2027 से पहले कांग्रेस का अल्पसंख्यक संगठन पर फोकस, हसीब खान को 15 जिलों की कमान


लखनऊ। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने अल्पसंख्यक संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पार्टी ने मुस्लिम नेता हसीब खान को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही पूर्वी जोन के 15 जिलों का प्रभारी बनाया है।

अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन सोहिल अख्तर अंसारी की ओर से जारी जिम्मेदारी के तहत हसीब खान को बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, जौनपुर, आजमगढ़, वाराणसी, गाजीपुर और सुल्तानपुर समेत कुल 15 जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस के इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी इन जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क मजबूत करने पर जोर दे रही है।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद हसीब खान को मिली इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संगठन में उनके बढ़ते कद से जोड़कर देखा जा रहा है। नई जिम्मेदारी मिलने पर हसीब खान ने कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने अजय राय, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उसे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी।

कांग्रेस की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारी का यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
जिला अदालत के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छह बुलडोजर से हटाया गया निर्माण

लखनऊ /सहारनपुर। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजर का इस्तेमाल करके सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद को गिरा दिया है। यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को अवैध घोषित करने वाले बेदखली के आदेश को सही ठहराया गया था।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा, "सहारनपुर जिले में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर सरकारी जमीन पर एक अवैध निर्माण पाया गया था, जिसके बारे में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील दायर की थी। उनकी अपील खारिज कर दी गई है और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसी आदेश के तहत, इस अवैध निर्माण को गिराने का काम किया जा रहा है।"

डीआईजी अभिषेक सिंह की ओर से बताया गया कि प्रशासन की ओर से जितने भी लीगल रिस्पॉन्सिबिलिटी थी, उसको पूरा किया है। कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत ही कार्रवाई की जा रही है। त्योहारों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ मिली है।

बता दें कि कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने नजरबंद कर दिया था। सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।

सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "देखिए, बात सिर्फ मस्जिद की नहीं है, देश के कानून और संविधान का उल्लंघन हो रहा है। आप यह साबित नहीं कर सकते कि जमीन आपकी है। खसरा रिकॉर्ड के आधार पर आपने दावा किया है कि यह सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन है। लेकिन कलेक्ट्रेट की जमीन आज भी वहीद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है, जिनकी जमींदारी के भीतर मस्जिद बनाई गई थी। यह अभी भी कायम है।"

इमरान मसूद ने आगे कहा, "मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत है, लेकिन आपने वक्फ बोर्ड को पार्टी नहीं बनाया। जहां तक वक्फ बाय यूजर का सवाल है, मैं जेपीसी का सदस्य था, और वक्फ बाय यूजर स्थापित करता है कि यह एक मस्जिद है, वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है और ये सभी गतिविधियां होती रही हैं।''
पुलिस लाइन में सीएम योगी ने किया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का शुभारंभ
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत
डीजीपी ने भेंट की कामधेनु-बछड़े की प्रतिमा,पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया
जन्माष्टमी को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा
लखनऊ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में भव्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों ने उत्साह एवं श्रद्धा के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में सहभागिता की।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया और जन्माष्टमी समारोह के औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और कर्मयोग के संदेश को प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही स्मृति-चिह्न के रूप में कामधेनु और बछड़े की आकर्षक प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को स्वीकार किया।कार्यक्रम में पुलिस परिवार के अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों की मौजूदगी रही। जन्माष्टमी के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में उत्सव और भक्ति का माहौल नजर आया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पुलिस विभाग के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारजनों को भी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देखने को मिला।रिजर्व पुलिस लाइन लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के बाद पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण महानगर स्थित पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय पहुंचे। यहां भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। डीजीपी ने कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया और पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारजनों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।इस दौरान उन्होंने प्रदेश के समस्त पुलिस कर्मियों और उनके परिवारजनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लखनऊ पुलिस लाइन से लेकर पुलिस टेलीकॉम मुख्यालय तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रमों में पुलिस परिवार की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
35वीं वाहिनी पीएसी में धूमधाम से मनी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

मध्यरात्रि में कान्हा का प्राकट्य, पूजन-आरती के साथ गूंजे भजन-कीर्तन; पुलिसकर्मियों और परिजनों ने लिया आशीर्वाद

लखनऊ। महानगर स्थित 35वीं वाहिनी पीएसी परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक पीएसी, उत्तर प्रदेश आलोक सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिजनों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद बृजलाल, पुलिस महानिदेशक रेलवे/जीआरपी उत्तर प्रदेश प्रकाश डी., अपर पुलिस महानिदेशक पावर कॉरपोरेशन उत्तर प्रदेश डॉ. रामकृष्ण स्वर्णकार, पुलिस महानिरीक्षक पीएसी मध्य जोन लखनऊ डॉ. प्रीतिंदर सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पीएसी लखनऊ अनुभाग किरीट राठोड़, पुलिस उपमहानिरीक्षक भवन/कल्याण मोहम्मद इमरान, 35वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक अमित कुमार तथा सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनोहारी झांकी सजाई गई

जन्माष्टमी के अवसर पर वाहिनी परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनोहारी झांकी सजाई गई। झांकी ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान भजन, कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण स्मरण किया।भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीक्षा में कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिली। जैसे-जैसे मध्यरात्रि नजदीक आई, भक्तों का उत्साह बढ़ता गया।

श्रीकृष्ण के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजन और आरती की गई

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद विधि-विधान से पूजन और आरती की गई। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिसकर्मियों और उनके परिवारजनों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। अधिकारियों ने धर्म, कर्तव्य, सत्य और कर्मयोग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कर्तव्यनिष्ठा और कर्म के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

वाहिनी परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा

जन्माष्टमी समारोह के दौरान वाहिनी परिसर में देर रात तक भक्तिमय माहौल बना रहा। भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुलिसकर्मियों के परिवारजनों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ। पूरी वाहिनी परिसर में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का वातावरण नजर आया। पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को हर्षोल्लास के साथ मनाते हुए सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

मथुरा से 2027 का सियासी बिगुल! योगी के ‘विजय संकल्प’ के सामने अखिलेश की चुनौती

ब्रजभूमि में धर्म, विकास और राजनीति का संगम; भाजपा के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती, विपक्ष तलाश रहा वापसी का रास्ता

राम आशीष गोस्वामी

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन उसकी आहट तेज होने लगी है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘विजय संकल्प’ वाला संदेश ऐसे समय आया है, जब प्रदेश की राजनीति धीरे-धीरे अगले विधानसभा चुनाव की दिशा में बढ़ रही है। मंच पर ‘राधे-राधे’ का उद्घोष, विकास परियोजनाओं का जिक्र और सत्ता में वापसी का आत्मविश्वास—इन सबने मथुरा के कार्यक्रम को महज सरकारी आयोजन से आगे राजनीतिक संकेतों का विषय बना दिया है।

ब्रजभूमि की धार्मिक पहचान और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का यह मेल भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा सकता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने चुनौती है कि वे भाजपा के मजबूत संगठन और सांस्कृतिक मुद्दों के बीच अपने राजनीतिक एजेंडे को किस तरह जनता तक पहुंचाते हैं।

मथुरा से संदेश कितना राजनीतिक, कितना सांस्कृतिक?

मथुरा भाजपा के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। कृष्ण जन्मभूमि, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन की धार्मिक पहचान को विकास और पर्यटन से जोड़ने की कोशिश लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। योगी आदित्यनाथ के भाषणों में भी विरासत और विकास का यह मेल लगातार दिखाई देता है। मथुरा में विकास परियोजनाओं के साथ ब्रज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता देना इसी व्यापक राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा माना जा सकता है।

यहीं से 2027 की राजनीति का एक अहम सवाल निकलता है—क्या सांस्कृतिक मुद्दे और विकास का मॉडल भाजपा को फिर से मजबूत बढ़त दिला पाएगा, या विपक्ष सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के सहारे चुनावी समीकरण बदलने में सफल होगा? 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए महज सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं होगा। यह उनके शासन मॉडल, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और हिंदुत्व आधारित राजनीतिक छवि की जनता के बीच स्वीकार्यता का भी परीक्षण होगा।

भाजपा के पास संगठन की मजबूत मशीनरी, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का आधार तथा मुख्यमंत्री का स्थापित राजनीतिक चेहरा है। ऐसे में पार्टी के लिए चुनौती अपने समर्थक आधार को बनाए रखने के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना होगी। मथुरा से निकला ‘विजय’ का संदेश इसी आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन चुनावी मैदान में राजनीतिक दावे तभी परिणाम में बदलते हैं, जब वे मतदाता की प्राथमिकताओं से जुड़ते हैं।

अखिलेश के सामने भाजपा के नैरेटिव का जवाब देने की चुनौती

समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह 2027 में किस मुद्दे और किस सामाजिक समीकरण के साथ भाजपा को चुनौती देगी। अखिलेश यादव के पास पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति है। इसके साथ रोजगार, किसानों की समस्याएं, महंगाई, युवाओं की अपेक्षाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख हथियार हो सकते हैं। लेकिन केवल सरकार विरोधी माहौल के भरोसे चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। सपा को मतदाताओं के सामने ऐसा वैकल्पिक राजनीतिक एजेंडा रखना होगा, जो भाजपा के सांस्कृतिक और विकास संबंधी नैरेटिव का प्रभावी जवाब दे सके।

आस्था के बीच राजनीति का नया रंग

उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों की भूमिका नई नहीं है। कृष्ण की मथुरा हो या अयोध्या, काशी और अन्य धार्मिक केंद्र—आस्था हमेशा से राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करती रही है।

नीम करोली बाबा और हनुमान भक्ति से जुड़े संदर्भ भी इसी व्यापक आध्यात्मिक विमर्श को एक नया आयाम देते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषण में यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि धार्मिक आस्था और चुनावी निर्णय एक ही चीज नहीं हैं। मतदाता मंदिर में श्रद्धालु हो सकता है, लेकिन मतदान केंद्र पर उसका फैसला स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार, सरकार के कामकाज, सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत अनुभवों समेत कई कारकों से प्रभावित हो सकता है।

2027 की लड़ाई में आमने-सामने होंगे दो अलग नैरेटिव

आगामी विधानसभा चुनाव की तस्वीर को मोटे तौर पर दो अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा सकता है।

एक ओर भाजपा अपने विकास, कानून-व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ा सकती है। दूसरी ओर सपा सामाजिक न्याय, पीडीए, रोजगार, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी मैदान तैयार कर सकती है।

लेकिन चुनाव का वास्तविक परिणाम इन नैरेटिव से आगे जाकर तय होगा। कौन-सा मुद्दा मतदाता को ज्यादा प्रभावित करता है, किस दल का संगठन बूथ स्तर तक प्रभावी रहता है और कौन गठबंधन या सामाजिक समीकरणों को बेहतर तरीके से साध पाता है—ये सभी निर्णायक कारक होंगे।

मथुरा से शुरू हुई हलचल का अगला पड़ाव कहां?

मथुरा से उठी चुनावी हलचल अब प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। पश्चिमी यूपी से लेकर अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी तक राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी करेंगे। भाजपा जहां सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी, वहीं विपक्ष के सामने सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की चुनौती होगी। आखिरकार 2027 की लड़ाई किसी एक मंच, नारे या धार्मिक प्रतीक से तय नहीं होगी। चुनावी मैदान में राजनीतिक दल अपने-अपने दावे रखेंगे, लेकिन अंतिम निर्णय जनता के हाथ में होगा।

मथुरा से सियासी संकेत जरूर मिल गया है। अब देखना यह है कि 2027 के चुनावी रण में भाजपा अपने विजय अभियान को आगे बढ़ा पाती है या अखिलेश यादव विपक्ष की चुनौती को सत्ता परिवर्तन की ताकत में बदल पाते हैं।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर घटा, 688 लोगों का रेस्क्यू; राहत-बचाव अभियान जारी

- 36 गांवों में 13,906 प्रभावितों तक पहुंची मदद, 28,803 लंच पैकेट और 2,065 राहत किट बांटी गईं; गाजीपुर में 12 चरवाहों समेत 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया

लखनऊ। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब तेजी से घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव अभियान जारी है। 29 अगस्त को नदी का जलस्तर 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 128 मीटर रह गया है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार बाढ़ की स्थिति में अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में बाढ़ से किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय बचाव दलों को तैनात रखा है। एनडीआरएफ के 30 और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।

- 36 गांवों में 13,906 लोग प्रभावित
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी क्षेत्र के रामघाट समेत 19 गांव, राजापुर के 7 और मानिकपुर के 10 गांव प्रभावित हुए। कुल 36 गांवों में 13,906 लोगों तक राहत पहुंचाई गई है। प्रशासन की ओर से भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था लगातार की जा रही है।

- करीब 29 हजार लंच पैकेट बांटे
बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए अब तक 28,803 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इनमें कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 पैकेट शामिल हैं।
जरूरी घरेलू सामग्री के लिए 2,065 राहत किट भी बांटी गई हैं। कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट वितरित की गईं। प्रभावित लोगों के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय सक्रिय हैं।

- मकान क्षति पर 8.72 लाख की सहायता
बाढ़ के कारण जिले में 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें 188 मामलों में प्रभावित परिवारों के खातों में 7.52 लाख रुपये की सहायता भेजी जा चुकी है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त एक मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। बाकी मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।

- 28 मेडिकल टीमें तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी और संक्रमण की आशंका को देखते हुए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और दवाओं के साथ तैनात हैं। टीमें प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए फसल क्षति का सर्वे भी कराया जा रहा है।

-  गाजीपुर में टला बड़ा हादसा, 12 चरवाहे और 2 हजार से अधिक भेड़ें बचाईं
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर फंसे 12 चरवाहों और दो हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस-प्रशासन की टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। करीब छह घंटे चले रेस्क्यू अभियान में नाइट विजन ड्रोन की मदद से पहले फंसे लोगों और पशुओं की लोकेशन चिन्हित की गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन, पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय नाविकों की संयुक्त टीम ने ददरी घाट से अभियान शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी चरवाहों और भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’, यूपी के सभी वन प्रभागों में होगा पौधरोपण

- गुरुजनों के सम्मान में लगाए जाएंगे पौधे, लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर के पास होगा विशेष आयोजन; गोरखपुर में सीएम योगी के पौधरोपण की संभावना


लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी वन प्रभागों में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया जाएगा। पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत शुरू की गई विशिष्ट वनों की श्रृंखला में इस कार्यक्रम को शामिल किया गया है। वन विभाग ने सभी प्रभागों में आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
लखनऊ में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ कार्यक्रम चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को स्मृति चिह्न के तौर पर पौधे भी दिए जाएंगे। वहीं, गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पौधरोपण करने की संभावना है।

- महर्षि चरक औषधि वन से शुरू हुई विशिष्ट वनों की पहल
वन विभाग के अनुसार, विशिष्ट वनों की श्रृंखला में महर्षि चरक औषधि वन से शुरुआत हुई थी। इसके बाद अलग-अलग विषयों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अन्य विशिष्ट वन विकसित किए गए। इसी क्रम में अब शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के सम्मान में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा के मुताबिक, प्रदेश के सभी वन प्रभागों को शिक्षक दिवस के आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के जरिए पौधरोपण के साथ शिक्षकों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
आबकारी राजस्व में यूपी ने बनाया नया रिकॉर्ड, पांच माह में जुटाए 24,795 करोड़

- पिछले साल की तुलना में 11 फीसदी बढ़ी आय, अगस्त में भी 3,933 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में राजस्व संग्रह के मामले में नया रिकॉर्ड कायम किया है। अप्रैल से अगस्त तक विभाग ने 24,795.52 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में मिले 22,337.62 करोड़ रुपये की तुलना में 2,457.90 करोड़ रुपये अधिक, यानी करीब 11 फीसदी की वृद्धि है।
अगस्त में भी आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की गई। विभाग के मुताबिक, इस महीने 3,933.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,754.43 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर अगस्त के राजस्व में 4.76 फीसदी की वृद्धि हुई है।

- पिछले वित्तीय वर्ष में भी रहा रिकॉर्ड प्रदर्शन
आबकारी विभाग का राजस्व संग्रह पिछले वित्तीय वर्ष में भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। वर्ष 2025-26 में विभाग ने कुल 57,722.26 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। यह वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्त 52,573.07 करोड़ रुपये से 5,149.19 करोड़ रुपये अधिक था। इसमें करीब 9.79 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विभाग राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया है।

- पांच माह में 49,569 मुकदमे, 7,899 गिरफ्तार
अवैध शराब के खिलाफ चलाए गए प्रवर्तन अभियान के दौरान अप्रैल से अगस्त 2026 तक 49,569 अभियोग दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान 13.83 लाख लीटर अवैध मदिरा और मादक द्रव्य बरामद किया गया। अवैध शराब के कारोबार में शामिल 7,899 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 1,327 लोगों को जेल भेजा गया। तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 50 वाहनों को भी जब्त किया गया।

- अगस्त में भी चला व्यापक अभियान
अगस्त महीने में अवैध शराब के खिलाफ विभाग की कार्रवाई और तेज रही। इस दौरान 10,479 अभियोग दर्ज किए गए और 2.48 लाख लीटर अवैध मदिरा/मादक द्रव्य बरामद किया गया। कार्रवाई में 1,639 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 228 लोगों को जेल भेजा गया। इसके अलावा अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल सात वाहन जब्त किए गए।
मंत्री नितिन अग्रवाल के मुताबिक, विभाग का लक्ष्य केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध और जहरीली शराब के निर्माण तथा कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के जरिए लोगों को इसके दुष्प्रभावों से बचाना भी है। उनका दावा है कि पिछले साढ़े चार वर्षों में अवैध और जहरीली शराब के सेवन से प्रदेश में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है।
जलभराव वाले इलाकों में युद्धस्तर पर हो जल निकासी: ए.के. शर्मा

- आशियाना के नाले का औचक निरीक्षण, नगर विकास मंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने रविवार को आशियाना स्थित नाले का औचक निरीक्षण कर शहर में जल निकासी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से जल निकासी सुनिश्चित करने और नालों-नालियों की नियमित सफाई कराने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि बारिश के कारण जलभराव से आमजन को आवागमन और दैनिक कार्यों में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारी लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करें और जहां भी जल निकासी में बाधा सामने आए, वहां तत्काल कार्रवाई करें।

- लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
ए.के. शर्मा ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जलभराव की समस्या के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह स्वयं दोबारा इन क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। यदि अगले निरीक्षण में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं मिली या लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

-  स्थायी समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश
मंत्री ने वर्षा काल में बार-बार होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही तत्काल शुरू करने को कहा। उन्होंने नालों और नालियों की सफाई के साथ जल निकासी के रास्तों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को सुचारु और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जलभराव, गंदगी और जल निकासी जैसी समस्याओं पर अधिकारी लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर बिना देरी प्रभावी कार्रवाई करें।
UPTET-2026 परिणाम पर आपत्ति अब सिर्फ ई-मेल से होगी दर्ज

- 10 सितंबर तक भेजना होगा प्रत्यावेदन, आयोग कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे

प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने UPTET-2026 के घोषित परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों के प्रत्यावेदन पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब परिणाम से संबंधित अनुतोष या आपत्ति के लिए अभ्यर्थियों को अपना प्रत्यावेदन केवल ई-मेल के माध्यम से भेजना होगा। आयोग कार्यालय में ऑफलाइन प्रत्यावेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि 26 अगस्त को घोषित UPTET-2026 के परिणाम के संबंध में प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने के इच्छुक अभ्यर्थी 10 सितंबर 2026 तक अपना आवेदन आयोग के ई-मेल पते पर भेज सकते हैं।
अभ्यर्थियों को अपना प्रत्यावेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर भेजना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 3 सितंबर से इस संबंध में कार्यालय में किसी भी प्रकार का ऑफलाइन प्रत्यावेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा का पालन करते हुए अपने प्रत्यावेदन ई-मेल के माध्यम से भेजें, ताकि प्राप्त मामलों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सके।