उत्तर प्रदेश में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों को नया स्वरूप दिया गया : योगी आदित्यनाथ
-मुख्यमंत्री ने काशी से 09वें 'राष्ट्रीय पोषण माह' का किया शुभारंभ

—आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया सीधा संवाद

लखनऊ, वाराणसी । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नौवें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों से सीधा संवाद किया और पोषण अभियान में उनके योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री संध्या को पहचान लिया। संध्या ने बताया कि मुख्यमंत्री गोरखपुर के उनके गांव बसियापुर में आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए हामी भरी। इस आत्मीय संवाद से कार्यक्रम में मौजूद लोगों के चेहरे पर भी मुस्कान देखने को मिली। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने वर्ष 2017 के पहले आंगनबाड़ी केंद्र देखा होगा, ज्यादातर में गंदगी थी। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र में व्यवस्था नहीं थी। समय पर कोई रेसिपी नहीं उपलब्ध होती थी। 2017 में जब हम आये तो पता लगा कि उत्तर प्रदेश का एक शराब माफिया यह रेसिपी सप्लाई करता था। हमने उसके क्वॉलिटी की जांच के आदेश दिए। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे अपना टाट लेकर जाते थे। केन्द्रों में न पेयजल था, न टॉयलेट, न ही कोई हॉट कुक फूड। गलती करता था कोई और गाली पड़ती थी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री को। लखनऊ में बैठकर गलती वो लोग करते थे। आपके हिस्से आती थी गाली। मानदेय भी नहीं मिलता था।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की बात करें तो मैं जब जिलों के भ्रमण करने जाता हूँ तो अक्सर आंगनबाड़ी और बाल वाटिका देखने भी जाता हूँ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के भविष्य की नींव को सशक्त बनाने के लिए जो 2014 में कदम बढ़ाए थे, वो जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो ये मॉडल 2001 से अपनाया था। हमने पिछले साढ़े नाै वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया है।

उन्हाेंने कहा कि प्रदेश में पहली बार हुआ है जब आंगनवाड़ी केंद्र के निर्माण में 30 लाख खर्च करके उनको मॉडल बनाया गया है। आज जो पोषाहार वितरित हो रहा है वो हॉट मील के साथ टीएचआर प्लांट से ही सप्लाई दी जा रही है। बच्चों के लिए टॉयलेट, पीने का पानी तथा बाल वाटिका संचालित है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष इस अभियान में पांच विषयों को शामिल किया गया है, जिसमें आहार विविधता एवं प्रोटीन युक्त भोजन, केंद्रों पर ताजा गर्म पका हुआ भोजन, सामुदायिक स्वामित्व एवं भागीदारी, पोषण एवं प्रारंभिक विकास तथा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना अभियान प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्रों के माध्यम से पांच करोड़ माताओं को 2100 करोड़ से ज्यादे की धनराशि मुहैया कराई गई है। प्रदेश मे एक लाख नब्बे हजार केंद्र स्वीकृत हैं। 40 वर्ष पुराने 2100 विद्यालयों के भवनों को राशि मुहैया कराई गई है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आंगनवाड़ी बहनें पोषण माह के कार्यक्रम को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि 2017 के पहले तीन हजार मासिक को आज चार गुना बढ़ाकर 12 हजार रुपये करते हुए उनको पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा भी मुहैया कराया गया है।

मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि काशी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने विजन से नए कलेवर के रूप में पहचान दी है। आज काशी, नई आभा नई काया के साथ दुनिया को आकर्षित कर रही है। हमें आज़ादी के 100 वर्ष पूर्ण होंने पर हमें कैसा भारत चाहिए ! आत्मनिर्भर और विकसित भारत, लेकिन यह आत्मनिर्भर, विकसित भारत दिल्ली में बनाने से नही होगी। यह आत्मनिर्भर, विकसित भारत गांव और गलियों से होकर निकलेगी। यहां से प्रारंभ होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल इसके प्रारंभिक केंद्र बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की थीम ‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ को जनभागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि आंगनबाड़ी की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के साथ ग्राम पंचायत, परिवार और पूरा समुदाय अपनी जिम्मेदारी समझे, तभी इसका वास्तविक असर दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का बचपन स्वस्थ, सक्षम और शिक्षित होगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने टेक होम राशन (टीएचआर) से बच्चों को मिलने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी ली। योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में गुजरात और ओडिशा से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों से भी संवाद किया। उन्होंने आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों और कुपोषित बच्चों के जीवन में आए बदलावों के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम को केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश की महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने भी संबोधित किया।
मऊ -: जन्मदिन पर मऊ कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने वृद्धाश्रम में बांटी खुशियां

मऊ कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने अपने जन्मदिन के अवसर पर  स्थित वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ केक काटकर समय बिताया और उन्हें फल, ब्रेड, दूध सहित अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की।

इस अवसर पर राजमंगल यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सेवा, त्याग, सद्भावना और सामाजिक न्याय की विचारधारा को लेकर आगे बढ़ती रही है। समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों के साथ खड़ा होना कांग्रेस की राजनीतिक सोच के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने कहा कि जन्मदिन जैसे अवसरों पर व्यक्तिगत खुशी मनाने के बजाय जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उनके साथ खुशियां साझा करना अधिक संतोष देता है। बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान और सेवा करना हम सभी का कर्तव्य है।

राजमंगल यादव ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा रहना और समाज में भाईचारा एवं आपसी सद्भाव को मजबूत करना है। कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्गों ने राजमंगल यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया। इस दौरान माहौल भावुक और आत्मीय रहा।

इस अवसर पर ओमप्रकाश ठाकुर, वीरेंद्र तीवारी, मनोज गिहार, हफीजुर्रहमान अंसारी, शाहिद फारूकी, आकाश गिहार अनिल कुमार सोनू यादव प्रधान साधू यादव एवं आकाश सैनी उपस्थित रहे।
एक व्यक्ति, दो नाम और दो पिता! डीएम के दरबार में पहुंची शिकायत ने खोली प्रशासनिक तंत्र की पाेल
गोरखपुर। जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बुधवार को फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान पिपराइच क्षेत्र से पहुंची एक महिला की शिकायत ने प्रशासनिक स्तर पर पहले से चल रहे एक गंभीर मामले को फिर चर्चा में ला दिया। महिला ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति अलग-अलग स्थानों पर अपनी सुविधा के अनुसार अलग नाम और पिता के नाम का इस्तेमाल कर रहा है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा गोरखपुर में एक नाम और दूसरे प्रदेश में दूसरे नाम से नौकरी करने का मामला सामने आया है। मामले में मंडलायुक्त के निर्देश पर मुकदमा दर्ज होने और चार्जशीट दाखिल किए जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर संबंधित ग्राम सचिव और अन्य अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

फरियादी ने जिलाधिकारी को बताया कि कथित रूप से एक ही व्यक्ति अलग-अलग दस्तावेजों और स्थानों पर अलग पहचान का इस्तेमाल कर रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले की जानकारी प्रशासन के संज्ञान में पहले ही आ चुकी है और मंडलायुक्त स्तर से कार्रवाई के निर्देश के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है। पुलिस विवेचना के बाद मामले में चार्जशीट दाखिल किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कार्रवाई के बावजूद राजस्व एवं ग्राम स्तर के अभिलेखों में कथित रूप से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। फरियादी ने आरोप लगाया कि संबंधित गांव का सचिव कथित व्यक्ति के पक्ष में अभिलेखीय प्रक्रिया को प्रभावित करने अथवा मामले को उलझाए रखने का प्रयास कर रहा है। महिला ने सवाल उठाया कि यदि एक व्यक्ति की पहचान को लेकर इतना गंभीर विवाद प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है और मुकदमा दर्ज होकर चार्जशीट तक दाखिल हो चुकी है, तो फिर स्थानीय स्तर पर उसके पक्ष में कार्रवाई अथवा सहयोग किस आधार पर किया जा रहा है।

शिकायत सुनते समय जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने यह भी देखा कि यदि फरियादी इससे पहले भी शिकायत कर चुकी है तो उसके पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर क्या कार्रवाई हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से जानकारी प्राप्त की कि अब तक शिकायत का निस्तारण क्यों नहीं हुआ और किन कारणों से मामला लंबित रहा।

डीएम ने संबंधित अधिकारियों को फोन कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि फरियादी की शिकायत पर केवल कागजी निस्तारण न किया जाए, बल्कि पूरे मामले की वास्तविकता की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। पुराने प्रार्थना पत्रों पर की गई कार्रवाई, संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और वर्तमान स्थिति की भी जानकारी प्राप्त की जाए।

शिकायत में ग्राम सचिव की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। आखिर वह कौन से कारण हैं जिनकी वजह से कथित रूप से विवादित पहचान वाले व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर सहयोग मिल रहा है? क्या ग्राम स्तर पर तैयार किए गए अभिलेख सही तथ्यों के आधार पर हैं या उनमें किसी प्रकार का बदलाव किया गया है? यदि रिकॉर्ड में विसंगति है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है।

महिला का आरोप है कि कथित व्यक्ति गोरखपुर में एक नाम और गैर प्रदेश में दूसरे नाम से नौकरी कर रहा है। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल ग्राम स्तर के अभिलेखों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहचान, दस्तावेजों और नौकरी से संबंधित तथ्यों की भी जांच का विषय बन सकता है। यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित ग्राम सचिव के साथ निचले स्तर के कुछ अधिकारी भी कथित व्यक्ति की मदद कर रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर यह जांच का विषय है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी ने नियमों के विपरीत किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है तो उसकी भूमिका क्या है।

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला मंडलायुक्त स्तर तक पहुंचा, मुकदमा दर्ज हुआ और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है, तब स्थानीय स्तर पर शिकायत के समाधान में देरी क्यों हुई? जिलाधिकारी द्वारा पुराने प्रार्थना पत्रों की स्थिति और कार्रवाई का विवरण मांगे जाने के बाद संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है।

डीएम के जनता दर्शन में इस तरह की शिकायतों को प्राथमिकता से सुनना प्रशासन की कार्यप्रणाली में जवाबदेही का संकेत माना जा रहा है। खास तौर पर दोबारा शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के मामलों में जिलाधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई। इससे केवल शिकायतकर्ता को जवाब मिलने की उम्मीद नहीं है, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा हो रही है।

पिपराइच क्षेत्र के इस मामले में अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। एक व्यक्ति की कथित दो पहचान, अलग-अलग पिता के नाम का इस्तेमाल, मुकदमा और चार्जशीट के बाद भी स्थानीय स्तर पर विवाद का बने रहना तथा ग्राम सचिव और अन्य अधिकारियों पर लगाए गए सहयोग के आरोप ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया है। यदि जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन जिलाधिकारी द्वारा मामले में पुराने प्रार्थना पत्रों की कार्रवाई, देरी के कारण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जानकारी मांगे जाने से साफ है कि प्रकरण को अब केवल एक सामान्य शिकायत मानकर टालने के बजाय रिकॉर्ड और जिम्मेदारी के स्तर पर जांचने की कवायद शुरू हो गई है।
मऊ -: दलित उत्पीड़न मामले में कार्रवाई न होने से भाकपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश
19 सितंबर को एसडीएम कार्यालय के सामने धरना देने का निर्णय, जनसंपर्क के लिए जत्थों का गठन

मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ) : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी रानीपुर एवं मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक कमेटी की संयुक्त बैठक करजौली मोड़, खुरहट में हुई। बैठक में तहसील क्षेत्र के बाड़ागांव निवासी बद्देराम से जुड़े दलित उत्पीड़न मामले में प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आक्रोश जताया गया। कार्यकर्ताओं ने आगामी 19 सितंबर को उपजिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रस्तावित धरने को सफल बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के जिला मंत्री राम अवतार सिंह ने कहा कि दलित उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले में प्रशासन की सुस्ती से पीड़ित और गरीब तबके के लोगों में निराशा एवं आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि शोषित और वंचित लोगों के अधिकारों के लिए पार्टी संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रतिरोध और संघर्ष के लिए तैयार रहें तथा धरने को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान तेज करें। बैठक में व्यापक जनसंपर्क के लिए विभिन्न जत्थों का गठन भी किया गया। बैठक की अध्यक्षता कामरेड रामजीत चौहान एवं जयप्रकाश चौहान ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान कामरेड रमकुमार भारती, रामसोच यादव, अनीस अहमद अंसारी, सुभाष चंद्र राम, सुभाष चक्रदेवा, पतिराम, रामचंद्र राम, जगजीवन राम, फूलचंद समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
15 अक्टूबर तक पूरे हों सांसद निधि के अधूरे काम
मीरजापुर। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलेड्स) के तहत वर्ष 2023-24 और 2024-25 में स्वीकृत अधूरे कार्यों को हर हाल में 15 अक्टूबर तक पूरा कराकर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। यह निर्देश बुधवार को मंडलायुक्त राजेश प्रकाश ने मंडलायुक्त सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कार्यदायी संस्थाओं को दिए।

बैठक में मीरजापुर, सोनभद्र और भदोही में योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मंडलायुक्त ने कहा कि सांसदों से प्रस्ताव मिलने के 45 दिन के भीतर कार्य स्वीकृत, स्वीकृति के तीन माह के अंदर काम शुरू और एक वर्ष में कार्य पूरा होना चाहिए।

मीरजापुर में वर्ष 2023-24 के तीन और 2024-25 के दो कार्य अधूरे मिले। लालगंज स्थित बाबू उपरौध इंटर कॉलेज में छात्राओं के लिए शौचालय निर्माण लंबे समय से अधूरा रहने और धनराशि अवमुक्त न होने पर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई। सोनभद्र में चार विद्यालयों में स्वीकृत शिक्षण कक्षों का निर्माण लंबित पाया गया। भदोही में 2025-26 के 13 और 2026-27 के एक इंटरलॉकिंग कार्य पर समय बीतने के बाद भी काम शुरू न होने तथा प्रथम किस्त जारी नहीं होने पर भी नाराजगी व्यक्त की गई।

मंडलायुक्त ने मुख्य विकास अधिकारियों को निर्माण संस्थाओं के साथ साप्ताहिक समीक्षा करने और सभी लंबित कार्य समय से पूरा कराने के निर्देश दिए। बैठक में संबंधित जिलाधिकारियों, सीडीओ, परियोजना निदेशकों और सांसद प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जौनपुर में एमडीएमए बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़,अधिवक्ता समेत चार तस्कर गिरफ्तार
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में केराकत पुलिस और स्वाट टीम ने बुधवार को मेथिलीनडाइऑक्सी मेथामफेटामाइन (एमडीएमए), बनाने और बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की एमडीएमए मादक पदार्थ बनाने के उपकरण, 9,500 रुपये नकद और दो चार पहिया वाहन बरामद किया है।

अपर पुलिस अधीक्षक (देहात) आतिश कुमार सिंह ने बुधवार खुलासा करते हुए बताया कि 8 सितंबर को सूचना मिली थी कि केराकत थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित ग्रांड वेलकम रेस्टोरेंट/एंड होटल में कुछ लोग एमडीएमए तैयार कर रहे हैं। सूचना पर केराकत पुलिस और स्वाट टीम ने छापेमारी की। मौके से चार आरोपितों को माल तैयार करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपितों के कब्जे से करीब 317 ग्राम तैयार एमडीएमए तथा 660 ग्राम अर्धनिर्मित एमडीएमए बरामद हुई। इसके अलावा मादक पदार्थ बनाने में इस्तेमाल सामग्री भी बरामद हुई है। गिरफ्तार आरोपितों में सैदनपुर निवासी अधिवक्ता शशांक मौर्य, सुनील कुमार सोनकर, राहुल सोनकर और शिवशंकर शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क मीरजापुर, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात तक फैला हुआ है। वर्ष 2025 में बरसठी थाना क्षेत्र में पकड़े गए ऐसे ही मामले में एक केमिकल इंजीनियर भी गिरफ्तार हुआ था, जिससे इन आरोपितों से संपर्क की बात सामने आई है। वह वर्तमान में नोएडा जेल में बंद है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपित एमडीएमए लिए कच्चा माल कहां से लाते थे, इसे कैसे तैयार करते थे और किन-किन स्थानों पर इसकी आपूर्ति करते थे। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
राहुल ने फ़ोटो दिखाकर पूछा,सड़कों की यह हालत क्यों?
- मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा तेज़ी से विकास की ओर अग्रसर है रायबरेली

रायबरेली। सांसद राहुल गांधी ने जिला निगरानी एवं अनुश्रवण समिति(दिशा) की बैठक के दौरान ज़िले की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया,उन्होंने मोबाइल में सड़कों की बदहाल फ़ोटो दिखाते हुए कहा कि सरकार जब पैसा देती है तो ये हालत क्यों है।क़रीब ढाई घंटे तक चली बैठक में विधायकों ने भी विकास से जुड़े मामलों को उठाया। बैठक के बाद विपक्षी विधायकों ने कहा कि विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार हो रहा है जबकि मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा कि तेज़ी से रायबरेली विकास की ओर अग्रसर है। बैठक के बाद राहुल गांधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

बुधवार को कलेक्ट्रेट के बचत भवन में जिला निगरानी समिति(दिशा) की बैठक राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई,बैठक में राहुल गांधी ने ज़िले की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब सरकार फंड देती है तो यह हालत क्यों है। उन्होंने पिछली बैठकों के निर्णयों पर भी सवाल उठाते हुए अधिकारियों से तत्काल कार्यवाही करने को कहा। राहुल ने कहा कि ग्रामीण सड़कों की हालत बहुत ख़राब है। अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस व्यवस्था को सुधारें। इस दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा कि पहले की तुलना में विकास तेज़ी से हो रहा है। पांच साल में 16 हज़ार सड़कें बनाई गईं है।पहले 20 प्रतिशत राशन मिलता था अब जिलें में सभी को राशन मिलता है। सपा विधायक राहुल लोधी ने कहा कि सरकार कहती है कि 24 हजार करोड़ सड़कों के लिए दिए गए हैं लेकिन वह गए कहां। उन्होंने सड़कों में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। प्रदेश के राज्य मंत्री(स्वतन्त्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने मीडिया से कहा कि राहुल गांधी रायबरेली में केवल पिकनिक मनाने आते हैं,इनका जनता से कोई लेना देना नहीं है। दिशा की बैठक के बाद राहुल गांधी सड़क मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना हो गए,जहां से उनके दिल्ली जाने का कार्यक्रम है।

दिशा की बैठक में अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा, कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडे, राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी, सलोन विधायक अशोक कुमार, बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती व सरेनी के विधायक देवेंद्र सिंह शामिल रहे,जबकि रायबरेली की विधायक अदिति सिंह की बैठक में गैर मौजूदगी चर्चा में रही। इस अवसर पर जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका, पुलिस अधीक्षक रवि सिंह,मुख्य विकास अधिकारी परियोजना निदेशक मुनीश चंद्र सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लें तभी आकाश को मिलेगी जिम्मेदारी: मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भतीजे आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि आकाश आनंद को तभी जिम्मेदारी मिलेगी, जब उनके ससुर राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीएसपी का शीर्ष नेतृत्व भूले-भटके हुये लोगों को उनके अचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल कर रहा है। जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बन रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसका उदाहरण राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौका दिया, लेकिन बसपा के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ व महत्वकांक्षा आदि को ज्यादा महत्व दिया, जिसका खामियाजा उनके दामाद आकाश आनन्द को भी भुगतना पड़ा है।

बसपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि कुल मिलाकर इन्होंने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनन्द और बसपा के मूवमेन्ट की भी कभी सही से परवाह नहीं की है जबकि अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व सामाज के सामने देनी चाहिये थी, लेकिन ऐसा ना होकर ठीक इसके उलटा ही होता रहा है।

मायावती ने कहा कि बसपा मूवमेन्ट के हित और दामाद आकाश आनन्द के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में आकाश आनन्द का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा। तभी पार्टी उनको उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम लोगों की राय है।
आंगनबाड़ी बहनें बच्चों के पोषण का ध्यान रख विकसित भारत की नींव रखें : बेबी रानी मौर्य
- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी बोलीं, योगी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को बनाया विकास की आधारशिला

- देश के 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प को बढ़ा रहे आगे

वाराणसी। नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है। आंगनबाड़ी बहनों पर बच्चों के पोषण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास का ध्यान रखकर विकसित भारत की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही हैं।
बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य की चिंता जैसे आयामों को धरातल पर उतारा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पोषण माह अभियान कुपोषण से मुक्ति के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। आज पोषण का यह संकल्प जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां जब जनता के जीवन से जुड़ती हैं तो वे संस्कृति का हिस्सा बन जाती हैं।
उन्होंने कहा कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को विकास की आधारशिला बनाया है। एक समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को नमन करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में पोषण अभियान के अंतर्गत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य कर रही है।

- विभिन्न प्रदेशों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। गांधीनगर, गुजरात से आईं भावना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अब काफी बेहतर हुई है। लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे अपने बच्चों को केंद्रों पर भेज रहे हैं। गर्भवती महिलाएं पोषाहार को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं। बच्चों के जन्म के बाद भी अभिभावक उनके खानपान को लेकर मार्गदर्शन लेते हैं। कई बच्चे घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन केंद्र पर उनकी जरूरत को समझकर भोजन दिया गया तो वे चाव से खाने लगे।
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों का बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुशी होती है कि उनके प्रयास से देश का भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।
गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की संध्या सिंह ने बताया कि बच्चों का समय-समय पर वजन और लंबाई मापी जाती है। इससे उनके पोषण की स्थिति का पता चलता है। कुपोषण की ओर बढ़ रहे बच्चों की विशेष निगरानी की जाती है और उनके अभिभावकों से मिलकर खानपान एवं देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है।
2017 से पहले शराब माफिया करता था बच्चों के पोषाहार की सप्लाई : सीएम योगी
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौवें राष्ट्रीय पोषण माह का किया शुभारंभ

- साढ़े नौ वर्ष में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को मिला नया स्वरूप, एक केंद्र पर 30 लाख रुपये तक खर्च

- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये, पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा भी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर पूर्ववर्ती सरकारों पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जाने वाले पोषाहार की सप्लाई एक शराब माफिया करता था। हालात यह थे कि तीन-तीन महीने तक पोषाहार केंद्रों तक नहीं पहुंचता था। बच्चे अपना टाट लेकर आते थे। न पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय, न गर्म भोजन। गलती लखनऊ में बैठे लोग करते थे और गाली आंगनबाड़ी बहनों को खानी पड़ती थी।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की तो पूरा तंत्र बदहाल मिला। पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल थे और वितरण की कोई नियमित व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव शुरू किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है। मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण और नवीनीकरण पर 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। चहारदीवारी, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में इस समय 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से हर महीने 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। 35.46 लाख बच्चों को हॉट कुक्ड मील दिया जा रहा है, जबकि 46 लाख बच्चों के वजन और स्टंटिंग की नियमित निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि टेक होम राशन की व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाया गया है। प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें महिला स्वयं सहायता समूह संचालित कर रहे हैं। 20 लाख से अधिक महिलाएं इससे जुड़ी हैं। पोषाहार की गुणवत्ता की जांच भारत सरकार की संस्था से कराई जा रही है। परिवहन से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक जीपीएस ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है और प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि 2017 से पहले उन्हें मात्र तीन हजार रुपये और सहायिकाओं को मात्र 1500 रुपये मानदेय मिलता था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय अब बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है। पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी उन्हें और उनके परिवार को दिया जा रहा है। अब तक 1.56 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए जा चुके हैं और शेष कार्यकर्ताओं को भी स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाएंगे। इनके माध्यम से केंद्र की गतिविधियों का रियल टाइम डाटा अपलोड किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस बार पोषण माह पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है। बच्चों के लिए विविध और पर्याप्त प्रोटीन वाला पोषक आहार, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा गर्म भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती और धात्री माताओं को आर्थिक सहायता इसके प्रमुख आधार हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बच्चे को केवल भोजन देना पर्याप्त नहीं है। भोजन संतुलित, पौष्टिक और स्वादिष्ट भी होना चाहिए। मूंग की दाल की खिचड़ी में गाजर और दूसरी सब्जियां मिलें तो स्वाद, रंग और पोषण तीनों बढ़ते हैं। बच्चा खुशी से खाएगा तभी पोषण अभियान सफल होगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर के एक आंगनबाड़ी केंद्र का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह बिना सूचना वहां पहुंचे थे। करीब 20-22 बच्चे खेल-खेल में अंक और शरीर के अंग सीख रहे थे। तीन वर्ष की एक बच्ची ने उन्हें बताया, ‘एक-एक-एक, मेरी नाक एक।’ दूसरे बच्चे ने ‘दो-दो-दो, मेरी आंख दो’ कहा। योगी ने कहा कि इससे साफ है कि आंगनबाड़ी केंद्र पोषण के साथ शिक्षा की भी मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के पहले एक हजार दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ बच्चे से सक्षम विद्यार्थी और सक्षम विद्यार्थी से कुशल युवा तैयार होता है। यही युवा आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव रखेगा। इसीलिए इस वर्ष की थीम ‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने बेसिक शिक्षा में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से पहले 75 से 80 प्रतिशत बेटियां नंगे पैर विद्यालय जाती थीं। आज 1.60 करोड़ बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर दिए जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर बनाया गया है। बालवाटिका के बच्चों को भी दो यूनिफॉर्म देने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से काशी ने अपनी पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए नया कलेवर पाया है और आज नई आभा के साथ दुनिया को आकर्षित कर रही है। इसी तरह गांव और गलियों से पोषण, शिक्षा और कौशल की मजबूत नींव रखकर आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण होगा।
- बच्चों को कराया अन्नप्राशन, पोषाहार स्टालों का किया निरीक्षण
अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोटे बच्चों को दुलारा और उन्हें खिलौने, टॉफी व चॉकलेट दी। उन्होंने बच्चों को गोद में लेकर अन्नप्राशन कराया और माला पहनाई। इसके बाद विभिन्न राज्यों से आए पोषाहार से संबंधित स्टालों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने खाद्य सामग्री, हाथ से बने खिलौनों, जड़ी-बूटियों और पौधों के बारे में जानकारी ली। बिहार के स्टाल पर मौजूद महिलाओं ने मुख्यमंत्री को मोमेंटो भेंट किया।