न्यूयॉर्क ने AI पर खींची लक्ष्मण रेखा, भारत के स्कूलों के सामने बड़ा सवाल—‘AI सिखाएं या स्क्रीन रोकें?’ दुनिया AI की ओर बढ़ रही है,
अमर बहादुर सिंह बलिया शहर! नई दिल्ली:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से शिक्षा का हिस्सा बन रहा है। विद्यार्थी सवालों के जवाब खोजने, नोट्स बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और नई जानकारी समझने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के स्क्रीन टाइम को लगातार बढ़ा रहे हैं। इसी दोहरी चुनौती के बीच न्यूयॉर्क के सरकारी स्कूलों में AI और स्क्रीन टाइम को लेकर अपनाई गई सख्त नीति भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी बनकर सामने आई है। भारत की चुनौती न्यूयॉर्क से अलग अमेरिका के कई स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल संसाधन पहले से उपलब्ध हैं, जबकि भारत के सरकारी स्कूलों में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चों को पर्याप्त डिजिटल संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की आवश्यकता है। इसलिए भारत के लिए समाधान AI पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता। भारत को ऐसी नीति की जरूरत है जिसमें तकनीक का इस्तेमाल भी हो और बच्चों की स्वतंत्र सोच भी मजबूत हो। AI से नकल नहीं, सीखने की आदत बने शिक्षाविदों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यार्थी हर उत्तर AI से लेने लगेंगे तो उनकी सोचने, लिखने, तर्क करने और समस्या हल करने की क्षमता पर क्या असर पड़ेगा? स्कूलों में AI साक्षरता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बच्चों को बताया जा सकता है— AI कैसे काम करता है? AI की जानकारी में गलती क्यों हो सकती है? AI और इंटरनेट की जानकारी की सत्यता कैसे जांचें? असाइनमेंट में AI का नैतिक उपयोग कैसे करें? अपनी सोच और रचनात्मकता को AI से कैसे बेहतर बनाएं? भारत को ‘AI बैन’ नहीं, ‘AI बैलेंस’ चाहिए भारत की परिस्थितियों में सबसे व्यावहारिक रास्ता AI को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल है। प्राथमिक कक्षाओं में स्क्रीन आधारित गतिविधियों को सीमित रखते हुए किताब, शिक्षक, खेल और वास्तविक दुनिया के अनुभवों को प्राथमिकता दी जा सकती है। उच्च कक्षाओं में AI को एक शैक्षणिक सहायक के रूप में इस्तेमाल करना सिखाया जा सकता है। स्कूल से ज्यादा बड़ी चुनौती घर में है स्कूल में स्क्रीन टाइम नियंत्रित करने के बावजूद बच्चे घर पर घंटों मोबाइल चला सकते हैं। इसलिए केवल शिक्षा विभाग की नीति पर्याप्त नहीं होगी। अभिभावकों को भी डिजिटल अनुशासन का हिस्सा बनाना होगा। बच्चों के लिए पढ़ाई, खेल, नींद, परिवार के साथ समय और डिजिटल मनोरंजन के बीच संतुलन जरूरी है। भारत के सामने अवसर भी बड़ा है भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है। यदि भारतीय विद्यार्थी AI को केवल उत्तर पाने वाली मशीन के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय नई समस्याओं के समाधान, शोध, नवाचार और रचनात्मकता के लिए इस्तेमाल करना सीखते हैं, तो यही तकनीक भारत की बड़ी ताकत बन सकती है। अब बहस ‘AI आएगा या नहीं’ की नहीं होनी चाहिए AI शिक्षा में आएगा—और तेजी से आएगा। असली सवाल यह है कि भारत अपने बच्चों को AI का मालिकाना सोच वाला उपयोगकर्ता बनाएगा या केवल AI से उत्तर लेने वाला उपभोक्ता। “AI बच्चों की सोच का विकल्प न बने; वह उनकी सोच को और ऊंचा उठाने का साधन बने—भारत की शिक्षा नीति की अगली चुनौती यही है।”![]()


संजीव सिंह बलिया!नगरा: 12 सितंबर 2026 को शिक्षा क्षेत्र नगरा के कम्पोजिट विद्यालय देवलवीर में परिचारक के पद पर तैनात शिव कुमार सिंह का 31 अगस्त 2026 को असामयिक निधन हो गया था। आज 12 सितंबर 2026 को उनके पैतृक गांव कसौन्डर में आयोजित तेरहवीं की श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और परिचारक समुदाय ने स्वर्गीय आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय शिव कुमार सिंह की तेरहवीं पर उनके मूल आवास गांव कसौन्डर में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ और अनुदेशक संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव, मंत्री ओमप्रकाश, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत कुमार यादव, उपाध्यक्ष विनोद कुमार भारती,प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव सिंह,वरिष्ठ शिक्षक संकुल चंद्रमोहन जी, शैलेश कुमार यादव, रवींद्र सिंह, संतोष सिंह, दिनेश जी, अभिमन्यु सिंह और कृपाशंकर जी सहित कई शिक्षकगण मौजूद रहे। परिवार को आर्थिक सहयोग श्रद्धांजलि सभा में सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों और परिचारकों के सहयोग से स्वर्गीय शिव कुमार सिंह के परिवार को 25,500 रुपये (पच्चीस हजार पाँच सौ रुपये) का आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। इस सहयोग के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ और अनुदेशक संघ ने सभी योगदानकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उपस्थित पदाधिकारी कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव, मंत्री ओमप्रकाश, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत कुमार यादव, उपाध्यक्ष विनोद कुमार भारती प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला मंत्री अजय श्रीवास्तव, ब्लॉक कोषाध्यक्ष बच्चालाल,अनुदेशक संघ के पदाधिकारी सुनील कुमार और परिचारक अमित कुमार भी मौजूद रहे।
संजीव सिंह बलिया: समग्र शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को मिलेंगे निःशुल्क ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और श्रवण यंत्र; 18–21 सितंबर को परीक्षण शिविर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा कार्यक्रम में शारीरिक, श्रवण, मानसिक एवं दृष्टि बाधित बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने और स्वावलंबी बनाने के लिए एलिम्को कानपुर के सहयोग से निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर का उद्देश्य और उपकरण इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (हियरिंग एड), वैशाखी, ब्रेल किट, स्लेट, छड़ी आदि उपकरण प्रदान कर उनकी गतिशीलता और शिक्षा में सहायता करना है। एलिम्को कानपुर की विशेषज्ञ तकनीकी टीम बच्चों का गहन परीक्षण करके आवश्यक उपकरणों का मापन और चिन्हांकन करेगी, जिसके बाद उपकरण वितरण किया जाएगा। बलिया जनपद में शिविर की तिथि और स्थान जनपद बलिया के परीषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों के लिए तीन स्थानों पर परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया है: 18 सितंबर 2026 – बीआरसी नगरा 19 सितंबर 2026 – बीआरसी पन्दह 21 सितंबर 2026 – कम्पोजिट विद्यालय, भृगुआश्रम नगर क्षेत्र, बलिया राज्य परियोजना कार्यालय, निशातनगंज, लखनऊ के आदेश के क्रम में आयोजित इन शिविरों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यक दस्तावेज और पात्रता बीएसए मनीष कुमार सिंह ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारी, एसआरजी, एआरपी, शिक्षक, ग्राम प्रधान, प्रधानाध्यापक, विशेष शिक्षकों एवं अभिभावकों से अपेक्षा की है कि वे अपने क्षेत्र के कक्षा 1 से 8 तक के सभी शारीरिक दिव्यांग, श्रवण बाधित एवं दृष्टि बाधित बच्चों को शिविर में लाएं। शिविर में लाने के लिए अनिवार्य दस्तावेज: बच्चे का पूरा शरीर दिखाई देने वाला एक फोटोग्राफ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र आधार कार्ड सांसद/विधायक/प्रधान/तहसीलदार द्वारा निर्गत आय प्रमाण-पत्र विद्यालय में नामांकन एवं प्रेरणा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन आगे की प्रक्रिया परीक्षण शिविर के बाद चिन्हित बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अक्टूबर 2026 के आसपास विशेष वितरण शिविर आयोजित कर निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
संजीव सिंह बलिया! मुरली छपरा:शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा के प्राथमिक विद्यालय धतूरी टोला में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का शुक्रवार की शाम लखनऊ में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। 31 जुलाई को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए शिक्षक का 42 दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। मौत की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मिलनसार प्रवृत्ति के धनी शौकत अली के निधन पर खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, प्राशिसं के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, मुरलीछपरा के ब्लाक अध्यक्ष नीरज सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धांजलि देने वालों में राधेश्याम पांडेय, संजय सिंह, अरुण सिंह, कुलदीप सिंह रिंकू, दिग्विजय सिंह, श्रीकांत नारायण सिंह, उपेंद्र सिंह, अल्ताफ अंसारी, रामरतन सिंह यादव, पंकज यादव, विनोद यादव, पवन शर्मा, अजय कुमार गुप्ता, प्रमोद सिंह, राजीव सिंह, बृजेश यादव, गंगासागर पांडेय, सतदेव, दुर्गेश सिंह, संतोष मिश्र, नागेंद्र सिंह, दीपक माली, शशिकांत आदि शामिल हैं। बलिया के काजीपुर निवासी शौकत अली लंबे समय से शिक्षा सेवा से जुड़े रहे थे और अपने सहकर्मियों व छात्रों में लोकप्रिय थे। उनके निधन पर विद्यालय परिसर में शोक मनाया गया और गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
संजीव सिंह बलिया! मुरली छपरा:शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा के प्राथमिक विद्यालय धतूरी टोला में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का शुक्रवार की शाम लखनऊ में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। 31 जुलाई को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए शिक्षक का 42 दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। मौत की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मिलनसार प्रवृत्ति के धनी शौकत अली के निधन पर खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, प्राशिसं के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, मुरलीछपरा के ब्लाक अध्यक्ष नीरज सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धांजलि देने वालों में राधेश्याम पांडेय, संजय सिंह, अरुण सिंह, कुलदीप सिंह रिंकू, दिग्विजय सिंह, श्रीकांत नारायण सिंह, उपेंद्र सिंह, अल्ताफ अंसारी, रामरतन सिंह यादव, पंकज यादव, विनोद यादव, पवन शर्मा, अजय कुमार गुप्ता, प्रमोद सिंह, राजीव सिंह, बृजेश यादव, गंगासागर पांडेय, सतदेव, दुर्गेश सिंह, संतोष मिश्र, नागेंद्र सिंह, दीपक माली, शशिकांत आदि शामिल हैं। बलिया के काजीपुर निवासी शौकत अली लंबे समय से शिक्षा सेवा से जुड़े रहे थे और अपने सहकर्मियों व छात्रों में लोकप्रिय थे। उनके निधन पर विद्यालय परिसर में शोक मनाया गया और गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
संजीव सिंह बलिया!इंसिग्निया कार्यक्रम के गरिमामय अवसर पर सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल रसड़ा (बलिया) के निर्देशक व शिक्षाविद अखिलेश सिंह जी और श्रीमति इंदिरा सिंह जी को जयपुरिया ग्रुप के ओनर श्री श्रीवत्स जयपुरिया जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरव एवं हर्ष का विषय बताया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षा में उत्कृष्टता, समर्पण और निरंतर प्रगति के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विद्यालय परिवार के लिए यह सम्मान नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नई उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर विद्यालय में हर्ष और खुशी का माहौल रहा। विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव सिंह चौहान ने इस अवसर पर पूरे विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस उपलब्धि ने विद्यालय को नई जिम्मेदारियों से जोड़ा है, जिसके लिए विद्यालय परिवार निरंतर कार्य करता रहेगा
7 hours ago
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