पाकिस्तान फिर हुआ बेनकाब, पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद ने हाफिज सईद को बताया अपना ‘आका’

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पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है। एक बार फिर ये बात जगजाहिर हो गई है कि पाकिस्तान आतंकियों का सरपरस्त है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कथित तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के साथ अपने रिश्ते की बात करते नजर आ रहे हैं।

आतंकियों के साथ मंच साझा

पाक के पूर्व मंत्री शेख रशीद अहमद प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में शामिल हुए और आतंकियों के साथ एक मंच पर देखे गए हैं। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसमें रशीद खालिद मसूद संधू और कारी मोहम्मद याकूब शेख के साथ पर दिख रहे हैं। संधू लश्कर-ए-तैयबा का एक वरिष्ठ कमांडर और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) का अध्यक्ष है और याकूब शेख आतंकी समूह की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है।

खुद को बताया हाफिज सईद का गुलाम

कार्यक्रम में बोलते हुए राशिद ने हाफिज सईद की तारीफ की और खुद को उसका ‘गुलाम’ तक कह डाला। सभा को संबोधित करते हुए रशीद ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद की प्रशंसा कर कहा, "मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं।"

भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहे शेख राशिद अहमद ने सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर न सिर्फ आदर भरी बातें कीं बल्कि भारत के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा, "अगर भारत पाकिस्तान की ओर देखता है तो अल्लाह उसे नष्ट कर देगा। भारत में न पक्षी चहचहाएंगे, न मंदिरों में घंटियां बजेंगी। हम हाफिज सईद के साथ हैं।"

कौन है शेख रशीद?

शेख रशीद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में 2020 से 2022 तक गृह मंत्री रहा। वह अवामी मुस्लिम लीग पार्टी का संस्थापक नेता भी है। शेख रशीद इससे पहले भी अपने भारत विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। 2019 में भी शेख रशीद ने भारत के खिलाफ बेहद उग्र बयान दिए थे और युद्ध और परमाणु हथियारों की बात की थी।

हाफिज सईद है भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी

बता दें कि शेख रशीद खुद को जिस हाफिज सईद का गुलाम बता कर भारत को धमका रहा है, उसको संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। हाफिज सईद आंतकी संगठन लश्कर एक तैयबा का प्रमुख है और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है। वह भारत में हुए कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इनमें 2008 का मुंबई आतंकी हमला भी शामिल है, जिसमें 26/11 के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। साथ ही पुलवामा में हुए हमले का मास्टरमाइंड भी उसे ही माना जाता है। हाफिज सईद जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकी समूहों को फंडिंग करता है।

झारखंड विधानसभा घेराव पर बड़ा एक्शन, 600 लोगों पर एफआईआर, 100 को किया गया नामजद

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झारखंड में परिक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने झारखंड विधानसभा घेराव किया था। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल करीब 100 लोगों को नामजद करते हुए 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी और हंगामा किया था। पुलिस ने बैरीकेडिंग तोड़ने, हंगामा करने, पुलिस पर हमला करने सहित कई बिंदुओं पर मामला दर्ज किया है। विधानसभा थाना में दर्ज प्राथमिकी में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

आरोपियों की पहचान करने में जुटी पुलिस

पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे और लोगों के नाम जोड़े जा सकते हैं। वहीं, छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

बदलती नारी, बदलता झारखंड: अब योजना की लाभार्थी नहीं, पहचान बनाना चाहती हैं महिलाएं

बदलती नारी, बदलता झारखंड’ में 10,351 महिलाओं ने भाग लिया और अपने अधिकार, आकांक्षाएं, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी. सर्वे में 30.7% ग्रामीण और 29.4% शहरी क्षेत्र की महिलाएं शामिल रहीं. सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि झारखंड की महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.

महासर्वे की प्रमुख बातें

66.8% महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं.

61.3% महिलाएं अगले दो वर्षों में बेहतर करियर या ऊंचे पद पर खुद को देखती हैं.

55.7% महिलाएं दिन में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में बाहर निकलने से डरती हैं.

44% महिलाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार को सरकार की पहली प्राथमिकता बताया.

28.4% महिलाओं ने कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग की मांग की.

19.3% महिलाओं ने महिला सुरक्षा बल या हेल्पलाइन को प्राथमिकता दी.

युवतियों में करियर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह

सर्वे में 58% भागीदारी छात्राओं की रही। इनमें 18-24 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 82% और 25-35 वर्ष की 56.1% रही. यह संकेत है कि नई पीढ़ी की लड़कियां केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि करियर और कौशल विकास के उद्देश्य से पढ़ाई कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह राज्य में बढ़ती उच्च शिक्षा भागीदारी और घटते ड्रॉपआउट का सकारात्मक संकेत है.

मध्य आयु की महिलाएं भी करियर नहीं छोड़ना चाहतीं

16.8% प्रतिभागी वर्किंग प्रोफेशनल्स थीं, जिनमें 36-50 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 43.4% रही. यह दर्शाता है कि विवाह, मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाद भी महिलाएं आर्थिक और पेशेवर पहचान बनाए रखना चाहती हैं. सर्वे में 46.4% महिलाओं ने कहा कि वे अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेती हैं.

महिलाओं का सबसे बड़ा सपना

66.8% – आत्मनिर्भर बनकर पहचान बनाना

12.1% – बच्चों को बेहतर भविष्य देना

10.8% – सुरक्षित और खुशहाल जीवन

10.3% – अपने गांव और समुदाय के लिए काम करना

सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता

सर्वे में महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में असुरक्षा को गंभीर मुद्दा बताया.

55.7% – दिन में सुरक्षित, रात में असुरक्षित

21.5% – हमेशा सुरक्षित महसूस करती हैं

18.3% – हमेशा डर बना रहता है

4.5% – सार्वजनिक स्थानों पर ईव-टीजिंग बड़ी समस्या

महिलाओं ने बेहतर स्ट्रीट लाइट, रात्रि परिवहन, सीसीटीवी, पुलिस गश्त और हेल्पलाइन की प्रभावी निगरानी की मांग की.

करियर में सबसे बड़ी बाधा क्या?

36.7% – सामाजिक सोच और रूढ़िवादिता

31.6% – बेहतर अवसर और प्रशिक्षण की कमी

महिलाओं का मानना है कि सामाजिक मानसिकता और सीमित अवसर उनके करियर विकास में सबसे बड़ी बाधाएं हैं.

सरकार से क्या चाहती हैं महिलाएं?

जब पूछा गया कि महिलाओं के विकास के लिए सरकार को सबसे पहले किस क्षेत्र पर काम करना चाहिए, तो जवाब मिले:

44% – शिक्षा और स्वास्थ्य

28.4% – कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग

19.3% – सुरक्षा व्यवस्था और हेल्पलाइन

8.4% – स्टार्टअप और आसान ऋण सुविधा

विशेषज्ञों की राय

आईआईएम रांची के प्रो. कुशाग्र शरण के अनुसार, झारखंड की महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है. वे अब केवल नकद सहायता योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के जरिए अपनी आर्थिक पहचान बनाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि स्किल सेंटर, वित्तीय साक्षरता, मेंटरशिप और बाजार से जुड़ाव पर निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा.

पांच सूत्री रोडमैप

शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश

महिलाओं ने गुणवत्तापूर्ण स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र और नियमित जांच सुविधाओं की मांग की

कौशल विकास और उद्यमिता

जिला स्तर पर स्किल सेंटर, डिजिटल व्यापार प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाए

महिलाओं की सुरक्षा

ब्लॉक स्तर तक सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन, सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए

स्वास्थ्य और मानसिक सहयोग

मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, एनीमिया जांच, कैंसर स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं

योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन

डिजिटल डैशबोर्ड, सोशल ऑडिट और समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की जाए

प्रेस वार्ता नहीं, अंतराक्षी खेल रहे थे कांग्रेसी मंत्री": भानु प्रताप शाही का पलटवार

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता पर चुटकी लेते हुए कहा है कि कांग्रेसी मंत्री प्रेस वार्ता नहीं कर रहे थे, उनमें बोलने की इस प्रकार आपाधापी मची थी कि मानो वे अंतराक्षी प्रतियोगिता खेल रहे थे कि कौन सबसे पहले अपने आलाकमान द्वारा रटा रटाया गाना गाएगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कांग्रेस द्वारा छात्र आंदोलन में भाजपा द्वारा दोहरी राजनीति करने, आंदोलन को हाईजैक करने एवं इस मामले में राहुल गांधी को बदनाम करने के आरोप पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि छात्रों पर बर्बरतापूर्ण एक बार नहीं बल्कि चार चार बार लाठीचार्ज करने वाली कांग्रेस समर्थित सरकार के मंत्रियों और नेताओं के मुंह से दोहरी राजनीति, मगरमच्छ के आंसू जैसा शब्द शोभा नहीं देता। राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी दोहरी नीति की पर्याय है।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि छात्र आंदोलन को लेकर दोहरी राजनीति तो सत्ता पक्ष कर रहा है। एक तरफ वार्ता के नाम पर छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। इनकी कथनी और करनी में अंतर है। सरकार और कांग्रेसी नेताओं को छात्रों की दयनीय हालत क्यों नहीं दिखती ? सरकार चाहती ही नहीं कि छात्रों का आंदोलन खत्म हो, अगर सरकार की मंशा साफ है तो छात्रों की एक ही मांग है सीबीआई जांच, इसे सरकार मान ले आंदोलन चुटकी में खत्म हो जायेगा। यह मांग तो सरकार को पूरी करनी है। भाजपा तो इसे पूरा नहीं कर सकती। फिर मामले को कौन लटका रहा है ? छात्रों को कौन बरगला रहा है ?

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के लिए राहुल गांधी को जो जिम्मेवार ठहराया है, वह बिल्कुल सही है। राहुल गांधी सिर्फ दिखावे के लिए एक ट्वीट कर अपने दायित्व से भाग रहे हैं। अगर वास्तव में कांग्रेस और राहुल गांधी छात्रों के हितकारी हैं तो हेमंत सरकार से दो टूक बात करें। या तो सीबीआई जांच या फिर समर्थन वापस। नीट मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने वाली कांग्रेस झारखंड के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं मांगती ? अब कांग्रेसी ही बतलाए कि यह दोहरा चरित्र नहीं तो क्या?

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि धैर्य की बात करने वाले, इस पर सरकार और प्रशासन की पीठ थपथपाने वाले कांग्रेस के मंत्री पहले यह बतलाएं कि 11 अगस्त की रात एक बजे रांची उपायुक्त, ssp सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी कौन सा संयम बरतने के लिए धरना स्थल पर गए हुए थे, क्या वे लोग सेल्फी खींचवाने गए थे। सरकार और प्रशासन छात्रों पर एक और दमनात्मक कार्रवाई की तैयारी करके छात्रों के पास गई थी, वह तो भाजपा और मीडिया वाले पहुंच गए और प्रशासन को उल्टे पांव लौटना पड़ा। इसलिए झूठी बयानबाज़ी से कांग्रेस बाज आए।

श्री शाही ने कहा कि अनुपूरक बजट वाले दिन सदन में भाजपा विधायक कांग्रेस और jmm की वजह से नहीं पहुंच पाई। भाजपा विधायकों को खुद डिटेन करवा कर "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे" की कहावत कांग्रेस चरितार्थ कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति रोटी नहीं सेंकती, भाजपा जो भी करती है डंके की चोट पर करती है।

झारखण्ड में मतदाता सूची SIR-2026 के लिए 311 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी नियुक्त

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 के दावा एवं आपत्ति चरण में नोटिस, सुनवाई तथा संबंधित मामलों का 5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026 तक समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों की नियुक्ति हेतु प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को भारत निर्वाचन आयोग के अनुमोदन हेतु भेजा गया था, जिसे आयोग द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

श्री के. रवि कुमार ने कहा मतदाताओं को इन पदाधिकारियों की नियुक्ति से दावा एवं आपत्ति अवधि में प्राप्त आवेदनों, नो-मैप मतदाताओं, तार्किक विसंगतियों तथा अन्य संबंधित मामलों में नोटिस निर्गत करने, सुनवाई करने, दस्तावेजों का सत्यापन करने और मामलों के पारदर्शी एवं समयबद्ध निष्पादन में सुविधा एवं तेजी लाई जा सकेगी। मतदाता सूची में विसंगतियों, नो-मैप एवं अन्य त्रुटियों को सुधारने हेतु 24 अगस्त से सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि उक्त नियुक्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेंगी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि उक्त अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी एसआईआर के क्रम में अपने संबंधित मतदान केंद्र के एक परिवार के मतदाताओं का एक साथ एक मतदान केंद्र पर रखना, घर घर होम टू रोल, एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छुटे नहीं एवं एक भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में नहीं जुड़े इस हेतु भी कार्य करेंगे।

मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है, मगर विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है


केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने आज स्पष्ट कर दिया कि मोदी सरकार संसद में हर प्रकार की चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ, मगर विपक्ष चर्चा ही नहीं होने देना चाहता। श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और NDA की मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष बस संसद चलने दे।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने विपक्ष के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखते हुए कहा कि विपक्ष आज दोपहर 2 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष महोदय को चर्चा का पत्र लिखकर दे दे, आज 3 बजे से चर्चा शुरू कर दी जाएगी और कल दोपहर 3 बजे तक चर्चा चलेगी। श्री शाह ने कहा कि यदि अध्यक्ष महोदय अनुमति दें तो सरकार प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए भी तैयार है, ताकि आज 3 बजे से देर रात तक और कल 3 बजे तक विस्तृत चर्चा हो सके।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि मैं स्वयं सदन में बैठूँगा, सबको सुनूँगा, हर बात लिखूँगा और कल 3 बजे विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूँगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है। चर्चा होने से देश की जनता के सामने सारी बातें स्पष्ट हो जाएँगी - दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री जी ने विपक्ष की माँग पर कहा कि कोई मुझसे कहता है कि आप एक statement दे दो, मगर इतने गंभीर मसले पर इस तरह चर्चा नहीं हो सकती। संसद में चर्चा करने के नियम और तरीके बने हैं, संसदीय पद्धति में विस्तार से (at length) चर्चा होती है और संसदीय परंपरा के अनुसार ही statement दी जाएगी।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, वे लगातार संसद आ रहे हैं, मगर विपक्ष दोनों सदनों में संसद को चलने ही नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू जी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है, चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष पहले यही माँग कर रहा था, सरकार ने हाँ बोल दिया है।

अंत में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उसे चर्चा करनी है या हंगामा, और जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।

पतरातू में “हर घर तिरंगा अभियान” का भव्य आयोजन: PVUNL ने 200 तिरंगे वितरित कर जगाई देशभक्ति


पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL), NTPC पतरातू के तत्वावधान में “हर घर तिरंगा अभियान” का आयोजन 9 अगस्त से 17 अगस्त तक किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव एवं तिरंगे के महत्व के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ 9 अगस्त को किया गया, जिसमें NTPC के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के साथ-साथ CISF के जवानों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर टाउनशिप में प्रभात फेरी का आयोजन किया गया, जिसमें तिरंगे का वितरण किया गया। साथ ही, टाउनशिप में स्थापित LED स्क्रीन के माध्यम से हर घर तिरंगा अभियान से संबंधित संदेश प्रदर्शित कर लोगों को जागरूक किया गया।

12 अगस्त को PVUNL द्वारा अभियान को आसपास के समुदायों एवं विद्यालयों तक पहुंचाया गया। इस क्रम में SS High School, Patratu के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों के बीच 200 राष्ट्रीय ध्वजों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, नारे, कविताएं, शायरी एवं भाषण के माध्यम से विद्यार्थियों को हर घर तिरंगा अभियान के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 20 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उनके उत्साहवर्धन हेतु पुरस्कार वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों को उपहार एवं राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किए गए। कुल 200 राष्ट्रीय ध्वज विद्यार्थियों के बीच वितरित किए गए, ताकि वे अपने घरों में गर्व के साथ तिरंगा फहराने के संदेश को आगे बढ़ा सकें।

विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में PVUNL के HR (Human Resources) विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा कार्यक्रम के आयोजन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन सभी गतिविधियों के माध्यम से PVUNL ने देशभक्ति, एकता एवं राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया तथा अपने कर्मचारियों, उनके परिवारों, CISF कर्मियों, विद्यार्थियों एवं आसपास के समुदायों को “हर घर तिरंगा” अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट से भी झटका: रांची के मधुकम जमीन विवाद में महादेव उरांव की SLP खारिज


झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के मधुकम स्थित शिव-दुर्गा मंदिर रोड में आदिवासी जमीन पर 50-60 वर्षों से रह रहे गैर-आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने के मामले में जमीन मालिक महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी करारा झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने मामले में दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान अदालत ने जमीन की बिक्री और बाद में उसे खाली कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर कड़ी नाराजगी जतायी. अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता की ओर से एसएलपी वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

जमीन बेचने के बाद बेदखली की मांग पर कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुखता से उठा कि संबंधित लोगों से जमीन के बदले बड़ी रकम ली गयी और बाद में उन्हीं लोगों को जमीन से हटाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया गया. अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि मामला जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत के इस सख्त रुख के बाद महादेव उरांव की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया. अदालत ने आग्रह स्वीकार कर एसएलपी खारिज कर दी. इस तरह मामले में हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी महादेव उरांव को राहत नहीं मिली.

हाईकोर्ट ने 12 परिवारों को दी थी बड़ी राहत

इससे पहले 31 जुलाई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. अदालत ने रांची के रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में करीब 50-60 वर्षों से घर बनाकर रह रहे 12 गैर-आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए अतिक्रमण हटाने के पहले जारी आदेश को वापस ले लिया था. अदालत ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. यह राशि मामले से प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये के रूप में देने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने माना था कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया और शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया.

1 करोड़ के लेनदेन की जानकारी छिपाने का आरोप

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य सामने आया कि जमीन से जुड़े विवाद में संबंधित लोगों के साथ एक करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन हुआ था. आरोप था कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अदालत के समक्ष पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किया गया. अदालत ने इसे गंभीरता से लिया. मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि जिन 12 परिवारों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का सीधा असर पड़ना था, उन्हें मूल रिट याचिका में प्रतिवादी ही नहीं बनाया गया था. हाईकोर्ट ने माना कि यदि इन तथ्यों की जानकारी पहले अदालत के सामने होती, तो मामले की सुनवाई और आदेश की परिस्थितियां अलग हो सकती थीं.

कोर्ट के आदेश के आधार पर मकान हटाने की कार्रवाई

महादेव उरांव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के उस आदेश का अनुपालन कराने की मांग की थी, जिसमें हेहल के अंचलाधिकारी को मधुकम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आधार पर प्रशासन ने शिव-दुर्गा मंदिर रोड के समीप मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी. कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों में विरोध और असंतोष की स्थिति बनी थी. उनका कहना था कि वे कई दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं और अचानक उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है.

परिवारों का दावा, जमीन खरीदकर बनाये मकान

मामले से प्रभावित परिवारों का कहना था कि वे मधुकम क्षेत्र में 50-60 वर्षों से रह रहे हैं. उनके अनुसार, उन्होंने संबंधित जमीन मालिक को प्रति डिसमिल 5.25 लाख रुपये की दर से भुगतान कर जमीन खरीदी थी. इसके बाद वहां मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगे. परिवारों का आरोप था कि जमीन के लिए भुगतान करने और लंबे समय से वहां रहने के बावजूद उन्हें अवैध कब्जाधारी बताया गया. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई के दौरान सामने आये वित्तीय लेनदेन और पक्षकारों से जुड़े तथ्यों ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखकर और प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद ही किया जाना चाहिए. अदालत ने तथ्यों को छिपाने और न्यायालय को भ्रामक जानकारी देने के प्रयास को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में माना. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज किये जाने के बाद महादेव उरांव की ओर से दायर इस चुनौती को भी झटका लगा है. मामले में हाईकोर्ट के आदेश के साथ-साथ सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. जमीन विवाद में लंबे समय से रह रहे परिवारों के अधिकार, जमीन के लेनदेन और न्यायालय के समक्ष तथ्यों के पूर्ण खुलासे का सवाल इस पूरे प्रकरण के केंद्र में बना हुआ है.

भाजपा ने रचा हेमंत सरकार को बदनाम करने का राजनीतिक षड्यंत्र : विनोद कुमार पांडेय

भाजपा ने विवादित रही TDPL के जरिए झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रची

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID की त्वरित कार्रवाई, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने पर यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विवादों और जांच के घेरे में रही टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) जैसी एजेंसी को झारखंड की महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की परिस्थितियां क्या थीं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा नेताओं ने ऐसी विवादित एजेंसी को झारखंड की भर्ती प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता देकर हेमंत सरकार को बदनाम करने और राज्य के युवाओं को दिगभ्रमित करने का षड़यंत्र रचा है। इसकी परत दर परत आगे की जांच में उभरते जाएगी और भाजपा का घिनौना चेहरा बेनकाब होता जाएगा। सब सामने आएगा इस पूरी साजिश के पीछे कौन लोग थे।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता झारखंड के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की सेंधमारी, OMR शीट में कथित हेरफेर या डेटा से छेड़छाड़ की कोशिश युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई ने साफ किया सरकार का रुख

झामुमो महासचिव ने कहा कि जैसे ही परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। CID और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, संबंधित ठिकानों की जांच, डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन तथा संदिग्ध लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा डालने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हेमंत सोरेन सरकार परीक्षा माफिया या किसी भी निजी एजेंसी को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगी।

यूपी के विवादित रिकॉर्ड की भी हो निष्पक्ष जांच

विनोद पांडेय ने कहा कि TDPL को लेकर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 से 2021 के बीच आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के संदर्भ में उठे विवादों और जांच का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वहां इस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, तो झारखंड में उसे परीक्षा व्यवस्था से जोड़ने के निर्णय की भी गहन जांच आवश्यक है।

दोषियों के साथ-साथ साजिश के सूत्रधार भी सामने आएं

झामुमो महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाए। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों या एजेंसी के लोगों पर कार्रवाई कर पूरे मामले का पटाक्षेप नहीं किया जा सकता। जांच की अंतिम कड़ी उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्होंने भर्ती परीक्षा की व्यवस्था में सेंधमारी की योजना बनाई, उसे संरक्षण दिया या उससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में राजनीतिक साजिश के आरोप सही साबित होते हैं, तो भाजपा को झारखंड के युवाओं से जवाब देना होगा कि उनके भविष्य को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश क्यों की गई।

युवाओं का विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड के युवाओं ने लंबे संघर्ष के बाद अपने राज्य में रोजगार और सम्मान की उम्मीद बनाई है। कोई भी राजनीतिक दल या भर्ती माफिया इस उम्मीद को तोड़ने की कोशिश करेगा तो सरकार और जनता मिलकर उसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार का संकल्प स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा; दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आपराधिक सेंधमारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।