द‍िल्‍ली के 57 मेट्रो स्‍टेशन आज रात 9 बजे से रहेंगे बंद, पुलिस के प्रस्ताव को डीएमआरसी की मंजूरी

#57metrostationsofdelhimetrowillremainclosedfrom9october9pmtoday

दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का फ़ैसला लिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी। डीएमआरसी के मुताबिक़, 9 अक्तूबर, 2026 को रात 9 बजे से इन स्टेशनों को बंद कर दिया जाएगा। ये स्टेशन अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

डीएमआरसी ने एक्स पर लिखा, "सुरक्षा कारणों से, इन मेट्रो स्टेशनों पर 9 अक्तूबर, 2026 को रात 09:00 बजे से एंट्री और एग्ज़िट के रास्ते बंद रहेंगे। यह रोक 10 अक्तूबर, 2026 को भी अगले आदेश तक जारी रहेगी। हालांकि, नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को छोड़कर, सभी संबंधित मेट्रो स्टेशनों पर मेट्रो बदलने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।" इसका मतलब है कि यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन में बदल सकेंगे। लेकिन वे स्टेशन से बाहर नहीं निकल पाएंगे। साथ ही, इन स्टेशनों में प्रवेश भी नहीं कर पाएंगे।

10 घंटे तक दिल्ली और निज़ामुद्दीन स्टेशन बंद

इधर, भारतीय रेलवे ने शनिवार, 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने और वहाँ से रवाना होने वाली सभी ट्रेनों को 10 घंटे के लिए रद्द कर दिया है। शनिवार सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाली सभी ट्रेन सेवाएं रद्द रहेंगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा कम करने के लिए यह फ़ैसला लिया गया है।

सीजेपी को नहीं मिली प्रदर्शन की अनुमति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्तूबर से आंदोलन की घोषणा की है। सीजेपी के इस आंदोलन का विपक्ष समर्थन कर रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाज़त नहीं दी है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की जॉइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ''कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास से हमें एक आवेदन मिला है। इस आवेदन पर विचार किया गया, लेकिन पाया गया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है।'' नूपुर प्रसाद ने कहा, ''यह बताना भी ज़रूरी है कि इससे पहले जब सीजेपी को वहाँ विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, तब पार्टी ने क़ानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था और उस समय दिए गए अपने आश्वासनों का भी उल्लंघन किया था।''

भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

#indianoriginnavanethemnavipillayreceivesnobelpeaceprize

मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन कल हो सकते बंद, नई दिल्ली और निजामुद्दीन पहुंचने वाली ट्रेनें भी रहेंगी रद्द

#57metrostationscanbecloseddelhipolicesuggests_dmrc

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन के आह्वान किया है। इससे पहले दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। इस बीच दिल्लीवालों के ल‍िए बड़ी खबर है। आज रात से द‍िल्‍ली मेट्रो के 57 मेट्रो स्टेशन बंद हो सकते हैं। डीएमआरसी मेट्रो स्‍टेशनों को लेकर यह बड़ा फैसला ले सकता है। वहीं, सीजेपी के प्रदर्शन के बीच रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने ट्रैफिक जाम का हवाला देते हुए 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निज़ामुद्दीन पहुंचने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है।

डीएमआरसी की ओर से अंतिम पुष्टि का इंतजार

दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर डीएमआरसी को लेटर लिखा है और हालात को काबू में रखने के लिए कई मेट्रो स्टेशन बंद रखने का प्रस्ताव दिया है। आज रात 9 बजे से कल तक मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारियों को भेजा गया है। डीएमआरसी की ओर से इस पर अंतिम पुष्टि का इंतजार है।

57 मेट्रो स्टेशन हो सकते हैं बंद

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों और बेकाबू भीड़ के जमा होने की आशंका को देखते हुए, 9 अक्टूबर को रात 9:00 बजे से लेकर 10 अक्टूबर को हालात सामान्य होने तक दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों के एंट्री/एक्जिट गेट बंद किए जा सकते हैं। दिल्ली मेट्रो पुलिस की ओर से डीएमआरसी को लिखे गए एक पत्र के अनुसार, 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी के 57 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एक्जिट गेट बंद करने और इन स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या कम करने का प्रस्ताव दिया है।

रेलवे ने लिया बड़ा फैसला

इस बीच रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रैफ़िक जाम की वजह से रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन पहुँचने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाक़े में सड़क पर भारी ट्रैफ़िक जाम की आशंका को देखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है।

अमेरिका में भारतीय कंपनियों पर एक्शन, ग्रीन कार्ड प्रोग्राम को लेकर भड़के वेंस, विदेशी कर्मचारी को कहा ‘बंधुआ मजदूर

#ussuspendsinfosystcswiprohclandothertechfirmsfromgreencard_programme

अमेरिकी सरकार ने स्किल्ड विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास हासिल करने की अनुमति देने वाले एक अहम प्रोग्राम से कई बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों को निलंबित कर दिया है। अमेरिका ने आज (गुरुवार को) आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को उस प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने कथित धोखाधड़ी का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कर्मचारियों की क़ीमत पर नौकरियां दी गईं।

इन कंपनियों पर कार्रवाई

अमेरिकी प्रशासन ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कंपनियों का 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर दिया है। जिसके जरिए विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में मदद मिलती है। अमेरिकी प्रशासन ने इन कंपनियों पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

भारतीय कंपनियों के ख़िलाफ एक्शन

अमेरिका के श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कहा, "मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित कर रहा हूँ। ये वे कंपनियां हैं, जिन्होंने दशकों से इस दुरुपयोग को संभव बनाया है। मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों- कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा हूँ। इसके अलावा, कई सक्रिय फेडरल जांचों के कारण लेबर मंत्रालय माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी इस कार्यक्रम से निलंबित कर रहा है।''

वीजा प्रोग्राम के गलत इस्तेमाल का आरोप

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन कंपनियों पर वीजा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए देश में लाए स्किल्ड प्रोफेशनल को बंधुआ मंजदूर कहा। वेंस का यह बयान ट्रंप प्रशासन के माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी टेक कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम सस्पेंड किए जाने के बाद आया है।

विदेशी कर्मचारियों को कहा बंधुआ मजदूर

वेंस आगे कहा, "मुझे यकीन है कि यहां हर कोई उस खेल को समझता है जो खेला जा रहा है। आप देश के बाहर से बंधुआ मजदूरों को लाते हैं और अमेरिकी वर्कर को नौकरी से निकालते हैं।" अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने अमेरिकी वर्करों की मजदूरी कम करके उनकी जगह ऐसे लोगों को रखा जिन्हें अमेरिका में नहीं होना चाहिए था और इस तरह खूब पैसा कमाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां लेबर कॉस्ट कम करने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल कर रही थीं।

भारत पर कितना असर?

अमेरिकी प्रशासन की ओर से एच-1बी वीज़ा पर काम करने वाले प्रवासियों के लिए स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया रोकने की कोशिश का भारतीय आईटी सेवा कंपनियों पर शायद ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इस रास्ते से स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया पहले ही लगभग ठप हो चुकी थी। पीईआरएम आवेदन दाखिल करते समय नियोक्ता को नौकरी की रिक्ति का विज्ञापन देना होता है, आवेदकों पर विचार करना होता है, यह दस्तावेजी प्रमाण देना होता है कि योग्य अमेरिकी कर्मचारियों का चयन क्यों नहीं किया गया। साथ ही यह साबित करना होता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी हालात पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

2024 से 2025 के बीच आवेदनों दो फ़ीसदी से भी कम की कमी

अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच दाखिल किए गए कुल 1,17,849 पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन आवेदनों में भारतीय आईटी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 1,400 से कम यानी दो फ़ीसदी से भी कम रही। यह उपलब्ध आंकड़ों की सबसे हालिया अवधि है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस लिमिटेड के पास 2022 के बाद से कोई पीईआरएम मामला नहीं है। अमेरिकी सरकार के वित्त वर्ष 2025 के पीईआरएम डिस्क्लोजर डेटा के मुताबिक, इस अवधि में विप्रो, टीसीएस और एचसीएलटेक को क्रमशः 523, 513 और 393 स्थायी निवास संबंधी मंज़ूरियां मिलीं। यह संख्या उन मंज़ूरियों का एक छोटा हिस्सा है, जो ग़ैर-आईटी कंपनियों को मिली थीं। वित्त वर्ष 2025 में माइक्रोसॉफ्ट देश में पीईआरएम आवेदन दाखिल करने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी। उसके 3,161 मामलों पर फ़ैसला हुआ, जो छह आउटसोर्सिंग कंपनियों के संयुक्त आंकड़े से दोगुने से भी अधिक है।

*सीएम हेमंत सोरेन ने पैतृक गांव नेमरा में दिवंगत मां रूपी सोरेन की आत्मा शांति के लिए निभाई पारंपरिक रस्म

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज सुबह रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित अपने पैतृक आवास पर परिजनों के साथ स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुरूप अपनी पूजनीय दिवंगत माता श्रीमती

Ptsd सोरेन के निमित्त भोजन परोसने की पारंपरिक रस्म निभाई। मौके पर उन्होंने पारिवारिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपनी दिवंगत माता की स्मृति से जुड़े पारंपरिक संस्कारों को निभाया।*

दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर खुफिया इनपुट, बढ़ाई गई चौकसी, 26 हजार से ज्यादा जवान तैनात

#intelligenceinputsregardingcjpprotestindelhi

भारतीय निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। जिसको लेकर सड़कों पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच जंतर-मंतर पर 10 अक्तूबर को कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन प्रस्तावित है। सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन रहेगा जारी

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा कर चुके हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) भी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने शनिवार को जंतर मंतर पर धरने का आह्वान किया है। इस बड़े विरोध प्रदर्शन में कई अन्य विपक्षी दलों के शामिल होने की भी संभावना है।

प्रदर्शन की अनुमति नहीं

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। दिल्ली पुलिस के खुफिया विभाग ने प्रदर्शन को लेकर इनपुट मिलने की बात कही है। पुलिस को आशंका है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच सकते हैं। ऐसे में जंतर-मंतर तक किसी भी अनधिकृत जमावड़े को पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति होने वाले किसी भी प्रदर्शन या जमावड़े में शामिल नहीं होने की अपील की है।

दिल्ली में 26,000 से ज्यादा जवान तैनात

सीजेपी दो महीने पहले, नीट-यूजी पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर थी। इस दौरान काफी बवाल देखने को मिला। अब सीजेपी के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर है। ऐसे में हंगामे के आसार को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के 26,000 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है।

महिला पैरासैन्य कंपनियां भी ड्यूटी पर

जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ कंपनियां आ रही हैं। ये अतिरिक्त बल प्रदर्शनों को संभालने, महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की सुरक्षा करने और केंद्रीय दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेंगे। महिलाओं की बड़ी संख्या में शामिल होने की आशंका को देखते हुए पांच महिला पैरासैन्य कंपनियां भी ड्यूटी पर होंगी।

*आंसुओं के सैलाब के बीच सीएम हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन पंचतत्व में विलीन, पैतृक गांव नेमरा में बेटे हेमंत ने दी मुखाग्नि

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की पूजनीय माता रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार गुरुवार को पूरे सम्मान और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। अंत्येष्टि रामगढ़ जिला में उनके पैतृक गांव नेमरा स्थित श्मशान घाट पर हुई। अपनी दिवंगत माता को मुखाग्नि मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने दी। जैसे ही मुखाग्नि दी गई, पूरा गांव और वहां मौजूद हजारों लोगों की आँखें नम हो गईं। इस अवसर पर पूरा माहौल अत्यंत गमगीन हो गया।

शोक में डूबा नेमरा, उमड़ा जनसैलाब

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की माता दिवंगत रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर का दर्शन और उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए नेमरा गांव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों ग्रामीण, समर्थकों, राजनीतिक दिग्गजों और प्रशासनिक अधिकारियों ने दिवंगत रूपी सोरेन को अश्रुपूर्ण आँखों से अंतिम विदाई दी। शव यात्रा में शामिल होकर बड़ी संख्या में लोग श्मशान घाट तक गये। माहौल गमगीन था, लेकिन हर एक की अंतिम तमन्ना रूपी सोरेन का अंतिम दर्शन करते हुए उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई देना था। नेमरा गांव का हर एक घर अंतिम विदाई बेला में जहां शामिल था, वहीं रूपी सोरेन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी चर्चा कर रहा था।

सादगी और संघर्ष की प्रतिमूर्ति

दिवंगत रूपी सोरेन झारखंड आंदोलन के दौर से लेकर आज तक सादगी, त्याग और संघर्ष की प्रतिमूर्ति रही थीं। उन्होंने न केवल अपना परिवारिक दायित्व बखूबी निभाया था, बल्कि पूरे झारखंड समाज के लिए एक अभिभावक की भूमिका भी निभाई थी। उनके निधन से झारखंड ने एक ममतामयी मां और मार्गदर्शक को खो दिया है। इस दुःखद वेला में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की है।

42 पूर्व जजों ने लिखा खुला पत्र, वोट चोरी के आरोपों को लेकर दी चेतावनी

#42formerjudgeswriteopenletterinsupportofecandcecgyanesh_kumar

देश की राजनीति में इन दिनों ‘भूचाल’ आया हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टी के सांसद सड़कों पर हैं। विपक्षी सांसद मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन सबके बीच 42 पूर्व जजों ने बड़ा कदम उठाया है।पूर्व जजों ने एक खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी जारी की है।

42 रिटायर्ड जजों का खुला पत्र

42 रिटायर्ड जजों ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है। कड़े शब्दों वाले इस पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के लिए चल रहे अभियान पर गहरी चिंता ज़ाहिर की है। पूर्व जजों ने अपने पत्र में कहा है कि संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं।

पूर्व जजों ने दी चेतावनी

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व जजों ने बिना किसी सबूत के "वोट चोरी" के आरोपों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार चोर और मिलीभगत वाला बताने से लोकतंत्र में जनता का भरोसा कम हो सकता है। पत्र में लिखा है, "हम यह इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि ऐसे समय में चुप रहना अब कोई निष्पक्ष विकल्प नहीं है। हमारी चिंता गंभीर है। भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।"

पूर्व जजों ने कहा-सुनियोजित अभियान

पत्र के जरिए उन्होंने कहा, "भारत का चुनाव आयोग इस हमले के केंद्र में है। यहाँ तक कि उच्च न्यायपालिका, जिसका हम बहुत सम्मान करते हैं, और वैधानिक एजेंसियों को भी नहीं बख्शा गया है।" न्यायाधीशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये हमले सोच-समझकर की गई आलोचना नहीं हैं। उन्होंने लिखा, "यह राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित एक सुनियोजित अभियान लगता है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने के संभावित विनाशकारी परिणामों की कोई परवाह नहीं की गई है।"

एसआईआर का बचाव किया

पूर्व जजों ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) का बचाव किया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह एक कानूनी रूप से स्थापित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य साफ़-सुथरी और सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करना है। पूर्व जजों ने पत्र में चेतावनी दी है कि भरोसा ही लोकतंत्र की असली पूंजी है और चुनावों की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिशें अशांति फैला सकती हैं और अराजक तत्वों का हौसला बढ़ा सकती हैं।

PVUNL में हाइड्रोक्लोरिक एसिड केमिकल रिलीज को लेकर रासायनिक सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित

पतरातू, 8 अक्टूबर 2026: पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) द्वारा संयंत्र में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों, सुरक्षा प्रक्रियाओं एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन करने के उद्देश्य से रासायनिक सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित की गई।

मॉक ड्रिल के तहत DM प्लांट के हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) बल्क स्टोरेज/एसिड टैंक क्षेत्र में रासायनिक रिसाव (Chemical Release) की आपातकालीन स्थिति को प्रदर्शित किया गया। मॉक ड्रिल की शुरुआत 11:53 बजे हुई तथा निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया गतिविधियों को पूरा करते हुए इसे 12:25 बजे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान एक व्यक्ति के रासायनिक संपर्क में आने की स्थिति को भी प्रदर्शित किया गया। उसे तत्काल प्राथमिक उपचार एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता के लिए पतरातू अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

मॉक ड्रिल के दौरान CISF एवं PVUNL के कर्मचारियों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। संबंधित टीमों द्वारा आपातकालीन प्रतिक्रिया, सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता तथा समन्वय से जुड़ी प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया।

इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य रासायनिक आपात स्थिति की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, कर्मचारियों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करना था।

PVUNL प्रबंधन ने कहा कि संयंत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी मॉक ड्रिल के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का नियमित रूप से परीक्षण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाता है।

*सीएम हेमंत सोरेन की माता के निधन पर सियासी जगत में शोक की लहर, मंत्री-सांसद और पूर्व CM अर्जुन मुंडा समेत कई दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की माता एवं स्वर्गीय श्रीमती रूपी सोरेन के निधन पर आज मोरहाबादी स्थित आवास पर राज्य सरकार के मंत्री श्री चमरा लिंडा, मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, सांसद श्री विजय हांसदा,

सांसद श्री ढुल्लू महतो, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री श्री चम्पाई सोरेन, पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुदेश महतो, विधायकगण, पूर्व मंत्रीगण, प्रशासनिक अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय श्रीमती रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार एवं विकट दुःख को सहन करने की शक्ति और धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।_*