कर वहां लगा दिया। सैफई में मेडिकल कॉलेज बनवाने से लेकर वहां की सड़कें तक चौड़ी करवा दी। दूसरी जगहों की उपेक्षा हुई।

SIR पर अखिलेश के आरोप गलत

राजभर ने कहा कि अखिलेश SIR पर जो आरोप लगा रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। मैं जिस विधान सभा से विधायक हूं वहां 16 हजार वोटर मृतक थे, उनको निकाला गया। इसके अलावा 23 हजार स्थानांतरित मतदाता थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने एक जगह करने के लिए स्वीकृत किया। SIR कोई नया नहीं है. यह 1952 से लेकर 2003 के बीच में कई बार हुआ है।

अखिलेश की सरकार में गुंडागर्दी चरम पर थी

राजभर ने कहा कि अखिलेश के राज में गुंडागर्दी, लूट, हत्या, बलात्कार और छिनैती चरम पर थे। मुजफ्फरनगर जब दंगों में जल रहा था तो यह मुख्यमंत्री होते हुए डांस देख रहे थे। सरकारी नौकरियां पैसे पर देते थे। राजभर ने कहा अखिलेश को कोई वोट नहीं देगा। अखिलेश वोट पाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। उन्हें तो अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

15 अक्टूबर से मिठाई की ‘यूज बाई डेट’ दिखाना होगा अनिवार्य

- खुली मिठाई की गुणवत्ता और ताजगी को लेकर यूपी में खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा उपभोक्ता हितैषी कदम

- मिठाई विक्रेताओं को बिक्री स्थल पर प्रदर्शित करनी होगी उपयोग की अंतिम तिथि

- खुली मिठाई पर भी अब उपभोक्ता को मिलेगी अंतिम उपयोग तिथि की जानकारी

- मिठाई कारोबार में बढ़ेगी पारदर्शिता, ग्राहक को मिलेगी जरूरी जानकारी

लखनऊः 27 सितम्बर। उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब राज्य में 15 अक्टूबर 2026 से विक्रय के लिए प्रदर्शित एवं भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाई डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है, जिनके संबंध में अब तक उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं था।

विभाग के अनुसार, विगत कुछ समय में मिठाई निर्माण एवं विक्रय प्रतिष्ठानों में की गई प्रवर्तन और निरीक्षण कार्यवाहियों के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया कि अनेक स्थानों पर उपभोक्ताओं को मिठाई के निर्माण की तारीख और उसके अवसान की तारीख के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। ऐसे में उपभोक्ता मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग की अवधि के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाता।

- 01 से 30 दिन तक हो सकती है मिठाई की उपयोग अवधि

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मिठाई की उपयोग अवधि उसकी प्रकृति और प्रकार के आधार पर अलग-अलग होती है। अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। समय बीतने के साथ मिठाई की गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी प्रभावित होती है। ऐसे में उपभोक्ता को मिठाई खरीदते समय उसकी उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी होना स्वास्थ्य हित में आवश्यक है।

विभाग का मानना है कि मिठाई की यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक किया जाना उचित है। इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा।

- पैक्ड मिठाई पर पहले से अनिवार्य, अब खुली मिठाई पर भी व्यवस्था

वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर अवसान तिथि अथवा ‘यूज बाई डेट’ अंकित किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, खुली मिठाइयों के संबंध में इस प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रावधान नहीं था। विभाग द्वारा जारी निर्देश इसी अंतर को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।अब मिठाई के निर्माण एवं विक्रय प्रतिष्ठानों को बिक्री के लिए प्रदर्शित और भंडारित मिठाइयों के संबंध में यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इससे ग्राहक को मिठाई खरीदने से पहले उसकी उपयोग अवधि की जानकारी मिल सकेगी।

- उपभोक्ता हित और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और मानव जीवन एवं स्वास्थ्य के उचित स्तर के संरक्षण का प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा 18(1)(ए) में खाद्य सुरक्षा मानकों एवं खाद्य व्यापार में निष्पक्ष व्यवहार के संदर्भ में मानव जीवन एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा उपभोक्ता हितों के संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जाने की व्यवस्था है। इसी प्रकार अधिनियम की धारा 30(2)(डी) के तहत खाद्य सुरक्षा मानकों और अन्य निर्धारित प्रावधानों के प्रभावी एवं समान क्रियान्वयन के साथ पारदर्शिता, विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।इन विधिक व्यवस्थाओं के आधार पर उत्तर प्रदेश में मिठाई की उपयोग अवधि को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

- मिठाई खरीदते समय उपभोक्ता को मिलेगी स्पष्ट जानकारी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को मिठाई खरीदते समय उसके उपयोग की अंतिम तिथि के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी। इससे ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार मिठाई की खरीद कर सकेगा और अधिक अवधि तक रखी गई मिठाई के सेवन से जुड़े संभावित जोखिमों को कम किया जा सकेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की यह व्यवस्था मिठाई कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ता को उसके द्वारा खरीदे जा रहे खाद्य पदार्थ के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में है।

बॉक्स

- दूध प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक

उत्तर प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डाई एथिलीन ग्लाइकोल के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उपभोक्ता हित एवं व्यापक जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। विभाग की प्रवर्तन एवं निरीक्षण कार्यवाहियों के दौरान सामने आया कि कुछ दुग्ध प्रसंस्करण प्रतिष्ठानों में पाश्च्युरीकरण, प्रशीतन आदि प्रक्रियाओं में एथिलीन ग्लाइकोल अथवा डाई एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, ये रसायन खाद्य पदार्थ में मिल जाने की स्थिति में स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। प्रसंस्करण उपकरणों में लीकेज होने पर इनके दूध में मिल जाने की आशंका को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। विभाग ने कहा है कि इनके स्थान पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पहले से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सौंपेंगे नियुक्ति पत्र

लखनऊ में 28 सितंबर को गूंजेगा ग्रामीण विकास का संकल्प

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास, सुशासन और पंचायत व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार कल एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पंचायती राज विभाग द्वारा नवचयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार, 28 सितंबर को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी होंगे, जो अपने कर-कमलों से इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी की भी विशिष्ट उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम का आयोजन सोमवार सुबह 10:30 बजे से लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल (विभूति खंड) में किया जाएगा। विभागीय कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार, इसमें कुल 1,375 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारी शामिल होंगे। मा. मुख्यमंत्री जी द्वारा मंच पर 11 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों को सांकेतिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान मा. पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी समारोह को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा अपनी चयन प्रक्रिया व नियुक्ति से संबंधित अनुभव साझा किए जाएंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों की इस नियुक्ति से ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण नागरिकों को पंचायत स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। ग्राम पंचायत अधिकारी पंचायत प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिनकी भूमिका ग्रामीण विकास एवं पंचायत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने में अहम है।

समारोह के दौरान नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए आयोजित होने वाले एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम (Orientation & Training Program) के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। पंचायती राज विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं जनसुविधा केंद्रित बनाते हुए प्रदेश में ग्रामीण विकास की प्रक्रिया को गति प्रदान करना है।