एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।

नेपाल बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत, 4000 से ज्यादा लोग लापता

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नेपाल में बाढ़ से आई त्रासदी में जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। अब भी 3000 से ज्यादा लोग लापता हैं। नेपाल में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है।

903 पहुंचा बाढ़ में जान गंवाने वालों का आंकड़ा

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए ताजा जानकारी के मुताबिक बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 4247 लोग लापता बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाया गया है। वहीं, घायलों की संख्या 267 है। वहीं, चीन ने अब तक 16 लोगों की मौत की ही पुष्टि की है। साथ ही 500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी भी दी है।

275 भारतीय लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद कम से कम 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 128 भारतीय मूल के लोग भी अब तक नहीं मिल पाए हैं। मंत्रालय ने बताया कि 403 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल पहुंचे थे, जबकि करीब 500 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं। अब तक 149 लोगों को बचाया जा चुका है। भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए मदद बढ़ा दी है। काठमांडू में भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम काम कर रही है। टीम डीएनए नमूनों की जांच कर पीड़ितों की पहचान करने में मदद कर रही है।

त्रिशूली नदी के उफान में झूला पुल बहा

नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी में फिर बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में एक सस्पेंशन ब्रिज यानी झूला पुल बह गया। यह पुल गंडकी प्रांत के गोरखा जिले की गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 के घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी से जोड़ता था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ करीब तीन घंटे तक रही। इस दौरान सुबह करीब साढ़े 11 बजे पुल बह गया। बाढ़ में पुल बह जाने के बाद गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-7 और 8 के लोगों का पृथ्वी राजमार्ग से संपर्क टूट गया है।

भोटेकोशी नदी में अब भी बाढ़ का खतरा बना

नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही के बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। अधिकारियों ने प्रभावित जिलों के लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। रविवार सुबह ही लोगों के मोबाइल फोन पर बाढ़ की चेतावनी भेजी गई। इस बीच बचाव दल काठमांडू को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों से जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग को साफ करने में जुटे हैं।

समुद्री मार्गों की शक्ति : विश्व के प्रमुख जलडमरूमध्यों पर संघर्ष और प्रतिस्पर्धा
--अमरेश द्विवेदी--

जलडमरूमध्य समुद्र या महासागर का वह संकीर्ण प्राकृतिक मार्ग है, जो दो बड़े जल निकायों को जोड़ता है और सामान्यतः दो भू-भागों के बीच स्थित होता है। आकार में छोटे होने के बावजूद जलडमरूमध्य का भूराजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और सामरिक महत्व अत्यधिक होता है। विश्व के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों का एक बड़ा हिस्सा कुछ महत्वपूर्ण जलडमरूमध्यों से होकर गुजरता है। तेल, प्राकृतिक गैस, खाद्यान्न, औद्योगिक कच्चा माल और निर्मित वस्तुओं के परिवहन में इनका विशेष योगदान है।
इसी कारण जलडमरूमध्य केवल भौगोलिक संरचनाएँ नहीं हैं बल्कि वे वैश्विक शक्ति-संतुलन के केंद्र भी बन गए हैं। इनके आसपास होने वाला युद्ध, राजनीतिक तनाव, समुद्री सीमा विवाद, नाकेबंदी या जहाजों पर हमले पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

1. होर्मुज़ जलडमरूमध्य: ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र
होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके आसपास ईरान और ओमान स्थित हैं तथा संयुक्त अरब अमीरात भी निकटवर्ती क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। होर्मुज़ का सबसे बड़ा महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा है। फारस की खाड़ी के तेल और गैस उत्पादक देशों से निकलने वाले बड़े पैमाने के ऊर्जा निर्यात के लिए यह प्रमुख समुद्री मार्ग है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव, ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय संघर्षों के कारण होर्मुज़ बार-बार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना है। ईरान द्वारा कभी-कभी इस मार्ग को बाधित करने की चेतावनी देना भी वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता पैदा करता है। इसलिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य का महत्व केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध भारत, चीन, जापान और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा से भी है।

2. बाब-अल-मंदेब : लाल सागर का संकट
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसके एक ओर यमन तथा दूसरी ओर अफ्रीका का जिबूती और इरिट्रिया क्षेत्र स्थित है। यह मार्ग यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से जहाज लाल सागर और स्वेज नहर की दिशा में जाते हैं। यमन के गृहयुद्ध और हूती आंदोलन के कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है। जहाजों पर हमलों और सुरक्षा जोखिमों के कारण कई वाणिज्यिक जहाजों को वैकल्पिक लंबे मार्गों का उपयोग करना पड़ा है। इसका परिणाम यह हुआ कि यूरोप-एशिया व्यापार की लागत और यात्रा समय बढ़ सकता है। इसलिए बाब-अल-मंदेब यह दिखाता है कि किसी छोटे से समुद्री चोकपॉइंट में अस्थिरता वैश्विक सप्लाई श्रृंखला को कैसे प्रभावित कर सकती है।

3. ताइवान जलडमरूमध्य : चीन और ताइवान का तनाव
ताइवान जलडमरूमध्य चीन के मुख्य भूभाग और ताइवान के बीच स्थित है। यह वर्तमान विश्व राजनीति के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में से एक है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान अपनी अलग राजनीतिक व्यवस्था के साथ स्वयं शासित है। अमेरिका ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध और सुरक्षा सहयोग बनाए रखता है। इस क्षेत्र में चीनी सैन्य अभ्यास, ताइवान की सुरक्षा और अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियाँ तनाव को बढ़ाती हैं। यदि यहां गंभीर सैन्य संघर्ष होता है, तो इसका प्रभाव केवल पूर्वी एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। ताइवान वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए ताइवान जलडमरूमध्य में संघर्ष से तकनीकी उद्योग, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

4. मलक्का जलडमरूमध्य : व्यापार और सुरक्षा
मलक्का जलडमरूमध्य मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच स्थित है। यह हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र को जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। बड़ी मात्रा में ऊर्जा और व्यापारिक वस्तुएँ इस मार्ग से होकर गुजरती हैं। मलक्का में वर्तमान में होर्मुज़ या बाब-अल-मंदेब जैसी प्रत्यक्ष युद्ध स्थिति नहीं है, लेकिन यहां समुद्री डकैती, आतंकवाद, दुर्घटनाएँ और संभावित सैन्य प्रतिस्पर्धा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ पैदा करती हैं। चीन की “मलक्का का धर्मसंकट” की अवधारणा इसी चिंता से जुड़ी है कि संकट की स्थिति में उसकी ऊर्जा आपूर्ति इस चोकपॉइंट पर निर्भर रह सकती है। इसी कारण चीन वैकल्पिक समुद्री और स्थल मार्ग विकसित करने की कोशिश करता रहा है।

5. जिब्राल्टर जलडमरूमध्य : यूरोप और अफ्रीका के बीच
जिब्राल्टर जलडमरूमध्य अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर को जोड़ता है। इसके उत्तर में स्पेन और दक्षिण में मोरक्को स्थित हैं। इसके निकट ब्रिटेन का जिब्राल्टर क्षेत्र भी स्थित है। जिब्राल्टर को लेकर ब्रिटेन और स्पेन के बीच लंबे समय से राजनीतिक विवाद रहा है। ब्रिटेन का नियंत्रण इस क्षेत्र को यूरोप की सुरक्षा और समुद्री रणनीति में महत्वपूर्ण बनाता है। यह जलडमरूमध्य यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के बीच समुद्री संपर्क का महत्वपूर्ण मार्ग है। साथ ही नाटाे और अन्य शक्तियों के लिए भी इसका सैन्य महत्व है।

6. बॉस्फोरस और डार्डानेल्स: रूस-यूक्रेन संदर्भ
तुर्की के बॉस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य काला सागर को भूमध्य क्षेत्र से जोड़ते हैं। इनके बीच मारमारा सागर स्थित है। इन जलमार्गों का महत्व रूस, यूक्रेन, तुर्की और अन्य काला सागर देशों के लिए बहुत अधिक है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के संदर्भ में इनका रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। तुर्की इन जलडमरूमध्यों पर नियंत्रण रखता है और मोंट्रो कन्वेंशन के तहत युद्धपोतों की आवाजाही के संबंध में विशेष अधिकार रखता है। इस कारण तुर्की की नीति काला सागरकी सामरिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इन जलडमरूमध्यों से अनाज, ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का व्यापार भी जुड़ा है। इसलिए इनका महत्व सैन्य के साथ-साथ आर्थिक भी है।

7. केर्च जलडमरूमध्य: रूस-यूक्रेन विवाद
केर्च जलडमरूमध्य, काला सागर और अज़ोव सागर को जोड़ता है। यह रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण बन गया है। क्रीमिया के रूस द्वारा 2014 में अधिग्रहण के बाद इस क्षेत्र की राजनीतिक और सैन्य संवेदनशीलता बढ़ गई। रूस ने केर्च ब्रिज का निर्माण करके क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की। इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का संबंध समुद्री यातायात, सैन्य गतिविधियों और यूक्रेन के बंदरगाहों तक पहुंच से जुड़ा है। इसलिए यह क्षेत्र रूस-यूक्रेन संघर्ष में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु रहा है।

8. पाल्क जलडमरूमध्य : भारत और श्रीलंका
पाल्क जलडमरूमध्य भारत और श्रीलंका के बीच स्थित है। यह क्षेत्र अपेक्षाकृत उथला है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का क्षेत्र रहा है। यहां प्रमुख समस्या सैन्य संघर्ष के बजाय मछली पकड़ने, समुद्री सीमा और मछुआरों की गिरफ्तारी से जुड़ी है। भारतीय और श्रीलंकाई मछुआरों के बीच सीमा पार करने तथा समुद्री संसाधनों के उपयोग को लेकर समय-समय पर विवाद उत्पन्न होते हैं। भारत और श्रीलंका के लिए चुनौती यह है कि स्थानीय लोगों की आजीविका और समुद्री पर्यावरण की रक्षा करते हुए सीमा संबंधी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान किया जाए।

9. लुज़ोन जलडमरूमध्य : इंडो-पैसिफिक प्रतिस्पर्धा
लुज़ोन जलडमरूमध्य ताइवान और फिलीपींस के बीच स्थित है। यह दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत के बीच रणनीतिक संपर्क प्रदान करता है। चीन, ताइवान, फिलीपींस और अमेरिका की इंडो-पैसिफिकरणनीतियों के कारण यह क्षेत्र तेजी से महत्वपूर्ण हुआ है। फिलीपींस की अमेरिका के साथ सुरक्षा साझेदारी और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां इस क्षेत्र के सामरिक महत्व को बढ़ाती हैं। भविष्य में ताइवान संकट की स्थिति में लुज़ोन जलडमरूमध्य सैन्य आवाजाही और समुद्री रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

10. बेरिंग जलडमरूमध्य : अमेरिका और रूस
बेरिंग जलडमरूमध्य अमेरिका के अलास्का और रूस के सुदूर पूर्व के बीच स्थित है। यह प्रशांत और आर्कटिक क्षेत्रों को जोड़ता है। आर्कटिक में बर्फ पिघलने और नए समुद्री मार्गों की संभावनाओं के कारण बेरिंग जलडमरूमध्य का महत्व बढ़ रहा है। अमेरिका और रूस के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में यह क्षेत्र भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
जलडमरूमध्यों में संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है। यदि किसी महत्वपूर्ण संकरे मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत बढ़ती है। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। बीमा लागत बढ़ सकती है। खाद्य और औद्योगिक वस्तुओं की कीमत प्रभावित हो सकती है। वैश्विक सप्लाई श्रृंखला में देरी हो सकती है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार और ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है।

जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों का समाधान केवल सैन्य शक्ति से नहीं किया जा सकता। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति, समुद्री सुरक्षा सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (यूएनसीएलओएस) समुद्री क्षेत्रों और नौवहन से जुड़े अनेक अधिकारों और दायित्वों का कानूनी ढांचा प्रदान करता है। देशों को समुद्री सीमा विवादों का समाधान बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से करना चाहिए। साथ ही, महत्वपूर्ण संकरे मार्ग के लिए वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग, रणनीतिक भंडार और मजबूत समुद्री सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
दुनिया के जलडमरूमध्य आकार में छोटे हो सकते हैं लेकिन उनका महत्व वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ा है। होर्मुज़ ऊर्जा सुरक्षा, बाब-अल-मंदेब वैश्विक व्यापार, ताइवान जलडमरूमध्य महाशक्ति प्रतिस्पर्धा, मलक्का व्यापारिक आपूर्ति, जिब्राल्टर यूरोप-अफ्रीका संपर्क और बॉस्फोरस-डार्डानेल्स, काला सागर भू-राजनीति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
21वीं सदी में समुद्री शक्ति और आर्थिक शक्ति का संबंध और गहरा होता जा रहा है। इसलिए जलडमरूमध्यों पर नियंत्रण, स्वतंत्र नौवहन और समुद्री सुरक्षा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे। अतः विश्व शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है कि इन रणनीतिक समुद्री मार्गों को संघर्ष के क्षेत्र के बजाय सहयोग के गलियारे के रूप में विकसित किया जाए।
(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
सितंबर मध्य में बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र, परिसीमन और मह‍िला आरक्षण पर बड़ी तैयारी

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केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार मध्य सितंबर के बाद परिसीमन व महिला आरक्षण के लिए दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मानसून सत्र में मोदी सरकार परिसीमन विधेयक पेश नहीं कर पाई थी। अब इसे लेकर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। फिलहाल सरकार दो तिहाई नंबर जुटाने पर विचार कर रही है। इसके बाद सरकार संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए दो दिन का सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।

संख्याबल जुटाने में जुटी सरकार

फिलहाल सरकार दो तिहाई नंबर जुटाने पर विचार कर रही है। इसके बाद सरकार संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए दो दिन का सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय तभी किया जाएगा, जब सरकार इन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत के प्रति आश्वस्त हो जाए। सरकार की योजना विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार के जरिये एनडीए में शामिल होने के इच्छुक दलों को साधने की है।

विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार में दो बड़े पेच

सरकार के सूत्र के मुताबिक, विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार में दो बड़े पेच हैं। सरकार चाहती है कि विस्तार से पहले एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय हो जाए और डीएमके सरकार का हिस्सा बने। दोनों ही मामलों में बातचीत अपने अंतिम दौर में है। परिसीमन के संदर्भ में सरकार ने डीएमके को पहले ही राज्यों की सीटों की संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को विधेयक के मसौदे में लिखित रूप में शामिल करने का आश्वासन दिया है। एनसीपी के दोनों धड़ों में विलय को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार बातचीत कर रहे हैं।

डीएमके को लेकर फंसा मामला

परिसीमन के सवाल पर सरकार एनसीपी-एसपी के समर्थन को लेकर आश्वस्त है। मामला डीएमके को लेकर फंसा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट और शरद पवार, अकाली दल के समर्थन के संकेत के बाद भी विशेष सत्र का रुख डीएमके ही तय करेगी, जिसके पास लोकसभा में 22 तो राज्यसभा में 8 सांसद हैं। इनके बिना सरकार विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। सूत्र के मुताबिक, डीएमके से परिसीमन ही नहीं बल्कि राजग में शामिल होने, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देने जैसे मामले पर भी बात हो रही है। डीएमके की सहमति मिलते ही विशेष सत्र के साथ कैबिनेट विस्तार की रूपरेखा भी तैयार कर ली जाएगी।

मानसून सेशन का अब तक सत्रावसान नहीं

बता दें कि अभी हाल ही में 3 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद दोनों सदनों को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। लेकिन अभी तक संसद का सत्रावसान नहीं हुआ है यानी तकनीकी रूप से अब भी मानसून सत्र चल रहा है और दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी जब भी चाहें सदन की बैठक बुला सकते हैं। सद के सत्र की समाप्ति के लिए अंग्रेजी में Prorogue शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब होता है एक पूरे सत्र की समाप्ति। यानी सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को Prorogue करने की घोषणा नहीं की है। लोकसभा अध्यक्ष ने 13 अगस्त को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल (Sine Die) तक स्थगित करने की घोषणा की थी। Sine Die का मतलब सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना होता है। ऐसे में सरकार के पास शीतकालीन सत्र का इंतजार किए बिना इसी सत्र को विशेष बैठक के लिए फिर से बुलाने का विकल्प है।

सिंधु जल संधि के लिए फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, दुनिया के सामने लगाई गुहार

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पाकिस्तान बार-बार सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगा रहा है। भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। भारत के सख्त रवैये से पाकिस्तान खून के आंसू रो रहा है। अब पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के अप्रैल 2025 के फैसले पर चिंता जताते हुए, सिंधु का पानी देने की गुहार लगाई है।

सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने पर चिंता जताई

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है। पाकिस्तान की 25 करोड़ से ज्यादा आबादी की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। इशाक डार ने यह बयान अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार में दिया।

बातचीत और सहयोग की बताई जरूरत

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए तीन-सूत्रीय तरीका बताया जिसमें 1960 की संधि को पूरी तरह से लागू करने और परमाणु हथियार रखने वाले इन पड़ोसी देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए संधि में तय तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही। सेमिनार को वर्चुअली संबोधित करते हुए डार ने कहा 'पाकिस्तान और भारत को संधि के अनुसार तकनीकी बातचीत, पारदर्शिता और डेटा साझा करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू और मजबूत करना चाहिए।'

जल संकट का दिया हवाला

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने देश के बढ़ते जल संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे ज्यादा जल-संकट वाले देशों में शामिल है। पिछले कई दशकों में देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भी बड़ी चुनौती बताया। डार ने कहा कि बारिश के बदलते पैटर्न, ग्लेशियरों के पिघलने, विनाशकारी बाढ़, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और पानी के प्रवाह में बढ़ती अनिश्चितता ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे पर ज्यादा सहयोग होना चाहिए।

अपील के साथ भारत को चेतावनी भी

इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगने के साथ भारत को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले पानी से वंचित किया गया तो इसका असर क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी को टकराव की वजह नहीं बनना चाहिए. यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन और आजीविका का आधार है। डार ने साझा जल संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल न करने की अपील की।

पहलगाम हमले के बाद संधि स्थगित

बता दें कि भारत ने अप्रैल 2025 में विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली इस संधि को अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था। इसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी थी। भारत ने साफ कर रखा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।'

नेपाल की बाढ़ में अब तक 626 लोगों की मौत, 2400 से ज्यादा लोग लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अब तक 600 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। हिमालयी इलाकों में रेस्क्यू टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, लेकिन उनके सामने एक और खतरा खड़ा है। पहाड़ों के बीच मलबे से बनी अस्थिर झीलों में पानी बढ़ रहा है, जिससे किसी भी वक्त दोबारा सैलाब आने का डर बना हुआ है।

626 लोगों की मौत की पुष्टि

नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की । रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 540 विदेशी अब भी लापता हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री हैं।

करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं

भारत के लिए भी यह आपदा बड़ी चिंता बन गई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं। 149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उनकी वापसी में मदद कर रहा है। इसके बावजूद करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

चीन ने दी चेतावनी

इधर, चीन ने एक बार फिर नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी इलाकों में बनी झील कभी भी अपने किनारों को तोड़ सकती है। हालांकि, बीजिंग ने कहा है कि अगर झील टूटती भी है, तो नदी में पानी का बहाव ज़्यादा से ज़्यादा 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड ही होगा। नेपाल को भेजे गए संदेश में चीन ने कहा कि उस झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, जो इस हफ़्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत के कुछ हिस्सों में आए भयानक अचानक बाढ़ के बाद बनी थी, इससे संकेत मिलता है कि झील कभी भी फट सकती है।

राहत कार्य के लिए नेपाल पहुंचा 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल

अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित इस टीम को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ ने 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।

पीएम मोदी उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान की यात्रा पर, बताया क्यों अहम है ये दौरा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय विदेश यात्रा के लिए शनिवार को रवाना हो गए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर होंगे। इस दौरान वह प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे और एससीओ के 26वें शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर दो दिन की द्विपक्षीय यात्रा के लिए आज ताशकंद पहुंचेंगे। वे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। आगे की राह के लिए एजेंडा तय करेंगे। वे 'विकसित भारत 2047' और ' उज्बेकिस्तान-2030' के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी अपने चर्चा करेंगे।

पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों का दौरा किया था और उसके बाद 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में शामिल होने के लिए वहां गए थे। उनका यह दौरा दो दिन का है। इसके बाद 31 अगस्त को वह किर्गिस्तान दौरे पर रहेंगे।

किर्गिस्तान दौरे का कार्यक्रम

उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बिश्केक जाएंगे। इस साल एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है और इस साल का विषय है 'एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर'। बिश्केक में होने वाले आगामी एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को स्वागत भोज और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी अपना संबोधन देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित करने की योजना है।

पीएम मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग पर मनाया रक्षाबंधन, साझा किए यादगार पल

- प्रधानमंत्री बोले- त्योहार प्रेम और आपसी मेलजोल के रिश्तों को और मजबूत करे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने रक्षाबंधन समारोह के कुछ यादगार पलों को साझा करते हुए देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का यह पावन पर्व प्रेम, स्नेह और आपसी मेलजोल के रिश्तों को और मजबूत करे। उन्होंने कामना की कि यह त्योहार सभी के जीवन में खुशियां और समृद्धि लेकर आए।
प्रधानमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों के सुख, शांति  खुशहाली की कामना की।
कांग्रेस ने पांच राज्यों में सोशल मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी

- चुनावी तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति, यूपी में प्रणव वच्छराजानी और आयुष पांडे को जिम्मा


नई दिल्ली। आगामी चुनावों की तैयारियों को धार देने के लिए कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया संगठन में नई नियुक्तियां की हैं। पार्टी के सोशल मीडिया विभाग ने पांच राज्यों में चुनावी सोशल मीडिया गतिविधियों के समन्वय के लिए राष्ट्रीय पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
उत्तर प्रदेश में प्रणव वच्छराजानी और आयुष पांडे को सोशल मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उत्तराखंड में संदीप गुप्ता और अक्षिता सिंह को यह दायित्व सौंपा गया है।
पार्टी के अनुसार नियुक्त पदाधिकारी संबंधित राज्यों में चुनाव से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियों के संचालन और समन्वय का काम देखेंगे। कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।