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सवाल है कि तलाक के मामले में एलिमनी यानी गुजारा भत्ता कैसे तय होता है और क्या पुरुष इसके लिए हकदार है?

डेस्क:–क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा ने तलाक ले लिया है. दोनों गुरुवार को बांद्रा फैमिली कोर्ट पहुंचे और मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए. वकील ने पुष्टि की है कि दोनों का तलाक हो गया है और शादी टूट गई है. तलाक पर सहमति की शर्तों के मुताबिक, चहल ने अपनी कोरियोग्राफर पत्नी धनश्री वर्मा को 4 करोड़ 75 लाख रुपए की एलिमनी देने पर सहमति जताई थी. चहल अब तक 2 करोड़ 37 लाख और 55 हजार रुपए दे चुके हैं. बाकी राशि का भुगतान अब करना होगा.

देश में तलाक के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब पत्नी को एक बड़ी राशि गुजारा भत्ते के तौर पर दी गई है. ऐसे में सवाल है कि तलाक के मामले में एलिमनी यानी गुजारा भत्ता कैसे तय होता है.

*कैसे तय होती है तलाक की एलिमनी?*


सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आशीष पांडे कहते हैं, भारतीय कानून में तलाक के मामले में गुजारा भत्ता देने का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है. गुजारा भत्ता तय करने में कई बातों का ध्यान रखा जाता है, उसके आधार पर कोर्ट एक राशि तय करता है. गुजारा भत्ता तय करने में पति पत्नी की वित्तीय स्थिति, उनकी कमाई की क्षमता जैसे कई फैक्टर्स पर विचार किया जाता है.

जैसे- अगर कोई महिला 10 साल से एक गृहिणी है और वो अपने पति को तलाक देती है तो कोर्ट उसकी एलिमनी तय करते वक्त पति की आय को ध्यान में रखेगा. चूंकि, महिला सिर्फ गृहिणी है और उसने बच्चों-परिवार की देखभाल के लिए नौकरी नहीं की और अपना करियर त्याग दिया, इसलिए ऐसा गुजारा भत्ता तय किया जाएगा कि उसका सामान्य जीवन चलता रहे.

मान लीजिए कोई पति और पत्नी दोनों ही नौकरी से 50-50 हजार रुपए हर माह कमा रहे हैं. तो जरूरी नहीं है कि कोर्ट गुजारा भत्ता देने का आदेश दे क्योंकि दोनों की आर्थिक स्थिति एक जैसी है. अगर पत्नी या पति में से किसी एक पर बच्चों की देखभाल से ज्यादा वित्तीय बोझ है तो कोर्ट वित्तीय सहायता का आदेश दे सकता है.

इसे तय करने में यह देखा जाता है कि दोनों की सामाजिक और वित्तीय स्थिति क्या है, पत्नी और आश्रित बच्चों की जरूरतें क्या हैं, क्या दोनों रोजगार से जुड़े हैं. उनकी योग्यताएं क्या हैं, इसका ध्यान रखा जाता है. इसके अलावा आवेदक की स्वतंत्र आय क्या है, कितनी सम्पत्ति पहले से उसके पास है. विवाह के दौरान किस तरह का जीवन स्तर रहा है, पारिवारिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए कितना त्याग किया गया. गैर-कामकाजी जीवनसाथी ने कानूनी प्रक्रिया के लिए कितना खर्च किया, गुजारा भत्ता तय करते वक्त यह भी ध्यान रखा जाता है. अगर पति पर कर्ज है तो इसे भी कानूनी फैसले का हिस्सा बनाया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि गुजारा भत्ता आश्रित पति या पत्नी की मदद करने के लिए है न कि दूसरे पक्ष को दंडित करने के लिए.

*क्या पुरुष एलिमनी का हकदार?*

तलाक के ज्यादातर मामलों में पत्नियों को वित्तीय सहायता मिलती है, लेकिन भारतीय कानून में पुरुषों को भी गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार है. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में धारा 24 और 25 के तहत पति गुजारा भत्ता की मांग कर सकता है. हालांकि, कुछ खास स्थितियों में ही पति को गुजारा भत्ता मिलता है. इसके लिए पति को यह साबित करना होगा कि वो किसी खास वजह से आर्थिकतौर पर पत्नी पर निर्भर था. जैसे- उसे विकलांगता या कोई ऐसी स्थिति से जूझ रहा था जिसके कारण वो कमाई करने में असक्षम था.

झारखंड सरकार के मंत्री का फेसबुक पेज हैक, आपत्तिजनक पोस्ट से मचा हड़कंप

डेस्क:–झारखंड सरकार के नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का फेसबुक पेज हैक हो गया है. गुरुवार को उनके ऑफिशियल पेज से अश्लील और आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किए गए, जिससे उनके समर्थक और आम जनता हैरान रह गई, मंत्री के फेसबुक पेज पर 24 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं. जैसे ही मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और उनकी टीम को इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत फेसबुक पेज को रिकवर करने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन, उन्हें अपना एडमिन एक्सेस नहीं मिल पाया.

इसे लेकर रांची स्थित लालपुर साइबर थाने में लिखित शिकायत की गई है. मंत्री के फेसबुक पेज का ऑपरेशन संभालने वाले रांची के कोकर निवासी ओमप्रकाश रमण ने शिकायत में कहा है कि इस पेज में सुदिव्य कुमार सोनू और गोपाल विश्वकर्मा को एडमिन का पावर था. अचानक सभी एडमिन का पावर खत्म कर दिया गया. साइबर पुलिस से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.

गुरुवार तक मंत्री के फेसबुक पेज पर किया गया अश्लील पोस्ट भी नहीं हटाया जा सका था. शुक्रवार को यानि आज पोस्ट हटाने की कोशिश जारी है. इस पर शाम सात बजे तक 130 से ज्यादा लोगों के कमेंट आए हैं. मंत्री के समर्थक तमाम यूजर्स से पोस्ट को नजरअंदाज करने और इस संबंध में फेसबुक को रिपोर्ट करने का अनुरोध कर रहे हैं.

पिछले महीने भी साइबर अपराधियों ने झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता का फोटो इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक अकाउंट बना लिया था और इसके जरिए आम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजे गए थे. मामला तब उजागर हुआ जब इस फर्जी फेसबुक अकाउंट में डीजीपी अनुराग गुप्ता के नाम की स्पेलिंग गलत होने पर कुछ लोगों ने पुलिस का ध्यान आकृष्ट कराया.

पुलिस का साइबर सेल इस मामले की तहकीकात कर रहा है. झारखंड के पूर्व डीजीपी आईपीएस नीरज सिन्हा के साथ-साथ कुछ आईएएस अधिकारियों के भी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर ठगी की कोशिश के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन किसी मंत्री का सोशल मीडिया पेज हैक कर लिए जाने की यह पहली घटना है.
5 हजार से भी अधिक पदों पर मेडिकल ऑफिसर की बंपर भर्ती
डेस्क:–ओडिशा लोक सेवा आयोग यानी ओपीएससी (OPSC) ने मेडिकल ऑफिसर के बंपर पदों पर भर्तियां निकली हैं, जिसके लिए आवेदन मांगे गए हैं. योग्य और इच्छुक उम्मीदवार ओपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट opsc.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 25 मार्च से शुरू होगी, जो 25 अप्रैल 2025 तक चलेगी. इस भर्ती अभियान के तहत ओडिशा लोक सेवा आयोग कुल 5,248 पदों को भरेगा.

*OPSC Medical Officer Vacancy Details: वैकेंसी डिटेल्स*

सामान्य वर्ग: 411 पद

एसईबीसी वर्ग: 736 पद

अनुसूचित जाति: 1620 पद

अनुसूचित जनजाति: 2481 पद

*पात्रता मानदंड क्या हैं?*

*शैक्षणिक योग्यता*- मेडिकल ऑफिसर के इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज या संस्थान से एमबीबीएस या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए.

*उम्र सीमा*- अभ्यर्थी की उम्र सीमा 1 जनवरी 2025 तक 21 से 32 साल के बीच होनी चाहिए यानी उसका जन्म 2 जनवरी 1993 से पहले और 1 जनवरी 2004 के बाद नहीं हुआ होना चाहिए.

*आवेदन कैसे करें?*

सबसे पहले ओपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट opsc.gov.in पर जाएं.

फिर होमपेज पर उपलब्ध ऑनलाइन आवेदन लिंक पर क्लिक करें.

उसके बाद अपना रजिस्ट्रेशन कराएं और मेडिकल ऑफिसर भर्ती लिंक पर क्लिक करें.

अब अपना आवेदन पत्र भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें.

जब ये सब हो जाए तो सबमिट पर क्लिक करें और पेज को डाउनलोड कर लें.

आगे की जरूरत के लिए इसकी एक हार्ड कॉपी अपने पास जरूर रख लें.

*चयन प्रक्रिया क्या है?*

इन पदों के लिए चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा शामिल है. यह परीक्षा 11 मई 2025 को कटक/भुवनेश्वर में आयोजित की जाएगी. लिखित परीक्षा में 200 अंकों का एक पेपर होगा, जिसमें कुल 200 प्रश्न होंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा. परीक्षा में पूछे जाने वाले सभी प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप के बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जिनका ओएमआर मूल्यांकन किया जाएगा. इस परीक्षा की अवधि 3 घंटे होगी और सबसे जरूरी बात कि परीक्षा में निगेटिव मार्किंग भी होगी यानी गलत उत्तर देने पर अंक काटे भी जाएंगे.

अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार ओपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट opsc.gov.in देख सकते हैं.
Oppo F29 Pro 5G ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन किया लॉन्च,जानिए इसके डिजाइन, बैटरी और प्रोसेसर की पूरी डिटेल्स

डेस्क:–Oppo F29 Pro 5G ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। आज हम आपको इस फोन के डिजाइन, डिस्प्ले, कैमरा, प्रोसेसर, और कीमत के बारे में सारी जानकारी देंगे। अगर आप भी इस फोन को खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।

*Oppo F29 Pro 5G के अलग-अलग वेरिएंट्स की कीमत*

8GB RAM + 128GB स्टोरेज – ₹27,999
8GB RAM + 256GB स्टोरेज – ₹29,999
12GB RAM + 256GB स्टोरेज – ₹31,999

*Oppo F29 के वेरिएंट्स की कीमत:*

8GB RAM + 128GB स्टोरेज – ₹23,999
8GB RAM + 256GB स्टोरेज – ₹25,999

*बैटरी और चार्जिंग*

Oppo F29 Pro 5G में 6000 mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो पूरे दिन बिना किसी परेशानी के बैकअप दे सकती है। इसके साथ ही, 80W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी है, जिससे फोन जल्दी चार्ज होता है।

*स्टोरेज और रैम*

Oppo F29 Pro 5G में आपको 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलेगा। इसका मतलब है कि फोन की स्पीड काफी बेहतरीन होगी और आप एक साथ कई ऐप्स को बिना किसी परेशानी के चला पाएंगे।

*प्रोसेसर*

इसमें MediaTek Dimensity 7300 SoC प्रोसेसर दिया गया है, जो फोन को बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है। शुरुआती अनुभव के अनुसार, फोन में कोई लैगिंग नहीं होती और इसकी स्पीड काफी तेज है।

*IP रेटिंग और अंडरवॉटर फोटोग्राफी*

Oppo F29 Pro 5G IP66, IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है, जिससे यह पानी, धूल और झटकों से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा, इसमें अंडरवॉटर फोटोग्राफी का भी सपोर्ट मिलेगा, जिससे आप पानी के अंदर भी शानदार तस्वीरें ले सकेंगे।

*सेल और उपलब्धता*

Oppo F29 Pro 5G Flipkart, Amazon और OPPO India e-store पर उपलब्ध होगा। आप इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके आसानी से घर बैठे ले सकते हैं।

*Oppo F29*

Oppo F29 Pro के साथ ही Oppo F29 भी लॉन्च किया गया है, जिसमें 6500 mAh की बैटरी दी गई है। इस फोन में 45W SuperVOOC चार्जिंग का भी सपोर्ट है, जो फास्ट चार्जिंग में मदद करता है।

*सिग्नल बूस्ट*

Oppo ने फोन में एक विशेष सिग्नल बूस्ट एंटीना दिया है, जिससे आपको बेहतर नेटवर्क सिग्नल मिलेंगे। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या से जूझते हैं।

*बॉडी और डिजाइन*

Oppo F29 Pro 5G में 360 डिग्री आर्मर बॉडी दी गई है, जो डैमेज प्रूफ है और फोन को झटकों से बचाती है। इसके अलावा, इस फोन में 300% नेटवर्क बूस्ट की सुविधा भी है। मार्बल व्हाइट कलर में यह फोन देखने में बेहद स्टाइलिश लगता है।

*शुरुआती अनुभव*

हमारा शुरुआती अनुभव Oppo F29 Pro 5G के साथ काफी अच्छा रहा है। फोन को इस्तेमाल करते वक्त हमें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आई। फोन का डिजाइन सबसे आकर्षक और पॉजिटिव पहलू है। बता दें कि इस प्रकार, Oppo F29 Pro 5G एक बेहतरीन स्मार्टफोन है, जो अच्छी बैटरी, तेज प्रोसेसर, और शानदार डिजाइन के साथ आता है। अगर आप एक नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
फिल्म ‘छावा'' पर प्रतिबंध लगाने की मांग, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने शाह को लिखा पत्र

डेस्क:–ऑल इंडिया मुस्लिम जमात, दरगाह आला हजरत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर फिल्म ‘‘छावा'' पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। |

उनका आरोप है कि ‘‘यह फिल्म सांप्रदायिक तनाव भड़का रही है और नागपुर में हाल ही में हुए दंगों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।'' शाह को लिखे पत्र में मौलाना रजवी ने फिल्म के निर्देशक, निर्माता और लेखक के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया। मौलाना का दावा है कि फिल्म में बादशाह औरंगजेब को इस तरह से दिखाया गया है, जिससे हिंदू युवा भड़क गए हैं। रजवी ने अपने पत्र में कहा, ‘‘फिल्म ‘छावा' की रिलीज के बाद से देश का माहौल खराब हो रहा है। फिल्म में बादशाह औरंगजेब की छवि हिंदू विरोधी के रूप में दिखाकर हिंदू युवाओं को भड़काया गया है। यही कारण है कि हिंदू संगठनों के नेता जगह-जगह औरंगजेब के बारे में नफरत भरे भाषण दे रहे हैं।''

उन्होंने कहा, ‘‘इसी कारण 17 मार्च को नागपुर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जो बेहद खेदजनक है।'' मौलाना रजवी ने कहा, ‘‘मैंने तुरंत मीडिया के माध्यम से शांति की अपील की और माहौल को शांत करने के लिए नागपुर की मस्जिद के उलेमा और इमामों से रात भर संपर्क बनाए रखा।'' उन्होंने औरंगजेब के बारे में मुस्लिम समुदाय के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘भारत के मुसलमान बादशाह औरंगजेब को अपना आदर्श और नेता नहीं मानते। हम उन्हें केवल एक शासक मानते हैं, इससे अधिक कुछ नहीं।''
50 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे गुलाब यादव

डेस्क:–रमजान माह पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए बेहद मुकद्दस होता है लेकिन अन्य धर्मों को मानने वाले कुछ लोगों की भी इससे गहरी वाबस्तगी (जुड़ाव) है। आजमगढ़ के कौड़िया गांव के गुलाब यादव भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं। जिनकी पुकार रोज भोर में रोजेदारों को सहरी (रमजान के दिनों में भोरकालीन भोजन) के लिए जगाती हैं। बनारसी साड़ियों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर कस्बे के निकट के गांव कौड़िया में भोर में जब सभी लोग सो रहे होते हैं तब गुलाब यादव और उनके 12 वर्षीय बेटे रात एक बजे से अगले दो से तीन घंटों तक गांव के मुस्लिम परिवारों को रमजान में सहरी के लिए जगाने निकल पड़ते हैं।

किसी ने खूब कहा है कि ‘‘दोस्ताना इतना बरकरार रखो कि मजहब बीच में न आये कभी। तुम उसे मंदिर तक छोड़ दो, वो तुम्हें मस्जिद छोड़ आये कभी।'' यादव के यह जज्बात इसी का अक्स हैं। वैसे तो रमजान के दिनों में मस्जिदों से ऐलान करके लोगों को सहरी के लिए उठाया जाता रहा है लेकिन उच्चतम न्यायालय के लाउडस्पीकर को लेकर जारी किए गए निर्देशों का सरकार द्वारा कड़ाई से पालन कराये जाने के बाद अब गुलाब यादव की इस जिम्मेदारी भरी कवायद का महत्व और बढ़ गया है।

गुलाब यादव ने बुधवार को मीडियो को बताया कि वह अपने परिवार की 50 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जिसकी शुरुआत 1975 में उनके पिता चिरकिट यादव ने की थी। यादव कहते हैं, ‘‘उस वक्त मैं काफी छोटा था और तब मुझे पिताजी की इस कवायद की वजह भी समझ नहीं आती थी। मगर वक्त के साथ मैंने इसके पीछे की भावना को समझा।'' अब यादव कहते हैं कि उन्हें इस काम से बहुत सुकून मिलता है। पेशे से दिहाड़ी मजदूर गुलाब यादव (45) ज्यादातर वक्त दिल्ली में रहते हैं, लेकिन रमजान आने पर वह अपने परिवार की पांच दशक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अपने गांव लौट आते हैं।

*50 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे गुलाब यादव*

गुलाब यादव अपने पिता द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को लेकर अपनी अगली पीढ़ी में भी जिम्मेदारी का भाव पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए मैं रोज अपने 12 साल के बेटे अभिषेक को भी साथ लेकर जाता हूं।'' एक हाथ में टॉर्च और दूसरे हाथ में आवारा कुत्तों से बचने के लिए डंडा लिये यादव और उनका बेटा अभिषेक गांव के सभी मुस्लिम लोगों के घरों पर दस्तक देते हैं और उन लोगों के जागने तक वहां से नहीं हटते हैं। यादव ने बताया, "मेरे पिता की मृत्यु के बाद मेरे बड़े भाई ने कुछ वर्षों तक यह काम किया लेकिन उनकी आंखों की रोशनी कम होने के बाद उन्हें मजबूरन यह काम छोड़ना पड़ा। उनके बाद मैंने यह जिम्मा उठाया है और अब मैं हर रमजान में इसी काम के लिए यहां लौट आता हूं।''

गुलाब यादव के इस नेक काम की पूरे इलाके में सराहना होती है। यादव के पड़ोसी शफीक ने कहा, ‘‘रोजेदारों को सहरी के लिए जगाना बेहद सवाब (पुण्य) का काम है।'' उन्होंने कहा, ‘‘गुलाब भाई लोगों को जगाने के लिए पूरे गांव का चक्कर लगाते हैं। इसमें दो घंटे का वक्त लगता है। इसके बाद वह यह पक्का करने के लिए एक बार फिर पूरे गांव में घूमते हैं कि कोई भी रोजेदार सहरी करने से बाकी न रहे। इससे ज्यादा मुकद्दस जज्बा और क्या हो सकता है।'' ‘‘जब मोहब्बत लिखी हुई है गीता और कुरान में, फिर ये कैसा झगड़ा हिन्दू और मुसलमान में'' दोहे का जिक्र करते हुए शफीक कहते हैं, ‘‘रमजान इस्लाम के प्रमुख कर्तव्यों में से एक है। उस फर्ज को निभाने में इतनी शिद्दत से मदद करके गुलाब यादव हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं।''
''मैं 7 दारोगा का हाथ-पैर तुड़वाकर यहां तक पहुंचा हूं'', संजय निषाद का विवादित बयान वायरल

डेस्क::–उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह मंच से एक विवादित बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने पुलिसवालों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैं यहां ऐसे नहीं पहुंचा हूं, 7 दारोगा का हाथ-पैर तुड़वाकर और उन्हें गड्ढे में फेंकवाकर यहां तक पहुंचा हूं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह बयान उस समय सामने आया जब मंत्री संजय निषाद सुल्तानपुर जिले में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके समुदाय के कई लोगों को झूठे मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने पुलिस से कहा कि हमारे लड़कों के ऊपर से सभी फर्जी केस हटा दो, नहीं तो हम आंदोलन करेंगे। दारोगा सस्पेंड हो जाएगा और मैं मुख्यमंत्री से भी शिकायत करूंगा। मैं ऐसे ही यहां तक नहीं पहुंचा हूं, मैंने कई दारोगाओं का हाथ-पैर तुड़वाकर यहां तक पहुंचा हूं।

बताया जा रहा है कि संजय निषाद ने आगे कहा कि अगर किसी निषाद को झूठे मामले में फंसाया गया तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। दारोगा अगर ज्यादा ड्रामा करेगा तो उसे जेल में डाल देंगे, और उसे बेल भी नहीं मिलेगी। जरूरत पड़ी तो दारोगा के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करेंगे। यह विवादित बयान तब आया जब संजय निषाद अपनी निषाद पार्टी की जनाधिकार यात्रा के दौरान सुल्तानपुर जिले में पहुंचे थे। उन्होंने चांदा इलाके के मदारडीह गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।

दरअसल, 14 मार्च को होली के दिन जिले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव में रंग खेलने को लेकर एक विवाद हुआ था। इस विवाद में एक दलित और निषाद परिवार के बीच मारपीट हो गई थी, जिससे 65 वर्षीय दलित महिला सुनरा देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने मृतक महिला के परिजनों की शिकायत के आधार पर शाहपुर गांव के ग्राम प्रधान कृष्णा कुमार निषाद समेत 5 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इनमें से 4 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

बताया जा रहा है कि जब यह जानकारी मंत्री संजय निषाद को मिली, तो उन्होंने मंच से पुलिस के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि निषाद समाज के लोग निर्दोष हैं और उन्हें फर्जी मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि इन लोगों को छोड़ा जाए, वरना वे कड़ी कार्रवाई करेंगे। अब संजय निषाद के इस बयान के बाद यह मामला और भी विवादों में घिर गया है, और यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।

कानपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां एक पालतू जर्मन शेफर्ड ने अपनी मालकिन को उतारा मौत के घाट

डेस्क:–उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले के विकास नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक पालतू जर्मन शेफर्ड ने अपनी 80 वर्षीय मालकिन पर हमला कर उनकी जान ले ली। घटना के बाद से एक बार फिर पालतू कुत्तों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।

*जानिए, क्या हुआ था घटना वाले दिन?*

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते रविवार को मोहनी देवी अपने घर के आंगन में थीं, तभी उनके पालतू कुत्ते ने उन पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। पहले परिजनों को लगा कि कुत्ता किसी बाहरी व्यक्ति पर भौंक रहा है, लेकिन जब उन्होंने मोहनी देवी की चीखें सुनीं, तो तुरंत बाहर भागे। लेकिन जब तक वे बाहर पहुंचे तब तक कुत्ते ने मोहनी देवी के चेहरे, पेट और कमर पर गंभीर घाव कर दिए थे जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि मोहनी देवी अपने कुत्ते को बहुत प्यार करती थीं और उसे बच्चे की तरह पालती थीं, लेकिन वही कुत्ता अब उनकी मौत का कारण बन गया। परिवार वाले इस हमले से हैरान थे और समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। वहीं सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद ने पुलिस और नगर निगम की टीम को बुलाया। काफी प्रयासों के बाद, नगर निगम की टीम ने कुत्ते को काबू कर लिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया।

वहीं इस घटना के बाद पालतू कुत्तों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। स्थानीय पार्षद ने कहा कि पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए और कुत्तों के मालिकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।पुलिस अब यह जांच रही है कि आखिर कुत्ते ने अचानक हमला क्यों किया। इस घटना ने पालतू कुत्तों के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक किया है और इस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है।
1 अप्रैल से Google Pay, PhonePe और Paytm इन मोबाइल नंबरों पर नहीं करेगा काम, जानिए क्या है वजह?

डेस्क:–यदि आप अपने स्मार्टफोन या मोबाइल फोन के जरिए बैंकिंग करते हैं या यूपीआई से लेनदेन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2024 से उन मोबाइल नंबरों को बैंक अकाउंट और यूपीआई ऐप्स से हटा दिया जाएगा, जो लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं। मतलब, अगर आपने किसी नंबर को अपने बैंक खाते या यूपीआई ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) से जोड़ा है और वह नंबर काफी समय से रिचार्ज नहीं हुआ या काम नहीं कर रहा है, तो वह नंबर आपके बैंक अकाउंट से हटा दिया जाएगा।


इस फैसले के पीछे मुख्य कारण यह है कि जिन मोबाइल नंबरों का अब कोई उपयोग नहीं हो रहा, वे बैंकिंग और यूपीआई सिस्टम में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। यदि ये नंबर किसी और के नाम पर जारी हो जाते हैं, तो इससे धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ सकता है। सरकार का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित रखना और फर्जीवाड़े से बचाना है।

यूपीआई पेमेंट्स में मोबाइल नंबर एक पहचान का साधन होता है। जब आप पेमेंट करते हैं, तो यही नंबर सुनिश्चित करता है कि पेमेंट सही व्यक्ति को जा रही है या नहीं। यदि कोई नंबर निष्क्रिय है और उसे किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया है, तो इससे पेमेंट फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ऐसे नंबरों को सिस्टम से हटाने का निर्णय लिया गया है।

यदि आपका मोबाइल नंबर आपके बैंक अकाउंट या यूपीआई ऐप से जुड़ा है और आपने उसे लंबे समय से रिचार्ज नहीं कराया है, तो आपको तुरंत अपने मोबाइल ऑपरेटर (जैसे जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया) से यह पुष्टि करनी चाहिए कि वह नंबर अब भी आपके नाम पर सक्रिय है या नहीं।

- अगर नंबर डिएक्टिवेट हो चुका है, तो उसे तुरंत एक्टिवेट करा लें।
- अगर नंबर एक्टिव है, तो उसे रिचार्ज करा लें ताकि वह आपके बैंक अकाउंट और यूपीआई ऐप से जुड़ा रहे।

जानकारी के अनुसार, यदि किसी मोबाइल नंबर को 90 दिनों तक रिचार्ज नहीं किया जाता, तो वह डिएक्टिवेट हो सकता है। हालांकि, उपयोगकर्ताओं को 15 दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, जिसमें वे अपना नंबर फिर से एक्टिवेट करा सकते हैं। यदि यह अवधि पूरी हो जाती है और नंबर को फिर से एक्टिव नहीं कराया जाता, तो वह सिम निष्क्रिय हो जाएगा और किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित किया जा सकता है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बैंकों और यूपीआई ऐप्स को निर्देश दिए हैं कि वे हर हफ्ते डिलीट किए गए मोबाइल नंबरों की लिस्ट को अपडेट करें। इससे सुनिश्चित होगा कि 1 अप्रैल के बाद, बेकार नंबर सिस्टम से हटा दिए जाएं। यदि आपका नंबर भी उन मोबाइल नंबरों में है जो लंबे समय से रिचार्ज नहीं हुए हैं, तो इसे जल्द से जल्द चेक करें और एक्टिवेट करा लें। ऐसा करने से आप किसी भी परेशानी से बच सकेंगे।
गंगा बैराज में नहाने गए एक युवक की दर्दनाक मौत

डेस्क:–उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में गंगा बैराज में नहाने गए एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान कल्याणपुर निवासी कारोबारी हरिनाम सिंह यादव के बेटे 22 वर्षीय प्रांजुल यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, प्रांजुल अपने दोस्त नवीन कुमार मिश्रा और एक युवती के साथ गंगा बैराज पहुंचा था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि गांगा बैराज पर पहले तीनों ने शराब पी और फिर प्रांजुल ने कहा कि गंगा में नहाने से सारे पाप धुल जाएंगे। यह कहकर वह पानी में उतर गया। नशे की हालत में प्रांजुल गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। नवीन ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन पानी के तेज बहाव की वजह से वह उसे बचा नहीं सका।

बताया जा रहा है कि बाद में गोताखोरों की मदद से प्रांजुल के शव को पानी से बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और परिजनों को सूचना दी।

प्रांजुल के परिजनों ने उसकी मौत पर संदेह जताया है, जिसके कारण पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब होली के दिन भी गंगा घाट पर नहाने गए 5 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग अभी भी लापता हैं। वहीं पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर प्रांजुल ने गंगा में नहाने का इतना जोखिम क्यों उठाया और क्या इसका कोई अन्य कारण था।