राष्ट्रगान के अपमान का आरोप, गोंडा में कांग्रेस ने कोतवाली में दी तहरीर
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उन्नाव के सरकारी कार्यक्रम का वायरल वीडियो दिखाते हुए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कार्रवाई की मांग की
गोण्डा। आज दिनांक 24 अगस्त 2026 को दोपहर 2:30 बजे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय राय जी के निर्देश पर शहर कांग्रेस कमेटी गोंडा के अध्यक्ष शाहिद अली कुरैशी के नेतृत्व में कांग्रेस जनों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर गोंडा बिन्देश्वरी मणि त्रिपाठी जी को रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु प्रार्थना पत्र सौंपा।
प्रार्थना पत्र में बताया गया कि उन्नाव में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान के समय लोगों का आवागमन व आपस में बातचीत करना राष्ट्रगान का घोर अपमान है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि राष्ट्रगान बज रहा है और लोग सम्मान में खड़े होने के बजाय टहल रहे हैं। उक्त कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी भी उपस्थित थे। यह कृत्य न केवल अशोभनीय है बल्कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत दंडनीय अपराध है।
शहर अध्यक्ष शाहिद अली कुरैशी ने कहा - "उन्नाव की घटना ने हर देशभक्त का सिर शर्म से झुका दिया है। राष्ट्रगान के दौरान टहलना और बातचीत करना राष्ट्र का अपमान है। विधानसभा अध्यक्ष जी जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की मौजूदगी में ऐसा होना और भी दुर्भाग्यपूर्ण है और उनकी भी जिम्मेदारी बनती थी कि वे राष्ट्रगान का सम्मान करवाते। कांग्रेस पार्टी तिरंगे और राष्ट्रगान के अपमान को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। हम मांग करते हैं कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो यह सुनिश्चित किया जाए। कांग्रेस हमेशा राष्ट्रवाद और संविधान की रक्षा के लिए खड़ी रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार में लगातार संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान हो रहा है जिसे देश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस अवसर पर डॉ सैयद अब्दुल मुजीब, सुकई भारती, जाकिर अली, इमरान खान, सुरेश गौतम, प्रदुमन शुक्ला, अनीश नाना, निरमेश श्रीवास्तव, रियाज अहमद, खगेश चतुर्वेदी, मोहम्मद शाबान, हरिराम वर्मा, आफताब अंसारी, छोटेलाल, मोहम्मद रिजवान, शिव प्रताप शुक्ला, संतोष सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।


गोण्डा। मामला लगभग 1997 से यानी 30 वर्षों से लंबित है और अत्यंत मूल्यवान सरकारी नजूल भूमि से संबंधित है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इस भूमि पर वर्ष 2008 से बिना किसी विधिक प्रपत्र के एक साधारण कागज के आधार पर कथित पट्टा दर्शाया जा रहा है, जबकि भूमि सरकारी है और 1985 में पट्टा निरस्त करके सरकार के नाम पर दर्ज है। इस भूमि पर निजी विद्यालय भी संचालित हो रहा है। मंडलायुक्त द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद इस पुराने मामले की जानकारी मिलने पर उनका उद्देश्य केवल सरकारी भूमि के संरक्षण तथा सरकार की ओर से लंबित वाद में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था।
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Aug 24 2026, 17:26
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