जिला पंचायत के अभियंताओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण
- एमएनएनआईटी प्रयागराज में पहली बार तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, 80 अभियंता दो बैच में होंगे प्रशिक्षित

लखनऊ। पंचायती राज विभाग की ओर से जिला पंचायतों में कार्यरत अभियंताओं एवं अवर अभियंताओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए तीन दिवसीय व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान (प्रिट) के तत्वावधान में यह प्रशिक्षण मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से इस प्रकार का प्रशिक्षण पहली बार आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जिला पंचायतों में होने वाले विकास एवं निर्माण कार्यों के तकनीकी पक्ष, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, नवीन तकनीकों, प्रभावी निगरानी और व्यावहारिक तकनीकी प्रक्रियाओं के संबंध में अभियंताओं को अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना है।
- 80 प्रतिभागी दो बैच में होंगे प्रशिक्षित
प्रथम चरण में 80 प्रतिभागियों को 40-40 के दो बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले बैच का प्रशिक्षण 8 सितंबर से शुरू हुआ है, जबकि दूसरे बैच का आयोजन 22 से 24 सितंबर 2026 तक एमएनएनआईटी, प्रयागराज में किया जाएगा। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ प्रायोगिक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके माध्यम से अभियंताओं को प्राक्कलन, मानचित्र और डीपीआर तैयार करने सहित निर्माण कार्यों की तकनीकी प्रक्रियाओं में कार्यकुशलता विकसित करने का अवसर मिलेगा। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण से जिला पंचायतों में कराए जा रहे निर्माण एवं विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के साथ उनकी तकनीकी निगरानी और क्रियान्वयन को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह प्रशिक्षण पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर की प्रेरणा तथा पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।
सेवा पखवाड़ा के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर : शिवराज सिंह चौहान

- सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को जन-जन तक पहुंचाएगा सेवा पखवाड़ा : केशव प्रसाद मौर्य

- ग्राम चौपाल, ग्रामीण आवास और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को मिलेगी गति


लखनऊ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को राज्यों के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ आगामी ‘सेवा पखवाड़ा’ के आयोजन एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं ग्रामीण विकास मंत्री केशव प्रसाद मौर्य लखनऊ स्थित कैम्प कार्यालय से एनडीए के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वर्चुअल रूप से सम्मिलित हुए।
बैठक में सेवा पखवाड़े के दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘सेवा पखवाड़ा’ सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प को धरातल पर उतारने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने राज्यों से आह्वान किया कि पखवाड़े के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए तथा योजनाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पात्र लाभार्थियों को समय से लाभ उपलब्ध कराने तथा गांवों में विकास कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का मूल उद्देश्य गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है और सेवा पखवाड़ा इसी संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।
‘सेवा पखवाड़ा’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से प्रारम्भ होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती 2 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सेवा, समर्पण एवं जनभागीदारी की भावना के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में ‘सेवा पखवाड़ा’ सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का व्यापक अभियान है। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास एवं जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सेवा पखवाड़े के दौरान प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत स्वीकृत आवासों को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने तथा पात्र लाभार्थियों को सीधे लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही विकसित भारत-जी राम जी तथा अन्य ग्रामीण रोजगार पहलों के अंतर्गत गांवों में ग्रामीण सड़कों, खेल मैदानों सहित बुनियादी अवस्थापना के विकास को गति देने पर जोर रहेगा।
श्री मौर्य ने कहा कि लखपति दीदी एवं महिला सशक्तिकरण को भी अभियान में प्रमुखता दी जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनके कौशल विकास एवं आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयोजित होने वाली ग्राम चौपालों के माध्यम से ग्रामीण जनता की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करने तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार सेवा पखवाड़े के दौरान ग्रामीण विकास, गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण एवं सुशासन से जुड़ी प्राथमिकताओं को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतारेगी।वर्चुअल बैठक में ग्राम्य विकास विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
राज्य स्तरीय पुरस्कार-2026 के लिए 15 सितंबर तक आवेदन
- दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं होंगे सम्मानित

लखनऊ। प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों और उनके सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित और सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार-2026 प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कारों का वितरण 3 दिसंबर 2026 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर किया जाएगा।
विभाग ने पुरस्कारों के लिए कुल 12 श्रेणियां निर्धारित की हैं। प्रत्येक श्रेणी में चयनित विजेता को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। पुरस्कार के लिए दक्ष दिव्यांग कर्मचारी/स्वनियोजित दिव्यांगजन, सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता, सर्वश्रेष्ठ प्लेसमेंट अधिकारी या एजेंसी, सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति/संस्था, प्रेरणास्रोत एवं सृजनशील दिव्यांग बालक/बालिका, दिव्यांग खिलाड़ी तथा दिव्यांगजनों के लिए बाधारहित वातावरण के सृजन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा दिव्यांगजनों को पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने वाले सर्वश्रेष्ठ जिले समेत अन्य निर्धारित श्रेणियों में भी उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा।
- जिलाधिकारी की संस्तुति जरूरी
पुरस्कार के लिए इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ 15 सितंबर 2026 तक अपना आवेदन निदेशालय, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, कक्ष संख्या-1010, दशम तल, इंदिरा भवन, अशोक मार्ग, हजरतगंज, लखनऊ में जमा कर सकते हैं। विभाग के अनुसार पुरस्कार से संबंधित विस्तृत जानकारी विभागीय वेबसाइट तथा हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1995 से प्राप्त की जा सकती है। विभाग ने पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं से निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है।
अखिलेश का बुद्ध स्थलों के विकास का दावा छलावा, सपा शासन में हुआ था बुद्ध प्रतिमा पर हमला: बृजलाल
- पूर्व डीजीपी ने सपा अध्यक्ष पर साधा निशाना, कहा- बुद्ध और दलित महापुरुषों के अपमान का इतिहास नहीं भूलेगा समाज

लखनऊ। पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बुद्धिस्ट तीर्थ स्थलों के विकास संबंधी बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बौद्ध स्थलों का विकास कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा। सपा शासन में बुद्ध प्रतिमा और बौद्ध संतों पर हुए हमले को प्रदेश आज भी नहीं भूला है।
बृजलाल ने कहा कि 17 अगस्त 2012 को लखनऊ में अलविदा की नमाज के बाद निकली भीड़ ने बुद्धा पार्क में तोड़फोड़ की थी। भगवान बुद्ध की प्रतिमा और अन्य बौद्ध प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भंते अशोकानंद और उनके शिष्यों के साथ मारपीट की गई तथा उनकी गाड़ियां भी तोड़ी गईं। इसके बावजूद तत्कालीन अखिलेश सरकार ने दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कठोर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने इसे तत्कालीन सरकार की तुष्टिकरण नीति का परिणाम बताया।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि आज अखिलेश यादव बुद्धिस्ट तीर्थ स्थलों के विकास की बात कर रहे हैं, जबकि उनकी सरकार का रिकॉर्ड इसके उलट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम हटाया और आंबेडकर से जुड़े संस्थानों तथा प्रतीकों के प्रति भी सम्मान नहीं दिखाया। उन्होंने 2016 में आजम खान की बाबा साहब को लेकर की गई टिप्पणी का भी उल्लेख किया।
बृजलाल ने कहा कि इसके विपरीत भाजपा सरकार ने ‘विरासत से विकास’ को नीति का हिस्सा बनाया है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर के साथ कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और बुद्धिस्ट सर्किट के तहत बौद्ध स्थलों के विकास पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कपिलवस्तु से जुड़े भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेश में उनकी प्रस्तावित नीलामी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की। बृजलाल ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखा था।
बृजलाल ने अखिलेश यादव पर दलित विरोधी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा शासन में दलित अधिकारियों- कर्मचारियों की पदावनति और पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी का रुख भी समाज भूला नहीं है। उन्होंने कहा, “बुद्ध और दलित महापुरुषों के अपमान का इतिहास रखने वाले आज बुद्ध स्थलों के विकास की बात कर रहे हैं। दलित समाज इस दोहरे चरित्र को समझता है और इसे कभी माफ नहीं करेगा।”
टेक्सटाइल नीति के तहत उद्यमियों को मिला प्रोत्साहन, यूपी में नए निवेश के लिए एमओयू
- छह इकाइयों को दिए गए लेटर ऑफ कमेंडेशन, पांच इकाइयों को मिला वित्तीय लाभ

- एलायंस ग्रुप, ऋचा ग्लोबल समेत नौ कंपनियों और संस्थाओं के साथ निवेश के लिए एमओयू का आदान-प्रदान

लखनऊ। यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 में मंगलवार को प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया गया। यूपी टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत छह इकाइयों को लेटर ऑफ कमेंडेशन दिए गए, जबकि पांच इकाइयों को नीति के तहत वित्तीय लाभ प्रदान किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया।
यूपी टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत मेसर्स शाही एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, गाजियाबाद को 30 करोड़ 50 लाख रुपये का लेटर ऑफ कमेंडेशन दिया गया। राजलक्ष्मी कॉटन मिल्स, गौतमबुद्धनगर को 12 करोड़ 69 लाख 80 हजार रुपये, आधुनिक मैटेरियल एंड साइंसेज, कानपुर को 10 करोड़ रुपये, पी एग्रो इंडिया इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, बरेली को 7 करोड़ 72 लाख रुपये, रामकुमार एग्रो प्रोडक्ट, बरेली को 6 करोड़ 69 लाख रुपये और आरएस पॉलिटेक्स प्राइवेट लिमिटेड, चंदौली को 6 करोड़ 34 लाख रुपये का लेटर ऑफ कमेंडेशन दिया गया।
नीति के तहत उद्यमियों को वित्तीय लाभ भी प्रदान किए गए। जीईएससी स्पिनर्स प्राइवेट लिमिटेड, रामपुर के निदेशक संदीप खंडेलवाल को 32 करोड़ 68 लाख 59 हजार रुपये का वित्तीय लाभ दिया गया। पार्थ थ्रेड प्राइवेट लिमिटेड, अंबेडकरनगर को 5 करोड़ 26 लाख 23 हजार रुपये और एमको एक्सपोर्ट, बुलंदशहर को 3 करोड़ 75 लाख रुपये का वित्तीय लाभ प्रदान किया गया। सक्षम एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, गोरखपुर और मेसर्स एंड पीएग्रो लिमिटेड को भी नीति के तहत वित्तीय लाभ दिया गया।
कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया। इनमें एलायंस ग्रुप, आइकोनिक ग्लोबल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, यूनाइटेड एग्जिम प्राइवेट लिमिटेड, टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, एमआई इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, एएमडी इंडस्ट्रीज, महालक्ष्मी टेक्नोप्रैक प्राइवेट लिमिटेड, ऋचा ग्लोबल और रचित प्रिंट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल रहे।
उद्योग जगत ने कहा, अनुशासन और मजबूत नेतृत्व से टेक्सटाइल हब बनने की राह पर यूपी
- पूर्व राज्यसभा सांसद अयोध्या रामी रेड्डी बोले- निवेश वहीं आता है, जहां अनुशासन हो, मुख्यमंत्री योगी तेजी से प्रदेश को ले जा रहे आगे - उद्योगपतियों ने यूपी के बड़े घरेलू बाजार और मजबूत एमएसएमई आधार को बताया बड़ी ताकत- टेक्निकल टेक्सटाइल को डिफेंस और एयरोस्पेस से जोड़ने का सुझाव, उद्यमियों ने जताई निवेश की इच्छालखनऊ। यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 में मंगलवार को देश के दिग्गज उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश की बदली औद्योगिक तस्वीर पर मुहर लगाई। किसी ने बेहतर कानून व्यवस्था और अनुशासन को निवेश का आधार बताया तो किसी ने विशाल घरेलू बाजार और मजबूत एमएसएमई नेटवर्क को यूपी की ताकत बताया। उद्योग जगत ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में उभरेगा। साथ ही टेक्निकल टेक्सटाइल को डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों से जोड़ने का सुझाव भी दिया।
पूर्व राज्यसभा सांसद एवं उद्योगपति अयोध्या रामी रेड्डी ने कहा कि उद्योग जगत के लोग वहीं निवेश करते हैं, जहां अनुशासन होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अनुशासन और तेजी के साथ उत्तर प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूपी को नंबर वन बनाना है और टेक्सटाइल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह उत्तर प्रदेश और देश दोनों के लिए बड़ा सेक्टर है। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश करेंगे।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि भारत के पास टेक्सटाइल सेक्टर का मजबूत आधार है और अगले पांच वर्षों में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का आकार दोगुना करने का विजन है। यूपी के पास एमएसएमई का मजबूत आधार होने के साथ बहुत बड़ा घरेलू बाजार है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश भारत का अग्रणी टेक्सटाइल हब बनेगा।
कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के उपाध्यक्ष रवि सैम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसा मजबूत नेतृत्व है। यहां भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की धरती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल सेक्टर में जितने सहयोग की आवश्यकता होगी, उतनी मदद की जाएगी।
एमकेयू लिमिटेड के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनके समूह ने यूपी में एयरोस्पेस और डिफेंस के क्षेत्र में पहल की है। उन्होंने स्ट्रैटेजिक टेक्निकल टेक्सटाइल की विशेष सूची तैयार करने और इसे एयरोस्पेस एवं डिफेंस इकोसिस्टम से जोड़ने का सुझाव दिया।
इंडिया आईटीएमई सोसाइटी के अध्यक्ष केतन सांघवी ने कहा कि भारत का वस्त्र उद्योग दुनिया में दूसरे-तीसरे स्थान पर गिना जाता है। उन्होंने विदेशी मुद्रा की बचत और ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग बांटने के लिए प्रदेश में लगेंगे शिविर

- 17 सितंबर को 41 और 2 अक्टूबर को 34 जिलों में होगा वितरण


लखनऊ। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण निदेशालय ने सभी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विभाग ने प्रथम चरण के वितरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 75 जिलों को दो समूहों में विभाजित किया है। पहले समूह के 41 जिलों में 17 सितंबर 2026 को वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें आगरा, अलीगढ़, एटा, अयोध्या, सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, बदायूं, बांदा, देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, उन्नाव, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, जौनपुर, गोरखपुर, कन्नौज, प्रयागराज, शामली, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, बिजनौर, इटावा, हापुड़, ललितपुर, मथुरा, रामपुर, सीतापुर, कौशांबी, हरदोई और बुलंदशहर शामिल हैं।
वहीं, दूसरे समूह के 34 जिलों में 2 अक्टूबर 2026 को वितरण शिविर लगाए जाएंगे। इस समूह में लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, चंदौली, बलरामपुर, चित्रकूट, अंबेडकरनगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, जालौन, कानपुर देहात, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज, मऊ, पीलीभीत, रायबरेली, संभल, शाहजहांपुर, सोनभद्र, अमेठी, औरैया, बागपत, बाराबंकी, भदोही, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महोबा, मुजफ्फरनगर, बहराइच, बलिया, बस्ती और मैनपुरी शामिल हैं।
- तीन चरणों में आयोजित होंगे शिविर
विभाग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय चरण के शिविर 20 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक तथा तृतीय चरण के शिविर 3 दिसंबर से 15 दिसंबर 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण निदेशालय ने संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित समय-सारिणी के अनुरूप शिविरों के सफल आयोजन के लिए कार्ययोजना तैयार कर उसका शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया है।
- आत्मनिर्भरता और गतिशीलता बढ़ाना उद्देश्य
राज्य सरकार की ओर से दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग वितरण योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
वितरण शिविरों के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाने के साथ गतिशीलता, कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके जीवन को अधिक सुगम और सम्मानजनक बनाना है।
यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: योगी

- सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें

- टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी

- कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन

- यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च, हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ की बन गई थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौटता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। उन्होंने कहा, “बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो दो ही जगह होंगी, या जेल या जहन्नुम।” उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्रा पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यूपी आज पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

रक्षाबंधन पर जिस भाई की कलाई सजाई, उसी का शव घर पहुंचा, चार बहनों की चीखों से गूंज उठा औरैया
लखनऊ /औरैया। रक्षाबंधन पर चार बहनों ने जिस भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की दुआ मांगी थी, कुछ ही दिनों बाद उसी इकलौते भाई का शव घर पहुंचा तो खुशियों से भरा परिवार मातम में डूब गया। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने की घटना में जान गंवाने वाले दिबियापुर निवासी पवन कुमार का शव मंगलवार सुबह घर पहुंचा। भाई का बेजान चेहरा देखते ही चारों बहनें फूट-फूटकर रो पड़ीं। पिता रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह बेटे को देखकर बदहवास हो गए।

पवन के घर में मंगलवार को हर तरफ सिसकियां थीं। जिस आंगन में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन की खुशियां थीं, वहां अब बेटे और भाई को खोने का गम था। परिवार की हालत देखकर रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

डेढ़ महीने पहले शुरू किया था नया सफर

पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दिबियापुर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। अपने भविष्य को संवारने के सपनों के साथ उसने 20 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि पवन पढ़-लिखकर अपना और परिवार का नाम रोशन करेगा, लेकिन महज डेढ़ महीने के भीतर ही उसका यह नया सफर एक दर्दनाक हादसे में थम गया।

पवन की बहन प्रियांशी भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही है और गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। हादसे की खबर मिलने के बाद वह घटनास्थल पर पहुंची और काफी देर तक अपने भाई की तलाश करती रही। देर रात जब पवन की मौत की खबर सामने आई तो परिवार की खुशियां हमेशा के लिए गहरे दुख में बदल गईं।

रक्षाबंधन पर बहनों ने हंसते हुए बांधी थी राखी

कुछ दिन पहले ही पवन रक्षाबंधन पर घर आया था। चारों बहनों ने उसकी कलाई पर राखी बांधी थी। परिवार ने साथ बैठकर जन्माष्टमी भी मनाई। घर में हंसी-खुशी का माहौल था। इसके बाद शनिवार को पवन दिल्ली के लिए रवाना हुआ।

जाते समय पवन बिल्कुल सामान्य था। बहनों ने भी उसे हंसते हुए विदा किया था। किसी ने कल्पना तक नहीं की थी कि घर से दिल्ली के लिए निकला यह भाई दोबारा जिंदा लौटकर नहीं आएगा और वह विदाई उनकी आखिरी विदाई बन जाएगी।

मां से आखिरी बार वीडियो कॉल पर हुई थी बात

परिवार के अनुसार पवन अपनी मां मीरा देवी के बेहद करीब था। वह रोज सुबह-शाम मां से वीडियो कॉल पर बात करता था। शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद भी उसने मां से बातचीत की थी। रविवार सुबह भी मां से वीडियो कॉल पर बात हुई।

इसके बाद शाम को जब पवन का फोन नहीं आया तो परिवार की चिंता बढ़ने लगी। किसी अनहोनी की आशंका के बीच सत्य निकेतन हादसे की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। जिस बेटे के फोन का मां इंतजार कर रही थीं, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

मां को अब तक नहीं बताई गई बेटे की मौत

पवन की मौत की सबसे दर्दनाक बात यह है कि उसकी मां मीरा देवी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती। परिवार ने उन्हें अब तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी है। घर में लगातार रिश्तेदारों और परिचितों का पहुंचना जारी है।

एक तरफ चार बहनें अपने भाई को खोने के गम में रो रही हैं, पिता बेटे की याद में बदहवास हैं और दूसरी तरफ मां को अब भी अपने बेटे के लौटने का इंतजार है। कुछ दिन पहले जिस घर में रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की खुशियां थीं, आज उसी घर में पवन की यादें और अपनों की सिसकियां रह गई हैं।
अयोध्या में आज जुटेंगी हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां, CM योगी करेंगे सम्मान, रामलला के दर्शन भी करेंगे

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मंगलवार को अयोध्या दौरे पर रहेंगे। इस दौरान राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में वह आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में अयोध्या मंडल की करीब 12 से 15 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के पहुंचने की संभावना है।

 राज्यस्तरीय आयोजन का मुख्य कार्यक्रम अयोध्या में होगा, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में भी समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण किया जाएगा। समारोह में विभागीय मंत्री के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी मौजूदगी रहेगी। राशन वितरण व्यवस्था से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं भी कार्यक्रम में भाग लेंगी।

 - सीएम योगी की मौजूदगी में होगा मुख्य समारोह

 जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के पहुंचने को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह की निगरानी में कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।

- करीब तीन घंटे अयोध्या में रहेंगे मुख्यमंत्री

 निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर करीब 2:50 बजे हेलीकॉप्टर से जीआईसी मैदान पहुंचेंगे। यहां वह राज्यस्तरीय समारोह में शामिल होंगे और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री करीब शाम 4 बजे तक कार्यक्रम में रहेंगे। इसके बाद वह हेलीकॉप्टर से राम कथा पार्क स्थित हेलीपैड पहुंचेंगे। यहां से मुख्यमंत्री पहले हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद श्रीराम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री शाम करीब 5 बजे हेलीकॉप्टर से लखनऊ के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारियां की गई हैं।