सुप्रीम कोर्ट से भी झटका: रांची के मधुकम जमीन विवाद में महादेव उरांव की SLP खारिज


झारखंड की राजधानी रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के मधुकम स्थित शिव-दुर्गा मंदिर रोड में आदिवासी जमीन पर 50-60 वर्षों से रह रहे गैर-आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े जाने के मामले में जमीन मालिक महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी करारा झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने मामले में दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान अदालत ने जमीन की बिक्री और बाद में उसे खाली कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर कड़ी नाराजगी जतायी. अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता की ओर से एसएलपी वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

जमीन बेचने के बाद बेदखली की मांग पर कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुखता से उठा कि संबंधित लोगों से जमीन के बदले बड़ी रकम ली गयी और बाद में उन्हीं लोगों को जमीन से हटाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया गया. अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि मामला जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत के इस सख्त रुख के बाद महादेव उरांव की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया. अदालत ने आग्रह स्वीकार कर एसएलपी खारिज कर दी. इस तरह मामले में हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी महादेव उरांव को राहत नहीं मिली.

हाईकोर्ट ने 12 परिवारों को दी थी बड़ी राहत

इससे पहले 31 जुलाई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. अदालत ने रांची के रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में करीब 50-60 वर्षों से घर बनाकर रह रहे 12 गैर-आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए अतिक्रमण हटाने के पहले जारी आदेश को वापस ले लिया था. अदालत ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. यह राशि मामले से प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये के रूप में देने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने माना था कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया और शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया.

1 करोड़ के लेनदेन की जानकारी छिपाने का आरोप

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य सामने आया कि जमीन से जुड़े विवाद में संबंधित लोगों के साथ एक करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन हुआ था. आरोप था कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अदालत के समक्ष पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किया गया. अदालत ने इसे गंभीरता से लिया. मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि जिन 12 परिवारों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का सीधा असर पड़ना था, उन्हें मूल रिट याचिका में प्रतिवादी ही नहीं बनाया गया था. हाईकोर्ट ने माना कि यदि इन तथ्यों की जानकारी पहले अदालत के सामने होती, तो मामले की सुनवाई और आदेश की परिस्थितियां अलग हो सकती थीं.

कोर्ट के आदेश के आधार पर मकान हटाने की कार्रवाई

महादेव उरांव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के उस आदेश का अनुपालन कराने की मांग की थी, जिसमें हेहल के अंचलाधिकारी को मधुकम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आधार पर प्रशासन ने शिव-दुर्गा मंदिर रोड के समीप मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी. कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों में विरोध और असंतोष की स्थिति बनी थी. उनका कहना था कि वे कई दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं और अचानक उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर हटाने की कोशिश की जा रही है.

परिवारों का दावा, जमीन खरीदकर बनाये मकान

मामले से प्रभावित परिवारों का कहना था कि वे मधुकम क्षेत्र में 50-60 वर्षों से रह रहे हैं. उनके अनुसार, उन्होंने संबंधित जमीन मालिक को प्रति डिसमिल 5.25 लाख रुपये की दर से भुगतान कर जमीन खरीदी थी. इसके बाद वहां मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगे. परिवारों का आरोप था कि जमीन के लिए भुगतान करने और लंबे समय से वहां रहने के बावजूद उन्हें अवैध कब्जाधारी बताया गया. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई के दौरान सामने आये वित्तीय लेनदेन और पक्षकारों से जुड़े तथ्यों ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखकर और प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद ही किया जाना चाहिए. अदालत ने तथ्यों को छिपाने और न्यायालय को भ्रामक जानकारी देने के प्रयास को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में माना. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज किये जाने के बाद महादेव उरांव की ओर से दायर इस चुनौती को भी झटका लगा है. मामले में हाईकोर्ट के आदेश के साथ-साथ सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. जमीन विवाद में लंबे समय से रह रहे परिवारों के अधिकार, जमीन के लेनदेन और न्यायालय के समक्ष तथ्यों के पूर्ण खुलासे का सवाल इस पूरे प्रकरण के केंद्र में बना हुआ है.

भाजपा ने रचा हेमंत सरकार को बदनाम करने का राजनीतिक षड्यंत्र : विनोद कुमार पांडेय

भाजपा ने विवादित रही TDPL के जरिए झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रची

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID की त्वरित कार्रवाई, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने पर यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विवादों और जांच के घेरे में रही टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) जैसी एजेंसी को झारखंड की महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की परिस्थितियां क्या थीं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा नेताओं ने ऐसी विवादित एजेंसी को झारखंड की भर्ती प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता देकर हेमंत सरकार को बदनाम करने और राज्य के युवाओं को दिगभ्रमित करने का षड़यंत्र रचा है। इसकी परत दर परत आगे की जांच में उभरते जाएगी और भाजपा का घिनौना चेहरा बेनकाब होता जाएगा। सब सामने आएगा इस पूरी साजिश के पीछे कौन लोग थे।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता झारखंड के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की सेंधमारी, OMR शीट में कथित हेरफेर या डेटा से छेड़छाड़ की कोशिश युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई ने साफ किया सरकार का रुख

झामुमो महासचिव ने कहा कि जैसे ही परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। CID और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, संबंधित ठिकानों की जांच, डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन तथा संदिग्ध लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा डालने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हेमंत सोरेन सरकार परीक्षा माफिया या किसी भी निजी एजेंसी को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगी।

यूपी के विवादित रिकॉर्ड की भी हो निष्पक्ष जांच

विनोद पांडेय ने कहा कि TDPL को लेकर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 से 2021 के बीच आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के संदर्भ में उठे विवादों और जांच का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वहां इस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, तो झारखंड में उसे परीक्षा व्यवस्था से जोड़ने के निर्णय की भी गहन जांच आवश्यक है।

दोषियों के साथ-साथ साजिश के सूत्रधार भी सामने आएं

झामुमो महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाए। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों या एजेंसी के लोगों पर कार्रवाई कर पूरे मामले का पटाक्षेप नहीं किया जा सकता। जांच की अंतिम कड़ी उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्होंने भर्ती परीक्षा की व्यवस्था में सेंधमारी की योजना बनाई, उसे संरक्षण दिया या उससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में राजनीतिक साजिश के आरोप सही साबित होते हैं, तो भाजपा को झारखंड के युवाओं से जवाब देना होगा कि उनके भविष्य को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश क्यों की गई।

युवाओं का विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड के युवाओं ने लंबे संघर्ष के बाद अपने राज्य में रोजगार और सम्मान की उम्मीद बनाई है। कोई भी राजनीतिक दल या भर्ती माफिया इस उम्मीद को तोड़ने की कोशिश करेगा तो सरकार और जनता मिलकर उसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार का संकल्प स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा; दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आपराधिक सेंधमारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

राहुल गांधी के इशारे पर की गई झारखंड के छात्रों पर बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्रवाई : आदित्य साहू


भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्रों के द्वारा विधानसभा घेराव के दौरान की गई बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार और राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर राहुल गांधी को जिम्मेवार ठहराया।

प्रदेश अध्यक्ष श्री साहू ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को कुचलने और दबाने के लिए कंटीले तार लगाए गए, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर छात्रों पर अत्याचार किया गया। छात्राओं के कपड़े तक फाड़ दिए गए, मीडिया तक को भी नहीं छोड़ा गया, कैमरे तोड़े गए, उन्हें पीटा गया। यह सारी चीज राज्य सरकार द्वारा राहुल गांधी के इशारे पर किया गया है।

श्री साहू ने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली एवं भाजपा शासित दूसरे राज्यों में गला फाड़ फाड़ कर छात्रों के मुद्दे उठाते हैं और लेकिन झारखंड के मामले पर उनके मुंह पर ताला जड़ जाता है। राहुल गांधी को छात्रों के नाम पर देश को गुमराह करने और सुविधा की राजनीति करने के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से हेमंत सरकार चल रही है। राहुल गांधी मोबाइल से छात्रों से बात करके उन पर दबाव डालने का काम करते हैं परंतु उन्होंने छात्रों के सीबीआई जांच की डिमांड को लेकर कभी भी राज्य सरकार पर दबाव डालने का काम नहीं किया। राहुल गांधी में अगर थोड़ी भी नैतिकता है तो राज्य के छात्रों के साथ सीएम के दरवाजे पर धरना देने का काम करें। अगर उनकी बात सरकार नहीं सुनती है तो उन्हें तत्काल सरकार से समर्थन वापस लेकर छात्रों के मुद्दे पर लड़ाई लड़नी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगते हैं वहीं दूसरी ओर झारखंड के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कभी बात नहीं करते। राहुल गांधी को प्रयागराज जाने से पहले झारखंड आकर यहां के छात्रों से वार्ता करनी चाहिए थी। राहुल गांधी का यह दोहरा रवैया नहीं चलेगा। राहुल गांधी को राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का दबाव बनाना चाहिए। लेकिन राहुल गांधी ऐसा कदापि नहीं करेंगे क्योंकि वह सत्ता की मलाई खा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गोली, लाठी, बंदूक, वाटर कैनन और आंसू गैस से छात्रों की आवाज को बंद नहीं किया जा सकता है। लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार सुलूक किया गया, 10 अगस्त का दिन झारखंड राज्य के लिए काला दिवस के रूप में दर्ज हो गया है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संसद के अंदर बाहर एनडीए के सांसदों ने झारखंड में बच्चों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, मार्च किया, यह बड़ी बात है। छात्रों को पार्टी आश्वस्त करती है पूरे देश भर के एनडीए के सांसद पूरी मजबूती के साथ बच्चों के साथ खड़े हैं। अब यह आंदोलन केवल झारखंड का नहीं बल्कि पूरे देश का आंदोलन बन चुका है।

श्री साहू ने कहा कि राहुल गांधी सदन में चर्चा से भागते हैं। अमित शाह सदन में चर्चा को तैयार हैं लेकिन राहुल गांधी चर्चा से डरते हैं। इनका काम देश को गुमराह करना रह गया है। राहुल गांधी ने संसदीय इतिहास की सारी गरिमा को तार-तार कर दिया है। यह देश में अराजकता और झूठ के पोस्टर बॉय का प्रतीक बनकर रह गए हैं। राहुल गांधी ने झूठ की खेती करके भ्रम फैलाकर संसद को हाईजैक किया हुआ है। इनका मकसद केवल अराजकता फैलाना है। उसी प्रकार की अराजकता राहुल गांधी झारखंड में फैलाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन छात्रों ने उनके इस मकसद पर पानी फेर दिया है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में बच्चों ने अपने पूरे आंदोलन में मर्यादा की मिसाल कायम की है। किसी नेता या दल के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। लेकिन जंतर मंतर में दिल्ली की धरती से पीएम को भद्दी भद्दी गालियां देने का काम किया गया। उनकी दिवंगत मां तक को भी नहीं बख्शा गया।

उन्होंने सीएम के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों के काम की सराहना करते हुए सम्मानित करने की बात कही गई है। आदित्य साहू ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज करना, कपड़े फाड़ना और दमनात्मक कार्रवाई करना आखिर कौन सा अच्छा काम है।

आदित्य साहू ने छात्रों पर हुए अत्याचार के खिलाफ भाजपा द्वारा बुलाए गए झारखंड बंद को पूरी तरह सफल बताया। कहा कि देर रात में घोषणा करने के बावजूद राज्य भर में व्यापक जनसमर्थन देने के लिए जनता का आभार। साथ ही कार्यकर्ताओं और मीडिया का भी उन्होंने आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की न्याय की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।

इस दौरान प्रेस वार्ता में मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाइक, अजय राय और प्रकाश सिंह भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश*

माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री रबींद्र नाथ महतो एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज झारखंड विधान सभा परिसर में आयोजित "77वाँ राज्यव्यापी वन महोत्सव, 2026" कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर माननीय विधान सभा अध्यक्ष एवं माननीय मुख्यमंत्री ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

महोत्सव में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल, पहाड़, नदियां और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से है। जंगल और प्रकृति यहां के जनजीवन एवं संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण एवं अहसास कराते हैं।

हमें केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार, जल संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए झारखंड की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मौके पर माननीय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी उपस्थित थीं।

पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता लाना अत्यंत आवश्यक

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी लोग योगदान दें। पौधा लगाने के साथ-साथ उसे संरक्षित करने का भी महोत्सव होना चाहिए। पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी समान उत्साह होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वन महोत्सव का परिणाम है कि आज झारखंड विधानसभा परिसर, उसके आसपास एवं संपूर्ण झारखंड में अनेक हरे-भरे वृक्ष दिखाई दे रहे हैं। धरती हरा-भरा हो रहा है। उन्होंने आमलोग से भी अपील किया कि पौधा लगाकर हरा-भरा धरती बनाने में हम सभी को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक है। हम व्यक्तिगत रूप से इस मुहिम से जुड़ेंगे, तो इस विशाल धरा और इसकी जैव-विविधता की रक्षा करना आसान हो जायेगा।

पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करने की जरूरत

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रायः यह देखा जाता है कि विकास के नाम पर हम कई कार्य करते हैं। विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण को नुकसान पहुँचते हैं। इससे पर्यावरण में असंतुलन पैदा होता है। इससे संपूर्ण मानव जीवन और समस्त जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। मनुष्य से लेकर पशु- पक्षी आदि प्रत्येक प्राणी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमसभी को इस नुकसान की शीघ्र भरपाई करनी चाहिए। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण को लेकर बड़ी-बड़ी गोष्ठी व चर्चाएं होती हैं, परंतु नुकसान की भरपाई मुश्किल होता है। उन्होंने समाचार पत्रों के माध्यम से इटली के एक अति प्राचीन ज्वालामुखी को पुनः सक्रिय होने संबंधी समाचार का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं स्पष्ट संकेत देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण केवल वृक्ष काटने तक सीमित नहीं है, और न ही पौधरोपण से पूर्ण भरपाई संभव है। प्रकृति में जो उथल-पुथल हो रहे हैं, उसकी भरपाई हमें हर स्तर पर करनी होगी अन्यथा आने वाला समय मानव जीवन के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। हमसभी वृक्षों को कटाते हैं, खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, भू-जल का अत्यधिक निष्कर्षण कर रहे हैं और बाँध बनाकर नदियों के प्रवाह को रोक रहे हैं। प्रकृति के प्रति यह शोषण निरंतर बढ़ रहा है। देश व राज्य की जनसंख्या बढ़ रही है। यह जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों पर टूट पड़ेंगे, तो इससे होने वाले दुष्परिणामों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। अतः आज हमें अत्यंत सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

जल का संचयन कर धरती में समाहित करने का कार्य करें

माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में संपूर्ण विश्व, विशेषकर हमारा देश भारत जल संकट की एक बड़ी विभीषिका का सामना कर सकता है। यह स्थिति संपूर्ण मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बन जाएगी। इसलिए यह आवश्यक है कि समय रहते छोटे-बड़े सभी नगरों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जाए और विभिन्न माध्यमों से जन-जन को जागरूक किया जाए। झारखंड जैसे समृद्ध और हरा-भरा प्रदेश, जहाँ वन, पर्वत, नदियाँ और प्रचूर मात्रा में विद्यमान खनिज संपदा हमारे जीवन-यापन का मुख्य आधार है। हमसबों को प्रकृति के साथ ऐसा संतुलित व्यवहार अपनाना होगा कि यह धरा अनंत काल तक आने वाली पीढ़ियों के पोषण का माध्यम बनी रहे। हम आज हैं, कल नहीं रहेंगे, किंतु हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इस विनाश का दंश न झेलें,यह सुनिश्चित करना हमसभी का दायित्व है। अधिकाधिक पौधरोपण करें और वर्षा जल का संचयन कर धरती में समाहित करने का कार्य करें। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को केवल पौधरोपण तक सीमित न रहकर पौधों में खाद देने, उनकी सही देखभाल करने और उन्हें पोषण प्रदान करने के लिए भी तिथियाँ निर्धारित कर विशेष अभियान चलानी चाहिए।

माननीय विधायकगणों के आवासीय परिसर में पौधरोपण करें

माननीय मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि माननीय विधायकगणों के आवासीय परिसर में भी फलदार पौधों का रोपण हो। इसके लिए सभी विधायकगणों को फलदार पौधा उपलब्ध कराकर उसका रोपन कराये जाएं, ताकि धरती में हरीयाली लाई जा सके।

कार्यक्रम में माननीय अध्यक्ष, झारखंड विधान सभा श्री रबींद्र नाथ महतो ने अपने संबोधन में राज्यव्यापी वन महोत्सव कार्यक्रम के उद्देश्य एवं प्राकृतिक तथा पर्यावरण संरक्षण की महत्ता को लेकर विस्तृत प्रकाश डाला। मौके पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजीव कुमार ने स्वागत संबोधन किया।

कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने विधान सभा परिसर में पौधारोपण किया और सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण का उपहार है।

इस अवसर पर माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, माननीय मंत्री श्री हफीजुल हसन, माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, माननीय विधायकगण, वन विभाग के वरीय अधिकारीगण एवं गणमान्य अतिथिगण सहित बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित थे।

आंदोलन के बाद छात्रों को नहीं होगी दिक्कत - रांची प्रशासन ने की फ्री बस व्यवस्था, देखें बस नंबर और ड्राइवर का संपर्क

आंदोलन में शामिल होने के बाद आसपास के विभिन्न जिलों से आए छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर जिला प्रशासन, रांची द्वारा मानवीय संवेदनशीलता के साथ विशेष पहल की गई है। अपने-अपने जिलों को लौटने वाले छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा आवश्यकतानुसार परिवहन की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन का उद्देश्य है कि बाहर से आए कोई भी छात्र अकेला, असहाय अथवा परेशान होकर अपने घर लौटने के लिए भटकने को मजबूर न हो।रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद एवं गिरिडीह के लिए बस नंबर के साथ ड्राइवर के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं।

जिलावार बस एवं चालक संपर्क विवरण

रामगढ़ एवं हजारीबाग के लिए:-

JH01GJ5480 - 9110913935

JH01BQ9049 - 8709036227

JH01FD1051 - 7632069309

JH01EW9093 - 9798208660

JH01DP8393 - 9771611890

JH01DW5232 - 9546189388

JH01FA5855 - 8862818140

JH01FA5338 - 7479994308

JH01FU7346 - 6204213843

JH01AV5082 - 6204020831

धनबाद के लिए:-

JH01DK4815 - 7209887996

JH01DK7314 - 9771555676

JH01DK8690 - 7091781702

JH01FA6089 - 9006749479

JH01FY9514 - 9708185363

गिरिडीह के लिए:-

JH01AZ8244 - 9905414556

JH01AZ8251- 8084222709

JH01FN6741- 9204563137

JH01EJ3281- 9204449827

JH01FN1057 - 9931427191

रिजर्व लोकल बसें:-

JH01BY5936 - 6200429723

JH01BP4097 - 9798230459

JH01BQ2170 - 6205690592

JH01EZ2519 - 9801235556

JH01EB8578 - 7631140679

जिला प्रशासन ने कहा है कि छात्र हमारे अपने हैं और उनकी सुरक्षा, सुविधा एवं सकुशल घर वापसी प्रशासन की प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर छात्र जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे निर्धारित परिवहन व्यवस्था का लाभ उठाएं और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचें।

छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी का आज झारखंड बंद, दिखने लगा असर

#jharkhandbandhtodayranchipoliceonhigh_alert

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर बढ़ते हुए कई बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले पानी की बौछार की और फिर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसपर भी छात्र नहीं माने तो पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया। अब छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने आज झारखंड बंद का आह्वान किया है।

बंद के समर्थन में सड़क पर उतरे भाजपा कार्यकर्ता

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज पर सवाल उठाते हुए आज के बंद को जोरदार बनाने का आह्वान किया। राजधानी रांची के चौक चौराहों पर सुबह 7:30 बजे से ही बंद का असर दिखना शुरू हो गया है। रांची के सबसे व्यस्ततम मार्ग में एक किशोरगंज चौक पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान वहां ट्रैफिक को लेकर जाम की स्थिति नजर आई। खासकर चार पहिया वाहनों को वहां से निकलने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

झारखंड बंद को लेकर प्रशासन की पुख्ता तैयारी

झारखंड बंद को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बंद के दौरान प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी कार्यालयों, संवेदनशील स्थानों और महत्वपूर्ण मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रहेगी। रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन ने देर रात प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बंद के दौरान गड़बड़ हिंसा और विधिव्यवस्था भंग करने चालों की खैर नहीं होगी। ऐसे लोंगों से सख्ती से निपटा जाएगा। डीसी ने कहा कि बंद से निपटने को लेकर हर स्तर पर तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा घेराव के दौरान काफी संयम बरता गया था।

रांची के अधिकांश स्कूल आज बंद

राजधानी रांची के अधिकांश स्कूलों ने मंगलवार को बंद रखने की घोषणा की है। डीपीएस, लेडी केसी राय स्कूल, जेवीएम श्यामली सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, कैंब्रियन स्कूल, ऑक्सफोर्ड स्कूल, सच्चिदानंद स्कूल, शारदा ग्लोबल स्कूल, मेरे नन्हे कदम स्कूल, ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल, चिरंजीव पब्लिक स्कूल, मनन विद्या मनरखन महतो स्कूल, गुरु गोविंद सिंह पब्लिक स्कूल, सरला बिरला स्कूल, श्रद्धानंद बाल मंदिर स्कूल, सेवंथ स्टार एकेडमी, संत माइकल स्कूल बंद है। इसके अलावा स्टेप बाय स्टेप स्कूल, ब्रिजफोर्ड स्कूल, टेंडर हार्ट स्कूल, ओडीएम सफायर स्कूल डीएवी नंदराज बरियातू, संत माइकल प्ले स्कूल, जी एंड एच स्कूल, सेंट्रल एकेडमी, लाला लाजपत राय स्कूल, नोवल किड्स प्ले स्कूल, यूरो किड्स मोराबादी और कांके, ड्रीमर डेन प्री स्कूल, कोलकाता पब्लिक स्कूल, सृजन वैली स्कूल, ईस्ट प्वाइंट स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल, डीएवी कपिलदेव, डीएवी बारियातू, डीएवी गांधीनगर आदि ने स्कूल बंद रखने का नोटिस जारी किया है।

झारखंड की मिट्टी और भाषा बनेगी सिनेमा की पहचान, आदिवासी महोत्सव में फिल्मकारों की विशेष चर्चा

झारखंड सरकार द्वारा आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को मोरहाबादी मैदान स्थित वीर बुधु भगत सभागार में विभिन्न लघु एवं एनिमेशन फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ फिल्म निर्माण पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फिल्म निर्माण की संभावनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने और झारखंड की अपनी सिनेमाई पहचान विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

फिल्म स्क्रीनिंग के साथ आयोजित मास्टर क्लास और पैनल डिस्कशन ने युवा फिल्मकारों, विद्यार्थियों और सिनेमा में रुचि रखने वाले दर्शकों को फिल्म निर्माण के रचनात्मक एवं तकनीकी पक्षों को करीब से समझने का अवसर दिया।

पैनल में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के हेड श्री इंद्रनील मुखर्जी, प्रदीप्तो भट्टाचार्य और फिल्म निर्देशक श्री निरंजन कुजूर शामिल रहे। तीनों ने फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न रचनात्मक पक्षों—प्रोडक्शन, निर्देशन और एडिटिंग के बारे में विस्तार से बताया।

कल्याणी खत्री ने पैनलिस्टों से फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े कई व्यावहारिक और तकनीकी सवाल पूछे। चर्चा में यह जानने की कोशिश की गई कि झारखंड में फिल्म निर्माण की शुरुआत कैसे की जाए, कहानी का चुनाव किस आधार पर हो, क्या बिना औपचारिक प्रशिक्षण के फिल्म बनाई जा सकती है, प्रकाश और प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल कैसे किया जाए, अभिनय में भावनाओं की सीमा कैसे तय हो, अभिनेता और निर्देशक के बीच रचनात्मक तालमेल कैसे विकसित हो तथा ओटीटी और फीचर फिल्मों की एडिटिंग में क्या अंतर है।

पैनलिस्टों ने अपने अनुभवों के आधार पर इन सवालों के जवाब दिए और फिल्म निर्माण को लेकर दर्शकों की जिज्ञासाओं को दूर किया।

‘फिल्म बनाने के लिए प्रशिक्षण से ज्यादा जरूरी है अपनी कहानी और दृष्टि’

फिल्म निर्माण में प्रशिक्षण की भूमिका पर चर्चा करते हुए सुदीप्तो ने कहा कि फिल्म बनाने के लिए हमेशा औपचारिक प्रशिक्षण जरूरी नहीं है। बिना संस्थागत प्रशिक्षण के भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक स्पष्ट सोच और अपनी कहानी को समझने की क्षमता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई फिल्मकार हैं जिन्होंने औपचारिक रूप से फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग नहीं ली, लेकिन उनकी डॉक्यूमेंट्री और फिल्मों में जीवन को देखने की गहरी दृष्टि दिखाई देती है। उनके अनुसार प्रशिक्षण तकनीकी दक्षता बढ़ाता है, लेकिन फिल्मकार की संवेदना, दृष्टि और कहानी कहने की क्षमता उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।

प्राकृतिक रोशनी से लेकर एलईडी तक बदली फिल्म निर्माण की दुनिया

फिल्मों में लाइटिंग के इस्तेमाल पर पूछे गए सवाल के जवाब में चर्चा हुई कि किसी दृश्य में प्राकृतिक प्रकाश का इस्तेमाल करना है या कृत्रिम रोशनी का I यह कहानी, दृश्य और निर्देशक की रचनात्मक जरूरत पर निर्भर करता है फिर भी प्राकृतिक प्रकाश की अपनी खूबसूरती और स्वाभाविकता है। इसलिए कई फिल्मकार आज भी कहानी की जरूरत के अनुसार प्राकृतिक रोशनी को प्राथमिकता देते हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि तकनीक साधन है, लेकिन दृश्य को प्रभावशाली बनाने का निर्णय फिल्मकार की दृष्टि करती है।

भावनाओं का संतुलन सिनेमा की बड़ी चुनौती

फिल्म में इमोशनल शूट्स को लेकर कल्याणी खत्री के सवाल पर पैनलिस्टों ने इसे पाककला से जोड़कर समझाया। उनका कहना था कि जिस तरह भोजन में यह अनुभव जरूरी है कि कौन-सा मसाला कितना और किस समय डालना है, उसी तरह सिनेमा में भी यह समझना जरूरी है कि किसी दृश्य में भावनाओं की मात्रा कितनी होनी चाहिए और कहां उसे रोक देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्म में इमोशन केवल अभिनेता के अभिनय से पैदा नहीं होता। निर्देशन, एडिटिंग, कलर, साउंड, म्यूजिक और दर्शक की मनोदशा सभी मिलकर किसी दृश्य के भावनात्मक प्रभाव को तय करते हैं। दर्शक को भावनाओं से जोड़ना जरूरी है, लेकिन भावनाओं की अति फिल्म को बोझिल भी बना सकती है।

‘अपनी मिट्टी की महक वाली कहानियां लिखना चाहता हूं’

फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट के चयन को लेकर पूछे गए सवाल पर फिल्म निर्देशक श्री निरंजन ने कहा कि उनके लिए कहानी का सबसे महत्वपूर्ण आधार वह चीज है, जो उन्हें भीतर से प्रभावित करती है। झारखंड की संस्कृति, समाज और अपनी जमीन से जुड़े अनुभव उन्हें कहानी लिखने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि वह ऐसी कहानियां लिखना और प्रोड्यूस करना पसंद करते हैं, जिनमें अपनी संस्कृति और मिट्टी की महक हो। कुरुख जैसी क्षेत्रीय भाषाओं और आदिवासी जीवन से जुड़े विषयों को सिनेमा में स्थान देना उनके रचनात्मक काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के अवसरों ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया, लेकिन वापस लौटकर उन्होंने अपनी जमीन और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी कहानियों पर काम करने को प्राथमिकता दी।

अभिनेता और निर्देशक के बीच समझ से बेहतर होता है अभिनय

अभिनेता के मूड और उसकी क्षमता को निर्देशक किस तरह समझता है, इस सवाल पर पैनलिस्टों ने कहा कि यह एक दिन में विकसित होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसकी शुरुआत कास्टिंग के समय से ही हो जाती है।

अभिनेता की ऊर्जा, उसकी अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व को देखकर निर्देशक यह समझने की कोशिश करता है कि किस भूमिका और परिस्थिति में उससे बेहतर काम लिया जा सकता है। शूटिंग के दौरान लगातार संवाद और साथ काम करने से अभिनेता और निर्देशक के बीच एक रचनात्मक समझ विकसित होती है। यही तालमेल अभिनय को अधिक सहज और प्रभावी बनाता है।

OTT और फीचर फिल्मों की एडिटिंग अलग

OTT और फीचर फिल्मों की एडिटिंग के अंतर पर चर्चा करते हुए पैनलिस्टों ने बताया कि दोनों माध्यमों की अपनी अलग जरूरतें हैं। OTT में दर्शक का ध्यान लगातार बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। इसलिए कट, साउंड, म्यूजिक और अन्य तकनीकी प्रभावों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत अलग तरीके से किया जाता है।

वहीं फीचर फिल्म में दर्शक लंबे समय तक एक निरंतर सिनेमाई अनुभव का हिस्सा बना रहता है। इसलिए उसमें कहानी, अभिनय, लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड और म्यूजिक को एक समग्र अनुभव के रूप में विकसित किया जाता है। वक्ताओं के अनुसार OTT और फीचर फिल्मों के लिए स्क्रिप्टिंग से लेकर एडिटिंग और साउंड डिजाइन तक की पूरी रचनात्मक प्रक्रिया में अंतर होता है।

बदलते सिनेमा में समाज की बदलती तस्वीर

फिल्मों और OTT में बढ़ती अश्लीलता, हिंसा और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। पैनलिस्टों ने कहा कि सिनेमा को समाज का आईना माना जाता है और समाज में होने वाले बदलावों का प्रभाव फिल्मों पर भी दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति का दायरा बढ़ा है और दर्शकों की पसंद भी बदली है। वहीं महिलाओं की बदलती सामाजिक भूमिका और फेमिनिज्म के प्रभाव ने भी फिल्मों की विषयवस्तु को प्रभावित किया है। इन बदलावों को केवल मनोरंजन के नजरिये से देखने के बजाय समाज की बदलती मानसिकता और संबंधों के प्रतिबिंब के रूप में भी समझने की जरूरत है।

क्षेत्रीय भाषाएं बन सकती हैं झारखंडी सिनेमा की ताकत

पैनल में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषाएं, लोककथाएं, आदिवासी जीवन, प्रकृति, इतिहास और समकालीन सामाजिक सरोकार यहां के सिनेमा को देश के अन्य हिस्सों से अलग पहचान दे सकते हैं।

स्थानीय भाषाओं में फिल्म निर्माण से न केवल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लेखकों, कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, संपादकों और तकनीशियनों के लिए रोजगार और रचनात्मक अवसर भी बढ़ेंगे।

पैनलिस्टों ने कहा कि झारखंड को यदि एक मजबूत फिल्म हब के रूप में विकसित करना है तो स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन, वित्तीय सहयोग और अपनी फिल्मों को प्रदर्शित करने के अवसर देने होंगे।

कार्यक्रम में हुई चर्चा का मूल संदेश स्पष्ट था—झारखंड के सिनेमा को अपनी पहचान बाहर से आयात करने की जरूरत नहीं है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी अपनी मिट्टी, भाषाएं, संस्कृति और कहानियां हैं। जरूरत है इन्हें कैमरे की नजर और सिनेमा की भाषा देने की। यही प्रयास झारखंड को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्रों में एक विशिष्ट पहचान दिला सकता है।

कार्यक्रम के दौरान एनिमेशन फिल्म ‘XENO’ और ‘PRIYO AMI’ सहित कई लघु एवं एनिमेशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। ‘PRIYO AMI’ का निर्देशन सुचना साहा ने किया है। इसके अलावा What Are You Searching, Look at the Sky और Tou-Tai जैसी फिल्मों की भी स्क्रीनिंग हुई।

झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में बनी ‘Sohrai’ (हिंदी), ‘Miyad Arah Gaada’ (मुंडारी), ‘Gadi Lohardaga Mail’ (हिंदी) और ‘Aabua Paika Kabu Baegya’ (मुंडारी) जैसी फिल्मों को भी दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया।

इन फिल्मों के माध्यम से झारखंड की स्थानीय संस्कृति, भाषाई विविधता, सामाजिक जीवन, परंपराओं और समकालीन सरोकारों को सिनेमाई अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया। खासकर क्षेत्रीय भाषाओं में बनी फिल्मों की स्क्रीनिंग ने यह रेखांकित किया कि झारखंड की भाषाएं और सांस्कृतिक विरासत सिनेमा के लिए महज विषय नहीं, बल्कि उसकी विशिष्ट पहचान का आधार बन सकती हैं।

कार्यक्रम में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के प्रभारी कुलपति श्री शुक्रांतो मजूमदार, श्री शिलादित्य सान्याल, श्री नीलांजन बनर्जी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती मोनिका टूटी, संयुक्त निदेशक श्री आनंद, उप निदेशक श्री सैयद राशिद अख्तर, फिल्म निर्देशक श्री बीजू टोप्पो सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती भारती ओझा ने किया।

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विश्व आदिवासी दिवस पर सिनेमा से सजी रांची: झारखंड फिल्म संस्थान की ओर पहला कदम

झारखंड फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल, मास्टरक्लास, आदिवासी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग और परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने रांची में दो दिनों तक सिनेमा का ऐसा माहौल तैयार किया, जहां फिल्में केवल पर्दे पर नहीं चलीं, बल्कि उनके जरिए संस्कृति, पहचान, परंपरा, भाषा और समाज पर गंभीर संवाद भी हुआ।

इस आयोजन ने फिल्म विद्यार्थियों, फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, सिनेप्रेमियों और सिनेमा से जुड़े लोगों को एक साझा मंच प्रदान किया। लंबे समय से झारखंड में सिनेमा के लिए एक मजबूत और रचनात्मक मंच की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। ऐसे में यह आयोजन सिनेप्रेमियों के लिए एक ऐसा अवसर बनकर सामने आया, जहां उन्होंने फिल्मों को देखने के साथ-साथ उनके निर्माण, कथ्य और सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया।

दो दिनों तक चले इस फिल्म फेस्टिवल में आदिवासी जीवन, संस्कृति और समाज की विविधता को केंद्र में रखने वाली फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग के बाद फिल्मों को लेकर चर्चा और संवाद ने कार्यक्रम को और सार्थक बनाया। दर्शकों और फिल्मकारों के बीच हुए संवाद ने यह स्पष्ट किया कि सिनेमा मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज की स्मृतियों, संघर्षों, सवालों और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

फिल्म फेस्टिवल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहा फिल्मों के माध्यम से आदिवासी समाज को समझने की कोशिश।

मास्टरक्लास के दौरान विद्यार्थियों और सिनेप्रेमियों को फिल्म निर्माण की बारीकियों, कहानी कहने की कला और सिनेमा के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों से परिचित कराया गया। प्रतिभागियों ने फिल्मकारों और विशेषज्ञों से संवाद करते हुए सिनेमा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।

दो दिवसीय आयोजन की खास बात यह रही कि इसने रांची के सिनेप्रेमियों को एक साझा मंच दिया। फिल्मों के प्रति दर्शकों का उत्साह और प्रतिक्रियाएं पूरे आयोजन के दौरान देखने को मिलीं। स्क्रीनिंग के बाद हुई चर्चाओं में दर्शकों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।

फिल्म देखने आए दर्शकों, विद्यार्थियों और सिनेमा से जुड़े लोगों ने इस तरह के आयोजनों को झारखंड में सिनेमा की नई संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम ने यह एहसास कराया कि झारखंड में न केवल फिल्मों और फिल्म निर्माण को लेकर उत्साह है, बल्कि यहां एक ऐसे दर्शक वर्ग की भी मौजूदगी है जो सार्थक और विषयपरक सिनेमा को देखने, समझने और उस पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की भाजपा की कोशिश विफल, छात्रों और पुलिस ने रखा संयम : झामुमो

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान छात्र संगठनों और पुलिस-प्रशासन ने जिस संयम, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति के लिए सराहनीय है। शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार का सम्मान करते हुए सरकार लगातार छात्रों से संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से भारतीय जनता पार्टी ने छात्रों के इस शांतिपूर्ण आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने और अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए उसे दिग्भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया। भाजपा की कोशिश थी कि छात्रों के वास्तविक मुद्दों को पीछे धकेलकर आंदोलन को सरकार के साथ टकराव और राज्य में अशांति की दिशा में ले जाया जाए। लेकिन छात्रों की समझदारी और पुलिस-प्रशासन के संयम के कारण भाजपा अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता द्वारा लगातार नकारे जाने के बाद भाजपा राजनीतिक रूप से बौखलाई हुई है। अपने राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए वह अब झारखंड के युवाओं के भविष्य और उनकी चिंताओं को राजनीतिक अस्थिरता का माध्यम बनाने की कोशिश कर रही है। युवाओं को दिग्भ्रमित कर राज्य में तनाव और अराजकता का वातावरण तैयार करना भाजपा की इसी राजनीति का हिस्सा है। लेकिन भाजपा को यह समझ लेना चाहिए यह झारखंड है। यह वह राज्य है जहां के युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हैं। यह वह राज्य है जहां मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन लगातार युवाओं से संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान की अपील कर रहे हैं। झारखंड की जनता और युवा भाजपा की राजनीतिक साजिश को समझते हैं। भाजपा अपने मंसूबे में न कभी कामयाब हुई है और न उसे कामयाब होने दिया जाएगा।

सरकार छात्रों के मुद्दों पर गंभीर, वार्ता से समाधान की कोशिश

झामुमो विनोद पांडेय ने कहा कि छात्र प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय समिति के समक्ष हुई वार्ता को सरकार ने पूरी गंभीरता से लिया है। छात्रों की मांगों और उनके भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चर्चा की है तथा अधिकांश मुद्दों के समाधान की दिशा में सहमति और आगे बढ़ने की संभावनाएं बनी हैं। सरकार का स्पष्ट मत है कि छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान सड़क पर टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, विमर्श और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील है और उनके हित में आवश्यक निर्णय लेने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने ने कहा कि कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट रूप से आशंका जताई है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक स्वरूप देने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। लोकतांत्रिक आंदोलन के अधिकार का सम्मान किया जाएगा, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भाजपा की कोशिश रही कि शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाया जाए

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने पूरी कोशिश की कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक टकराव में बदला जाए। लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हो सकी। छात्र संयमित रहे और पुलिस प्रशासन ने भी पूरी संवेदनशीलता, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभाला। पुलिस-प्रशासन के इस संयमित रवैये की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पुलिस ने इसी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। भाजपा के राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं होने का परिणाम यह है कि अपने राजनीतिक नेतृत्व और आकाओं से खरी-खोटी सुनने के बाद भाजपा अब बौखलाहट में मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान कर रही है। झामुमो ने कहा कि बंद और टकराव की राजनीति से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला है।

छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार ने गंभीरता से वार्ता की और समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की। लेकिन भाजपा ने राजनीतिक मंशा से छात्रों के निर्मल और शांतिपूर्ण आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास किया। उच्चस्तरीय समिति के समक्ष छात्र प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता से यह स्पष्ट हुआ कि छात्रों की वास्तविक चिंता उनके भविष्य, रोजगार और अवसरों को लेकर है। इन जायज चिंताओं का समाधान सरकार संवाद के माध्यम से करना चाहती है। लेकिन भाजपा ने इन मुद्दों को राजनीतिक नाटक में बदलने और पूरी प्रक्रिया को भटकाने का प्रयास किया। छात्र सरकार के प्रस्ताव पर विचार कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते थे, लेकिन उनके पीछे खड़े राजनीतिक तत्वों ने आंदोलन को 10 तारीख को झारखंड की सड़कों पर अराजकता पैदा करने के उद्देश्य से हाईजैक करने की कोशिश की। युवाओं को दिग्भ्रमित कर सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा करना भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

छात्रों के साथ है सरकार

झामुमो ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। छात्र अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें, सरकार उनकी बात सुनेगी और समाधान की दिशा में हर संभव कदम उठाएगी। छात्रों ने भी लगातार कहा है कि वे संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और किसी प्रकार की हिंसा या उत्तेजना का रास्ता नहीं अपनाएंगे। सरकार को अपने छात्रों पर पूरा विश्वास है। लेकिन यदि शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में कोई असामाजिक या राजनीतिक तत्व हिंसा, तोड़फोड़ या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करता है, तो उसके साथ कानून के मुताबिक पूरी कठोरता से निपटा जाएगा। लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार किसी को नहीं है।

झामुमो ने कहा कि मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन का स्पष्ट संदेश है सरकार संवाद के लिए तैयार है, छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए तैयार है और युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। भाजपा जितना चाहे राजनीतिक षड्यंत्र कर ले, झारखंड के युवाओं को दिग्भ्रमित करने और राज्य को अशांत करने की उसकी कोशिश सफल नहीं होगी। झारखंड की जनता शांति, विकास और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के पक्ष में है और भाजपा की टकराव तथा अराजकता की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

झामुमो छात्रों से अपील करता है कि वे किसी भी राजनीतिक उकसावे में न आएं, अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखें और सरकार के साथ संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। सरकार उनके साथ खड़ी है और उनके जायज हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।