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झारखण्ड SIR 2026: दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि आज, 19 अक्टूबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

(A) दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान प्राप्त आवेदन प्रपत्रों की स्थिति (13 सितम्बर 2026 तक)

1). फॉर्म-6 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 4,86,783

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 23,833)

2). फॉर्म-6A के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 87

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 4)

3). फॉर्म-7 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन/आपत्तियां:- 5,689

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 469)

4). फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 3,11,770

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:-17,156)

(B) दावा एवं आपत्ति (Claims & Objections) प्राप्त करने की अंतिम तिथि:- 15 सितम्बर 2026

(C) अंतिम मतदाता सूची (Final Roll) के प्रकाशन की तिथि:- 19 अक्टूबर 2026

भारत बना ईरान-यूएई के बीच 'मध्यस्थ', दिल्ली में ब्रिक्स समिट की अहम कामयाबी

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नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत ने उस वक्त बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की, जब पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर आमने-सामने खड़े ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक साझा ब्रिक्स घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गंभीर मतभेद देख जा रहे हैं। युद्ध और लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सहमति बनना सिर्फ ब्रिक्स के लिए नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईरान-यूएई को एक साथ लाना था चुनौती

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मई में हुई बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि संयुक्त बयान तक जारी नहीं हो पाया था। पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं और संघर्ष की व्याख्या अलग-अलग थी। ऐसे में दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि ऐसी भाषा तैयार की जाए, जिस पर ईरान और यूएई समेत ब्रिक्स के सभी सदस्य देश एक साथ खड़े हो सकें। अंतिम घोषणा में किसी एक देश को सीधे तौर पर युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर सामूहिक चिंता जताई गई। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के क्राउन प्रिंस की मुलाकात

इसी बीच दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान एक अप्रत्याशित राजनयिक क्षण सामने आया। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ब्रिक्स सिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, तनाव कम करने, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण संपर्कों में से एक माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब क्षेत्रीय संघर्ष ने ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत की भूमिका क्यों अहम?

नई दिल्ली के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, साथ ही ईरान के साथ भी उसके दीर्घकालिक संबंध बने हुए हैं। इसके अलावा, भारत के अमेरिका, रूस और इज़राइल के साथ भी घनिष्ठ साझेदारी है। इससे भारत को राजनयिक स्तर पर ऐसी पहुँच प्राप्त है जो कई अन्य देशों के पास नहीं है। चुनौती यह है कि उस पहुंच का उपयोग इस तरह से किया जाए कि ऐसा न लगे कि आप किसी का पक्ष ले रहे हैं। नई दिल्ली ने ईरान और अमेरिका या ईरान और अरब देशों के बीच औपचारिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका नहीं निभाई है। इसके बजाय, उसने लगातार संवाद, कूटनीति, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार एवं नौवहन की वकालत की है। दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत का प्रस्ताव किसी बड़े शांति समझौते की मध्यस्थता करने से कम और राजनयिक चैनलों को खुला रखने से अधिक संबंधित है।

हिंदी दिवस पर एटीआई में व्याख्यान एवं काव्यपाठ - हिंदी को बताया जनसरोकार की भाषा

रांची। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर एटीआई के सभागार में भव्यव्याख्यान एवं काव्यपाठ समारोह का आयोजन किया गया।विभागीय सचिव श्री प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सुशासन की असली पहचान सरल हिंदी, सुगम प्रक्रियाएं और पारदर्शी व्यवस्था से होती है। जब सरकारी भाषा आमजन की समझ में आती है, तब योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचता है। उन्होंने जोर दिया कि कार्यालयों में अनावश्यक जटिल शब्दों और प्रक्रियाओं को कम कर नागरिकों के लिए काम को आसान बनाया जाए।

सचिव ने कहा कि तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है, जिससे हर निर्णय और प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह बने। ऑनलाइन सेवाएं, समयबद्ध निस्तारण और शिकायतों की निगरानी से जनता का भरोसा मजबूत होता है।

उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सरल भाषा और स्पष्ट कार्यशैली अपनाएं, ताकि शासन वास्तव में जनता के करीब और भरोसेमंद बन सके।

कार्यक्रम में हिंदी पट्टी के कई प्रख्यात कवियों और विद्वानों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी की समृद्धि, संवेदनशीलता और व्यापकता को रेखांकित किया। समारोह में उपस्थित साहित्यकारों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने हिंदी को “बोली और भाषा के बीच का आत्मसमर्पण” बताते हुए कहा कि यह भाषा देश की विविध लोकभाषाओं और बोलियों को आत्मसात कर निरंतर समृद्ध होती रही है। हिंदी की यही विशेषता उसे जन-जन की भाषा बनाती है।

काव्यपाठ के दौरान कवियों ने सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन मुद्दों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन में केंद्रीय भूमिका निभाई थी और आज भी यह देश को एकसूत्र में बांधने का कार्य कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रगति में लोकभाषाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी का स्वरूप लगातार विकसित हो रहा है, जिसमें विभिन्न भाषाओं के शब्दों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। वक्ताओं ने आह्वान किया कि हिंदी को केवल अतीत की विरासत के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की भाषा के रूप में विकसित करने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

समारोह का समापन हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके संवर्धन के संकल्प के साथ किया गया।

कार्यक्रम में काव्यपाठ करने आए विद्वानों में मुख्यरूप से डॉक्टर जिंदर सिंह मुंडा - अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, डॉ केदार सिंह - सेवानिवृत प्राध्यापक - विनोबा भावे विश्वविद्यालय, डॉ वन्दना टेटे - प्रख्यात कवियित्री लेखिका, डॉ सावित्री बड़ाईक-सहायक प्राध्यापक - एसएस मेमोरियल महाविद्यालय, डॉ कुमारी उर्वशी सहित कई हिंदी के प्रख्यात विद्वान उपस्थित थे। स्वागत संबोधन श्री संजय रजक, उप सचिव ने किया। कार्मिक विभाग से मुख्य रूप से संयुक्त निदेशक श्री आसिफ हसन, श्री इश्तियाक अहमद, एटीआई से श्रीमती शालिनी खलखो, अपर निदेशक श्री

मती सीमा सिंह की उपस्थिति रही।

ब्रेकफास्ट से डिनर तक सब दिल्ली में नहीं होगा…” क्यों तिलमिलाए तारिक रहमान के मंत्री

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भारत के न्योते के बाद भी बांग्लादेश ब्रिक्स समिट में शामिल नहीं हुआ। अब नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की धमाकेदार सफलता और भारत के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव को देखकर पड़ोसी देश बांग्लादेश के पेट में मरोड़ उठने लगी है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने अजीबोगरीब बयान देकर अपनी भड़ास निकाली है।

बांग्लादेश सरकार भारत से अच्छे संबंध चाहती है लेकिन...

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है लेकिन दिल्ली को दूसरे देशों से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाएगी। बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करना चाहता है। हमारी सरकार एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ना कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए ये होना चाहिए।

भारत के प्रति आकर्षण से आगे बढ़ना होगा- हुमायूं कबीर

भारत से रिश्ते को लेकर हुए सवाल पर कबीर ने कहा, भारत में ही नाश्ता, भारत में लंच, भारत में ही डिनर होगा तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे। हमें भारत के प्रति इस आकर्षण से आगे बढ़ना होगा। बाकी दुनिया के देशों की तरह भारत भी बस एक और देश है, जिसके साथ बांग्लादेश अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।

भारत से बना रहा दूरी

हुमायूं कबीर के इस बयान से दो दिन पहले बांग्लादेश की तरफ से ऐलान किया गया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बजाय उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, इससे पहले फरवरी में भी तारीक रहमान को एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। बावजूद इसके बांग्लादेशी सरकार ने निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

भारत को मिला यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस का साथ, सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार का समर्थन

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भारत की बढ़ती ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। अब भारत को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का भी साथ मिल गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है। एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान इस बात पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है। तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट है कि परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्व वाली संस्था बनाने की जरूरत है, जिसमें विकासशील देशों और खासकर अफ्रीका की आवाज को सही जगह मिले।

गुटेरेस ने खास तौर पर लिया भारत का नाम

सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है। आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।

रूस-चीन ने भी की भारत को बड़ी भूमिका देने की मांग

ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है। दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है। ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है।

ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी होनी चाहिए- पीएम मोदी

इससे पहले रविवार को पीएम मोदी ने कहा था, मौजूदा वैश्विक शासन ढांचा एक 'पिरामिड' जैसा है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से प्रभावित होने वाले देशों की उन्हें आकार देने की क्षमता सीमित है। पीएम मोदी ने कहा था कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में सबसे आगे रहता है लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पिछली पंक्ति में रहता है। उन्होंने विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलने का प्रस्ताव दिया, जहां हर देश की अपनी आवाज और हिस्सेदारी हो। ऐसे में यूएन के महासचिव का पीएम मोदी की बात को सीधा समर्थन देना अहम माना जा रहा है।

यूएन महासचिव का समर्थन भारत के लिए क्यों अहम?

भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है। अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है। ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत को स्वीकार किया है। इससे भारत की दावेदारी पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर आई है।

150 करोड़ का ट्रेजरी स्कैम: भाजपा ने कहा - छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर बड़ी मछलियों को बचा रही हेमंत सरकार

झारखंड में 150 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित ट्रेजरी स्कैम (कोषागार घोटाला) को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर इस पूरे मामले को दबाने और जांच के नाम पर महज खानापूर्ति करने का गंभीर आरोप लगाया है.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, रामगढ़ और चाईबासा जैसे कई जिलों के कोषागारों से बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आ चुकी है. इसके बावजूद जांच का दायरा केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखना मामले की गंभीरता को छिपाने का प्रयास है.

150 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी, बिना बड़े अफसरों की सह के संभव नहीं

प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि शुरुआती जांच में ही वित्तीय अनियमितता का आंकड़ा 150 करोड़ रुपये को पार कर चुका है. इतने बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से पैसे की अवैध निकासी बिना उच्च स्तर के अधिकारियों की जानकारी, स्वीकृति और निगरानी के संभव ही नहीं है. उन्होंने मांग की कि एसआईटी (SIT) और सीआईडी (CID) को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय उन सभी जिम्मेदार वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करनी चाहिए, जिनके कार्यकाल के दौरान यह घोटाला हुआ.

ट्रेजरी स्कैम में भी बड़ी मछलियों को बचाने का आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने पूर्व में हुए परीक्षा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी जांच में कई प्रभावशाली लोगों को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई थी. बाद में जब छात्रों और युवाओं का उग्र आंदोलन हुआ, तब जाकर जांच का दायरा बढ़ा और बड़ी मछलियां पुलिस की पकड़ में आईं. ठीक उसी तर्ज पर ट्रेजरी स्कैम में भी केवल छोटे स्तर के आरोपियों को मोहरा बनाकर मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े अफसरों को बचाने का खेल खेला जा रहा है.

जिले के SP और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर भी उठाए सवाल

अजय साह ने पुलिस कोषागार निकासी प्रक्रिया में डीडीओ (DDO) यानी जिले के एसपी (SP) की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन जिलों में इतनी बड़ी राशि की अवैध निकासी हुई, वहां के तत्कालीन और वर्तमान एसपी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इसके साथ ही उन्होंने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कोषागारों से इतनी बड़ी गड़बड़ी हुई, लेकिन वे जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार पर झारखंड के वित्तीय संकट का ठीकरा फोड़ने में व्यस्त हैं. भाजपा ने मांग की है कि पूरे प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र की जवाबदेही तय करते हुए निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की जाए.

सिमडेगा जिला प्रशासन की पहल: अधिकारियों-कर्मियों के लिए दो दिवसीय AI कार्यशाला आयोजित

सिमडेगा उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार नई तकनीकों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर सक्रिय एवं प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा यह पहल की गई है। वे शुक्रवार को सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों की क्षमता वृद्धि तथा सरकारी कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 एवं 11 सितंबर 2026 को दो दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यशाला में बोल रहीं थीं । कार्यशाला को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।

उपायुक्त, सिमडेगा श्रीमती कंचन सिंह ने कहा कि “सिमडेगा विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं विकासात्मक पहलों के माध्यम से निरंतर प्रगति कर रहा है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीक का प्रभावी उपयोग प्रशासनिक कार्यों को तेज, गुणवत्तापूर्ण और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से पदाधिकारी कम समय में अधिक प्रभावी तरीके से कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे। इससे सरकारी प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाने तथा आम नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। जिला प्रशासन का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान JSLPS एवं GDI Partners के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पदाधिकारियों एवं कर्मियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवधारणा, इसके विभिन्न उपयोगों तथा सरकारी कार्यों में इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को विभिन्न AI टूल्स से परिचित कराने के साथ-साथ Hands-on Practical Sessions भी आयोजित किए गए, ताकि वे AI का व्यावहारिक उपयोग अपने दैनिक कार्यों में कर सकें।

प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन GDI के विशेषज्ञ श्री अंशुल गुप्ता एवं सुश्री जान्हवी बहादुर द्वारा किया गया। JSLPS की ओर से राज्य स्तरीय पदाधिकारी श्री बिष्णु चरण परिडा, श्री अमित जैन, श्री हेम राज एवं अन्य ने प्रशिक्षण के समन्वय एवं तकनीकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

सिमडेगा जिला प्रशासन की यह पहल सरकारी कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा प्रशासनिक कार्यों में दक्षता एवं गति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

UPSC CDS (II) और NDA/NA (II) परीक्षा 2026 को लेकर रांची में निषेधाज्ञा लागू, 21 केंद्रों पर धारा-163 के तहत पाबंदी


संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली द्वारा आयोजित सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा (II), तथा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौ सेना अकादमी (II), 2026 के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची, श्री राकेश रंजन के संयुक्तादेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया:-

(1) पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना

(सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 13.09.2026 के प्रातः 07:00 बजे से अपराह्न-09:00 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केन्द्र का नामः-

(1) सेन्ट्रल एकादमी, बरियातू रोड, राँची।

(2) संत अलोइस हाई स्कूल, पुरुलिया रोड, राँची।

(3) संत अन्ना बालिका उच्च विद्यालय, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(4) उर्सुलाईन इंटर कॉलेज, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(5) संत अन्ना, इन्टरमीडिएट कॉलेज, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(6) गोस्सनर हाई स्कूल, जी०ई०एल० कॉम्पलेक्स के पीछे, मेन रोड, राँची।

(7) फिरायालाल पब्लिक स्कूल, नियर रेलवे ओवरब्रिज, 5 मेन रोड, राँची।

(8) संत पॉल कॉलेज, चर्च रोड, बहुबाजार राँची।

(9) राजकीय बालिका +2 उच्च विद्यालय, बरियातु, एच०डी०एफ०सी० बैंक के सामने, राँची।

(10) डोरण्डा कॉलेज, श्री कृष्ण पार्क के सामन, ए०जी० मोड के नजदीक, डोरण्डा, राँची।

(11) गोस्सनर कॉलेज क्लब रोड, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(12) गोस्सनर कॉलेज क्लब रोड, राँची (सब, सेन्टर बी)।

(13) डी०ए०भी० पब्लिक स्कूल, गाँधी नगर सी०सी०एल०, काँके, रोड, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(14) डी०ए०भी० पब्लिक स्कूल, गाँधी नगर सी०सी०एल०, काँके, रोड, राँची (सब सेन्टर बी)।

(15) निर्मला कॉलेज, नियर संत जेवियर स्कूल, डोरण्डा, राँची।

(16) जे०एम० जे० हाई स्कूल, नॉर्थ ऑफिस पाड़ा, डोरण्डा, राँची।

(17) अनिता गर्ल्स हाई स्कूल, काँके, राँची।

(18) सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जे०पी० मार्केट धुर्वा के पीछे, राँची (सब सेन्टर-ए)

(19) राजकीय +2 हाई स्कूल, काँके, सेमरटोली, नियर CIP. काँके, राँची।

(20) विवेकानन्द विद्या मंदिर, सेक्टर-1, धुर्वा, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(21) विवेकानन्द विद्या मंदिर, सेक्टर-1. धुर्वा, राँची (सब सेन्टर-बी)।

ब्रिक्स पर बंटी कांग्रेस, चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिना दिए फायदे

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देश की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का अगले कुछ दिनों तक भारत में जमावड़ा रहेगा। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ गए हैं। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को भारत आने वाले हैं। ऐसे में दुनिया भर की नजर भारत पर लगी है। वहीं, देश में इसपर भी सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।

कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर

ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। समिट को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर देश को मिल रहे इस मौके से गदगद हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की नकारात्मक सोच की हवा निकाल दी है।

कांग्रेस सांसद थरूर ने क्या कहा?

भारत की अगुवाई में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है, 'सबसे पहले बात ये है कि हम ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मुहैया करवा रहे हैं।' थरूर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के वे महत्वपूर्ण 11 खिलाड़ी जुट रहे हैं, जो बहुत अधिक विविधता वाले विचारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं और ये वो देश भी हैं जिनकी हम इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे हैं।'

चिदंबरम ने क्या कहा था?

इससे पहले बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं।

सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?

वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'

चीनी राष्ट्रपति सात साल बाद आ रहे भारत, शी जिनपिंग का दिल्ली दौरा कितना अहम?

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रौनक दिखने वाली है। जिसमें शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। पुतिन ने काफी पहले ही दिल्ली दौरे का ऐलान कर दिया था। हालांकि, चीन ने शी जिनपिंग के दौरे को लेकर ऐन वक्त तक सस्पेंस बनाए रखा। आखिरी करीब 48 घंटे पहले गुरुवार को चीन ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे।

7 साल बाद भारत दौरा

शी जिनपिंग का ये भारत दौरा कई वजहों से बेहद खास माना जा रहा है। इससे पहले साल 2019 में शी जिनपिंग चेन्नई के पास मामल्लापुरम में हुई एक अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे। साल 2019 दौरे के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। ऐसे में पूरे 7 साल बाद उनका भारत आना अपने आप में एक बड़ी बात है। भले ही यह मुख्य रूप से ब्रिक्स की एक बड़ी बैठक है, लेकिन पूरी दुनिया की नजरें नई दिल्ली में होने वाली हर हलचल पर टिकी हैं।

गलवान तनाव के बाद भारत-चीन के रिश्तों में गिरावट

2020 के गलवान घाटी तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी गिरावट आई थी। साल 2020 में भारत चीन सीमा के पास गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए थे। सीमा पर तनाव के साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते भी प्रभावित हुए। हालांकि, हाल के सालों में संबंधों में सुधार हुआ है, ख़ासकर पिछले साल चीन के तियानजिन में एससीओ बैठक में शामिल होने के लिए मोदी ने यात्रा की थी। यहां रूस और चीन के नेताओं के साथ उनकी मुलाकात ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। पीएम मोदी और राष्ट्रपित शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी हुई थी।

कड़वाहट के बाद दोनों देशों के रिश्तों ने ली करवट

हालांकि, दोनों देशों के संबंधों ने एक करवट जरूर ली है। जबसे सीमा पर तनाव को कम करने की कोशिशें हुई हैं, आर्थिक रिश्तों में भी बदलाव नजर आया है। इसी साल मार्च में भारत ने चीनी निवेश पर लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील दी थी। ये पाबंदियां गलवान में हुई झड़पों के बाद लगाई गई थीं। इन पाबंदियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल सेक्टर आदि शामिल था। भारत कुछ उद्योगों में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच ज्वाइंट वेंचर्स को तेज़ी से मंज़ूरी देने पर भी विचार कर रहा है। हाल ही में नई दिल्ली ने कुछ अहम परियोजनाओं को मंज़ूरी भी दी है जिनमें भारत की डिक्सन टेक्नोलॉजीज और चीनी स्मार्टफ़ोन निर्माता वीवो मोबाइल के बीच स्मार्टफ़ोन निर्माण से जुड़ा संयुक्त उपक्रम भी शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ बड़े निवेश और परियोजनाओं में बाधाएं बनी हुई हैं।

तनाव कम करने की कोशिश के बाद कई मुद्दे बरकरार

तनाव कम करने की कोशिश के बाद भी दोनों देशों के बीच ट्रस्ट डेफ़िसिट (भरोसे की कमी) और ट्रेड डेफ़िसिट (व्यापार घाटा) दो अहम मुद्दे बने हुए हैं। रॉयटर्स ने पिछले सप्ताह बताया था कि नई दिल्ली ने चीन के एंट ग्रुप से जुड़ी कंपनी अलीपे के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी देने से मना कर दिया। इस प्रस्ताव के तहत उसे भारत की तत्काल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाना था। भारत ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार चीन की मोबाइल फ़ोन निर्माता कंपनी शाओमी के खिलाफ जांच की सिफारिश पर भी विचार कर रही है, जिसे सीरियस फ़्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफ़िस ने की थी। इसमें भारत में कंपनी के कारोबार में कथित अनियमितताओं और विदेशी निवेश कानूनों के उल्लंघन की जांच की बात कही गई है। हालांकि शाओमी ने कानूनों के पालन की बात कही है।

दोनों देशों में भरोसे की कमी

उधर चीन की ओर से भी बहुत सारी पाबंदियां लगाई गई हैं। रॉयटर्स ने भारतीय सूत्रों के हवाले से दावा किया कि चीनी अधिकारियों ने अपनी कंपनियों से कहा है कि वे भारत को पोर्ट इक्विपमेंट, सोलर पैनल और मोबाइल निर्माण उपकरण समेत महत्वपूर्ण तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़े सामान न बेचें। समाचार एजेंसी ने ये भी दावा किया कि सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टर में जिन उपकरणों और पुर्ज़ों की जरूरत है, उन्हें चीनी सीमा शुल्क विभाग में रोक रखा है। रॉयटर्स ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से ये भी दावा किया है कि कुछ बड़ी सुरंग खोदने वाली मशीनों को एक साल से अधिक समय से चीन ने रोक रखा है।