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150 करोड़ का ट्रेजरी स्कैम: भाजपा ने कहा - छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर बड़ी मछलियों को बचा रही हेमंत सरकार

झारखंड में 150 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित ट्रेजरी स्कैम (कोषागार घोटाला) को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर इस पूरे मामले को दबाने और जांच के नाम पर महज खानापूर्ति करने का गंभीर आरोप लगाया है.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, रामगढ़ और चाईबासा जैसे कई जिलों के कोषागारों से बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आ चुकी है. इसके बावजूद जांच का दायरा केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखना मामले की गंभीरता को छिपाने का प्रयास है.

150 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी, बिना बड़े अफसरों की सह के संभव नहीं

प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि शुरुआती जांच में ही वित्तीय अनियमितता का आंकड़ा 150 करोड़ रुपये को पार कर चुका है. इतने बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से पैसे की अवैध निकासी बिना उच्च स्तर के अधिकारियों की जानकारी, स्वीकृति और निगरानी के संभव ही नहीं है. उन्होंने मांग की कि एसआईटी (SIT) और सीआईडी (CID) को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय उन सभी जिम्मेदार वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करनी चाहिए, जिनके कार्यकाल के दौरान यह घोटाला हुआ.

ट्रेजरी स्कैम में भी बड़ी मछलियों को बचाने का आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने पूर्व में हुए परीक्षा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी जांच में कई प्रभावशाली लोगों को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई थी. बाद में जब छात्रों और युवाओं का उग्र आंदोलन हुआ, तब जाकर जांच का दायरा बढ़ा और बड़ी मछलियां पुलिस की पकड़ में आईं. ठीक उसी तर्ज पर ट्रेजरी स्कैम में भी केवल छोटे स्तर के आरोपियों को मोहरा बनाकर मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े अफसरों को बचाने का खेल खेला जा रहा है.

जिले के SP और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर भी उठाए सवाल

अजय साह ने पुलिस कोषागार निकासी प्रक्रिया में डीडीओ (DDO) यानी जिले के एसपी (SP) की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन जिलों में इतनी बड़ी राशि की अवैध निकासी हुई, वहां के तत्कालीन और वर्तमान एसपी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इसके साथ ही उन्होंने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कोषागारों से इतनी बड़ी गड़बड़ी हुई, लेकिन वे जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार पर झारखंड के वित्तीय संकट का ठीकरा फोड़ने में व्यस्त हैं. भाजपा ने मांग की है कि पूरे प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र की जवाबदेही तय करते हुए निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की जाए.

सिमडेगा जिला प्रशासन की पहल: अधिकारियों-कर्मियों के लिए दो दिवसीय AI कार्यशाला आयोजित

सिमडेगा उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार नई तकनीकों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर सक्रिय एवं प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा यह पहल की गई है। वे शुक्रवार को सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों की क्षमता वृद्धि तथा सरकारी कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 एवं 11 सितंबर 2026 को दो दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यशाला में बोल रहीं थीं । कार्यशाला को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।

उपायुक्त, सिमडेगा श्रीमती कंचन सिंह ने कहा कि “सिमडेगा विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं विकासात्मक पहलों के माध्यम से निरंतर प्रगति कर रहा है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीक का प्रभावी उपयोग प्रशासनिक कार्यों को तेज, गुणवत्तापूर्ण और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से पदाधिकारी कम समय में अधिक प्रभावी तरीके से कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे। इससे सरकारी प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाने तथा आम नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। जिला प्रशासन का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान JSLPS एवं GDI Partners के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पदाधिकारियों एवं कर्मियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवधारणा, इसके विभिन्न उपयोगों तथा सरकारी कार्यों में इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को विभिन्न AI टूल्स से परिचित कराने के साथ-साथ Hands-on Practical Sessions भी आयोजित किए गए, ताकि वे AI का व्यावहारिक उपयोग अपने दैनिक कार्यों में कर सकें।

प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन GDI के विशेषज्ञ श्री अंशुल गुप्ता एवं सुश्री जान्हवी बहादुर द्वारा किया गया। JSLPS की ओर से राज्य स्तरीय पदाधिकारी श्री बिष्णु चरण परिडा, श्री अमित जैन, श्री हेम राज एवं अन्य ने प्रशिक्षण के समन्वय एवं तकनीकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

सिमडेगा जिला प्रशासन की यह पहल सरकारी कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा प्रशासनिक कार्यों में दक्षता एवं गति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

UPSC CDS (II) और NDA/NA (II) परीक्षा 2026 को लेकर रांची में निषेधाज्ञा लागू, 21 केंद्रों पर धारा-163 के तहत पाबंदी


संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली द्वारा आयोजित सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा (II), तथा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौ सेना अकादमी (II), 2026 के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, राँची, श्री राकेश रंजन के संयुक्तादेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया:-

(1) पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना

(सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक 13.09.2026 के प्रातः 07:00 बजे से अपराह्न-09:00 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केन्द्र का नामः-

(1) सेन्ट्रल एकादमी, बरियातू रोड, राँची।

(2) संत अलोइस हाई स्कूल, पुरुलिया रोड, राँची।

(3) संत अन्ना बालिका उच्च विद्यालय, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(4) उर्सुलाईन इंटर कॉलेज, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(5) संत अन्ना, इन्टरमीडिएट कॉलेज, डॉ कामिल बुल्के पथ, पुरूलिया रोड, राँची।

(6) गोस्सनर हाई स्कूल, जी०ई०एल० कॉम्पलेक्स के पीछे, मेन रोड, राँची।

(7) फिरायालाल पब्लिक स्कूल, नियर रेलवे ओवरब्रिज, 5 मेन रोड, राँची।

(8) संत पॉल कॉलेज, चर्च रोड, बहुबाजार राँची।

(9) राजकीय बालिका +2 उच्च विद्यालय, बरियातु, एच०डी०एफ०सी० बैंक के सामने, राँची।

(10) डोरण्डा कॉलेज, श्री कृष्ण पार्क के सामन, ए०जी० मोड के नजदीक, डोरण्डा, राँची।

(11) गोस्सनर कॉलेज क्लब रोड, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(12) गोस्सनर कॉलेज क्लब रोड, राँची (सब, सेन्टर बी)।

(13) डी०ए०भी० पब्लिक स्कूल, गाँधी नगर सी०सी०एल०, काँके, रोड, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(14) डी०ए०भी० पब्लिक स्कूल, गाँधी नगर सी०सी०एल०, काँके, रोड, राँची (सब सेन्टर बी)।

(15) निर्मला कॉलेज, नियर संत जेवियर स्कूल, डोरण्डा, राँची।

(16) जे०एम० जे० हाई स्कूल, नॉर्थ ऑफिस पाड़ा, डोरण्डा, राँची।

(17) अनिता गर्ल्स हाई स्कूल, काँके, राँची।

(18) सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जे०पी० मार्केट धुर्वा के पीछे, राँची (सब सेन्टर-ए)

(19) राजकीय +2 हाई स्कूल, काँके, सेमरटोली, नियर CIP. काँके, राँची।

(20) विवेकानन्द विद्या मंदिर, सेक्टर-1, धुर्वा, राँची (सब सेन्टर-ए)।

(21) विवेकानन्द विद्या मंदिर, सेक्टर-1. धुर्वा, राँची (सब सेन्टर-बी)।

ब्रिक्स पर बंटी कांग्रेस, चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिना दिए फायदे

#pchidambaramshashitharoorbrics_summit

देश की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का अगले कुछ दिनों तक भारत में जमावड़ा रहेगा। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ गए हैं। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को भारत आने वाले हैं। ऐसे में दुनिया भर की नजर भारत पर लगी है। वहीं, देश में इसपर भी सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।

कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर

ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। समिट को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर देश को मिल रहे इस मौके से गदगद हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की नकारात्मक सोच की हवा निकाल दी है।

कांग्रेस सांसद थरूर ने क्या कहा?

भारत की अगुवाई में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है, 'सबसे पहले बात ये है कि हम ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मुहैया करवा रहे हैं।' थरूर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के वे महत्वपूर्ण 11 खिलाड़ी जुट रहे हैं, जो बहुत अधिक विविधता वाले विचारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं और ये वो देश भी हैं जिनकी हम इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे हैं।'

चिदंबरम ने क्या कहा था?

इससे पहले बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं।

सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?

वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'

चीनी राष्ट्रपति सात साल बाद आ रहे भारत, शी जिनपिंग का दिल्ली दौरा कितना अहम?

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रौनक दिखने वाली है। जिसमें शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। पुतिन ने काफी पहले ही दिल्ली दौरे का ऐलान कर दिया था। हालांकि, चीन ने शी जिनपिंग के दौरे को लेकर ऐन वक्त तक सस्पेंस बनाए रखा। आखिरी करीब 48 घंटे पहले गुरुवार को चीन ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे।

7 साल बाद भारत दौरा

शी जिनपिंग का ये भारत दौरा कई वजहों से बेहद खास माना जा रहा है। इससे पहले साल 2019 में शी जिनपिंग चेन्नई के पास मामल्लापुरम में हुई एक अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे। साल 2019 दौरे के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। ऐसे में पूरे 7 साल बाद उनका भारत आना अपने आप में एक बड़ी बात है। भले ही यह मुख्य रूप से ब्रिक्स की एक बड़ी बैठक है, लेकिन पूरी दुनिया की नजरें नई दिल्ली में होने वाली हर हलचल पर टिकी हैं।

गलवान तनाव के बाद भारत-चीन के रिश्तों में गिरावट

2020 के गलवान घाटी तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी गिरावट आई थी। साल 2020 में भारत चीन सीमा के पास गलवान में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए थे। सीमा पर तनाव के साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते भी प्रभावित हुए। हालांकि, हाल के सालों में संबंधों में सुधार हुआ है, ख़ासकर पिछले साल चीन के तियानजिन में एससीओ बैठक में शामिल होने के लिए मोदी ने यात्रा की थी। यहां रूस और चीन के नेताओं के साथ उनकी मुलाकात ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। पीएम मोदी और राष्ट्रपित शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी हुई थी।

कड़वाहट के बाद दोनों देशों के रिश्तों ने ली करवट

हालांकि, दोनों देशों के संबंधों ने एक करवट जरूर ली है। जबसे सीमा पर तनाव को कम करने की कोशिशें हुई हैं, आर्थिक रिश्तों में भी बदलाव नजर आया है। इसी साल मार्च में भारत ने चीनी निवेश पर लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील दी थी। ये पाबंदियां गलवान में हुई झड़पों के बाद लगाई गई थीं। इन पाबंदियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल सेक्टर आदि शामिल था। भारत कुछ उद्योगों में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच ज्वाइंट वेंचर्स को तेज़ी से मंज़ूरी देने पर भी विचार कर रहा है। हाल ही में नई दिल्ली ने कुछ अहम परियोजनाओं को मंज़ूरी भी दी है जिनमें भारत की डिक्सन टेक्नोलॉजीज और चीनी स्मार्टफ़ोन निर्माता वीवो मोबाइल के बीच स्मार्टफ़ोन निर्माण से जुड़ा संयुक्त उपक्रम भी शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ बड़े निवेश और परियोजनाओं में बाधाएं बनी हुई हैं।

तनाव कम करने की कोशिश के बाद कई मुद्दे बरकरार

तनाव कम करने की कोशिश के बाद भी दोनों देशों के बीच ट्रस्ट डेफ़िसिट (भरोसे की कमी) और ट्रेड डेफ़िसिट (व्यापार घाटा) दो अहम मुद्दे बने हुए हैं। रॉयटर्स ने पिछले सप्ताह बताया था कि नई दिल्ली ने चीन के एंट ग्रुप से जुड़ी कंपनी अलीपे के एक प्रस्ताव को मंज़ूरी देने से मना कर दिया। इस प्रस्ताव के तहत उसे भारत की तत्काल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाना था। भारत ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार चीन की मोबाइल फ़ोन निर्माता कंपनी शाओमी के खिलाफ जांच की सिफारिश पर भी विचार कर रही है, जिसे सीरियस फ़्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफ़िस ने की थी। इसमें भारत में कंपनी के कारोबार में कथित अनियमितताओं और विदेशी निवेश कानूनों के उल्लंघन की जांच की बात कही गई है। हालांकि शाओमी ने कानूनों के पालन की बात कही है।

दोनों देशों में भरोसे की कमी

उधर चीन की ओर से भी बहुत सारी पाबंदियां लगाई गई हैं। रॉयटर्स ने भारतीय सूत्रों के हवाले से दावा किया कि चीनी अधिकारियों ने अपनी कंपनियों से कहा है कि वे भारत को पोर्ट इक्विपमेंट, सोलर पैनल और मोबाइल निर्माण उपकरण समेत महत्वपूर्ण तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़े सामान न बेचें। समाचार एजेंसी ने ये भी दावा किया कि सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टर में जिन उपकरणों और पुर्ज़ों की जरूरत है, उन्हें चीनी सीमा शुल्क विभाग में रोक रखा है। रॉयटर्स ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से ये भी दावा किया है कि कुछ बड़ी सुरंग खोदने वाली मशीनों को एक साल से अधिक समय से चीन ने रोक रखा है।

ब्रिक्स सम्मेलन में नहीं आ रहे तारिक रहमान, बांग्लादेश ने कहा- भारत ने पीएम की हैसियत से नहीं बुलाया

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। गुरुवार को पत्रकारों ने रहमान के समिट में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। कबीर ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री को तो न्योता नहीं मिला। न्योता BIMSTEC के चेयरमैन को मिला है।

न रहमान आएंगे और न ही कोई प्रतिनिधि

गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि "भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट में न तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान जाएंगे और न ही कोई अन्य प्रतिनिधि। कबीर ने फ़ॉरन सर्विस एकेडमी में पत्रकारों से कहा, "जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तब द्विपक्षीय यात्राएं होंगी। इसमें जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है।"

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में न्योता नहीं

कबीर ने आगे कहा कि "भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया था, ना की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं। इसे द्विपक्षीय निमंत्रण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती। हम द्विपक्षीय यात्राओं और बातचीत को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं।"

तारिक रहमान ने भारत के दो-दो न्योते ठुकराए

भारत ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए निमंत्रण भेजा गया था। इससे पहले फरवरी में तारिक रहमान के शपथग्रहण के दौरान भी भारत ने द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया था। हालांकि, तारिक रहमान अपनी पार्टी बीएनपी के कट्टरपंथी नेताओं के दबाव और प्रमुख विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के भारत विरोधी एजेंडे को साधने के लिए भारत की यात्रा स्थगित कर चुके हैं।

मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत

बांग्लादेश उस रक्षा गठबंधन में शामिल होना चाहता है, जिसका उसे न्योता नहीं मिला है और दूसरी तरफ़ भारत के दो-दो न्योते ठुकरा चुका है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने की चाहत बांग्लादेश कई बार सार्वजनिक रूप से प्रकट कर चुका है। तारिक़ रहमान इस साल फरवरी में जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने थे तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नई दिल्ली आने के लिए न्योता भेजा था। रहमान नहीं आए और पहले विदेशी दौरे के लिए मलेशिया को चुना. मलेशिया के बाद रहमान चीन गए।

ब्रिक्स समिट को लेकर दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 15 हजार पुलिस कर्मी तैनात

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12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स समिट आयोजित हो रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों और अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं। दिल्ली में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है।

किले में तब्दील दिल्ली

दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली बंद नहीं होगी लेकिन वीवीआईपी के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक को रोका जा सकता है। कुछ जगहों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा के साथ आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और यातायात संबंधी एडवाइजरी पहले ही जारी की जा चुकी है।

खुफिया अलर्ट के बाद निगरानी बढ़ाई गई

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अलर्ट के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ संगठन या समूह वीवीआईपी नेताओं की आवाजाही में बाधा डालने, सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने या विरोध-प्रदर्शन के जरिए सम्मेलन को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। खुफिया इनपुट में दीवारों पर आपत्तिजनक या विरोध से जुड़े नारे लिखने, ड्रोन उड़ाने और वीवीआईपी रूट में घुसने जैसी कोशिशों का खतरा बताया गया है। इसके बाद सम्मेलन स्थल, प्रमुख होटलों, वीवीआईपी रूट, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और बड़े परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।

500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए

सुरक्षा व्यवस्था हवाई अड्डे, विदेशी नेताओं को ठहराए जाने वाले होटलों, भारत मंडपम और उन अन्य स्थानों तक रहेगी जहां ये विदेशी मेहमान जाएंगे। नई दिल्ली इलाके में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के अलावा चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सम्मेलन स्थल और विदेशी मेहमानों को ठहराए जाने वाले होटलों में प्रवेश नियंत्रण, पहचान सत्यापन, खुफिया जानकारी जुटाने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।

क्या है ब्रिक्स ?

ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स अंग्रेजी के अक्षर B R I C S से बना वो शब्द है, जिसमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है। ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका। ब्रिक्स में दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती 11 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं- रूस, चीन, भारत, ब्राज़ील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस ग्रुपिंग का पूर्ण सदस्य बना। बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में इस ग्रुपिंग के पार्टनर देश बने। कुछ जानकारों का कहना है कि ये देश साल 2050 तक विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे। उनका मानना है कि चीन और भारत विनिर्माण उद्योग और सेवाओं के मामले में पूरी दुनिया के प्रमुख सप्लायर हो जाएंगे जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे।

ब्रिक्स समिट से पहले पीएम मोदी का खास संदेश, पुतिन सुबह-सुबह पहुंचे दिल्ली, प्रधानमंत्री से होगी मुलाकात

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नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा है। सम्मेलन से पहले दुनिया भर के नेताओं का दिल्ली आना शुरू हो गया है। ब्रिक्स समिट 2026 में शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंच गए हैं। । दिग्गजों के आगमन से पहले दिल्ली को अभेद्य किला में तब्दील कर दिया गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन से पहले संदेश जारी किया है।

पीएम मोदी ने ब्रिक्‍स सम्‍मेलन से पहले कही बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश जारी किया है। उन्होंने लिखा, ''अगले कुछ दिनों में दुनियाभर के नेता ब्रिक्स समिट के लिए जुटेंगे. पूर्ण विश्वास है कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की कामना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।'' पीएम मोदी ने संस्कृत के एक श्लोक भी ज़िक्र किया है, जिसका मतलब है-''मनुष्य को सदैव सज्जनों के साथ रहना और उनकी संगति करनी चाहिए। सज्जनों के साथ ही विचार-विमर्श और मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना चाहिए क्योंकि परस्पर सदभाव, संवाद और मैत्रीपूर्ण संबंध, शांति और सहयोग को सुदृढ़ करते हैं।''

पुतिन पहुंचे भारत, जिनपिंग का इंतजार

इधर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। अपनी यात्रा के दौरान, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करेंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। अब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत अन्‍य नेताओं का इंतजार है।

ब्रिक्स समिट में इन मुद्दों पर चर्चा होगी

नई दिल्ली का भारत मंडपम इस हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल समिट की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है। यह कार्यक्रम 12 से 13 सितंबर तक दुनिया भर के प्रतिनिधियों और नेताओं को एक मंच पर लाएगा। बैठक में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के नेता शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शिखर सम्मेलन में नेता ब्रिक्स के भीतर सहयोग को मजबूत करने से जुड़े साझा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। सदस्य देश और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधि वैश्विक तथा क्षेत्रीय मामलों पर भी अपने विचार साझा करेंगे। इन मुद्दों को लेकर देशों के बीच आपसी महत्व के विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

ब्रिक्‍स में कौन-कौन देश हैं शामिल

ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स पार्टनर देशों में; बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम; शामिल हैं। भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 भी एक अहम पड़ाव है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है।

Amended BharatNet के तहत झारखंड के 260 प्रखंडों और 31 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचेगा हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड

भारत सरकार एवं झारखंड सरकार के सहयोग से 260 प्रखंडों, 4,395 ग्राम पंचायतों एवं 26,777 गैर-जीपी गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार

रांची, 10 सितंबर 2026: झारखंड में डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme–ABP) – भारतनेट फेज-III के लिए Project Implementation and Support Agreement पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौते पर 10 सितंबर 2026 को भारत सरकार के डिजिटल भारत निधि (DBN), झारखंड सरकार तथा झारखंड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (JDICL) के बीच हस्ताक्षर किए गए। भारत सरकार की ओर से DBN के Administrator श्री श्यामल मिश्रा उपस्थित रहे। वहीं, झारखंड सरकार की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव श्रीमती पूजा सिंघल एवं निदेशक सुश्री माधवी मिश्रा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को भारत सरकार एवं झारखंड सरकार की साझी पहल के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण एवं डिजिटल रूप से अपेक्षाकृत कम जुड़े क्षेत्रों में विश्वसनीय एवं हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करना है।

कार्यक्रम के तहत 260 प्रखंडों, 4,395 ग्राम पंचायतों एवं 26,777 गैर-जीपी गांवों को कवर किया जाएगा। यह पहल राज्य के डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों, सरकारी संस्थानों एवं अन्य उपयोगकर्ताओं तक ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक आधार तैयार करेगी।

कार्यक्रम के प्रमुख अवसंरचनात्मक एवं सेवा संबंधी घटक

4,387 मौजूदा ग्राम पंचायतों को Ring Topology में अपग्रेड किया जाएगा।

8 नई ग्राम पंचायतों को Ring Topology के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

पांच वर्षों की अवधि में 4,39,049 FTTH कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

ग्राम पंचायतों एवं गैर-जीपी गांवों में मांग के आधार पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार किया जाएगा।

नेटवर्क की क्षमता एवं विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए Middle-Mile Infrastructure का निर्माण एवं उन्नयन किया जाएगा।

झारखंड में State Network Operations Centre (SNOC) की स्थापना एवं संचालन किया जाएगा।

* कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए BSNL द्वारा JDICL को Project Management Consultancy (PMC) सहायता प्रदान की जाएगी।

ग्रामीण परिवारों एवं सरकारी संस्थानों तक कनेक्टिविटी

कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक फाइबर आधारित ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें सरकारी संस्थानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बेहतर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से झारखंड के ग्रामीण एवं कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों के नागरिकों की ई-गवर्नेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सेवाओं तथा अन्य ऑनलाइन सुविधाओं तक पहुंच को और सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।

सुदृढ़ डिजिटल नेटवर्क बुनियादी ढांचा नागरिक-केंद्रित सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति में भी सहायक होगा तथा सरकारी संस्थानों एवं ग्रामीण समुदायों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के अधिक प्रभावी उपयोग को सक्षम बनाएगा।

डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए केंद्र–राज्य सहयोग

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने तथा ग्रामीण एवं कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए भारत सरकार एवं झारखंड सरकार के बीच महत्वपूर्ण केंद्र–राज्य सहयोग का उदाहरण है।

यह पहल डिजिटल सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच बढ़ाने तथा डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं की प्रभावी एवं व्यापक उपलब्धता के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य के अनुरूप है।

माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा राज्य के ग्रामीण समुदायों तक बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी का लाभ पहुंचाने के लिए भारत सरकार एवं संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ निकट समन्वय में कार्य कर रही है।

मिस्टर सिंह हमारी सड़कों से हटिए', अमेरिका में भारतीय ड्राइवरों पर नस्लीय टिप्पणी

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अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया एक एआई-जनरेटेड पोस्टर से विवाद बढ़ गया है। पोस्टर को आलोचक 'नस्लवादी' तथा 'भारत विरोधी' बता रहे हैं। जिसमें ‘मिस्टर सिंह’ से खुद देश छोड़कर जाने के लिए कहा गया। भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले इस पोस्टर में 'सेल्फ-डिपोर्ट या परिणाम भुगतने' जैसी चेतावनी दी गई है।

विज्ञापन में क्या

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के हालिया इमिग्रेशन लागू करने वाले विज्ञापन में ट्रांसफॉर्मर्स फिल्म की पैरोडी वाले पोस्टर में एक रोबोट, सिर पर कपड़ा बांधे गोरे (वाइट) का सामना करता हुआ दिखाया गया है, जिसे मिस्टर सिंह कहा गया है। विज्ञापन में 'ट्रांसफॉर्मर्स' फ्रैंचाइजी के मुख्य किरदार 'ऑप्टिमस प्राइम' को DHS का आर्म पैच पहने हुए दिखाया गया है। वह भूरी दाढ़ी वाले आदमी का सामना करते हुए कहता है, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह।'

एक वीडियो क्लिप भी किया गया पोस्ट

एक्स पर इससे संबंधित पोस्ट में एक छोटा वीडियो क्लिप दिखाया गया है जिसमें ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी का मुख्य खलनायक मेगाट्रॉन, एलियंस की रिहाई के लिए बातचीत कर रहा है। यह शब्द अमेरिकी प्रशासन विदेशी नागरिकों के लिए इस्तेमाल करता है। मेगाट्रॉन को ट्रक ड्राइवरों हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह की रिहाई की कोशिश करते हुए दिखाया गया है, जो सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों में शामिल थे।

'खुद देश छोड़ने या अंजाम भुगतने की धमकी

डीएचएस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अगर आप इस देश के खिलाफ दुश्मनी भरी नीयत से आते हैं, तो यह जान लें हम अपना बचाव करेंगे। हम अमेरिकन मूल्यों की रक्षा करेंगे। हम अपने देश की रक्षा करेंगे। एक अन्य पोस्ट में ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी के मुख्य नायक ऑप्टिमस प्राइम को दिखाया गया है, जिसके हाथ पर डीएचएस का एक बैज लगा है। वह भूरी दाढ़ी वाले व्यक्ति का सामना करते हुए संदेश दे रहा है। 'खुद देश छोड़ दें या अंजाम भुगतें'

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन में नाराजगी

सिंह सरनेम हिंदू और सिख धर्म मानने वाले बहुत से लोगों का होता है। यह समूह अमेरिकी ट्रकिंग वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा है। इससे साफ है कि पोस्टर में सिंह लिखा जाना भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाने की ओर इशाका करती है। विज्ञापन में मिस्टर सिंह के जिक्र की हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन जैसे संगठनों ने आलोचना की है। संगठन ने एक्स पर लिखा कि 'सिंह' हिंदू होते हैं, सिख होते हैं, अमेरिकी होते हैं और वे गाड़ी चलाते हैं। इस नस्लवादी, भारत-विरोधी प्रोफाइलिंग से अमेरिका की सामूहिक अंतरात्मा को झटका लगना चाहिए।