*गांवों की बेटियां बन रहीं बदलाव की अगुवा, इमामगंज में भी खुलेगा i-Saksham का फेलोशिप कार्यक्रम*
*शेरघाटी (गयाजी):* गया जिले की ग्रामीण बेटियां अब शिक्षा और नेतृत्व के जरिए समाज में बदलाव की नई मिसाल बन रही हैं। शेरघाटी में सक्रिय संस्था i-Saksham के दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम से अब तक 300 से अधिक युवतियां "एडु-लीडर" बनकर अपने परिवार और समाज की सोच बदल रही हैं।

संस्था पिछले 5 वर्षों से गया जिले के चार प्रखंडों - आमस, ढोभी, बांके बाजार और शेरघाटी के सरकारी विद्यालयों, किशोरियों और अभिभावकों के साथ काम कर रही है।

*गांव की सीमा से समाज की अगुवाई तक* 
एक समय था जब इन गांवों की बेटियों को घर से बाहर निकलने की इजाजत भी नहीं मिलती थी। आज यही बेटियां पढ़ाई जारी रखने, नौकरी के लिए बाहर जाने और समाज के दकियानूसी सवालों का जवाब देने में आगे हैं। संस्था का मानना है कि असली बदलाव घर की चौखट से ही शुरू होता है।

*अब इमामगंज में भी शुरू होगी फेलोशिप* 
इसी सोच के साथ i-Saksham अब अपने फेलोशिप कार्यक्रम का विस्तार गया के इमामगंज प्रखंड में करने जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की और अधिक बेटियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाना है। *12 साल से 5 जिलों में सक्रिय* 
गौरतलब है कि i-Saksham बिहार के 5 जिलों - बेगूसराय, गया, जमुई, मुंगेर और मुजफ्फरपुर में पिछले 12 वर्षों से काम कर रही है। संस्था के फेलोशिप कार्यक्रम से अब तक 1200 से अधिक एडु-लीडर जुड़ चुकी हैं, जो न सिर्फ सामाजिक बदलाव ला रही हैं बल्कि अपने सपनों को भी साकार कर रही हैं।


रिपोर्टर:- धनंजय कुमार यादव