भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ
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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।
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क्यों मिला पुरस्कार?
महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।
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विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए
नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।
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कौन हैं नावी पिल्ले?
88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
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ट्रंप के हाथ फिर से खाली
नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।













5 hours ago
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