कश्मीर पहुंच रहे भारत में अमेरिकी राजदूत, सीएम उमर अब्दुल्ला से होगी मुलाकात, जानें क्यों अहम है यह दौरा?

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भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर आज (बुधवार, 19 अगस्त) को दो दिवसीय दौरे पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पहुंचेंगे। वह इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुला से मिलेंगे। गुरुवार को वह लद्दाख का भी दौरा करेंगे। पदभार संभालने के बाद उनका यह पहला कश्मीर का पहला दौरा है।

उपराज्यपाल और सीएम से होगी मुलाकात

जनवरी में भारत में 27वें अमेरिकी राजदूत के तौर पर औपचारिक रूप से पद संभालने के बाद कश्मीर घाटी का यह सर्जियो गोर का पहला दौरा होगा। वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के तौर पर भी काम करते हैं। गोर के 19 अगस्त की दोपहर को पहुंचने का कार्यक्रम है, जिसके बाद वे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलेंगे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी मुलाकात करेंगे। जिस होटल में वे रात भर रुकेंगे, वहां भी उनकी कुछ बैठकें तय हैं। उन्होंने कहा कि उनके 20 अगस्त को लद्दाख के लिए रवाना होने की संभावना है।

अहम है सर्जियो गोर का दौरा

सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का दौरा कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण और इस क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के बाद यह किसी अमेरिकी राजदूत का पहला सीधा दौरा है। जनवरी 2026 में अमेरिका के 27वें राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्जियो गोर की यह पहली कश्मीर और लद्दाख यात्रा है। इसके जरिए अमेरिका यह संकेत दे रहा है कि वह दक्षिण एशिया के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक दिलचस्पी और निरंतरता बनाए हुए है।

पहले भी कई अमेरिकी राजदूतों ने किया है कश्मीर का दौरा

यह पहली बार नहीं है जब कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर का दौरा कर रहा हो। सर्जियो गोर से पहले कई अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा किया है। कश्मीर में अमेरिकी राजदूत का पिछला दौरा जनवरी 2020 में हुआ था, जब तत्कालीन राजदूत विदेशी दूतों के 15 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर लाई थी। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों, नागरिक समाज के सदस्यों और सेना के अधिकारियों से बातचीत की थी।

कश्मीर के मसले पर रही है अमेरिका की नजर

1990 के दशक में कश्मीर पर पूरी दुनिया की नजर थी। उस वक्त अमेरिका की नीति कश्मीर के मसले को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की थी। लेकिन, भारत कभी भी इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसी क्रम में अमेरिकी राजदूत फ्रैंक विजनर ने 1995 में कश्मीर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां के राजनेताओं के साथ-साथ अलगाववादियों और छात्रों-पत्रकारों तक से मुलाकात की। इसका संकेत था कि अमेरिका कश्मीर मसले को सुलझाने को उत्सुक है। इसके बाद कई मौकों पर अमेरिका कश्मीर से जुड़े हर मौके पर भारत-पाकिस्तान के बीच परोक्ष तौर पर एक मध्यस्थ के रूप में खड़ा होते रहा।

जाति जनगणना में OBC का कॉलम नहीं होने पर भड़के राहुल गांधी, पूछा-Gen-Z की राह पर OBC निकल पड़े तो?

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जनगणना 2027 को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने एक गहरी साजिश के तहत जाति जनगणना से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी को जान-बूझकर हटा दिया है। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं रखे जाने को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। जेन जी आंदोलन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तरह ओबीसी समाज उठ गया तो?

ओबीसी कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार पहले जाति जनगणना नहीं कराना चाहती थी और जब हम उसकी मांग कर रहे थे, मांग करने वाले लोगों को पीएम मोदी ने अर्बन नक्सल बताया था। बाद में ओबीसी की संख्या और प्रेशर में सरकार मानी तो सही, लेकिन जाति जनगणना को वो सही तरीके से नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे एससी (SC) और एसटी (ST) का कॉलम रखा है, वैसे ओबीसी (OBC) का नहीं रखा है।

ओबीसी कॉलम को लेकर आंदोलन की चेतावनी

राहुल ने ओबीसी विभाग के नेताओं को निर्देश दिए कि अपने इलाकों में लोगों को जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं होने को लेकर जागरूक करें। राहुल बोले कुछ दिनों पहले छात्रों के आंदोलन में लोग सड़कों पर आए और सरकार को झुकना पड़ा। ओबीसी समाज की आबादी पचास फीसदी से ज्यादा है। अगर वो सड़क पर आ गए तो मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा। 

पहली बार जाति जनगणना

पिछले साल मोदी सरकार ने आजाद भारत में पहली बार जाति जनगणना करवाने का फैसला किया था। जनगणना के पहले चरण में मकानों की गिनती का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के लिए चालीस सवालों की सूची पी पिछले हफ्ते जारी की गई थी। इस सूची में एससी, एसटी की तरह ओबीसी के लिए अलग से कोई श्रेणी नहीं है बल्कि जाति बताने का विकल्प दिया गया है। देश के पहाड़ी राज्यों में जनगणना का दूसरा चरण एक सितंबर से शुरू होगा। महीने भर चलने वाली यह प्रक्रिया देश के बाकी हिस्सों में एक फरवरी से शुरू होगी।

झारखंड की 44 परीक्षाएं रद्द, गड़बड़ी की शिकायतों के बाद हेमंत सोरेन सरकार का बड़ी फैसला

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झारखंड सरकार ने प्रतियोगिता परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बड़ा फैसला किया है। हेमंत सोरेन की सरकार ने मंगलवार को अनियमितताओं के आरोप में 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। उन 44 भर्ती परीक्षाओं की लिस्ट जारी कर ही है, जिन्हें अनियमितताओं की वजह से रद्द किया गया है। झारखंड सरकार ने देर रात आठ अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए। इन नोटिफिकेशन में रद्द की गई परीक्षाओं की जानकारी है, जो 2014 से झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएसस) और आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) ने आयोजित की थीं।

इन परीक्षाओं को किया गया रद्द

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया गया है। मंगलवार रात जारी आठ अधिसूचनाओं में 2014 से जेपीएससी और आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल हैं। झारखंड सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, अतिरिक्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। वहीं अन्य प्रभावित परीक्षाओं में सरकारी पॉलीटेक्निक के लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और कई प्रशासनिक व तकनीकी पदों की परीक्षाएं भी शामिल हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करेगी सरकार

सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं में कहा गया है कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से त्वरित न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

सुधार समिति का गठन

वहीं, सरकार ने जेपीएससी-जेएसएससी की व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति का भी गठन किया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति आयोग और भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों को लेकर अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर सरकार को सौंपेगी। इसके अलावा जेपीएससी-जेएसएससी में एक आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ गठित करने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों पर नजर रखी जा सके।

हेमंत सरकार ने कैबिनेट में बैठकर छात्रों को ठगने की बनाई पूरी प्लानिंग, सीबीआई जांच बिना न्याय अधूरा : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्र आंदोलन के संदर्भ में झारखंड सरकार के द्वारा लिए गए फैसले की मंशा एवं सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों को ठगने के लिए हेमंत सोरेन ने सोची-समझी साजिश के तहत कल कैबिनेट में परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार ने कैबिनेट में बैठकर मंत्रियों के साथ मिलकर छात्रों को ठगने की पूरी प्लानिंग बनाई है। बच्चों की एक ही मांग सीबीआई जांच की रही है। आखिर सरकार इससे क्यों भाग रही है ? इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि इस गड़बड़ी में, जेपीएससी, जेएसएससी की नौकरियों को बेचने में सरकार में बैठे लोग भी शामिल हैं। सीबीआई जांच के बिना छात्रों को पूरा न्याय नहीं मिल सकता है। श्री मरांडी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

श्री मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी सरकार में पार्टनर हैं, इसलिए वे चुप हैं। ईमानदारी से छात्रों के हित का मुद्दा इसलिए वे नहीं उठा पा रहे हैं। छात्र हित के नाम पर वे केवल दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा है कि अध्यक्ष बनने के लिए 70 करोड़ रूपया देना पड़ता है। अब हेमंत सोरेन खुद तो इतना पैसा डकारेंगे नहीं, निश्चित रूप से कुछ हिस्सा राहुल गांधी तक भी पहुंचता ही होगा।

श्री मरांडी ने कहा कि टीडीपीएल कंपनी द्वारा ली गई सारी परीक्षा एवं जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला कर हेमंत सरकार अपनी पीठ खुद थपथपा रही है। सरकार चाहती है कि उसके दोनों हाथ में लड्डू हो। एक तरफ सरकार कहेगी कि उन्होंने तो परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी। अब गलत ढंग से चयनित छात्र न्यायालय जाएंगे। न्यायालय सरकार और CID से सबूत मांगेगा।

कोर्ट में वही सीआईडी तथ्यों को प्रस्तुत करेगी, जो पिछली बार अपनी झूठी जांच रिपोर्ट से कोर्ट को दिग्भ्रमित कर चुकी है। सरकार की एजेंसी सरकार को बचाने में ही लगी है। नेपाल में, बंगाल में, झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में प्रश्न पत्रों को रटवाया गया है, आखिर बच्चे इसे कैसे साबित करेंगे। नतीजा यह होगा कि सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर न्यायालय से स्टे लग सकता है। अब जिन लोगों ने पैसा देकर नौकरियां खरीदी है, वे भी खुश हो जाएंगे और सरकार को भी कोर्ट का फैसला होने का बहाना मिल जाएगा। इस प्रकार कुल मिलाकर जो बच्चे पिछले 24 दिनों से आंदोलनरत थे, उनके हिस्से केवल धोखा के सिवाय कुछ नहीं आने वाला है।

श्री मरांडी ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस सरकार की मंशा यहां के छात्र, युवा समझ चुके हैं। यह सरकार केवल जनता को गुमराह कर रही है। यह सरकार झारखंड की जनता को, बच्चों को दिगभ्रमित कर रही है। हम प्रारंभ से ही कह रहे हैं कि एग्जाम रद्द करना समस्या का समाधान नहीं है। समस्या का समाधान है केवल और केवल सीबीआई जांच। हेमंत सरकार में जेपीएससी, जेएसएससी के सारे एग्जाम में गड़बड़ियां हुई हैं, नौकरियों को बेचा गया है। प्रतिदिन इस संदर्भ में सनसनीखेज खुलासे भी हो रहे हैं। हमारी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से हो, तभी न्याय पूरा होगा।

श्री मरांडी ने कहा कि आज तक जेएसएससी के चेयरपर्सन के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये 2024 से ही पद पर हैं, इसी बीच में सारी गड़बड़ियां हुई है। इसी प्रकार सीआईडी के जिन अफसरों ने जांच की पूरी दिशा ही बदल दी, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे बिल्कुल साफ है कि हेमंत सरकार खुद की सरकार को बचाना चाहती है, इस दौरान जॉब में जो खरीद फरोख्त हुआ है उन दलालों को, भ्रष्ट्र अफसर को भी सरकार बचाना और बच्चों को ठगना चाहती है। इसलिए इधर-उधर की बातें छोड़ राज्य सरकार को तत्काल सारे मामलों की जांच सीबीआई को सुपुर्द कर देनी चाहिए। बच्चों को इससे कम पर न्याय नहीं मिलेगा। सीबीआई जांच होने से ही इसमें गड़बड़ी करने वाले, जिन लोगों ने पैसे के बल पर नौकरियां हासिल की है, इसमें संलिप्त सभी सफेदपोश का चेहरा बेनकाब हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि छात्र सजग रहें और अपनी CBI जांच की मांग पर अडिग रहें। पूरा देश देख रहा है कि झारखंड के छात्रों के साथ सरकार द्वारा किस तरह की साजिश की जा रही है। भाजपा छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। जब तक CBI जांच का आदेश नहीं होता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

TDPL परीक्षा रद्द करने के फैसले से अभ्यर्थियों को राहत, कांग्रेस नेताओं ने CM से की मुलाकात

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी श्री के० राजू , झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री केशव महतो कमलेश सहित कांग्रेस के माननीय मंत्रीगण एवं विधायकगणों ने आत्मीय मुलाकात की।

इस दौरान सभी ने 17 अगस्त 2026 को झारखंड मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट की विशेष बैठक में छात्र हित में राज्य सरकार द्वारा लिए गये महत्वपूर्ण निर्णयों का स्वागत करते हुए माननीय मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। साथ ही इन निर्णयों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और संवेदनशील पहल की सराहना की। मौके पर उन्होंने संयुक्त रूप से कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। माननीय मुख्यमंत्री से उन्होंने कहा कि आपके नेतृत्व में राज्य सरकार जनहित और युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय से प्रभावित विद्यार्थियों एवं अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी तथा उनके भविष्य को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता भी दूर होगी। मौके पर माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी श्री के० राजू , झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री केशव महतो कमलेश सहित कांग्रेस के माननीय मंत्रीगण एवं विधायकगणों के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड के युवाओं और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार पूरी तरह संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निर्णय लेती रही है, आगे भी लेती रहेगी। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री एवं उनके बीच राज्य में चल रहे विकासात्मक योजनाओं, जनहित एवं छात्र कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विस्तृत संवाद हुआ।

मौके पर माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, माननीय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, माननीय विधायक श्री रामेश्वर उरांव, माननीय विधायक श्री प्रदीप यादव, माननीय विधायक श्री कुमार जयमंगल, माननीय विधायक श्री राजेश कच्छप, माननीय विधायक श्री रामचंद्र सिंह, माननीय विधायक श्री नमन विक्सल कोनगाड़ी, माननीय विधायक श्री

भूषण बाड़ा एवं माननीय विधायक श्रीमती ममता देवी सहित अन्य उपस्थित रहे।

हम इस ‘वसूली तंत्र’ को जड़ से बदलकर रहेंगे…झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर बोले राहुल गांधी

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झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कर दी है। बीती रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसका ऐलान किया है। इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर खुशी जताई है।

छात्र सवाल उठाएं तो जवाब मिलना चाहिए-राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम बरता और अपनी बात रखी। यही सही तरीका है, जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए।

वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, वो इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे, ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक मिले। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ये सिस्टम बदलेगा। अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।

देवेंद्र महतो ने खत्म की 16 दिन से चल रही भूख हड़ताल

झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। महतो ने कहा, "आज झारखंड के लिए एक बड़ी जीत का दिन है। हालांकि मैं अपना विरोध प्रदर्शन अभी रोक रहा हूं, लेकिन अन्य सुधारों के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।"

प्रोजेक्ट भवन का दरवाजा बंद, CGL पास अभ्यर्थी सड़क पर

प्रोजेक्ट भवन के बाहर बड़ी संख्या में CGL पास अभ्यर्थी खड़े हैं। कल तक इसी प्रोजेक्ट भवन में काम कर रहे कर्मचारी आज अचानक बाहर हैं।

अभ्यर्थियों में सरकार के फैसले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि उन्होंने केंद्र सहित अन्य विभाग की नौकरी तक छोड़कर अपने राज्य में काम करने का फैसला लिया था।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि बिना उनका पक्ष सुने ही नौकरी रद्द करने का फरमान जारी कर दिया गया।

अभ्यर्थियों ने कहा—

“कल तक हम सचिवालय कर्मी थे, आज सड़क पर खड़े हैं। सरकार का यह फरमान तुगलकी है।”

प्रोजेक्ट भवन के बाहर हालात तनावपूर्ण, अभ्यर्थियों में नाराजगी।

रांची में JPSC-JSSC आंदोलन का अहम मोड़, अनशनकारियों को जूस पिलाकर खत्म कराया गया उपवास

रांची: JPSC और JSSC परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर झारखंड में चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया। रांची सदर अस्पताल में इलाजरत JLKM के नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य अनशनकारियों का अनशन ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने जूस पिलाकर समाप्त कराया।

पिछले कई दिनों से परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में बैठे आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को मंत्री दीपिका पांडेय सिंह अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने अनशनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और JLKM विधायक जयराम महतो भी मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन से आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और उन्हें मिल रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। मंत्री ने कहा कि छात्रों की चिंता जायज है और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

दरअसल JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर पिछले काफी समय से झारखंड के छात्र सड़कों पर हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और कई परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है। वे मांग कर रहे हैं कि विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। इसी मांग को लेकर देवेंद्र नाथ महतो समेत कई आंदोलनकारी अनशन पर बैठे थे।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार किया था। अनशन समाप्त होने के बाद JLKM विधायक जयराम महतो ने कहा कि यह आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ है। जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती और छात्रों को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।

फिलहाल अनशन टूटने से अस्पताल में भर्ती आंदोलनकारियों को राहत मिली है। वहीं सरकार पर अब छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है। छात्र संगठन भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

मिशन 2027 के लिए बीजेपी ने चला दांव, तीन राज्यों के प्रभारियों का एलान, विनोद तावड़े को यूपी की कमान

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भारतीय जनता पार्टी का चुनावी मिशन मोड में आ गई है। भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए तीन राज्यों में अपने प्रभारी नियुक्त किए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं।

विनोद तावड़े यूपी के प्रभारी नियुक्त

बीजेपी की तरफ से जारी सूची के मुताबिक विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगे। महाराष्ट्र राजनीति के दिग्गज नेता विनोद तावड़े माहिर रणनीतिकार माने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए सबसे अहम राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की कमान तावड़े के हाथों में दी गई है।

2027 चुनाव के लिए तावड़े की नियुक्ति काफी अहम

लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटें होने के कारण यहां पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति पर भी सीधा असर डालता है। विनोद तावड़े के सामने राज्य संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी। उन्हें प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की अहम जिम्मेदारी निभानी होगी। हालांकि, उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। विनोद तावड़े बिहार में अपना लोहा मनवा चुके हैं। 2027 में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए उनकी यह नियुक्ति काफी अहम हो जाती है।

सतीश पूनिया को पंजाब की कमान

पंजाब में भी अगले साल विधानसभा चुनाव है। पंजाब में भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से ही सतीश पूनिया पर अपना भरोसा जताया है। बीजेपी ने राजस्थान के सीनियर नेता सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। सतीश पूनिया के सियासी अनुभव का इस्तेमाल पार्टी पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए कर सकती है। उनके सामने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन का विस्तार करने और राज्य में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती होगी।

तरुण चुघ को गुजरात का प्रभार

गुजरात में भी पंजाब और यूपी की तरह अगले साल चुनाव है। बीजेपी ने तरुण चुघ को गुजरात का नया प्रभारी बनाया है। गुजरात लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले गुजरात राज्य का प्रभारी बनाकर पार्टी ने उन पर बड़ा संगठनात्मक भरोसा जताया है। ऐसे में पार्टी संगठन को और मजबूत बनाए रखना और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना प्रभारी के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

एक दिन पहले हुआ नितिन नवीन की नई टीम का एलान

इससे पहले भाजपा अध्यक्ष ने सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का एलान किया था। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हुईं। नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं, स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

CM हेमंत के मंत्रिमंडल का आया फैसला, JSSC-CGL परीक्षा और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर 24 दिनों से जारी छात्र आंदोलन में सोमवार देर रात बड़ा फैसला आया। सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में यह निर्णय लिया गया कि JSSC-CGL परीक्षा और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द की जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद मीडिया से बातचीत करते हुए इसकी आधिकारिक घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे युवा हमारे राज्य के नौजवान हैं और सरकार हमेशा उनके हितों के साथ खड़ी है। मैं खुद हमेशा छात्र के हित के पक्ष में रहा हूं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 से अब तक हुई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की गड़बड़ियों की जांच सीआईडी (CID) और एक सेवानिवृत्त जज की समिति द्वारा की जाएगी।

रिफॉर्म को लेकर सरकार का एक और बड़ा फैसला आया है कि आइएएस अमिताभ कौशल के नेतृत्व में राज्य सरकार जेपीएससी जेएसएससी के रिफॉर्म के लिए कमेटी का गठन करेगी। ये कमेटी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और आवश्यक परीक्षा सुधारों (Exam Reforms) के लिए अपनी सिफारिशें और दिशा-निर्देश तैयार करेगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले से ही एसओपी बनी हुई है, यदि उसका पालन किया गया होता तो ऐसी परिस्थिति नहीं होती।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए सबसे पहले कड़ा कानून बनाया है और अब छात्र हित में परीक्षा प्रक्रिया में कई नई सुधार करने जा रही है ताकि पूरी पारदर्शिता सामने आए।