ब्रिक्स पर बंटी कांग्रेस, चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिना दिए फायदे
#pchidambaramshashitharoorbrics_summit
देश की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का अगले कुछ दिनों तक भारत में जमावड़ा रहेगा। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ गए हैं। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को भारत आने वाले हैं। ऐसे में दुनिया भर की नजर भारत पर लगी है। वहीं, देश में इसपर भी सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।
![]()
कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर
ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। समिट को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर देश को मिल रहे इस मौके से गदगद हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की नकारात्मक सोच की हवा निकाल दी है।
![]()
कांग्रेस सांसद थरूर ने क्या कहा?
भारत की अगुवाई में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है, 'सबसे पहले बात ये है कि हम ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मुहैया करवा रहे हैं।' थरूर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के वे महत्वपूर्ण 11 खिलाड़ी जुट रहे हैं, जो बहुत अधिक विविधता वाले विचारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं और ये वो देश भी हैं जिनकी हम इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे हैं।'
![]()
चिदंबरम ने क्या कहा था?
इससे पहले बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं।
![]()
सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?
वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'








भारत सरकार एवं झारखंड सरकार के सहयोग से 260 प्रखंडों, 4,395 ग्राम पंचायतों एवं 26,777 गैर-जीपी गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार

Sep 11 2026, 14:14
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
3.4k