राहुल ने फ़ोटो दिखाकर पूछा,सड़कों की यह हालत क्यों?
- मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा तेज़ी से विकास की ओर अग्रसर है रायबरेली

रायबरेली। सांसद राहुल गांधी ने जिला निगरानी एवं अनुश्रवण समिति(दिशा) की बैठक के दौरान ज़िले की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया,उन्होंने मोबाइल में सड़कों की बदहाल फ़ोटो दिखाते हुए कहा कि सरकार जब पैसा देती है तो ये हालत क्यों है।क़रीब ढाई घंटे तक चली बैठक में विधायकों ने भी विकास से जुड़े मामलों को उठाया। बैठक के बाद विपक्षी विधायकों ने कहा कि विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार हो रहा है जबकि मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा कि तेज़ी से रायबरेली विकास की ओर अग्रसर है। बैठक के बाद राहुल गांधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

बुधवार को कलेक्ट्रेट के बचत भवन में जिला निगरानी समिति(दिशा) की बैठक राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई,बैठक में राहुल गांधी ने ज़िले की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब सरकार फंड देती है तो यह हालत क्यों है। उन्होंने पिछली बैठकों के निर्णयों पर भी सवाल उठाते हुए अधिकारियों से तत्काल कार्यवाही करने को कहा। राहुल ने कहा कि ग्रामीण सड़कों की हालत बहुत ख़राब है। अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस व्यवस्था को सुधारें। इस दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मनोज़ पांडे ने कहा कि पहले की तुलना में विकास तेज़ी से हो रहा है। पांच साल में 16 हज़ार सड़कें बनाई गईं है।पहले 20 प्रतिशत राशन मिलता था अब जिलें में सभी को राशन मिलता है। सपा विधायक राहुल लोधी ने कहा कि सरकार कहती है कि 24 हजार करोड़ सड़कों के लिए दिए गए हैं लेकिन वह गए कहां। उन्होंने सड़कों में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। प्रदेश के राज्य मंत्री(स्वतन्त्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने मीडिया से कहा कि राहुल गांधी रायबरेली में केवल पिकनिक मनाने आते हैं,इनका जनता से कोई लेना देना नहीं है। दिशा की बैठक के बाद राहुल गांधी सड़क मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना हो गए,जहां से उनके दिल्ली जाने का कार्यक्रम है।

दिशा की बैठक में अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा, कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडे, राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी, सलोन विधायक अशोक कुमार, बछरावां विधायक श्याम सुंदर भारती व सरेनी के विधायक देवेंद्र सिंह शामिल रहे,जबकि रायबरेली की विधायक अदिति सिंह की बैठक में गैर मौजूदगी चर्चा में रही। इस अवसर पर जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका, पुलिस अधीक्षक रवि सिंह,मुख्य विकास अधिकारी परियोजना निदेशक मुनीश चंद्र सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लें तभी आकाश को मिलेगी जिम्मेदारी: मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भतीजे आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि आकाश आनंद को तभी जिम्मेदारी मिलेगी, जब उनके ससुर राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीएसपी का शीर्ष नेतृत्व भूले-भटके हुये लोगों को उनके अचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल कर रहा है। जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बन रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसका उदाहरण राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौका दिया, लेकिन बसपा के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ व महत्वकांक्षा आदि को ज्यादा महत्व दिया, जिसका खामियाजा उनके दामाद आकाश आनन्द को भी भुगतना पड़ा है।

बसपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि कुल मिलाकर इन्होंने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनन्द और बसपा के मूवमेन्ट की भी कभी सही से परवाह नहीं की है जबकि अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व सामाज के सामने देनी चाहिये थी, लेकिन ऐसा ना होकर ठीक इसके उलटा ही होता रहा है।

मायावती ने कहा कि बसपा मूवमेन्ट के हित और दामाद आकाश आनन्द के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में आकाश आनन्द का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा। तभी पार्टी उनको उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम लोगों की राय है।
आंगनबाड़ी बहनें बच्चों के पोषण का ध्यान रख विकसित भारत की नींव रखें : बेबी रानी मौर्य
- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी बोलीं, योगी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को बनाया विकास की आधारशिला

- देश के 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प को बढ़ा रहे आगे

वाराणसी। नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है। आंगनबाड़ी बहनों पर बच्चों के पोषण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास का ध्यान रखकर विकसित भारत की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही हैं।
बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य की चिंता जैसे आयामों को धरातल पर उतारा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पोषण माह अभियान कुपोषण से मुक्ति के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। आज पोषण का यह संकल्प जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां जब जनता के जीवन से जुड़ती हैं तो वे संस्कृति का हिस्सा बन जाती हैं।
उन्होंने कहा कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को विकास की आधारशिला बनाया है। एक समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को नमन करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में पोषण अभियान के अंतर्गत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य कर रही है।

- विभिन्न प्रदेशों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। गांधीनगर, गुजरात से आईं भावना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अब काफी बेहतर हुई है। लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे अपने बच्चों को केंद्रों पर भेज रहे हैं। गर्भवती महिलाएं पोषाहार को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं। बच्चों के जन्म के बाद भी अभिभावक उनके खानपान को लेकर मार्गदर्शन लेते हैं। कई बच्चे घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन केंद्र पर उनकी जरूरत को समझकर भोजन दिया गया तो वे चाव से खाने लगे।
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों का बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुशी होती है कि उनके प्रयास से देश का भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।
गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की संध्या सिंह ने बताया कि बच्चों का समय-समय पर वजन और लंबाई मापी जाती है। इससे उनके पोषण की स्थिति का पता चलता है। कुपोषण की ओर बढ़ रहे बच्चों की विशेष निगरानी की जाती है और उनके अभिभावकों से मिलकर खानपान एवं देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है।
2017 से पहले शराब माफिया करता था बच्चों के पोषाहार की सप्लाई : सीएम योगी
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौवें राष्ट्रीय पोषण माह का किया शुभारंभ

- साढ़े नौ वर्ष में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को मिला नया स्वरूप, एक केंद्र पर 30 लाख रुपये तक खर्च

- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये, पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा भी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर पूर्ववर्ती सरकारों पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जाने वाले पोषाहार की सप्लाई एक शराब माफिया करता था। हालात यह थे कि तीन-तीन महीने तक पोषाहार केंद्रों तक नहीं पहुंचता था। बच्चे अपना टाट लेकर आते थे। न पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय, न गर्म भोजन। गलती लखनऊ में बैठे लोग करते थे और गाली आंगनबाड़ी बहनों को खानी पड़ती थी।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की तो पूरा तंत्र बदहाल मिला। पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल थे और वितरण की कोई नियमित व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव शुरू किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है। मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण और नवीनीकरण पर 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। चहारदीवारी, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में इस समय 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से हर महीने 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। 35.46 लाख बच्चों को हॉट कुक्ड मील दिया जा रहा है, जबकि 46 लाख बच्चों के वजन और स्टंटिंग की नियमित निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि टेक होम राशन की व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाया गया है। प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें महिला स्वयं सहायता समूह संचालित कर रहे हैं। 20 लाख से अधिक महिलाएं इससे जुड़ी हैं। पोषाहार की गुणवत्ता की जांच भारत सरकार की संस्था से कराई जा रही है। परिवहन से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक जीपीएस ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है और प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि 2017 से पहले उन्हें मात्र तीन हजार रुपये और सहायिकाओं को मात्र 1500 रुपये मानदेय मिलता था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय अब बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है। पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी उन्हें और उनके परिवार को दिया जा रहा है। अब तक 1.56 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए जा चुके हैं और शेष कार्यकर्ताओं को भी स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाएंगे। इनके माध्यम से केंद्र की गतिविधियों का रियल टाइम डाटा अपलोड किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस बार पोषण माह पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है। बच्चों के लिए विविध और पर्याप्त प्रोटीन वाला पोषक आहार, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा गर्म भोजन, सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती और धात्री माताओं को आर्थिक सहायता इसके प्रमुख आधार हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बच्चे को केवल भोजन देना पर्याप्त नहीं है। भोजन संतुलित, पौष्टिक और स्वादिष्ट भी होना चाहिए। मूंग की दाल की खिचड़ी में गाजर और दूसरी सब्जियां मिलें तो स्वाद, रंग और पोषण तीनों बढ़ते हैं। बच्चा खुशी से खाएगा तभी पोषण अभियान सफल होगा।
मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर के एक आंगनबाड़ी केंद्र का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वह बिना सूचना वहां पहुंचे थे। करीब 20-22 बच्चे खेल-खेल में अंक और शरीर के अंग सीख रहे थे। तीन वर्ष की एक बच्ची ने उन्हें बताया, ‘एक-एक-एक, मेरी नाक एक।’ दूसरे बच्चे ने ‘दो-दो-दो, मेरी आंख दो’ कहा। योगी ने कहा कि इससे साफ है कि आंगनबाड़ी केंद्र पोषण के साथ शिक्षा की भी मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के पहले एक हजार दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ बच्चे से सक्षम विद्यार्थी और सक्षम विद्यार्थी से कुशल युवा तैयार होता है। यही युवा आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव रखेगा। इसीलिए इस वर्ष की थीम ‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने बेसिक शिक्षा में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से पहले 75 से 80 प्रतिशत बेटियां नंगे पैर विद्यालय जाती थीं। आज 1.60 करोड़ बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर दिए जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर बनाया गया है। बालवाटिका के बच्चों को भी दो यूनिफॉर्म देने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से काशी ने अपनी पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए नया कलेवर पाया है और आज नई आभा के साथ दुनिया को आकर्षित कर रही है। इसी तरह गांव और गलियों से पोषण, शिक्षा और कौशल की मजबूत नींव रखकर आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण होगा।
- बच्चों को कराया अन्नप्राशन, पोषाहार स्टालों का किया निरीक्षण
अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छोटे बच्चों को दुलारा और उन्हें खिलौने, टॉफी व चॉकलेट दी। उन्होंने बच्चों को गोद में लेकर अन्नप्राशन कराया और माला पहनाई। इसके बाद विभिन्न राज्यों से आए पोषाहार से संबंधित स्टालों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने खाद्य सामग्री, हाथ से बने खिलौनों, जड़ी-बूटियों और पौधों के बारे में जानकारी ली। बिहार के स्टाल पर मौजूद महिलाओं ने मुख्यमंत्री को मोमेंटो भेंट किया।
CM योगी का बड़ा एक्शन, 5 तहसीलदार निलंबित; 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

- राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर सीएम योगी की सख्ती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबित राजस्व वादों के निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व मामलों की समीक्षा के दौरान कार्य में लापरवाही और उदासीनता सामने आने पर पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राजस्व परिषद ने यह कार्रवाई की है। शासन स्तर पर लंबित राजस्व वादों की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। साफ किया गया है कि राजस्व वादों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की ओर से अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने तथा आम लोगों को समयबद्ध तरीके से न्याय उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है।

अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि राजस्व मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर उदासीनता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन का जोर लंबित वादों के त्वरित निस्तारण के साथ राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर है।

इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'काम में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस' नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पांच तहसीलदारों के निलंबन और 13 अधिकारियों को नोटिस जारी होने से राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति है।

  - ये 5 तहसीलदार हुए निलंबित

1. अमित यादव — तहसीलदार, सण्डीला, हरदोई

2. कृष्ण कुमार मिश्रा — तहसीलदार, देवरिया

3. सौरभ कुमार — तहसीलदार, जौनपुर

4. रंजन वर्मा — तहसीलदार, गाजीपुर

5. अलख शुक्ला — तहसीलदार, प्रतापगढ़

इन 13 अधिकारियों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस

1. चन्द्रशेखर वर्मा — तत्कालीन तहसीलदार, देवरिया; वर्तमान में तहसीलदार, गोरखपुर

2. गोपाल जी — तत्कालीन नायब तहसीलदार, देवरिया; वर्तमान में तहसीलदार, कुशीनगर

3. रंनिरंजन कश्यप — तहसीलदार, जौनपुर

4. राकेश कुमार — तत्कालीन तहसीलदार, जौनपुर; वर्तमान में तहसीलदार, बलरामपुर

5. कविता ठाकुर — तत्कालीन तहसीलदार, बाराबंकी; वर्तमान में तहसीलदार, गोण्डा

6. देवानन्द तिवारी — तत्कालीन तहसीलदार, सुल्तानपुर; वर्तमान में तहसीलदार, फिरोजाबाद

7. स्नेहिल वर्मा — तत्कालीन नायब तहसीलदार, अयोध्या; वर्तमान में तहसीलदार, लखनऊ

8. राहुल सिंह — तहसीलदार, अमेठी

9. अनिल कुमार — तहसीलदार, प्रतापगढ़

10. यजुवेन्द्र सिंह — नायब तहसीलदार, लखनऊ

11. सुखवीर सिंह — तहसीलदार, लखनऊ

12. रमाशंकर मिश्रा — नायब तहसीलदार, रायबरेली

13. शरद सिंह — तहसीलदार, लखनऊ

लखनऊ को जल्द मिलेगी गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क की सौगात

- एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने किया निरीक्षण, 15 अक्टूबर तक पार्क खोलने के दिये निर्देश

- आईजीपी में विकसित होगा अत्याधुनिक मीटिंग हॉल, नए कलेवर में नजर आएगा सैटर्न मैरिज हॉल

लखनऊ। लखनऊ को जल्द ही गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क की सौगात मिलेगी। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मंगलवार को पार्क का निरीक्षण करके 15 अक्टूबर तक सभी कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिये हैं, जिसके बाद यह पार्क नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा। यह पार्क शहर को हरियाली देने के साथ ही युवाओं को जैव-विविधता से रूबरू कराएगा।

 लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्र्रथमेश कुमार ने बताया कि गोमती नगर में दयाल पैराडाइज चौराहे के पास सहारा ग्रुप से वापस ली गयी ग्रीन बेल्ट की 25 एकड़ जमीन पर शहर का यह पहला बायो-डायवर्सिटी पार्क विकसित किया जा रहा है। लगभग 14 करोड़ रूपये की लागत से विकसित किये जा रहे इस पार्क में बटर प्लाई गार्डेन, इंसेक्ट पोलराइजेशन गार्डेन, नेचर ट्रेल, पाथ-वे, किड्स प्ले-एरिया, वॉटर बॉडी, वॉच टॉवर, बाउंड्रीवॉल, पार्किंग, इंट्री गेट, ऑफिस आदि निर्मित किया जा रहा है। इसके अलावा लोगों की सुविधा के लिए जगह-जगह गजीबो एवं बेंच स्थापित किये जाएंगे। 

- पक्षियों को आकर्षित करेगा पार्क

गोमती बायो-डाइवर्सिटी पार्क को देसी एवं प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक निवास के लिहाज से तैयार किया जा रहा है। गोमती नदी के बेसिन में पाये जाने वाले पौधों की विभिन्न प्रजातियां, जो वर्तमान में विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें एकत्रित करके पार्क में संरक्षित किया जा रहा है। यह पार्क ईको-टूरिज्म के साथ ही शैक्षिक दृष्टिकोण से भी अहम साबित होगा। उपाध्यक्ष ने बताया कि 15 अक्टूबर तक सभी कार्य पूर्ण कराकर पार्क खोलने के निर्देश दिये गये हैं। 

- आईजीपी को मिलेगा आधुनिक मीटिंग हॉल

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के अपग्रेडेशन कार्य के अंतर्गत अर्थ ब्लॉक में 150 लोगों की क्षमता का अत्याधुनिक मीटिंग हॉल विकसित किया जा रहा है। एलडीए उपाध्यक्ष ने स्थल निरीक्षण करके 30 सितम्बर तक मीटिंग हॉल तैयार करने के निर्देश दिये हैं। इसी तरह सैटर्न ब्लॉक में रेनोवेट किये जा रहे 600 लोगों की क्षमता के मैरिज हॉल को 25 अक्टूबर तक संचालित करने की टाइमलाइन निर्धारित की गयी है। इस क्रम में उपाध्यक्ष ने बजट होटल का निरीक्षण करके कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये हैं। 

- हिलटन होटल का निरीक्षण

विभूति खण्ड में होटल हिलटन गार्डेन में नया ब्लॉक निर्मित किया गया है। होटल प्रबंधन द्वारा पूर्णतः प्रमाण पत्र के लिए प्राधिकरण में आवेदन किया गया था। जिसके क्रम में उपाध्यक्ष ने मंगलवार को होटल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से पार्किंग, फायर एक्जिट, सेट बैक, एसटीपी आदि की जांच की। उपाध्यक्ष ने होटल प्रबंधन से एसटीपी के संचालन एवं अग्निशमन सम्बंधी एनओसी प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। निरीक्षण में मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार एवं मनोज सागर समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश में सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी, आवेदन हुए शुरू

- अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों एवं महिला महाविद्यालयों में होगी भर्ती, 19 व 20 नवंबर को परीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रदेश के अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों एवं महिला महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (Assistant Professor) के 1,936 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 04/2026 जारी कर दिया है। आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है।

आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) व्यवस्था लागू की है। अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य पद के लिए आवेदन करने से पहले OTR की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापित पदों के सापेक्ष निर्धारित अर्हता एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन करें। विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से व्यक्तिगत परामर्श उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। अभ्यर्थियों के लिए विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका आयोग की वेबसाइट https://upessc.up.gov.in/ पर उपलब्ध करा दी गई है। अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले विस्तृत विज्ञापन का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर लें और सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी करने के बाद ही आवेदन करें।

आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 रहेगी। सहायक आचार्य पदों के लिए लिखित परीक्षा 19 एवं 20 नवंबर 2026 को है। परीक्षा से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम, परीक्षा केंद्र एवं अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश आयोग की ओर से समय-समय पर अपनी वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे।

आयोग के अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन करने से पहले विज्ञापन में दी गई शैक्षिक योग्यता, विषयवार पदों, आयु सीमा, आरक्षण, आवेदन प्रक्रिया तथा अन्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन पूर्ण करें।

योगी सरकार की पहल से वैश्विक गारमेंट क्लस्टर्स की दिशा में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

- यूपी टेक्स-2026 के प्रथम दिन के तीसरे सत्र में असंगठित विनिर्माण को वैश्विक स्तर के परिधान उद्योग से जोड़ने पर मंथन

लखनऊ। योगी सरकार उत्तर प्रदेश के परिधान उद्योग को संगठित, प्रतिस्पर्धी और निर्यातोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में यू.पी. टेक्स-2026 के प्रथम दिन के तीसरे सत्र में “स्केल यूपी अपरैल: असंगठित विनिर्माण से वैश्विक स्तर के गारमेंट क्लस्टर्स तक” विषय पर केंद्रित पैनल चर्चा आयोजित की गई।

चर्चा में उत्तर प्रदेश के पऱिधान उद्योग को संगठित, प्रतिस्पर्धी एवं निर्यातोन्मुख विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक नीतिगत एवं औद्योगिक उपायों पर विचार किया गया। पैनलिस्टों ने आधुनिक विनिर्माण प्रणालियों, स्वचालन, डिजिटल उत्पादन नियोजन, गुणवत्ता मानकों, वैश्विक अनुपालन आवश्यकताओं तथा बड़े उद्योगों एवं एमएसएमई इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

सत्र की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, हथकरघा एवं वस्त्र, उत्तर प्रदेश सरकार अनिल कुमार सागर ने की। संचालन टीटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय जैन ने किया। पैनल में खादी एवं ग्रामोद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान, नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल, पेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जॉकी इंडिया) के हेड प्रोजेक्ट्स फनीश राव, फाइन लाइन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चेतन गौतम, अरविंद लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंकुर त्रिवेदी, रोजाना रूरल कॉमर्स के मुख्य रणनीति एवं लोक नीति अधिकारी तथा रोजाना फाउंडेशन के सीईओ कुमार प्रियदर्शी, स्वागत सेल्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षय जैन तथा कपूर एंटरप्राइजेज के निदेशक सौरभ कपूर ने सहभागिता की।

चर्चा में राज्य में एकीकृत गारमेंट क्लस्टर्स, निवेश आकर्षण और निर्यात संवर्धन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उपायों पर सुझाव दिए गए। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली विकसित करने को उत्तर प्रदेश के परिधान उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

यू.पी. टेक्स-2026 के इन तकनीकी सत्रों में सामने आए विचारों एवं सुझावों से उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी वस्त्र एवं परिधान विनिर्माण राज्यों में स्थापित करने की दिशा में स्पष्ट कार्ययोजना सामने आई। निवेश, औद्योगिक अवसंरचना, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी उन्नयन, निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन के माध्यम से प्रदेश को वैश्विक वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी से मिली ‘हनुमान अंश’ की टीम, गुरु गोरक्षनाथ के प्रसंग पर हुई चर्चा

- निर्देशक विशाल चतुर्वेदी बोले- नाथ संप्रदाय के संतों के साथ रहे थे नीब करोरी बाबा

- फिल्म में गुरु गोरक्षनाथ की पंक्तियों का लिया गया संदर्भ, मुख्यमंत्री योगी ने टीम का बढ़ाया उत्साह

- यूपी के शहरों में टैलेंट हंट कर स्थानीय और थिएटर कलाकारों को अवसर देगी फिल्म की टीम

लखनऊ। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्माता, निर्देशक और प्रमुख कलाकारों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की। टीम ने उन्हें फिल्म के कुछ खास अंश दिखाए। इनमें नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और गुरु गोरक्षनाथ की पंक्तियों से जुड़ा हिस्सा भी शामिल था। मुख्यमंत्री योगी ने फिल्म और टीम के प्रयासों की सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया।

करीब दो करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक एवं निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने मुलाकात के बाद बताया कि फिल्म में नीब करोरी बाबा के घर छोड़कर ईश्वर की खोज में निकलने की यात्रा को दिखाया गया है। बचपन में मां के निधन के बाद लक्ष्मी नारायण शर्मा, जो आगे चलकर नीब करोरी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए, घर से निकले तो उनका संपर्क नाथ संप्रदाय के संतों से हुआ। संन्यास लेने से पहले उन्होंने इन संतों के साथ समय बिताया था।

विशाल ने बताया कि नीब करोरी बाबा की इसी आध्यात्मिक यात्रा के कारण फिल्म में गुरु गोरक्षनाथ की लिखी पंक्तियों का संदर्भ लिया गया है। उनके अनुसार, नाथ संप्रदाय के संतों के साथ रहने के दौरान नीब करोरी बाबा की अंतर्यात्रा शुरू होने के संदर्भ मिलते हैं। उनके कुंडलिनी जागरण, अन्नपूर्णा समेत कई सिद्धियां प्राप्त होने और पक्षियों की आवाजें सुनने से जुड़े प्रसंगों को भी फिल्म में स्थान दिया गया है।

विशाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी स्वयं संत परंपरा से आते हैं, इसलिए टीम ने उन्हें फिल्म का वह हिस्सा भी दिखाया जो भारतीय सभ्यता और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है। फिल्म में नीब करोरी बाबा की भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात सुखद रही। टीम को उनका आशीर्वाद मिला है और इसके लिए सभी आभारी हैं।

- यूपी में शूटिंग के लिए कई बेहतरीन लोकेशन

विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं हैं। नोएडा में बन रही फिल्म सिटी के अलावा वाराणसी, चित्रकूट, मथुरा, वृंदावन, प्रयागराज और आगरा में शूटिंग के लिए बेहतरीन लोकेशन उपलब्ध हैं। उनका प्रोडक्शन हाउस भी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत है और फिल्म के लगभग सभी कलाकार उत्तर और मध्य भारत से हैं।

विशाल मूल रूप से झांसी के रहने वाले हैं और उनकी पढ़ाई गोरखपुर में हुई है, जबकि उनका परिवार लखनऊ में रहता है। नीब करोरी बाबा की भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या भी लखनऊ के हैं। फिल्म में उनकी पत्नी की भूमिका निभाने वाली पूर्णिमा तिवारी और निर्माता रागिनी सोना भी लखनऊ की रहने वाली हैं।

- यूपी के शहरों में होगा टैलेंट हंट

विशाल ने कहा कि आगे भी उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों को केंद्र में रखकर फिल्में बनाई जाएंगी। यूपी की कहानी और यहां की बोली वाली फिल्मों को दक्षिण भारत में भी दर्शक मिल रहे हैं। आने वाली फिल्मों के लिए प्रदेश के अलग-अलग शहरों में टैलेंट हंट किया जाएगा और थिएटर से जुड़े कलाकारों को भी मौका दिया जाएगा। कोशिश उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के कलाकारों को फिल्म निर्माण से जोड़ने और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर देने की है।

यूपीएससीआर का पहला पड़ाव पार, कमेटी ने बेस मैप को दी मंजूरी
- लखनऊ विकास प्राधिकरण के पारिजात सभागार में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में अहम फैसला
- अब एक्जीक्यूटिव कमेटी को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव, रीजनल प्लान का शुरू होगा काम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (यूपीएससीआर) का पहला पड़ाव पार हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के पारिजात सभागार में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई एक अहम बैठक में कमेटी ने यूपीएससीआर के बेस मैप को मंजूरी दे दी है। अब इसे एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद यूपीएससीआर का रीजनल प्लान तैयार होगा। 
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जनपद को शामिल करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 26,741 वर्ग किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि यूपीएससीआर के लिए जीआईएस आधारित क्षेत्रीय महायोजना तैयार की जा रही है। इसके अंतर्गत ट्रांसपोर्टेशन एंड मोबिलिटी, इकोनॉमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर व टूरिज्म को लेकर 30 परियोजनाएं चिन्हित की गयी हैं। इसमें उक्त 06 जनपदों की कनेक्टिविटी को रफ्तार देने की दिशा में राज्य राजधानी माला (रीजनल रोड), एलिवेटेड पेरिफेरल रोड व रोड अपग्रेडेशन के कार्य शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर, मेट्रो नेटवर्क विकसित करने की परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गयी हैं। इसके अतिरिक्त अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर ओरिएंटेड डेवलपमेंट आदि परियोजनाएं चिन्हित की गयी हैं।
- 22 सदस्यीय कमेटी ने दी सहमति
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन का बेस मैप तैयार कराया गया है। जिसके लिए सम्बंधित विकास प्राधिकरणों, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग समेत 22 संस्थाओं से अभिमत मांगा गया था। जिसमें सभी विभागों ने बेस मैप का परीक्षण करने के बाद अपनी सहमति प्रदान की है। मंगलवार को रिव्यू कमेटी की बैठक में बेस मैप का प्रेजेन्टेशन किया गया, जिसमें इसे मंजूरी दे दी गई है।
- निवेश के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
उपाध्यक्ष ने बताया कि अब यूपीएससीआर की एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष बेस मैप अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। वहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद रीजनल प्लान तैयार कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपीएससीआर से निवेश बढ़ेगा, रोजगार व व्यवसाय के अवसर सृजित होंगे। गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचेंगी और लोगों को उनके क्षेत्र में ही निवास, व्यापार व नौकरी आदि के लिए बेेहतर माहौल मिलेगा। साथ ही जनपदों के बीच हाई स्पीड कनेक्टिविटी होने से माइग्रेशन में कमी आएगी।
- सैटेलाइट इमेज का हुआ ग्राउंड परीक्षण
उपाध्यक्ष ने बताया कि यूपीएससीआर के बेस मैप की प्रमाणिकता के लिए सभी 06 जनपदों में ग्राउंड ट्रूथिंग (स्थलीय सत्यापन) का कार्य कराया गया है। इसमें कंसल्टेंट के साथ-साथ सम्बंधित विभागों ने भी सैटेलाइट इमेज व नक्शों से मिले डाटा का अलग-अलग स्थलों पर जाकर मिलान किया है। इस प्रक्रिया में कुल 2239 स्थानों पर ग्राउंड ट्रूथिंग कराई गई है। बैठक में अपर जिलाधिकारी राकेश सिंह, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, अपर सचिव सीपी त्रिपाठी, मुख्य नगर नियोजक केके गौतम समेत अन्य अधिकारी व कंसल्टेंट उपस्थित रहे।