रांची डीसी ने नगड़ी ईवीएम वेयर हाउस का किया मासिक निरीक्षण, सुरक्षा मानकों के पालन के दिए निर्देश

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज दिनांक 29.08.2026 को नगड़ी स्थित ईवीएम वेयर हाउस का निर्धारित मासिक (बाह्य) निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य वेयर हाउस की सुरक्षा व्यवस्था, रख-रखाव तथा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं का नियमित मूल्यांकन करना था।

निरीक्षण के दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने वेयर हाउस की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी की कार्यशीलता तथा संपूर्ण परिसर की निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ईवीएम वेयर हाउस के संचालन एवं सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक प्रावधान का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने उप निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देशित किया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक माह निर्धारित समय पर वेयर हाउस की सुरक्षा, रख-रखाव और तकनीकी व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन समय पर निर्वाचन आयोग को भेजा जाए।

निरीक्षण के दौरान जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री बिवेक कुमार सुमन एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

बाबूलाल जी, खनन कंपनियों की चिंता छोड़ झारखंड के हितों की बात कीजिए : विनोद कुमार पांडेय


रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के वित्त मंत्री को लिखे पत्र पर पलटवार करते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी का पत्र पढ़कर साफ लगता है कि उन्हें झारखंड के खनिज से ज्यादा चिंता खनन कंपनियों की लागत और मुनाफे की है। उन्हें तय करना चाहिए कि वे झारखंड के नेता की तरह बात कर रहे हैं या खनन कंपनियों के प्रवक्ता की तरह।

उन्होंने कहा कि कोयला और लौह-अयस्क झारखंड की खनिज संपदा है। इस पर झारखंड के उचित अधिकार और राजस्व की मांग करना कोई अपराध नहीं है। बाबूलाल जी कंपनियों की लागत और ट्रकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ का हिसाब तो बता रहे हैं, लेकिन झारखंड की जमीन, जंगल, पानी, प्रदूषण, विस्थापन और खनन प्रभावित लोगों की कीमत का हिसाब क्यों नहीं बताते?

खनिज झारखंड का है तो उसके लाभ में झारखंड का उचित हिस्सा भी होना चाहिए।

ओडिशा का उदाहरण देने पर विनोद पांडेय ने कहा कि ओडिशा में क्या हुआ, यह अलग विषय है। ओडिशा की नीलामी का उदाहरण देकर झारखंड के अधिकार का सवाल खत्म नहीं किया जा सकता। बाबूलाल जी यह बताएं कि झारखंड के खनिज से राज्य को कितना राजस्व, स्थानीय लोगों को कितना रोजगार और खनन प्रभावित इलाकों को कितना वास्तविक लाभ मिला।

बालू और पत्थर की व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि जहां कमियां हैं, राज्य सरकार उन्हें दूर कर रही है। सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था के साथ स्थानीय लोगों और स्थानीय वाहनों को लाभ पहुंचाना है। लेकिन बाबूलाल जी यह भूल जाते हैं कि खनन व्यवस्था की समस्याएं आज पैदा नहीं हुई हैं, भाजपा सरकारों की विरासत भी इसमें शामिल रही है।

DMFT पर उन्होंने कहा कि यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के लिए है। लेकिन बाबूलाल जी को यह भी पूछना चाहिए कि केंद्र से झारखंड के हिस्से का पैसा और अधिकार वर्षों तक क्यों रोका गया?

विनोद पांडेय ने कहा कि बाबूलाल जी राज्य सरकार से सवाल जरूर पूछें, लेकिन कभी अपनी केंद्र सरकार से भी पूछें—

झारखंड की खनिज संपदा का उचित हिस्सा झारखंड को कब मिलेगा?

खनिज अधिकारों को प्रभावित करने वाले कानूनों पर भाजपा का स्पष्ट स्टैंड क्या है?

खनिज संपदा का सबसे ज्यादा लाभ झारखंड के लोगों को मिलेगा या खनन कंपनियों को?

उन्होंने कहा कि बाबूलाल जी, अगर दिल्ली और खनन कंपनियों का पक्ष रखना है तो खुलकर रखिए। लेकिन उसे झारखंड के हित की राजनीति का नाम मत दीजिए। झारखंड अपने खनिज का हिसाब भी मांगेगा और अपना अधिकार भी।

धन्यवाद

रक्षाबंधन पर भावुक हुए CM हेमन्त सोरेन, बड़ी बहन ने बांधी राखी

भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व आज मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के लिए भी भावनाओं से भरा रहा। रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की कलाई पर बड़ी बहन श्रीमती अंजनी सोरेन ने रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखद, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। इस पावन पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की चचेरी बहनों ने भी मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर उनके उत्तम एवं सुदीर्घ जीवन की कामना की।

इस आत्मीय अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अपनी बड़ी बहन का स्नेहपूर्वक आशीर्वाद लिया तथा छोटी बहनों को सहृदय स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने समस्त झारखंड वासियों को श्रावण पूर्णिमा तथा पवन पर्व रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि, उन्नति एवं खुशहाल जीवन की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री की माता श्रीमती रूपी सोरेन सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।

रक्षाबंधन पर भाई-बहन के अटूट प्रेम की मिसाल: सीतासाल से रांची पहुंचकर मति सोरेन ने CM हेमन्त सोरेन को बांधा रक्षा सूत्र

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को पावन पर्व रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर आज दुमका जिला स्थित शिकारीपाड़ा प्रखंड के ग्राम-सीतासाल से रांची पहुंचकर मति सोरेन ने रक्षा सूत्र बांधी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने बहन मति सोरेन को आशीर्वाद देते हुए उन्हें रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी।

गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर बहन मति सोरेन मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को रक्षा सूत्र बांधती आई हैं।

पेड़ों को भाई मानकर बांधी राखी, छात्राओं ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया,में छात्राओं ने पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा और सराहनीय संदेश दिया है।

छात्राओं ने पेड़ों को तिलक लगाया और उन्हें अपना रक्षक व भाई मानकर रक्षा सूत्र (राखी) बांधा।स्कूल में आयोजित इस खास अभियान "वृक्षाबंधन" प्रकृति की रक्षा का संकल्प: छात्राओं ने स्कूल परिसर में पेड़ों को राखी बांधी।

उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे न केवल नए पौधे लगाएंगे, बल्कि बड़े होने तक उनकी नियमित देखभाल भी करेंगे।विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत ने बच्चों को हमारे जीवन में पेड़ों की अहमियत बताते हुए छात्राओं की इस पहल की सराहना की।

निदेशक डॉ खालिद ने कहा कि सही मायने में पेड़ ही हमारे सबसे बड़े रक्षक हैं और इन्हें सहेज कर रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है ।

भाजपा को झारखंड के खनिज पर सेस से दर्द क्यों? खनिज हमारा है तो फैसला भी झारखंड का होगा : विनोद कुमार पांडेय

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खनिज संसाधनों पर राज्य द्वारा सेस लगाए जाने के अधिकार को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि भाजपा को अब यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे झारखंड के हित और संवैधानिक अधिकार से परेशानी है या उन पूंजीपतियों से, जिन पर इस व्यवस्था का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 8:1 के ऐतिहासिक फैसले में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा द्वारा इस अधिकार पर सवाल उठाना सीधे तौर पर राज्यों के अधिकार और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है।

झामुमो का भाजपा नेताओं से तीन सीधे सवाल : —

पहला, जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को संवैधानिक मान्यता दी है, तो भाजपा को झारखंड द्वारा अपने खनिज पर सेस तय करने से आपत्ति क्यों है?

दूसरा, जब खनिज झारखंड की धरती से निकलता है, उसके पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभाव झारखंड के लोग झेलते हैं, तो उसके ऊपर लगने वाले सेस और राजस्व का फैसला झारखंड क्यों नहीं करेगा?

तीसरा, यदि झारखंड का खनिज महंगा लगता है तो कोई उसे खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। यदि भाजपा के पूंजीपति मित्रों को कहीं सस्ता खनिज उपलब्ध होता है तो वे वहां से खरीद सकते हैं। लेकिन झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधन औने-पौने दाम पर देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि वर्षों से झारखंड की धरती से कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज निकाले जाते रहे हैं। संसाधन झारखंड के रहे, लेकिन उसका बड़ा आर्थिक लाभ बाहर जाता रहा, जबकि विस्थापन, प्रदूषण, जंगल और जमीन की कीमत झारखंडी समाज ने चुकाई।

उन्होंने कहा कि अब वही पुरानी मानसिकता स्वीकार नहीं की जाएगी जिसमें “खनिज झारखंड से निकालेंगे, कीमत अपने हिसाब से तय करेंगे और झारखंड अपने हिस्से का सेस लगाए तो उसका विरोध करेंगे।”

झामुमो ने कहा कि झारखंड किसी की खनिज संपदा की दुकान नहीं है। राज्य अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का उपयोग अपने लोगों—विशेषकर आदिवासी, मूलवासी, खनन प्रभावित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के हित में करने का अधिकार रखता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा चाहे जितना दबाव बनाए, झारखंड अपने संवैधानिक और प्राकृतिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

खनिज झारखंड का है। उस पर अधिकार झारखंड का है।

उससे होने वाली कमाई में पहला हक झारखंडियों का है।

और अपने संसाधनों पर फैसला भी झारखंड ही करेगा।

जल जीवन मिशन को गति देने के लिए SWSM कार्यकारिणी की बैठक, विभागीय समिट की तैयारी पर मंथन

रांची। जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रस्तावित विभागीय समिट की तैयारियों को लेकर राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (SWSM) की कार्यकारिणी की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव श्री अबु इमरान ने की।

बैठक में जल जीवन मिशन के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख एजेंडों में जल संरचना परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, कैच द रेन अभियान, पेयजल स्रोतों की स्थिरता तथा ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव जैसे विषय शामिल रहे।

विशेष रूप से पेयजल स्रोतों की स्थिरता (Source Sustainability) और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव (Operation & Maintenance) पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इन विषयों के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए आपसी समन्वय को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा जलापूर्ति योजनाओं के सतत संचालन के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बैठक में पंचायती राज विभाग, जल संसाधन विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा यूनिसेफ (UNICEF) के WASH विशेषज्ञ भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभागीय समिट के माध्यम से जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर नल से जल’ की उपलब्धता को स्थायी और गुणवत्तापूर्ण बनाया जाएगा।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता, PMU के पदाधिकारी, मुख्य अभियंता (CDO), उप निदेशक-1, राज्य समन्वयक सहित अन्य अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

सीएम हेमन्त सोरेन को आदिवासी एकता महाजुटान रैली का न्योता, मोरहाबादी मैदान में जुटेगा जनसैलाब

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आदिवासी एकता महाजुटान रैली के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को प्रतिनिधिमंडल में

शामिल सदस्यों ने आगामी 30 अगस्त 2026 को मोरहाबादी मैदान, राँची में आयोजित होने वाले "आदिवासी एकता महाजुटान रैली" में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन को उन्होंने अवगत कराया कि झारखण्ड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों, अस्तित्व, पहचान एवं सामाजिक हितों की रक्षा के उद्देश्य से यह "आदिवासी एकता महाजुटान रैली" आयोजित की जा रही है। इस मौके पर श्री शशि पन्ना, श्री अजय तिर्की, श्रीमती रमा खलखो, श्री अनिल पन्ना, सुश्री ज्योत्सना केरकेट्टा, श्री शिवा कच्छप, श्री अनिल उरांव, श्री पुष्कर बड़ाईक सहित अन्य उपस्थित रहे।

दंगों के मास्टरमाइंड थे शरजील इमाम और उमर खालिद', दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस ने किया जमानत का विरोध

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में जोरदार विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है। अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया।

'दोनों दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड'

31 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है।

'याचिकाएं ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली'

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है। पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है।

नए सिरे से लगा सकते हैं जमानत याचिका

पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है।

सीएए के विरोध में हुए थे दंगे

बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं।

नेपाल में आई बाढ़ में 288 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

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नेपाल ने बुधवार को एक बार फिर से विनाश का मंजर देखा। यहां बड़ी संख्या में लोग तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए। बाढ़ में कम से कम 270 लोगों की मौत की खबर है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं।

नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय लापता

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि नेपाल त्रासदी में 288 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। इनके अलावा 37 और 39 लोगों के दो समूह तमिलनाडु के हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा तीसरा समूह 32 लोगों का है, जो पश्चिम बंगाल के हैं, वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हुए हैं। इनके अलावा 61 लोग विभिन्न राज्यों के हैं, जो नेपाल में लापता हैं। साथ ही केरलम के 33 लोगों का भी एक समूह नेपाल में लापता है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूह लापता हैं।

भारत ने भेजी 47 टन राहत सामग्री

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नेपाल को इस मुश्किल समय में मदद के लिए भारत ने दो विमान भेजे हैं। जिनमें से एक सी-130 जे विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर बुधवार को नेपाल हुआ था। इनमें अस्थायी शेल्टर, दवाईयां आदि लेकर गया है। आज भी एक सी-17 विमान 37 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इनमें से आठ टन दवाईयां हैं और एक टन खाद्य पदार्थ हैं। इस तरह दो दिनों में नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जो भी राहत सामग्री भेजी गई है, वह नेपाल की मांग के आधार पर ही भेजी गई है।

नेपाल के हालात को लेकर जयशंकर ने की समीक्षा बैठक*

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल बाढ़ के हालात पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इस बैठक में काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। विदेश मंत्री ने बताया कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर्स और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। जयशंकर ने कहा कि हम इस मामले के साथ-साथ राहत कार्यों को लेकर भी नेपाल के अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय में काम कर रहे हैं।