भारत को मिला यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस का साथ, सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार का समर्थन
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भारत की बढ़ती ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। अब भारत को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का भी साथ मिल गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है। एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान इस बात पर जोर दिया।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है। तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट है कि परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्व वाली संस्था बनाने की जरूरत है, जिसमें विकासशील देशों और खासकर अफ्रीका की आवाज को सही जगह मिले।
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गुटेरेस ने खास तौर पर लिया भारत का नाम
सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है। आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।
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रूस-चीन ने भी की भारत को बड़ी भूमिका देने की मांग
ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है। दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है। ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है।
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ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी होनी चाहिए- पीएम मोदी
इससे पहले रविवार को पीएम मोदी ने कहा था, मौजूदा वैश्विक शासन ढांचा एक 'पिरामिड' जैसा है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से प्रभावित होने वाले देशों की उन्हें आकार देने की क्षमता सीमित है। पीएम मोदी ने कहा था कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में सबसे आगे रहता है लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पिछली पंक्ति में रहता है। उन्होंने विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलने का प्रस्ताव दिया, जहां हर देश की अपनी आवाज और हिस्सेदारी हो। ऐसे में यूएन के महासचिव का पीएम मोदी की बात को सीधा समर्थन देना अहम माना जा रहा है।
यूएन महासचिव का समर्थन भारत के लिए क्यों अहम?
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है। अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है। ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत को स्वीकार किया है। इससे भारत की दावेदारी पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर आई है।










3 hours ago
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