परिवहन समिति सभापति राजकुमार मिश्रा के कार्यालय उद्घाटन समारोह में पहुंची जानी-मानी हस्तियां
भायंदर। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा के कार्यालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि एडवोकेट राजकुमार मिश्रा सुशिक्षित और जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय व्यक्ति हैं। परिवहन समिति के सभापति के रूप में जनता से जुड़ी समस्याओं के निराकरण की दिशा में सराहनीय काम करेंगे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी ने कहा कि राजकुमार मिश्रा ऊर्जावान तथा अच्छी सोच रखने वाले व्यक्ति हैं, जो राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी पूरी तरह से सक्रिय रहते हैं।  कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित भवन निर्माता उमराव सिंह ओस्तवाल, जेडी शिक्षा ग्राम प्रतापगढ़ के चेयरमैन दिनेश त्रिपाठी, आदित्य कॉलेज केh संचालक हरिश्चंद्र मिश्रा ने एड राजकुमार मिश्रा को बधाई और शुभकामनाएं दी।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहने वाले लोगों में महापौर डिंपल विनोद मेहता, आयुक्त राधाविनोद शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल, गटनेता तथा स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत, सभागृह नेता एडवोकेट रवि व्यास उपस्थित रहे। कार्यालय उद्घाटन समारोह में परिवहन समिति सदस्य अंसारी राशीद अनवर, आदेश छोटेलाल अग्रवाल, काजल सक्सेना, भारत बोहरा, कुलदीप सिंह, प्रकाश जैन, आशीष लोढ़ा, प्रशांत केहकर, सुरेशचंद्र दुबे,ऑस्टिन जॉन मेनेजेस तथा सद्दाम कुरैशी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विगत 25वर्षों से कार्य कर रहे सैकड़ों संविदा प्राध्यापकों को अतिथि शिक्षक बनने पर किया गया मजबूर

मुंबई। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देश भर में स्थित 13 परिसरों में कार्यरत संविदा प्राध्यापकों की सेवा-स्थिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वर्षों से संविदा पद पर कार्यरत बड़ी संख्या में प्राध्यापकों को अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य किए जाने के बाद शिक्षकों में असंतोष एवं भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ने की बात सामने आ रही है। शिक्षकों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस निर्णय के लिए उड़ीसा उच्च न्यायालय में चल रहे प्रकरण तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के कथित मौखिक निर्देशों का हवाला दिया है, जबकि शिक्षकों का दावा है कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है। शिक्षकों का कहना है कि जिन प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय में 10, 15, 20 तथा 25 वर्षों से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं, उनकी सेवा-स्थिति को अचानक निम्न स्तर पर ले जाना उनके दीर्घकालीन अनुभव एवं योगदान के साथ न्यायसंगत नहीं है। अतिथि एवं संविदा शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के अथक परिश्रम कर विश्वविद्यालय को बेहतर ग्रेड प्राप्त कराने में महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं अकादमिक योगदान दिया था। अतिथि शिक्षकों के लिए लगभग ₹50,000 तथा संविदा शिक्षकों के लिए ₹57,700 मूल वेतन के साथ HRA आदि की व्यवस्था की गई और कुछ परिसरों को ‘हार्ड स्टेशन’ घोषित कर अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की गईं। शिक्षकों का कहना है कि इन निर्णयों से यह उम्मीद बनी थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन संविदा एवं अतिथि शिक्षकों की दीर्घकालीन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा। शिक्षक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से कार्यरत कुछ अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर सामान्य साक्षात्कार के माध्यम से संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय तथा आदर्श महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी कुछ शिक्षकों ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आंतरिक रूप से वर्षों से कार्यरत योग्य अभ्यर्थियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिला और बड़ी संख्या में बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया। शिक्षकों के अनुसार, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से बार-बार आग्रह किया कि वर्षों से कार्यरत योग्य संविदा एवं अतिथि शिक्षकों को स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया में उचित अवसर प्रदान किया जाए, लेकिन इस संबंध में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। शिक्षकों के अनुसार, जून 2024 में डेक्कन कॉलेज, पुणे में स्थायी शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में लिखित परीक्षा को साक्षात्कार के लिए आवश्यक चरण बनाया गया था। शिक्षकों का दावा है कि कई आंतरिक अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफल नहीं हो सके तथा परीक्षा के प्रश्नपत्र एवं उत्तर-कुंजी सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी प्रश्न उठे, जिसके कारण चयन प्रक्रिया एवं आंतरिक अभ्यर्थियों को मिले अवसर को लेकर असंतोष बढ़ा। नवंबर 2025 में आदर्श महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बहु-चरणीय लिखित परीक्षा का विज्ञापन जारी किए जाने के बाद संविदा एवं अतिथि शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। शिक्षकों के अनुसार, उन्होंने सेवा-सुरक्षा, स्थायीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सहित विभिन्न माँगें प्रशासन के समक्ष रखीं, लेकिन संवाद के प्रयासों के बावजूद उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद कुछ संविदा शिक्षकों ने न्यायिक एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं का रुख किया। शिक्षकों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित नहीं होने के बाद कुछ संविदा एवं अतिथि शिक्षकों ने अपनी समस्याओं से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्रालय, सांसदों, मंत्रियों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया तथा कुछ मामलों में न्यायालय की शरण भी ली।  शिक्षकों का दावा है कि लगातार किए गए पत्राचार, संवैधानिक संस्थाओं से संपर्क तथा न्यायालयीन प्रक्रियाओं के बीच आंतरिक अभ्यर्थियों को अपेक्षाकृत अधिक अवसर मिला। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं चयन के मानदंडों को लेकर अभी भी शिक्षकों की ओर से प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों ने चयन समितियों में विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं और कुछ नामों के संबंध में पूर्व में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता जताई है; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है तथा संबंधित व्यक्तियों अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी सार्वजनिक किया जाना आवश्यक होगा। वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विश्वविद्यालय के 13 परिसरों में वर्षों से कार्यरत संविदा प्राध्यापकों को अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य किए जाने से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि जिन प्राध्यापकों की नियुक्ति विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संविदा शिक्षक के रूप में हुई थी तथा जिन्होंने वर्षों तक विश्वविद्यालय में निरंतर अध्यापन किया, उन्हें अचानक अतिथि शिक्षक की श्रेणी में लाना सेवा में अवनति के समान है। शिक्षकों के अनुसार, इनमें ऐसे प्राध्यापक भी शामिल हैं जिन्होंने पहले अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य किया और बाद में अपने अनुभव एवं निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर संविदा शिक्षक का पद प्राप्त किया था, लेकिन अब उन्हें पुनः अतिथि शिक्षक बनाए जाने से उनके पद, पारिश्रमिक, सेवा-सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो गए हैं। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के लिए ₹100 के शपथ-पत्र की शर्त रखी गई तथा शपथ-पत्र की भाषा एवं उसके संभावित प्रभाव को लेकर भी उनके बीच चिंता है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से संविदा पद पर कार्यरत शिक्षक को अतिथि शिक्षक के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को संबंधित शिक्षकों के साथ व्यापक संवाद करना चाहिए था। इसी बीच कुछ शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन में कथित क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर एक विशेष क्षेत्र के अधिकारियों की निरंतरता दिखाई देती है और नियुक्तियों, कार्यक्रमों तथा प्रशासनिक निर्णयों में भी क्षेत्रीय प्रभाव की आशंका व्यक्त की जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तथ्यात्मक जांच की मांग की गई है। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के वर्तमान शीर्ष प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं और कुलपति एवं कुलसचिव की नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता, चयन समिति की कार्यवाही, अनुभव संबंधी मानदंड तथा चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की माँग की है, ताकि विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। पूरे प्रकरण को लेकर संविदा शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं, स्थानांतरण, सेवा-शर्तों तथा अन्य निर्णयों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सभी संबंधित अभिलेखों, चयन समितियों की कार्यवाही, भर्ती के मानदंड, विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति, सेवा-परिवर्तन तथा प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र जाँच कराई जाती है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। संविदा शिक्षकों की प्रमुख माँगों में उनकी पूर्व सेवा-स्थिति बहाल करना, वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव एवं सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान की नीति बनाना, समान कार्य के लिए समान वेतन, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, सेवा-सुरक्षा तथा सभी परिसरों में एक समान नियम लागू करना शामिल है। संविदा शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान विवाद को केवल किसी एक आर्थिक राशि अथवा भत्ते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वास्तविक प्रश्न उन शिक्षकों के भविष्य का है जिन्होंने विश्वविद्यालय में वर्षों तक अध्यापन एवं अकादमिक सेवाएं प्रदान की हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। शिक्षकों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में उठ रहे सभी गंभीर प्रश्नों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाए। संविदा शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन इन गंभीर सवालों पर क्या रुख अपनाता है और वर्षों से विश्वविद्यालय की सेवा कर रहे संविदा प्राध्यापकों की सेवा-संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
लोकतंत्र के सशक्तिकरण में समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका : ज्ञान प्रकाश सिंह
मुंबई। समाचार पत्र हमारे दैनिक जीवन और लोकतंत्र के सशक्तिकरण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दैनिक हिंदी समाचार पत्र हमारा महानगर के 21 में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रख्यात समाजसेवी और वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि हमारा महानगर सशक्त निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज और राष्ट्र को मजबूत करने का काम कर रहा है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने उनका स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य राजहंस सिंह, कार्यकारी संपादक राघवेंद्र नाथ द्विवेदी, महाप्रबंधक सुधीर दलवी, संवाददाता जितेंद्र मिश्रा, पत्रकार दिनेश सिंह समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान,बोरीवली में 200 सरयूपारीण ब्राह्मणों ने किया श्रावणी उपाक्रम
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय सरयूपारीण ब्राह्मण परिषद के तत्वाधान में 28अगस्त को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, बोरीवली मे  नदी के तट पर 200 सरयूपारीण ब्राह्मणों ने धर्माचार्य मुरलीधर मिश्र, वेदनिधि शास्त्री,डा वाणी प्रमुख विलाश शुक्ला,पं नरेंद्र मिश्रा एवं ध्रुवकुमार पांडेय के मार्गदर्शन मे श्रावणी उपाकर्म महापर्व मे  सोल्लास सहभाग किया। कार्यक्रम विधि-विधान से संपन्न हुआ। प्रमुख सरयूसेवक डा आर के चौबे एवं डा राधेश्याम तिवारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में सुभाष उपाध्याय, इंदुप्रकाश तिवारी, कृपाशंकर पांडे, संतोष दुबे, अवधेंद्र शुक्ला,के के तिवारी,रविकांत शुक्ला, सुरेश मिश्रा, हेमंत पांडेय,अशोक तिवारी. विद्याशंकर चतुर्वेदी.चंद्रशेखर शुक्ल,नागेंद्र मिश्रा.मुकेश मिश्रा विजय श्याम शुक्ला विजयनाथ तिवारी, रवि मिश्रा.संजय शर्मा, पत्रकार नित्यानंद तिवारी आदि का समावेश रहा। मुंबई महानगरपालिका के प्रभाग अध्यक्ष प्रकाश दरेकर ने उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढाई और भविष्य मे और अधिक सहयोग देने का आश्वासन दिया।परिषद ने प्रकाश दरेकर, प्रवीण दरेकर, विधायक प्रकाश दादा सुर्वे एवं राज सुर्वे का आभार प्रकट किया।
मुंबई नगरी के अनोखे रंग, साहित्यकारों के संग
मुंबई । अखिल भारतीय साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था सृजन के रंग नवी मुंबई इकाई के तत्वावधान में 26 अगस्त 2026 को आनलाइन कविगोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त गोष्ठी में पूर्व निर्धारित विषय ' मुंबई नगरी के अनोखे रंग ' पर परिचर्चा एवं कविगोष्ठी रखी गई जिसमें उपस्थित सभी साहित्यकारों ने मुंबई महानगर के विविध आयामों ऐतिहासिक, भौतिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप का दर्शन शब्दों के रंगों में रंग कर परोसा, जिसका आनंद सभी ने लिया तथा रचना की सराहना भी की। उक्त गोष्ठी की अध्यक्षता कनकलता तिवारी ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ गज़लकार, गीतकार डॉ प्रमोद कुमार कुश तन्हा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप उपस्थित थे। आमंत्रित साहित्यकारों में रोमा झा, लक्ष्मी यादव ओजस्विनी, कविता ए झा,गीता विश्वकर्मा नेह,संजय जैन, सीमा त्रिवेदी साज़, जागृति सिन्हा, प्रवीण पाण्डेय आवारा, अमनदीप गुजराल, मीनाक्षी शर्मा पंकज, सीमा श्रीवास्तव,संजय सरस,ऊषा सक्सेना, नम्रता मिश्र साहसी, डॉ मधु स्वामी एवं दयाराम दर्द फिरोजबादी उपस्थित थे। मंच का खूबसूरत संचालन लक्ष्मी यादव ओजस्विनी ने किया।अंत में अध्यक्ष श्रीमती कनकलता तिवारी ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समाजसेवी हरिशंकर शर्मा के जन्मदिन पर शुभचिंतकों ने दी बधाई
मुंबई । महानगर के गोरेगांव शहर में रहने वाले उत्कृष्ट समाजसेवी एवं साप्ताहिक समाचार पत्र कदम कदम पर के उप संपादक हरिशंकर शर्मा उर्फ मुन्ना के कुशल व्यवहार एवं सराहनीय समाजसेवा को देखते हुए शुभचिंतकों ने 25 अगस्त 2026 को केक काटकर जन्मदिन मनाया और शुभकामनाएं प्रेषित किया। शुभचिंतकों में मुन्ना के मित्रों एवं संबंधियों सहित सैकड़ों लोग एकत्रित होकर केक काटा और बधाइयां दीं। महानगर से कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप, हरिकेश शर्मा नंदवंशी, प्रदीप कुमार शर्मा नंदवंशी, संतोष निरंकार शर्मा, एडवोकेट अनिल शर्मा, मनोज जगदीश शर्मा,बाबुल्ले शर्मा, श्रीमती राधा शर्मा, सुनीता शर्मा, कलेक्टर शर्मा, संतोष कुमार शर्मा, चंद्रभूषण शर्मा, कन्हैयालाल शर्मा,कदम कदम पर के संपादक छोटेलाल शर्मा, राममिलन शर्मा,डॉ प्रहलाद शर्मा, राकेश कुमार शर्मा,कदम कदम पर के प्रबंध संपादक अनिल शर्मा,अनिल कुमार शर्मा,उमानाथ महाराज, केतन,महेश मोरे,एडवोकेट संदीप दुबे,संजय,हरि नायर, राहुल,सर्वेश,एडवोकेट रोहन, अनिल,बालाजी तेजस राय, विशाल शर्मा,सरोज शर्मा, अभय शर्मा,अजय शर्मा,कान्हू आदि ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दी।
नवकुंभ के स्थापना दिवस पर कविगोष्ठी संपन्न
मुंबई । साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान के 6 वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार 24 अगस्त 2026 को आनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता लोक गीतकार डॉ राजबहादुर राणा सुल्तानपुर ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामजीलाल वर्मा उपस्थित थे। उक्त समारोह का आयोजन विनय शर्मा दीप,संयोजन राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार राही ने किया। उपस्थित साहित्यकारों में मुंबई से नरसिंह हैरान जौनपुरी, डॉ आनंदी सिंह रावत, सुल्तानपुर से नागेन्द्र यादव, गाजियाबाद से डॉ मधु स्वामी,कल्याण ठाणे से बीनू त्रिपाठी विभु, सुल्तानपुर से शिक्षाविद् रमेशचंद्र नंदवंशी, श्रावस्ती से संस्था उपाध्यक्ष प्रितम श्रावस्तवी, जौनपुर से प्रवीण कुमार प्रेमी, पुणे से डा संगीता तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित थे। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने संस्था के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष कविगोष्ठी में सावनी फुहार के रंग में कजरी गीत से पटल सुगंधित हुआ। मंच का खूबसूरत संचालन संस्था के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप ने किया।संस्था उपाध्यक्ष प्रितम श्रावस्तवी ने कहा संस्था की स्थापना 22 अगस्त 2020 को हुई थी जो अपनी साहित्यिक यात्रा के 6 वर्ष पूर्ण करके आगे प्रस्थान कर रही है आगे भी आप सभी के साहित्यिक सहयोग की अपेक्षा रहेगी तथा अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुलुंड खेल मैदान को पेट्रोल पंप के लिए इस्तेमाल करने के खिलाफ राकेश शेट्टी का विरोध प्रदर्शन
मुंबई। मुलुंड (पूर्व) के महाकाली नगर स्थित आरक्षित खेल मैदान की जमीन को पेट्रोल पंप के लिए इस्तेमाल किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता और मुंबई रीजनल कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश शंकर शेट्टी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खेल मैदान और खुले स्थानों को सुरक्षित रखने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए खेल मैदान को बचाने की मांग की। उनका कहना था कि मुलुंड जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में बच्चों और युवाओं के लिए उपलब्ध खेल मैदानों और खुले स्थानों को किसी अन्य उपयोग के लिए नहीं दिया जाना चाहिए। राकेश शंकर शेट्टी ने कहा कि हमें पेट्रोल पंप की जरूरत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए मुलुंड के खेल मैदान को खत्म नहीं किया जा सकता। बच्चों के खेलने और युवाओं के भविष्य के लिए इस मैदान को बचाना जरूरी है। विकास के नाम पर शहर में बचे खुले स्थानों को खत्म करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तलाशा जाए और खेल मैदान को सुरक्षित रखा जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि खेल मैदान और खुले स्थानों की सुरक्षा नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आरडी यादव को बीजेपी महाराष्ट्र उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ की बड़ी ज़िम्मेदारी

मुंबई। भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक जिम्मेदारी में बदलाव करते हुए मुलुंड निवासी आर. डी. यादव को भाजपा उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ , महाराष्ट्र का प्रभारी नियुक्त किया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र जी चव्हाण ने 24 अगस्त 2026 को प्रदेश सेल के प्रभारी एवं सह-प्रभारियों की नियुक्ति की।संगठन में लंबे समय से सक्रिय आर. डी. यादव को जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। नई जिम्मेदारी मिलने पर भाजपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों में उत्साह का माहौल है और उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं। आर. डी. यादव ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जिस विश्वास के साथ मुझे यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, उसके लिए मैं शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा प्रयास रहेगा कि उत्तर भारतीय समाज को संगठन से और मजबूती से जोड़ा जाए तथा पार्टी की विचारधारा और जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन करूंगा। उनकी नियुक्ति से उत्तर भारतीय  समुदाय की गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जय गदाधारी कांवरिया संघ द्वारा भव्य कावड़ यात्रा संपन्न
वसई। जय गदाधारी सेवा संघ द्वारा संचालित जय गदाधारी कांवरिया सेवा संघ द्वारा भव्य कांवड़ यात्रा मां चंडिका मंदिर नायगांव से तुंगारेश्वर महादेव मंदिर वसई तक निकाली गई। इस अवसर पर जय गदाधारी सेवा संघ के संस्थापक अध्यक्ष वकील साहब तिवारी, उपाध्यक्ष संजय पांडेय, कोषाध्यक्ष विनोद शुक्ला, कार्याध्यक्ष राम मुरारी दुबे, सक्रिय सदस्य मुकेश तिवारी, युवा समाजसेवी मीडिया प्रभारी कृष्ण कुमार तिवारी, सहमीडिया प्रभारी अतुल चौहान, मंदिर व्यवस्थापक शैलेश दुबे, नीरज दुबे, जय गदाधारी कांवरिया सेवा संघ अध्यक्ष सुरेश पांडेय, उपाध्यक्ष दिनेश तिवारी, कोषाध्यक्ष ऋषि मिश्रा, व्यास सलिल दुबे हंडिया प्रयाग वाले सुनील तिवारी, विशेष सहयोगी राकेश पाठक, अशोक उपाध्याय, संतोष चतुर्वेदी ,दयाशंकर दुबे, देवीशंकर दुबे,शशि मिश्रा, राजेश मिश्रा, राहुल मिश्रा, रोहित मिश्रा, कृष्ण मुरारी मिश्रा, महेश शुक्ला, पवन देवी चरण मिश्रा, संजीत पांडे, प्रवीण मिश्रा, नीरज तिवारी, एडवोकेट तीर्थराज उपस्थित रहे। सभी शिव भक्तों के सहयोग से यह कार्य संपन्न हुआ । जय गदाधारी कांवरिया सेवा संघ के संस्थापक अध्यक्ष वकील साहब तिवारी ने सभी शिव भक्तों का आभार प्रकट किया।