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सहायक अध्यापक की जनगणना में लापरवाही पर बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने किया निलंबन; जांच के निर्देश जारी
संजीव सिंह बलिया, 9 जून 2026 — जनगणना जैसे संवेदनशील सरकारी कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में सोहांव क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय इटहीं के सहायक अध्यापक विनोद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई चार्ज अधिकारी जनगणना/तहसीलदार, बलिया की रिपोर्ट के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मनीष कुमार सिंह ने की है। चार्ज अधिकारी की रिपोर्ट में बताया गया है कि एचएलबी संख्या 0690 के प्रगणक विनोद कुमार ने बार-बार निर्देश देने के बावजूद भी जनगणना कार्य शुरू नहीं किया। सुपरवाइजर धनश्याम पांडेय की जानकारी के अनुसार 31 मई 2026 की दोपहर 1 बजे तक विनोद कुमार ने एचएलबी 0692 में कार्य आरंभ नहीं किया था और उनके मोबाइल भी बंद पाए गए। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने जनगणना जैसे महत्वपूर्ण दायित्व में घोर लापरवाही बरती है। बीएसए ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (आचरण एवं अपील) नियमावली, 1999 के अनुरूप नहीं है और कर्तव्य एवं दायित्व के निर्वहन में उदासीनता का उदाहरण है। निलंबन अवधि के दौरान विनोद कुमार प्रावि रामापुर से सम्बद्ध रहेंगे और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। जांच अधिकारी नियुक्त, 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई बीएसए ने खण्ड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार चौबे (सीयर) को जांच अधिकारी नामित किया है। जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित सहायक अध्यापक के विरुद्ध आवश्यक आरोप पत्र अधोस्ताक्षरी से अनुमोदित कराकर अपचारी कर्मचारी का लिखित अभिकथन प्राप्त करें और तथ्यपरक जांच आख्या 15 दिनों के भीतर बीएसए कार्यालय को उपलब्ध कराएं। (सम्बन्धित अधिकारी बयान उपलब्ध होते ही आगे की रिपोर्ट देंगें।)
अतिस्थौल्य (मोटापा) केवल वजन नहीं, मेद धातु की विकृति : आयुर्वेद
अमर बहादुर सिंह बलिया शहर नगरा बलिया। आधुनिक जीवनशैली में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या को आयुर्वेद ने हजारों वर्ष पूर्व ही गंभीर रोग के रूप में वर्णित किया है। आयुर्वेदाचार्यों चरक, सुश्रुत और वाग्भट के अनुसार अतिस्थौल्य केवल शरीर का भार बढ़ना नहीं है, बल्कि मेद धातु की विकृति है, जिससे अनेक अन्य रोग उत्पन्न हो सकते हैं। आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित श्लोक “अतिस्थौल्यापचीमेहज्वरोदरभगन्दरान् । काससंन्यासकुष्ठानि तृट्कृच्छ्राणि च दारुणान् ॥” के अनुसार अत्यधिक मोटापा प्रमेह (मधुमेह), उदर रोग, भगन्दर, कास, मूत्र विकार तथा अन्य गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी मोटापे को डायबिटीज, फैटी लिवर, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का प्रमुख कारण मानता है। आयुर्वेद के अनुसार मोटापे की चिकित्सा का मूल सिद्धांत है— “मेद, कफ और विकृत चयापचय को संतुलित करना।” वाग्भट ने कहा है कि ऐसी चिकित्सा अपनानी चाहिए जो मेद को कम करे, कफ का शमन करे तथा शरीर के संतुलन को बनाए रखे। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा नियंत्रण में जौ, कुल्थी, मूंग, छाछ तथा गुनगुना जल अत्यंत लाभकारी माने गए हैं। कुल्थी को आयुर्वेद में शक्तिशाली मेदहर बताया गया है, जबकि जौ को मोटापा नियंत्रण की श्रेष्ठ औषधि माना गया है। इन पदार्थों में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन सुधारने और वजन नियंत्रित करने में सहायक होता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में त्रिफला, गिलोय, शुद्ध मधु तथा शिलाजीत का भी उल्लेख मिलता है। त्रिफला पाचन को सुदृढ़ करने, गिलोय चयापचय को बेहतर बनाने तथा मधु को ‘लेखन’ गुण वाला बताया गया है, जो अतिरिक्त मेद को कम करने में सहायक माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ किसी भी औषधि के सेवन से पूर्व योग्य चिकित्सक की सलाह लेने की सलाह देते हैं। स्वस्थ जीवन के लिए नियमित व्यायाम, प्रतिदिन 8 से 10 हजार कदम चलना, योग, सूर्य नमस्कार तथा श्रम को भी अत्यंत आवश्यक बताया गया है। आयुर्वेद का उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि अग्नि को संतुलित करना, मेद को नियंत्रित करना, कफ का शमन करना और सम्पूर्ण स्वास्थ्य की स्थापना करना है। अमर बहादुर सिंह नगरा बलिया, उत्तर प्रदेश “स्वस्थ शरीर, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या ही मोटापे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।”