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सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास को मिलेगी रफ्तार, अनुपूरक बजट में 5 करोड़ रुपये का प्रावधान

-  उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बोले- संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध


लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास और निर्माणाधीन परियोजनाओं को गति देने के लिए अनुपूरक बजट में 5 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और लंबित निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में किया जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार संस्कृत शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और उच्च शिक्षण संस्थानों के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास के लिए अनुपूरक बजट में 500 लाख रुपये (5 करोड़ रुपये) की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा और प्राचीन विद्या का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। सरकार विश्वविद्यालय में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण और निर्माणाधीन परियोजनाओं को शीघ्र पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्य पूरे होने से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए इस दिशा में निरंतर निवेश कर रही है।
'कोई परिषदीय विद्यालय बंद नहीं हुआ', विपक्ष के आरोपों पर बोले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह

-  विद्यालयों की पेयरिंग को बताया संसाधनों के बेहतर उपयोग की पहल, कहा- 19 मानकों पर सुविधाएं 36% से बढ़कर 96% हुईं


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने विधान परिषद में स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की पेयरिंग (एकीकरण) को लेकर विपक्ष भ्रम फैला रहा है, जबकि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019 में एक ही परिसर में संचालित 25,578 विद्यालयों के प्रशासनिक एकीकरण का निर्णय लिया गया था। कई स्थानों पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय या दो-दो प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित हो रहे थे। ऐसे विद्यालयों को कक्षा 1 से 8 तक कंपोजिट विद्यालय के रूप में संचालित करने का फैसला संसाधनों के बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में 50 से कम छात्र हैं और जो एक किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं, उनके संबंध में पेयरिंग का निर्णय लिया गया है। इन विद्यालयों का यू-डायस कोड समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि वहां बाल वाटिकाएं संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में वर्तमान में 71,877 बाल वाटिकाएं संचालित हैं और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए 19,484 ईसीसीई एजुकेटर्स की नियुक्ति भी की गई है।
संदीप सिंह ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों की आधारभूत संरचना में व्यापक सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में विद्यालयों में निर्धारित 19 मानकों पर सुविधाओं की उपलब्धता लगभग 36 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है, जबकि मानव संपदा पोर्टल से शिक्षकों से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता आई है।
उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से परिषदीय विद्यालयों में अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 73.94 लाख बालिकाओं सहित कुल 1.43 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं और यूनिफॉर्म व अन्य आवश्यक सामग्री के लिए डीबीटी के माध्यम से प्रति छात्र 1,200 रुपये सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये तथा अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया है। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे 12.28 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए 11,508 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा जा चुका है। साथ ही श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं तथा प्रत्येक जिले में दो-दो सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं।
संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विद्यालय बंद करना नहीं, बल्कि संसाधनों को सुदृढ़ बनाकर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।
विपक्ष के हंगामे के बीच ए. के. शर्मा ने पूरी की विधायी प्रक्रिया, सनातन और श्रीराम के मुद्दे पर किया पलटवार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में मंगलवार को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा विपक्ष के हंगामे के बीच भी अपनी विधायी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए मुखर नजर आए। सदन में लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के बावजूद उन्होंने संयम बनाए रखते हुए विधायी प्रक्रिया पूरी की और बाद में विपक्ष के आरोपों का जवाब भी दिया।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ए. के. शर्मा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "जो लोग रामभक्तों पर गोली चलवाने का इतिहास रखते हैं और जिन्होंने वर्षों तक श्रीराम मंदिर को टूटी हुई अवस्था में रहने दिया, उन्हें श्रीराम और सनातन पर आस्था रखने वाली सरकार पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और जनभावनाओं के सम्मान के साथ कार्य कर रही है। सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है तथा विपक्ष के निराधार आरोपों से विचलित होने वाली नहीं है।
मंत्री ने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है और सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विपक्ष के व्यवधान और हंगामे के बावजूद सरकार जनहित से जुड़े विधायी कार्यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के लगातार विरोध के बीच भी ए. के. शर्मा ने शांत और संयमित तरीके से अपनी विधायी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के विकास, बेहतर शहरी सुविधाओं, ऊर्जा क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और जनता के हितों से जुड़े कार्यों को गति देना है।
जीएनएसएस रोवर तकनीक से भूमि सीमांकन का सफल प्रदर्शन, राजस्व मंत्री बोले- विवाद होंगे कम, बढ़ेगी पारदर्शिता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भूमि सीमांकन को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील के ग्राम करोरवा में राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर की उपस्थिति में आधुनिक जीएनएसएस (GNSS) रोवर तकनीक से भूमि सीमांकन का सफल प्रदर्शन किया गया।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-24 के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में तहसील की राजस्व टीम ने आधुनिक जीएनएसएस रोवर मशीन और पारंपरिक जरीब पद्धति, दोनों के माध्यम से भूमि का सीमांकन किया। दोनों विधियों से प्राप्त परिणामों का अधिकारियों ने मौके पर मिलान और सत्यापन किया, जिसमें सीमाएं पूरी तरह समान और सटीक पाई गईं।
राजस्व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह दिलेर ने स्वयं रोवर तकनीक की कार्यप्रणाली, उसकी तकनीकी सटीकता और सीमांकन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इस तकनीक को राजस्व प्रशासन के लिए एक प्रभावशाली और क्रांतिकारी पहल बताते हुए कहा कि इससे भूमि सीमांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से भूमि विवादों में कमी आएगी और राजस्व प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राजस्व व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, उत्तरदायी और जनहितकारी बनाने के लिए लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। इससे वर्षों पुरानी प्रक्रियाएं सरल होंगी और नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं तेज, निष्पक्ष और बिना अनावश्यक परेशानी के मिल सकेंगी।
मंत्री ने इस पहल के लिए राजस्व परिषद, जिला प्रशासन और तहसील की राजस्व टीम की सराहना करते हुए कहा कि रोवर तकनीक के प्रभावी उपयोग से धारा-24 के सीमांकन मामलों के गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निस्तारण में मदद मिलेगी। इससे भूमि सीमाओं को लेकर होने वाले विवाद कम होंगे, प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
कार्यक्रम में राजस्व परिषद के अधिकारी राजेश रंजन (आईएएस), उप जिलाधिकारी मोहनलालगंज आकाश सिंह, तहसीलदार ऋतुराज शुक्ला, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल सहित राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने भी आधुनिक तकनीक से किए गए भूमि सीमांकन की सराहना की।
उप्र मानसून सत्र : प्रदेश सरकार ने पेश किया 59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट, केंद्र से मिलेगी 11 हजार करोड़ की सहायता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शून्यकाल में विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे बीच वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए अनुपूरक बजट में पेश किया। उन्होंने कुल 59,019.54 करोड़ रुपये की अनुपूरक बजट मांग (अतिरिक्त बजट) पेश किया। इस बजट में केंद्र सरकार से 11,240.97 करोड़ की मदद अंशदान (हिस्सेदारी) के रूप में मिलेगी।

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना बार -बार विपक्षी सदस्यों को अपनी सीट पर बैठने और चर्चा में भाग लेने का आग्रह करते रहे, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। इस बीच जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलने के लिए खडे़ हुए तो विपक्षी सदस्यों ने हंगामा और तेज कर दिया। विपक्षी सदस्य नारे लगा रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष न तो सदन की मर्यादा का ख्याल रखता है और संवैधानिक मूल्यों का ही पालन कर रहा है।

आज सदन में विपक्षी सदस्याें के हंगामे के बीच वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए राज्य सरकार ने कुल 59,019.54 करोड़ रुपये की अनुपूरक बजट मांग (अतिरिक्त बजट) पेश किया। इस बजट में केंद्र सरकार से 11,240.97 करोड़ की मदद अंशदान (हिस्सेदारी) के रूप में मिलेगी। केंद्र से मिलने वाली राशि को घटाने के बाद राज्य सरकार के खजाने (समेकित निधि) पर 47,778.57 करोड़ रुपये का शुद्ध वित्तीय बोझ पड़ेगा। इस खर्च का इंतज़ाम सरकार टैक्स (कर) और गैर-टैक्स (करेतर) से होने वाली अपनी राजस्व आय के तय लक्ष्यों को पूरा करके तथा फालतू (अनुत्पादक) खर्चों में कटौती करके करेगी।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पेश किया पअनुपूरक बजट

वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए पेश किए गए अनुपूरक बजट में राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। औद्योगिक विकास एवं भारी उद्योगों को सबसे बड़ा हिस्सा दिया गया है, जिसके तहत भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए 1,30,301.92 लाख रुपये का राजस्व खर्च और 20,905.88 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजीगत बजट मंजूर किया गया है। इसके अलावा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को 1,502.79 लाख रुपये राजस्व और 12,500.00 लाख रुपये पूंजीगत मद में दिए गए हैं, जबकि मुद्रण तथा लेखन सामग्री के पूंजीगत कार्यों हेतु 2,350.00 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है।

ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए ग्राम्य विकास विभाग को 8,103.51 लाख रुपये राजस्व तथा 14,18,471.95 लाख रुपये का पूंजीगत आवंटन प्राप्त हुआ है। ऊर्जा क्षेत्र (बिजली व्यवस्था) के लिए कुल मिलाकर 7,02,227.00 लाख रुपये (भारित राशि सहित) राजस्व मद में और 40,000.00 लाख रुपये पूंजीगत मद में आवंटित किए गए हैं। वहीं स्थानीय निकायों और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज विभाग को 15,633.00 लाख रुपये का राजस्व तथा 13,998.00 लाख रुपये का पूंजीगत बजट प्रदान किया गया है।

कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों के लिये जरूरी राशि का प्रबंध किया गया है। कृषि विभाग को 13,237.76 लाख रुपये राजस्व और 15,900.00 लाख रुपये पूंजीगत विकास के लिए दिए गए हैं। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के हिस्से में 24,480.37 लाख रुपये राजस्व और 1,005.02 लाख रुपये पूंजीगत आवंटन आया है। पशुपालन विभाग के लिए 2,497.84 लाख रुपये राजस्व व 4,486.66 लाख रुपये पूंजीगत, दुग्ध विकास विभाग के लिए 20,425.10 लाख रुपये राजस्व, मत्स्य विभाग के लिए 300.00 लाख रुपये राजस्व व 600.00 लाख रुपये पूंजीगत, तथा भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को 200.00 लाख रुपये का राजस्व बजट मंजूर हुआ है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अतिरिक्त राशि की व्यवस्था

इस अनुपूरक बजट में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रभाग के लिए राजस्व मद में 10.00 लाख रुपये और पूंजीगत मद में 10.00 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। एलोपैथी चिकित्सा प्रभाग को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जिसके अंतर्गत राजस्व मद में 1,10,000.00 लाख रुपये तथा पूंजीगत मद में 9,600.00 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा प्रभाग के लिए राजस्व मद में 25.00 लाख रुपये और पूंजीगत मद में 2,300.00 लाख रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा परिवार कल्याण प्रभाग के लिए राजस्व मद में 70,425.00 लाख रुपये तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाग के लिए राजस्व मद में 2,015.00 लाख रुपये और पूंजीगत मद में 4,050.00 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

शिक्षा और संस्कृति के विकास पर विशेष ध्यान

सदन में आज पेश किए गए अनुपूरक बजट में शिक्षा और संस्कृति के विकास पर भी याेगी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। अनुपूरक बजट में प्राविधिक शिक्षा (तकनीकी शिक्षा) के लिए 521.14 करोड़ रुपये, स्कूली शिक्षा को 351.25 करोड़ रुपये और माध्यमिक शिक्षा के लिए 74.50 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार उच्च शिक्षा के लिए 5.00 करोड़ रुपये, व्यावसायिक शिक्षा के लिए 1.98 करोड़ रुपये और संस्कृति विभाग के विभिन्न आयोजनों व योजनाओं के लिए 2.43 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार सभी प्रमुख विभागाें की याेजनाओं काे आगे जारी रखने के लिए अतिरिक्त राशि की व्यवस्था की गयी है।
जनसेवा सर्वोपरि, जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें : केशव प्रसाद मौर्य

-  विधान भवन जाने से पहले उपमुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में सुनीं फरियादें, अधिकारियों को दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को विधान भवन में तृतीय सत्र-2026 की कार्यवाही में शामिल होने से पहले अपने सरकारी आवास 7, कालिदास मार्ग पर आयोजित 'जनता दर्शन' कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक एवं स्थानीय समस्याओं से उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया। श्री मौर्य ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनसेवा और जनसमस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आमजन की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे और प्रत्येक नागरिक को न्यायपूर्ण समाधान मिले, इसके लिए सभी अधिकारी पूरी जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र पर चलते हुए सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि 'जनता दर्शन' केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच प्रत्यक्ष संवाद का प्रभावी माध्यम है, जिससे समस्याओं के त्वरित समाधान का रास्ता आसान होता है।
उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार जनसेवा, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत है।
विकसित भारत' की मजबूत नींव बनेंगे गांव : केशव प्रसाद मौर्य
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-  जल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका पर विशेष फोकस, आत्मनिर्भर गांवों से मजबूत होगी देश की अर्थव्यवस्था


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने में ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों का समग्र विकास ही देश की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला है। प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए योजनाबद्ध और व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, आधारभूत अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता दे रही है। इन प्रयासों से गांवों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, कृषि को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहेगा। साथ ही बेहतर सड़क, सिंचाई, अन्य आधारभूत सुविधाओं और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं से किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इससे उनकी आय बढ़ेगी और आर्थिक सशक्तीकरण को नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और अन्य चुनौतियों को देखते हुए जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण समुदाय भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके और गांव सामाजिक व आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार गांव, गरीब, किसान, महिला और युवा के सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतार रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जनभागीदारी और समावेशी विकास के बल पर आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से साकार होगा तथा प्रत्येक गांव और प्रत्येक ग्रामीण परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा।
आउटसोर्स कर्मियों के लिए बड़ी सौगात, शीघ्र लागू होगा आउटसोर्स कमीशन : सीएम योगी

-  मानसून सत्र से पहले सीएम का बड़ा ऐलान, न्यूनतम मानदेय होगा सुनिश्चित; किसानों, महिलाओं, युवाओं और विपक्ष के मुद्दों पर भी बोले


लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के प्रारंभ होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर आउटसोर्स कमीशन लागू करेगी, जिसके माध्यम से आउटसोर्स कर्मियों के लिए न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं, रसोइयों और ग्राम चौकीदारों के मानदेय में सुधार के लिए अनुपूरक बजट में प्रावधान किया गया है।

-  राम मंदिर पर विपक्ष पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर में चढ़ावे और कथित चंदा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि "जिनके जेब से राम मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वही आज चंदा चोरी की बात कर रहे हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने अयोध्या आंदोलन का विरोध किया और राम मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी कीं, वही अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं।

- किसानों के लिए खाद उपलब्ध कराने के निर्देश
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि खाद वितरण पोर्टल पर कुछ तकनीकी दिक्कतें आई थीं, लेकिन अधिकारियों को किसानों के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान किया है और अधिकांश चीनी मिलें चार से पांच दिनों के भीतर किसानों के खातों में भुगतान कर रही हैं। साथ ही 16 लाख निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

-  सदन में सकारात्मक चर्चा की अपील
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से मानसून सत्र के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि विधानमंडल आम जनता की समस्याओं के समाधान और विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा का सर्वोत्तम मंच है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 25 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण और रचनात्मक होनी चाहिए।

-  महिलाओं और युवाओं की उपलब्धियां गिनाईं
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में महिला श्रमबल की भागीदारी लगभग 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 37-38 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मिशन शक्ति, श्रमजीवी हॉस्टल और विभिन्न रोजगार योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सशक्तीकरण को नई दिशा मिली है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है, जिनमें 20 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। साथ ही एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP), पीएम विश्वकर्मा और निवेश आधारित औद्योगिक नीतियों से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है।

-  सावन और कांवड़ यात्रा का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने सावन माह और कांवड़ यात्रा की महत्ता का उल्लेख करते हुए शिवभक्तों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सरकार कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और व्यवस्थाओं के लिए पूरी तरह सतर्क है तथा 7 अगस्त से विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य भी विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे।
पत्रकार वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही तथा कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख सहित अन्य वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहे।
IBM के साथ योगी सरकार की बड़ी साझेदारी, युवाओं को मिलेगा AI आधारित प्रशिक्षण और रोजगार

-  मेगा जॉब मेला-2026 का शुभारंभ, UPSDM और IBM के बीच हुआ MoU; 20 से अधिक कंपनियों ने दिए रोजगार के अवसर


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित मेगा जॉब मेला-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) और IBM के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने किया।
नई साझेदारी के तहत प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानों में AI, डिजिटल स्किल्स, इंडस्ट्री-ओरिएंटेड प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे युवाओं को आधुनिक तकनीकों के अनुरूप तैयार कर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

-  'नई तकनीक सीखना समय की जरूरत' : कपिल देव अग्रवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि युवा शक्ति को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि AI, डिजिटल स्किल्स, प्रभावी संवाद क्षमता और आत्मविश्वास भी सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने युवाओं से किसी भी नौकरी को छोटा न समझने, निरंतर सीखने की आदत विकसित करने और बदलती तकनीक के साथ स्वयं को लगातार अपडेट रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक युवा को उसकी योग्यता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराकर 'विकसित उत्तर प्रदेश' और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करना है।

-  2 हजार से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कौशल विकास मिशन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। वहीं IBM इंडिया/दक्षिण एशिया की CSR लीड शिप्रा शर्मा ने कहा कि यह साझेदारी उत्तर प्रदेश के युवाओं तक अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और AI आधारित शिक्षा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एमओयू के आदान-प्रदान के बाद सेरेमोनियल बेल रिंगिंग के साथ रोजगार मेले का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मेले में प्रदेश के विभिन्न पॉलिटेक्निक, आईटीआई, इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेजों के 2,000 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। वहीं Airtel Payments Bank, Nykaa, Tata Motors, Suzuki सहित 20 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों ने युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए।
24 घंटे में मोबाइल चोर गैंग का पर्दाफाश, सरोजनीनगर पुलिस ने दो शातिर दबोचे, 4 मोबाइल बरामद
लखनऊ।राजधानी की सरोजनीनगर थाना पुलिस और दक्षिणी जोन की सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मोबाइल चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी के चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1.20 लाख रुपये बताई गई है।यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार, 1 अगस्त को गौरी बाजार सब्जी मंडी से दो अलग-अलग लोगों के मोबाइल चोरी होने की शिकायतें मिली थीं। दोनों मामलों में सरोजनीनगर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।घटना के खुलासे के लिए थाना पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त टीमें गठित की गईं। जांच के दौरान पुलिस ने करीब 50 से 60 सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें कैलाश विहार मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय महतो और ताजुद्दीन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे भीड़भाड़ वाले बाजारों में ग्राहक बनकर घूमते थे और मौका मिलते ही लोगों के मोबाइल फोन चोरी कर लेते थे। चोरी के मोबाइल बाद में राह चलते लोगों को बेच देते थे और रकम आपस में बांट लेते थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी के चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें—

आईफोन 11 प्रो
रियलमी
ओप्पो
वीवो कंपनी के मोबाइल शामिल हैं।
मुख्य आरोपी का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी संजय महतो के खिलाफ लखनऊ, बाराबंकी, वाराणसी और झारखंड में चोरी, आर्म्स एक्ट और अन्य मामलों के कई आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है।दोनों आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।