_खरीफ कर्मशाला में कृषि मंत्री सख्त: लापरवाही पर होगी कार्रवाई, 20 मई से हर जिले में लगेगा खरीफ मेला

रांची:- कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्थान के प्रति गंभीर है और इस दिशा में लापरवाही कतई बर्दास्त नहीं की जाएगी । किसानों के हित के लिए जो काम करेंगे उनका सम्मान दिया जाएगा और जो लापरवाही करेंगे उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी । श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की मंगलवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित खरीफ कर्मशाला 2026 के दूसरे दिन कर्मशाला में कृषि प्रभाग के निदेशकों की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराज़गी जाहिर कर रही थीं।

सूखे की स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता

कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून में कम बारिश के आसार है जिस कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार पहले से ही तैयारी कर किसानों को राहत पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। सूखे से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूर्व में कर ली जाए इसी हेतु किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह कर्मशाला का आयोजन किया गया है। सूखे की आशंका को देखते हुए सभी जिला के कृषि पदाधिकारियों को अपने अपने जिले में किस स्तर की तैयारियाँ करेंगे इस हेतु एक कांटिजेंट प्लान बनाने का निदेश दिया गया था। जिसे विस्तार में इस कर्मशाला में प्रस्तुत किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए समय महत्वपूर्ण होता है । उसे यदि सही समय पर बीज ना मिले, सिंचाई की सुविधा न मिले तो हमारी सारी मेहनत बेकार है। यह एक-एक की जिम्मेवारी है इस जिम्मेवार को धर्म के रूप में निभाना होगा।

कृषि मंत्री ने सूखे की संभावित आशंका को देखते हुए दिया एक्शन प्लान

कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग एक सेना के रूप में किसानों में लिए काम करेंगे । जिला में नोडल पदाधिकारी जिला कृषि पदाधिकारी रहेंगे और कृषि प्रभाग से जुड़े सभी पदाधिकारी मिलकर एक्शन मोड पर काम करेंगे । उन्होंने निदेश दिया कि 15 मई को जिला स्तरीय बैठक बुलायें जिसमे प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे । इस कर्मशाला में बताए गए प्लान की सूचना उनसे साझा करेंगे । इसकी रिपोर्ट राज्य के नोडल पदाधिकारी को भेजेंगे। साथ ही 20 मई को हर जिला में ख़रीफ़ मेला का आयोजन होगा । जिसमें 500 प्रगतिशील किसान भाग लेंगे इसमें हर प्रखंड से भागीदारी हो इसे सुनिश्चित करेंगे। मेला में सॉइल टेस्टिंग काउंटर भी उपलब्ध करायेंगे। कर्मशाला में जो बातें आपने सीखी है उसे सरल तरीक़े से किसानो को समझाना होगा। कृषि विभाग से क्या मदद मिल सकती है उसकी जानकारी भी दे । 22 मई को प्रखंड स्तर भी खरीफ मेला का आयोजन करें और पंचायत स्तर भागीदारी सुनिश्चित करें साथ ही हर पंचायत से 50-50 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करें । बीज का वितरण एसएचजी और एफ़पीओ के जरिये हो इसे भी सुनिश्चित करेंगे ।

कृषि के अलावा अन्य प्रभाग पर भी जोर

कृषि मंत्री ने पदाधिकारियों को निदेश दिया कि पशुओं के दवाई का वितरण समय पर इससे संबंधित निविदा समय पर हो इसे सुनिश्चित करें । मई अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य ख़त्म को जाना चाहिए। जिला मत्स्य पदाधिकारी मत्स्य बीज का आंकलन कर निदेशालय को भेज दें और मई अंत तक वितरण हो इसे सुनिश्चित करें ।इसके अलावे उन्होंने भूमी संरक्षण,सोलर पम्प वितरण , ड्रिप इरीगेशन ,मधुमक्खी पालन आदि पर सख्ती से अनुपालन करने का निदेश दिया ।

बिरसा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एससी दुबे ने कर्मशाला में कहा कि जल संरक्षण की दिशा में काम करना होगा । डाइवर्सिफिकेशन को बढ़ाना है। किसान आय के अन्य उपायों को भी अपनाने पर जोर दें इसके लिए उन्हें प्रेरित करना होगा । जिला कृषि पदाधिकारी को अपने जिले की कृषि से संबंधित सभी जानकारी रखनी होगी ।

विशेष सचिव श्री गोपाल जी तिवारी ने कहा कि कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की के निदेश पर इस दो दिवसीय कर्मशाला का आयोजन किया गया। इसमें संभावित सूखे की स्थिति में किसानों को कैसे राहत पहुंचाई जाए इस रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस कर्मशाला का उद्देश्य था कि जिला स्तर पर एक इंटीग्रेटेड प्लान निकल कर सामने आए । ताकि राज्य स्तर पर इसे इंप्लीमेंट करे सके ।

दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला के दूसरे दिन मंगलवार को डॉ अख़लाक़ अहमद ,कृषि वैज्ञानिक ने धान के किस्मों के चयन के बारे में जानकारी दी । मानसून समय पर आता है तो धान की बुआई शुरू कर देनी है। उन्होंने मौसम और भूमि के आधार पर धान के किस्मों के चयन के बारे में जानकारी दी।डॉ अशोक कुमार सिंह ने धान की उन्नत खेती कैसे करें इस संबंध में कार्यशाला में मौजूद पदाधिकारियों को जानकारी दी ताकि किसानों को इस संबंध में जागरूक किया जा सके ताकि धान की पैदावार अधिक से अधिक हो । उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों से धान की खेती पर जोर दिया । धान की बुआई कैसे करें , किस प्रकार की धान के किस्मों का चयन करें, ज़्यादा उपज के धान की किस्मों का चयन, भूमि आधारित धान के किस्मों का चयन आदि की जानकारी दी। खरपतवार नाशक के किस्म और उनके उपयोग की जानकारी दी । डॉ अरुण कुमार , कृषि वैज्ञानिक बीएयू ने मिलेट्स खेती की जानकारी दी । सॉइल कंजर्वेशन के उपायों की भी जानकारी दी गई।

इस अवसर पर सूखे की आपात स्थिति से निपटने के लिए किस प्रकार की तैयारी रखें इस आधारित एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म बनायी गई है जिससे किसानों को अवगत कराया जा सके । इसे दिखाया गया ।

कार्यक्रम में निदेशक समिति श्री विकास कुमार , निदेशक सांख्यिकी एवं मूल्यांकन श्री श्री शैलेन्द्र कुमार , कृषि विभाग से जुड़े पदाधिकारी, सभी जिले से आयें कृषि पदाधिकारी , संबंधित विभिन्न विभागों से जुड़े पदाधिकारीगण सहित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण, कृषि वैज्ञानिक आदि उपस्थित थे ।

PVUNL की बड़ी छलांग: 800 MW Unit-2 का Trial Operation पूरा, Jharkhand को मिलेगी 1360 MW बिजली

Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) ने 11 मई 2026 को शाम 7:15 बजे Unit-2 के Trial Operation को सफलतापूर्वक पूरा कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस सफलता के साथ Unit-2 के नियमित संचालन एवं Commercial Operation Declaration (COD) का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे Jharkhand सहित अन्य लाभार्थी राज्यों में गर्मी के मौसम में बढ़ी हुई बिजली मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

PVUNL से उत्पादित कुल विद्युत का 85% Jharkhand को प्राप्त होगा। Unit-1 और Unit-2 के 1600 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता में से 1360 मेगावाट बिजली Jharkhand को जाएगी। यह विद्युत राज्य के औद्योगिकीकरण को गति देने तथा विकास के नए अवसर सृजित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर PVUNL के CEO Shri A.K. Sehgal, CGM (Project) Shri Anupam Mukherjee, GM (O&M) Shri Manish Khetrapal, GM (O&C) Shri Jogesh Chandra Patra, GM (Project) Shri Bishnu Dutta Dash तथा GM (Maintenance & ADM) Shri O.P. Solanki सहित PVUNL, NTPC एवं BHEL के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और इस उपलब्धि का उत्सव मनाया।

इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए CEO Shri A.K. Sehgal ने सभी कर्मचारियों, अभियंताओं एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत, समर्पण और सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष 05 नवंबर 2025 को Unit-1 की वाणिज्यिक परिचालन की घोषणा (COD) की गई थी और अब PVUNL, Unit-2 की वाणिज्यिक परिचालन के घोषणा की दिशा में भी पूर्ण रूप से तैयार है।

Shri Sehgal ने NTPC, Government of Jharkhand, JBVNL तथा अन्य सभी हितधारकों के अधिकारियों एवं सहयोगी संस्थाओं का उनके निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन एवं समर्थन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

धनबाद समाहरणालय का भाजपा ने किया घेराव, पेयजल संकट को लेकर डीसी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

धनबाद जिले में व्याप्त भीषण पेयजल संकट को लेकर आज भारतीय जनता पार्टी धनबाद जिला महानगर एवं ग्रामीण के संयुक्त तत्वावधान में समाहरणालय के बाहर मटका फोड़ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं आमजन शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मौजूद थे।

साथ ही सांसद ढुल्लू महतो , पूर्व सांसद पीएन सिंह, विधायक राज सिन्हा , झरिया विधायक रागिनी सिंह , बाघमारा विधायक शत्रुघन महतो , भाजपा नेत्री तारा देवी तथा महानगर अध्यक्ष श्रवण राय और ग्रामीण अध्यक्ष मोहन कुंभकार विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि धनबाद जिले की जनता आज भीषण पेयजल संकट से जूझ रही है। जिले के कई क्षेत्रों में लोग डोभा, चुआं, नदी एवं नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि बराकर और दामोदर जैसी नदियों से घिरा धनबाद भी आज पानी के लिए तरस रहा है।

उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के बाद भाजपा सरकार ने मैथन डैम से धनबाद तक पेयजल पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया था, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार की उदासीनता एवं कुंभकर्णी नींद के कारण आज स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से नल-जल योजना के माध्यम से लगातार प्रयास कर रही है, मगर राज्य सरकार इस योजना में भी भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आ रही है।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा कार्यकर्ताओं ने धनबाद जिला समाहरणालय का घेराव कर जनता की आवाज को बुलंद करने का कार्य किया है। भाजपा जनता के अधिकारों एवं हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला शुरू, सूखे से निपटने पर बना कंटीजेंट प्लान

रांची:- सोमवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन हुआ । सभी जिला के कृषि पदाधिकारियों ने आने वाले मौसम को ध्यान में रखते हुए जिलों में किए जा रही तैयारियों को एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बतलाया । आने वाले मौसम में यदि राज्य में सूखे की आशंका बनती है तो, जिलों में किस प्रकार की तैयारियां की जा रही है इससे अवगत कराया ।

सूखे की स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाना प्राथमिकता

बिरसा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एससी दुबे ने कर्मशाला में सभी जिला के कृषि पदाधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी कि प्राकृतिक आपदा (सूखे की स्थिति) में हमलोग किस प्रकार की तैयारी करें कि किसानों को ज़्यादा से ज्यादा राहत पहुँचा सकें। उन्होंने बतलाया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक सभी तैयारियाँ और प्लान सुनिश्चित कर लें। बीज वितरण को प्राथमिकता के साथ लें। नर्सरी प्रबंधन पर फोकस करें। इंटरक्रॉपिंग भी साथ साथ करें। सूखे की यदि थोड़ी भी संभावना दिखे तो उसे देखते हुए युरिया का प्रयोग सावधानी के साथ करें। सॉइल कांजेर्वेशन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता दें। बागवानी भी साथ-साथ में करें। आम-लीची के पेड़ लगायें। पानी की कमी है तो खेत खाली ना छोड़े बल्कि ख़रीफ़ सब्जी लगायें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि झारखंड में किसानों की आय बढ़ानी है तो सिर्फ़ खेती पर निर्भर ना रहें बल्कि किसानों को पशुपालन के लिए भी प्रेरित करें ।

राज्य में मानसून के मद्देनज़र सभी तैयारियां करें सुनिश्चित

उपनिदेशक , सांख्यिकीय,श्री शैलेन्द्र कुमार ने कहा कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने सभी पदाधिकारियों को निदेश दिया है कि राज्य में यदि सूखे की स्थिति बनती है तो इस मद्देनज़र सभी स्तर पर व्यापक तैयारियां सुनिश्चित किया जाए। सूखे की स्थिति में अन्य विकल्पों पर कार्य करें। कृषि विभाग से जुड़े सभी प्रभाग को बेहतर समन्वय बनाते हुए सभी तैयारियाँ रखें ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटा जा सके और राज्य के किसानों को राहत मिल सके । इन सभी पर आकस्मिक योजना की जानकारी देने हेतु 11 एवं 12 मई को दो दिवसीय कर्मशाला का आयोजन किया जा रहा है। जहाँ पहले दिन सोमवार को कंटीजेंट प्लान(आकस्मिक योजना ) पर प्रेजेंटेशन दिया गया और मंगलवार को दूसरे दिन कर्मशला का आयोजन होगा ।

विभिन्न जिलों के कृषि पदाधिकारियों ने बतलाया कांटीजेंट प्लान

रांची के जिला कृषि पदाधिकारी श्री राम शंकर प्रसाद सिंह रांची जिला के कंटिंजेंट प्लान को एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले में की जा रही तैयारियों को बतलाया। इन्होंने कहा कि यदि राज्य में सूखे की स्थिति बनती है तो उस मुताबिक़ हमलोगों ने कांटीजेंट प्लान (आकस्मिक योजना) तैयार किया गया है ।

जिला कृषि पदाधिकारी खूँटी श्री हरिकेश ने खूँटी जिला में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए बनायी गई आकस्मिक योजना की जानकारी एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी ।

इसके अलावा राज्य के सभी जिला के कृषि पदाधिकारियों ने अपने- अपने जिलों में की जा रही तैयारियों की जानकारी दी ।

कार्यक्रम में कृषि विभाग से जुड़े पदाधिकारी, जिलों से आयें कृषि पदाधिकारी , संबंधित विभिन्न विभागों से जुड़े पदाधिकारीगण सहित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण, कृषि वैज्ञानिक आदि उपस्थित थे ।

टेंडर कमीशन घोटाला: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को SC से राहत, 15 मई 2024 से थे जेल में बंद

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार सुबह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है. आलमगीर आलम को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 मई 2024 को टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था. यह कार्रवाई उनके करीबियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में 32.20 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद होने के बाद हुई थी.

हाईकोर्ट में जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट दी थी चुनौती

ज्ञात हो कि झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल की जमानत याचिका खारिज कर चुका था, जिसके बाद से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की ओर से कहा गया कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है. न ही उनके यहां से किसी तरह के कोई पैसे बरामद हुए थे. ऐसे में उन्हें राहत मिलनी चाहिए. इसके अलावा पूर्व मंत्री के अधिवक्ताओं ने उनकी बीमारी का भी हवाला देते हुए को जमानत की गुहार लगाई.

ईडी ने क्या दी दलील

जबकि ईडी की ओर से पेश होने वाले अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को भी टेंडर आवंटन के बाद कमीशन का पैसा मिलता था. उनके पीएस संजीव लाल के यहां से मिली डायरी में यह लिखा गया था कि मंत्री को भी कमीशन का पैसा दिया जाता है. ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती है.

ईडी ने गवाहों को प्रभावित करने की जताई थी आशंका

आलमगीर आलम की जमानत मामले में इससे पहले 2 अप्रैल को भी सुनवाई हुई थी, जिसमें जांच एजेंसी ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में अभी चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं, ऐसे में अभियुक्तों को रिहा करना उचित नहीं होगा. ईडी ने कोर्ट के समक्ष यह आशंका भी जताई थी कि यदि इन आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वे बाहर निकलकर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. हालांकि, इन तमाम विरोधों के बावजूद अदालत ने अब उन्हें जमानत की राहत प्रदान कर दी है.

रांची DC की सख्ती: 60-70% फीस बढ़ाने वाले प्राइवेट स्कूलों पर कसेगा शिकंजा

रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में जिले के सभी निजी स्कूलों CBSE, ICSE और JAC बोर्ड के प्राचार्यों के साथ अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में राइट टू एजुकेशन (RTE) से जुड़े पांच प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान स्कूलों की फीस बढ़ोतरी, इंफ्रास्ट्रक्चर, को लेकर उपायुक्त का रुख सख्त रहा। कई ऐसे स्कूल पाए गए जो प्रत्येक वर्ष फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं और कई स्कूलों में तो 60 से 70% तक फीस बढ़ोतरी की है उन्हें कारण बताने को भी कहा गया। तो कई स्कूलों ने इसे एडजस्ट करने की भी बात कही।

शिक्षा के अधिकार को माने तो दो वर्षों के बाद 10% स्कूल फीस में बढ़ोतरी करना है। जिला प्रशासन ने समीक्षा के दौरान पाया कि कई स्कूलों में दो वर्षों के भीतर निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ोतरी की गई है। समीक्षा में यह भी निकाल कर सामने आया कि 13 अप्रैल के बैठक के बाद 149 CBSE और ICSE स्कूलों में से 129 स्कूलों ने फीस मैनेजमेंट कमेटी और PTA का गठन कर उसकी जानकारी अपलोड कर दी है। हालांकि 20 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अब तक इसका पालन नहीं किया। ऐसे स्कूलों के खिलाफ जिला प्रशासन और संबंधित बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय आगे कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई कर की बात कही।

वहीं, पिछले तीन वर्षों की फीस संरचना की समीक्षा में यह सामने आया कि 92 स्कूलों में फीस नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे अगले 10 से 15 दिनों के भीतर एक एक्शन प्लान आरटीई नोडल पदाधिकारी को सौंपें। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में हुई अतिरिक्त फीस बढ़ोतरी को छात्रों की मासिक फीस में री-एडजस्ट किया जाएगा।

इसके अलावा RTE के तहत 25 प्रतिशत बीपीएल छात्रों के एडमिशन पर भी चर्चा हुई। जिला प्रशासन ने बताया कि पिछले वर्ष पूरी पारदर्शिता के साथ दाखिला लिया जाएगा। स्कूलों को इसकी सूचना जल्द दे दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं और 25 प्रतिशत बीपीएल एडमिशन जैसे अहम बिंदु शामिल रहे।

अमूमन अपराधियों का पुलिस करती है पर्दाफाश, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर पुलिस का खोल रहे हैं कच्चा चिट्ठा : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने  

कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के मीडिया में वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो को लेकर फिर से हेमंत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। 

सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा है कि आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का “मूल्यांकन” भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

श्री मरांडी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के।

श्री मरांडी ने आगे लिखा है कि सबसे भयावह पक्ष 'सत्ता संरक्षण' की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की 'बोली' लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” की तरह काम कर रही है?

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा है कि यदि वसूली की मानसिकता वाली यह कार्यशैली जारी रही, तो झारखंड 'जंगलराज' से भी बदतर स्थिति में पहुँच जाएगा। जब रक्षक ही भय का कारण बन जाएं, तो लोकतंत्र खतरे में है। जनता अब पूछ रही है—आखिर कब तक चलेगा यह “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” देने का धंधा?

09 मई को RTE बैठक: राँची के सभी निजी स्कूल प्राचार्यों की उपस्थिति अनिवार्य

आर्यभट्ट सभागार, राँची विश्वविद्यालय, राँची में दिनांक 09 मई 2026 (शनिवार) को पूर्वाह्न 11:30 बजे RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' सम्बंधित बैठक

RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' सम्बंधित बैठक आहूत की गई है।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में दिनांक 09 मई 2026 (शनिवार) को पूर्वाह्न 11:30 बजे यह बैठक आयोजित की जाएगी।

बैठक का स्थान:

आर्यभट्ट सभागार, राँची विश्वविद्यालय, राँची

महत्वपूर्ण निर्देश:

- राँची जिले के सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य/अधिकृत प्रतिनिधि को बैठक में उपस्थित होना अनिवार्य है।

- पंजीकरण का कार्य पूर्वाह्न 11:00 बजे* से शुरू होगा।

उक्त बैठक में RTE Right to Education 'शिक्षा का अधिकार' संबंधी महत्वपूर्ण चर्चा की जाएगी। इसलिए सभी संबंधित निजी विद्यालयों के प्राचार्यों से अपील की जाती है कि वे समय पर पंजीकरण कर बैठक में

अनिवार्य रूप से भाग लें।

भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

450 मेगावाट क्षमता के साथ दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन चालू, 7 जिलों को फायदा

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झारखंड की विद्युत व्यवस्था के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब 220 केवी दुमका–गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन के एक सर्किट के LILO (Line In Line Out) का सफलतापूर्वक चार्जिंग कार्य पूर्ण कर लिया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ Jharkhand Urja Sancharan Nigam Limited अब North Karanpura Transmission Limited से लगभग 450 मेगावाट तक विद्युत प्राप्त करने में सक्षम हो गया है।

वर्तमान में इस लाइन के माध्यम से डुमका क्षेत्र को करीब 103 मेगावाट तथा गोविंदपुर ग्रिड सबस्टेशन (GSS) को लगभग 80 मेगावाट बिजली मिल रही है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही यह लाइन अपनी पूर्ण क्षमता से संचालित होगी, राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।

इस परियोजना के चालू होने से डुमका, साहिबगंज, पाकुड़, देवघर, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही गोविंदपुर, चंदनकियारी, जैनामोड़, डुमका, महारो, पाकुड़, साहिबगंज, लालमटिया, अमड़ापाड़ा, जसीडीह, गिरिडीह, देवघर, बरहेट और सरिया सहित कई महत्वपूर्ण ग्रिड सबस्टेशनों को अब अधिक स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

विशेष रूप से डुमका, धनबाद और बोकारो में बीते कुछ समय से जारी बिजली संकट और लोड शेडिंग की समस्या से उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। भीषण गर्मी और पीक लोड के दौरान यह ट्रांसमिशन लाइन राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित होगी।

इस उपलब्धि का श्रेय JUSNL के अधिकारियों, अभियंताओं, साइट टीमों और संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयासों को दिया जा रहा है। उनके सतत परिश्रम और प्रतिबद्धता ने झारखंड की विद्युत संरचना को नई मजबूती प्रदान की है।