सितंबर मध्य में बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र, परिसीमन और मह‍िला आरक्षण पर बड़ी तैयारी

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केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार मध्य सितंबर के बाद परिसीमन व महिला आरक्षण के लिए दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मानसून सत्र में मोदी सरकार परिसीमन विधेयक पेश नहीं कर पाई थी। अब इसे लेकर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। फिलहाल सरकार दो तिहाई नंबर जुटाने पर विचार कर रही है। इसके बाद सरकार संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए दो दिन का सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।

संख्याबल जुटाने में जुटी सरकार

फिलहाल सरकार दो तिहाई नंबर जुटाने पर विचार कर रही है। इसके बाद सरकार संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए दो दिन का सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय तभी किया जाएगा, जब सरकार इन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत के प्रति आश्वस्त हो जाए। सरकार की योजना विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार के जरिये एनडीए में शामिल होने के इच्छुक दलों को साधने की है।

विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार में दो बड़े पेच

सरकार के सूत्र के मुताबिक, विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार में दो बड़े पेच हैं। सरकार चाहती है कि विस्तार से पहले एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय हो जाए और डीएमके सरकार का हिस्सा बने। दोनों ही मामलों में बातचीत अपने अंतिम दौर में है। परिसीमन के संदर्भ में सरकार ने डीएमके को पहले ही राज्यों की सीटों की संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को विधेयक के मसौदे में लिखित रूप में शामिल करने का आश्वासन दिया है। एनसीपी के दोनों धड़ों में विलय को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लगातार बातचीत कर रहे हैं।

डीएमके को लेकर फंसा मामला

परिसीमन के सवाल पर सरकार एनसीपी-एसपी के समर्थन को लेकर आश्वस्त है। मामला डीएमके को लेकर फंसा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट और शरद पवार, अकाली दल के समर्थन के संकेत के बाद भी विशेष सत्र का रुख डीएमके ही तय करेगी, जिसके पास लोकसभा में 22 तो राज्यसभा में 8 सांसद हैं। इनके बिना सरकार विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी। सूत्र के मुताबिक, डीएमके से परिसीमन ही नहीं बल्कि राजग में शामिल होने, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देने जैसे मामले पर भी बात हो रही है। डीएमके की सहमति मिलते ही विशेष सत्र के साथ कैबिनेट विस्तार की रूपरेखा भी तैयार कर ली जाएगी।

मानसून सेशन का अब तक सत्रावसान नहीं

बता दें कि अभी हाल ही में 3 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद दोनों सदनों को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। लेकिन अभी तक संसद का सत्रावसान नहीं हुआ है यानी तकनीकी रूप से अब भी मानसून सत्र चल रहा है और दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी जब भी चाहें सदन की बैठक बुला सकते हैं। सद के सत्र की समाप्ति के लिए अंग्रेजी में Prorogue शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब होता है एक पूरे सत्र की समाप्ति। यानी सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को Prorogue करने की घोषणा नहीं की है। लोकसभा अध्यक्ष ने 13 अगस्त को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल (Sine Die) तक स्थगित करने की घोषणा की थी। Sine Die का मतलब सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना होता है। ऐसे में सरकार के पास शीतकालीन सत्र का इंतजार किए बिना इसी सत्र को विशेष बैठक के लिए फिर से बुलाने का विकल्प है।

सिंधु जल संधि के लिए फिर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, दुनिया के सामने लगाई गुहार

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पाकिस्तान बार-बार सिंधु जल संधि बहाल करने की गुहार लगा रहा है। भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। भारत के सख्त रवैये से पाकिस्तान खून के आंसू रो रहा है। अब पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के अप्रैल 2025 के फैसले पर चिंता जताते हुए, सिंधु का पानी देने की गुहार लगाई है।

सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने पर चिंता जताई

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है। पाकिस्तान की 25 करोड़ से ज्यादा आबादी की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। इशाक डार ने यह बयान अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार में दिया।

बातचीत और सहयोग की बताई जरूरत

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए तीन-सूत्रीय तरीका बताया जिसमें 1960 की संधि को पूरी तरह से लागू करने और परमाणु हथियार रखने वाले इन पड़ोसी देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए संधि में तय तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही। सेमिनार को वर्चुअली संबोधित करते हुए डार ने कहा 'पाकिस्तान और भारत को संधि के अनुसार तकनीकी बातचीत, पारदर्शिता और डेटा साझा करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू और मजबूत करना चाहिए।'

जल संकट का दिया हवाला

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने देश के बढ़ते जल संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे ज्यादा जल-संकट वाले देशों में शामिल है। पिछले कई दशकों में देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भी बड़ी चुनौती बताया। डार ने कहा कि बारिश के बदलते पैटर्न, ग्लेशियरों के पिघलने, विनाशकारी बाढ़, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और पानी के प्रवाह में बढ़ती अनिश्चितता ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे पर ज्यादा सहयोग होना चाहिए।

अपील के साथ भारत को चेतावनी भी

इशाक डार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगने के साथ भारत को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले पानी से वंचित किया गया तो इसका असर क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी को टकराव की वजह नहीं बनना चाहिए. यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन और आजीविका का आधार है। डार ने साझा जल संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल न करने की अपील की।

पहलगाम हमले के बाद संधि स्थगित

बता दें कि भारत ने अप्रैल 2025 में विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली इस संधि को अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था। इसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी थी। भारत ने साफ कर रखा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।'

नेपाल की बाढ़ में अब तक 626 लोगों की मौत, 2400 से ज्यादा लोग लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अब तक 600 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। हिमालयी इलाकों में रेस्क्यू टीमें मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, लेकिन उनके सामने एक और खतरा खड़ा है। पहाड़ों के बीच मलबे से बनी अस्थिर झीलों में पानी बढ़ रहा है, जिससे किसी भी वक्त दोबारा सैलाब आने का डर बना हुआ है।

626 लोगों की मौत की पुष्टि

नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की । रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 540 विदेशी अब भी लापता हैं। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री हैं।

करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं

भारत के लिए भी यह आपदा बड़ी चिंता बन गई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग और त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारी शामिल हैं। 149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उनकी वापसी में मदद कर रहा है। इसके बावजूद करीब 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

चीन ने दी चेतावनी

इधर, चीन ने एक बार फिर नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी इलाकों में बनी झील कभी भी अपने किनारों को तोड़ सकती है। हालांकि, बीजिंग ने कहा है कि अगर झील टूटती भी है, तो नदी में पानी का बहाव ज़्यादा से ज़्यादा 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड ही होगा। नेपाल को भेजे गए संदेश में चीन ने कहा कि उस झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, जो इस हफ़्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत के कुछ हिस्सों में आए भयानक अचानक बाढ़ के बाद बनी थी, इससे संकेत मिलता है कि झील कभी भी फट सकती है।

राहत कार्य के लिए नेपाल पहुंचा 11 सदस्यीय भारतीय बचाव दल

अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित इस टीम को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ ने 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।

पीएम मोदी उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान की यात्रा पर, बताया क्यों अहम है ये दौरा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय विदेश यात्रा के लिए शनिवार को रवाना हो गए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर होंगे। इस दौरान वह प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे और एससीओ के 26वें शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर दो दिन की द्विपक्षीय यात्रा के लिए आज ताशकंद पहुंचेंगे। वे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। आगे की राह के लिए एजेंडा तय करेंगे। वे 'विकसित भारत 2047' और ' उज्बेकिस्तान-2030' के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी अपने चर्चा करेंगे।

पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों का दौरा किया था और उसके बाद 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में शामिल होने के लिए वहां गए थे। उनका यह दौरा दो दिन का है। इसके बाद 31 अगस्त को वह किर्गिस्तान दौरे पर रहेंगे।

किर्गिस्तान दौरे का कार्यक्रम

उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बिश्केक जाएंगे। इस साल एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है और इस साल का विषय है 'एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर'। बिश्केक में होने वाले आगामी एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को स्वागत भोज और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी अपना संबोधन देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित करने की योजना है।

पीएम मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग पर मनाया रक्षाबंधन, साझा किए यादगार पल

- प्रधानमंत्री बोले- त्योहार प्रेम और आपसी मेलजोल के रिश्तों को और मजबूत करे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने रक्षाबंधन समारोह के कुछ यादगार पलों को साझा करते हुए देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन का यह पावन पर्व प्रेम, स्नेह और आपसी मेलजोल के रिश्तों को और मजबूत करे। उन्होंने कामना की कि यह त्योहार सभी के जीवन में खुशियां और समृद्धि लेकर आए।
प्रधानमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों के सुख, शांति  खुशहाली की कामना की।
कांग्रेस ने पांच राज्यों में सोशल मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी

- चुनावी तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति, यूपी में प्रणव वच्छराजानी और आयुष पांडे को जिम्मा


नई दिल्ली। आगामी चुनावों की तैयारियों को धार देने के लिए कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया संगठन में नई नियुक्तियां की हैं। पार्टी के सोशल मीडिया विभाग ने पांच राज्यों में चुनावी सोशल मीडिया गतिविधियों के समन्वय के लिए राष्ट्रीय पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
उत्तर प्रदेश में प्रणव वच्छराजानी और आयुष पांडे को सोशल मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उत्तराखंड में संदीप गुप्ता और अक्षिता सिंह को यह दायित्व सौंपा गया है।
पार्टी के अनुसार नियुक्त पदाधिकारी संबंधित राज्यों में चुनाव से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियों के संचालन और समन्वय का काम देखेंगे। कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
आईपीएस रोबिन हिबू ने कैलाश मासूम को बनाया हैल्पिंग हैंड्स के कोर कमेटी का सदस्य
नई दिल्ली। अरुणांचल प्रदेश के प्रथम आईपीएस अधिकारी, दिल्ली के डीजीपी और स्पेशल पुलिस कमिश्नर रोबिन हिबू ने समाजसेवी और फ़िल्मकार कैलाश मासूम को हैल्पिंग हैंड्स एनजीओ का कोर सदस्य नियुक्त किया है!
रोबिन हिबू की हैल्पिंग हैंड्स संस्था अरुणांचल के पहाड़ों में रहने वाले गरीब, एवं अनाथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके विकास के लिए काम करती है. साथ ही लावारिश लाशों का अपने खर्चे से दाह संस्कार करती है. कैलाश मासूम इस संस्था के साथ काफ़ी समय से जुड़े हुए हैं और इस संस्था की हर संभव मदद करते हैं! हाल ही में कैलाश मासूम के द्वारा उद्योगपति संजय सिन्हा की आर्थिक मदद से भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की साढ़े 6 फिट की प्रतिमा रोबिन हिबू की संस्था को भेंट की गई। लगभग 10 लाख रुपये की लागत से ब्रोंज (कांस्य) की बनी यह प्रतिमा दिवाली के आस पास जीरो अरुणांचल के होंग विलेज में जय हिन्द चौक पर लगने वाली है जो चायना बॉर्डर पर है!
जस्टिस एसपी शर्मा कौन हैं, क्यों हटाने की मांग, जानें क्या बोले-CJI सूर्य कांत?

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राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर उठे सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत से राजस्थान हाई कोर्ट में तत्काल किसी दूसरे राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं, मामलों की सेलेक्टिव लिस्टिंग और प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने लगाए गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत को तीन अलग-अलग चिट्ठियां लिखकर जस्टिस शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से लेकर केस लिस्टिंग में हेरफेर तक के आरोप हैं। जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को लिखी चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा के कामकाज को लेकर कई चिंताएं जताईं। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों ने उनसे मुलाकात के दौरान जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की थी। आरोपों में साथी जजों को ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की कथित धमकी देने और सीजेआई से करीबी का दावा करने जैसी बातें भी शामिल हैं। एक शिकायत में हाईकोर्ट में नियुक्तियों और केस लिस्टिंग से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने चिंताओं पर ध्यान दिया है। पद पर मौजूद जज के खिलाफ ऐसे आरोपों से “स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता है।

कौन हैं चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा

जस्टिस शर्मा नवंबर 2016 में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस बने थे। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना हाई कोर्ट किया गया। राजस्थान वापसी का उनका अनुरोध मार्च 2023 में कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट भेजा गया। बाद में मई 2025 में कॉलेजियम ने उनकी राजस्थान वापसी की सिफारिश की। सितंबर 2025 से न्यायमूर्ति शर्मा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। वह सितंबर 2025 से इस पद पर हैं और अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

नेपाल में जल प्रलय से हाहाकार, 150 से ज़्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लापता

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है। के बाद बचाव और तलाश का काम जारी है। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में बुधवार सुबह आई बाढ़ और भूस्खलन से पानी का स्तर 30 फीट तक बढ़ गया और यह रास्ते के आस-पास पड़ने वाली बस्तियों, पनबिजली इकाइयों और रास्तों को बहा ले गया। अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत से आए कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

579 लोगों का अब तक लापता

नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 157 शव बरामद किए जा चुके हैं। इस बाढ़ में सुरक्षाकर्मियों व विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। नेपाल पुलिस ने बताया कि 579 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 28 देशों के 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं। लापता लोगों में कम से कम 133 भारतीय हैं। 33 लोगों के शव घटना स्थल से 150 किमी दूर चितवन में मिले, जिससे मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका है।

1993 से भी बड़ी तबाही के अनुमान

यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है। बुधवार की बाढ़ ने कई पनबिजली परियोजनाओं और वाणिज्यिक बैंकों को तबाह कर दिया है। नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, बाढ़ में कई पुल और क़रीब 40 किलोमीटर हाइवे बह गए हैं। निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए कुल नुक़सान का अभी तक कोई आकलन नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि यह 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ से भी ज़्यादा विनाशकारी हो सकती है, जिसमें 1,400 लोगों की मौत हुई थी और जिसे लंबे समय से देश की सबसे बड़ी आपदा माना जाता रहा है।

भारत ने नेपाल भेजी राहत सामग्री की पहली खेप

भारत ने नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत कार्यों के लिए 10 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी है। बुधवार रात सैन्य परिवहन विमान के जरिये नेपाल को राहत सामग्री की पहली खेप भेजी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बातचीत करने के कुछ घंटे बाद राहत सामग्री भेजी गई। मोदी ने शाह को स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर कहा, “इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने बहन-भाइयों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने संवेदना जताई

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख जताया है। बाढ़ में कई लोगों की मौत हुई है। कई लोग लापता हैं। बड़े स्तर पर नुकसान भी हुआ है। गुटेरेस ने 'एक्स' पर लिखा कि वह बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हैं। उन्होंने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। गुटेरेस ने कहा कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार की अगुवाई में चल रहे राहत अभियान में मदद कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े संगठन बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान और कर्मचारियों को जुटा रहे हैं।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग : 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम

अमरेश द्विवेदीसोमनाथ मन्दिर दक्षिण एशिया स्थित भारत के पश्चिमी छोर पर गुजरात प्रदेश में स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक शिव मन्दिर  है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बन्दरगाह स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था।
यह मन्दिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यन्त वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरम्भ भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार पटेल ने करवाया और पहली दिसम्बर 1955 को भारत के राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहाँ श्राद्ध करने का विशेष महत्त्व बताया गया है। इसके अलावा यहाँ तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्त्व है।- सोम-गंगा जल : पवित्र प्रसाद का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण
श्री सोमनाथ ट्रस्ट की सोम-गंगा जल पहल, भक्ति परंपरा, पर्यावरण की ज़िम्मेदारी और पवित्र संसाधनों के मैनेजमेंट का एक अनोखा मेल दिखाती है। अक्टूबर 2022 में शुरू की गई यह पहल इस सिद्धांत पर आधारित है कि भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले हर प्रसाद का बहुत सम्मान किया जाना चाहिए और उसे कभी भी बिना सम्मान के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
भारत के प्रधानमंत्री और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, यह पहल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ वैज्ञानिक शुद्धिकरण तरीकों को जोड़ते हुए शिव निर्माल्य की पवित्रता को बनाए रखने की एक सोची-समझी कोशिश है।
सोमनाथ में रोज़ाना पूजा के हिस्से के तौर पर, भक्त शिवलिंग के अभिषेक के दौरान पानी, दूध, शहद, दही, घी, पंचामृत और दूसरी खुशबूदार चीज़ें चढ़ाते हैं। पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, पवित्र निर्माल्य पर पहला हक चंद्रदेव का होता है, जिनकी मूर्ति मंदिर परिसर में स्थापित है। उसके बाद, बचे हुए पवित्र तरल पदार्थों को व्यवस्थित रूप से इकट्ठा किया जाता है और देखभाल और सम्मान के साथ प्रोसेस किया जाता है। साफ़-सफ़ाई और टिकाऊ तरीके से दोबारा इस्तेमाल पक्का करने के लिए, ट्रस्ट ने हर दिन 500 लीटर की कैपेसिटी वाला एक एडवांस्ड एफ्लुएंट फ़िल्ट्रेशन सिस्टम लगाया है। प्यूरिफ़िकेशन प्रोसेस में नौ-लेयर वाला फ़िल्ट्रेशन सिस्टम इस्तेमाल होता है, जिसे चढ़ावे की पवित्रता बनाए रखते हुए गंदगी हटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। फिर, साफ़ किया गया पवित्र पानी भक्तों को “सोम-गंगा जल” के तौर पर 15 रूपये प्रति बोतल की मामूली कीमत पर दिया जाता है।
ट्रस्ट के पर्यावरण के लिए वादे को ध्यान में रखते हुए, सोम-गंगा जल खास तौर पर 100 परसेंट प्लास्टिक-फ़्री कांच और मेटल के कंटेनर में बांटा जाता है। यह पहल पूरी तरह से नॉन-प्रॉफ़िट बेसिस पर चलती है, जिसमें कमर्शियल एक्टिविटी के बजाय सेवा और पवित्र देखरेख पर ज़ोर दिया जाता है।
जनवरी 2026 तक, 1,67,000 से ज़्यादा परिवारों को इस पहल से फ़ायदा हुआ था, जो इसकी बड़े पैमाने पर भक्ति और सांस्कृतिक स्वीकृति को दिखाता है। सोम-गंगा जल का आध्यात्मिक महत्व तब और पता चला जब प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव से पहले अयोध्या में श्री राम मंदिर के पवित्रीकरण के कामों में श्री सोमनाथ मंदिर के पानी का इस्तेमाल किया गया।
सोम-गंगा जल पहल के ज़रिए, श्री सोमनाथ ट्रस्ट दिखाता है कि सोच-समझकर किए गए नए कामों और इकोलॉजिकल सेंसिटिविटी के ज़रिए पवित्र परंपराओं को कैसे बचाया जा सकता है। पूजा-पाठ को सम्मान के साथ लगातार आध्यात्मिक जुड़ाव के ज़रिए बदलकर, सोमनाथ भारत की सभ्यता के आदर, स्थिरता और सामूहिक विश्वास के मूल्यों को बनाए रखता है।- बिल्व वन: पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण
पारंपरिक भारतीय समझ कि प्रकृति खुद दिव्य है, पर आधारित, श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बिल्व वन पहल एक ऐसे मॉडल के तौर पर सामने आई है जिसके ज़रिए इकोलॉजिकल संरक्षण को सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक निरंतरता से अलग नहीं किया जा सकता।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े विज़न को दिखाती है, जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट, महिलाओं के नेतृत्व में सशक्तिकरण, भारत की पवित्र परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने पर केंद्रित है।
शैव परंपराओं में बिल्व के पेड़ का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है, क्योंकि इसे भगवान शिव के लिए पवित्र माना जाता है। इस आध्यात्मिक और इकोलॉजिकल महत्व को पहचानते हुए, श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने बिल्व वन पहल को सिर्फ़ एक प्लांटेशन प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं, बल्कि एक पवित्र पर्यावरण प्रोग्राम के तौर पर विकसित किया है जो संरक्षण को रोज़ी-रोटी कमाने के साथ जोड़ता है।
श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा 2001 और 2016 के बीच लगाए गए बिल्व वन अब पाँच जगहों पर फैले हुए हैं और इनमें लगभग 2,800 बिल्व के पेड़ हैं। यह पहल मंदिर के रीति-रिवाजों के लिए ज़रूरी बिल्व पत्तों की लगातार उपलब्धता और आत्मनिर्भरता पक्का करती है, सोमनाथ मंदिर में रोज़ाना लगभग 10,000 बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं।
सैकड़ों स्थानीय महिलाएं प्लांटेशन केयर, सिंचाई मैनेजमेंट, ऑर्गेनिक मेंटेनेंस और बचाव के कामों के ज़रिए बिल्व वन को बनाए रखने में एक्टिव रूप से लगी हुई हैं। ये ज़िम्मेदारियां लंबे समय तक नौकरी के मौके देती हैं और साथ ही एनवायरनमेंट मैनेजमेंट में महिलाओं की भागीदारी को भी मज़बूत करती हैं। - पवित्र ध्वजा परंपरा: महिला कारीगरों की विरासत
सोमनाथ में पवित्र ध्वजा परंपरा, पीढ़ी दर पीढ़ी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली रस्मी विरासत के सबसे स्थायी उदाहरणों में से एक है। सोमनाथ मंदिर के ऊपर चढ़ाया जाने वाला पारंपरिक झंडा सिर्फ़ एक रस्म की चीज़ नहीं है, बल्कि भक्ति, निरंतरता और पवित्र सेवा में सामूहिक भागीदारी का एक गहरा प्रतीक है। यह परंपरा एक ही समय में एक स्थायी आजीविका पहल के रूप में उभरी है जिसने तीन पीढ़ियों की महिला कारीगरों को सशक्त बनाया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रेरणा से प्रेरित, यह पहल महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास, भारत की पवित्र विरासत के संरक्षण और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी आजीविका के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
2016 और 2026 के बीच, सोमनाथ मंदिर में 16,300 से ज़्यादा ध्वजाएँ चढ़ाई गई हैं। हर झंडा आध्यात्मिक श्रद्धा को दर्शाता है, साथ ही स्थानीय महिला कारीगरों की कुशल कारीगरी को भी दर्शाता है, जिन्होंने बारीकी से हाथ के काम और विरासत में मिले ज्ञान सिस्टम के ज़रिए इस पवित्र परंपरा को बनाए रखा है। इस पहल से लगभग ₹ 80,99,650 की इनकम हुई है, जिससे इस काम में लगी महिलाओं के घर में स्थिरता, आर्थिक आज़ादी और समाज की तरक्की में सीधा योगदान मिला है। महिलाओं की इस पहल का दायरा मुख्य सोमनाथ मंदिर से आगे तक फैला हुआ है। ट्रस्ट से जुड़ी महिला कारीगरों ने सोमनाथ इलाके के दूसरे पवित्र मंदिरों के लिए भी ध्वजाएँ तैयार की हैं, जिसमें भालका मंदिर के लिए 695 ध्वजाएँ, अहिल्याबाई मंदिर के लिए 780 ध्वजाएँ और दूसरे जुड़े हुए मंदिरों के लिए 1,247 ध्वजाएँ शामिल हैं। रीति-रिवाजों के प्रोडक्शन के इस बढ़ते नेटवर्क ने सोमनाथ के बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी को मज़बूत किया है।
ध्वजा परंपरा के ज़रिए, सोमनाथ दिखाता है कि कैसे पवित्र संस्थाएं न सिर्फ़ आस्था की, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाले सामाजिक-आर्थिक विकास की भी रखवाली कर सकती हैं। यह पहल इस बात का एक मज़बूत उदाहरण है कि कैसे रीति-रिवाज़ों की निरंतरता, महिलाओं की कारीगरी, और समुदाय का सशक्तिकरण एक जीवंत मंदिर परंपरा के अंदर एक साथ रह सकते हैं जो आज के समाज के लिए बहुत ज़रूरी है।
- पाघ पूजन: भक्ति से सामाजिक सेवा तक
सोमनाथ में, भगवान शिव को पाघ चढ़ाने की पवित्र परंपरा महिलाओं के नेतृत्व वाले सामाजिक सशक्तिकरण का एक शानदार मॉडल बन गई है - जो भक्ति, सम्मान और सांस्कृतिक निरंतरता पर आधारित है। श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा 2022 में सोचा गया और 2023 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया, पाघ पूजन पहल दिखाती है कि कैसे रीति-रिवाज अपनी आध्यात्मिक पवित्रता को बनाए रखते हुए सामाजिक बदलाव का ज़रिया बन सकते हैं।
पाघ पूजन पहल प्रधानमंत्री और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन, नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में फली-फूली है, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास, भारत की पवित्र परंपराओं के संरक्षण और समावेशी सामाजिक कल्याण के प्रति उनके कमिटमेंट को दिखाती है।
हर दिन दोपहर में, भगवान सोमनाथ को एक खास तौर पर डिज़ाइन किया गया पाघ औपचारिक रूप से चढ़ाया जाता है। पाघ को 21 (इक्कीस) बारीकी से डिज़ाइन किए गए पीतांबरों से बनाया जाता है, जिन्हें देवता के साइज़ और रीति-रिवाजों के हिसाब से सावधानी से स्टैंडर्ड बनाया जाता है। पवित्र अर्पण पूरा होने के बाद, पाघ को सम्मान के साथ खोला जाता है और पवित्र कपड़े को ट्रस्ट द्वारा ट्रेंड और सपोर्टेड लोकल महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप को सौंप दिया जाता है। ये महिलाएं पीतांबर को कुर्ते और कपड़ों के रूप में वस्त्र प्रसाद में बदलने का नाजुक प्रोसेस करती हैं, जिससे एक रस्म का अर्पण इंसानियत की सेवा का एक ज़रिया बन जाता है।
इस पहल ने एक अनोखा पवित्र चक्र बनाया है जिसमें देवता को चढ़ाया गया अर्पण महादेव के प्रसाद के रूप में समाज में वापस आता है। ये कपड़े ज़रूरतमंद समुदायों, आदिवासी आबादी और वृद्धाश्रम में रहने वालों के बीच मुफ़्त में बांटे जाते हैं। अकेले 2024 में, 14 (चौदह) ज़िलों में 10,111 आदिवासी लाभार्थियों को वस्त्र प्रसाद मिला, जबकि 2023 में वृद्धाश्रम (वृद्धाश्रम) में रहने वाले 7,500 से ज़्यादा बुज़ुर्गों को इस पहल से फ़ायदा हुआ। इस प्रोसेस के ज़रिए, पवित्र सामग्री सामाजिक जुड़ाव, दया और कम्युनिटी की भलाई का ज़रिया बन जाती है।अपनी भक्ति से जुड़ी अहमियत के अलावा, यह पहल लोकल महिलाओं के लिए आर्थिक मज़बूती का एक अच्छा ज़रिया बनकर उभरी है। - नि:शुल्क भोजनालय: सेवा और करुणा की परंपरा
श्री सोमनाथ ट्रस्ट का बनाया निशुल्क भोजनालय, अन्न-दान की पवित्र सेवा और सबकी भलाई के तौर पर भारत की पुरानी परंपरा को दिखाता है। 2022 में अहिल्याबाई मंदिर के पास और राम मंदिर परिसर में शुरू हुए इस भोजनालय की सोच एक ऐसी जगह के तौर पर थी जहाँ हर भक्त को इज्ज़त, भक्ति और देखभाल के साथ अच्छा खाना मिल सके।
भारत के प्रधानमंत्री और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन, नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित, यह पहल ट्रस्ट के आध्यात्मिक सेवा को सामाजिक ज़िम्मेदारी के साथ जोड़ने के वादे को दिखाती है। इस सोच पर आधारित कि इंसानियत की सेवा खुद भगवान को अर्पण है, भोजनालय सोमनाथ तीर्थयात्रा इकोसिस्टम में समाज के सपोर्ट का एक ज़रूरी हिस्सा बनकर उभरा है।
हर दिन, भक्ति से तैयार किया गया साफ़-सुथरा और पौष्टिक खाना सोमनाथ आने वाले 7,000 से ज़्यादा भक्तों को मुफ़्त में परोसा जाता है। तीर्थयात्रियों की सेवा के अलावा, यह पहल पास के सिविल हॉस्पिटल में भर्ती मरीज़ों की देखभाल करने वालों को एक खास फ्री टिफिन बांटने की सर्विस के ज़रिए दया की भावना से मदद भी देती है। यह मदद ट्रस्ट के बड़े इंसानी नज़रिए को दिखाती है, जो यह पक्का करता है कि शारीरिक, इमोशनल और पैसे की मुश्किल के समय लोगों तक मदद पहुंचे।
नवंबर 2021 और जनवरी 2026 के बीच, निशुल्क भोजनालय ने 50,94,777 से ज़्यादा लोगों को खाना परोसा, जिसका कुल खर्च ₹17 करोड़ से ज़्यादा था। ये आंकड़े न सिर्फ़ प्रोग्राम के बड़े लेवल को दिखाते हैं, बल्कि इसे बनाए रखने वाली बिना स्वार्थ की सेवा की भावना को भी दिखाते हैं।- श्री सोमनाथ गौशाला: परंपरा और वैज्ञानिक प्रबंधन का संगम
श्री सोमनाथ गौशाला, गौ सेवा की सनातन परंपरा का जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ गाय को सिर्फ़ एक जानवर के तौर पर नहीं, बल्कि पालन-पोषण, इकोलॉजिकल बैलेंस और पवित्र निरंतरता के प्रतीक के तौर पर पूजा जाता है। गौ माता को 33 कोटि देवताओं का धरती पर निवास और वैदिक रीति-रिवाजों की एक ज़रूरी नींव के तौर पर समझने वाली यह गौशाला, श्री सोमनाथ ट्रस्ट के आध्यात्मिक मूल्यों और देसी मवेशियों की विरासत, दोनों को बचाने के कमिटमेंट को दिखाती है।
गौशाला गिर नस्ल के बचाव पर खास ज़ोर देती है, जिसे भारत के सबसे कीमती देसी मवेशियों के खानदान में से एक माना जाता है और ब्राज़ील जैसे देशों में "व्हाइट रेवोल्यूशन" में योगदान के लिए इंटरनेशनल लेवल पर पहचान मिली है। ट्रस्ट आने वाली पीढ़ियों के लिए नस्ल की जेनेटिक शुद्धता और मज़बूती बनाए रखने के लिए बारह अलग-अलग शारीरिक लक्षणों के आधार पर सिस्टमैटिक साइंटिफिक इवैल्यूएशन करता है।
ट्रस्ट ने 2013 में अपनी पहली गौशाला शुरू की, उसके बाद 2016 में दूसरा शेल्टर बनाया। कुल मिलाकर, ये सुविधाएँ अभी लगभग 300 मवेशियों को पर्सनलाइज़्ड देखभाल देती हैं। खास इंफ्रास्ट्रक्चर में गायों, बछड़ों और सांडों के लिए अलग शेड, बीमार जानवरों के लिए क्वारंटाइन सुविधाएँ और बूढ़े मवेशियों के लिए खास शेल्टर शामिल हैं, जिससे जानवरों की दयालु और व्यवस्थित देखभाल पक्की होती है।- यज्ञ परंपरा का पुनर्जीवन और महिला भागीदारी
श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने पारंपरिक यज्ञ परंपरा को फिर से ज़िंदा करने के लिए एक अनोखी पहल की है, साथ ही इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी और महिलाओं के नेतृत्व वाली कम्युनिटी एम्पावरमेंट को बढ़ावा दिया है। दिसंबर 2022 में शुरू की गई लघु यज्ञ किट पहल को छोटे पैमाने के यज्ञों को भक्तों के लिए ज़्यादा आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, साथ ही मंदिर के पवित्र चढ़ावे का सम्मानजनक दोबारा इस्तेमाल भी पक्का किया गया था।
इस पहल के तहत, भगवान सोमनाथ को चढ़ाए गए फूलों और बिल्व पत्र को ध्यान से इकट्ठा किया जाता है, सुखाया जाता है और लघु यज्ञ किट तैयार करने के लिए इक्कीस पवित्र चीज़ों के साथ मिलाया जाता है। किट में गिर गायों के गोबर से बने गौमय दीपक भी शामिल हैं, जो इकोलॉजिकल तालमेल और रीति-रिवाजों की पवित्रता पर आधारित पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों को दिखाते हैं। इस प्रोसेस के ज़रिए, बायोडिग्रेडेबल मंदिर के चढ़ावे को कचरे के रूप में फेंकने के बजाय पवित्र रीति-रिवाजों की चीज़ों में बदल दिया जाता है। इन किट को महिलाओं के नेतृत्व वाली सखी मंडलें तैयार करती हैं, जिससे स्किल डेवलपमेंट, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन के लिए अच्छे मौके मिलते हैं। भारत के प्रधानमंत्री और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन, श्री नरेंद्र मोदी के विज़न से गाइडेड, यह पहल मंदिर के इकोसिस्टम में कल्चरल प्रोटेक्शन, एनवायरनमेंटल ज़िम्मेदारी और लोकल एम्पावरमेंट को जोड़ने की एक बड़ी कोशिश को दिखाती है।दिसंबर 2022 में इसके शुरू होने के बाद से, कुल 13,476 लघु यज्ञ किट तैयार किए गए हैं, जिनमें से 4,217 किट भक्तों और कम्युनिटीज़ के बीच मुफ़्त में बांटे गए हैं। इस पहल से लोकल महिला सेल्फ़-हेल्प ग्रुप्स के लिए लगभग ₹4.2 लाख की इनकम हुई है, जिससे पारंपरिक रीति-रिवाजों को बचाते हुए रोज़ी-रोटी के मौके मज़बूत हुए हैं।- प्लास्टिक कचरे से पेवर ब्लॉक: पर्यावरण और रोजगार का मॉडल
श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने एक नई और समाज को बदलने वाली पहल शुरू की है। इसमें प्लास्टिक वेस्ट से पेवर ब्लॉक बनाकर एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर वेस्ट मैनेजमेंट और महिलाओं की लीडरशिप में आर्थिक मज़बूती को शामिल किया गया है। अपने सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर, ट्रस्ट ने इस्तेमाल के बाद के प्लास्टिक वेस्ट को सड़कों और फुटपाथ बनाने में इस्तेमाल होने वाले टिकाऊ M-50 ग्रेड के पेवर ब्लॉक में बदलने का एक सिस्टम बनाया है। यह पहल मॉडर्न शहरी समाज की सबसे बड़ी एनवायरनमेंटल चुनौतियों में से एक - प्लास्टिक डिस्पोज़ल - को हल करती है, साथ ही स्थानीय महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप के लिए रोज़ी-रोटी के मौके भी पैदा करती है।- वैज्ञानिक वेस्ट मैनेजमेंट और पवित्र इकोलॉजी
श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने एक बड़ा इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है जो पर्यावरण की ज़िम्मेदारी, साइंटिफिक वेस्ट प्रोसेसिंग और पवित्र इकोलॉजिकल चेतना का एक अच्छा मेल दिखाता है। सस्टेनेबल मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन के बड़े नज़रिए पर आधारित, यह पहल दिखाती है कि कैसे पारंपरिक तीर्थस्थल पूजा-पाठ और पब्लिक जगहों की पवित्रता को बनाए रखते हुए मॉडर्न पर्यावरण के तरीकों को अपना सकते हैं।
2019 में शुरू हुआ यह वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम सोमनाथ में बढ़ती तीर्थयात्रा गतिविधियों से जुड़ी पर्यावरण की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। साइंटिफिक वेस्ट प्रोसेसिंग और सस्टेनेबल रिसोर्स मैनेजमेंट के महत्व को पहचानते हुए, इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार की PRASAD स्कीम के तहत मदद मिली। यह पहल तब से पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार मंदिर गवर्नेंस के एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में उभरी है।- संस्कृत शिक्षा और आधुनिक तकनीक का संगम
सोमनाथ का जीर्णोद्धार हमेशा एक पवित्र मंदिर के फिर से बनने से कहीं ज़्यादा रहा है। यह भारत की सभ्यता की चेतना, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक विरासत के फिर से शुरू होने का प्रतीक है। श्री सोमनाथ ट्रस्ट के बुनियादी आदर्शों में सबसे ज़रूरी ज़िम्मेदारियों में से एक संस्कृत सीखने का बचाव और प्रचार-प्रसार रहा है - यह एक ऐसा वादा है जो आज भी ट्रस्ट की शिक्षा और सांस्कृतिक पहल को आकार दे रहा है।
यह सोच 11 मई को, ठीक किए गए सोमनाथ मंदिर के पवित्र प्राण-प्रतिष्ठा के दिन खास महत्व रखती है। इसी तारीख को देश भर में नेशनल टेक्नोलॉजी डे के तौर पर भी मनाया जाता है, जो भारत की हमेशा रहने वाली आध्यात्मिक परंपराओं और उसकी आज की वैज्ञानिक उम्मीदों के बीच एक सिंबॉलिक मेल बनाता है। सोमनाथ में, यह मेल एक गहरी सोच को दिखाता है: कि पुराना ज्ञान और टेक्नोलॉजी की तरक्की एक-दूसरे की विरोधी ताकतें नहीं हैं, बल्कि देश की तरक्की के एक-दूसरे को पूरा करने वाले पहलू हैं। भारत के प्रधानमंत्री और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन, नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित होकर, सोमनाथ एक नेशनल मॉडल के तौर पर उभर रहा है, जहाँ सभ्यता की विरासत और मॉडर्न इनोवेशन एक साथ मौजूद हैं। सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी आज ट्रेडिशनल स्कॉलरशिप का एक बड़ा सेंटर है, जहाँ अभी 432 शास्त्री और 239 आचार्य स्कॉलर वैदिक लिटरेचर, संस्कृत ग्रामर, फिलॉसफी, धर्मशास्त्र और उससे जुड़े सब्जेक्ट्स की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, ट्रस्ट गुजरात भर में 34 पाठशालाओं को सपोर्ट करता है, जिनमें कुल 3,740 स्टूडेंट्स पढ़ते हैं, जिससे यह पक्का होता है कि ट्रेडिशनल एजुकेशन अलग-अलग इलाकों और कम्युनिटी तक पहुँचे।- सामाजिक कल्याण : सेवा का व्यापक स्वरूप
सेवा की हमेशा रहने वाली भावना और “सबके नाथ सोमनाथ” के सबको साथ लेकर चलने वाले विज़न से गाइडेड, श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने लगातार हेल्थ, न्यूट्रिशन, इज्ज़त और समाज की दयालु देखभाल के लिए वेलफेयर पहल की है। अपनी आध्यात्मिक ज़िम्मेदारियों से आगे बढ़कर, ट्रस्ट इंसानियत की सेवा का एक सेंटर बनकर उभरा है, जिसने लगातार सोशल आउटरीच प्रोग्राम के ज़रिए हज़ारों लोगों की ज़िंदगी को छुआ है।
जानवरों की भलाई के लिए अपना कमिटमेंट दिखाते हुए, ट्रस्ट ने लम्पी वायरस फैलने के दौरान तुरंत मदद की, वैक्सीनेशन ड्राइव के लिए ₹3,72,000 और ज़रूरी दवाओं के लिए ₹1,50,000 दिए, जिससे कुल ₹5,22,000 की मदद मिली। हेल्थकेयर सेक्टर में, ट्रस्ट ने 2014 में भक्तों और आस-पास के लोगों को आसानी से मेडिकल सर्विस देने के लिए एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर खोला। रिहैबिलिटेटिव हेल्थकेयर को और मज़बूत करने के लिए, 2015 में एक फिजियोथेरेपी सेंटर बनाया गया, जिससे 2025 तक 51,099 लोगों को फ़ायदा हुआ।
इन कई तरह की कोशिशों के ज़रिए, श्री सोमनाथ ट्रस्ट स्पिरिचुअलिटी को सोशल ज़िम्मेदारी के साथ जोड़ना जारी रखता है, और दयालु सेवा, पब्लिक वेलफेयर और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास के लिए अपने पक्के वादे को दोहराता है। प्रस्तुति अमरेश द्विवेदी