JPSC के सवालों से भाग रही कांग्रेस-जेएमएम सरकार, भाजपा के आंदोलन से पहले बौखलाई कांग्रेस : अशोक बड़ाईक

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा के बयान को झूठ, राजनीतिक हताशा और युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने की असफल कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को होने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के ऐतिहासिक JPSC घेराव से घबराकर कांग्रेस और झामुमो के नेताओं की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि यदि झामुमो-कांग्रेस सरकार के दामन पर कोई दाग नहीं है तो वह JPSC को लेकर उठ रहे सवालों से भाग क्यों रही है? 14वीं JPSC का परिणाम आधी रात में, वह भी आयोग के सक्षम हस्ताक्षर के बिना क्यों जारी किया गया? कटऑफ सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को गोपनीय क्यों रखा गया? उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड रही एजेंसी को भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई? इन सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाकर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालना चाहती है।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि 22 जुलाई का JPSC घेराव किसी दल का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य, उनके सम्मान और उनके अधिकारों का आंदोलन है। प्रदेशभर से हजारों छात्र, अभ्यर्थी और भाजयुमो कार्यकर्ता रांची पहुंचकर सरकार को यह संदेश देंगे कि अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डाले। कांग्रेस के दस वर्षीय शासनकाल में AIPMT, AIEEE, AIIMS, CBSE सहित अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली आम बात बन चुकी थी। लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार ने न पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कोई कठोर कानून बनाया, न कोई ठोस कार्रवाई की और न ही कभी जवाबदेही तय की। कांग्रेस की चुप्पी ने ही पेपर लीक माफियाओं के हौसले बुलंद किए।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार देश में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हुई। केंद्र सरकार ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू कर स्पष्ट संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जांच एजेंसियों को सक्रिय किया और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए पुनः परीक्षा कराकर समयबद्ध तरीके से परिणाम घोषित किया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि पेपर लीक करने वाले युवाओं के सपनों के अपराधी हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो सरकार दूसरों पर उंगली उठाने से पहले झारखंड के युवाओं को जवाब दे कि JPSC में पारदर्शिता क्यों नहीं है? भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं? और आखिर सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है?

उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड के युवाओं के न्याय की लड़ाई लड़ रही है और लड़ती रहेगी। जब तक JPSC से जुड़े प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच, पूरी पारदर्शिता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, भाजपा का संघर्ष सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।

रांची: आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, डीसी मंजूनाथ भजन्त्री का सख्त आदेश

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री से आज दिनांक- 21 जुलाई 2026 को समाहरणालय ब्लॉक-ए स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आदिवासी समुदाय बेयासी गांव, प्रखंड चान्हो के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत करते हुए जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की मांग की।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने शिकायत को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अंचल अधिकारी, चान्हो को निर्देशित किया कि शिकायत पर कार्रवाई करते हुये स्थानीय थाना (चान्हो थाना) के सहयोग से पूरी घटना की जांच करें और यदि अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तुरंत हटाकर प्रभावित आदिवासी परिवारों को उनके वैध अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करें।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा,

“आदिवासी समुदाय हमारी जिले की रीढ़ हैं। उनकी जमीन से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत को जिला प्रशासन शून्य सहनशीलता के साथ देखता है। कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

जिला प्रशासन, रांची ने स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी विवादों में कानून के अनुसार सख्ती बरती जाएगी।

सीएम हेमन्त सोरेन: वन क्षेत्रों का डिजिटल रिकॉर्ड 1 महीने में तैयार करें, इको-टूरिज्म और उपयोगिता आधारित पौधारोपण पर जोर

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में राज्य के वन संसाधनों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक प्रबंधन को नई दिशा प्रदान किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य गठन के बाद से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का टेक्निकल एवं डिजिटल रिकॉर्ड एक माह के भीतर तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिससे एक क्लिक पर पूरे राज्य के वन क्षेत्रों का अवलोकन कर उनके वास्तविक स्वरूप, संरचना और वर्तमान स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सके, इसके लिए वन क्षेत्रों के डिजिटल मैप की लेयरिंग सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद वन क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। कहीं वनों का विस्तार हुआ है तो कहीं इको-टूरिज्म परियोजनाएं और गेस्ट हाउस विकसित हुए हैं। दूसरी ओर, वनों की कटाई, खनन क्षेत्रों के विस्तार तथा वन्यजीव अभयारण्यों एवं राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं में भी बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में वन क्षेत्रों का अद्यतन एवं वैज्ञानिक डिजिटल दस्तावेज तैयार करना समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वनों की सुरक्षा और उनका सतत विकास राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने तथा सूखे एवं अनुपयोगी पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई की योजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक नए पौधे लगाए जा सकें और हरित आवरण में निरंतर वृद्धि हो।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निदेशित किया

कि वन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के माध्यम से बीज गिराकर वन क्षेत्रों के विकास के लिए एक बेहतर कार्य योजना तैयार करने, जंगली हाथियों के हमलों से मृत व्यक्तियों के आश्रितों तथा क्षतिग्रस्त फसल एवं घरों के मुआवजा भुगतान में तत्परता बरतने का निर्देश दिया।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि झारखंड में इको टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं अतएव इस निमित्त एक बेहतर प्लान के साथ आगे बढ़ें। वन विभाग तथा पर्यटन विभाग समन्वय स्थापित कर इको टूरिज्म के विकास को गति प्रदान करें।

पौधारोपण कार्य उपयोगिता आधारित और स्थानीय इको सिस्टम के अनुरूप हो

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पौधरोपण केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि उपयोगिता आधारित और स्थानीय इको सिस्टम के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि ऐसे वृक्षों का चयन किया जाए, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका, पशुओं की जरूरतों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने वन एवं गैर-वन क्षेत्रों में महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर तथा तसर उत्पादन के लिए उपयोगी अर्जुन जैसे वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ये वृक्ष न केवल जैव विविधता को समृद्ध करेंगे, बल्कि ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। महुआ, जामुन, कटहल, आवला, चिरौंजी और बैर जैसे फलदार वृक्ष स्थानीय लोगों को पोषण एवं अतिरिक्त आय देंगे, जबकि पलाश, कुसुम और अर्जुन जैसे वृक्ष लाह एवं तसर उद्योग को नई गति प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की बड़ी आबादी ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए पौधरोपण की योजना ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों को वन उपज का प्रत्यक्ष लाभ मिले। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अनुपयोगी वृक्ष लगाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि ऐसे वृक्ष न तो पशुओं के लिए उपयोगी होते हैं और न ही स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाते हैं। इसलिए पौधरोपण की पूरी रणनीति स्थानीय जरूरतों और आर्थिक उपयोगिता को ध्यान में रखकर तैयार की जाए।

"एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं" योजना का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को शहरी विकास से जोड़ते हुए कहा कि शहरों को बचाने के लिए भी पौधरोपण आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही राज्य सरकार द्वारा "पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ" योजना का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि अधिकाधिक नागरिक इस अभियान से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत एक पेड़ लगाने पर पांच यूनिट बिजली नि: शुल्क प्रदान किये जाने की योजना है।

वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन राज्य सरकार की प्राथमिकता

बैठक में मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से जुड़े वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि पात्र लाभुकों को बिना अनावश्यक विलंब के वन पट्टों का वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें वन पट्टा का लाभ समय पर मिल सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं विभाग द्वारा संचालित सभी वन योजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि इनका लाभ स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि वन संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका, पर्यटन और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिल सके।

काजू, बैम्बू सहित विभिन्न व्यावसायिक खेती पर करें फोकस

बैठक में मुख्यमंत्री ने काजू, बैम्बू सहित विभिन्न व्यावसायिक खेती (Cashew Farming) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को बड़े भू-भागों की पहचान कर, वहां व्यापक स्तर पर काजू एवं बैम्बू के पौधे लगाने और राज्य में काजू उत्पादन की संभावनाओं को विकसित करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों के लिए आय के नए स्रोत सृजित हो सकें। उन्होंने बांस (बैम्बू) के व्यापक रोपण और उसके सुनियोजित विकास पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बांस आधारित उद्योगों और बैम्बू क्राफ्ट को बढ़ावा देकर राज्य में बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पारंपरिक हस्तशिल्प को नया बाजार भी मिलेगा। शहरी क्षेत्रों के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने अकाशिया सहित अन्य छायादार पेड़-पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शहरों में हरित आवरण बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और लोगों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थित शहरी पौधरोपण अभियान चलाया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में अधिकाधिक पौधरोपण कर हरीयाली लाने, पर्यावरणीय संतुलन बनाने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसी सोच के अनुरूप उपयोगी, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी पौधों को प्राथमिकता देकर झारखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।

प्राकृतिक संपदा, घने जंगल, वन्यप्राणी एवं समृद्ध जैव विविधता झारखंड की पहचान

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, वन्यप्राणियों एवं समृद्ध जैव विविधता से है। इन प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण तथा संवर्द्धन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने वनों के संरक्षण, मानव एवं वन्यजीवों के संघर्ष की रोकथाम, विकास कार्यों को गति प्रदान करने एवं पौधारोपण तथा वनों की कटाई रोकने के लिए सख्त कदम उठाये जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने संयुक्त वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े योजनाओं एवं कार्यक्रमों तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं के प्रगति की विस्तृत जानकारी अधिकारियों से ली तथा उन्हें कई अहम दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की आजीविका एवं पर्यावरणीय संतुलन को दृष्टिगत रखते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश को दिए।

डिजिटल रूप से जुड़े रहे सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारी

झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से ऑनलाइन माध्यम से सीधा संवाद स्थापित कर वन विभाग की योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दुमका, जामताड़ा और कोडरमा के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से सीधे बातचीत कर उनके जिलों में वनपट्टा वितरण की वर्तमान कार्य प्रगति, काजू, बैम्बू सहित अन्य पौधरोपण कार्य, इको-टूरिज्म विकास, तथा अन्य प्रमुख योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कहा कि प्रत्येक योजना का परिणाम जनहित और वन संरक्षण के लक्ष्यों के अनुरूप दिखाई देना चाहिए।

बैठक के दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण के उपायों, इन्वायरनमेंटल कंपनसेशन की प्रगति पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मामलों के त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण के लिए जनविश्वास एप की उपयोगिता और उसके प्रभावी संचालन पर भी विमर्श किया गया।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी पी०, अनु०जनजाति, अनु०जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री कृपानंद झा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन बल प्रमुख (PCCF HoFF) श्री संजीव कुमार, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ श्री रवि रंजन, पीसीसीएफ (इडी) श्री ए० टी० मिश्रा, झारखंड जैव विविधता पर्षद के चेयरमैन श्री विश्वनाथ शाह, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ श्री एस०आर० नटेश, एम०डी० फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन श्री जब्बर सिंह, एपीसीसीएफ श्री डी० वेंकटेश वर्लू, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव श्री राजीव लोचन बक्शी, आरसीसीएफ दुमका श्री आर० थंगा पांडियन, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर सचिव श्री भोर सिंह यादव, अपर सचिव श्री दिलीप तिर्की सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

CEO झारखण्ड का खंडन: SIR में 30% आदिवासी मतदाता हटने की खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा है कि राज्य में वर्तमान में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम का इन्यूमरेशन फेज चल रहा है। इस दौरान मतदाताओं के इन्यूमरेशन फॉर्म भरने, विगत विशेष गहन पुनरीक्षण के मतदाता सूची से मैपिंग करने, भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने एवं इन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इन्यूमरेशन फेज में यह बता पाना कि कितने प्रतिशत मतदाताओं के इन्यूमरेशन फॉर्म में तार्किक विसंगतियां प्राप्त हुई है, संभव नहीं है। उन्होंने "झारखंड जनाधिकार महासभा" द्वारा गलत उद्देश्य एवं मतदाताओं को दिग्भ्रमित करने हेतु सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाई जा रही सूचना – "झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में एक-एक बूथ में 30% मतदाताओं के नाम SIR की logical discrepancy सूची में दिख रहे हैं। इसके अलावा हर बूथ में कई मतदाता हैं जिनके पूर्वजों का नाम 2003 सूची में नहीं है। ऐसे में लाखों आदिवासी नोटिस के शिकार और परेशान होंगे और नाम कट सकता है।" – बिल्कुल असत्य एवं वास्तविकता से परे है। उन्होंने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से संबंधित सभी स्टेकहोल्डर से अनुरोध किया है कि इस तरह के मिसइनफॉरमेशन को किसी प्रकार से बढ़ावा न दें। वर्तमान मतदाता सूची के प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को एसआईआर के माध्यम से नए मतदाता सूची में जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

तार्किक विसंगतियों की पहचान एवं निराकरण मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने का एक चरण

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के क्रम में तार्किक विसंगतियों की पहचान एवं निराकरण मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने का एक चरण है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के उम्र एवं संबंध जैसे नाम, पिता, पति, पत्नी, माता आदि में लिपिकीय त्रुटियों को पहचानकर, उन्हें मतदाताओं के माध्यम से सत्यापित करते हुए दूर किया जाएगा। इस हेतु संबंधित मतदाता से आवश्यकता पड़ने पर उनके ईआरओ/एईआरओ द्वारा नोटिस जारी करते हुए, आवश्यक दस्तावेज लेकर इसका सत्यापन कर विसंगतियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा, कि तार्किक विसंगति को दूर करने का मुख्य उद्देश्य है, कि एसआईआर के उपरांत प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं का विवरण शुद्ध–शुद्ध एवं त्रुटिरहित आ सके।

आदिम जनजाति एवं जनजाति समुदाय के मतदाताओं को अंचल कार्यालयों में उपलब्ध खतियान के आधार पर दी जाएगी हर संभव सहायता

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि झारखंड के वैसे आदिम जनजाति एवं जनजाति समुदाय के मतदाता जिनकी जानकारी में कोई तार्किक विसंगति आने पर उनका या जिनकी मैपिंग नहीं हुई है उन्हें, अंचल कार्यालयों में उपलब्ध खतियान अथवा वंशावली के आधार पर एईआरओ, ईआरओ एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी मतदाता सूची में पंजीकरण करवाना सुनिश्चित करेंगे। झारखण्ड में आदिम जनजाति एवं जनजाति का विवरण, खतियान एवं अन्य अभिलेखों के माध्यम से एईआरओ, ईआरओ एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालयवम उपलब्ध है। अतः इस तरह के भ्रामक एवं दुष्प्रचार के बहकावे में आने की कोई आवश्यकता नहीं है।

वृद्ध, दिव्यांग एवं अन्य दूरस्थ आदि श्रेणी के मतदाता के सहयोग के लिए वोलेंटियर्स कर रहे अथक प्रयास

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची में हर पात्र भारतीय नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो, इस हेतु चुनाव आयोग कृतसंकल्पित है। उन्होंने कहा कि राज्य में वृद्ध, दिव्यांग एवं अन्य दूरस्थ आदि श्रेणी के मतदाताओं की सहायता के लिए विशेष वोलेंटियर्स प्रत्येक मतदान केंद्र पर नियुक्त किए गए हैं। ये वोलेंटियर्स इन मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म भरने में मदद कर रहे हैं और मतदाता सूची के ड्राफ्ट पब्लिकेशन के बाद यदि आवश्यकता पड़ी, तो जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी समन्वय एवं सहयोग करेंगे।

22 जुलाई को बीएलओ एवं बीएलए-2 की बैठक एवं चुनाव पाठशाला का आयोजन

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए इस सूची से एएसडीडी सूची को अलग कर इसे हटाने का कार्य किया जाता है। इस हेतु बीएलओ एवं बीएलए-2 द्वारा इन्यूमरेशन फेज में 2 बार बैठक आयोजित कर अपने मतदान केंद्रों के वर्तमान मतदाता सूची से एएसडीडी सूची को बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस हेतु बीएलओ द्वारा घर-घर भ्रमण के दौरान इसका सत्यापन किया गया साथ ही चुनाव पाठशाला में इसे पढ़कर भी सुनाया गया है। एएसडीडी सूची को अंतिम स्वरूप देने हेतु 22 जुलाई को बीएलओ एवं बीएलए-2 की बैठक के साथ-साथ चुनाव पाठशाला का भी आयोजन किया गया है । इस अवसर पर मतदाताओं से अनुरोध है कि वे अवश्य इसमें शामिल हों। साथ ही सभी मान्यता प्राप्त राजनीति दलों से अनुरोध है कि वे अपन बीएलए-2 की शत प्रतिशत उपस्थिति मतदान केंद्र पर सुनिश्चित करवायेंगे एवं एएसडीडी सूची को भलीभांति जांच कर इसे सत्यापित भी करेंगे ।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा है कि एक त्रुटिरहित और शुद्ध मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र का आधार है। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर के कार्य में जुटे सभी मतदाताओं, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2, बूथ लेवल अवेयरनेस ग्रुप और वोलेंटियर्स की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक सहभागी प्रक्रिया है, इससे जुड़े सभी स्टेकहोल्डर का सहयोग अपेक्षित है । उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक जिनका वर्तमान मतदाता सूची में नाम है,–का पंजीकरण मतदाता सूची में सुनिश्चित किया जाएगा लेकिन सभी स्टेकहोल्डर यह शत प्रतिशत सुनिश्चित करेंगे कि कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो ।

झारखंड में 22 जुलाई को बीएलओ-बीएलए-2 की अंतिम बैठक, चुनाव पाठशाला भी आयोजित

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने सोमवार को निर्वाचन सदन से सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के इन्यूमरेशन फेज की प्रगति और आगामी रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।

22 जुलाई को होगी बीएलओ एवं बीएलए–2 कि तीसरी बैठक

श्री के. रवि कुमार ने बताया कि इन्यूमरेशन फेज के तहत 22 जुलाई, 2026 को सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर और बूथ लेवल एजेंट की तीसरी तथा अंतिम बैठक निर्धारित है।निम्नलिखित कार्यों के लिए यह बैठक अति महत्वपूर्ण:

चुनाव पाठशाला: बैठक के दौरान चुनाव पाठशाला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अनुरोध है कि वे अपने संबंधित बीएलए-2 की उपस्थिति उक्त बैठक में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। इसके साथ–साथ मतदाताओं को भी बैठक में भाग लेने के लिए प्रेरित करें जिससे यदि किसी कारण से सूची में त्रुटि पाई जाती है तो उसे ससमय सुधार जा सके।

एएसडीडी (ASDD) सूची को अंतिम रूप देना: उक्त बैठक में बीएलओ और बीएलए-2 से वैरिफाई कराकर एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ एवं डुप्लीकेट सूची वाले मतदाताओं की सूची को अंतिम रूप दी जाएगी।

ड्राफ्ट प्रकाशन: इस अंतिम सूची का प्रकाशन 5 अगस्त, 2026 को मतदाता सूची के ड्राफ्ट पब्लिकेशन के साथ किया जाएगा।

इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने और डिजिटाइजेशन पर जोर

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मतदाताओं और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 से अपील की है कि वे मतदाताओं द्वारा भरा हुआ और हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म 19 जुलाई तक संबंधित बीएलओ के पास जमा कराना सुनिश्चित करें । समय पर फॉर्म मिलने से इन्यूमरेशन फेज में इन्यूमरेशन फॉर्म का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण (यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक ही परिवार या घर के सभी मतदाता एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में शामिल हों।) का कार्य समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकेंगे।

किसी कारणवश इन्यूमरेशन फॉर्म न मिलने अथवा खराब हो जाने पर अपने बीएलओ से करें संपर्क

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी न कहा कि यदि किसी भी कारणवश वर्तमान मतदाता सूची के किसी मतदाता का इन्यूमरेशन फॉर्म अप्राप्त है अथवा खराब हो गया हो, तो वे तुरंत अपने बीएलओ से संपर्क करें। बीएलओ संबंधित ईआरओ/ एईआरओ कार्यालय से संपर्क कर इसे संबंधित मतदाता को उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान मतदाता सूची के प्रत्येक मतदाता के इन्यूमरेशन फॉर्म का पीडीएफ संबंधित ईआरओ/एईआरओ कार्यालय में उपलब्ध है। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त दलों से इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य ट्रेनिंग नोडल पदाधिकारी श्री देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह सहित सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

स्वर्णरेखा महिला समिति द्वारा 'प्रगति 2.0 टेलरिंग सेंटर' का शुभारंभ, महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

स्वर्णरेखा महिला समिति की अध्यक्ष श्रीमती रेणु सहगल द्वारा 20 जुलाई 2026 को पीवीयूएनएल (PVUNL) पतरातू टाउनशिप शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 'प्रगति 2.0 टेलरिंग सेंटर' का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस पहल का उद्देश्य आसपास के गांवों—हनुमानगढ़ी, शाह कॉलोनी एवं कटिया—की महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। चयनित महिलाओं को सप्ताह

में छह दिन नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे कौशल विकसित कर स्वरोजगार एवं रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। इस अवसर पर श्रीमती रेणु सहगल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही वास्तविक रूप से संभव है।

समिति का यह प्रयास महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उद्घाटन समारोह में समिति के सदस्य, पीवीयूएनएल के अधिकारी तथा स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

झारखण्ड के लिए गर्व का पल: संथाली फिल्म 'आंगेन' के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

राँची, झारखण्ड।

मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने संथाली फिल्म "आंगेन" (Angen) के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 'सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक' (Best Debut Film of a Director) की श्रेणी में 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।युवा फिल्म निर्माता को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:"मैं श्री रवि राज मुर्मू को इस शानदार उपलब्धि पर अपनी हार्दिक बधाई देता हूँ।

यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना न केवल उनके लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है, बल्कि झारखण्ड के लोगों और संताली भाषा के लिए भी गर्व की बात है। उन्होंने अपनी फिल्म 'आंगेन' के माध्यम से राष्ट्रीय मंच पर संथाली भाषा, संस्कृति और कहानियों की समृद्धि को बेहद खूबसूरती से प्रदर्शित किया है।

"मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान झारखण्ड से उभरती हुई बेहतरीन रचनात्मक प्रतिभाओं को दर्शाता है। साथ ही, यह कला, संस्कृति और देशज सिनेमा के एक जीवंत केंद्र के रूप में राज्य की बढ़ती पहचान को और मजबूत करता है।

उन्होंने विश्वास जताया कि रवि राज मुर्मू की यह सफलता झारखण्ड के युवा फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को प्रेरित करेगी। इससे वे सार्थक सिनेमा के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए आगे आएंगे।श्री हेमंत सोरेन ने रवि राज मुर्मू के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे भविष्य में भी अपनी उत्कृष्ट कला से झारखण्ड और देश का नाम रोशन करते रहें।

आर्थिक सहायता ने बदली कोडरमा की महिलाओं की तस्वीर: सम्मान योजना से नए सपने

कोडरमा। आर्थिक रूप से सशक्त महिला ही एक मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की आधारशिला होती है। इसी सोच को साकार करते हुए झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना जिले की हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता केवल एक वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत बन रही है।

कोडरमा जिले की अनेक महिलाओं ने इस सहायता राशि का उपयोग स्वरोजगार शुरू करने, छोटे व्यवसाय का विस्तार करने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में किया है। आज ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

रीना देवी (चंदवारा): सपनों को मिली नई उड़ान

चंदवारा प्रखंड की रीना देवी पहले बेरोजगार थीं। मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना से मिलने वाली राशि को उन्होंने बचाकर कपड़ों की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढ़ा और आज वे आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। रीना देवी कहती हैं कि यह योजना उनके लिए नई शुरुआत का माध्यम बनी है और अब उनका लक्ष्य अपने व्यवसाय का और विस्तार करना है।

गायत्री देवी (चंदवारा): छोटे कदम से बड़ी सफलता

गायत्री देवी ने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग किराना दुकान शुरू करने में किया। आज उनकी दुकान से नियमित आय हो रही है, जिससे परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान किया।

पूजा देवी (जयनगर): मिली नई पहचान

जयनगर की पूजा देवी के पास पहले कोई स्थायी रोजगार नहीं था। योजना की सहायता से उन्होंने राशन दुकान का संचालन शुरू किया। आज वे सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय चला रही हैं और परिवार का भरण-पोषण स्वयं कर रही हैं। उनके लिए यह योजना आर्थिक सहायता के साथ सामाजिक सम्मान का भी आधार बनी है।

सीमा देवी (जयनगर): बढ़ा व्यवसाय, बढ़ी आय

सीमा देवी पहले से पूजा सामग्री और सब्जी की छोटी दुकान चलाती थीं। मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने अपने व्यवसाय में अतिरिक्त पूंजी लगाई, जिससे दुकान का विस्तार हुआ और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज उनका व्यवसाय पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त और स्थिर हो चुका है।

नंदनी कुमारी (मरकच्चो): स्थानीय उत्पादन से आत्मनिर्भरता

मरकच्चो की नंदनी कुमारी ने योजना की सहायता से साबुन निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया। आज वे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण साबुन का उत्पादन कर रही हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। उनका मानना है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का वास्तविक अवसर प्रदान कर रही है।

टुनी कुमारी (मरकच्चो): मेहनत और योजना का सफल संगम

टुनी कुमारी ने योजना से मिलने वाली राशि को पूंजी के रूप में जोड़कर राशन दुकान की शुरुआत की। आज उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। वे भविष्य में अपने व्यवसाय का और विस्तार करने की योजना बना रही हैं।

बदल रही है महिलाओं की तस्वीर

मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना ने कोडरमा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं, परिवार की आय बढ़ा रही हैं तथा समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं।

इन महिलाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर उचित सहयोग और अवसर मिले तो महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि परिवार, समाज और राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना आज महिलाओं के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास, स्वावलंबन और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन चुकी है।

SIR-2026: रांची के सभी शहरी बूथों पर 10 से 4 बजे तक चला विशेष कैंप, बड़ी संख्या में मतदाता पहुंचे

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) 2026 के तहत आज दिनांक 18 जुलाई 2026 को रांची जिला के सभी शहरी क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 10:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में मतदाता अपने-अपने मतदान केंद्र पहुंचे तथा गणना प्रपत्र (Enumeration Form) प्राप्त करने एवं भरे हुए प्रपत्र जमा करने की प्रक्रिया में भाग लिया।

शिविर के दौरान ऐसे मतदाताओं को Enumeration Form उपलब्ध कराया गया, जिन्हें अब तक प्रपत्र प्राप्त नहीं हुआ था। वहीं, जिन मतदाताओं ने प्रपत्र भर लिया था, उन्होंने संबंधित बीएलओ (BLO) के पास अपना गणना प्रपत्र जमा किया। मतदान केंद्रों पर बीएलओ द्वारा मतदाताओं को आवश्यक जानकारी एवं सहयोग भी किया गया।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि जिन मतदाताओं का गणना प्रपत्र अभी तक प्राप्त या जमा नहीं हो पाया है, उनके लिए 20 जुलाई 2026 को भी शहरी क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर प्रातः 10:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने सभी शहरी मतदाताओं से अपील की है कि जिनका Enumeration Form अभी तक जमा नहीं हुआ है, वे 20 जुलाई को अपने संबंधित मतदान केंद्र पर आयोजित विशेष शिविर में पहुंचकर गणना प्रपत्र प्राप्त करें अथवा भरा हुआ प्रपत्र अवश्य जमा करें। उन्होंने कहा कि समय पर गणना प्रपत्र जमा करना विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं ने अपना गणना प्रपत्र पहले ही संबंधित बीएलओ के पास जमा कर दिया है अथवा ऑनलाइन आवेदन सफलतापूर्वक जमा कर दिया है, उन्हें शिविर में आने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्यमंत्री ने माना बारिश कम, लेकिन किसान अब भी बीज-खाद के लिए परेशान : मृत्युंजय शर्मा

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं स्वीकार किया है कि राज्य में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हो रही है तथा सूखे की आशंका को देखते हुए अधिकारियों को योजनाएं बनाने और किसानों को समय पर बीज एवं खाद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि खरीफ सीजन शुरू होने के बाद सरकार को अब इन निर्देशों की याद क्यों आई? यदि सरकार समय रहते तैयारी करती, तो आज किसानों को बीज और खाद के लिए भटकना नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा कि कृषि कार्य का सबसे महत्वपूर्ण समय निकलता जा रहा है, जबकि राज्य के अनेक हिस्सों से किसानों को बीज और उर्वरक नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सरकार की तैयारियां समय पर नहीं हो सकीं। कमजोर मानसून की आशंका के बीच यह लापरवाही किसानों की चिंता और बढ़ाने वाली है।

मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा है, लेकिन 15 जुलाई तक केवल 2.36 लाख हेक्टेयर, अर्थात मात्र 13.14 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की बिजाई और रोपाई हो सकी है। पलामू प्रमंडल के जिलों में तो न के बराबर बिजाई-रोपाई हुई है। यह स्थिति केवल कम वर्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि समय पर बीज, खाद और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार की विफलता को भी दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की किसान विरोधी कार्यशैली नई नहीं है। पिछले वर्ष धान खरीद सत्र (2025-26) में भी सरकार किसानों के साथ न्याय नहीं कर सकी। सरकार ने 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन खरीद अवधि समाप्त होने तक केवल करीब 30 लाख क्विंटल, यानी लगभग 50 प्रतिशत धान की ही खरीद हो सकी। हजारों किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिला, भुगतान में देरी हुई और अनेक किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर धान बेचना पड़ा। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने उस विफलता से भी कोई सबक नहीं लिया।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में किसानों की चिंता करते हैं, तो केवल समीक्षा बैठकें और निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को तत्काल सभी जिलों में बीज और खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना लागू करनी चाहिए तथा किसानों को हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। अन्यथा कमजोर मानसून और सरकारी लापरवाही का दोहरा संकट झारखंड के किसानों पर भारी पड़ेगा।