मऊ पुलिस की सघन चेकिंग, 590 वाहनों का चालान
31 टीमों ने 31 स्थानों पर चलाया अभियान, चार वाहन सीज; यातायात नियमों के पालन की अपील

मऊ। अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर मऊ पुलिस ने बुधवार को जिलेभर में व्यापक चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर के निर्देशन में जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों के साथ यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की सघन जांच की गई।

अभियान के लिए 31 पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने जिले के 31 अलग-अलग स्थानों पर बदल-बदलकर चेकिंग की। इस दौरान करीब 1420 संदिग्ध वाहनों एवं व्यक्तियों की जांच की गई। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 590 वाहनों का विभिन्न धाराओं में चालान किया गया, जबकि चार वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की गई।

चेकिंग के दौरान पुलिस टीमों ने वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया। लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने, निर्धारित नियमों का पालन करने और सड़क पर अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी गई।

पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने आमजन से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें। इसके साथ ही गलत स्थानों पर वाहन पार्क करने से बचें और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में पुलिस का सहयोग करें।

पुलिस ने संकेत दिया कि यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ चेकिंग और कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
मऊ -: स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर सांसद राजीव राय का बड़ा हमला
बोले—जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, भ्रष्टाचार की शिकायतों की हो निष्पक्ष जांच

मऊ। स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर घोसी लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजीव राय ने सवाल खड़े किए हैं। सांसद ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य आम गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, दवाएं और जरूरी सेवाएं मिलना उनका अधिकार है। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी या मरीजों के साथ लापरवाही की शिकायत मिलती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सांसद राजीव राय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि जनता के पैसे से संचालित सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय होना जरूरी है। गरीब मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े और उन्हें सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले, इसके लिए अधिकारियों को जमीन पर प्रभावी निगरानी करनी चाहिए।

सांसद ने संकेत दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों और अनियमितताओं के मुद्दे को उचित मंच पर उठाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा जाएगा।
यूपी में अब 70 की उम्र तक डॉक्टर देंगे सेवा, रिटायरमेंट उम्र बढ़ी : ब्रजेश पाठक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने ऐलान किया है कि अब चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की सेवा की उम्र सीमा बढ़ाकर 70 साल कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला डॉक्टरों के लंबे अनुभव का लाभ जनता को देने के लिए लिया गया है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले डॉक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 70 साल कर दी गई है। इसका मतलब है कि डॉक्टर 70 साल की उम्र तक सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।"

पाठक ने कहा, "हमने यह फैसला जनहित में लिया है ताकि मरीजों को सीनियर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अनुभव का फायदा मिल सके। मैं उन सभी डॉक्टरों और उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देता हूं जिन्हें इस फैसले से फायदा होगा।"

बता दें कि वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रदेश में सरकारी डॉक्टर 65 साल की उम्र तक ही सेवा दे सकते थे लेकिन प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स (सीएचसी) और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (पीएचसी) में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का यह फैसला मरीजों के लिए भी राहत दे सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सीनियर डॉक्टरों के पास दशकों का क्लीनिकल अनुभव होता है, जो गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज में बेहद महत्वपूर्ण है। रिटायरमेंट की उम्र 65 से 70 साल करने से अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं पांच साल और मिल सकेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर होगी।डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है।

2027 की तैयारी में सपा छात्र सभा की सक्रियता बढ़ी, अखिलेश ने तय की रणनीति

- छात्र सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो घंटे बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन; हर विधानसभा और विश्वविद्यालय में छात्रों से संवाद पर जोर

लखनऊ। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मंगलवार को सपा मुख्यालय में समाजवादी छात्र सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की करीब दो घंटे बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता सपा प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, छात्रों के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक में छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने के साथ ही दलित और पिछड़े वर्ग के युवाओं को संगठन से जोड़ने की रणनीति पर भी मंथन हुआ। पार्टी की ओर से छात्र सभा के पदाधिकारियों के लिए नई ड्रेस कोड भी तय की गई है। इसके तहत नीली जींस, नीली टी-शर्ट और लाल टोपी निर्धारित की गई है। टी-शर्ट पर समाजवादी पार्टी का लोगो भी अंकित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

- हर विधानसभा और विश्वविद्यालय में छात्रों से संवाद

अखिलेश यादव ने छात्र सभा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र तथा विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद करने के निर्देश दिए। कार्यकर्ता छात्रों से शिक्षा, रोजगार और उनकी अन्य समस्याओं को लेकर बातचीत करेंगे। साथ ही उन्हें समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा एवं युवाओं से जुड़े कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि छात्र सभा को केवल चुनाव के समय सक्रिय होने के बजाय पूरे वर्ष छात्रों के बीच रहकर उनके मुद्दों को उठाना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रों के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने से आगामी चुनाव में युवाओं को पार्टी से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

- संगठन विस्तार पर भी जोर

बैठक में समाजवादी छात्र सभा के संगठन को बूथ और विधानसभा स्तर तक मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे राष्ट्रीय पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में छात्रों के साथ नियमित संवाद और संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष विनीत कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव मुकुल यादव समेत प्रदेशभर से आए राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में लिए गए फैसलों को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी को हाई कोर्ट की फटकार, NSA मामले में 5 लाख मुआवजा देने का आदेश

लखनऊ/नोएडा: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम को इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीखी फटकार का सामना करना पड़ा है। मेधा रूपम उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले की जिलाधिकारी हैं। इसी साल नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन के दौरान बंगाल की रहने वाली आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने का आदेश मेधा ने ही दिया था।

उसके बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय की ग्रेजुएट आकृति लगातार पांच महीने तक न्यायिक हिरासत में थीं। बीते 2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति के खिलाफ लगे NSA को रद्द करने का आदेश दिया था। सोमवार को कोर्ट के फैसले की कॉपी सार्वजनिक हुई है। इसमें जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने जिलाधिकारी की भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

आदेश में हाई कोर्ट ने कहा है कि मेधा ने एक ‘मिसाल कायम करने’ की मंशा से आकृति के खिलाफ NSA की धारा लगाई थी। उनका यह फैसला ‘उपहास के योग्य’ है। कोर्ट के मुताबिक, मेधा ने अभिव्यक्ति की आजादी में बाधा डालकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लंघन किया है।

हाई कोर्ट ने आकृति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है और कहा है कि यह रकम मेधा और संबंधित अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।

साथ ही समूचे नौकरशाही और पुलिस की भूमिका पर भी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कड़ी टिप्पणी की है - पुलिस और अफसरों को याद रखना चाहिए कि वे संविधान के प्रति जवाबदेह हैं, राजनीतिक प्रशासन के प्रति नहीं। उन्हें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे वे ‘ब्रिटिश काल के दमन के वाहक’ जैसे दिखें।

दो जजों की बेंच ने जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास ‘1984’ का जिक्र करते हुए कड़े शब्दों में कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश के अफसरों ने खुद को नहीं सुधारा तो जल्द ही यह राज्य ‘पूर्ण रूप से सर्वग्रासी राष्ट्र’ में बदल जाएगा। गौरतलब है कि ऑरवेल ने 1949 में प्रकाशित अपने उपन्यास ‘1984’ में भविष्य के एक ऐसे तानाशाही समाज की कल्पना की थी, जहां लोगों के निजी जीवन, सोच और यहां तक कि इतिहास पर भी एक सर्वग्रासी सरकार का नियंत्रण होगा।

उप्र जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ में उपाध्यक्ष समेत नौ सदस्य नामित


लखनऊ। संस्कृति विभाग के अधीन स्वायत्तशासी संस्था उप्र जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ के संविधान में की गयी प्राविधान के अनुसार सामान्य परिषद में उपाध्यक्ष/सदस्य समेत 09 महानुभावों को तत्काल प्रभाव से सदस्य के रूप में नामित किया गया है। इन नामित सदस्यों का कार्यकाल 03 वर्ष की अवधि के लिए होगा अथवा राज्य सरकार द्वारा हटाये जाने की तिथि तक, जो पहले हो।

इन नामित सदस्यों में उपाध्यक्ष/सदस्य के रूप में प्रोफेसर (डॉ.) अभय कुमार जैन, आशियाना कालोनी लखनऊ के अलावा सदस्य के रूप में राहुल जैन, मैनपुरी, आशीष जैन, फिरोजाबाद, रोहित जैन, गोरखपुर, डॉ. संजीव जैन, लखनऊ, डा. प्रमोद कुमार भदौरा, प्रयागराज, सुनील जैन, मैनपुरी, डा. सुनील कुमार जैन, ललितपुर तथा सौरभ शास्त्री, फिरोजाबाद को नामित किया गया है।यह जानकारी देते हुए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि शासन द्वारा नामित पॉलि, जैन दर्शन, जैन विद्या या इसी प्रकार के अन्य क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त विद्वान शामिल किये गये हैं। इन सदस्यों के नामित होने से जैन विद्या शोध संस्थान लखनऊ की कार्यों में गति आयेगी तथा यह अपने उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में सफल होगा।

मंत्री ने बलिया मोड़, गाजीपुर तिराहा, बस स्टैंड व मिर्ज़ाहादीपुर में विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का किया शुभारंभ

- नागरिकों की सुविधा-सहूलियत के लिए विकास कार्यों में नहीं आने दी जाएगी कोई कमी: ए. के. शर्मा

- मऊ में विकास की नई तस्वीर, प्रमुख स्थलों पर सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था से बढ़ेगी शहर की सुंदरता

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने मऊ जनपद में कल देर शाम विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बलिया मोड़ तिराहा स्थित पटेल उपवन में सरदार वल्लभभाई पटेल जी की प्रतिमा के आसपास कराए गए विकास कार्यों, गाजीपुर तिराहा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा के आसपास के सौंदर्यीकरण कार्यों, मऊ बस स्टैंड स्थित स्व. अलगू राय शास्त्री जी की प्रतिमा स्थल तथा मिर्ज़ाहादीपुर चौक पर स्थापित भव्य ट्राई कलर मिरर एवं कॉलम लाइट का शुभारंभ किया।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मऊ शहर को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में विकास कार्य निरंतर जारी रहेंगे। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों का योजनाबद्ध तरीके से विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है, जिससे नागरिकों को बेहतर वातावरण के साथ-साथ सुविधाजनक और आकर्षक सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं हमारी प्रेरणा और गौरव का प्रतीक हैं। ऐसे स्थलों का विकास एवं सौंदर्यीकरण केवल शहर की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नई पीढ़ी को महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराने का भी अवसर मिलता है।

नगर विकास मंत्री ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और शहरों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें लोगों को आवागमन, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं के स्तर पर किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नगरीय क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ, सुंदर और नागरिक सुविधाओं से युक्त बनाने का अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। मऊ भी इसी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आने वाले समय में यहां और अधिक विकास कार्य दिखाई देंगे।

महोबा में तीन बच्चों की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत


लखनऊ /महोबा। उत्तर प्रदेश में महोबा जिले के चरखारी क्षेत्र में रविवार दोपहर नहाने गए तीन मासूम बच्चे खेलते-खेलते पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में समा गए, जिसमें डूबने से तीनों की मौत हो गई। देर रात एक-एक कर तीनों के शव पानी से बाहर निकाले गए तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। पुलिस मामले की जांच में जुट गई।

चरखारी क्षेत्राधिकारी दीपक दुबे ने रविवार की देर रात बताया कि थाना चरखारी क्षेत्र के रिवई गांव में तीन बच्चे प्रिंस (15) पुत्र मनोज अहिरवार, रोशनी (11) पुत्री जियालाल और अंशुल (10) पुत्र खलक अहिरवार की नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने के कारण डूब जाने की सूचना मिली। इस पर थाना पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुँचकर स्थानीय गोताखोरों की मदद से तीनों बच्चों की तलाश कर उन्हें बाहर निकाला। तीनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चरखारी ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया गया।

परिवार से पता चला है कि तीनों बच्चें रविवार दोपहर गांव के ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज के पीछे बने गड्ढे में भरे पानी में नहाने गए थे। तीनों रोजाना वहां मछली पकड़ने भी जाते थे। रविवार को भी गए और देर शाम तक जब तीनों बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। खोजबीन की गई, लेकिन कोई पता नहीं चल सका। देर रात गांव के लोगों ने गड्ढे में एक शव उतराता देखा, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी।

सूचना पर चरखारी थाना प्रभारी राहुल मिश्रा ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच कर स्थानीय गोताखोरों की मदद से प्रिंस को बाहर निकाल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी भेजा। इसके बाद दुबे अन्य दो बच्चों की तलाश की तो वह भी उसी गहरे गड्ढे में मिले। लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रोशनी और अंशुल को उसी गड्ढे से बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब मामले की जांच में जुट गई हैं।

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में कांग्रेस एक्टिव

- प्रदेश अध्यक्ष अजय राय आज पहुंचेंगे सहारनपुर, मस्जिद कमेटी के सदस्यों से करेंगे मुलाकात

लखनऊ। सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय आज सहारनपुर जाएंगे। वह शाम करीब 5 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी लेंगे।

अजय राय मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी लेने के साथ स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों से भी बातचीत कर सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर पार्टी की सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी के मुताबिक, अजय राय मौके की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी लेने के बाद इस मामले को लेकर कांग्रेस का पक्ष सामने रख सकते हैं।

92 साल के रस्किन बॉन्ड से मिलने लखनऊ की अद्रिका पहुंची देहरादून

- स्पाइन सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे साहित्यकार ने बच्ची की किताब पर लिखा—‘Keep writing!’

लखनऊ/देहरादून। किताबों की दुनिया में कुछ मुलाकातें उम्र और पहचान की सीमाओं से कहीं आगे निकल जाती हैं। लखनऊ की बच्ची अद्रिका उमराव के लिए ऐसी ही यादगार मुलाकात तब हुई, जब वह भारत के बेहद लोकप्रिय साहित्यकार रस्किन बॉन्ड से मिलने देहरादून पहुंची। 92 वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे बॉन्ड ने न केवल बच्ची से मुलाकात की, बल्कि उसकी किताब देखकर उसे अपने हाथ से शुभकामना भी दी।

कुछ महीने पहले स्पाइन की सर्जरी के बाद रस्किन बॉन्ड इन दिनों देहरादून में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। शारीरिक दिक्कतों के बावजूद जब अद्रिका उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने उसके साथ समय बिताया और उसकी किताब पर अपने हाथ से संदेश लिखा—

“Dear Adrika,

Congratulations on your book.

Keep writing!

Ruskin Bond

6/9/26”

छोटा-सा यह संदेश अद्रिका के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं। जिस लेखक की कहानियों ने भारत में कई पीढ़ियों के बचपन को संवारा, उसी साहित्यकार का एक उभरती लेखिका से कहना—‘लिखते रहो’—अपने आप में एक खूबसूरत साहित्यिक आशीर्वाद है।

- 17 साल की उम्र में लिखी थी पहली किताब

रस्किन बॉन्ड ने महज 17 वर्ष की उम्र में अपना पहला उपन्यास ‘The Room on the Roof’ लिखा था। वर्ष 1957 में इस कृति के लिए उन्हें प्रतिष्ठित John Llewellyn Rhys Memorial Prize मिला। इसके बाद उनका लेखन लगातार आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहानियों, निबंधों, उपन्यासों और बाल साहित्य की अनेक पुस्तकों के जरिए भारतीय साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाई।

‘The Blue Umbrella’, ‘Our Trees Still Grow in Dehra’, ‘A Flight of Pigeons’ और ‘The Adventures of Rusty’ उनकी चर्चित कृतियों में शामिल हैं। खास तौर पर Rusty का किरदार बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है।

- पहाड़, बारिश और छोटे शहर बने उनकी कहानियों की दुनिया

रस्किन बॉन्ड के साहित्य की सबसे खास बात उनकी सहज और सरल भाषा है। पेड़-पौधे, बारिश, पहाड़, जानवर, बचपन, दोस्ती और छोटे शहरों के आम लोग उनकी कहानियों में बेहद आत्मीयता के साथ दिखाई देते हैं।

देहरादून और मसूरी उनके साहित्यिक संसार के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। उनके लेखन में पहाड़ों की खूबसूरती के साथ-साथ वहां का सामान्य जीवन, छोटे कस्बों की गलियां और प्रकृति के साथ इंसान का रिश्ता बार-बार उभरता है।

उनकी पुस्तक ‘Our Trees Still Grow in Dehra’ में देहरादून और गढ़वाल क्षेत्र से जुड़े अनुभवों की झलक मिलती है, जबकि ‘The Adventures of Rusty’ में देहरादून में अपने दादा-दादी के साथ रहने वाले Rusty की दुनिया को केंद्र में रखा गया है।

- पुरस्कारों से कहीं बड़ी है पाठकों की दुनिया

रस्किन बॉन्ड को वर्ष 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें 2021 में साहित्य अकादमी फेलोशिप भी मिली।

हालांकि, बॉन्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि उनके पुरस्कारों से ज्यादा उनके पाठकों के बीच उनकी लोकप्रियता है। उनकी कहानियों में पाठक अपने बचपन, बारिश, पहाड़, पेड़ और आसपास के साधारण लोगों की झलक महसूस करते हैं।

उम्र के इस पड़ाव पर उनकी शारीरिक सक्रियता भले सीमित हुई हो, लेकिन लेखन से उनका रिश्ता अब भी कायम है। हालिया जानकारी के मुताबिक दृष्टि कमजोर होने के कारण अब वे अपनी रचनाएं स्वयं लिखने के बजाय पोती को बोलकर लिखवाते हैं। मई 2026 में उनके 92वें जन्मदिन के मौके पर ‘All-Time Favourite Friendship Stories’ भी प्रकाशित हुई।

और अद्रिका के साथ हुई यह मुलाकात शायद इसी निरंतरता की सबसे खूबसूरत तस्वीर है—एक ओर 92 साल का वह लेखक, जिसने अपना जीवन शब्दों को समर्पित कर दिया, और दूसरी ओर लेखन की दुनिया में कदम रखती एक बच्ची। बॉन्ड ने अद्रिका को कोई लंबा भाषण नहीं दिया।

बस उसकी किताब पर लिखा—“Congratulations on your book. Keep writing!”

कभी-कभी साहित्य की सबसे बड़ी सीख बस इतनी ही होती है—लिखते रहो।