समुद्र में डूबी श्रीकृष्ण की नगरी 'द्वारका' को अब करीब से देखिए, देश की पहली सबमरीन सर्विस शुरू कर रही सरकार

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गुजरात सरकार राज्य में पर्यटकों के लिए एक पनडुब्बी सेवा शुरू करने के लिए तैयार है, जिससे उन्हें समुद्र के नीचे खोए हुए श्रीकृष्ण के प्राचीन शहर 'द्वारका' में समुद्री जीवन का पता लगाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने शहर में परियोजना के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के साथ एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 'हिंदू भगवान भगवान कृष्ण के शहर' के रूप में सांस्कृतिक महत्व रखता है। 

 

बता दें कि, यह भारत में सबमरीन के माध्यम से पहली अंडरवॉटर पर्यटन सुविधा होगी। वर्तमान योजना के अनुसार, सरकार का लक्ष्य अक्टूबर 2024 में दिवाली से पहले परियोजना को चालू करना है। परियोजना के अनुसार, पर्यटकों को पानी के भीतर समुद्री जीवन को देखने के लिए एक सबमरीन में समुद्र से 100 मीटर नीचे ले जाया जाएगा। प्रत्येक पनडुब्बी 24 पर्यटकों को ले जाएगी, और जहाज का नेतृत्व दो अनुभवी पायलट और एक पेशेवर चालक दल द्वारा किया जाएगा। जहाज को सभी यात्रियों के लिए खिड़की का दृश्य प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि पनडुब्बी सुविधा से देश के प्रमुख मंदिर शहरों में से एक द्वारका में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा, जो हर दिन बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। मीडिया से बात करते हुए, गुजरात पर्यटन के प्रबंध निदेशक, सौरभ पारधी ने कहा कि यह प्रकृति में एक "अलग परियोजना" है, जो शहर में पर्यटन को महत्वपूर्ण बढ़ावा देने की क्षमता रखती है। पर्यटकों को पनडुब्बी से द्वारका के पास समुद्र में ले जाया जाएगा, जहां वे आराम से पानी के अंदर समुद्री जीवन को देख सकेंगे। पारधी ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुजरात में पर्यटन को बढ़ावा देना और धार्मिक स्थानों पर आने वाले पर्यटकों के लिए अधिक सुविधाएं प्रदान करना है, साथ ही यात्री सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

एक लड़की को ढूंढने बंगाल गई थी मुंबई पुलिस और मिल गई एक साल में गायब हुईं 35 लड़कियां

 बंगाल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमे मुंबई पुलिस बंगाल तो पहुंची थी एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को बचाने के लिए मगर जब टीम पांजीपाड़ा क्षेत्र में पहुंची तो उन सभी लड़कियों को भी बरामद कर लिया जो पिछले तकरीबन एक वर्ष में मुंबई के धारावी क्षेत्र से गायब हुई थीं। दरअसल मुंबई से हाल ही में अगवा कर पश्चिम बंगाल लाई गई एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को ढूंढते हुए महाराष्ट्र पुलिस पश्चिम बंगाल पहुंची थी। पश्चिम बंगाल में देह व्यापार करवाने के लिए कुछ व्यक्तियों ने मुंबई में लड़की का अपहरण कर लिया था। 

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वही इसको लेकर धारावी पुलिस ने बताया कि शहर की एक 17 वर्षीय लड़की का अपहरण कर उसे पश्चिम बंगाल में वेश्यावृत्ति में धकेल दिया गया था, जिसे बचा लिया गया है। एक अफसर ने बताया कि लड़की को अगवा किए जाने के मामले में सम्मिलित होने के आरोप में बिहार के चंपारण से कुणाल पांडे (30) एवं सिकंदर शेख को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, इस रेस्क्यू के साथ, धारावी पुलिस ने 2023 के सभी लापता बच्चों के मामलों को सुलझा लिया है तथा 35 लड़कियों को उनके माता-पिता से मिलवाया है जो पहले गायब हो गई थीं। अफसर ने कहा कि वर्तमान मामले में, लड़की सितंबर में अपने धारावी के घर से लापता हो गई थी। उसके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था।

 वह पश्चिम बंगाल के पांजीपाड़ा में है, इसकी जानकारी मिलने के बाद धारावी पुलिस की एक टीम बंगाल पहुंची तथा उसे एक वेश्यालय से बचाया। अपराधियों पर बलात्कार और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। एक अन्य मामले में, एक 14 वर्षीय लड़की, जो अपना घर छोड़कर ट्रेन से पटना जा रही थी, उसे भी रोक लिया गया तथा उसके माता-पिता से मिला दिया गया। बृहस्पतिवार को अपहरण की शिकायत दर्ज करने के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज की जांच की तथा पाया कि लड़की लोकमान्य तिलक टर्मिनस से पटना के लिए ट्रेन में बैठी थी। अफसर ने बताया कि इसके पश्चात् मुंबई पुलिस ने राजकीय रेलवे पुलिस, औरंगाबाद को सतर्क किया तथा लड़की को रावेर रेलवे स्टेशन पर हिरासत में ले लिया गया तथा वापस शहर लाया गया।

विवादों में घिरे सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, जानें पोस्ट डिलीट कर क्यों मांगी माफी?

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने एक ट्वीट के लिए माफ़ी मांगी है। हालांकि उस ट्वीट को उन्होंने अब डिलीट कर दिया है।गीता के इस 'श्लोक' के गलत अनुवाद को लेकर विवाद पैदा हो गया था, जिससे बाद असम के सीएम ने माफी मांगी है। गीता के श्‍लोक से जुड़ी 'एक्स' पर हिमंता बिस्‍वा सरमा की पोस्ट ने उन्हें विपक्ष के निशाने पर ला दिया था। कई नेताओं ने उन पर जाति विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने न केवल सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी है, बल्कि उन्होंने अपने पोस्ट को भी डिलीट कर दिया है।असम सीएम का पोस्ट 'ब्राह्मण-शूद्र' से जुड़ा हुआ थाष

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सरमा ने मांगी माफी

हिमंत बिस्वा सरमा एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘मैं नियमित तौर पर हर सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भगवद गीता का एक श्लोक अपलोड करता हूं। अब तक मैंने 668 श्लोक पोस्ट किए हैं। हाल ही में मेरी टीम के एक सदस्य ने अध्याय 18 श्लोक 44 से एक श्लोक गलत अनुवाद के साथ पोस्ट किया है। जैसे ही मुझे गलती का एहसास हुआ, मैंने उस पोस्ट को हटा दिया। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नेतृत्व में सुधार आंदोलन की बदौलत असम राज्य जातिविहीन समाज की एक आदर्श तस्वीर दर्शाता है। अगर डिलीट की गई पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं।

हटाई गई पोस्ट में क्या था?

26 दिसंबर की सुबह हिमन्त बिस्व सरमा ने श्रीमदभगवद्गीता का एक श्लोक अपनो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उन्होंने एक तस्वीर शेयर की थी जिस पर कृष्ण और अर्जुन की तस्वीर बनी थी और गीता का हवाला देकर एक श्लोक लिखा था। इसमें लिखा था, खेती गाय पालन और व्यापार- ये वैश्यों के अंतर्निहित और स्वाभाविक कर्म हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य ये तीन वर्णों की सेवा करना शूद्र का भी स्वाभाविक कर्म है। इसे शेयर करते हुए हिमन्त बिस्व सरमा ने लिखा, भगवान श्रीकृष्ण स्वयं वैश्यों और शूद्रों के स्वाभाविक कर्मों का वर्णन करते हैं।

आवैसी का हिमंता सरमा पर तीखा हमला

गीता के श्‍लोक को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हिमंता बिस्‍वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह हर भारतीय नागरिक के साथ समान व्यवहार करने की अपनी शपथ पूरी नहीं कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा, एक संवैधानिक पद पर रहते हुए, आपकी शपथ प्रत्येक नागरिक के साथ समान व्यवहार करने की है। यह उस दुर्भाग्यपूर्ण क्रूरता में परिलक्षित होता है, जिसका असम के मुसलमानों ने पिछले कुछ वर्षों में सामना किया है।

कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

असम सीएम के ट्वीट पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने पूछा कि क्या पीएम और राष्ट्रपति हिमंत बिस्वा की जातिवादी टिप्पणियों से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि और फिर यदि आप उनसे कुछ कहेंगे तो वह अपनी पुलिस भेज देंगे, लेकिन ऐसी मूर्खतापूर्ण टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। क्या राष्ट्रपति भवन और पीएमओ हिमंत बिस्वा की जातिवादी टिप्पणियों से सहमत हैं?

शराब मुक्त होगी 'रामनगरी', सरकार ने किया बड़ा ऐलान, अयोध्या के 84 परिक्रमा क्षेत्र में पूर्ण शराब बंदी, हटाई जाएंगी दुकानें

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या के परिक्रमा क्षेत्र में शराब बंदी की घोषणा कर दी है। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि रामनगरी में 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शराब की बिक्री को पूर्ण तौर पर बैन किया जाएगा। सभी दुकानें हटाई जाएंगी। नितिन अग्रवाल अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात करने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि श्रीराम मंदिर क्षेत्र को पहले से ही मदिरा मुक्त किया जा चुका है उन्होंने 84 कोस तक शराब की दुकानों को हटाने की बात कही। उन्होंने कहा- इसके लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र को मद्य निषेध घोषित किया जा चुका है। इस क्षेत्र में आने वाली सभी दुकानें हटाई जाएंगी। 

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर चल रही है। जिसके कारण अयोध्या में राज्य के मंत्रियों के साथ ही आला अफसरों का जमावड़ा लग रहा है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पीएम भी आ रहे हैं। प्राण प्रतिष्ठा से पहले 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी श्रीराम हवाईअड्डे का उद्घाटन करने अयोध्या आएंगे। प्राण प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक बनाने के लिए डबल इंजन की सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिससे दुनिया कलयुग में भी द्वापर युग की झलक देख सके।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या यात्रा के चलते पहले इसके संकेत दिए थे। उन्होंने कहा कि चूंकि यह एक धार्मिक नगरी है, इसलिए जनभावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यहां मांस एवं शराब का सेवन बैन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 'धर्मनगरी' अयोध्या शहरी विकास का मॉडल होगी। यहां 24×7 पीने का पानी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री योगी ने विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा था कि अयोध्या आने वाले हर श्रद्धालुओं को शांति, संतोष और आनंद के साथ वापस जाना चाहिए।

उत्तराखंड सरकार ने निकाली नई नीति, अब अपनी निजी जमीन पर भी बना सकते हैं हेलीपैड और हेलीपोर्ट, लीज पर लेगी सरकार

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उत्तराखंड में अब हवाई सेवाओं को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है। अब उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों पर हेलीपैड बनाया जाएगा। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीपैड बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए जाने हैं। अब इसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

ये हेलीपैड कहां बनने हैं, इसके लिए जल्द ही उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) निजी क्षेत्र से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआइ) आमंत्रित करने जा रहा है। इसके तहत यूकाडा बताएगा कि किन क्षेत्रों में हेलीपैड बनाने की जरूरत है। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों स्वयं अथवा सरकार के सहयोग से हेलीपैड बनाने के आवेदन दे सकेंगे।

प्रदेश सरकार लगातार हेली सेवाओं का विस्तार कर रही है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में हेली सेवा देना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके लिए तमाम प्रयास भी किए गए, लेकिन भूमि संबंधी दिक्कतों के चलते इसमें आशातीत सफलता नहीं मिल पाई है। कारण यह कि जहां भी हेलीपैड अथवा हेलीपोर्ट बनाने के लिए सरकारी भूमि देखी जा रही है, वहां वन क्षेत्र की समस्या सामने आ रही है।

सरकार ने बनाई नई नीति

वन क्षेत्र पड़ने की समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने हाल ही में निजी क्षेत्र के जरिये हेलीपैड अथवा हेलीपोर्ट बनाने के लिए नई नीति बनाई है। इस नीति के अनुसार कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा किसी भूमि को लीज पर लेकर हेलीपोर्ट बना सकता है। इसके लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी दिए जाने का प्रविधान किया गया है।

15 साल के लिए सरकार को दे सकते हैं लीज

इसके साथ ही यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि कोई स्वयं हेलीपैड अथवा हेलीपोर्ट बनाने में सक्षम नहीं है तो वह सरकार को यह भूमि 15 वर्ष की लीज पर दे सकता है। इसके लिए उसे वार्षिक शुल्क के साथ ही इससे होने वाले लाभ का एक हिस्सा भी दिया जाएगा। 15 वर्ष बाद उसे वह भूमि व हेलीपोर्ट वापस मिल जाएगा। हेलीपैड कहां बनाए जाने हैं, इसके लिए यूकाडा जगह तय कर आवेदन आमंत्रित करेगा।

 

अब इस नीति को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस कड़ी में प्रदेश सरकार जनवरी में उन स्थानों के लिए ईओआई जारी करने की तैयारी कर रही है जहां हेलीपैड बनाने की आवश्यकता अधिक महसूस की जा रही है। इससे इन स्थानों पर हेली सेवाओं का संचालन शुरू किया जा सकेगा।

 लोगों ने दिखाई रुचि

यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि निवेशक सम्मेलन में भी कुछ व्यक्तियों ने हेलीपोर्ट बनाने में रुचि दिखाई है। ऐसे में अगले माह स्थानों की सूची जारी कर ईओआई आमंत्रित किए जाएंगे।

तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, 24 घंटे में आए कोरोना के 797 नए मामले, 5 लोगों की हो गई मौत

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कोविड के मामले भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं।एक तरफ नए साल के जश्न मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ देशभर में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में खतरा और बढ़ता नजर आ रहा है।पिछले 24 घंटों में कोविड के 797 नए मामले सामने आए हैं। इससे कोविड संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या 4091 हो गई है। एक दिन में कोविड के इतने ज्यादा केस 225 दिनों के बाद आए हैं, इसके पहले इससे ज्यादा केस 19 मई को मिले थे।

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कोविड के मामलों में इतनी ज्यादा वृद्धि ठंड की वजह से भी दिख रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इन 24 घंटों में कोविड की वजह से अलग-अलग राज्यों में 5 लोगों की मौतें हुई हैं। केरल में कोविड की वजह से 2, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और तमिलनाडु से 1-1 मौतें हुई हैं। 19 मई को देश में 865 नए मामले देखने को मिले थे और 5 दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक में आ गई थी।

वहीं देश में कोरोना का नया वैरिएंट जेएन.1 का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। अभी तक पूरे देश में जेएम.1 के 157 मिले हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 78 केस केरल में दर्ज हुए हैं। जबकि गुजरात में नए वेरिएंट के 34 मरीज मिले हैं। गोवा 18 केस रिपोर्ट किए जा चुके हैं। कर्नाटक में सब वैरिएंट जेएन.1 के 8 मामले दर्ज हुए हैं। जबकि महाराष्ट्र में 7 और राजस्थान के 5 मरीजों में नया सब वेरिएंट मिला है। तमिलनाडु में 4 और तेलंगाना में दो मामले दर्ज हुए हैं।

सीट शेयरिंग पर गठबंधन में रार! महाराष्ट्र में उद्धव ने मांगीं 23 सीटें, कांग्रेस ने ठुकराई उद्धव की डिमांड

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2024 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एकजुटता का दावा कर रहे विपक्षी दलों के गठबंधन में आए दिन नया बवाल खड़ा हो रहा है। एनडीए गठबंधन का मुकाबला करने के लिए बने 28 दलों के 'इंडिया' गठबंधन में अब तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है। इससे पहले ही क्षेत्रीय पार्टियों ने अपनी डिमांड रखना शुरू कर दिया है।इसी कड़ी में अब सीट बंटवारे को लेकर महाराष्ट्र में रार होता दिख रहा है।शिवसेना यूबीटी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने राज्य की 48 में से 23 सीटों की बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर ली है। जिससे कांग्रेस और यहां तक कि शरद पवार की पार्टी भी सकते में आ गई। इससे पहले गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि वे लोकसभा चुनाव में राज्य में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगी। अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना ने भी सीटों की डिमांड रख कर गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में हम टूट के बावजूद सबसे बड़ी पार्टी हैं। हम 23 सीटों पर चुनाव लड़ते आए हैं। पिछले चुनाव में हम इनमें से 18 सीटों पर जीते थे। इस बार भी हम इतने ही सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) मिलकर चुनाव लड़ेंगे।

राज्य कांग्रेस के नेताओं ने शिवसेना यूबीटी के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उनकी पार्टी जुलाई 2022 में विभाजित हो गई है और इसके कई सांसद अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ हैं, इसलिए पार्टी को इतने सारी संसदीय सीटें नहीं दी जा सकतीं हैं।कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्थिति अब बदल गई है और शिवसेना (यूबीटी) को इस बारे में सोचना चाहिए।संजय निरुपम ने कहा कि उन्हें पता चला कि शिवसेना (यूबीटी) महाराष्ट्र में 48 में से 23 सीटें मांग रही है। उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा एक जटिल विषय है, इसके बारे में निर्णय इतनी आसानी से नहीं लिया जा सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन में सभी दलों को एक साथ लड़ने और बीजेपी को हराने की जरूरत है, तो हमें अंदरूनी कलह को रोकना होगा।

इसके बाद इस बयान पर भी पलटवार सामने आया। संजय राउत ने कहा कि यह तय करना कांग्रेस का काम नहीं है कि पार्टी टूट गई है। इतना ही नहीं संजय राउत ने यह भी कहा कि भले ही कई सांसदों और विधायकों ने पार्टी छोड़ दी हो, लेकिन पार्टी के मतदाता अभी भी ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के साथ हैं। राउत ने कहा कि राज्य कांग्रेस के सभी बड़े या छोटे फैसले दिल्ली में लिए जाते हैं, इसलिए हमने इंडिया ब्लॉक के चौथे सम्मेलन के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से बात की है। हमने महाराष्ट्र लोकसभा सीट आवंटन पर चर्चा के लिए अपना विचार व्यक्त किया और कांग्रेस नेताओं ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं के साथ कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है, और इस स्तर पर राज्य में विशिष्ट सीटों के लिए व्यक्तिगत दावों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

बता दें कि 2019 में अविभाजित शिवसेना बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी अब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सहयोगी हैं। इसके बाद, जून 2022 में, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने 40 अन्य विधायकों के साथ, पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया और बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी।

चीन-पाकिस्तान की भी अब खैर नहीं! 5 सालों में 50 सैटेलाइट लॉन्च करेगा भारत, सीमा पर होगी निगेहबानी

#india_planning_to_launch_50_satellites_isro 

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बीते कुछ सालों में भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में काफी तरक्की की है।भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी खुद को लगातार मजबूत कर रहा है। इस साल देश ने चंद्रयान 3 की उपलब्धि हासिल की है। भारत अब सैटेलाइट की मदद से खुफिया जानकारियों को इकट्ठा करेगा। इसके लिए अंतरिक्ष में 50 सैटेलाइट भेजने की योजना है। ये 50 सैटेलाइट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से भेजे जाएंगे। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने ये जानकारी दी।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बंबई के वार्षिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी समारोह ‘टेकफेस्ट’ को संबोधित करते हुए सोमनाथ ने कहा कि बदलावों का पता लगाने, आंकड़ों के विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से संबंधित और डेटा आधारित प्रयासों के मामले में उपग्रहों की क्षमता बढ़ाना अहम है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा को साकार करने के लिए, इसके उपग्रह बेड़े का वर्तमान आकार पर्याप्त नहीं है और इसे ‘‘आज की क्षमता के मुकाबले दस गुना’’ होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि अंतरिक्षयान देश की सीमाओं और पड़ोसी क्षेत्रों पर नजर रखने में सक्षम हैं। सोमनाथ ने कहा, ‘‘यह सब उपग्रहों से देखा जा सकता है। हम इसे संभालने के लिए उपग्रह प्रक्षेपित कर रहे हैं, लेकिन अब सोचने का एक अलग तरीका है और हमें इसे और अधिक महत्वपूर्ण तरीके से देखने की जरूरत है क्योंकि (किसी भी) राष्ट्र की शक्ति उसकी यह समझने की क्षमता है कि उसके आसपास क्या हो रहा है।

इसरो प्रमुख सोमनाथ ने कहा, हमने अगले पांच वर्षों में 50 उपग्रहों को अंतिम रूप देने के लिए उनको असेंबल कर लिया है और इसे अगले पांच वर्षों से अधिक समय में इस विशेष भू-खुफिया जानकारी संग्रह में सहायता के लिहाज से भारत के लिए भेजा जा रहा है।इसरो प्रमुख के मुताबिक सैटेलाइट को अगल-अलग कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा. इसके सहारे हजारों किलोमीटर के दायरे के सेना की गतिविधियों और तस्वीरों को देखा जा सकेगा।

भारत के पास फिलहाल 54 उपग्रहों का बेड़ा है। सोमनाथ का कहना था कि यह कम से कम दस गुना होना चाहिए। इस तरह इसरो प्रमुख का कहना था कि भारत को तकरीबन 550 उपग्रहों का बेड़ा तैयार करने की आवश्यकता है। तभी जाकर भारत अपनी निगेहबानी अच्छी तरह कर पाएगा।

उत्तर भारत में कोहरे और शीतलहर का कहर, ट्रेन और फ्लाइट सेवाएं प्रभावित, लोगों की बढ़ी मुश्किलें

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दिल्लीपंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में भीषण ठंड और कोहरे का सितम जारी है। घने कोहरे की वजह से आज भी ट्रेन और फ्लाइट सेवाओं पर असर पड़ा है। पूरे उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग ने राजधानी दिल्ली में अगले 5 दिन तक घना कोहरे रहने की संभावना जताई है। आईएमडी ने दिल्ली और इससे सटे हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए 31 दिसंबर तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है।

इस दौरान न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है।मौसम विभाग ने न्यूनतम तापमान में गिरावट का संकेत दिया है। पारे में गिरावट के सथा ही पहाड़ों से आ रही ठंडी हवाएं दिल्ली में भी सिहरन पैदा कर सकती हैं।

मौसम विभाग ने घने कोहरे में गाड़ी चलाते वक्त फॉग लाइट का इस्तेमाल करने को कहा है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 30 और 31 दिसंबर को हल्की बारिश और बर्फबारी का अनुमान है। इतना ही नहीं 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक यूपी, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

घने कोहरे के कारण यातायात काफी प्रभावित हो रहा है। कोहरे के चलते सड़क पर कुछ न दिखने से दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं।वहीं, दूसरी ओर घने कोहरे के कारण भारी संख्या में हवाई उड़ानों और ट्रेन प्रभावित हो रही हैं। गुरुवार को 60 से अधिक उड़ानों के रूट डायवर्ट किए गए और कई उड़ानें देरी से चल रही हैं। ज्यादातर दिल्ली आने वाली उड़ानों को जयपुर, लखनऊ और इंदौर सहित अन्य हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया है।

अयोध्या के राम मंदिर में 7 दिन तक चलेगा प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान, पीएम मोदी समेत सिर्फ ये 5 लोग होंगे गर्भगृह में मौजूद

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अयोध्या में प्रभु रामलला के नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसको लेकर विशेष कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। मंदिर के उद्घाटन समारोह को लेकर अयोध्या को अलग ही लुक दिया गया है। पूरे शहर को सजाया गया है। दुनिया भर के राम भक्त राम मंदिर उद्घाटन को लेकर उत्साह से भरे हुए हैं।अयोध्या में 7 दिनों तक वृहद स्तर पर अनुष्ठान प्रक्रिया चलेगी, जिसकी शुरुआत 16 जनवरी से होगी। 22 जनवरी को श्रीरामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी। 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के करकमलों से श्रीराम अपने दिव्य एवं भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।

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प्राण प्रतिष्ठा पूजन के साथ ही भगवान को सोने के वस्त्र धारण कराए जाएंगे। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी गर्भगृह में केवल पांच लोग रहेंगे। इस यज्ञ के यजमान के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के गर्भगृह में उपस्थित रहेंगे। उनके अलावा यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, संघ प्रमुख मोहन भागवत, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास इस कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहेंगे।

राम लला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य यजमान पीएम नरेंद्र मोदी होंगे। राम जन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी ही रामलला की प्रतिमा से पर्दा हटाएंगे। इसके बाद वह भगवान की आंखों में काजल भी लगाएंगे। इसके बाद रामलला की प्रतिमा का सोने के वस्त्र धारण कराए जाएंगे और 56 भोग लगाया जाएगा। इस सबसे पहले राम लला को नगर भ्रमण कराया जाएगा।

प्राण-प्रतिष्ठा के वक्त पर्दा बंद रहेगा और भगवान राम की प्रतिमा की पट्टी हटाने के बाद सबसे पहले प्रभु राम को आईना दिखाया जाएगा। सबसे पहले रामलला अपना चेहरा देखेंगे। दलपूजा के लिए आचार्यों की 3 टीम बनाई गई है। पहले दल का नेतृत्व स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे। वहीं दूसरे दल का नेतृत्व शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती करेंगे जो कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य हैं। तीसरी टीम में काशी के 21 विद्वान होंगे।