आमस में रविदास समरसता शिविर में नदारद रहे अधिकारी, खानापूर्ति कर लौटे कर्मचारी
आमस: संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर हर पंचायत में चलाए जा रहे "श्री गुरु संत रविदास समरसता संकल्प अभियान" और "श्री संत रविदास विकास शिविर" का आयोजन गुरुवार को आमस प्रखंड के झरी पंचायत के बलियारी स्कूल में किया गया। *शिविर का उद्देश्य* इस शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज में सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना तथा सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। शिविर के माध्यम से राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, भूमि पर्चा, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम कार्ड, आयुष्मान कार्ड और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी सुविधाओं के लिए मौके पर ही आवेदन लेना और समस्याओं का समाधान करना है।

*जमीनी हकीकत*

लेकिन आमस प्रखंड में शिविर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। चाहे मुख्यमंत्री का शिविर हो या संत रविदास विकास शिविर, बस कॉलम पूरा किया जा रहा है। गुरुवार को झरी पंचायत में लगे शिविर में विकास मित्र, पंचायत सचिव, पंचायत रोजगार सेवक और मुखिया के अलावा कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। गरीबों के उत्थान के लिए लगाया गया शिविर सिर्फ जातीय, आवासीय, आय, मृत्यु, जन्म प्रमाण पत्र और जॉब कार्ड वितरण कर समाप्त कर दिया गया।

*ग्रामीणों में नाराजगी*

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ नहीं मिल रहा। शिविर में आवास योजना, राशन कार्ड, भूमि पर्चा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निपटारा नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शिविरों की मॉनिटरिंग कराने और सभी विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है।


रिपोर्टर:- धनंजय कुमार यादव
दिन के उजाले में ही चल रहा कोयला का अवैध धंधे,प्रशासन मौन,अन्य वाहनों को लगाकर हो रहे अवैध धंधे से कई बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं
आमस:- आमस थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-19 अब अवैध कोयला कारोबार का अड्डा बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ दिन के उजाले में, पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। हमजापुर से लेकर ताराडीह तक, अकौना, मोलनाचक, सिमरी, बुधौल और बिशुनपुर में ट्रकों से धड़ल्ले से कोयला उतारा जा रहा है। रात के अंधेरे में शुरू होने वाला यह खेल दिन के उजाला में चल रहा है। *सस्ता खरीदो, महंगा बेचो का खेल:* सूत्रों की मानें तो कारोबारी अवैध तरीके से कम दाम में कोयला लाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। साथ ही सरिया (छड़) का अवैध धंधा भी जोरों पर है। *हाईवे पर हादसे का खतरा:* एनएच पर बेतरतीब खड़े ट्रकों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई लोगों की जान इस वजह से जा चुकी है। फिर भी प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। पुलिस गश्ती का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। कारोबारियों में कानून का जरा भी डर नहीं दिखता। अब देखना होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन नींद से जागता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है।


रिपोर्टर:- धनंजय कुमार यादव
*गांवों की बेटियां बन रहीं बदलाव की अगुवा, इमामगंज में भी खुलेगा i-Saksham का फेलोशिप कार्यक्रम*
*शेरघाटी (गयाजी):* गया जिले की ग्रामीण बेटियां अब शिक्षा और नेतृत्व के जरिए समाज में बदलाव की नई मिसाल बन रही हैं। शेरघाटी में सक्रिय संस्था i-Saksham के दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम से अब तक 300 से अधिक युवतियां "एडु-लीडर" बनकर अपने परिवार और समाज की सोच बदल रही हैं।

संस्था पिछले 5 वर्षों से गया जिले के चार प्रखंडों - आमस, ढोभी, बांके बाजार और शेरघाटी के सरकारी विद्यालयों, किशोरियों और अभिभावकों के साथ काम कर रही है।

*गांव की सीमा से समाज की अगुवाई तक* 
एक समय था जब इन गांवों की बेटियों को घर से बाहर निकलने की इजाजत भी नहीं मिलती थी। आज यही बेटियां पढ़ाई जारी रखने, नौकरी के लिए बाहर जाने और समाज के दकियानूसी सवालों का जवाब देने में आगे हैं। संस्था का मानना है कि असली बदलाव घर की चौखट से ही शुरू होता है।

*अब इमामगंज में भी शुरू होगी फेलोशिप* 
इसी सोच के साथ i-Saksham अब अपने फेलोशिप कार्यक्रम का विस्तार गया के इमामगंज प्रखंड में करने जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की और अधिक बेटियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाना है। *12 साल से 5 जिलों में सक्रिय* 
गौरतलब है कि i-Saksham बिहार के 5 जिलों - बेगूसराय, गया, जमुई, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में पिछले 12 वर्षों से काम कर रही है। संस्था के फेलोशिप कार्यक्रम से अब तक 1200 से अधिक एडु-लीडर जुड़ चुकी हैं, जो न सिर्फ सामाजिक बदलाव ला रही हैं बल्कि अपने सपनों को भी साकार कर रही हैं।


रिपोर्टर:- धनंजय कुमार यादव