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ससुराल के खिलाफ अस्पष्ट आरोप पर 498A का केस नहीं चलेगा - हाईकोर्ट का बड़ा फैसला*

#CalcuttaHighCourt

रिपोर्ट: स्वरूप रॉय

कोलकाता, 11 सितंबर:

पति-पत्नी के झगड़े में पूरे ससुराल को फंसा देने के चलन पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि सिर्फ घिसे-पिटे और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर ससुराल वालों के खिलाफ 498A का केस नहीं टिकेगा।

जस्टिस शम्पा दत्त (पॉल) की बेंच ने डॉ. शैबल अधिकारी और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए ससुराल पक्ष के खिलाफ चल रही पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

एक महिला ने अपने पति और ससुराल के लोगों पर दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर 498A / 406 / 323 / 506 / 34 के तहत FIR दर्ज कराई थी।

ससुराल पक्ष ने हाईकोर्ट में कहा कि वे अलग रहते हैं। उनका इस झगड़े से कोई लेना-देना नहीं है, सिर्फ पति के रिश्तेदार होने के कारण उन्हें फंसाया गया है।

वहीं पत्नी पक्ष का आरोप था कि ससुराल वालों ने सब कुछ जानते हुए भी बेटे को रोका नहीं, बल्कि उसे उकसाया।

हाईकोर्ट की 5 बड़ी टिप्पणियां:

1. शिकायत में कोई तारीख, समय या घटना का जिक्र नहीं है। आरोप बेहद सामान्य हैं।

2. सिर्फ यह जानकर चुप रहना कि बेटा बहू को प्रताड़ित कर रहा है, 498A के तहत क्रूरता नहीं है।

3. केस डायरी में ससुराल वालों के खिलाफ कोई मेडिकल रिपोर्ट, बरामदगी या स्वतंत्र गवाह नहीं है।

4. सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल, प्रीति गुप्ता और गीता मेहरोत्रा फैसलों का हवाला, जहां पूरे परिवार को घसीटने से मना किया गया है।

5. ऐसे केस को चलने देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

कोर्ट का अंतिम आदेश: ससुराल वालों के खिलाफ केस खारिज। पति के खिलाफ केस चलता रहेगा।

ससुराल के खिलाफ अस्पष्ट आरोप पर 498A का केस नहीं चलेगा - हाईकोर्ट का बड़ा फैसला*

#CalcuttaHighCourt

रिपोर्ट: स्वरूप रॉय

कोलकाता, 11 सितंबर:

पति-पत्नी के झगड़े में पूरे ससुराल को फंसा देने के चलन पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि सिर्फ घिसे-पिटे और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर ससुराल वालों के खिलाफ 498A का केस नहीं टिकेगा।

जस्टिस शम्पा दत्त (पॉल) की बेंच ने डॉ. शैबल अधिकारी और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए ससुराल पक्ष के खिलाफ चल रही पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

एक महिला ने अपने पति और ससुराल के लोगों पर दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर 498A / 406 / 323 / 506 / 34 के तहत FIR दर्ज कराई थी।

ससुराल पक्ष ने हाईकोर्ट में कहा कि वे अलग रहते हैं। उनका इस झगड़े से कोई लेना-देना नहीं है, सिर्फ पति के रिश्तेदार होने के कारण उन्हें फंसाया गया है।

वहीं पत्नी पक्ष का आरोप था कि ससुराल वालों ने सब कुछ जानते हुए भी बेटे को रोका नहीं, बल्कि उसे उकसाया।

हाईकोर्ट की 5 बड़ी टिप्पणियां:

1. शिकायत में कोई तारीख, समय या घटना का जिक्र नहीं है। आरोप बेहद सामान्य हैं।

2. सिर्फ यह जानकर चुप रहना कि बेटा बहू को प्रताड़ित कर रहा है, 498A के तहत क्रूरता नहीं है।

3. केस डायरी में ससुराल वालों के खिलाफ कोई मेडिकल रिपोर्ट, बरामदगी या स्वतंत्र गवाह नहीं है।

4. सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल, प्रीति गुप्ता और गीता मेहरोत्रा फैसलों का हवाला, जहां पूरे परिवार को घसीटने से मना किया गया है।

5. ऐसे केस को चलने देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

कोर्ट का अंतिम आदेश: ससुराल वालों के खिलाफ केस खारिज। पति के खिलाफ केस चलता रहेगा।