व्यापारियों ने नगरपालिका अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाया,जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन,नपा अध्यक्ष ने मामले को सिरे से किया ख़ारिज,बताया बेबुनियाद*
सुल्तानपुर में आज सैकड़ो की संख्या में ग़ल्ला मंडी व्यापारियों ने सड़क पर उतर कर नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गल्ला मंडी ब्यापारी पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय कलेक्ट्रेट पहुँचे,जहां उन्होंने नपा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
अध्यक्ष व्यापार मनीष शाहू ने बताया कि मामला यह है कि यहां जो गल्ला मंडी बसी हुई है वो नजूल की जमीन पर है और सन 1930 से अभी तक नगर पालिका के फेवर में इकट्ठा था और सभी व्यापारी नगर पालिका के दुकानदार किराएदार हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यहां के मौजूदा चेयरमैन प्रवीन अग्रवाल ने अपने पारिवारिक हितों को देखते हुए इस जमीन को कब्जाने का प्रयास किया है। इसी सिलसिले में आज हम लोग जिलाधिकारी महोदय से मिले हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसी भी व्यापारी के साथ या आम आदमी के साथ कोई भी गलत नहीं होने पाएगा।
उन्होंने कहा कि शासन के नगर विकास विभाग को इनकी कार्यप्रणाली को लेकर पत्र लिखा गया है,सूचित भी करा दिया गया है, कि नजूल विभाग को भी सूचना दी जा चुकी है। हाईकोर्ट में जो इन्होंने अधपैरवी में मुकदमा खारिज करा दिया था उसके लिए भी जिलाधिकारी महोदय द्वारा हाईकोर्ट में फिर से वाद प्रस्तुत किया गया है,ये आज हम लोगों को जिलाधिकारी से जानकारी मिली।
(गल्ला मंडी नजूल की जमीन पर 1930 से बसी है और व्यापारी नगर पालिका के किराएदार हैं। मौजूदा पालिकाध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल पारिवारिक हित के लिए जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहे हैं। आज DM से मिले हैं, DM ने आश्वासन दिया है कि किसी व्यापारी के साथ गलत नहीं होगा और उन्होंने नगर विकास और नजूल विभाग को पत्र लिखा है।)
गल्ला मंडी व्यापारियों के आरोपों को नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने सिरे से किया ख़ारिज,बताया मामला बेबुनियाद।
सवाल-व्यापारियों ने आपके ऊपर एक गंभीर आरोप लगाया है। कि आप अपने परिजनों को फायदा पहुँचा रहे है। सवालों का जवाब देते हुए नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि पहली चीज तो हम वो आरोप सिरे से नकारते हैं और खारिज करते हैं।
ये गल्ला मंडी में 1956 या 63 का जो मामला था, उसी का मुकदमा सिविल कोर्ट में चल रहा था, जो खारिज होने पर नगर पालिका वहां जो भी दुकानदार थे उनसे किराए की वसूली कर रही थी। नगर पालिका की पोजीशन भी थी। 1983 में नगर पालिका ने उच्च न्यायालय लखनऊ में केस किया था, जिसकी सुनवाई 1983 से चलती आ रही थी और नगर पालिका उस पर काबिज थी और वहां के दुकानदारों से किराया बराबर लेती रही।
जब जानकारी मिली कि जो 1983 की याचिका थी वो जनवरी 2020 में खारिज हो गई थी, उसकी रेस्टोरेशन एप्लीकेशन नगर पालिका ने दिसंबर 2020 में माननीय उच्च न्यायालय में पुनः सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया था। जो 5 साल तक पेंडिंग रहने के कारण बीच में सुनवाई नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट किसी के कहने पर नहीं चलता, उसकी अपनी प्रक्रिया है। एप्लीकेशन जब आई किन परिस्थितियों में कोर्ट में पुटअप हुई, हमारे अधिवक्ता को जानकारी थी लेकिन जब तक पहुंचते तब तक लिस्ट आ चुकी थी, नंबर आ चुका था। वो एप्लीकेशन जुलाई 2025 में खारिज हो गई।
जब जानकारी मिली कि इस प्रकार का कोई प्रकरण है, तभी नगर पालिका ने 10 दिन पहले पुनः एक रेस्टोरेशन याचिका माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में दायर किया है और उसके अनुसार जो भी निर्णय होगा उसका नगर पालिका पालन करेगी।
अध्यक्ष ने कहा कि व्यापारियों को भय था कि उनकी दुकानें खाली करा दी जाएगी। उनको बहुत स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया गया कि नगर पालिका को कोई अधिकार नहीं है आपकी दुकान खाली कराने का और ना ही नगर पालिका ने आपको कोई नोटिस दिया है। जिस तरीके से आप लोग कार्यरत हैं उसी तरह से करें और जो किराया आप लोग जमा करते थे वो जमा करते रहें।
लेकिन आज जो ये प्रदर्शन सुनने में आया और दिखाई पड़ा,ये हमारे ख्याल से एक सोची-समझी साजिश है। कुछ बाहरी तत्वों के द्वारा गल्ला मंडी के हमारे व्यापारियों को, जो हमारे घर परिवार के हैं,उनको भ्रमित करके और ये प्रदर्शन सिर्फ और सिर्फ हमारे खिलाफ निकाला गया। इसमें कुछ चेहरे ऐसे थे जिनका गल्ला मंडी के व्यापारियों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है, वो दुकान हटे या काबिज रहे इससे उनका कोई मतलब नहीं, खाली राजनीतिक रोटी सेकने के लिए ये किया गया।
अध्यक्ष नगरपालिका प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि आप सबके चैनल के माध्यम से उन सभी व्यापारियों को पुनः आश्वस्त करना चाहूंगा कि वो कतई परेशान ना हों। नगर पालिका इस प्रकार का कोई भी कृत्य उनको हटाने का नहीं करने जा रही और जब तक मैं बैठा हूं तब तक कोई इस चीज को होने नहीं दूंगा।
नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीन अग्रवाल ने कहा कि व्यापारियों का आरोप सिरे से खारिज है। गल्ला मंडी का मामला 1983 से हाईकोर्ट में चल रहा था,जनवरी 2020 में खारिज हुआ तो दिसंबर 2020 में हमने रेस्टोरेशन डाला। जुलाई 2025 में फिर खारिज हुआ तो 10 दिन पहले हमने फिर याचिका दायर की है। किसी व्यापारी की दुकान खाली नहीं कराई जाएगी,कोई नोटिस नहीं दिया गया है। आज का प्रदर्शन बाहरी तत्वों द्वारा व्यापारियों को भ्रमित कर राजनीतिक रोटी सेकने के लिए किया गया है।
7 hours ago
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