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।। গুলি-কাণ্ডের অভিযুক্তদের গ্রেপ্তারের দাবিতে রাস্তায় বিক্ষোভ, তিন ঘণ্টা অবরুদ্ধ বসিরহাট-পিফা রোড ।।
বসিরহাট : দুষ্কৃতীদের দ্রুত গ্রেপ্তারের দাবিতে সোমবার ফের উত্তপ্ত হয়ে উঠল বসিরহাট। বসিরহাট রেল স্টেশন সংলগ্ন এলাকায় গত ৬ মে বিজেপি কর্মী রোহিত রায় ওরফে চিন্টুকে লক্ষ্য করে গুলি চালিয়ে খুনের চেষ্টার ঘটনায় অভিযুক্ত দুই কুখ্যাত দুষ্কৃতী মেঘনাথ দাস ওরফে ভোলা এবং বুদ্ধদেব মণ্ডল ওরফে বুধো এখনও অধরা থাকায় ক্ষোভে ফেটে পড়েন এলাকার বাসিন্দারা। অভিযুক্তরা তৃণমূল আশ্রিত বলে অভিযোগ তুলে তাদের অবিলম্বে গ্রেপ্তারের দাবিতে বসিরহাট-পিফা রোড অবরোধ করে বিক্ষোভে সামিল হন স্থানীয়রা। বিক্ষোভকারীরা রাস্তার উপর টায়ার জ্বালিয়ে তাদের ক্ষোভ উগরে দেন। প্রায় তিন ঘণ্টা ধরে চলা এই অবরোধে চরম ভোগান্তির মুখে পড়েন নিত্যযাত্রী ও সাধারণ মানুষ। দীর্ঘ যানজটের সৃষ্টি হয় গোটা এলাকায়।
স্থানীয়দের অভিযোগ, গত মে মাসে গুলি চালানোর ঘটনার পর থেকেই অভিযুক্ত দুই দুষ্কৃতী পলাতক। একাধিকবার পুলিশ প্রশাসনের কাছে অভিযোগ জানানো হলেও এখনও পর্যন্ত তাদের গ্রেপ্তার করা যায়নি। এর আগেও একাধিকবার প্রতিবাদ ও বিক্ষোভ কর্মসূচি সংগঠিত হলেও পুলিশের তরফে কার্যকর কোনও পদক্ষেপ দেখা যায়নি বলেই দাবি বিক্ষোভকারীদের। সেই কারণেই এদিন ফের রাস্তায় নেমে আন্দোলনের পথে হাঁটেন তারা। খবর পেয়ে ঘটনাস্থলে পৌঁছায় বসিরহাট থানার পুলিশ। প্রথমে পুলিশ আধিকারিকরা অবরোধকারীদের সঙ্গে আলোচনা করে অবরোধ তুলে নেওয়ার আবেদন জানালেও তাতে সাড়া দেননি বিক্ষোভকারীরা। তাদের স্পষ্ট দাবি ছিল, বসিরহাট থানার ভারপ্রাপ্ত আধিকারিক (আইসি) ঘটনাস্থলে এসে অভিযুক্তদের দ্রুত গ্রেপ্তারের বিষয়ে লিখিত আশ্বাস না দেওয়া পর্যন্ত অবরোধ তোলা হবে না। পরিস্থিতি ক্রমশ উত্তপ্ত হয়ে ওঠায় পরে ঘটনাস্থলে পৌঁছান বসিরহাট থানার আইসি। তিনি বিক্ষোভকারীদের সঙ্গে দীর্ঘক্ষণ কথা বলেন এবং অভিযুক্তদের দ্রুত গ্রেপ্তারের জন্য প্রয়োজনীয় আইনানুগ ব্যবস্থা গ্রহণের আশ্বাস দেন। আইসির আশ্বাসের পর অবশেষে প্রায় তিন ঘণ্টা পর অবরোধ প্রত্যাহার করেন আন্দোলনকারীরা। এরপর ধীরে ধীরে স্বাভাবিক হয় যান চলাচল।
বিক্ষোভকারীদের দাবি, অভিযুক্তদের দ্রুত গ্রেপ্তার করে দৃষ্টান্তমূলক শাস্তির ব্যবস্থা করতে হবে। পাশাপাশি এলাকায় আইনশৃঙ্খলা বজায় রাখতে পুলিশের আরও সক্রিয় ভূমিকা নেওয়ারও দাবি জানিয়েছেন তারা। এদিকে, ঘটনাকে কেন্দ্র করে এলাকায় নতুন করে রাজনৈতিক চাপানউতোর শুরু হয়েছে। বিষয়টি নিয়ে বসিরহাট দক্ষিণের বিজেপি নেতা ডাঃ শৌর্য্য ব্যানার্জি বলেন, "তৃণমূল আমল থেকেই এই ভোলা ও বুধোর অত্যাচার সহ্য করছে ওই এলাকার মানুষ। পুলিশের একাংশের মদতেই তারা অপরাধ করেও সমাজে ঘুরে বেড়াচ্ছে। পুলিশ ভুলে গিয়েছে এখন তৃণমূল সরকার নেই এখন ভারতীয় জনতা পার্টির সরকার চলছে। এই সমস্ত অপরাধীর অবিলম্বে গ্রেপ্তার করে কঠোর থেকে কঠোরতম শাস্তি দেওয়া উচিত।"
मामलों की तेज सुनवाई के लिए ट्रैकिंग सिस्टम चाहता है हाईकोर्ट
*कोलकाता:* ज्यादातर फौजदारी मामलों में एक ही दिक्कत आती है। एक बार चार्जशीट जमा होने के बाद मामले की फाइल कहीं गुम हो जाती है। इसकी वजह से सुनवाई में देरी होती है। जिस थाने का मामला है, अगर जांच अधिकारी वहां से ट्रांसफर हो जाए तो ट्रायल कराने की पहल और भी ठंडे बस्ते में चली जाती है। 

इसी स्थिति और सालों से लंबित मामलों की भारी संख्या को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोलकाता और राज्य पुलिस को इस मामले में आपसी समन्वय बढ़ाने का निर्देश दिया है।

हाल ही में जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी फौजदारी मामले में चार्जशीट पेश होने के बाद अलग-अलग स्तर पर मामले की क्या प्रगति हो रही है, इस पर थाने या जांच एजेंसी को नियमित नजर रखनी चाहिए। इसके लिए थाने या जांच एजेंसी के साथ समन्वय बनाकर कोलकाता या राज्य पुलिस मुख्यालय में एक स्थायी व्यवस्था या नए नियम बनाए जाने चाहिए, ऐसा अदालत ने कहा है। अदालत सूत्रों के अनुसार जस्टिस घोष ने 5 मामलों के आधार पर यह रुख अपनाया है।

दीर्घकालिक समाधान के तौर पर अदालत ने राज्य को निर्देश दिया है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत ही यह तय किया जाए कि किसी फौजदारी मामले के जांच अधिकारी को मामले की स्थिति से अपडेट कैसे रखा जाए। यह निर्देश कोलकाता पुलिस, राज्य पुलिस और CID सभी पर लागू होगा। वकीलों और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए केस ट्रैकिंग सिस्टम जरूरी है।

हालांकि प्रशासन सूत्रों के मुताबिक 2015 में ही राज्य में ऐसा एक ऐप तैयार हो चुका है। CID के तत्कालीन IG संजय सिंह की पहल पर बना ‘क्राइम क्रिमिनल सर्च’ नाम का यह ऐप अब तक करीब 12 लाख केस और उनकी पूरी जानकारी रखता है। लेकिन राज्य पुलिस ने अब तक इसे सरकारी मान्यता नहीं दी है।

चार्जशीट जमा होने के बाद मामले की क्या स्थिति है, चार्जशीट के बाद मामला कितना आगे बढ़ा, इस बारे में जानकारी लेने में कई जगह बड़ी खामी सामने आई है, यह हाईकोर्ट ने जाना। जबकि 2015 में CID द्वारा बनाए गए इस ऐप में किसी भी मामले की पूरी जानकारी से लेकर चार्जशीट जमा होने तक का पूरा ब्योरा मौजूद है। चार्जशीट जमा होने के बाद ट्रायल के लिए कैलेंडर भी बना दिया जाता है। इस ऐप का इस्तेमाल करने पर सुनवाई की तय तारीख से 3 दिन पहले थाने के OC और जिले के SP या मामले के प्रभारी अधिकारी के पास अपने आप SMS चला जाता है।

राज्य पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी कुछ अन्य जिलों के साथ कृष्णनगर पुलिस जिले के थाने और अधिकारी इस ऐप का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों का अफसोस है कि 11 साल पहले बना यह ऐप शुरू हुआ था। इसके बाद राज्य पुलिस के 5-6 IPS अफसर DG बन चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इसे सरकारी तौर पर इस्तेमाल करने का आदेश जारी नहीं किया। ऐसे में अभी ऐप का इस्तेमाल पुलिस के लिए वैकल्पिक है। कई पुलिस अधिकारियों की राय है कि अगर इस ऐप का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया जाता तो हाईकोर्ट में पुलिस की फजीहत नहीं होती।

अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। उस दिन फौजदारी मामलों के लिए ट्रैकिंग सिस्टम या नियम बनाने की प्रगति रिपोर्ट कोलकाता पुलिस, राज्य पुलिस और CID को हाईकोर्ट में जमा करनी होगी। कुछ वकीलों का कहना है कि ट्रायल की सुस्ती और देरी को खत्म करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS में चार्जशीट जमा होने के बाद बाकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय सीमा तय की गई है।
আবৃত্তি কর্মশালা

নিজস্ব প্রতিনিধি:  ছাত্র-ছাত্রীদের মধ্যে কবিতার প্রতি আগ্রহ ও ভালোবাসা বাড়িয়ে তুলতে সম্প্রতি কলকাতায় 'মনন আবৃত্তি শিল্প সংস্থা' বিশেষ আবৃত্তি কর্মশালা আয়োজন করেছিল।

আধুনিক যুগের যান্ত্রিকতার  ভিড়ে বাংলার সমৃদ্ধ সাহিত্য ও কবিতার প্রতি ভালোবাসায় মনোযোগী  হতে মননের সংস্থার কর্ণধার পার্থ বসু ও রাতুলা বসুর  এই উদ্যোগ।

স্কুলগুলির শিক্ষক-শিক্ষিকারাও এ ব্যাপারে যথেষ্ট আগ্রহ প্রকাশ করেছেন । ছাত্রছাত্রীরাও এ ব্যাপারে বেশ উৎসাহী  হয়ে উঠেছে। ইতিমধ্যে "ডাফ হাই স্কুল ফর গার্লস","সরস্বতী উচ্চ বালিকা বিদ্যালয় ",'হিন্দু স্কুলে" অনুষ্ঠিত হয় এই কর্মশালা।

এই কর্মশালায় শুদ্ধ উচ্চারণ,  স্বরক্ষেপণ,  গলার স্বরের পরিমিত ব্যবহার,  মঞ্চভীতি  দূরীকরণের মাধ্যমে বাচ্চাদের মধ্যে আত্মবিশ্বাস গড়ে তোলার চেষ্টা করা হয়।আবৃত্তি যে  কেবলমাত্র একটি শিল্প নয়, এটি ব্যক্তিত্ব গঠনেরও সহায়ক সেটুকু আর বলার অপেক্ষা রাখে না।আগামী দিনে  এই কর্মশালা  শহর ছাড়িয়েও মফস্বলের স্কুলগুলোতেও ছড়িয়ে পড়বে এই প্রকল্প নিয়েই এগিয়ে চলেছে মনন।
ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট ফ্রিজ়  মামলায় সাময়িক স্বস্তি কালীঘাট তৃণমূলের,প্রয়োজনে ওই তিন ফ্রিজ় হওয়া অ্যাকাউন্টের টাকা ব্যবহারের অনুমতি হাইকোর্টের
নিজস্ব প্রতিনিধি: ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট ফ্রিজ় হওয়ার মামলায় কলকাতা হাইকোর্ট থেকে আপাতত স্বস্তি পেল কালীঘাট তৃণমূল কংগ্রেস। প্রয়োজনে ওই তিন ফ্রিজ় হওয়া অ্যাকাউন্টের টাকা তারা ব্যবহার করতে পারবে বলে নির্দেশ দিলেন বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য। সেখান থেকে প্রয়োজনীয় আইনি খরচও নিতে পারবে কালীঘাট তৃণমূল। অন্তর্বর্তী নির্দেশে এমনটাই জানিয়েছে হাইকোর্ট। এদিন আদালত পুলিশ ও বিদ্রোহী তৃণমূল বিধায়কদের ভূমিকা নিয়ে প্রশ্ন তুলেছেন। তাঁর মন্তব্য, নির্বাচনে লড়ার জন্যে এই অ্যাকাউন্ট থেকে এই বিধায়করা টাকা তুললেন, কিন্তু সেই সময় এই প্রশ্ন তোলেননি কেনো। অথচ ফল প্রকাশের পর তারাই অভিযোগ তুলছেন। তিনি জানান, এমন কোনো প্রমাণ নেই যার ফলে অ্যাকাউন্ট ফ্রিজ করা যায়। কার্যত বিদ্রোহী তৃণমূল বিধায়কদের আইনজীবীকে তিরস্কার করেন বিচারপতি। অ্যাকাউন্ট পরিচালনা দেখভালের জন্য একজন স্পেশাল অফিসার নিয়োগ করেছে আদালত। ফ্রিজ় হওয়া অ্যাকাউন্টের টাকাও তাঁর মাধ্যমেই তুলতে হবে কালীঘাট তৃণমূলকে। হাইকোর্টের বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্যের এজলাসে বৃহস্পতিবার মামলাটি শুনানির জন্য ওঠে। এ দিনের শুনানিতে তৃণমূলের তিনটি ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট ফ্রিজ় সংক্রান্ত মামলায় অবসরপ্রাপ্ত বিচারপতি সুব্রত তালুকদারকে স্পেশাল অফিসার হিসেবে নিয়োগ করেছে হাইকোর্ট। অন্তর্বর্তী নির্দেশে আদালত জানিয়েছে, আপাতত আগামী ৩০ সেপ্টেম্বর পর্যন্ত তিনিই ওই ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্টগুলি পরিচালনা করবেন।
অন্তর্বর্তী নির্দেশে হাইকোর্ট আরও জানিয়েছে, দলের দৈনন্দিন কাজকর্ম পরিচালনার জন্য অর্থ দিতে পারবেন স্পেশাল অফিসার। আইনি খরচও নিতে পারবে কালীঘাট তৃণমূল। তবে কেউ চাইলেই বড় কোনও অর্থ দিতে পারবেন না স্পেশাল অফিসার। বিচারপতি ভট্টাচার্য জানিয়েছেন, ভবিষ্যতে তৃণমূলের দুই গোষ্ঠীর মধ্যে কমিশন কাউকে চূড়ান্ত স্বীকৃতি দিলে এই নির্দেশ পরিবর্তন চেয়ে আদালতের দৃষ্টি আকর্ষণ করা যাবে। আগামী ২১ সেপ্টেম্বর এই মামলার পরবর্তী শুনানি। এরই মধ্যে গত ১৮ জুন বিধাননগর সাইবার থানায় অভিযোগ দায়ের করেন দক্ষিণ ২৪ পরগনার এক বিধায়ক। তাঁর অভিযোগ, বড় ধরনের সাইবার প্রতারণার টাকা কিছু ব্যাঙ্কের অ্যাকাউন্টে প্রবেশ করেছে। কালীঘাট তৃণমূলের বক্তব্য, ওই তিনটি অ্যাকাউন্ট থেকেই তারা কর্মীদের বেতন দেয়।অফিসের খরচ দেয়। বিদ্যুতের বিল দেয়। রাজনৈতিক কর্মসূচির খরচও মেটানো হয় ওই অ্যাকাউন্টের থেকেই। এ অবস্থায় বৃহস্পতিবার অন্তর্বর্তী নির্দেশ জারি করে ওই তিন ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্ট পরিচালনার জন্য স্পেশাল অফিসার নিয়োগ করল আদালত।
ফের রক্ষা কবচ পেলেন প্রাক্তন মন্ত্রী অরূপ বিশ্বাস
নিজস্ব প্রতিনিধি:কলকাতা হাইকোর্টে থেকে ফের রক্ষা কবচ পেলেন প্রাক্তন মন্ত্রী অরূপ বিশ্বাস। আদালতের অনুমতি ছাড়া রাজ্য কোনো পদক্ষেপ করতে পারবে না বলে নির্দেশ দিয়েছেন বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য। আদালতের নির্দেশ মেনে বিধাননগর দক্ষিণ থানায় হাজিরা দিয়ে ফেরার পথে একাধিক সংবাদমাধ্যম অনুসরণ করে রাজ্যের প্রাক্তন মন্ত্রী অরূপ বিশ্বাসকে। পরে আলিপুর জেলা আদালতে পৌঁছনোর পর তাঁকে ঘিরে হেনস্থা, প্রাণনাশের চেষ্টা হয় বলে অভিযোগ। এই নিয়ে মামলা ওঠে হাইকোর্টে, তাতে বুধবার অন্তর্বর্তী রক্ষাকবচ পেলেন অরূপ বিশ্বাস।বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্যের নির্দেশ দেন, আগামী ২৩ জুলাই পর্যন্ত এই মামলার প্রেক্ষিতে অরূপ বিশ্বাসের বিরুদ্ধে কোনও কঠোর আইনি পদক্ষেপ করা যাবে না। একইসঙ্গে আদালতের নির্দেশের পরও যদি সংশ্লিষ্ট ঘটনায় তাঁর বিরুদ্ধে কোনও পদক্ষেপের উদ্যোগ হয়, তা হলে বিষয়টি অবিলম্বে আদালতের নজরে আনতে হবে তাঁর আইনজীবী কিশোর দত্তকে।

অন্য দিকে,অপর একটি ডিম ছোরার ঘটনায় এবার হাইকোর্টের দ্বারস্থ হলেন সিপিএম নেত্রী মীনাক্ষী মুখার্জি। তাঁর অভিযোগ, শীতলকুচিতে দলের মৃত কর্মী মন্টু মি়ঞার পরিবারের সঙ্গে দেখা করতে গেলে তাঁর গাড়িতে ডিম ছোড়া হয়। তাঁকে মামলা দায়েরের অনুমতি দিয়েছেন বিচারপতি সৌগত ভট্টাচার্য। চলতি সপ্তাহে এর শুনানি হতে পারে।
স্কুলগুলিতে মিড-ডে মিলে পরিবেশন করবে ইসকন নিয়ে হলফনামা তলব হাইকোর্টের
নিজস্ব প্রতিনিধি: কলকাতার স্কুলগুলিতে মিড-ডে মিলে পরিবেশন করবে ইসকন ৷ রাজ্য বাজেটে প্রথমে অর্থমন্ত্রী স্বপন দাশগুপ্ত এবং পরে মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারীর এই ঘোষণা করেন ৷ কিন্তু বিষয়টি এখনও প্রস্তাবের পর্যায়ে রয়েছে বলে জানালেন রাজ্যের অ্যাডভোকেট জেনারেল সুরজিৎ নাথ মিত্র বুধবার এই সংক্রান্ত একটি জনস্বার্থ মামলার শুনানি হয় কলকাতা হাইকোর্টেের ভারপ্রাপ্ত প্রধান বিচারপতি তপোব্রত চক্রবর্তী ও বিচারপতি পার্থ সারথি চট্টোপাধ্যায়ের ডিভিশন বেঞ্চে ৷ এই ঘোষণা সম্পর্কে ৪ সপ্তাহের মধ্যে রাজ্যের বক্তব্য হলফনামা দিয়ে জানাতে নির্দেশ দেয় ডিভিশন বেঞ্চ৷
গত ২২ জুন বিজেপি সরকারের প্রথম বাজেটে অর্থমন্ত্রী ঘোষণা করেন, কলকাতার স্কুলগুলির মিড-ডে মিলের দায়িত্ব এবার থেকে ইসকনকে দেওয়া দেওয়া হল ৷ সুতরাং এবার থেকে শহরের সব স্কুলে মিড-ডে মিল খাওয়ানোর দায়িত্ব এই প্রতিষ্ঠানের ৷ তবে ইসকন মিড-ডে মিল সরবরাহ করলে সেখানে শিশুদের পাতে ডিম থাকবে না বলেই খবর ৷ পাশাপাশি ইসকন এই দায়িত্ব নিলে কলকাতার স্কুলগুলিতে মিড-ডে মিল রান্না ও পরিবেশনের দায়িত্বে থাকা বহু মহিলা চাকরি হারাবেন বলেও আশঙ্কা ৷ এই নিয়ে কলকাতা হাইকোর্টে জনস্বার্থ মামলা দায়ের হয় ৷
এদিনের শুনানিতে অ্যাডভোকেট জেনারেল সুরজিৎ নাথ মিত্র জানান, "এই বিষয়টি এখনও পর্যন্ত প্রস্তাবের পর্যায়ে রয়েছে ৷ কোনও চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়নি ৷ ফলে এখনই এই মামলার প্রয়োজন নেই।" এরপরই মামলাকারী শীর্ষাণ্য বন্দ্যোপাধ্যায়ের পক্ষে আইনজীবী কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায় বলেন, "তাহলে রাজ্য হলফনামা দিয়ে জানাক রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী বিধানসভায় এই ধরনের কথা বলেননি ৷ কারণ, কলকাতার কয়েক লক্ষ মহিলা যাঁরা স্বনির্ভর গোষ্ঠীর সঙ্গে যুক্ত, তাঁদের স্বার্থের সঙ্গে বিষয়টি জড়িয়ে রয়েছে ৷" আদালত এদিন ৬ সপ্তাহের মধ্যে দু'পক্ষের বক্তব্য হলফনামা দিয়ে জানাতে নির্দেশ দিয়েছে ৷ ইতিমধ্যে যদি রাজ্য কোনও সিদ্ধান্ত গ্রহণ করে, তাহলে তা আইনজীবী কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায়কে আদালতের গোচরে আনার নির্দেশ দিয়েছে ভারপ্রাপ্ত প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চ ৷
বাম আমলেই বিঘার পর বিঘা জমি দখল, এখনও ফেরতের আশায় দিন গুনছে মিনাখাঁর ঘোষ পরিবার
সৌমাভ মণ্ডল,বসিরহাট : মিনাখাঁয় জমি দখল বিতর্কে নতুন মাত্রা। বহু বছর ধরে জমি হারানোর অভিযোগ ঘিরে ফের চর্চায় ঘোষ পরিবার। সম্প্রতি পরিবারের কয়েকজন সদস্য দাবি করেছেন, তাদের জমি সাম্প্রতিককালে জোরপূর্বক দখল করা হয়েছে। তবে একই পরিবারের সদস্য অমীয় কুমার ঘোষ এবং এলাকার বাসিন্দা মানিক প্রামানিকের বক্তব্যে উঠে এসেছে ভিন্ন ছবি। তাদের দাবি, জমি-সংক্রান্ত সমস্যার সূত্রপাত বর্তমান সময়ে নয়, বরং বামফ্রন্ট আমলেই।
অমীয় কুমার ঘোষ জানান, তাদের পূর্বপুরুষেরা ওড়িশা থেকে বসিরহাটের মিনাখাঁ ব্লকের আটপুকুর এলাকায় এসে বসবাস শুরু করেন। দীর্ঘদিন ধরে পরিবারটির নামে বিস্তীর্ণ কৃষিজমি ছিল। কিন্তু বামফ্রন্ট সরকার ক্ষমতায় আসার পর ধাপে ধাপে সেই জমির বড় অংশ তাদের হাতছাড়া হয়ে যায় বলে অভিযোগ। তার বক্তব্য, কোথাও জমিকে খাস জমি ঘোষণা করা হয়, কোথাও আবার জোর করে বর্গাদার বসিয়ে দেওয়া হয়। এর ফলে বিঘার পর বিঘা জমির ওপর থেকে ঘোষ পরিবারের নিয়ন্ত্রণ চলে যায়। অমীয় কুমার ঘোষের দাবি, জমি ফিরে পাওয়ার আশায় তাদের পরিবার বছরের পর বছর প্রশাসনের দ্বারস্থ হয়েছে। সংশ্লিষ্ট সরকারি দপ্তর, জনপ্রতিনিধি, এমনকি আদালতের দ্বারেও কড়া নেড়েছেন তারা। কিন্তু এত দীর্ঘ সময় পেরিয়েও অধিকাংশ জমি আজও দখলমুক্ত করা সম্ভব হয়নি। তার কথায়, “আমাদের জমির সমস্যা আজকের নয়। বহু বছর আগে, বাম আমল থেকেই এই সমস্যা শুরু হয়েছে। সেই সময় থেকেই আমাদের বহু জমি হাতছাড়া হয়েছে। এখনও সেই জমি পুরোপুরি ফিরে পাইনি।”
একই সুর শোনা যায় আটপুকুর এলাকার বাসিন্দা মানিক প্রামানিকের বক্তব্যেও। তার দাবি, এলাকায় জমি দখল ও বর্গাদার বসানোর ঘটনা নতুন নয়। বহু মানুষ জানেন, বামফ্রন্ট সরকারের সময়েই এই ধরনের পদক্ষেপ নেওয়া হয়েছিল। তার কথায়, “ঘোষ পরিবারের জমি আজকের দিনে দখল হয়েছে এমন কথা ঠিক নয়। এই জমি বহু বছর ধরেই অন্যের দখলে রয়েছে। গ্রামের মানুষ জানেন, বিষয়টির সূত্রপাত বাম আমলেই।” স্থানীয়দের একাংশের দাবি, বর্তমানে যে অভিযোগকে ঘিরে রাজনৈতিক বিতর্ক তৈরি হয়েছে, তা বাস্তব পরিস্থিতির সঙ্গে পুরোপুরি মেলে না। তাদের বক্তব্য, দীর্ঘদিনের জমি-সংক্রান্ত জটিলতাকে বর্তমান রাজনৈতিক প্রেক্ষাপটে নতুনভাবে তুলে ধরা হলেও, সমস্যার শিকড় ১৯৭৭ সালে থেকে আটকে রয়েছে। এলাকার প্রবীণদেরও দাবি, মিনাখাঁর বিভিন্ন অংশে বামফ্রন্ট শাসনকালে জমি খাস ঘোষণা, বর্গাদার নথিভুক্তকরণ এবং জমির মালিকানা নিয়ে একাধিক বিতর্ক তৈরি হয়েছিল। সেই সময় বহু জমির মালিক প্রশাসনিক ও আইনি লড়াই করেও কাঙ্ক্ষিত ফল পাননি বলে অভিযোগ রয়েছে। বিষয়টি নিয়ে মিনাখাঁ বিধানসভার বিধায়িকা ঊষারাণী মন্ডলের স্বামী তথা উত্তর ২৪ পরগণা জেলা পরিষদের পরিষদীয় দলনেতা মৃত্যুঞ্জয় মন্ডল বলেন, "ঘোষ পরিবারের কিছু সদস্য বর্তমানে এই জমিকে ঘিরে বিতর্কের সৃষ্টি করছেন। কিন্তু এই জমি দখলের বিষয়ে আমি এবং এলাকার বিধায়িকা কোনভাবেই জড়িত নয়। শুধুমাত্র কালিমালিপ্ত করার জন্য এই ধরনের ঘটনার ঘটানো হচ্ছে। মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারীর নেতৃত্বে বর্তমান সরকার রাজ্য জুড়ে আইনের শাসন চালাচ্ছে। মানুষ নিশ্চয়ই সঠিক বিচার পাবে।"
ঘোষ পরিবারের সদস্যদের বক্তব্য অনুযায়ী, তাদের জমি পুনরুদ্ধারের লড়াই এখনও শেষ হয়নি। দীর্ঘ কয়েক দশক ধরে চলা এই বিরোধে প্রশাসনিক, রাজনৈতিক এবং আইনি সব স্তরেই তারা চেষ্টা চালিয়ে গিয়েছেন। কিন্তু আজও সম্পূর্ণ সমাধান না হওয়ায় পরিবারের মধ্যে ক্ষোভ ও হতাশা রয়ে গিয়েছে। সরকার পাল্টেছে, তাই ঘোষ পরিবারে সদস্যরা নতুন করে প্রহর গুনছেন তাদের জবরদখল করা জমি ফিরে পাওয়ার।
বিশ্বকাপ ফুটবল,২০২৬ রাউন্ড অফ ১৬: আর্জেন্টিনা-মিশর এবং সুইৎজারল্যান্ড-কলম্বিয়া ম্যাচে কৌশলের লড়াই

*স্পোর্টস ডেস্ক:* ফিফা বিশ্বকাপের রাউন্ড অফ ১৬ শেষ হচ্ছে দুটি হাইভোল্টেজ ম্যাচ দিয়ে। ডিফেন্ডিং চ্যাম্পিয়ন আর্জেন্টিনা মুখোমুখি হচ্ছে লড়াকু মিশরের, অন্যদিকে, সুইৎজারল্যান্ডের প্রতিপক্ষ টুর্নামেন্টের অন্যতম সেরা দল কলম্বিয়া। নকআউট পর্বের ফুটবল প্রায়শই সূক্ষ্ম কৌশলেই নির্ধারিত হয়। টিম ইন্ডিয়া ও এফসি গোয়ার ডিফেন্ডার বিশেষজ্ঞ সন্দেশ ঝিংগানের মতে, শৃঙ্খলা, রক্ষণের সংগঠন এবং সিদ্ধান্ত গ্রহণই এই দুই ম্যাচের ভাগ্য নির্ধারণ করবে।

কাবো ভার্দের বিরুদ্ধে আর্জেন্টিনার রক্ষণের পারফরম্যান্স নিয়ে ঝিংগান বলেছেন, রাউন্ড অফ ৩২-এর ম্যাচে দুটি গোল খেলেও লিওনেল স্কালোনির দল দারুণভাবে ঘুরে দাঁড়াবে।

গত ১০-১৫টি ম্যাচে আর্জেন্টিনার রেকর্ড , তারা প্রায় গোলই খায়নি। বিশেষজ্ঞদের মতে, তাদের সবচেয়ে বড় শক্তির একটি হল রক্ষণের দৃঢ়তা। কাবো ভার্দে ম্যাচটাকে তারা রাস্তার ছোট একটা বাধা হিসেবেই দেখবে।

মিশরের কৌশল প্রসঙ্গে এই টিম ইন্ডিয়া ডিফেন্ডার মনে করেন, আফ্রিকান দলটি মহম্মদ সালাহ ও ওমর মারমুশকে দিয়ে দ্রুত কাউন্টার অ্যাটাকে ভরসা রাখবে। তবে আর্জেন্টিনার আগ্রাসী কাউন্টার-প্রেসিংও সমান গুরুত্বপূর্ণ হবে।"মিশর সম্ভবত ডিফেন্স করে বসে থেকে কাউন্টারে আর্জেন্টিনাকে আঘাত করতে চাইবে, কারণ এটাই তাদের শক্তি। কিন্তু আর্জেন্টিনার যে বিষয়টা আমি সবচেয়ে পছন্দ করি তা হল বল হারানোর পর তারা কত দ্রুত কাউন্টার-প্রেস করে। তারা দল বেঁধে চাপ দেয় এবং প্রতিপক্ষকে ট্রানজিশনের সুযোগই দেয় না। মেসির প্রভাব কমাতে চাইলে এক-বনাম-এক-এ তাকে আটকানোর চেষ্টা নয়, বরং রদ্রিগো ডি পল ও অ্যালেক্সিস ম্যাক অ্যালিস্টারের মতো ফুটবলারদের কাছ থেকে তার কাছে বল যাওয়া বন্ধ করতে হবে। এটাই তার প্রভাব কমানোর একমাত্র বাস্তবসম্মত উপায়।"

সুইৎজারল্যান্ডের উচিত তাদের পজেশন-ভিত্তিক ফুটবলেই থাকা এবং কলম্বিয়ার আগ্রাসী প্রেসকে হুমকি নয়, বরং সুযোগ হিসেবে ব্যবহার করা উচিত বলে মনে করেন ঝিংগান।

ঝিংগান জানান,"আমার মনে হয় তাদের বিল্ড-আপের পরিকল্পনাতেই থাকা উচিত। কারণ দলগুলি বিল্ড-আপ করার অন্যতম কারণই হল প্রতিপক্ষকে চাপে আমন্ত্রণ জানানো। আপনি যখন হাই প্রেস করেন, তখন পিছনে অনেকটা জায়গা ছেড়ে দেন। সুইৎজারল্যান্ড চাইবে কলম্বিয়া নিজেদের অর্ধ থেকে বেরিয়ে আসুক, কারণ তখন এক, দুই বা তিন পাসেই যে জায়গাগুলি তারা কাজে লাগাতে পারে তা তৈরি হয়। বিল্ড-আপের মূল উদ্দেশ্যই হল চাপকে আমন্ত্রণ জানানো, যাতে পিছনের ফাঁকা জায়গা দিয়ে প্রতিপক্ষকে আঘাত করা যায়।"

কলম্বিয়ার কৌশলগত নমনীয়তা ও আক্রমণের গুণমানের প্রশংসা করার পাশাপাশি ঝিংগান সুইৎজারল্যান্ডের শৃঙ্খলা ও রক্ষণের সংগঠনকেও কুর্নিশ জানিয়েছেন। তাঁর মতে, এটি একটি হাড্ডাহাড্ডি লড়াই হতে চলেছে।তার মতে,"কলম্বিয়া টুর্নামেন্টের অন্যতম রোমাঞ্চকর দল। জেমস রদ্রিগেজের মাধ্যমে তারা মাঝমাঠে সংখ্যাগরিষ্ঠতা তৈরি করে, দখল ধরে রাখে এবং তারপর লুইস দিয়াজের গতি দিয়ে পিছনের ফাঁকা জায়গায় আক্রমণ করে। তারা খুবই পরিপূর্ণ একটি দল। কিন্তু সুইৎজারল্যান্ডও অন্য দিক দিয়ে সমানভাবে চিত্তাকর্ষক। তারা কম্প্যাক্ট, কৌশলগতভাবে শৃঙ্খলাবদ্ধ এবং খুব সংগঠিত মিড-ব্লক দিয়ে রক্ষণ করে। আমার মনে হয় মানজাম্বি তাদের এক্স-ফ্যাক্টর এবং আক্রমণে বাড়তি ধার দিয়েছে। আমার মনে হয় সুইৎজারল্যান্ড এই ম্যাচে এগিয়ে যেতে পারে, তবে দুই দলই এত সমান শক্তির যে মাঝমাঠে যে দল কম ভুল করবে এবং ভালো সিদ্ধান্ত নেবে, তারাই সম্ভবত কোয়ার্টার ফাইনালে যাবে।"

ছবি:সংগৃহীত।
ইডেন গার্ডেন্সে ডঃ শ্যামাপ্রসাদ মুখোপাধ্যায়ের ১২৫তম জন্মবার্ষিকী পালন করল সিএবি


*কলকাতা:* সোমবার ইডেন গার্ডেন্সের ক্লাব হাউস প্রাঙ্গণে ডঃ শ্যামাপ্রসাদ মুখোপাধ্যায়ের ১২৫তম জন্মবার্ষিকী পালন করল ক্রিকেট অ্যাসোসিয়েশন অফ বেঙ্গল( সিএবি)।এই  অনুষ্ঠান উপস্থিত ছিলেন সিএবির সভাপতি  সৌরভ গঙ্গোপাধ্যায়। এছাড়াও উপস্থিত ছিলেন তাঁর নেতৃত্বে সিএবি-র পদাধিকারীরা। উপস্থিত ছিলেন ছিলেন সিএবি-র সহ-সভাপতি নিতীশ রঞ্জন দত্ত, কোষাধ্যক্ষ সঞ্জয় দাস, প্রাক্তন পদাধিকারীরা, অ্যাপেক্স কাউন্সিলের সদস্য, বিভিন্ন কমিটির চেয়ারপার্সন, প্রাক্তন আন্তর্জাতিক ক্রিকেটার, অন্যান্য সিএবি আধিকারিক ও সদস্যরা। সকলেই ভারত কেশরী ডঃ শ্যামাপ্রসাদ মুখার্জীর প্রতিকৃতি তে মাল্যদান করে তাকে শ্রদ্ধা নিবেদন করেন।
উত্তর ২৪ জেলায় পালিত হল শ্যামাপ্রসাদ মুখার্জীর ১২৫ তম জন্মজয়ন্তী

নিজস্ব প্রতিনিধি: আজ ৬ জুলাই।ভারত কেশরী শ্যামাপ্রসাদ মুখার্জীর জন্ম দিবস। নতুন বিজেপি সরকার রাজ্যে ক্ষমতায় আসার পর আজ রাজ্য জুড়ে ছুটি ঘোষণা করা হয়েছে। এদিন জেলা তথ্য ও সংস্কৃতি দফতরের উদ্যোগে বারাসাত রবীন্দ্র ভবনে যথাযথ মর্যাদায় ভারত কেশরী ড: শ্যামাপ্রসাদ মুখার্জীর ১২৫ তম জন্মজয়ন্তী উদযাপন করা হল। অনুষ্ঠান উপস্থিত ছিলেন বারাসাতের বিধায়ক শঙ্কর চ্যাটার্জী মহাশয়। তিনি এদিন শ্যামাপ্রসাদের প্রতিকৃতিতে মাল্যদানের মধ্যে দিয়ে অনুষ্ঠানের সূচনা করেন। জেলার শিল্পীরা নাচ,গানের মধ্যে দিয়ে অনুষ্ঠানের শোভা বৃদ্ধি করেন।জেলা তথ্য ও সংস্কৃতি দপ্তর এবং উত্তর ২৪ পরগণা প্রশাসনের পক্ষ থেকে 'ড. শ্যামাপ্রসাদ মুখার্জীর জীবন ও উত্তরাধিকার' নিয়ে একটি বিশেষ প্রদর্শনীর আয়োজন করা হয়। বি সৌজন্যে:জেলা তথ্য ও সংস্কৃতি দফতর।