डिग्री हाथ में,पर हाथों में है स्टेयरिंग,पढ़ा-लिखा हूँ,पर मज़बूरी*
रिपोर्ट/लालजी
सुल्तानपुर,सड़क पर चलते-चलते अगर आपको एक ऑटो ई-रिक्शा दिखे जिस पर लिखा हो एजुकेटेड रिक्शा ड्राइवर तो आप एक बार जरूर रख कर देखेंगे ऐसा ही सुल्तानपुर की सड़कों पर एक ऑटो ई रिक्शा दौड़ रहा है जो गरीबी और मेहनत की कहानी को बयां कर रही है।
एजुकेटेड रुबीना ने बताते हुए कहा कि मैं इंगिलश से एम.ए.और ए.एन.एम.की डिग्री हासिल किया है,मै दिल्ली में जॉब किया और गुड़गांव मेदांता में भी मेरा सलेक्शन हुआ था बीच में भी एक वेकँसी आई थी लेकिन वहाँ हमें परेशान करने लगे थे,स्टॉफ पेसेंट के टॉयलेट साफ करने के लिए कहने लगे,तो मैंने रिजाइन दे दिया,इसके बाद जॉब के लिए मैंने कहीं ट्राई नहीं किया,मैं डेढ़ साल तक बैठी रही उसके बाद मै रिक्शा चलाना शुरू कर दिया।
रुबीना ने कहा कि घर की ऐसी स्थिति थी कि माता पिता ने जमीन को गिरवी रख कर नर्सिंग कराया था और सभी को यह उम्मीद थी कि कुछ स्थिति सुधरेगी, रिक्शा चलाना मज़बूरी थी, लेकिन लोग हमें अलग नजरों से देखते थे और परेशान करते थे। इन्होने रिक्शे पर अपने स्लोगन लिखवा रखा था एजुकेटेड रिक्शा ड्राइवर जिसका मतलब था कि
पढ़ा-लिखा ड्राइवर रुबीना अभी पढ़ाई कर रही है साथ में सरकारी नौकरी का इंतजार कर है और नीट की तैयारी भी कर रही है।
रुबीना ने कहा कि सरकार से यह उम्मीद कर रही है कि कोई उनको मेंटली टार्चर और परेशान न करें, ज़ब से गुड़गांव से जॉब छोड़कर आई है तब से वह हिम्मत नहीं जूटा पा रही कि कही जॉब कर लूँ, बस उनको परमानेंट जॉब का इंतजार है। जो युवा इस स्थिति से गुजर रहे है उनके लिए वाह सोचती है कि वह अपनी पढ़ाई और तेरी करते रहे कभी हिम्मत न हारें, मैं खुद हिम्मत नहीं हार रही हूँ और मैं 12-12,13-13 घंटे रिक्शे भी चला रही हूँ पढ़ाई भी करती हूँ।
हिम्मत नहीं हार रही हूँ कोशिश करती हूँ कि सोचती हूँ मैं हार मान जाऊं जॉब के चककर में, न रहूं,जॉब छोड़ दूँ लेकिन फिर भी नहीं मान रही हूँ,क्योंकि मुझे जॉब चाहिए,अपनी कंडीशन सही करना है और समाज का क्या बहुत परेशान करते है।
"मेरी नजर अभी मंजिल की तरफ है।* *चार लोग क्या सोचेंगे,ये सोचने का टाइम नहीं है"।।*
यदि पल भर के लिए मैं वेजमीर हो जाता।* "तो यकीन मनोनीत मैं कब का अमीर हो जाता"।।*जैसे इमानदारी मेरा दिमाग में भरा रहता है क्योंकि साथ में बेईमानी नहीं करनी है किसी के साथ गलत नहीं करना है जैसे कि अस्पतालों इंजेक्शन लगाना हो एक्सपायरी न हो जिससे कि उसको कोई नुकसान न हो, किसी को दुख न पहुंचे किसी को नुकसान ना पहुँचाऊ। एक और स्लोगन है
*"तरक्की की फसल हम भी काट लेते।*............. *थोड़े से तलवे हम भी चाट लेते"।।*
रुबीना का कहना कि जॉब एक तरफ से गुलामी लगती है गुलामी कि तरह लगती है मुझे गुलामी पसंद नहीं है,मैं आजाद की जिंदगी की तरह जीना चाहती हूँ, और ज़ब से रिक्शा चलाना शुरू किया है।
मतलब है कि जॉब में है कि दूसरे के इच्छा के अनुसार हिसाब से जाना पड़ता है। और अपना रिक्शा चलाना अपनी मर्जी है और ज़ब चाहे बंद करके रख दो, और जॉब है कि दूसरे हिसाब से करना पड़ता है।
ई-रिक्शा यूनियन अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि रुबीना ने हमसे रिक्शा चलाने के लिए सम्पर्क किया, तो हमने कहा जों भी हो सकेगा मैं पूरा सहयोग करूँगा, उन्होंने बताया कि रुबीना कि घर कि स्थिति ठीक नहीं है वाह रिक्शा चला कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करती है। लड़की हो या फिर लड़का काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता, बस ईमानदारी होना चाहिए और बड़ी ईमानदार है।
मकान मालिक बरकत अली ने बताया कि वाह रूम ढूढते हुए मेरे पास पहुंची थी, उसने अपनी सारी परेशानिया बताई,उन्होंने कहा कि बेटा मैं क्या सहायता कर सकता हूँ,उसकी घर कि स्थिति ठीक नहीं है वाह अपनी पढ़ाई के साथ साथ घर का भी खर्च उठाती है। वह बहुत संघर्षशील लड़की है। जों कि आजकल कि लड़की यह सब नहीं कर पति है लेकिन वह बहुत मेहनती लड़की है।
Jul 31 2026, 01:07
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