दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित एवं बाधारहित बनाने हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित
- दिव्यांगजन दया के नहीं, बल्कि समान अधिकार, गरिमापूर्ण व्यवहार और समान अवसरों के हकदार: प्रो. हिमांशु शेखर झा
- विद्याभवन निशातगंज में 28 जनपदों के परिवहन अधिकारियों व कार्मिकों ने लिया संवेदनशीलता का प्रशिक्षण
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और सुगम्य वातावरण निर्माण पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
लखनऊ, 04 नवम्बर 2026। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन न्यायालय/कार्यालय द्वारा बुधवार को दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास, विद्याभवन, निशातगंज, लखनऊ स्थित सभागार में “दिव्यांगजनों के समानता के अधिकार, भेदभाव रहित व्यवहार, सुगम्यता तथा सुगम परिवहन से संबंधित वैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने हेतु” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के 28 जनपदों से परिवहन विभाग के लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्मिकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा, उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय तथा उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
संवेदीकरण कार्यक्रम के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने परिवहन विभाग से संबंधित दिव्यांगजनों की प्रमुख समस्याओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के निवारण पर उपस्थित अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दिव्यांगजन किसी भी प्रकार की दया अथवा विशेष कृपा के नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त समान अधिकार, समान अवसर, गरिमापूर्ण व्यवहार एवं बाधारहित वातावरण के पूर्ण हकदार हैं। उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी वैधानिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन केवल दायित्वपूर्ति तक सीमित न रखकर मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं आत्मीय सम्मान की भावना से करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि दिव्यांग यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन में किसी भी प्रकार की असुविधा, उपेक्षा अथवा भेदभाव का सामना न करना पड़े तथा उन्हें सहज, सुरक्षित व सम्मानजनक यात्रा का अनुभव कराना सभी सेवा प्रदाताओं का सामूहिक दायित्व है।
उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को दिव्यांगजनों के अनुकूल, सुलभ और सुरक्षित बनाने के महत्वपूर्ण तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने परिवहन कर्मियों को यात्रियों के साथ गरिमापूर्ण एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। इसके उपरांत द्वितीय सत्र में उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों, कानूनी अधिकारों, वैधानिक संरक्षण तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने विगत दो वर्षों में दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण, समस्याओं के निराकरण एवं सुगम्यता विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों की रूपरेखा भी साझा की।
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में विषय विशेषज्ञ अमरेश चन्द्रा ने दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक मानकों के अनुरूप बाधारहित एवं सुगम्य वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता, उसके विभिन्न ढांचागत आयामों और सुगम्यता मानकों पर व्याख्यान दिया। समापन सत्र में राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा उपस्थित अधिकारियों व कार्मिकों की विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।








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