सीएचसी शंकरगढ़ को मिला नया अधीक्षक, डॉ. सुरेश कुमार ने संभाली कमान
पूर्व प्रभारी डॉ. अभिषेक सिंह के कार्यकाल को आज भी याद कर रहे क्षेत्रवासी, नई व्यवस्था से बढ़ी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद

प्रयागराज

Sb न्यूज से ब्यूरो चीफ विश्वनाथ प्रताप सिंह


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शंकरगढ़ में शुक्रवार को नए अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनके पदभार संभालते ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई उम्मीदें जाग उठी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रभारी डॉ. अभिषेक सिंह के स्थानांतरण के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल के संचालन में पहले जैसी सक्रियता और व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही थी, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
वहीं, क्षेत्र में आज भी पूर्व प्रभारी डॉ. अभिषेक सिंह के कार्यकाल की चर्चा होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनके कार्यकाल में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों की सराहना की जाती रही है। यही कारण है कि कई लोग आज भी उनके कार्यों को याद करते हैं।
अब नए अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार के कंधों पर सीएचसी शंकरगढ़ की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने, अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने, साफ-सफाई, दवा उपलब्धता तथा मरीजों को समयबद्ध उपचार सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि नए अधीक्षक के नेतृत्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ एक बार फिर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली के लिए पहचान बनाएगा।
रचनात्मक नारों के माध्यम से युवाओं ने दिया नशा मुक्त समाज का संदेश
मुविवि में नशा मुक्त स्लोगन लेखन प्रतियोगिता आयोजित



प्रयागराज, 6 अगस्त 2026।उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत गुरुवार को  नशा मुक्त भारत विषय पर स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन मानविकी विद्याशाखा के समन्वयक प्रो. सत्यपाल तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने नशा उन्मूलन, स्वस्थ जीवन, युवा शक्ति, पारिवारिक उत्तरदायित्व, सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण जैसे विविध विषयों पर प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक स्लोगन लिखे। प्रतिभागियों के नारों में समाज को नशे से दूर रहने, युवाओं को सकारात्मक जीवन शैली अपनाने तथा स्वस्थ एवं सशक्त भारत के निर्माण का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया। प्रतियोगिता के निर्णायकों ने प्रतिभागियों के स्लोगनों का मूल्यांकन मौलिकता, संक्षिप्तता, प्रभावशीलता, भाषा की शुद्धता, सृजनात्मकता तथा सकारात्मक सामाजिक संदेश के आधार पर किया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता विकसित करना तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समाज को नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।
कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने सभी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से नशामुक्त, स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अतुल कुमार मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी प्रतिनिधि एवं टीम लीडर सुश्री प्रीति ने  किया। डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी
जनसहभागिता से ही नशा मुक्त भारत का संकल्प होगा साकार
नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मुविवि में भाषण प्रतियोगिता आयोजित

प्रतिभागियों ने नशा उन्मूलन के सामाजिक एवं पारिवारिक पहलुओं पर रखे प्रभावी विचार



प्रयागराज।राज्यपाल सचिवालय के निर्देशानुसार तथा उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो. सत्यकाम के मार्गदर्शन में संचालित नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत बुधवार को विश्वविद्यालय की मानविकी विद्याशाखा द्वारा नशा मुक्ति अभियान : जनसहभागिता एवं चुनौतियाँ विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन विश्वविद्यालय के सरस्वती परिसर स्थित लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार में किया गया।
प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा समाज को नशा मुक्त बनाने में जनसहभागिता की भूमिका को रेखांकित करना था। प्रतिभागियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक तथा स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने नशे के बढ़ते प्रचलन, युवाओं पर उसके दुष्प्रभाव, सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक उत्तरदायित्व, शिक्षा की भूमिका तथा जनसहभागिता के माध्यम से नशा मुक्त भारत के निर्माण जैसे विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। अनेक प्रतिभागियों ने सरकार, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि व्यापक जनजागरण और सकारात्मक सामाजिक वातावरण से संभव है।प्रतियोगिता के निर्णायकों ने प्रतिभागियों की विषय की समझ, प्रस्तुतीकरण, तार्किकता, अभिव्यक्ति कौशल एवं प्रभावशीलता के आधार पर मूल्यांकन किया तथा विद्यार्थियों के उत्साह और जागरूकता की सराहना की।
कार्यक्रम का आयोजन मानविकी विद्याशाखा के समन्वयक प्रो. सत्यपाल तिवारी के निर्देशन में किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. अतुल कुमार मिश्र ने किया तथा शोधार्थी प्रतिनिधि  श्री संजय सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक, आचार्य, सहायक आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यह प्रतियोगिता विश्वविद्यालय में 24 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक संचालित नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। अभियान के अंतर्गत व्याख्यान, वेबिनार, नुक्कड़ नाटक, योग, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, जागरूकता सभाएँ, स्लोगन लेखन, नाटक प्रतियोगिता सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
एक अन्य सूचनानुसार नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान विद्याशाखा के तत्वावधान में बुधवार को होने वाला स्लोगन बोर्ड सहित पैदल मार्च का आयोजन बारिश के कारण स्थगित कर दिया गया। प्रोफेसर एस कुमार,  निदेशक, समाज विज्ञान विद्या शाखा ने बताया कि इस आयोजन के संबंध में पुनः सूचना जारी की जाएगी।

डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी
प्रयागराज में ट्रिपल मर्डर : मूकबधिर दंपती समेत तीन का कत्ल, जांच में जुटी पुलिस
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्थित शाहगंज थाना क्षेत्र के गढ़ीकला मोहल्ले में मंगलवार को एक घर में एक पुरूष , दो महिलाओं समेत कुल तीन लोगों के शव पाये गये हैं। पुलिस कहना है कि प्रथम दृष्टया आपसी विवाद में झगड़े के दौरान मौत हुई है। ऐसी जानकारी मिली है कि तीनों मूक-बधिर है। अब तक तीनों की पहचान नहीं हो पाई है। उनके पहचान के लिए प्रयास जारी है।

पुलिस उपायुक्त नगर मनीष कुमार शांडिल्य ने बताया कि प्रयागराज के शाहगंज थाना क्षेत्र के गढ़ीकला मोहल्ले में किराए का कमरा लेकर एक पुरुष और दो महिलाएं रहती थी। मंगलवार को सूचना मिली कि कमरे के अंदर मृत पाए गए। सूचना पर शाहगंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंचे और फोरेंसिक टीम को बुलाया। सभी तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। डीसीपी नगर ने बताया कि यह जानकारी मिली है कि तीनों मूक-बधिर थे, जिससे वारदात की जानकारी नहीं हो पाई। गृह स्वामी भी तीनों की पहचान नहीं बता पाए। एक महिला की उम्र 45 वर्ष है, युवक की उम्र 35 वर्ष और एक महिला की उम्र लगभग 33 वर्ष है। पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही है कि उनकी शिनाख्त हो जाय। एक पुरूष और दो महिलाओं का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तीनों की माैत आपसी मारपीट के दौरान हुई है। फिर भी हत्या को लेकर विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है।
एआई से नहीं, एजीआई से बढ़ेगा सबसे बड़ा खतरा : बालेंदु शर्मा दाधीच
राजर्षि टंडन स्मृति व्याख्यानमाला में कृत्रिम मेधा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ गंभीर मंथन

पाठ्यक्रमों में कृत्रिम मेधा का समावेश समय की आवश्यकता - प्रोफेसर सत्यकाम


प्रयागराज, 1 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के अटल प्रेक्षागृह में भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन
की 144वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को 19वीं राजर्षि टंडन स्मृति व्याख्यानमाला का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष व्याख्यानमाला का विषय कृत्रिम मेधा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा रखा गया, जिस पर देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों एवं चिंतकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में कृत्रिम मेधा की वर्तमान उपयोगिता, भविष्य की चुनौतियों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता, देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, तकनीकी विशेषज्ञ तथा टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि आने वाला समय केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस का होगा और वास्तविक चुनौती भी वहीं से उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा एआई से नहीं, बल्कि एजीआई से बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान एआई मनुष्य के निर्देशों के अनुरूप कार्य करने वाला एक शक्तिशाली उपकरण है, किंतु जब एजीआई मनुष्य की तरह स्वतंत्र रूप से सोचने, निर्णय लेने और स्वयं सीखने की क्षमता प्राप्त कर लेगा, तब उसके सामाजिक, नैतिक और वैश्विक प्रभाव अत्यंत गंभीर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक कृत्रिम मेधा का उपयोग मनुष्य एक तकनीकी उपकरण के रूप में करता है, तब तक यह नई संभावनाओं, नवाचार और विकास के असीम अवसर प्रदान करती है किंतु यदि तकनीक मानव मूल्यों से विमुख हो गई तो वही मानवता के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मस्तिष्क एक जैविक प्रणाली है, जिसमें संवेदना, करुणा, नैतिकता और सृजनात्मकता का समावेश है, जबकि कंप्यूटर केवल एल्गोरिद्म और आँकड़ों के आधार पर कार्य करता है। इसलिए भविष्य की पीढ़ी को केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, रचनात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना होगा।
बालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ज्ञान का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन को संतुलित और मूल्यनिष्ठ बनाने वाली परंपरा है। हमारे शास्त्र विज्ञान और आध्यात्म, तर्क और आस्था, ज्ञान और आचरण के अद्भुत समन्वय का संदेश देते हैं। यदि आधुनिक तकनीक का विकास भारतीय ज्ञान परंपरा के नैतिक मूल्यों, संस्कारों और मानवीय दृष्टि के साथ किया जाए तो कृत्रिम मेधा मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का अत्यंत प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक के उपभोक्ता मात्र न बनें, बल्कि उसके सृजनकर्ता और उत्तरदायी उपयोगकर्ता बनें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि आज आवश्यकता कृत्रिम मेधा से भयभीत होने की नहीं, बल्कि उसे गहराई से समझने और विवेकपूर्ण ढंग से अपनाने की है। उन्होंने कहा कि हमें अज्ञान और भय दोनों से मुक्त होना होगा।तकनीक का विरोध समाधान नहीं है; बल्कि उसके स्वरूप, सीमाओं और संभावनाओं को समझते हुए उसका उपयोग राष्ट्रहित में करना ही समय की मांग है। कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि उन्हें कृत्रिम मेधा का वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नैतिक दृष्टि और भारतीय ज्ञान परंपरा का बोध एक साथ दिया जाए, तो वे भारत को तकनीकी नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में कृत्रिम मेधा का समावेश अब एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता बन चुका है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि उत्तम चरित्र निर्माण, मूल्यपरक शिक्षा और तकनीक के नैतिक उपयोग की प्रेरणा देने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।प्रो. सत्यकाम ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए युवाओं से देश की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन विश्वविद्यालयों, मंदिरों, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, वास्तु ज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान और जीवन-दर्शन आज भी विश्व के लिए प्रेरणास्रोत हैं। तकनीकी विकास तभी सार्थक होगा जब वह मानवता, नैतिकता और राष्ट्रहित से जुड़ा होगा। उन्होंने उपस्थित सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नशा-मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी दिलाया तथा कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित समाज से संभव है।
विशिष्ट वक्ता एवं उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने कहा कि किसी भी तकनीक अथवा राष्ट्रीय योजना की सफलता समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता, जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा का उपयोग जनसुविधाओं, सुशासन, पारदर्शिता, संचार व्यवस्था तथा सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग सकारात्मक दृष्टि और मानवीय संवेदनाओं के साथ किया जाए तो यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अतिथि वक्ता एवं पूर्व डीआईजी कृपा शंकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम मेधा को केवल नकल या स्वचालित कार्यों तक सीमित नहीं समझना चाहिए। इसे अनुसंधान, नवाचार, विश्लेषण और ज्ञान-विस्तार के प्रभावी साधन के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई ने जटिल सूचनाओं और विशाल आंकड़ों का विश्लेषण सरल बना दिया है, जिससे शोध और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान और नवाचार के लिए करें।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. पी.के. पाण्डेय ने विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई तकनीकों से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों से जोड़ते हुए जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. त्रिविक्रम तिवारी ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. मीरा पाल ने तथा प्रो. आनन्दा नंद त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशकगण, आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी
भारतीय अपना समाज पार्टी और पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा का बड़ा प्रदर्शन

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ,आज प्रयागराज भारतीय अपना समाज पार्टी और पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा के घटक दल राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में जिलाधिकारी प्रयागराज के माध्यम से मा प्रधानमंत्री जी एवं मा मुख्यमंत्री जी को जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया तथा भव्य कार्यकर्ता सम्मान समारोह आयोजित हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मा राजन सिंह सूर्यवंशी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय अपना समाज पार्टी एवं राष्ट्रीय संयोजक, पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा) ने अपने संबोधन में कहा कि देश और प्रदेश में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है और सरकारें आम जनता के मुद्दों पर पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं।

उन्होंने किसानों को निः शुल्क खाद-बीज, गरीबों को आधार कार्ड को ही आधार मानते हुए बिना आयुष्मान कार्ड के ही मुफ्त इलाज, 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा, शिक्षित बेरोजगारों को भत्ता, पूर्वांचल राज्य गठन, गोरखपुर स्टेडियम का नाम 1857 के क्रांतिकारी महाराजा उदित नारायण सिंह के नाम पर रखने तथा सवर्ण आयोग के गठन की मांग प्रमुख रूप से उठाई। साथ ही “वन नेशन, वन कास्ट, वन कॉन्स्टिट्यूशन” लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए गांव-गांव जाकर जनजागरण करने और आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर रघुनाथ उपाध्याय राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी, एवं संजय पांडेय प्रदेश महासचिव भारतीय अपना समाज पार्टी, पुरनचंद मिश्रा, पंकज पांडेय, आलोक राय, शिवम मिश्रा,सहित कई वक्ताओं ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए संगठन को मजबूत करने की अपील की। कार्यक्रम में सर्वश्री राम बहादुर पांडेय, सप्तमी राय, महेंद्र साहनी, अमन साहनी, विनय साहनी, प्रेम चंद राय, गौरव शुक्ला,कैशलेस पटेल, आशीष तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, नरेंद्र शुक्ला, नीतीश पांडेय राम लल्लू पाण्डेय आदि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर पीयूष मोडिया ने पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से पहली औपचारिक वार्ता की
इस दौरान उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर जानकारी साझा की

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ,पुलिस कमिश्नर ने कहा कि शहर में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही।

उन्होंने बताया कि संगठित अपराध, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने पर भी जोर रहेगा।

पीयूष मोडिया ने कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि संगम नगरी में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक के साथ और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए जाएंगे।
रेखा सिंह और अशोक सिंह का कब खत्म होगा 'राजनीतिक वनवास'

विश्वनाथ प्रताप सिंह


प्रयागराज , प्रयागराज की राजनीति में एक बार फिर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह और उनके पति पूर्व ब्लॉक प्रमुख मांडा अशोक सिंह को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा इस बार दोनों नेताओं में से किसी एक पर भरोसा जताकर उनके लंबे राजनीतिक इंतजार का अंत करेगी?

रेखा सिंह का नाम प्रयागराज की प्रभावशाली पंचायत राजनीति में लंबे समय से शामिल रहा है। वह कई बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं और अपने कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों तथा संगठनात्मक सक्रियता के कारण मजबूत पहचान बनाई। समाजवादी पार्टी से राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2021 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भारी मतों से जीता।
हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद भी उन्हें अब तक कोई बड़ा चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला।

वर्ष 2021 के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में उनके नाम की चर्चा रही, लेकिन पार्टी ने डॉ. वीके सिंह को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी मेजा सीट से उनके टिकट की अटकलें लगीं, लेकिन अंततः भाजपा ने नीलम करवरिया को उम्मीदवार बनाया।
इसके बाद विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में भी रेखा सिंह का नाम दावेदारों में रहा, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने केपी श्रीवास्तव पर भरोसा जताया। यहां तक कि लोकसभा चुनाव से पहले भी उनके नाम को लेकर चर्चाएं हुईं, मगर भाजपा ने इलाहाबाद संसदीय सीट से नीरज त्रिपाठी को टिकट दिया।

इन सभी राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद रेखा सिंह और अशोक सिंह लगातार भाजपा के पक्ष में सक्रिय रहे। दोनों नेताओं ने पार्टी के सभी चुनावों में प्रचार किया और अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में जनसंपर्क अभियान चलाया।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मेजा सीट को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

वर्तमान में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के विधायक संदीप पटेल काबिज हैं। भाजपा 2022 में यह सीट हार गई थी और उस समय संगठन के भीतर गुटबाजी को भी हार का एक बड़ा कारण माना गया था।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि भाजपा मेजा से रेखा सिंह या अशोक सिंह को उम्मीदवार बनाती है तो पार्टी को बाहरी प्रत्याशी के विरोध जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

स्थानीय स्तर पर दोनों नेताओं की सक्रियता और संगठन में उनकी पकड़ को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि ऐसा फैसला भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को कुछ हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
फिलहाल टिकट को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन मेजा की राजनीति में रेखा सिंह और अशोक सिंह की भूमिका को लेकर चर्चाएं लगातार जोर पकड़ रही हैं। अब सबकी निगाहें भाजपा के आगामी राजनीतिक फैसले पर टिकी हैं।
राष्ट्रीय अपना समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन सिंह सूर्यवंशी के नेतृत्व में जनहित के मुद्दों पर सिद्धा होगा प्रहार

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज। राजन सिंह सूर्यवंशी नेआवाहन कियाआज प्रयागराज में होने वाला कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि जन-जन की आवाज है हर वर्ग हर समाज और हर व्यक्ति के अधिकार की लड़ाई है। आप सभी साथियों से विनम्र निवेदन है कि आदि से अधिक संख्या में अपने-अपने लोगों के साथ जिलाधिकारी महोदय प्रयागराज कार्यालय पर दोपहर 1:00 अवश्य पहुंचे और इस जनआंदोलन को सफल बनाएं। याद रखें यह किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। जब जनता एकजुट होती है तभी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करें और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाएं।
स्वयम मूक्स के विकास पर मुविवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारंभ


प्रयागराज। नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के तत्वावधान में बुधवार को स्वयम मूक्स के विकास विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. सत्यकाम ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि आज का युग डिजिटल शिक्षा का युग है। प्रत्येक शिक्षक को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों में दक्ष होना आवश्यक है। अन्यथा वह बदलते समय के साथ कदम से कदम नहीं मिला पाएगा।प्रो. सत्यकाम ने कहा कि सभी मुक्त विश्वविद्यालयों का एकमात्र लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। स्वयम भारत सरकार का ऐसा राष्ट्रीय मंच है जिसके माध्यम से यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय द्वारा स्वयम के साथ किए जा रहे प्रयासों को नई गति प्रदान करेगी और भविष्य में गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के बाद विश्वविद्यालय के अधिक से अधिक कोर्स  स्वयम प्लेटफार्म पर उपलब्ध होंगे, जिससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के शिक्षार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा स्वयम तथा स्वयम प्रभा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पाठ्यक्रमों के विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन एवं मुख्य वक्ता प्रो. जितेन्द्र पाण्डेय, प्रोफेसर एवं निदेशक, स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी ने प्रतिभागियों को स्वयम एवं मूक्स की अवधारणा, पाठ्यक्रम संरचना, ई-कंटेंट विकास, वीडियो व्याख्यान निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली, गुणवत्ता मानकों तथा पाठ्यक्रम प्रस्तुतीकरण की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयम पाठ्यक्रम प्रस्ताव तैयार करने, मॉड्यूल निर्माण, शिक्षण परिणाम, मूल्यांकन योजना तथा गुणवत्ता आश्वासन के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण दिया। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि मूक्स के माध्यम से अब कोई भी छात्र घर बैठे देश के श्रेष्ठ शिक्षकों से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकता है।
कार्यशाला के संयोजक एवं सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के निदेशक प्रो. ए.के. मलिक ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन अधिगम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।  प्रो. मलिक ने कार्यशाला के उद्देश्यों, तकनीकी सत्रों तथा प्रतिभागियों को मिलने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण की विस्तृत जानकारी दी।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि इस अवसर पर विद्या शाखाओं के निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताते हुए इसे डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यशाला के प्रति युवा शिक्षकों में गजब का उत्साह देखा गया। संचालन डॉ. तूबा फातमा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जूमी सिंह ने किया। कार्यशाला का समापन कल  होगा।

डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी