इंदिरा गांधी के हत्यारे का बेटा लड़ेगा चुनाव, अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब नेदिया टिकट

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पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल 2027 में होने हैं। अभी चुनाव में कई महीने का समय है लेकिन पंजाब में राजनीतिक अखाड़ा सजकर तैयार हो चुका है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने अपने पहले उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को आपना उम्मीदवार बनाया है।

अमृतपाल के पिता ने किया एलान

वारिस पंजाब दे पार्टी ने फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की ओर से मंगलवार को अमृतसर में उनके नाम की घोषणा की गई। उम्मीदवारी का एलान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया। इस दौरान सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी मौजूद रहे।

तरसेम सिंह ने बताया पार्टी का मकसद

पार्टी उम्मीदवार की घोषणा करते हुए तरसेम सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी का मकसद सिर्फ राजनीतिक सत्ता पाना नहीं है। यह पंथिक सिद्धांतों, पंजाब के अधिकारों और समुदाय के लिए कुर्बानी देने वाले परिवारों के योगदान और सम्मान को मान्यता देने पर केंद्रित है। हाल ही में हुई राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में कि पार्टी पुरानी कुर्बानियों से जुड़े परिवारों से दूरी बना रही है, उन्होंने कहा कि सतवंत के बेटे को उम्मीदवार बनाना इसका सीधा सबूत है कि ऐसा नहीं है।

कौन हैं सतवंत सिंह

61 साल के सतवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे है। केहर सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे और 1989 में उन्हें फांसी दी गई थी। केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं। सतवंत बस्सी पठाना के मुस्तफाबाद गांव के रहने वाले हैं।

स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, खुदीराम का बलिदान युवाओं के लिए बड़ा संदेश

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आज जब हम 18 साल की उम्र के युवाओं की गलतियों को बचपना कहकर दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। ऐसी ही छोटी उम्र में एक युवक ने कुछ ऐसा कर दिया था, जिसने पूरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ क्रांति को एक नई आग दी। देश के इतिहास के पन्नों में दर्ज वो युवक जो 18 साल की उम्र में हंसते-हंसते भारत माता की रक्षा के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया था। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद खुदीराम बोस की।

आजादी का एक मतवाला अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए 15 साल की उम्र में अनुशीलन समिति से जुड़ गए। अनुशीलन समिति 20वीं सदी के शुरुआती दौर में बंगाल में बनी एक गुप्त, क्रांतिकारी और सशस्त्र संगठन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था। देश को स्वतंत्र कराने और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़ा हुआ ये युवक आज ही के दिन यानी 11 अगस्त को केवल 18 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया।

इस तरह नाम पड़ा खुदीराम बोस

खुदीराम बोस का जन्म पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में 3 दिसंबर 1889 को त्रिलोक्यपुरी बोस और लक्ष्मीप्रिया के घर हुआ। खुदीराम के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने दो बेटों को बीमारी के चलते खोया था। इस बार खुदीराम के रूप में तीसरी संतान हुई तो डर स्वाभाविक था। तब मां-बाप ने एक देसी टोटका आजमाया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को तीन मुट्ठी 'खुदी' (बंगाल में टूटे हुए चावल को खुदी कहते हैं) देकर इस बच्चे को प्रतीकात्मक रूप से बेच दिया, ताकि मौत की नजर इस पर न पड़े। तीन मुट्ठी खुदी के बदले बचे इस बच्चे का नाम पड़ गया- खुदीराम।

15 साल की उम्र में पहली गिरफ्तारी

जिस उम्र में लड़के किताबों की दुनिया स्कूली जीवन में मस्त रहते हैं उस उम्र में खुदीराम बोस अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने उतर गए। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बांटने में लगा दिया गया। यह बात थी साल 1906 की। एक और क्रांतिकारी सत्येंद्रनाथ बोस ने वंदे मातरम लिखकर अंग्रेजी शासन के विरोध में पर्चे बंटवाने की जिम्मेदारी दी। मिदनापुर में आयोजित एक मेले में इस पर्चे को बंटवाने का प्लान था। अंग्रेजों को इस बात का पता चल गया। अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने इसकी खबर दे दी। खुदीराम बोस को देखते ही उन्हें पकड़ने का प्रयास हुआ। लेकिन, खुदीराम ने अंग्रेज अफसर के मुंह पर घूंसा जड़ दिया। हालांकि कई अंग्रेज सिपाही होने के चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। और पहली बार देश के लिए खुदीराम गिरफ्तार हुए। उन दिनों जिला जज हुआ करते थे डगलस किंग्सफोर्ड। इस जज को भारतीयों को सख्त नफरत थी। सजा के नाम पर भारतीयों पर कोडे़ बरसाने की सजा दी जाती थी। 15 साल के खुदीराम को जज ने 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। इस जज ने भारतीयों पर अत्याचार मचा रखा था। आखिर में इस जज को मारने का प्लान बनाया गया।

किंग्सफोर्ड को मारने का प्लान

क्रांतिकारियों ने तय किया कि इस किंग्सफोर्ड का काम तमाम करना होगा। खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल कुमार चाकी को यह जिम्मेदारी दी गई। किंग्सफोर्ड का ट्रांसफर बिहार के मुजफ्फरपुर हो गया था। ये दोनों लड़के अप्रैल 1908 में मुजफ्फरपुर पहुंचे। कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की रेकी की गई। शाम का वक्त था। खुदीराम और प्रफुल्ल किंग्सफोर्ड के घर के बाहर एक पेड़ के अंधेरे में घात लगाए बैठे थे। तभी एक बग्गी बाहर निकली। खुदीराम को लगा शिकार सामने हैय़ उन्होंने दौड़कर उस बग्गी पर बम मार दिया। जोरदार धमाका हुआ। दोनों को लगा कि उन्होंने अपना मिशन पूरा कर लिया है। लेकिन उस बग्गी में किंग्सफोर्ड नहीं था। उसमें लोकल बैरिस्टर प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी इस हमले में जान चली गई।

18 साल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

दोनों करीब 25 मील भागने के बाद एक रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। बोस पर पुलिस को शक हो गया और पूसा रोड रेलवे स्टेशन (अब यह स्टेशन खुदीराम बोस के नाम पर है) पर उन्हें घेर लिया गया। खुद को घिरा देख प्रफुल्ल चंद ने स्वयं को गोली मार ली पर खुदीराम पकड़े गए। खुदीराम बोस पर हत्या का मुकदमा चला और सिर्फ पांच दिन में मुकदमे का फैसला हो गया। 8 जून, 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया और 13 जून को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। खुदीराम बोस ने मात्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन की उम्र में 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगा लिया था। उन्हें किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंकने के आरोप में यह सजा दी गई थी। उनका यह बलिदान देश के युवाओं में आज भी देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है।

खुदीराम का बलिदान आज की युवा पीढ़ी के लिए संदेश

खुदीराम बोस का बलिदान आज की युवा पीढ़ी को देशप्रेम, निस्वार्थ त्याग और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस का पाठ पढ़ाता है। मात्र 18 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़कर उन्होंने यह सिखाया कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देना। व्यक्तिगत सुखों से ऊपर राष्ट्रहित को रखना। देश की संस्कृति और स्वतंत्रता के प्रति हमेशा जागरूक रहना। आज की आज़ादी को हल्के में न लेकर इसके पीछे के संघर्षों को याद रखना।

एनडीए के 'मंगल मिलन' में पीएम नरेंद्र मोदी ने लहाराया तिरंगा, एकजुटता का दिया संदेश

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों की मंगल बैठक 'वंदे मातरम' नारे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए।

नई दिल्ली में मंगलवार को संसद पुस्तकालय में ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एनडीए की मंगल मिलन बैठक में अलग ही नजारा देखने को मिला। पीएम मोदी की अगुवाई में वहां मौजूद सभी सांसदों ने तिरंगा लहराया। गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गडकरी समेत तमाम नेता तिरंगा लहराते नजर आए।

वंदे मातरम् के नारे लगाए गए

इस दौरान वहां वंदे मातरम् के नारे लगाए गए। 15 अगस्त से पहले आखिरी मंगलवार को हुई बैठक में सभी सांसदों ने एक साथ तिरंगा लहराया और वंदे मातरम् के नारे लगाए। पूरा हॉल देशभक्ति से सराबोर दिखाई दे रहा था। बता दें कि देशभर में दस से सत्रह अगस्त तक तिरंगा यात्रा का आयोजन हो रहा है। इस दौरान मंगल मिलन बैठक में भी अनोखा नजारा देखने को मिला।

'मंगल मिलन' बैठक का मकसद क्या है?

'मंगल मिलन' बैठक वास्तव में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का बदला हुआ नाम है। इसका मकसद रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना और गठबंधन के सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना है। संसद सत्र के दौरान रोजाना सदन की रणनीति तैयार करने और अलग-अलग दलों के बीच सहमति बनाने के अलावा, 'मंगल मिलन' बैठक एनडीए के सहयोगी दलों के साथ समन्वय बढ़ाने का माध्यम भी है।

भारत ने नक्शे पर दिखाए अरूणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम, चीन की बौखलाहट आई सामने

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भारत और चीन सीमा पर सालों से चले आ रहे तनाव के बाद अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच भारत ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन को एक बार फिर साफ संदेश दिया है। भारत सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे को अपडेट करते हुए चीन की सीमा से जुड़े 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज किया है। अरूणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के आधिकारिक नामकरण किए जाने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

चीन ने कहा-गैर-कानूनी और अमान्य

बीजिंग में विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि भारत का 'चीन द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे नामों को बदलने का प्रयास गैर-कानूनी और अमान्य है और इससे यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि जंगनान चीन का हिस्सा है।'

चीन ने कहा-संबंधों को सुधारने का प्रयासों होगा जटिल

वहीं, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारत के इस कदम को "आत्मधोखा" करार दिया गया है। चीन का दावा है कि भारत का यह एकतरफा फैसला दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और द्विपक्षीय राजनीतिक संबंधों को सुधारने के प्रयासों को जटिल बना सकता है।

भारत ने मानचित्र पर तय किए 27 स्थानों के नाम

भारत ने अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले 27 स्थानों के नाम अपने आधिकारिक मानचित्र पर मानकीकृत किए हैं। इस सूची में भूमि क्षेत्र, दर्रे, एक झील और एक ऐतिहासिक स्मारक शामिल हैं। इनमें ऊपरी सुबनसिरी में स्थित लोंग जू और माजा गांव, थाग ला और दजो ला दर्रे, म्यांमार सीमा के पास जयरामपुर लॉजिस्टिक्स हब और 1962 के युद्ध नायक शहीद जसवंत सिंह रावत की याद में बना रामनगर जसवंत गढ़ स्मारक प्रमुख हैं।

चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है

बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है और उसने इसका नाम 'जांगनान' रखा हुआ है। चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। चीन के इन्हीं मनगढ़ंत और आधारहीन दावों को खारिज करते हुए और आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने गृह मंत्रालय और अरुणाचल प्रदेश सरकार के परामर्श से 27 जगहों के सटीक भारतीय नाम आधिकारिक नक्शों और सरकारी अभिलेखों में शामिल किए हैं।

UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत, लेनदेन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

-  P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, भविष्य में MDR लागू हुआ तो सीमित मर्चेंट पर ही होगा असर

नई दिल्ली। UPI से लेनदेन करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए राहत की खबर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI के जरिए नागरिकों के लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले UPI ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
सरकार के मुताबिक, भविष्य में यदि MDR (Merchant Discount Rate) लागू करने की जरूरत पड़ती है तो इसे सीमित संख्या में मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू किया जाएगा। तय सीमा से अधिक के ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR लगाए जाने की व्यवस्था हो सकती है।

सरकार ने साफ किया है कि आम नागरिकों के लिए UPI लेनदेन मुफ्त रहेगा, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और आम लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़ने की उम्मीद है।
चार हाईकोर्ट को मिले 30 नए न्यायाधीश, केंद्र ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना
-  मद्रास हाईकोर्ट में 15, कलकत्ता में 8, कर्नाटक में 6 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक नियुक्ति

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के चार उच्च न्यायालयों में कुल 30 न्यायाधीशों और अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक मद्रास हाईकोर्ट को सबसे अधिक 15 न्यायाधीश मिले हैं। इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट में आठ, कर्नाटक हाईकोर्ट में छह और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है। नियुक्त किए गए 30 लोगों में 20 अधिवक्ता और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।

- मद्रास हाईकोर्ट में 15 नियुक्तियां :-
मद्रास हाईकोर्ट में पांच अधिवक्ताओं को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया है, जबकि 10 को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। स्थायी न्यायाधीश के रूप में गोविंदराजन कृष्णस्वामी, रजनीश पथियिल, रमेश नटराजन, के. मुथुकुमार और रामकृष्णन राजेश विवेकानन्दन की नियुक्ति हुई है।
अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर रविकुमार शंकरनारायणन, दिलीप कुमार नागराजन, एलप्पन मनोहरन, पी. मुरुगन, एमडी सुमति, एस. अली, सी. तिरुमगल, शनमुगम कार्तिकेयन, मुरुगेसन बलुचामी और गुणसेकरन को नियुक्त किया गया है।

- कलकत्ता हाईकोर्ट में आठ अतिरिक्त न्यायाधीश :-
कलकत्ता हाईकोर्ट में आर्यक दत्त, अतरूप बनर्जी, संदीप कुमार डे, पार्थ प्रतीम रॉय, सुदीप देब, अनुज सिंह, अर्जुन रे मुखर्जी और रिशाद मेडोरा को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

- कर्नाटक हाईकोर्ट में छह नियुक्तियां :-
कर्नाटक हाईकोर्ट में राघवेन्द्र सीताराम श्रीवत्स, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, विवेकानन्द थडगावडी प्रकाश, प्रमोद बक्केस्वरा और शांति भूषण होम्बे गौड़ा को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है।

- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक नियुक्ति :-
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अमित लाहोटी को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनहित याचिका दायर

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएमसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। इस याचिका में नए सिरे से परीक्षा के आयोजन और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

48 सवालों के जवाब देने पर ही पास हो गया एक कैंडिडेट

बता दें कि ये मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी और इसका प्रारंभिक रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। रिजल्ट आने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी। फिर आरोप लगा कि उम्मीदवार ने पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए, फिर भी वह परीक्षा में सफल घोषित हुआ।

याचिका में क्या मांग की गई?

अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में 9 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड, समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किए जाने की भी मांग की गी है।

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने किया बिल का समर्थन तो रिजिजू का जोरदार पलटवार

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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू आमने-सामने आ गए हैं। किरेन रिजिजू ने सबसे पहले एक बयान जारी कर राहुल गांधी को बिना शर्त महिला आरक्षण कानून को समर्थन करने के लिए कहा था। जिसके तुरंत बाद राहुल गांधी ने भी पलटवार कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हां मैं बिना शर्त के समर्थन करने को तैयार हूं लेकिन 2023 वाले महिला आरक्षण बिल को लागू कीजिए। रिजिजू ने इसे सकारात्मक संदेश बताया और तंज कहा कि क्या उनका हृदय परिवर्तन हुआ है।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

शुक्रवार के एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं को बातचीत में वापस लाना और उन्हें वह करने देना जो वे करना चाहती हैं जरूरी है। राहुल ने कहा था कि महिलाओं एनर्जी फंसी हुई है, उन्हें खुद को एक्सप्रेस करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता है जब तक महिलाओं खुद को एक्सप्रेस न करें। भारत पुरुषों द्वारा महिलाओं पर लगाए गए कड़े कंट्रोल से आजादी चाहता है।

रिजिजू का राहुल गांधी पर तंज

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण पर वीडियो संदेश पर निशाना साधा। रिजिजू ने राहुल के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी के महिलाओं को लेकर नजरिए में स्पष्ट रूप से हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।’

राहुल का पलटवार

रिजिजू की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने भी तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते रिजिजू से बेहतर यह कौन जान सकता है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने उस विधेयक का पूरा समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने सरकार के सामने असली सवाल रख दिया कि अगर कानून तीन साल पहले पास हो गया था तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया?

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का क्या रुख?

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। विपक्षी दलों की मांग रही है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की शर्त से न जोड़ा जाए।

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।

भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, रूस पर प्रतिबंध वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास

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अमेरिका और रूस की तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। रूस और उसके दोस्तों को तोड़ने के लिए अमेरिका ने ब्रह्मास्त्र चल दिया है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार 7 जुलाई को रूस पर प्रतिबंध वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसका मकसद रूस से ऊर्जा खरीद करने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 टैरिफ लगाने का अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल शुक्रवार को पास कर दिया। सीनेट में इस बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पास किया गया। अब इसे अमेरिकी हाउस (कांग्रेस) में पेश किया जाएगा। इसके पहले बिल का नाम बदलकर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 किया गया। यह बिल पूर्व अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था, जिनकी पिछले महीने अचानक मौत हो गई थी।

भारत और चीन जैसे देशों के खिलाफ लगेगा 100 फीसदी टैरिफ

इस बिल का मकसद मॉस्को व तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। बिल को मंजूरी मिलने के बाद ट्रंप को भारत, चीन जैसे देशों के खिलाफ 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। साथ ही, यह उन देशों को भी निशाना बनाता है, जो तेल-गैस खरीद के जरिये रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद जारी रखे हुए हैं।

रूसी तेल और गैस आयातकों पर लगेगा प्रतिबंध

यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर 100% टैरिफ लगाने की मंजूरी देता है, जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष 5 आयातक हैं। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। तर्क दिया गया है कि इससे रूस की पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली कमाई कम होगी और मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ेगा। इस समय चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस के शीर्ष 5 ऊर्जा खरीदार हैं।

रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन

खास बात यह है कि इस बिल को रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन मिला। दोनों पार्टियों के समर्थन वाले इस बिल को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था। सीनेट में इसे 86 वोटों के साथ भारी समर्थन हासिल हुआ। केंटकी के रैंड पॉल अकेले ऐसे रिपब्लिकन थे, जिन्होंने इस कानून का विरोध किया। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के 10 सीनेटरों ने इसके विरोध में वोट किया।