आंदोलन के बाद छात्रों को नहीं होगी दिक्कत - रांची प्रशासन ने की फ्री बस व्यवस्था, देखें बस नंबर और ड्राइवर का संपर्क

आंदोलन में शामिल होने के बाद आसपास के विभिन्न जिलों से आए छात्रों की सुरक्षित वापसी को लेकर जिला प्रशासन, रांची द्वारा मानवीय संवेदनशीलता के साथ विशेष पहल की गई है। अपने-अपने जिलों को लौटने वाले छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा आवश्यकतानुसार परिवहन की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन का उद्देश्य है कि बाहर से आए कोई भी छात्र अकेला, असहाय अथवा परेशान होकर अपने घर लौटने के लिए भटकने को मजबूर न हो।रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद एवं गिरिडीह के लिए बस नंबर के साथ ड्राइवर के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं।

जिलावार बस एवं चालक संपर्क विवरण

रामगढ़ एवं हजारीबाग के लिए:-

JH01GJ5480 - 9110913935

JH01BQ9049 - 8709036227

JH01FD1051 - 7632069309

JH01EW9093 - 9798208660

JH01DP8393 - 9771611890

JH01DW5232 - 9546189388

JH01FA5855 - 8862818140

JH01FA5338 - 7479994308

JH01FU7346 - 6204213843

JH01AV5082 - 6204020831

धनबाद के लिए:-

JH01DK4815 - 7209887996

JH01DK7314 - 9771555676

JH01DK8690 - 7091781702

JH01FA6089 - 9006749479

JH01FY9514 - 9708185363

गिरिडीह के लिए:-

JH01AZ8244 - 9905414556

JH01AZ8251- 8084222709

JH01FN6741- 9204563137

JH01EJ3281- 9204449827

JH01FN1057 - 9931427191

रिजर्व लोकल बसें:-

JH01BY5936 - 6200429723

JH01BP4097 - 9798230459

JH01BQ2170 - 6205690592

JH01EZ2519 - 9801235556

JH01EB8578 - 7631140679

जिला प्रशासन ने कहा है कि छात्र हमारे अपने हैं और उनकी सुरक्षा, सुविधा एवं सकुशल घर वापसी प्रशासन की प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर छात्र जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे निर्धारित परिवहन व्यवस्था का लाभ उठाएं और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचें।

छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी का आज झारखंड बंद, दिखने लगा असर

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर बढ़ते हुए कई बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले पानी की बौछार की और फिर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसपर भी छात्र नहीं माने तो पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया। अब छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने आज झारखंड बंद का आह्वान किया है।

बंद के समर्थन में सड़क पर उतरे भाजपा कार्यकर्ता

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज पर सवाल उठाते हुए आज के बंद को जोरदार बनाने का आह्वान किया। राजधानी रांची के चौक चौराहों पर सुबह 7:30 बजे से ही बंद का असर दिखना शुरू हो गया है। रांची के सबसे व्यस्ततम मार्ग में एक किशोरगंज चौक पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान वहां ट्रैफिक को लेकर जाम की स्थिति नजर आई। खासकर चार पहिया वाहनों को वहां से निकलने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

झारखंड बंद को लेकर प्रशासन की पुख्ता तैयारी

झारखंड बंद को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बंद के दौरान प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी कार्यालयों, संवेदनशील स्थानों और महत्वपूर्ण मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती रहेगी। रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन ने देर रात प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बंद के दौरान गड़बड़ हिंसा और विधिव्यवस्था भंग करने चालों की खैर नहीं होगी। ऐसे लोंगों से सख्ती से निपटा जाएगा। डीसी ने कहा कि बंद से निपटने को लेकर हर स्तर पर तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा घेराव के दौरान काफी संयम बरता गया था।

रांची के अधिकांश स्कूल आज बंद

राजधानी रांची के अधिकांश स्कूलों ने मंगलवार को बंद रखने की घोषणा की है। डीपीएस, लेडी केसी राय स्कूल, जेवीएम श्यामली सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, कैंब्रियन स्कूल, ऑक्सफोर्ड स्कूल, सच्चिदानंद स्कूल, शारदा ग्लोबल स्कूल, मेरे नन्हे कदम स्कूल, ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल, चिरंजीव पब्लिक स्कूल, मनन विद्या मनरखन महतो स्कूल, गुरु गोविंद सिंह पब्लिक स्कूल, सरला बिरला स्कूल, श्रद्धानंद बाल मंदिर स्कूल, सेवंथ स्टार एकेडमी, संत माइकल स्कूल बंद है। इसके अलावा स्टेप बाय स्टेप स्कूल, ब्रिजफोर्ड स्कूल, टेंडर हार्ट स्कूल, ओडीएम सफायर स्कूल डीएवी नंदराज बरियातू, संत माइकल प्ले स्कूल, जी एंड एच स्कूल, सेंट्रल एकेडमी, लाला लाजपत राय स्कूल, नोवल किड्स प्ले स्कूल, यूरो किड्स मोराबादी और कांके, ड्रीमर डेन प्री स्कूल, कोलकाता पब्लिक स्कूल, सृजन वैली स्कूल, ईस्ट प्वाइंट स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल, डीएवी कपिलदेव, डीएवी बारियातू, डीएवी गांधीनगर आदि ने स्कूल बंद रखने का नोटिस जारी किया है।

झारखंड की मिट्टी और भाषा बनेगी सिनेमा की पहचान, आदिवासी महोत्सव में फिल्मकारों की विशेष चर्चा

झारखंड सरकार द्वारा आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को मोरहाबादी मैदान स्थित वीर बुधु भगत सभागार में विभिन्न लघु एवं एनिमेशन फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ फिल्म निर्माण पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फिल्म निर्माण की संभावनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने और झारखंड की अपनी सिनेमाई पहचान विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

फिल्म स्क्रीनिंग के साथ आयोजित मास्टर क्लास और पैनल डिस्कशन ने युवा फिल्मकारों, विद्यार्थियों और सिनेमा में रुचि रखने वाले दर्शकों को फिल्म निर्माण के रचनात्मक एवं तकनीकी पक्षों को करीब से समझने का अवसर दिया।

पैनल में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के हेड श्री इंद्रनील मुखर्जी, प्रदीप्तो भट्टाचार्य और फिल्म निर्देशक श्री निरंजन कुजूर शामिल रहे। तीनों ने फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न रचनात्मक पक्षों—प्रोडक्शन, निर्देशन और एडिटिंग के बारे में विस्तार से बताया।

कल्याणी खत्री ने पैनलिस्टों से फिल्म निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े कई व्यावहारिक और तकनीकी सवाल पूछे। चर्चा में यह जानने की कोशिश की गई कि झारखंड में फिल्म निर्माण की शुरुआत कैसे की जाए, कहानी का चुनाव किस आधार पर हो, क्या बिना औपचारिक प्रशिक्षण के फिल्म बनाई जा सकती है, प्रकाश और प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल कैसे किया जाए, अभिनय में भावनाओं की सीमा कैसे तय हो, अभिनेता और निर्देशक के बीच रचनात्मक तालमेल कैसे विकसित हो तथा ओटीटी और फीचर फिल्मों की एडिटिंग में क्या अंतर है।

पैनलिस्टों ने अपने अनुभवों के आधार पर इन सवालों के जवाब दिए और फिल्म निर्माण को लेकर दर्शकों की जिज्ञासाओं को दूर किया।

‘फिल्म बनाने के लिए प्रशिक्षण से ज्यादा जरूरी है अपनी कहानी और दृष्टि’

फिल्म निर्माण में प्रशिक्षण की भूमिका पर चर्चा करते हुए सुदीप्तो ने कहा कि फिल्म बनाने के लिए हमेशा औपचारिक प्रशिक्षण जरूरी नहीं है। बिना संस्थागत प्रशिक्षण के भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक स्पष्ट सोच और अपनी कहानी को समझने की क्षमता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कई फिल्मकार हैं जिन्होंने औपचारिक रूप से फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग नहीं ली, लेकिन उनकी डॉक्यूमेंट्री और फिल्मों में जीवन को देखने की गहरी दृष्टि दिखाई देती है। उनके अनुसार प्रशिक्षण तकनीकी दक्षता बढ़ाता है, लेकिन फिल्मकार की संवेदना, दृष्टि और कहानी कहने की क्षमता उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।

प्राकृतिक रोशनी से लेकर एलईडी तक बदली फिल्म निर्माण की दुनिया

फिल्मों में लाइटिंग के इस्तेमाल पर पूछे गए सवाल के जवाब में चर्चा हुई कि किसी दृश्य में प्राकृतिक प्रकाश का इस्तेमाल करना है या कृत्रिम रोशनी का I यह कहानी, दृश्य और निर्देशक की रचनात्मक जरूरत पर निर्भर करता है फिर भी प्राकृतिक प्रकाश की अपनी खूबसूरती और स्वाभाविकता है। इसलिए कई फिल्मकार आज भी कहानी की जरूरत के अनुसार प्राकृतिक रोशनी को प्राथमिकता देते हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि तकनीक साधन है, लेकिन दृश्य को प्रभावशाली बनाने का निर्णय फिल्मकार की दृष्टि करती है।

भावनाओं का संतुलन सिनेमा की बड़ी चुनौती

फिल्म में इमोशनल शूट्स को लेकर कल्याणी खत्री के सवाल पर पैनलिस्टों ने इसे पाककला से जोड़कर समझाया। उनका कहना था कि जिस तरह भोजन में यह अनुभव जरूरी है कि कौन-सा मसाला कितना और किस समय डालना है, उसी तरह सिनेमा में भी यह समझना जरूरी है कि किसी दृश्य में भावनाओं की मात्रा कितनी होनी चाहिए और कहां उसे रोक देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्म में इमोशन केवल अभिनेता के अभिनय से पैदा नहीं होता। निर्देशन, एडिटिंग, कलर, साउंड, म्यूजिक और दर्शक की मनोदशा सभी मिलकर किसी दृश्य के भावनात्मक प्रभाव को तय करते हैं। दर्शक को भावनाओं से जोड़ना जरूरी है, लेकिन भावनाओं की अति फिल्म को बोझिल भी बना सकती है।

‘अपनी मिट्टी की महक वाली कहानियां लिखना चाहता हूं’

फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट के चयन को लेकर पूछे गए सवाल पर फिल्म निर्देशक श्री निरंजन ने कहा कि उनके लिए कहानी का सबसे महत्वपूर्ण आधार वह चीज है, जो उन्हें भीतर से प्रभावित करती है। झारखंड की संस्कृति, समाज और अपनी जमीन से जुड़े अनुभव उन्हें कहानी लिखने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि वह ऐसी कहानियां लिखना और प्रोड्यूस करना पसंद करते हैं, जिनमें अपनी संस्कृति और मिट्टी की महक हो। कुरुख जैसी क्षेत्रीय भाषाओं और आदिवासी जीवन से जुड़े विषयों को सिनेमा में स्थान देना उनके रचनात्मक काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के अवसरों ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया, लेकिन वापस लौटकर उन्होंने अपनी जमीन और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी कहानियों पर काम करने को प्राथमिकता दी।

अभिनेता और निर्देशक के बीच समझ से बेहतर होता है अभिनय

अभिनेता के मूड और उसकी क्षमता को निर्देशक किस तरह समझता है, इस सवाल पर पैनलिस्टों ने कहा कि यह एक दिन में विकसित होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसकी शुरुआत कास्टिंग के समय से ही हो जाती है।

अभिनेता की ऊर्जा, उसकी अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व को देखकर निर्देशक यह समझने की कोशिश करता है कि किस भूमिका और परिस्थिति में उससे बेहतर काम लिया जा सकता है। शूटिंग के दौरान लगातार संवाद और साथ काम करने से अभिनेता और निर्देशक के बीच एक रचनात्मक समझ विकसित होती है। यही तालमेल अभिनय को अधिक सहज और प्रभावी बनाता है।

OTT और फीचर फिल्मों की एडिटिंग अलग

OTT और फीचर फिल्मों की एडिटिंग के अंतर पर चर्चा करते हुए पैनलिस्टों ने बताया कि दोनों माध्यमों की अपनी अलग जरूरतें हैं। OTT में दर्शक का ध्यान लगातार बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। इसलिए कट, साउंड, म्यूजिक और अन्य तकनीकी प्रभावों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत अलग तरीके से किया जाता है।

वहीं फीचर फिल्म में दर्शक लंबे समय तक एक निरंतर सिनेमाई अनुभव का हिस्सा बना रहता है। इसलिए उसमें कहानी, अभिनय, लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड और म्यूजिक को एक समग्र अनुभव के रूप में विकसित किया जाता है। वक्ताओं के अनुसार OTT और फीचर फिल्मों के लिए स्क्रिप्टिंग से लेकर एडिटिंग और साउंड डिजाइन तक की पूरी रचनात्मक प्रक्रिया में अंतर होता है।

बदलते सिनेमा में समाज की बदलती तस्वीर

फिल्मों और OTT में बढ़ती अश्लीलता, हिंसा और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। पैनलिस्टों ने कहा कि सिनेमा को समाज का आईना माना जाता है और समाज में होने वाले बदलावों का प्रभाव फिल्मों पर भी दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति का दायरा बढ़ा है और दर्शकों की पसंद भी बदली है। वहीं महिलाओं की बदलती सामाजिक भूमिका और फेमिनिज्म के प्रभाव ने भी फिल्मों की विषयवस्तु को प्रभावित किया है। इन बदलावों को केवल मनोरंजन के नजरिये से देखने के बजाय समाज की बदलती मानसिकता और संबंधों के प्रतिबिंब के रूप में भी समझने की जरूरत है।

क्षेत्रीय भाषाएं बन सकती हैं झारखंडी सिनेमा की ताकत

पैनल में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषाएं, लोककथाएं, आदिवासी जीवन, प्रकृति, इतिहास और समकालीन सामाजिक सरोकार यहां के सिनेमा को देश के अन्य हिस्सों से अलग पहचान दे सकते हैं।

स्थानीय भाषाओं में फिल्म निर्माण से न केवल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लेखकों, कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, संपादकों और तकनीशियनों के लिए रोजगार और रचनात्मक अवसर भी बढ़ेंगे।

पैनलिस्टों ने कहा कि झारखंड को यदि एक मजबूत फिल्म हब के रूप में विकसित करना है तो स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन, वित्तीय सहयोग और अपनी फिल्मों को प्रदर्शित करने के अवसर देने होंगे।

कार्यक्रम में हुई चर्चा का मूल संदेश स्पष्ट था—झारखंड के सिनेमा को अपनी पहचान बाहर से आयात करने की जरूरत नहीं है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी अपनी मिट्टी, भाषाएं, संस्कृति और कहानियां हैं। जरूरत है इन्हें कैमरे की नजर और सिनेमा की भाषा देने की। यही प्रयास झारखंड को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्रों में एक विशिष्ट पहचान दिला सकता है।

कार्यक्रम के दौरान एनिमेशन फिल्म ‘XENO’ और ‘PRIYO AMI’ सहित कई लघु एवं एनिमेशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। ‘PRIYO AMI’ का निर्देशन सुचना साहा ने किया है। इसके अलावा What Are You Searching, Look at the Sky और Tou-Tai जैसी फिल्मों की भी स्क्रीनिंग हुई।

झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में बनी ‘Sohrai’ (हिंदी), ‘Miyad Arah Gaada’ (मुंडारी), ‘Gadi Lohardaga Mail’ (हिंदी) और ‘Aabua Paika Kabu Baegya’ (मुंडारी) जैसी फिल्मों को भी दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया।

इन फिल्मों के माध्यम से झारखंड की स्थानीय संस्कृति, भाषाई विविधता, सामाजिक जीवन, परंपराओं और समकालीन सरोकारों को सिनेमाई अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया। खासकर क्षेत्रीय भाषाओं में बनी फिल्मों की स्क्रीनिंग ने यह रेखांकित किया कि झारखंड की भाषाएं और सांस्कृतिक विरासत सिनेमा के लिए महज विषय नहीं, बल्कि उसकी विशिष्ट पहचान का आधार बन सकती हैं।

कार्यक्रम में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के प्रभारी कुलपति श्री शुक्रांतो मजूमदार, श्री शिलादित्य सान्याल, श्री नीलांजन बनर्जी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती मोनिका टूटी, संयुक्त निदेशक श्री आनंद, उप निदेशक श्री सैयद राशिद अख्तर, फिल्म निर्देशक श्री बीजू टोप्पो सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती भारती ओझा ने किया।

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विश्व आदिवासी दिवस पर सिनेमा से सजी रांची: झारखंड फिल्म संस्थान की ओर पहला कदम

झारखंड फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल, मास्टरक्लास, आदिवासी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग और परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने रांची में दो दिनों तक सिनेमा का ऐसा माहौल तैयार किया, जहां फिल्में केवल पर्दे पर नहीं चलीं, बल्कि उनके जरिए संस्कृति, पहचान, परंपरा, भाषा और समाज पर गंभीर संवाद भी हुआ।

इस आयोजन ने फिल्म विद्यार्थियों, फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, सिनेप्रेमियों और सिनेमा से जुड़े लोगों को एक साझा मंच प्रदान किया। लंबे समय से झारखंड में सिनेमा के लिए एक मजबूत और रचनात्मक मंच की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। ऐसे में यह आयोजन सिनेप्रेमियों के लिए एक ऐसा अवसर बनकर सामने आया, जहां उन्होंने फिल्मों को देखने के साथ-साथ उनके निर्माण, कथ्य और सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया।

दो दिनों तक चले इस फिल्म फेस्टिवल में आदिवासी जीवन, संस्कृति और समाज की विविधता को केंद्र में रखने वाली फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग के बाद फिल्मों को लेकर चर्चा और संवाद ने कार्यक्रम को और सार्थक बनाया। दर्शकों और फिल्मकारों के बीच हुए संवाद ने यह स्पष्ट किया कि सिनेमा मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज की स्मृतियों, संघर्षों, सवालों और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।

फिल्म फेस्टिवल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहा फिल्मों के माध्यम से आदिवासी समाज को समझने की कोशिश।

मास्टरक्लास के दौरान विद्यार्थियों और सिनेप्रेमियों को फिल्म निर्माण की बारीकियों, कहानी कहने की कला और सिनेमा के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों से परिचित कराया गया। प्रतिभागियों ने फिल्मकारों और विशेषज्ञों से संवाद करते हुए सिनेमा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।

दो दिवसीय आयोजन की खास बात यह रही कि इसने रांची के सिनेप्रेमियों को एक साझा मंच दिया। फिल्मों के प्रति दर्शकों का उत्साह और प्रतिक्रियाएं पूरे आयोजन के दौरान देखने को मिलीं। स्क्रीनिंग के बाद हुई चर्चाओं में दर्शकों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।

फिल्म देखने आए दर्शकों, विद्यार्थियों और सिनेमा से जुड़े लोगों ने इस तरह के आयोजनों को झारखंड में सिनेमा की नई संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम ने यह एहसास कराया कि झारखंड में न केवल फिल्मों और फिल्म निर्माण को लेकर उत्साह है, बल्कि यहां एक ऐसे दर्शक वर्ग की भी मौजूदगी है जो सार्थक और विषयपरक सिनेमा को देखने, समझने और उस पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की भाजपा की कोशिश विफल, छात्रों और पुलिस ने रखा संयम : झामुमो

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान छात्र संगठनों और पुलिस-प्रशासन ने जिस संयम, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति के लिए सराहनीय है। शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार का सम्मान करते हुए सरकार लगातार छात्रों से संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से भारतीय जनता पार्टी ने छात्रों के इस शांतिपूर्ण आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने और अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए उसे दिग्भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया। भाजपा की कोशिश थी कि छात्रों के वास्तविक मुद्दों को पीछे धकेलकर आंदोलन को सरकार के साथ टकराव और राज्य में अशांति की दिशा में ले जाया जाए। लेकिन छात्रों की समझदारी और पुलिस-प्रशासन के संयम के कारण भाजपा अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जनता द्वारा लगातार नकारे जाने के बाद भाजपा राजनीतिक रूप से बौखलाई हुई है। अपने राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए वह अब झारखंड के युवाओं के भविष्य और उनकी चिंताओं को राजनीतिक अस्थिरता का माध्यम बनाने की कोशिश कर रही है। युवाओं को दिग्भ्रमित कर राज्य में तनाव और अराजकता का वातावरण तैयार करना भाजपा की इसी राजनीति का हिस्सा है। लेकिन भाजपा को यह समझ लेना चाहिए यह झारखंड है। यह वह राज्य है जहां के युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हैं। यह वह राज्य है जहां मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन लगातार युवाओं से संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान की अपील कर रहे हैं। झारखंड की जनता और युवा भाजपा की राजनीतिक साजिश को समझते हैं। भाजपा अपने मंसूबे में न कभी कामयाब हुई है और न उसे कामयाब होने दिया जाएगा।

सरकार छात्रों के मुद्दों पर गंभीर, वार्ता से समाधान की कोशिश

झामुमो विनोद पांडेय ने कहा कि छात्र प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय समिति के समक्ष हुई वार्ता को सरकार ने पूरी गंभीरता से लिया है। छात्रों की मांगों और उनके भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चर्चा की है तथा अधिकांश मुद्दों के समाधान की दिशा में सहमति और आगे बढ़ने की संभावनाएं बनी हैं। सरकार का स्पष्ट मत है कि छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान सड़क पर टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, विमर्श और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील है और उनके हित में आवश्यक निर्णय लेने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने ने कहा कि कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट रूप से आशंका जताई है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक स्वरूप देने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। लोकतांत्रिक आंदोलन के अधिकार का सम्मान किया जाएगा, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भाजपा की कोशिश रही कि शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाया जाए

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने पूरी कोशिश की कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक टकराव में बदला जाए। लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हो सकी। छात्र संयमित रहे और पुलिस प्रशासन ने भी पूरी संवेदनशीलता, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभाला। पुलिस-प्रशासन के इस संयमित रवैये की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पुलिस ने इसी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। भाजपा के राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं होने का परिणाम यह है कि अपने राजनीतिक नेतृत्व और आकाओं से खरी-खोटी सुनने के बाद भाजपा अब बौखलाहट में मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान कर रही है। झामुमो ने कहा कि बंद और टकराव की राजनीति से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला है।

छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार ने गंभीरता से वार्ता की और समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की। लेकिन भाजपा ने राजनीतिक मंशा से छात्रों के निर्मल और शांतिपूर्ण आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास किया। उच्चस्तरीय समिति के समक्ष छात्र प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता से यह स्पष्ट हुआ कि छात्रों की वास्तविक चिंता उनके भविष्य, रोजगार और अवसरों को लेकर है। इन जायज चिंताओं का समाधान सरकार संवाद के माध्यम से करना चाहती है। लेकिन भाजपा ने इन मुद्दों को राजनीतिक नाटक में बदलने और पूरी प्रक्रिया को भटकाने का प्रयास किया। छात्र सरकार के प्रस्ताव पर विचार कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते थे, लेकिन उनके पीछे खड़े राजनीतिक तत्वों ने आंदोलन को 10 तारीख को झारखंड की सड़कों पर अराजकता पैदा करने के उद्देश्य से हाईजैक करने की कोशिश की। युवाओं को दिग्भ्रमित कर सरकार के साथ टकराव की स्थिति पैदा करना भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

छात्रों के साथ है सरकार

झामुमो ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। छात्र अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें, सरकार उनकी बात सुनेगी और समाधान की दिशा में हर संभव कदम उठाएगी। छात्रों ने भी लगातार कहा है कि वे संविधान के दायरे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और किसी प्रकार की हिंसा या उत्तेजना का रास्ता नहीं अपनाएंगे। सरकार को अपने छात्रों पर पूरा विश्वास है। लेकिन यदि शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में कोई असामाजिक या राजनीतिक तत्व हिंसा, तोड़फोड़ या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करता है, तो उसके साथ कानून के मुताबिक पूरी कठोरता से निपटा जाएगा। लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार किसी को नहीं है।

झामुमो ने कहा कि मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन का स्पष्ट संदेश है सरकार संवाद के लिए तैयार है, छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए तैयार है और युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। भाजपा जितना चाहे राजनीतिक षड्यंत्र कर ले, झारखंड के युवाओं को दिग्भ्रमित करने और राज्य को अशांत करने की उसकी कोशिश सफल नहीं होगी। झारखंड की जनता शांति, विकास और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के पक्ष में है और भाजपा की टकराव तथा अराजकता की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

झामुमो छात्रों से अपील करता है कि वे किसी भी राजनीतिक उकसावे में न आएं, अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखें और सरकार के साथ संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। सरकार उनके साथ खड़ी है और उनके जायज हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

रांची जिला प्रशासन की पहल: आंदोलन में आए छात्रों की सुरक्षित घर वापसी के लिए मुफ्त परिवहन व्यवस्था, हेल्पलाइन जारी*

रांची में छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए दूसरे जिलों से आए छात्रों की सुविधा और सुरक्षित वापसी को लेकर जिला प्रशासन ने मानवीय संवेदनशीलता के साथ पहल की है। आंदोलन में शामिल होने के बाद अपने-अपने जिलों को लौटने वाले छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा परिवहन व्यवस्था की गई है।

जिला प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं सामूहिक रूप से नजदीकी जिलों की ओर जाने वाले छात्रों के लिए आवश्यकतानुसार परिवहन की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का उद्देश्य है कि बाहर से आए कोई भी छात्र अकेला, असहाय या परेशान होकर अपने घर लौटने के लिए भटकने को मजबूर न हो।

जिला प्रशासन द्वारा छात्रों की सुविधा एवं आवश्यक सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 9162738438 जारी किया गया है। दूसरे जिलों से आए छात्र परिवहन संबंधी सहायता के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। प्राप्त सूचना के आधार पर छात्रों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्र हमारे अपने हैं और उनकी सुरक्षा, सुविधा एवं सकुशल घर वापसी प्रशासन की प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में कोई छात्र स्वयं को अकेला न समझे। आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन से संपर्क करें, प्रशासन हरसंभव सहयोग के लिए तत्पर है।

जिला प्रशासन की ओर से छात्रों से अपील की गई है कि वे शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से अपने घरों की ओर लौटें। किसी भी प्रकार की आवश्यकता अथवा परिवहन संबंधी परेशानी होने पर हेल्पलाइन नंबर 9162738438 पर संपर्क करें।

स्वतंत्रता दिवस 2026: राज्य के 10 जिलों में मंत्री करेंगे झंडोत्तोलन

रांची। स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के अवसर पर 15 अगस्त को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में माननीय मंत्रियों द्वारा झंडोत्तोलन किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जारी निर्देश के अनुसार पलामू (डालटनगंज) में माननीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर एवं माननीय मंत्री श्री दीपक बिरुवा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गुमला में भी माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा, गोड्डा में माननीय मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव, जामताड़ा में माननीय मंत्री श्री इरफान अंसारी, देवघर में माननीय मंत्री श्री हफीजूल हसन, पाकुड़ में माननीय मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, बोकारो में माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह में माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार तथा लोहरदगा में माननीय मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की झंडोत्तोलन करेंगी।

विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों एवं वरीय पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित मंत्रियों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय एवं सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने पर विशेष बल दिया है।

छात्रों के विधानसभा मार्च के बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, CID की बड़ी कार्रवाई

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झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को कथित परीक्षा अनियमितता के मामले में सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच हुई है। सीआईडी की टीम पिछले दिनों उनसे तीन दिन पूछताछ कर चुकी थी।

सीआईडी ने पहली ही की थी ख्यांगते से पूछताछ

14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में सीआईडी ने पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इससे पहले उनके सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेज, OMR शीट और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे। हालांकि ख्यांगते ने किसी भी गड़बड़ी में संलिप्तता से इनकार किया था।

पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच जारी

परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच एजेंसी पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच कर रही थी। इससे पहले जांच एजेंसी ने एल खियांग्ते के आवास समेत उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई थी।अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

जांच के बीच खियांग्ते ने दिया था इस्तीफा

एल. खियांग्ते ने हाल ही में जेपीएसी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया था। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया, जब जेपीएसी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा था। छात्रों ने परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं।

जेपीएससी धांधली के विरोध में उग्र हुआ छात्रों का विधानसभा घेराव, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन

जेपीएससी परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में छात्रों का झारखंड विधानसभा घेराव आंदोलन उग्र होता जा रहा है. विधानसभा की ओर तेजी से बढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने जगन्नाथपुर मंदिर के पास रोक दिया. बैरिकेडिंग के बावजूद छात्र आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.

पुलिस की ओर से पानी की तेज बौछार शुरू किए जाने के बाद भी छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ. कई छात्र पानी की धार के बीच डांस करते नजर आए. प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के आंदोलन के साथ पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश भी जारी रही.

छात्र आंदोलन में पुष्पा की शक्ल में पहुंचा व्यक्ति

रांची में छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक व्यक्ति फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की शक्ल में पहुंचा. उसके अंदाज ने मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान खींचा. इसी बीच छात्रों ने एकजुट होकर राष्ट्रगान गाया. प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की मौजूदगी के बीच छात्रों का आंदोलन जारी रहा. छात्र जेपीएससी परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.

विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछार की. पानी की तेज धार के बीच कुछ छात्रों ने जमकर रेन डांस किया और इसे भी अपने विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनाया.

झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच पीएम मोदी ने सीएम हेमंत सोरेन को दी बधाई, जानें क्या लिखा

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झारखंड में इन दिनों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन के बीच आज राज्यभर से हजारों की संख्या में आए छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शन के बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है।

हेमंत सोरेन को दी बधाई

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।

रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू

इधर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू हो गया है। पुराने विधानसभा मैदान से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च के दौरान छात्र पहले बैरियर तक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरियर तोड़ दिया। छात्रों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।

25 जुलाई है जारी है धरना-प्रदर्शन

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र अब सरकार के साथ आर-पार के मूड में हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बार बातचीत का दौर चल चुका है, हालांकि दोनों के बीच हुई चर्चा बेनतीजा निकली है। दरअसल, छात्र अनियमितताओं के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर छात्र अड़ गए हैं।