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वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री हनुमत सिंह का निधन,राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन रहा प्रेरणादायी
               
                                      
बलरामपुर। भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री,वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रख्यात समाजसेवी श्री हनुमत सिंह के निधन से बलरामपुर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। उनका जीवन सामाजिक सेवा,जनसंघर्ष,न्याय और जनकल्याण के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
श्री हनुमत सिंह का जन्म वर्ष 1942 में जनपद बस्ती के मरवटिया ग्राम में हुआ। वर्ष 1965 से उन्होंने बलरामपुर में वकालत की शुरुआत की और अपनी प्रतिभा,ईमानदारी तथा न्यायप्रियता के बल पर जिले के प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं में विशिष्ट पहचान बनाई। वे केवल एक सफल अधिवक्ता ही नहीं,बल्कि सामाजिक,धार्मिक एवं जनहित के कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहे। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता को उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने वर्ष 1985 में पहली बार बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 1989 में वे बलरामपुर से विधायक निर्वाचित हुए तथा 1991 में पुनः विधायक चुने गए। उनकी कार्यकुशलता और जनसेवा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में गन्ना उद्योग एवं चीनी मिलें विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों,विशेषकर गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा तथा चीनी उद्योग के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
श्री हनुमत सिंह को सामाजिक एवं राष्ट्रवादी विचारों की प्रेरणा अपने पिता श्री केसरी सिंह से मिली,जो सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने वर्ष 1952 में हिंदू महासभा के प्रत्याशी के रूप में बस्ती विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था।
पारिवारिक जीवन में श्री हनुमत सिंह के परिवार में उनके भाई विजय प्रताप सिंह एवं शिव प्रताप सिंह तथा चार बहनें थीं। उनके परिवार में एक पुत्र अखिलेश प्रताप सिंह तथा दो पुत्रियां मीटा सिंह एवं गुड़िया सिंह हैं।
श्री हनुमत सिंह का संपूर्ण जीवन न्याय,सेवा,सामाजिक समर्पण और जनकल्याण की भावना से ओत-प्रोत रहा। वकालत,राजनीति और समाजसेवा के माध्यम से उन्होंने बलरामपुर एवं आसपास के क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन जनपद और प्रदेश की राजनीति तथा समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके आदर्श,कार्यशैली और जनसेवा का भाव सदैव लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री हनुमत सिंह का निधन,राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन रहा प्रेरणादायी
               
                                      
बलरामपुर। भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री,वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रख्यात समाजसेवी श्री हनुमत सिंह के निधन से बलरामपुर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। उनका जीवन सामाजिक सेवा,जनसंघर्ष,न्याय और जनकल्याण के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
श्री हनुमत सिंह का जन्म वर्ष 1942 में जनपद बस्ती के मरवटिया ग्राम में हुआ। वर्ष 1965 से उन्होंने बलरामपुर में वकालत की शुरुआत की और अपनी प्रतिभा,ईमानदारी तथा न्यायप्रियता के बल पर जिले के प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं में विशिष्ट पहचान बनाई। वे केवल एक सफल अधिवक्ता ही नहीं,बल्कि सामाजिक,धार्मिक एवं जनहित के कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहे। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता को उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने वर्ष 1985 में पहली बार बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 1989 में वे बलरामपुर से विधायक निर्वाचित हुए तथा 1991 में पुनः विधायक चुने गए। उनकी कार्यकुशलता और जनसेवा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में गन्ना उद्योग एवं चीनी मिलें विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों,विशेषकर गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा तथा चीनी उद्योग के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
श्री हनुमत सिंह को सामाजिक एवं राष्ट्रवादी विचारों की प्रेरणा अपने पिता श्री केसरी सिंह से मिली,जो सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने वर्ष 1952 में हिंदू महासभा के प्रत्याशी के रूप में बस्ती विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था।
पारिवारिक जीवन में श्री हनुमत सिंह के परिवार में उनके भाई विजय प्रताप सिंह एवं शिव प्रताप सिंह तथा चार बहनें थीं। उनके परिवार में एक पुत्र अखिलेश प्रताप सिंह तथा दो पुत्रियां मीटा सिंह एवं गुड़िया सिंह हैं।
श्री हनुमत सिंह का संपूर्ण जीवन न्याय,सेवा,सामाजिक समर्पण और जनकल्याण की भावना से ओत-प्रोत रहा। वकालत,राजनीति और समाजसेवा के माध्यम से उन्होंने बलरामपुर एवं आसपास के क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन जनपद और प्रदेश की राजनीति तथा समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके आदर्श,कार्यशैली और जनसेवा का भाव सदैव लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
महाघोटाला या बड़ा फर्जीवाड़ा? बलरामपुर के चमरबोझिया में 14 साल से 'फर्जी' मार्कशीट पर नौकरी कर रहा रोजगार सेवक! गणित भी हुआ फेल
गैसड़ी/बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के विकास खंड गैसड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत चमरबोझिया से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ मनरेगा में धांधली के साथ-साथ ग्राम रोजगार सेवक की नियुक्ति पर ही बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने पुख्ता दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की प्रतियों के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, जिसमें खुलासा हुआ है कि रोजगार सेवक की अंकतालिकाओं में अंकों के जोड़ से लेकर श्रेणी (Division) तक में भारी गड़बड़ी है।
1. मार्कशीट का चौंकाने वाला सच: गणित फेल, नंबरों के जोड़ में भारी हेरफेर!
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की अंकतालिकाओं का गहन विश्लेषण करने पर कई हैरान करने वाली गणितीय और तकनीकी खामियां पाई गई हैं:
2002 (पूर्वा मध्यमा) की अंकतालिका में झोल:
पहला भाग: अनिवार्य विषयों में प्राप्तांक 35 + 32 + 38 = 105 होते हैं, लेकिन अंकतालिका में इसका जोड़ 144 लिखा गया है!
दूसरा भाग: साहित्य और हिन्दी के प्राप्तांक 36 + 40 = 76 होते हैं, जबकि मार्कशीट पर जोड़ 181 दर्ज है!
कुल अंक विरोधाभास: वास्तविक जोड़ 105 + 76 = 181 होना चाहिए था, परंतु मार्कशीट पर 325 / 500 चढ़ा दिया गया।
श्रेणी (Division) में सबसे बड़ा झोल:
2002 की अंकतालिका में 325 अंक दिखाकर "द्वितीय श्रेणी" (2nd Division) दर्ज है।
2002 के ही प्रमाण पत्र (Certificate) में अभ्यर्थी को "तृतीय श्रेणी" (3rd Division) में उत्तीर्ण दिखाया गया है। एक ही वर्ष और एक ही परीक्षा के दो दस्तावेजों में श्रेणी का अलग होना सबसे बड़ा संदेह पैदा करता है।
2004 (उत्तर मध्यमा) की अंकतालिका में गड़बड़ी:
अग्निवार्य विषय: 35 + 30 + 32 = 97 अंक होते हैं, पर योग 205 दिखाया गया है।
वैकल्पिक विषय: 28 + 40 + 38 = 106 अंक होते हैं, पर योग 203 लिखा गया है।
परिणाम: वास्तविक योग 97 + 106 = 203 के बजाय कुल प्राप्तांक 408 / 600 दर्ज करके "प्रथम श्रेणी" दे दी गई है!
2. 14 वर्षों से सरकार को गुमराह करने का आरोप
लोकपाल मनरेगा (विकास भवन, बलरामपुर) को सौंपे गए पत्र (दिनांक 09.08.2023) में शिकायतकर्ता बजरंगी, तिरकराम यादव और स्वामी दयाल यादव ने आरोप लगाया है कि रोजगार सेवक नाज़िर (पुत्र अ० कलीम) वर्ष 2009 से (खण्ड विकास अधिकारी गैसड़ी के आदेशानुसार) इन्हीं संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे सरकारी तंत्र को गुमराह कर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन विभागीय शह के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
3. मनरेगा में JCB का नंगा नाच और फर्जी निस्तारण
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलरामपुर को भेजी गई आईजीआरएस शिकायत (संख्या: 40018223007861) के अनुसार:
मशीनों का अवैध इस्तेमाल: वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत में नाला सफाई का कार्य मनरेगा मजदूरों से कराने के बजाय JCB मशीन से कराया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
दोबारा भुगतान का खेल: आरोप है कि पूर्व में कराएं जा चुके इसी कार्य का दोबारा भुगतान उठाने की साजिश रची जा रही है।
जांच में सांठगांठ: शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने मौके पर शिकायतकर्ताओं या ग्रामीणों को बुलाए बिना, ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक से साठ-गांठ कर मनमाने तरीके से फर्जी रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
अभिलेखों का सत्यापन: बोर्ड (उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद) से रोजगार सेवक के अनुक्रमांक (2002: 214240 और 2004: 354219) का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए।
रिकवरी व एफआईआर: फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर 14 वर्षों में उठाए गए वेतन/मानदेय की रिकवरी कर एफआईआर दर्ज की जाए।
सुरक्षा की गुहार: भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले शिकायतकर्ताओं ने अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
महाघोटाला या बड़ा फर्जीवाड़ा? बलरामपुर के चमरबोझिया में 14 साल से 'फर्जी' मार्कशीट पर नौकरी कर रहा रोजगार सेवक! गणित भी हुआ फेल
गैसड़ी/बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के विकास खंड गैसड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत चमरबोझिया से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ मनरेगा में धांधली के साथ-साथ ग्राम रोजगार सेवक की नियुक्ति पर ही बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने पुख्ता दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की प्रतियों के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, जिसमें खुलासा हुआ है कि रोजगार सेवक की अंकतालिकाओं में अंकों के जोड़ से लेकर श्रेणी (Division) तक में भारी गड़बड़ी है।
1. मार्कशीट का चौंकाने वाला सच: गणित फेल, नंबरों के जोड़ में भारी हेरफेर!
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की अंकतालिकाओं का गहन विश्लेषण करने पर कई हैरान करने वाली गणितीय और तकनीकी खामियां पाई गई हैं:
2002 (पूर्वा मध्यमा) की अंकतालिका में झोल:
पहला भाग: अनिवार्य विषयों में प्राप्तांक 35 + 32 + 38 = 105 होते हैं, लेकिन अंकतालिका में इसका जोड़ 144 लिखा गया है!
दूसरा भाग: साहित्य और हिन्दी के प्राप्तांक 36 + 40 = 76 होते हैं, जबकि मार्कशीट पर जोड़ 181 दर्ज है!
कुल अंक विरोधाभास: वास्तविक जोड़ 105 + 76 = 181 होना चाहिए था, परंतु मार्कशीट पर 325 / 500 चढ़ा दिया गया।
श्रेणी (Division) में सबसे बड़ा झोल:
2002 की अंकतालिका में 325 अंक दिखाकर "द्वितीय श्रेणी" (2nd Division) दर्ज है।
2002 के ही प्रमाण पत्र (Certificate) में अभ्यर्थी को "तृतीय श्रेणी" (3rd Division) में उत्तीर्ण दिखाया गया है। एक ही वर्ष और एक ही परीक्षा के दो दस्तावेजों में श्रेणी का अलग होना सबसे बड़ा संदेह पैदा करता है।
2004 (उत्तर मध्यमा) की अंकतालिका में गड़बड़ी:
अग्निवार्य विषय: 35 + 30 + 32 = 97 अंक होते हैं, पर योग 205 दिखाया गया है।
वैकल्पिक विषय: 28 + 40 + 38 = 106 अंक होते हैं, पर योग 203 लिखा गया है।
परिणाम: वास्तविक योग 97 + 106 = 203 के बजाय कुल प्राप्तांक 408 / 600 दर्ज करके "प्रथम श्रेणी" दे दी गई है!
2. 14 वर्षों से सरकार को गुमराह करने का आरोप
लोकपाल मनरेगा (विकास भवन, बलरामपुर) को सौंपे गए पत्र (दिनांक 09.08.2023) में शिकायतकर्ता बजरंगी, तिरकराम यादव और स्वामी दयाल यादव ने आरोप लगाया है कि रोजगार सेवक नाज़िर (पुत्र अ० कलीम) वर्ष 2009 से (खण्ड विकास अधिकारी गैसड़ी के आदेशानुसार) इन्हीं संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे सरकारी तंत्र को गुमराह कर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन विभागीय शह के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
3. मनरेगा में JCB का नंगा नाच और फर्जी निस्तारण
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलरामपुर को भेजी गई आईजीआरएस शिकायत (संख्या: 40018223007861) के अनुसार:
मशीनों का अवैध इस्तेमाल: वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत में नाला सफाई का कार्य मनरेगा मजदूरों से कराने के बजाय JCB मशीन से कराया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
दोबारा भुगतान का खेल: आरोप है कि पूर्व में कराएं जा चुके इसी कार्य का दोबारा भुगतान उठाने की साजिश रची जा रही है।
जांच में सांठगांठ: शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने मौके पर शिकायतकर्ताओं या ग्रामीणों को बुलाए बिना, ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक से साठ-गांठ कर मनमाने तरीके से फर्जी रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
अभिलेखों का सत्यापन: बोर्ड (उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद) से रोजगार सेवक के अनुक्रमांक (2002: 214240 और 2004: 354219) का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए।
रिकवरी व एफआईआर: फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर 14 वर्षों में उठाए गए वेतन/मानदेय की रिकवरी कर एफआईआर दर्ज की जाए।
सुरक्षा की गुहार: भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले शिकायतकर्ताओं ने अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
महाघोटाला या बड़ा फर्जीवाड़ा? बलरामपुर के चमरबोझिया में 14 साल से 'फर्जी' मार्कशीट पर नौकरी कर रहा रोजगार सेवक! गणित भी हुआ फेल
गैसड़ी/बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के विकास खंड गैसड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत चमरबोझिया से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ मनरेगा में धांधली के साथ-साथ ग्राम रोजगार सेवक की नियुक्ति पर ही बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने पुख्ता दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की प्रतियों के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, जिसमें खुलासा हुआ है कि रोजगार सेवक की अंकतालिकाओं में अंकों के जोड़ से लेकर श्रेणी (Division) तक में भारी गड़बड़ी है।
1. मार्कशीट का चौंकाने वाला सच: गणित फेल, नंबरों के जोड़ में भारी हेरफेर!
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की अंकतालिकाओं का गहन विश्लेषण करने पर कई हैरान करने वाली गणितीय और तकनीकी खामियां पाई गई हैं:
2002 (पूर्वा मध्यमा) की अंकतालिका में झोल:
पहला भाग: अनिवार्य विषयों में प्राप्तांक 35 + 32 + 38 = 105 होते हैं, लेकिन अंकतालिका में इसका जोड़ 144 लिखा गया है!
दूसरा भाग: साहित्य और हिन्दी के प्राप्तांक 36 + 40 = 76 होते हैं, जबकि मार्कशीट पर जोड़ 181 दर्ज है!
कुल अंक विरोधाभास: वास्तविक जोड़ 105 + 76 = 181 होना चाहिए था, परंतु मार्कशीट पर 325 / 500 चढ़ा दिया गया।
श्रेणी (Division) में सबसे बड़ा झोल:
2002 की अंकतालिका में 325 अंक दिखाकर "द्वितीय श्रेणी" (2nd Division) दर्ज है।
2002 के ही प्रमाण पत्र (Certificate) में अभ्यर्थी को "तृतीय श्रेणी" (3rd Division) में उत्तीर्ण दिखाया गया है। एक ही वर्ष और एक ही परीक्षा के दो दस्तावेजों में श्रेणी का अलग होना सबसे बड़ा संदेह पैदा करता है।
2004 (उत्तर मध्यमा) की अंकतालिका में गड़बड़ी:
अग्निवार्य विषय: 35 + 30 + 32 = 97 अंक होते हैं, पर योग 205 दिखाया गया है।
वैकल्पिक विषय: 28 + 40 + 38 = 106 अंक होते हैं, पर योग 203 लिखा गया है।
परिणाम: वास्तविक योग 97 + 106 = 203 के बजाय कुल प्राप्तांक 408 / 600 दर्ज करके "प्रथम श्रेणी" दे दी गई है!
2. 14 वर्षों से सरकार को गुमराह करने का आरोप
लोकपाल मनरेगा (विकास भवन, बलरामपुर) को सौंपे गए पत्र (दिनांक 09.08.2023) में शिकायतकर्ता बजरंगी, तिरकराम यादव और स्वामी दयाल यादव ने आरोप लगाया है कि रोजगार सेवक नाज़िर (पुत्र अ० कलीम) वर्ष 2009 से (खण्ड विकास अधिकारी गैसड़ी के आदेशानुसार) इन्हीं संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे सरकारी तंत्र को गुमराह कर नौकरी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन विभागीय शह के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
3. मनरेगा में JCB का नंगा नाच और फर्जी निस्तारण
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलरामपुर को भेजी गई आईजीआरएस शिकायत (संख्या: 40018223007861) के अनुसार:
मशीनों का अवैध इस्तेमाल: वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत में नाला सफाई का कार्य मनरेगा मजदूरों से कराने के बजाय JCB मशीन से कराया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
दोबारा भुगतान का खेल: आरोप है कि पूर्व में कराएं जा चुके इसी कार्य का दोबारा भुगतान उठाने की साजिश रची जा रही है।
जांच में सांठगांठ: शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने मौके पर शिकायतकर्ताओं या ग्रामीणों को बुलाए बिना, ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक से साठ-गांठ कर मनमाने तरीके से फर्जी रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
अभिलेखों का सत्यापन: बोर्ड (उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद) से रोजगार सेवक के अनुक्रमांक (2002: 214240 और 2004: 354219) का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए।
रिकवरी व एफआईआर: फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर 14 वर्षों में उठाए गए वेतन/मानदेय की रिकवरी कर एफआईआर दर्ज की जाए।
सुरक्षा की गुहार: भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले शिकायतकर्ताओं ने अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
बलरामपुर में कलयुगी बेटे का खौफनाक कदम, पीट-पीटकर पिता की हत्या, माँ गंभीर घायल
तुलसीपुर (बलरामपुर)। मानवता को तार-तार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात शनिवार को तुलसीपुर कस्बे के लाल चौराहा (जारवा रोड) से सामने आई है। जहाँ शराब के नशे में धुत एक कलयुगी बेटे ने अपने ही माता-पिता पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हृदयविदारक घटना में पिता की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि माँ गंभीर रूप से घायल हैं।
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाल चौराहा निवासी कल्लू (60 वर्ष) पुत्र राममिलन प्रतिदिन की तरह मजदूरी करके जब घर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि उनका मझला बेटा पिंटू अपनी माँ फूलमती (55 वर्ष) को बेरहमी से पीट रहा था।
जब बुजुर्ग पिता कल्लू ने बीच-बचाव कर अपनी पत्नी को बचाने का प्रयास किया, तो सिरफिरे बेटे पिंटू ने उन पर हमला बोल दिया और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उन्हें मरणासन्न कर दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
घटना के तुरंत बाद छोटा बेटा गोलू किसी तरह माता-पिता को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तुलसीपुर पहुँचा, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद कल्लू को मृत घोषित कर दिया।
वहीं, माँ फूलमती की हालत अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। उनके एक हाथ में गंभीर फ्रैक्चर है और सिर पर गहरा घाव आया है। होश में आने पर वह लगातार अपने दिवंगत पति को याद कर कलयुगी बेटे को धिक्कार रही हैं।
"आए दिन शराब के नशे में विवाद करता था पिंटू"
छोटा बेटा गोलू और परिवार से अलग रह रहा मंझला बेटा राजू दोनों सदमे में हैं। राजू ने बताया कि पिंटू की शराब की लत और आए दिन के मारपीट के रवैये से तंग आकर ही वह परिवार से अलग रहने लगा था।
पुलिस व प्रशासनिक कार्रवाई
पोस्टमार्टम की तैयारी: समाचार लिखे जाने तक दोनों सीएचसी तुलसीपुर में मौजूद थे। रविवार सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बलरामपुर भेजा जाएगा, जिससे मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो सके।
जांच जारी: पुलिस मामले का संज्ञान लेकर आरोपी बेटे की तलाश व अग्रिम कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
बरसात में बदहाल हुआ श्मशान घाट अंतिम संस्कार में हो रही भारी परेशानी
जयसिह
तुलसीपुर बलरामपुर । नगर के पुरानी बाजार स्थित नकटी नाले के तट पर बना एकमात्र श्मशान घाट वर्षों से बदहाली का शिकार है। बरसात के मौसम में यहां की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। जलभराव, कीचड़ और अव्यवस्थित परिसर के कारण परिजनों को शव का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों को विवशता में सिरिया नाले स्थित श्मशान घाट का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी बाजार से श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर पैदल चलना तक मुश्किल है, ऐसे में अंतिम यात्रा निकालना बेहद कष्टदायक हो जाता है। नगरवासियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से इस गंभीर समस्या की ओर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग का ध्यान नहीं गया है।
सभासद प्रतिनिधि राम दयाल सोनी ने कहा कि यदि जिम्मेदारों ने शीघ्र ही श्मशान घाट और संपर्क मार्ग की मरम्मत एवं आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं कराई, तो नगरवासियों की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की।
22 जुलाई को बलरामपुर में भाजपा का बूथ अध्यक्ष सम्मेलन,तैयारियों में जुटा संगठन
           
                                       
बलरामपुर। भारतीय जनता पार्टी की ओर से 22 जुलाई को विधानसभा बलरामपुर में आयोजित होने वाले बूथ अध्यक्ष सम्मेलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। शनिवार को जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा और सदर विधायक पल्टूराम के नेतृत्व में आयोजित बैठक में सम्मेलन की रूपरेखा तय की गई तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा ने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका बूथ संगठन है। उन्होंने कहा कि बूथ अध्यक्ष पार्टी की रीढ़ हैं और उनके नेतृत्व में प्रत्येक बूथ पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि 22 जुलाई का सम्मेलन संगठन को नई ऊर्जा और नई दिशा देगा।
सदर विधायक पल्टूराम ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में बूथ अध्यक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के साथ आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की मजबूत आधारशिला साबित होगा।
बैठक में जिला महामंत्री डॉ.अजय सिंह 'पिंकू',जिलाउपाध्यक्ष वरुण सिंह, विंदु विश्वकर्मा,आद्या सिंह 'पिंकी',राजाराम गौतम,ललिता तिवारी,जिला मंत्री अक्षय शुक्ला,युवा मोर्चा के जिला महामंत्री,मंजू तिवारी,सुनीता मिश्रा,सरोज तिवारी,युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष सौरभ तुलसियान,राकेश ओझा,चंचरीक त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी कार्यकर्ताओं से 22 जुलाई के बूथ अध्यक्ष सम्मेलन को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक बूथ अध्यक्षों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।
छत से टपक रहा पानी, गिर रहा प्लास्टर - संस्कृत विद्यालय में दहशत में पढ़ाई
तुलसीपुर, बलरामपुर ।स्थानीय श्रीराधा कृष्ण संस्कृत माध्यमिक विद्यालय तुलसीपुर में इस सत्र में पढ़ने वाले छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
         छात्रों के सामने पठन-पाठन में रोज कोई न कोई समस्या बनी रहती है। कमरों की पूरी छतों से बरसात का पानी टपक रहा है। साथ ही प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहे हैं। इसके कारण अध्यापकों के साथ-साथ पढ़ने वाले बच्चों में हर समय दहशत बनी रहती है।
         प्रधानाचार्य अनिल कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस विद्यालय में 160 बच्चे पंजीकृत हैं तथा 75 बच्चे छात्रावास में रहते हैं। उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी यहीं की जाती है।
         उन्होंने बताया कि यह विद्यालय पहले सैकड़ों साल पुराना विद्यालय देवीपाटन रोड स्थित जुगलीपुर में संचालित था। जो प्रदेश सरकार द्वारा देवीपाटन मंदिर कॉरिडोर विस्तार एवं सुंदरीकरण के लिए ओवर ब्रिज निर्माण और सड़क चौड़ीकरण में यह विद्यालय आ गया था। तब जिला प्रशासन ने बच्चों की समस्या को देखते हुए इसे तत्काल स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज खेल के मैदान के पास जिला पंचायत की बनी बिल्डिंग में हस्तांतरित कर दिया था। वर्तमान में यहीं बच्चों का पठन-पाठन कार्य चल रहा है।
       प्रधानाचार्य ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बरसात से स्कूल के कमरों के ऊपर से पानी बाहर न गिरकर छत पर भरा रहता है। जिसके कारण कमरों में टपक रहा है। सभी कमरे प्रभावित हो गए हैं तथा छतों के प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहे हैं। दहशत बनी रहती है कि बच्चे चोटिल न हो जाएं।विद्यालय में सहायक अध्यापक अनिरुद्ध कुमार पांडे, अरुण कुमार त्रिपाठी तैनात हैं और बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
        अध्यापकों और छात्रों ने बताया कि जब बरसात खत्म होती है तो छत के ऊपर चढ़कर झाड़ू से घंटों मेहनत करके पानी नीचे गिराते हैं। तब जाकर टपकना बंद होता है। लेकिन प्लास्टर बीच-बीच में टूट-टूटकर गिरते रहते हैं। इस समस्या को लेकर तहसील व जिले के अधिकारियों से मांग की गई है कि बरसात के मौसम में छात्रों की समस्या को देखते हुए विद्यालय के कमरों की मरम्मत कराई जाए, जिससे सुरक्षित रहते हुए बच्चे सही रूप से शिक्षा ग्रहण कर सकें।
प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा खेल! पात्र गरीबों को छोड़ संपन्न लोगों को आवास देने का आरोप, 50-50 बंटवारे की भी चर्चा

पचपेड़वा (बलरामपुर)। विकासखंड पचपेड़वा की ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद और कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों तक नहीं पहुंच रहा है, जबकि आर्थिक रूप से संपन्न और बड़े भू-स्वामित्व वाले लोगों को पात्र बनाकर आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में कई ऐसे गरीब परिवार हैं जो आज भी जर्जर और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। दूसरी ओर आरोप है कि सरकारी नौकरी करने वाले तथा तीन-चार हेक्टेयर तक कृषि भूमि रखने वाले लोगों के नाम पात्र सूची में शामिल कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि आवास स्वीकृत कराने के नाम पर "50-50 बंटवारे" की बात कही गई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता और पात्रता प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ग्राम पंचायत के प्रधान मोहम्मद शब्बीर हसन एवं प्रधान प्रतिनिधि जुबेर अहमद का नाम भी दबी जुबान से इस मामले में चर्चा में है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर अपात्र लाभार्थियों के आवास निरस्त करने तथा वास्तविक गरीबों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है और लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता के इस कथित प्रकरण में संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।