देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस, राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अराजकता से सत्ता हासिल करना चाहती है। युवाओं को अराजक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।

युवाओं को भड़काने का आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ की अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में छात्र आंदोलन को लेकर दिए हालिया बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस वार्ता कर कड़ा संदेश दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह से युवाओं को भड़का रहे ये स्पष्ट करता है कि इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। कांग्रेस और उनके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण के विचारों में लगाने की बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के साधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

लोकतंत्र अराजकता फैलाने का लाइसेंस नहीं-राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समझना चाहिए कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने या भारत के विकास में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। राजनीतिक हितों के लिए भारत की संवैधानिक संस्थाओं की बलि नहीं दी जा सकती। इस बात को समझने की जरूरत है। झूठा आक्रोश दिखाकर, संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करके और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए भारत की विकास यात्रा को प्रभावित नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी को बाधा डालने वाली राजनीति करने के बजाय, जन-जनादेश का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्म-चिंतन करना चाहिए।

देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने की साजिश-राजनाथ सिंह

बीजेपी नेता ने कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर शासन बदलना चाहते हैं और एक प्रेस वार्ता में खुलकर कहते हैं कि उसने शासन बदलने की प्रेरणा बांग्लादेश से ली है। तो दूसरा डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात करता है। राजनाथ बोले- इससे यह साफ होता है कि इनका इकलौता एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। शासन बदलने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे पता चलता है कि उनकी लड़ाई चुनाव सुधार, SIR, ज्ञानेश कुमार, देश के नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए नहीं है। उनकी लड़ाई देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की उनकी साजिश है।

सुप्रीम कोर्ट को कोई धमका नहीं सकता', राहुल गांधी SC मार्च पर सीजेआई की टिप्पणी

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता। ये बेकार की कोशिशें हैं और इनपर कोई ध्यान नहीं देता। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि राहुल गांधी को खुद के आचरण को लेकर सफाई देनी होगी।

आज राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यह सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत के बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं के कथित एसआईआर अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र होने पर सीजेआई ने कहा, 'कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता'।

हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है-सीजेआई

वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उसके घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह के दबाव बनाने के प्रयास पर चिंता जताते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह एकांतवास में नहीं है, हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता, जबकि अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है।

सुप्रीम कोर्ट तक निकाला था मार्च

ये पूरी सुनवाई 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च से जुड़ी हुई है। इस दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने बाराखंभा रोड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे। भीड़ के रूप में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे नेताओं ने वहां पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दी थी। इस याचिका में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए एक्शन लेने की मांग की गई थी।

केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस

सुनवाई के दौरान अदालत ने असदुद्दीन ओवैसी समेत नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए और समान राहत वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।

तिरंगा फहराने पर युवाओं को जेल में डालना कायरता', सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के राहुल गांधी

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दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सीजेपी नेताओं पांच दिन की न्यायिक हिरासत की निंदा की है।

तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण काम है। तिरंगा हाथ में लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना कानून का उल्लंघन नहीं हो सकता। सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

‘इंडिया’ गठबंधन युवाओं की इस लड़ाई में साथ-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग बैनर के तहत भले ही प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन उनकी मांग एक ही है। सभी नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन भी युवाओं की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

जंतर-मंतर भारत के लोगों का-राहुल गांधी

कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर की ऐतिहासिक पहचान का भी जिक्र किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जगह देश की आम जनता की है, सत्ता के हुक्मरानों की नहीं। राहुल ने कहा, जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस लेकर रहेंगे। लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने की जगह को बंद या सीमित नहीं किया जा सकता। सरकार चाहे जितनी बंदिशें लगा ले, अपने हक की लड़ाई रुकने वाली नहीं है।

सरकार विरोध की आवाज दबाने की कोशिश में-अभिजीत दिपके

वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर सरकार असहमति की आवाज दबाने के लिए इतनी ही दृढ़ है, तो उसे आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है। दिपके ने कहा कि इस कार्रवाई से पार्टी के कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई रोक, जानें पूरा मामला

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राहुल गांधी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। इस बीच उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल पर रोक लगा दी है। ये मामला महाराष्ट्र की एक ट्रायल कोर्ट से जुड़ा है।

यह मामला राहुल गांधी के उस कथित बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मामला निचली अदालत तक पहुंचा और राहुल गांधी को समन जारी किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही फिलहाल नहीं होगी। हालांकि यह राहत अभी अंतरिम है। मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है।

चार सप्ताह में मांगा जवाब

मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा। राहुल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए मानहानि केस रद्द करने से इनकार कर दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आठ सितंबर 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को 2019 में जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह समन मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जारी किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह तक टालने का अपना 2021 का आदेश जारी रखने को कहा था, जिससे राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट जा सकें।

पीएम मोदी पर लगाया था आरोप

याचिका श्रीमाल नाम के एक शख्स ने लगाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक सार्वजनिक भाषण में पीएम मोदी की बदनामी की थी। दावा किया गया था कि राहुल गांधी के बयानों का मतलब बीजेपी के सभी सदस्यों और पीएम मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे आरोप लगाना था।

राहुल गांधी ने गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का मारा', बीजेपी का बड़ा आरोप

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बीजेपी ने दिल्ली में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मार्च के दौरान राहुल ने गर्भवती महिला पत्रकार संग बदसलूकी की। बीजेपी ने महिला पत्रकार संग बदसलूकी वाले वीडियो भी शेयर किया है।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार का एक वीडियो भी एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उसने रोते हुए कांग्रेस सांसद पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया।

महिला पत्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप

बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने मीडिया से कहा कि रात 10 बजे उन्हें जानकारी मिली कि महिला पत्रकार रिचा पराशर के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उनसे मिलने के लिए बजाज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पत्रकार की हालत का जायजा लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बजाज ने इस कथित घटना की निंदा करते हुए पोस्ट किया, “जो व्यक्ति ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ की बात करता है, वह एक महिला पत्रकार के साथ, जो सिर्फ अपना काम कर रही थी, ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”

महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

वहीं, महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद उनके कंधे से पकड़ा, फिर उन्हें जोर से खींचा जिससे वह जमीन पर गिड़ गईं और उनके ऊपर भी 4 से 5 लोग गिर गए। वह उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं; वह बस विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पत्रकार की मदद के लिए कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता आगे नहीं आया और इसके बजाय उन पर आरोप लगाने की कोशिश की।

दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को विपक्षी नेता और समर्थक दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाल रहे थे। मार्च का नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई नेता डी. राजा सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता शामिल थे।

राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक, 'चाय' पार्टी में तय होगी सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के आरोप में सरकार की जड़े हिलाने के लिए कमर कस ली है। चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफी की मांग को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। इस आंदोलन को और धार देने के लिए राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं को अपने आवास पर 'चाय' के लिए बुलाया है। उन्होंने शाम 4 बजे हाई टी पार्टी का आयोजन किया है। बताया जा रहा है कि आगे की रणनीति यही से तैयार होगी।

छात्र संगठनों को भी चाय पर बुलाया

राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर बुलाया है। यह कार्यक्रम उनके आवास पर होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। इसके बाद राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर चाय का कार्यक्रम रखा गया है।

निमंत्रण पत्र में क्या

निमंत्रण में लिखा है, आज (सोमवार) लोकतंत्र बचाओ मार्च और याचिका सौंपने के बाद, कल दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद चाय का कार्यक्रम होगा। मैं आपको मंगलवार, 13 अक्तूबर को शाम 4 बजे, 5, सुनहरी बाग रोड, नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आने के लिए आमंत्रित करता हूं'।

सोमवार को राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च

राहुल गांधी के घर पर होने वाली यह 'हाई टी' उस घटनाक्रम के एक दिन बाद होगी, जब वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ताकत दिखाते हुए भारी बैरिकेडिंग वाले रास्ते पर "लोकतंत्र के लिए मार्च" (मार्च फॉर डेमोक्रेसी) निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

राहुल गांधी ने लगाया विपक्षी दलों को खत्म करने का आरोप, बीजेपी ने किया पलटवार

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है। जिसपर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर निशाना साधा। अब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को भस्मासुर कहा

सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा- पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। बीजेपी नेता ने कहा कि इन तीन दलों का नाम लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पढ़ाई-लिखाई नहीं करते हैं, उन्हें इतिहास पता करना चाहिए।

राहुल गांधी को अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता- सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'भारत की राजनीति के सदा सर्वदा व्याकुल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिनको देश और यहां की संस्कृति और धर्म के बारे में कुछ पता है। लेकिन आज ये पता लगा उनको अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता है। आज उन्होंने टीएमसी, एनसीपी का नाम लिया और कहा बीजेपी इनको खत्म कर रही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनी थीं। कांग्रेस ने न जाने की कितनी पार्टियों को तोड़ा।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर अलग पार्टी बनाई- सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। राहुल गांधी परिवार का ही इतिहास पता कर लीजिए। इंदिरा गांधी ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट करवा दिया था। अभी अशोक गहलोत कुछ समय पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे थे उन्होंने ही कहा है उनको निपटा दिया गया।'

पूर्व पीएम चंद्रशेखर और चरण सिंह का लिया नाम

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, 'जनता पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह जी के साथ धोखा किसने दिया। अभी राजस्थान में आधा दर्जन हाथी निगल गए थे। बसपा ने समर्थन दिया फिर भी उनके विधायकों को अपने में शामिल कर लिया। एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी यही किया। चंद्रशेखर जी के साथ भी यही किया। तीन महीने में ही उनकी सरकार को गिरा दिया था। देवगौड़ा और गुजराल जी की सरकार भी कांग्रेस ने गिराई। 1980 में जब सत्ता में आए तो 9 राज्यों की सरकारों को इसलिए डिसमिस कर दिया कि उनकी केंद्र से सरकार चली गई थी। अपने दौर का ही देख लो कितने मुख्यमंत्रियों को खा गए। गुलाम नबी आजाद, अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा इनको खा गए।'

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल टीएमसी के नाम और निशान छिन लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। उन्होंने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस, राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

#rajnathsinghonrahulgandhicjpprotest

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अराजकता से सत्ता हासिल करना चाहती है। युवाओं को अराजक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।

युवाओं को भड़काने का आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ की अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में छात्र आंदोलन को लेकर दिए हालिया बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस वार्ता कर कड़ा संदेश दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह से युवाओं को भड़का रहे ये स्पष्ट करता है कि इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। कांग्रेस और उनके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण के विचारों में लगाने की बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के साधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

लोकतंत्र अराजकता फैलाने का लाइसेंस नहीं-राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समझना चाहिए कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने या भारत के विकास में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। राजनीतिक हितों के लिए भारत की संवैधानिक संस्थाओं की बलि नहीं दी जा सकती। इस बात को समझने की जरूरत है। झूठा आक्रोश दिखाकर, संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करके और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए भारत की विकास यात्रा को प्रभावित नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी को बाधा डालने वाली राजनीति करने के बजाय, जन-जनादेश का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्म-चिंतन करना चाहिए।

देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने की साजिश-राजनाथ सिंह

बीजेपी नेता ने कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर शासन बदलना चाहते हैं और एक प्रेस वार्ता में खुलकर कहते हैं कि उसने शासन बदलने की प्रेरणा बांग्लादेश से ली है। तो दूसरा डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात करता है। राजनाथ बोले- इससे यह साफ होता है कि इनका इकलौता एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। शासन बदलने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे पता चलता है कि उनकी लड़ाई चुनाव सुधार, SIR, ज्ञानेश कुमार, देश के नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए नहीं है। उनकी लड़ाई देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की उनकी साजिश है।

सुप्रीम कोर्ट को कोई धमका नहीं सकता', राहुल गांधी SC मार्च पर सीजेआई की टिप्पणी

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता। ये बेकार की कोशिशें हैं और इनपर कोई ध्यान नहीं देता। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि राहुल गांधी को खुद के आचरण को लेकर सफाई देनी होगी।

आज राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यह सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत के बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं के कथित एसआईआर अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र होने पर सीजेआई ने कहा, 'कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता'।

हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है-सीजेआई

वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत में राजनीतिक जुलूस और उसके घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि करीब 200 वकीलों ने इस तरह के दबाव बनाने के प्रयास पर चिंता जताते हुए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह एकांतवास में नहीं है, हमें पता है कि बाहर क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता, जबकि अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है।

सुप्रीम कोर्ट तक निकाला था मार्च

ये पूरी सुनवाई 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च से जुड़ी हुई है। इस दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने बाराखंभा रोड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे। भीड़ के रूप में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे नेताओं ने वहां पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दी थी। इस याचिका में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए एक्शन लेने की मांग की गई थी।

केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस

सुनवाई के दौरान अदालत ने असदुद्दीन ओवैसी समेत नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए और समान राहत वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।

तिरंगा फहराने पर युवाओं को जेल में डालना कायरता', सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के राहुल गांधी

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दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सीजेपी नेताओं पांच दिन की न्यायिक हिरासत की निंदा की है।

तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण काम है। तिरंगा हाथ में लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना कानून का उल्लंघन नहीं हो सकता। सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

‘इंडिया’ गठबंधन युवाओं की इस लड़ाई में साथ-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन अलग-अलग बैनर के तहत भले ही प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन उनकी मांग एक ही है। सभी नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन भी युवाओं की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

जंतर-मंतर भारत के लोगों का-राहुल गांधी

कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर की ऐतिहासिक पहचान का भी जिक्र किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जगह देश की आम जनता की है, सत्ता के हुक्मरानों की नहीं। राहुल ने कहा, जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस लेकर रहेंगे। लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने की जगह को बंद या सीमित नहीं किया जा सकता। सरकार चाहे जितनी बंदिशें लगा ले, अपने हक की लड़ाई रुकने वाली नहीं है।

सरकार विरोध की आवाज दबाने की कोशिश में-अभिजीत दिपके

वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर सरकार असहमति की आवाज दबाने के लिए इतनी ही दृढ़ है, तो उसे आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है। दिपके ने कहा कि इस कार्रवाई से पार्टी के कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई रोक, जानें पूरा मामला

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राहुल गांधी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। इस बीच उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल पर रोक लगा दी है। ये मामला महाराष्ट्र की एक ट्रायल कोर्ट से जुड़ा है।

यह मामला राहुल गांधी के उस कथित बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मामला निचली अदालत तक पहुंचा और राहुल गांधी को समन जारी किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही फिलहाल नहीं होगी। हालांकि यह राहत अभी अंतरिम है। मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है।

चार सप्ताह में मांगा जवाब

मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा। राहुल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए मानहानि केस रद्द करने से इनकार कर दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आठ सितंबर 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को 2019 में जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह समन मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जारी किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह तक टालने का अपना 2021 का आदेश जारी रखने को कहा था, जिससे राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट जा सकें।

पीएम मोदी पर लगाया था आरोप

याचिका श्रीमाल नाम के एक शख्स ने लगाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक सार्वजनिक भाषण में पीएम मोदी की बदनामी की थी। दावा किया गया था कि राहुल गांधी के बयानों का मतलब बीजेपी के सभी सदस्यों और पीएम मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे आरोप लगाना था।

राहुल गांधी ने गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का मारा', बीजेपी का बड़ा आरोप

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बीजेपी ने दिल्ली में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मार्च के दौरान राहुल ने गर्भवती महिला पत्रकार संग बदसलूकी की। बीजेपी ने महिला पत्रकार संग बदसलूकी वाले वीडियो भी शेयर किया है।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार का एक वीडियो भी एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उसने रोते हुए कांग्रेस सांसद पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया।

महिला पत्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप

बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने मीडिया से कहा कि रात 10 बजे उन्हें जानकारी मिली कि महिला पत्रकार रिचा पराशर के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उनसे मिलने के लिए बजाज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पत्रकार की हालत का जायजा लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बजाज ने इस कथित घटना की निंदा करते हुए पोस्ट किया, “जो व्यक्ति ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ की बात करता है, वह एक महिला पत्रकार के साथ, जो सिर्फ अपना काम कर रही थी, ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”

महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

वहीं, महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद उनके कंधे से पकड़ा, फिर उन्हें जोर से खींचा जिससे वह जमीन पर गिड़ गईं और उनके ऊपर भी 4 से 5 लोग गिर गए। वह उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं; वह बस विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पत्रकार की मदद के लिए कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता आगे नहीं आया और इसके बजाय उन पर आरोप लगाने की कोशिश की।

दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को विपक्षी नेता और समर्थक दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाल रहे थे। मार्च का नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई नेता डी. राजा सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता शामिल थे।

राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक, 'चाय' पार्टी में तय होगी सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के आरोप में सरकार की जड़े हिलाने के लिए कमर कस ली है। चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफी की मांग को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। इस आंदोलन को और धार देने के लिए राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं को अपने आवास पर 'चाय' के लिए बुलाया है। उन्होंने शाम 4 बजे हाई टी पार्टी का आयोजन किया है। बताया जा रहा है कि आगे की रणनीति यही से तैयार होगी।

छात्र संगठनों को भी चाय पर बुलाया

राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर बुलाया है। यह कार्यक्रम उनके आवास पर होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। इसके बाद राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर चाय का कार्यक्रम रखा गया है।

निमंत्रण पत्र में क्या

निमंत्रण में लिखा है, आज (सोमवार) लोकतंत्र बचाओ मार्च और याचिका सौंपने के बाद, कल दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद चाय का कार्यक्रम होगा। मैं आपको मंगलवार, 13 अक्तूबर को शाम 4 बजे, 5, सुनहरी बाग रोड, नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आने के लिए आमंत्रित करता हूं'।

सोमवार को राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च

राहुल गांधी के घर पर होने वाली यह 'हाई टी' उस घटनाक्रम के एक दिन बाद होगी, जब वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ताकत दिखाते हुए भारी बैरिकेडिंग वाले रास्ते पर "लोकतंत्र के लिए मार्च" (मार्च फॉर डेमोक्रेसी) निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

राहुल गांधी ने लगाया विपक्षी दलों को खत्म करने का आरोप, बीजेपी ने किया पलटवार

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है। जिसपर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर निशाना साधा। अब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को भस्मासुर कहा

सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा- पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। बीजेपी नेता ने कहा कि इन तीन दलों का नाम लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पढ़ाई-लिखाई नहीं करते हैं, उन्हें इतिहास पता करना चाहिए।

राहुल गांधी को अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता- सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'भारत की राजनीति के सदा सर्वदा व्याकुल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिनको देश और यहां की संस्कृति और धर्म के बारे में कुछ पता है। लेकिन आज ये पता लगा उनको अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता है। आज उन्होंने टीएमसी, एनसीपी का नाम लिया और कहा बीजेपी इनको खत्म कर रही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनी थीं। कांग्रेस ने न जाने की कितनी पार्टियों को तोड़ा।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर अलग पार्टी बनाई- सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। राहुल गांधी परिवार का ही इतिहास पता कर लीजिए। इंदिरा गांधी ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट करवा दिया था। अभी अशोक गहलोत कुछ समय पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे थे उन्होंने ही कहा है उनको निपटा दिया गया।'

पूर्व पीएम चंद्रशेखर और चरण सिंह का लिया नाम

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, 'जनता पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह जी के साथ धोखा किसने दिया। अभी राजस्थान में आधा दर्जन हाथी निगल गए थे। बसपा ने समर्थन दिया फिर भी उनके विधायकों को अपने में शामिल कर लिया। एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी यही किया। चंद्रशेखर जी के साथ भी यही किया। तीन महीने में ही उनकी सरकार को गिरा दिया था। देवगौड़ा और गुजराल जी की सरकार भी कांग्रेस ने गिराई। 1980 में जब सत्ता में आए तो 9 राज्यों की सरकारों को इसलिए डिसमिस कर दिया कि उनकी केंद्र से सरकार चली गई थी। अपने दौर का ही देख लो कितने मुख्यमंत्रियों को खा गए। गुलाम नबी आजाद, अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा इनको खा गए।'

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल टीएमसी के नाम और निशान छिन लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। उन्होंने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।