छात्र आंदोलन: तीसरे दौर की वार्ता के लिए अतिथिशाला पहुंचे छात्र और मंत्रियों की टीम, कुछ ही देर में बातचीत शुरू

रांची: छात्र संगठनों और सरकार के बीच उपजे गतिरोध को सुलझाने के लिए कोशिशें तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में आज तीसरे दौर की वार्ता आयोजित की जा रही है।

प्रशासन की टीम छात्र प्रतिनिधियों को लेकर अतिथिशाला (गेस्ट हाउस) पहुंच चुकी है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से बातचीत के लिए गठित चार मंत्रियों की विशेष टीम भी अतिथिशाला पहुंच गई है।

मुख्य बिंदु:

दो दौर की बैठकें बेनतीजा: इससे पहले दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसी अंतिम सहमति पर न पहुंच पाने के कारण आज तीसरे दौर की बैठक बुलाई गई है।

कुछ ही देर में शुरू होगी बैठक: छात्र संगठन और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच अब से बस कुछ ही देर में यह अहम वार्ता शुरू होने वाली है।

माना जा रहा है कि आज की इस बैठक में दोनों पक्ष किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की पूरी कोशिश करेंगे ताकि मामले का हल निकाला जा सके।

क्विक समरी ( हाइलाइट्स):

छात्र संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता।

कहां: स्थानीय अतिथिशाला (गेस्ट हाउस)।

कौन शामिल: छात्र प्रतिनिधि और मंत्रिमंडल के चार सदस्यों की टीम।

स्थिति: कुछ ही देर में बातचीत शुरू होगी।

तिरंगा यात्रा राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का प्रतीक, यात्रा देशभक्ति की जगाती है प्रेरणा : आदित्य साहू


‘हर घर तिरंगा’ अभियान के भाजपा के द्वारा मोरहाबादी मैदान से शहीद अल्बर्ट एक्का चौक तक प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान देशभक्ति के उत्साह और हाथों में तिरंगा लिए हजारों कार्यकर्ताओं एवं आमजनों ने इस यात्रा के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव का संदेश दिया। दिल में राष्ट्रभक्ति और कदमों में देश के प्रति समर्पित इस यात्रा ने राँची की धरती पर राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संदेश दिया।

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा अभियान" आज राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी का जनआंदोलन बन चुका है। तिरंगा यात्रा राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का प्रतीक है, यह देशभक्ति की प्रेरणा जगाती है। यह सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का संदेश लेकर घर-घर, गाँव-गाँव, शहर-शहर और हर नागरिक तक पहुंच रही है। उन्होंने सभी से इस गौरवपूर्ण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आप सभी अपने घर एवं प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराएं और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं गौरव के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सहभागी बनें।

संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि तिरंगा केवल ध्वज नहीं बल्कि हमारा गौरव है। यह तिरंगा यात्रा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। राष्ट्रभक्ति, एकता और देश के प्रति समर्पण की भावना से ओत-प्रोत यह यात्रा हर भारतीय के हृदय में तिरंगे के गौरव को और अधिक सशक्त करने का संदेश दे रही है।

इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री संजय सेठ, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्र, मनोज सिंह, विधायक नवीन जायसवाल, सीपी सिंह, नीरा यादव, प्रदेश मंत्री सुनीता सिंह, पूर्व विधायक जीतू चरण राम, अनंत कुमार ओझा, रांची की मेयर रोशनी खलखो, संजीव विजयवर्गीय, आरती कुजूर, सुबोध सिंह गुड्डू, केके गुप्ता, शोभा यादव, वरुण साहू, सीमा सिंह, जितेंद्र वर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मंत्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा जतरा को दिखाई हरी झंडी, 10 हजार कलाकार हुए शामिल*

राँची। झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग श्री कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त, श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग, श्री राजीव लोचन पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, श्रीमती मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

छात्रों के समर्थन में जयराम महतो का निर्जला उपवास, 10 अगस्त के विधानसभा मार्च में होंगे शामिल

राॅंची। JLKM सुप्रीमो और डुमरी विधायक जयराम महतो रविवार को JPSC-JSSC में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में पुराने विधानसभा परिसर में एक दिवसीय निर्जला उपवास पर बैठे।

जयराम महतो ने कहा कि छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च में वह खुद शामिल होंगे। JLKM ने भी मार्च को समर्थन देने का ऐलान किया है।

हर साल 9 अगस्त को क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस ? जानिए रोचक इतिहास

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आज पूरी दुनिया में 'विश्व आदिवासी दिवस' मना रही है। आज ही के दिन यानी हर साल 9 अगस्त को झारखंड आदिवासी महोत्सव भी मनाया जाता है। मुख्यधारा से अलग रहने की वजह से आदिवासी समुदाय लंबे समय से आर्थिक और कई सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उनके इन्हीं अधिकारों के विकास और समृद्ध संस्कृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इस खास मौके पर झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन होता है।

कोलंबस दिवस से जुड़ा है आदिवासी दिवस

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार 1994 को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी वर्ष घोषित किया था। अमेरिका में 12 अक्‍टूबर को हर साल कोलंबस दिवस मनाया जाता है और वहां के आदिवासियों का मानना था कि कोलंबस उस उपनिवेशी शासन व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसके लिए बड़े पैमाने पर जनसंहार हुआ था। इसके बाद फिर कोलंबस दिवस की जगह पर आदिवासी दिवस मनाने की मागं उठी। इसके लिए 1977 में जेनेवा में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया और इस सम्‍मेलन में कोलंबस दिवस की जगह आदिवासी दिवस मनाने की मांग की गई।

विश्व आदिवासी दिवस मनाने की खास वजह

संयुक्त राष्ट्र ने 2019 में विश्व आदिवासी दिवस मनाने का एलान किया। आज आदिवासी समाज के लोगों को अपना अस्तित्व, संस्कृति और सम्मान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इसकी एक मुख्य वजह ये है कि ये लोग प्रकृति से समीप रहना ज्यादा पसंद करते हैं और जंगलों में रहते हैं जिसकी वजह से ये मुख्यधारा से कटे रहते हैं। आज जंगल घटते जा रहे हैं जिसकी वजह से इनकी संख्या भी कम होती जा रही है। आदिवासी समाज के लोगों का मुख्य आहार आज भी पेड़-पौधों से जुड़ा है, इनके धर्म-त्योहार भी प्रकृति से जुड़े हैं। दुनिया भर में 500 मिलियन के करीब आदिवासी रहते हैं और 7000 भाषाएं बोलते हैं, 5000 संस्कृतियों के साथ दुनिया के 22 प्रतिशत भूमि पर इनका कब्जा है। इनकी वजह से पर्यावरण संरक्षित है। साल 2016 में 2680 ट्राइबल भाषाएं विलुप्त होने की कगार पर थीं। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने इन भाषाओं और इस समाज के लोगों को समझने और समझाने के लिए 2019 में विश्व आदिवासी दिवस मनाने का एलान किया।

विश्व आदिवासी दिवस मनाने का उद्देश्य

विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य केवल आदिवासी समुदायों की संस्कृति का उत्सव मनाना ही नहीं है, बल्कि उनके उनके अधिकारों, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार से जुड़े जैसे मुद्दों पर समाज के साथ सरकार का ध्यान आकर्षित करना भी है। यह दिन हमें उनकी पहचान और विरासत को संरक्षित करने की याद दिलाता है कि विकास के साथ आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा और प्रकृति से उनके संबंधों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

भारत में आदिवासी समुदायों की बड़ी आबादी

भारत में भी आदिवासी समुदायों की एक बड़ी आबादी। झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा समेत कई राज्यों में अलग-अलग जनजातीय समुदाय के लोग रहते हैं। मध्‍य प्रदेश की बात कहें तो यहां 46 आदिवासी जनजातियां रहती हैं, जिसमें एमपी की कुल जनसंख्या के 21 फीसदी लोग आदिवासी समुदाय के हैं। वहीं झारखंड की कुल आबादी का करीब 28 फीसदी आदिवासी समाज के लोग हैं। झारखंड में संथाल, मुंडा, उरांव, हो, खड़िया, बिरहोर, पहाड़िया सहित कई जनजातियां हैं। जबकि मध्य प्रदेश में गोंड, भील, बैगा, सहरिया और कोरकू जैसे आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं। भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक गोंड है। गोंड एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है, जिनकी संख्या 30 लाख से अधिक है। जो मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में रहते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में संथाल, बंजारा, बिरहोर, चेरो, हो, खोंड, लोहरा, मुंडा, पहाड़िया और उरांव समेत कई अन्य जनजातीय समुदाय अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के साथ जीवन जी रहे हैं।

मोरहाबादी में सजेगा सिनेमा का दरबार!

रांची के मोरहाबादी मैदान में 9 और 10 अगस्त को आयोजित 'आदिवासी महोत्सव' के दौरान 'अमर शहीद चाँद-भैरव मुर्मू मंडप' में Jharkhand Film Development Corporation Limited (JFDCL) की ओर से विशेष फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया जा रहा है।

इस दौरान आदिवासी जीवन, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई बेहतरीन शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन और फिल्म मेकिंग से जुड़ी मास्टर क्लास भी आयोजित होगी, जहाँ आपको सीधे फिल्म इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स से जुड़ने और उनसे सीखने का शानदार मौका मिलेगा।

फिल्म मेकिंग में अपना करियर बनाने वालों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी!

अगर आप फ्यूचर में फ़िल्म मेकिंग की दुनिया से जुड़ना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन अवसर है। हाल ही में 22 जुलाई 2026 को माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन जी की गरिमामयी उपस्थिति में JFDCL और SRFTI (Satyajit Ray Film and Television Institute) के बीच एक ऐतिहासिक MoU साइन किया गया है।

इसके तहत जल्द ही सूचना भवन, रांची में एक नया संस्थान— 'झारखंड फिल्म टेलीविजन इंस्टीट्यूट' (Jharkhand Film Television Institute) खुलने जा रहा है। इस संस्थान में आने वाले समय में फिल्मों से जुड़ी शूटिंग, एडिटिंग और डायरेक्शन की प्रोफेशनल क्लासेज दी जाएंगी।

तो अगर आप सिनेमा, फिल्म मेकिंग और झारखंड की संस्कृति से जुड़ी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह शानदार मौका हाथ से बिल्कुल न जाने दें!

स्थान: अमर शहीद चाँद-भैरव मुर्मू मंडप, मोरहाबादी मैदान, रांची

दिनांक: 9 और 10 अगस्त

_मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शहीद निर्मल महतो के 39वें शहादत दिवस पर उलियान में दी श्रद्धांजलि_

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज शहीद निर्मल महतो जी के 39वीं शहादत दिवस पर उलियान, जमशेदपुर स्थित समाधि स्थल पहुंचे। उन्होंने झारखंड आंदोलन के महानायक एवं अमर शहीद निर्मल महतो जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शहीद निर्मल महतो जी की प्रतिमा पर मल्यार्पण कर उन्हें शत्-शत् नमन किया। साथ ही उनकी याद में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की धरती वीरों की भूमि रही है।

अमर शहीद निर्मल महतो जैसे महान आंदोलनकारियों और मार्गदर्शकों का जीवन समाज के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा। लम्बे संघर्ष और अनगिनत आंदोलनकारियों के समर्पण के बाद झारखंड राज्य को अपनी अलग पहचान मिली है। वीर शहीदों के विचार और उनके आदर्श हमेशा समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आदिवासी, मूलवासी, किसान, गरीब और आम नागरिकों के हक-अधिकारों की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक संकल्प है। शहीदों के त्याग, समर्पण और संघर्ष के मार्ग पर चलते हुए राज्य के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का संकल्प निरंतर जारी रहेगा। जन-जन को विकास योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता, भाईचारे और सौहार्द को मजबूत बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

लोगों की एकजुटता एवं परस्पर सहयोग इस राज्य की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की जनता की एकजुटता और परस्पर सहयोग ही इस राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। शहीदों के सपनों के अनुरूप एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध राज्य के निर्माण के लिए सभी को मिलकर बिना डरे, बिना रुके आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर साल आज के दिन सुबह से लेकर शाम तक एक महान आंदोलनकारी, एक महान योद्धा के याद में लोग यहां पहुंचते हैं। अमर शहीद निर्मल महतो जी के बारे में कुछ भी कहा जाए बहुत कम होगा, लेकिन एक बात आज जरूर कहूंगा कि "जब तक सूरज-चांद रहेगा निर्मल महतो का नाम रहेगा" यह नारा हम सभी के लिए प्रेरणादायक बनता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे महान लोगों के मार्गदर्शन और संघर्ष से राज्यवासियों का विश्वास, आशीर्वाद और सामूहिक शक्ति एकजुट करने में हम सफल रहे हैं। यही वजह है कि मैं झारखंड को ‘वीरों की भूमि’ कहता हूं। इस धरती पर अनगिनत ऐसे महान लोग हुए, जो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन का जो समय झारखंड को दिया, वह पूरी तरह समर्पित भाव से दिया। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने आदिवासी-मूलवासियों को एकजुट करने, उनके हक-अधिकार की आवाज को मजबूती देने और न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष, त्याग और समर्पण झारखंड की सामाजिक चेतना और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

झारखंड वीरों की धरती, एक वीर की कहानी सुनाएंगे, तो दूसरे वीरों की कड़ियाँ जुड़ती चली जाएगी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड के लोगों की एकजुटता को पूरा देश लोहा भी मानता है। आज हमारी इसी ताकत को, राज्य की एकजुटता को, बड़े योजनाबद्ध तरीके से अपना ताकत बनाने में कुछ षड्यंत्रकारी लोग लगे हैं, लेकिन चिंता मत कीजिए, जब-जब बाहर के लोगों ने यहां के लोगों पर आक्रमण करने की कोशिश की है, तब-तब यहां के लोगों ने एकजुटता दिखाकर उनसे लोहा लेने का भी काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम सभी लोग वीर शहीद निर्मल महतो जी के चरणों पर शीश झुकाने आए हैं। इससे कुछ दिन पहले ही लम्बे समय तक हमलोगों के बीच मार्गदर्शक के रूप में रहे स्मृति शेष आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की भी पुण्यतिथि थी। उस दिन भी हम सभी लोग बड़ी संख्या में एकजुट होकर उनको नमन किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है। एक वीर की कहानी सुनाएंगे, तो दूसरे वीरों की कहानी की कड़ियाँ जुड़ती चली जाएगी। आज के दिन हमसबों का यहां आना इस बात का परिचायक है कि जो वीर शहीद हमारे बीच आज शारीरीक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और आदर्श हमेशा हमारे जीवन में साथ चलेगा।

शहीदों के प्रेरणा से जीवन के सफर में आगे बढ़ते रहेंगे

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सभी लोग इसी तरीके से अपने वीर शहीदों, मार्गदर्शकों को अपना प्रेरणा बनाते हुए अपने जीवन के सफर को तय करेंगे और मजबूती के साथ बिना डरे, बिना रुके आगे बढ़ते रहेंगे।

मौके पर विधायक श्रीमती सबिता महतो, विधायक श्री समीर मोहंती, विधायक श्री संजीव सरदार, विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन, पूर्व मंत्री श्री बन्ना गुप्ता सहित अन्य गणमान्य एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन रांची में नवनियुक्त सहायक बिशप आनंद डेविड खाल्खो के अभिषेक समारोह में शामिल हुए

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज डॉ. कामिल बुल्के पथ (पुरुलिया रोड), रांची स्थित आर्चबिशप हाउस में आयोजित रांची महाधर्मप्रांत

के नवनियुक्त सहायक बिशप श्रद्धेय आनंद डेविड खाल्खो के

अभिषेक एवं प्रतिष्ठापन समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्रद्धेय आनंद डेविड खाल्खो को नई जिम्मेदारी ग्रहण करने पर

हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

इस अवसर पर आर्चबिशप विंसेंट आइंद, फादर अजित कुमार खेस सहित अन्य धर्मगुरु एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

आदिवासी संस्कृति का भव्य संगम: मोरहाबादी में 2 दिवसीय महोत्सव का आगाज*

झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं विरासत को समर्पित दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव 2026 का शुभारंभ कल से रांची के मोरहाबादी मैदान में भव्य रूप से होगा। महोत्सव के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग श्रीमती वंदना दादेल ने शुक्रवार को आयोजन स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान श्रीमती दादेल ने महोत्सव स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों एवं विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करते हुए गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अपर मुख्य सचिव ने वीवीआईपी आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, पार्किंग एवं भीड़ प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि महोत्सव में बड़ी संख्या में आने वाले आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए, इसके लिए सभी मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ रूप से उपलब्ध कराई जाएं।

इस दौरान उन्होंने मुख्य मंच, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के स्टॉल, पार्किंग क्षेत्र सहित समस्त व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों को आयोजन शुरू होने से पूर्व सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।

श्रीमती दादेल ने कहा कि आदिवासी महोत्सव राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय एवं गंभीरता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान कल्याण आयुक्त श्री कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग श्री राजीव लोचन बक्शी, संयुक्त निदेशक श्री आनंद, निदेशक टीआरआई श्री आलोक एस. कच्छप सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एजेंसी प्रतिनिधि उपस्थित थे।

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता