सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर के खिलाफ साथ आए दो 'दुश्मन', इंडिया ब्लॉक और विपक्ष एकजुट
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर इन दिनों देश की सियासत गरमाई हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। इस एक मुद्दे ने पूरे विपक्ष को एक बार फिर से एकजुट कर दिया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से लेकर अपने ‘कट्टर दुश्मन’ सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी से फोन पर बातचीत की है।
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इंडिया ब्लॉक की बैठक बुलाने की अपील
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर विपक्ष अब उनके खिलाफ एकजुट नजर आ रहा है। उन्हें हटाने की मांग कर रहे विपक्षी इंडिया गठबंधन के बड़े नेता संपर्क में हैं। अगले सप्ताह गठबंधन की बैठक और साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस की योजना बनाई जा रही है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का नोटिस तैयार किया जा रहा है। इस बारे में ममता ने राहुल गांधी से बात की है। ममता बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से आग्रह किया कि वो इंडिया ब्लॉक की बैठक तुरंत बुलाएं। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार को बैठक बुलाई जाए ताकि सीईसली के खिलाफ एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके।
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दशकों पुराने मतभेद को भूले दोनों नेता
इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में दशकों से एक-दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और सीपीआई (एम) ने एसआआर को लेकर चल रहे विवाद को लेकर बात की। दशकों पुराने मतभेदों को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी से बात की। इस दौरान दोनों नेता चुनाव आयोग (ईसी) की घटती विश्वसनीयता के मुद्दे पर चर्चा की। ये दोनों पार्टियां विपक्षी इंडिया गठबंधन की संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब तक इन्होंने किसी भी तरह का औपचारिक संवाद या संपर्क नहीं किया था। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी और एमए बेबी ने बात की और चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए विपक्षी दलों के एकजुट होकर अभियान चलाने की आवश्यकता पर चर्चा की।
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चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट है। उसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों की ओर से 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की गईं। यह बात सामने आते ही विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके भीतर फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए।







Sep 26 2026, 17:52
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