बदलती नारी, बदलता झारखंड: अब योजना की लाभार्थी नहीं, पहचान बनाना चाहती हैं महिलाएं

बदलती नारी, बदलता झारखंड’ में 10,351 महिलाओं ने भाग लिया और अपने अधिकार, आकांक्षाएं, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी. सर्वे में 30.7% ग्रामीण और 29.4% शहरी क्षेत्र की महिलाएं शामिल रहीं. सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि झारखंड की महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.
महासर्वे की प्रमुख बातें
66.8% महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं.
61.3% महिलाएं अगले दो वर्षों में बेहतर करियर या ऊंचे पद पर खुद को देखती हैं.
55.7% महिलाएं दिन में सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में बाहर निकलने से डरती हैं.
44% महिलाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार को सरकार की पहली प्राथमिकता बताया.
28.4% महिलाओं ने कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग की मांग की.
19.3% महिलाओं ने महिला सुरक्षा बल या हेल्पलाइन को प्राथमिकता दी.
युवतियों में करियर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह
सर्वे में 58% भागीदारी छात्राओं की रही। इनमें 18-24 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 82% और 25-35 वर्ष की 56.1% रही. यह संकेत है कि नई पीढ़ी की लड़कियां केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि करियर और कौशल विकास के उद्देश्य से पढ़ाई कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह राज्य में बढ़ती उच्च शिक्षा भागीदारी और घटते ड्रॉपआउट का सकारात्मक संकेत है.
मध्य आयु की महिलाएं भी करियर नहीं छोड़ना चाहतीं
16.8% प्रतिभागी वर्किंग प्रोफेशनल्स थीं, जिनमें 36-50 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी 43.4% रही. यह दर्शाता है कि विवाह, मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाद भी महिलाएं आर्थिक और पेशेवर पहचान बनाए रखना चाहती हैं. सर्वे में 46.4% महिलाओं ने कहा कि वे अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेती हैं.
महिलाओं का सबसे बड़ा सपना
66.8% – आत्मनिर्भर बनकर पहचान बनाना
12.1% – बच्चों को बेहतर भविष्य देना
10.8% – सुरक्षित और खुशहाल जीवन
10.3% – अपने गांव और समुदाय के लिए काम करना
सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
सर्वे में महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में असुरक्षा को गंभीर मुद्दा बताया.
55.7% – दिन में सुरक्षित, रात में असुरक्षित
21.5% – हमेशा सुरक्षित महसूस करती हैं
18.3% – हमेशा डर बना रहता है
4.5% – सार्वजनिक स्थानों पर ईव-टीजिंग बड़ी समस्या
महिलाओं ने बेहतर स्ट्रीट लाइट, रात्रि परिवहन, सीसीटीवी, पुलिस गश्त और हेल्पलाइन की प्रभावी निगरानी की मांग की.
करियर में सबसे बड़ी बाधा क्या?
36.7% – सामाजिक सोच और रूढ़िवादिता
31.6% – बेहतर अवसर और प्रशिक्षण की कमी
महिलाओं का मानना है कि सामाजिक मानसिकता और सीमित अवसर उनके करियर विकास में सबसे बड़ी बाधाएं हैं.
सरकार से क्या चाहती हैं महिलाएं?
जब पूछा गया कि महिलाओं के विकास के लिए सरकार को सबसे पहले किस क्षेत्र पर काम करना चाहिए, तो जवाब मिले:
44% – शिक्षा और स्वास्थ्य
28.4% – कौशल विकास और वोकेशनल ट्रेनिंग
19.3% – सुरक्षा व्यवस्था और हेल्पलाइन
8.4% – स्टार्टअप और आसान ऋण सुविधा
विशेषज्ञों की राय
आईआईएम रांची के प्रो. कुशाग्र शरण के अनुसार, झारखंड की महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है. वे अब केवल नकद सहायता योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के जरिए अपनी आर्थिक पहचान बनाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि स्किल सेंटर, वित्तीय साक्षरता, मेंटरशिप और बाजार से जुड़ाव पर निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा.
पांच सूत्री रोडमैप
शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश
महिलाओं ने गुणवत्तापूर्ण स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र और नियमित जांच सुविधाओं की मांग की
कौशल विकास और उद्यमिता
जिला स्तर पर स्किल सेंटर, डिजिटल व्यापार प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाए
महिलाओं की सुरक्षा
ब्लॉक स्तर तक सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन, सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए
स्वास्थ्य और मानसिक सहयोग
मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, एनीमिया जांच, कैंसर स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं
योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन
डिजिटल डैशबोर्ड, सोशल ऑडिट और समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की जाए
6 hours ago
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