PDA में ‘डी’ का मतलब दूर से प्रणाम, ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला

- कैबिनेट मंत्री ने कहा- अखिलेश यादव के PDA में दलितों की स्थिति दयनीय, योगी सरकार में मिल रहे पक्के घर और रोजगार

- रामपुर में ‘A’ से मिले, बनारस में ‘P’ के घर-दुकान हो लिए, ‘D’ से दूरी क्यों?’, राजभर ने सपा प्रमुख पर साधा निशाना

लखनऊ, 05 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए में ‘डी’ का मतलब दलितों को दूर से प्रणाम करना है। राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अखिलेश यादव से कहा कि वे जमीन पर उतरकर लोगों से मिलेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि योगी राज में कितना बदलाव हुआ है।

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव रामपुर जाकर ‘ए’ (अल्पसंख्यक) से मिलते हैं। बनारस में ‘पी’ (पिछड़ा) के घर-दुकान हो लेते हैं, लेकिन ‘डी’ यानी दलितों का हाल-समाचार नहीं लेते। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में पिछड़े और दलित वर्ग की वास्तविक स्थिति दयनीय रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पीडीए की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव दलितों की स्थिति जानने के लिए उनके बीच क्यों नहीं जाते?

- जमीन पर उतरकर देखिए, कितना बदला यूपी

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में दलित परिवारों के घर जाकर उनकी स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में दलित परिवारों के पक्के घर बन रहे हैं, शौचालय की सुविधा मिल रही है और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। दलित परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में दलित परिवारों के अधिकारों को छीना जाता था। उनका तिरस्कार किया जाता था।

- अपने लोगों से ही नहीं, आम जनता से भी मिलिए

राजभर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें केवल अपने लोगों से ही नहीं, बल्कि आम जनता से भी मिलना चाहिए। जनता के बीच जाकर ही पता चलेगा कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश कितना बदला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को प्रदेश की जनता के बीच जाकर सरकार के कामकाज की तुलना करनी चाहिए।

दिल्ली की 675 झुग्गी बस्तियों का होगा पुनर्विकास, करीब 4 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान
- झुग्गी के बदले कम से कम 25 वर्गमीटर का फ्लैट देने की तैयारी, कमरे से लेकर किचन, बाथरूम और बालकनी तक की होगी सुविधा

- पात्र परिवारों को 1.50 लाख रुपये में मिलेगा मकान, 50 हजार रुपये का मेंटेनेंस कॉर्पस भी देना होगा

नई दिल्ली। दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए पक्के मकान का रास्ता खुलने जा रहा है। राजधानी की करीब 675 झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास की नई नीति लागू की गई है। इसके तहत लगभग चार लाख परिवारों को झुग्गियों के स्थान पर बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पुनर्वास योजना में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि लोगों को यथासंभव उसी इलाके में आवास मिले, ताकि उनके रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रतिकूल असर न पड़े।

नई व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को कम से कम 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल का मकान दिया जाएगा। इसमें कमरे के साथ किचन, बाथरूम, शौचालय और बालकनी जैसी सुविधाएं होंगी। मकान की निर्धारित लागत 1.50 लाख रुपये रखी गई है। इसके अतिरिक्त 50 हजार रुपये मेंटेनेंस कॉर्पस के रूप में देने होंगे।

- क्या होगी मकान पाने की पात्रता

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसके तहत संबंधित झुग्गी का अस्तित्व 1 जनवरी 2025 से पहले का होना जरूरी होगा। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले परिवारों को पुनर्वास योजना में शामिल किया जाएगा।

- तीन इलाकों से पुनर्विकास की शुरुआत

योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में शुरुआती कदम भी बढ़ाए गए हैं। सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 झुग्गी बस्तियों में करीब 4,870 झुग्गियों के पुनर्विकास की योजना तैयार की गई है। इन बस्तियों के पुनर्विकास के लिए तीन हाईराइज आवासीय कॉलोनियां प्रस्तावित हैं। इस पहल को आगे बढ़ाने वाली बड़ी पुनर्वास योजना की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

- रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र को भी मिलेगा प्रोत्साहन

करीब चार लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की योजना का असर केवल आवास क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू होने से रियल एस्टेट, सीमेंट, स्टील, निर्माण सामग्री और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए भी कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही निर्माण गतिविधियों से रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है। कुल मिलाकर, दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास की यह योजना आवास, बुनियादी सुविधाओं और शहरी ढांचे में बदलाव की बड़ी पहल है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता पात्रता निर्धारण, पारदर्शी पुनर्वास और तय समयसीमा में मकानों के निर्माण पर निर्भर करेगी।
दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित एवं बाधारहित बनाने हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित


- दिव्यांगजन दया के नहीं, बल्कि समान अधिकार, गरिमापूर्ण व्यवहार और समान अवसरों के हकदार: प्रो. हिमांशु शेखर झा

- विद्याभवन निशातगंज में 28 जनपदों के परिवहन अधिकारियों व कार्मिकों ने लिया संवेदनशीलता का प्रशिक्षण

- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और सुगम्य वातावरण निर्माण पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

लखनऊ, 04 नवम्बर 2026। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन न्यायालय/कार्यालय द्वारा बुधवार को दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास, विद्याभवन, निशातगंज, लखनऊ स्थित सभागार में “दिव्यांगजनों के समानता के अधिकार, भेदभाव रहित व्यवहार, सुगम्यता तथा सुगम परिवहन से संबंधित वैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने हेतु” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के 28 जनपदों से परिवहन विभाग के लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्मिकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा, उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय तथा उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

संवेदीकरण कार्यक्रम के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने परिवहन विभाग से संबंधित दिव्यांगजनों की प्रमुख समस्याओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के निवारण पर उपस्थित अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दिव्यांगजन किसी भी प्रकार की दया अथवा विशेष कृपा के नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त समान अधिकार, समान अवसर, गरिमापूर्ण व्यवहार एवं बाधारहित वातावरण के पूर्ण हकदार हैं। उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी वैधानिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन केवल दायित्वपूर्ति तक सीमित न रखकर मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं आत्मीय सम्मान की भावना से करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि दिव्यांग यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन में किसी भी प्रकार की असुविधा, उपेक्षा अथवा भेदभाव का सामना न करना पड़े तथा उन्हें सहज, सुरक्षित व सम्मानजनक यात्रा का अनुभव कराना सभी सेवा प्रदाताओं का सामूहिक दायित्व है।

उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को दिव्यांगजनों के अनुकूल, सुलभ और सुरक्षित बनाने के महत्वपूर्ण तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने परिवहन कर्मियों को यात्रियों के साथ गरिमापूर्ण एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। इसके उपरांत द्वितीय सत्र में उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों, कानूनी अधिकारों, वैधानिक संरक्षण तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने विगत दो वर्षों में दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण, समस्याओं के निराकरण एवं सुगम्यता विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों की रूपरेखा भी साझा की।

कार्यक्रम के तृतीय सत्र में विषय विशेषज्ञ अमरेश चन्द्रा ने दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक मानकों के अनुरूप बाधारहित एवं सुगम्य वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता, उसके विभिन्न ढांचागत आयामों और सुगम्यता मानकों पर व्याख्यान दिया। समापन सत्र में राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा उपस्थित अधिकारियों व कार्मिकों की विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।

राहुल फुस्स रॉकेट, अखिलेश हार के बहानेबाज: योगी आदित्यनाथ

- भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का किया स्वागत

- अखिलेश को नसीहत, लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता करती है बदलाव

- राहुल का बारूद खत्म, कांग्रेस कितनी बार करेगी लॉन्च: मुख्यमंत्री योगी

- पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने पर कांग्रेस को आपत्ति क्यों

- कभी ईवीएम तो कभी एसआईआर का बहाना ढूंढती है दो लड़कों की जोड़ी

- आपातकाल और सिख विरोधी हिंसा के लिए देश से माफी मांगे कांग्रेस

गोरखपुर, 04 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राहुल गांधी को फुस्स रॉकेट बताते हुए कहा कि उनका बारूद समाप्त हो चुका है। कांग्रेस चाहे जितनी बार उन्हें लॉन्च कर ले, अब वह लॉन्च नहीं होने वाले। वहीं, अखिलेश यादव के बदला लेने संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के बबुआ को कोई समझाए कि लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता बदलाव करती है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों को आपत्ति क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन अपनी चुनावी पराजय छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज में भाजपा द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका यह पहला गोरखपुर दौरा है। लोकतंत्र को मजबूत करने और अराजकता के खिलाफ जनजागरण के लिए उन्होंने बाबा गोरक्षनाथ की धरती को चुना है। यह पदयात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से जुड़ी है।

- अखिलेश को नसीहत, लोकतंत्र में बदला नहीं होता

मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा अध्यक्ष ने कहा है कि अगली पीढ़ी हर लाठी और हर जख्म का बदला लेगी। उन्होंने पलटवार किया कि समाजवादी पार्टी के बबुआ को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता बदलाव करती है। वर्ष 2014 में देश और 2017 में उत्तर प्रदेश की जनता ने बदलाव करके दिखाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस को मिली कुल सीटों से अधिक 255 सीटें अकेले भाजपा ने 2022 में जीती थीं। जनता ही तय करती है कि किसे सत्ता सौंपनी है।

- राहुल का रॉकेट उड़ने से पहले छोड़ देता है धुआं

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक लॉन्चिंग पर तंज कसते हुए कहा कि दीपावली पर कुछ रॉकेट ऐसे होते हैं, जिनमें बत्ती लगाने के बाद लोग आसमान की ओर देखते रह जाते हैं, लेकिन रॉकेट वहीं धुआं छोड़कर बुझ जाता है। राहुल गांधी की भी यही स्थिति हो चुकी है। कांग्रेस ने वर्ष 2004 में सांसद, 2007 में महासचिव, 2013 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 2017 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उन्हें लॉन्च किया। इसके बाद 2019 में वह अमेठी से चुनाव हार गए। भारत जोड़ो यात्रा, न्याय यात्रा और अधिकार यात्रा से भी स्थिति नहीं बदली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी 56 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए अभी भी युवा हैं। अब यह युवा कभी लॉन्च नहीं होने वाला है।

- घुसपैठियों के नाम हटाने पर हाय-तौबा क्यों

मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952, 1962 और 2003 सहित अलग-अलग समय में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हुआ है। कांग्रेस के शासनकाल में इसका समर्थन किया जाता था, लेकिन आज निर्वाचन आयोग जब बांग्लादेशी घुसपैठियों, पाकिस्तानियों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाने की कार्रवाई कर रहा है तो विरोध हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई विदेशी घुसपैठिया मतदाता सूची में नाम दर्ज कराता है तो वह भारत के किसी गरीब, दलित और वंचित का अधिकार छीनता है। ऐसे नाम हटाना उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर अराजकता पैदा करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों को देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

- हारते ही ईवीएम पर फोड़ते हैं ठीकरा

मुख्यमंत्री ने राहुल-अखिलेश की जोड़ी की तुलना बार-बार परीक्षा में असफल होने वाले छात्र से की। कहा कि ऐसा छात्र कभी कॉपी गायब होने, कभी प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर आने और कभी पेन की स्याही समाप्त होने का बहाना बनाता है। अपनी असफलता स्वीकार नहीं करता। दोनों नेताओं की भी यही स्थिति है। चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हारने पर ईवीएम तथा निर्वाचन आयोग को दोषी ठहराते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 44, वर्ष 2019 में 52 और वर्ष 2024 में 99 सीटें मिलीं। तीनों चुनावों में कुल 195 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने अकेले 2024 में 240 सीटें जीतीं। उन्होंने बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार की हार के बावजूद कांग्रेस आत्ममंथन नहीं करती।

- आपातकाल और सिख विरोधी हिंसा पर मांगा जवाब

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र पर उपदेश दे रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस आपातकाल में प्रताड़ित लोगों और जान गंवाने वालों के परिजनों से माफी मांगेगी? वर्ष 1984 की सिख विरोधी हिंसा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि एक नवंबर को जब देश पीड़ित परिवारों को याद कर रहा था, तब कांग्रेस दिल्ली में जश्न मना रही थी।

- सपा की चार सरकारों में 1500 से अधिक दंगों का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। कुछ लोग देश को बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसा बनाने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन नया भारत अराजकता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले सपा की चार सरकारों में 1500 से अधिक दंगे हुए। पर्व-त्योहारों से पहले कर्फ्यू लगना आम था। बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। आज प्रदेश सुरक्षा और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की पदयात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का अभियान है। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का नारा लगवाया।

- विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है विपक्ष: संजय निषाद

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है। नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिशों से जनता को सावधान करने के लिए यह पदयात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में विकास कर रहा है, लेकिन सपा और कांग्रेस को यह बदलाव पसंद नहीं आ रहा है।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी व कमलेश पासवान, सांसद रवि किशन, मंत्री संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, ए.के. शर्मा, दारा सिंह चौहान, दयाशंकर सिंह, विजय लक्ष्मी गौतम, दानिश आजाद अंसारी, राष्ट्रीय मंत्री डॉ. प्रदीप वर्मा और क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय सहित पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे पर बीजेपी का हमला, कहा-काशी विश्वनाथ के दर्शन की हिम्मत नहीं जुटा सके सपा प्रमुख
- सपा राज में काशी, मथुरा और अयोध्या को नजरअंदाज किया जाता था: बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह
- संकटमोचन मंदिर ब्लास्ट के आतंकियों का केस वापस लेने की पैरवी करने वाली सपा का असली चेहरा पहचानते हैं काशीवासी: डॉ.अंकुश त्रिपाठी
- ज्ञानवापी में पूजा बंद करवाने वाली सपा किस मुंह से काशी के सम्मान की बात कर रही', अंकुश त्रिपाठी का अखिलेश पर तंज

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि आज वो अखिलेश यादव सनातन की बात कर रहे हैं जिनकी राजनीति का आधार ही तुष्टीकरण है। उन्होंने कहा कि सपा राज में काशी, मथुरा और अयोध्या को नजरअंदाज किया जाता था। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव को सबसे पहले  बनारस के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। ये वही सपा है जिसने वाराणसी में हुए सीरियल ब्लास्ट के आतंकियों का मुकदमा वापस लेने की पैरवी की थी।
- 'कृष्ण जन्मभूमि पर अपना स्टैंड क्लियर करें अखिलेश'
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव बनारस गए तो काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन का साहस क्यों नहीं जुटा सके? उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव में हिम्मत है तो कृष्ण जन्मभूमि पर अपना रुख स्पष्ट करें। एक बार कहने का साहस जुटाएं कि वो चाहते हैं कि मथुरा में शाही मस्जिद के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनना चाहिए।
- 'आतंकियों के पैरोकार हैं अखिलेश यादव'
अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि सपा ने सरकार में रहते हुए बनारस कचहरी और संकट मोचन मंदिर में हुए सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों के मुकदमे वापस लेने की पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि काशीवासी ये कैसे भूल सकते हैं कि ये वही सपा है जिसने ज्ञानवापी में पूजा बंद कराई थी। अखिलेश यादव के मन में न भोलेनाथ हैं, न कृष्ण और न राम। वे औरंगजेब और बाबर के पैरोकार हैं और सनातन विरोधी हैं।
अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि आज योगी राज में प्रदेश के धार्मिक स्थलों का विकास हो रहा है। उत्तर प्रदेश में टेंपल इकोनॉमी की चर्चा हो रही है। काशी कॉरिडोर बनने के बाद वहां से बड़े पैमाने पर राजस्व आ रहा है। मथुरा, अयोध्या और विंध्याचल में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले आज सनातन धर्म पर ज्ञान दे रहे : उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक

- अखिलेश को विकास से नहीं, सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति से मतलब, ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख पर कसा तंज

- ‘जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, वे आज राम-शिव की बात कर रहे’, मंत्री मनोज पाण्डेय ने अखिलेश पर साधा निशाना

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने तीखा हमला बोला है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि अखिलेश को विकास से कोई लेना-देना नहीं है, वे सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। वहीं, मनोज पाण्डेय ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने और राम-शिव के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले आज मंदिरों और सनातन की बात कर रहे हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा शासनकाल में जाति और क्षेत्र देखकर विकास कार्य किए जाते थे, लेकिन आज योगी सरकार में चौतरफा विकास हो रहा है। काशी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये अब वर्ल्ड क्लास सिटी के रूप में विकसित हो रही है। पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव काशी गए, लेकिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन तक नहीं किए और अब उसी नगरी के विकास पर सवाल उठा रहे हैं। 

- ‘रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले आज राम-शिव की बात कर रहे’

कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या में निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, भगवान राम और शिव के अस्तित्व पर सवाल उठाए तथा हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया, वे आज काशी में भेदभाव की बात कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह योगी सरकार की ही कृपा है कि अब ऐसे लोग भी राम और शिव की बात करने लगे हैं। पाण्डेय ने कहा कि सपा ने अपने विधायकों को अयोध्या राम मंदिर दर्शन से रोका था। उन्होंने कहा कि सनातनियों के लिए भगवान श्रीकृष्ण, भगवान राम और भगवान शिव सभी पूजनीय हैं।

'चुनाव से भाग रहे हैं अखिलेश जी, आइये हो जाये दो-दो हाथ’, ओपी राजभर का सपा प्रमुख के बयान पर पलटवार

- राजभर ने कहा- जब लग गया कि मिट्टीपलीत होनी तय है तो मैदान छोड़कर भागने लगे अखिलेश 

सिर्फ एक बार CM बन पाए, अगली पैदाइश तक उम्मीद नहीं: ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज

लखनऊ, 04 नवंबर। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया के जरिए तीखा पलटवार किया है। राजभर ने सपा प्रमुख को संबोधित करते हुए लिखा है कि आप चुनाव से भाग रहे हैं, वह नेता क्या जो चुनाव से भागे। पोस्ट में राजभर ने अखिलेश पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए हैं।

- ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? 

पोस्ट की शुरुआत में ही राजभर लिखते हैं, ‘अरे मित्र अखिलेश यादव जी! सुना है कि आप अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ेंगे। ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? आइये हो जाये दो-दो हाथ।’ उन्होंने अखिलेश को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि चुनाव से भागना नेतागिरी नहीं है।

- ‘इतना टोना-टोटका मानने वाले हो, पता नहीं था’

राजभर ने अखिलेश पर टोना-टोटका मानने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘हमको नहीं पता था कि आप इतना टोना-टोटका मानने वाले हैं। वैसे बिना चुनाव लड़े आपका मुख्यमंत्री बन जाना कोई टोना-टोटका नहीं था मित्र! बल्कि रेडीमेड पार्टी के रेडीमेड शहजादा होने के कारण मुख्यमंत्री बन पाए थे। अब जब लग गया कि लड़ने गए तो मिट्टीपलीत होनी तय है तो लगे मैदान छोड़कर भागने?’

उन्होंने आगे लिखा कि यह लाल टोपी वालों की सरकार नहीं है, जब प्रदेश टोना-टोटका वाले चलाया करते थे। नोएडा से लेकर आगरा, अयोध्या और मथुरा तक टोना-टोटका मानने वालों की सरकार को जनता ने 10 साल पहले ही उखाड़ के फेंक दिया है। आज हम लोगों ने मिलकर सारे टोना-टोटका, भूत-प्रेत, पिशाच सब झार दिए हैं। 

- ‘सिर्फ एक बार CM बन पाए, अगली पैदाइश तक उम्मीद नहीं’ 

राजभर ने कहा, ‘वैसे भी! ले दे के एक्कै बार सीएम बन पाए हैं आप... अब आगे अगली पैदाइश तक उम्मीद भी नहीं है। तो कम से कम हिम्मत दिखाते हुए किसी एक सीट से लड़ लिए होते।’ पोस्ट के अंत में राजभर ने अखिलेश को सलाह देते हुए लिखा, ‘चलिए, बाबा विश्वनाथ आपका कल्याण करें... आपके पास चौराहे पर रुककर मिठाई खाने का समय था, मगर कुछ ही दूर पर उनके दरबार में शीश झुकाने का समय नहीं मिला। कम से कम पास में ही काल भैरव बाबा के दरबार में चले गये होते। वहां आपके सब टोना-टोटका का इलाज हो गया होता।’

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश : ए.के. शर्मा
- भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट-2026 में ऊर्जा मंत्री ने प्रस्तुत किया उत्तर प्रदेश का विजन
- कहा - स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और निवेश के नए अवसरों के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार कर रहा उत्तर प्रदेश
- उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में हो रहे ठोस प्रयास

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो-2026 में उत्तर प्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी बढ़ती ताकत, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रदेश की ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों और भावी कार्ययोजना को प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद, निदेशक रविन्द्र सिंह, सचिव पंकज सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री ए.के. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने का जो संकल्प लिया है, उत्तर प्रदेश उसे धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश में सौर ऊर्जा, बायोएनर्जी और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, पीएम-कुसुम, सोलर सिटी और यूटिलिटी स्केल सोलर परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को आमजन, किसानों और उद्योगों तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने का महत्वपूर्ण आधार है। उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा के साथ-साथ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) एवं बायोएनर्जी परियोजनाओं में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक, उद्योग जगत की सहभागिता और निवेशकों के सहयोग से प्रदेश को ग्रीन एनर्जी के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
समिट में उत्तर प्रदेश की नोडल एजेंसी यूपीनेडा द्वारा प्रदेश की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं एवं परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इनमें सोलर सिटी, यूटिलिटी स्केल सोलर परियोजनाएं, कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG), बायोएनर्जी परियोजनाएं, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना तथा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस समिट में देश-विदेश के नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और विभिन्न राज्यों की नवीकरणीय ऊर्जा नोडल एजेंसियां प्रतिभाग कर रही हैं। आयोजन के माध्यम से निवेश, तकनीकी नवाचार और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग की नई संभावनाओं को भी बल मिल रहा है।
यूपी रेरा ने 8 जिलों में 17 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी हरी झंडी
*₹4,844 करोड़ के निवेश से विकसित होंगी 5,726 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयां, निवेश और इकाइयों के निर्माण में लखनऊ सबसे आगे*

लखनऊ/गौतमबुद्ध : 03 नवम्बर 2026।
उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश और विकास की संभावनाओं को एक और बढ़ावा मिला है। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने प्रदेश के आठ जिलों में प्रस्तावित 17 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग ₹4,844.43 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है, जिससे कुल 5,726 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।
इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासीय सुविधाओं के साथ व्यावसायिक विकास को भी विस्तार मिलेगा। इसके अतिरिक्त, निर्माण कार्यों में तेजी आने से रोजगार सृजन के नए रास्ते खुलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।
इन परियोजनाओं को यूपी रेरा मुख्यालय में आयोजित प्राधिकरण की 217वीं, 218वीं एवं 219वीं अथॉरिटी बैठकों में स्वीकृति दी गई। बैठकों की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी जी ने की। इस दौरान विभिन्न जिलों से प्राप्त परियोजना प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण एवं विचार-विमर्श करने के उपरांत प्राधिकरण ने उन्हें मंजूरी प्रदान की।
यूपी रेरा ने कहा कि स्वीकृत परियोजनाओं का विकास रेरा अधिनियम के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाएगा। प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य घर खरीदारों के हितों को सुरक्षित रखने के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र में विश्वास और जवाबदेही की व्यवस्था को और सुदृढ़ करना है।
*निवेश और इकाइयों के मामले में लखनऊ सबसे आगे*
नई स्वीकृत परियोजनाओं में लखनऊ का प्रदर्शन सबसे प्रमुख रहा है। जिले में 6 आवासीय, 1 मिश्रित उपयोग और 2 व्यावसायिक परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं में लगभग ₹2,203.27 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इनके माध्यम से कुल 3,031 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा। निवेश और प्रस्तावित इकाइयों, दोनों ही दृष्टि से लखनऊ इन जिलों में अग्रणी है।
*मुरादाबाद में एक परियोजना को स्वीकृति*
मुरादाबाद में एक आवासीय परियोजना को प्राधिकरण की मंजूरी मिली है। इस परियोजना के विकास में लगभग ₹1.03 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है, जिसके अंतर्गत 12 आवासीय इकाइयां विकसित की जाएंगी।
*गाजियाबाद में विकसित होंगी 1,016 इकाइयां*
गाजियाबाद में दो आवासीय परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं में कुल ₹943.28 करोड़ के निवेश का अनुमान है। इनके पूरा होने पर जिले में 1,016 नई आवासीय इकाइयां उपलब्ध होंगी।
*गौतमबुद्ध नगर में मिश्रित उपयोग की परियोजना को मंजूरी*
गौतमबुद्ध नगर में एक मिश्रित उपयोग वाली रियल एस्टेट परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के लिए लगभग ₹940.43 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत कुल 456 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।
*मेरठ में 313 नई आवासीय इकाइयों का होगा निर्माण*
मेरठ में ₹194.28 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली एक आवासीय परियोजना को स्वीकृति मिली है। इस परियोजना के तहत कुल 313 आवासीय इकाइयां विकसित की जाएंगी, जिससे शहर में आवासीय सुविधाओं का विस्तार होगा।
*फिरोजाबाद में आवासीय परियोजना को मंजूरी*
फिरोजाबाद में ₹10.87 करोड़ के प्रस्तावित निवेश वाली एक आवासीय परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से कुल 48 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।
*कानपुर में 597 आवासीय इकाइयां होंगी विकसित*
कानपुर में ₹524.66 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली एक आवासीय परियोजना को यूपी रेरा ने स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत कुल 597 आवासीय इकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है। इससे शहर के आवासीय क्षेत्र में नई सुविधाओं का विस्तार होगा।
*श्रीराम नगरी अयोध्या में आवासीय परियोजना को स्वीकृति*
धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण अयोध्या में भी रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा मिला है। यहां ₹26.61 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली एक आवासीय परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके माध्यम से कुल 159 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।
*प्रदेश सरकार की नीतियों से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिल रहा प्रोत्साहन*
उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट गतिविधियों का लगातार विस्तार राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों, सरल प्रक्रियाओं और विकासोन्मुखी प्रयासों का परिणाम है। आवास एवं शहरी विकास के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में नई परियोजनाओं के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। आठ जिलों में स्वीकृत 17 परियोजनाओं के माध्यम से प्रस्तावित ₹4,844.43 करोड़ का निवेश निर्माण क्षेत्र को नई गति प्रदान करेगा। इसका सकारात्मक प्रभाव निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग सहित इससे जुड़े विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। परियोजनाओं के निर्माण एवं संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
*पारदर्शिता और समयबद्ध विकास को प्राथमिकता*
यूपी रेरा के अनुसार, स्वीकृत एवं पंजीकृत परियोजनाओं का विकास निर्धारित नियमों और तय समय-सीमा के भीतर कराना प्राधिकरण की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए परियोजनाओं की निगरानी, नियमों का अनुपालन और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्राधिकरण का उद्देश्य घर खरीदारों को उनके अधिकारों के प्रति आश्वस्त करना व प्रमोटरों के लिए भी स्पष्ट और व्यवस्थित नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इन प्रयासों से प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं का विश्वास लगातार मजबूत होगा।
*अध्यक्ष का वक्तव्य*
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्राधिकरण निरंतर प्रभावी कदम उठा रहा है। परियोजनाओं के प्रस्तावों का समयबद्ध निस्तारण और उनके विकास की नियमित निगरानी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यूपी रेरा का प्रयास है कि घर खरीदारों को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण मिले व प्रमोटरों को भी निर्धारित नियमों के तहत परियोजनाओं के विकास के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो। प्राधिकरण भविष्य में भी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और प्रदेश में संतुलित एवं सुनियोजित रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
500 साल तक संघर्ष करती रही आस्था, एकजुट हुआ भारत तो अयोध्या में बना भव्य राम मंदिर: सीएम योगी

- पीलीभीत में श्रीराम कथा महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता
- 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में रामभक्तों पर चली थीं गोलियां, सैकड़ों ने दिया था बलिदान

पीलीभीत, उत्तर प्रदेश। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी आस्था और सांस्कृतिक एकता है। दुनिया में करीब 200 देश हैं, सभी की अपनी पहचान, उपलब्धियां और समस्याएं हैं, लेकिन भारत जैसा सांस्कृतिक एकता का सूत्र दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत को एक सूत्र में बांधने का काम हमारी आस्था करती है।
ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी की पुण्य स्मृति में पीलीभीत में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में चीन और भारत ही ऐसे दो देश हैं, जिनकी आबादी 50 करोड़ से अधिक है। यूरोप भले ही एक इकाई के रूप में दिखाई देता हो, लेकिन वह अलग-अलग देशों और राजनीतिक इकाइयों का समूह है। इसके विपरीत भारत विविधताओं के बावजूद सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यही आस्था हर भारतीय को निरंतर यह एहसास कराती रही कि जिन प्रभु श्रीराम की कथा का हम अखंड पाठ करते हैं, उनकी जन्मभूमि अयोध्या गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी। इस आस्था ने हार नहीं मानी। 500 वर्षों तक बिना रुके, बिना डिगे और बिना पीछे हटे संघर्ष चलता रहा। अंततः जब पूरा भारत एक स्वर में खड़ा हुआ तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सीएम योगी ने 2 नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी दिन अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। सैकड़ों रामभक्तों ने अपना बलिदान दिया था। उस दौर में अयोध्या में जय श्रीराम का उद्घोष करने और वहां पहुंचने तक पर प्रतिबंध था।
उन्होंने कहा कि उस समय अयोध्या की परिस्थितियां भी बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। वहां आवागमन के पर्याप्त साधन नहीं थे, गलियां संकरी थीं और अव्यवस्था का माहौल था। इसके बावजूद रामभक्तों की आस्था और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा।