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उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण: स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों व सदस्यों हेतु राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
- जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के त्वरित, सुलभ व किफायती निस्तारण में स्थायी लोक अदालतों की भूमिका महत्वपूर्ण: न्यायमूर्ति आलोक माथुर
- सुलह-समझौते और संवाद के जरिए बिना कोर्ट फीस के आमजन को न्याय दिलाना मूल उद्देश्य; निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाएं सदस्य
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 के तहत कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने और व्यवहारिक चुनौतियों पर हुआ गहन मंथन

लखनऊ, 31 अक्टूबर 2026। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  न्यायमूर्ति  सूर्यकान्त तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं कार्यपालक अध्यक्ष (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण-नालसा)  न्यायमूर्ति  विक्रम नाथ के संरक्षण में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा मुख्य संरक्षक (उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण)  न्यायमूर्ति अरूण भंसाली एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश तथा कार्यपालक अध्यक्ष (उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण)  न्यायमूर्ति  अरिन्दम सिन्हा के कुशल मार्गदर्शन में शनिवार को राजधानी के स्पंदन सभागार में राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की समस्त स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों एवं सदस्यों की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ के न्यायाधीश  न्यायमूर्ति  आलोक माथुर ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति  आलोक माथुर ने अपने संबोधन में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) संस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालतें आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ी जन उपयोगी सेवाओं (Public Utility Services) के विवादों को सुलझाने का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम हैं।
न्यायमूर्ति माथुर ने रेखांकित किया कि सुलह (Conciliation) की प्रक्रिया किसी तयशुदा अथवा औपचारिक खांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निरंतर संवाद, आपसी समझ और सौहार्दपूर्ण समाधान की भावना पर टिकी है। उन्होंने स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों एवं सदस्यों का आह्वान किया कि वे अनिवार्य सुलह की प्रक्रिया का निर्वहन करते समय पूरी तरह निष्पक्ष, संवेदनशील और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाएं, जिससे पक्षकारों का न्याय व्यवस्था पर अटूट विश्वास बना रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा  कि स्थायी लोक अदालतों का प्राथमिक दायित्व नियमित न्यायालयों की भांति केवल न्यायिक निर्णय पारित करना भर नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों के मध्य सार्थक संवाद स्थापित कराकर सहमति और सुलह के आधार पर विवादों का सर्वमान्य हल निकालना है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के प्राविधानों के अंतर्गत इन संस्थाओं में सुलह की मानवीय भावना के साथ त्वरित न्याय निर्णयन की व्यवस्था अंतर्निहित है।
अभिमुखीकरण सत्र के दौरान वक्ताओं ने रेखांकित किया कि स्थायी लोक अदालतें न्याय व्यवस्था का ऐसा अनूठा मंच हैं, जहां आम नागरिकों को बिना किसी कोर्ट फीस और बिना जटिल अदालती प्रक्रियाओं के त्वरित, सुलभ व किफायती न्याय प्राप्त होता है। दिन भर चले तकनीकी सत्रों में प्रदेश भर से आए स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों और सदस्यों ने अपने व्यवहारिक अनुभव साझा किए। इस दौरान स्थायी लोक अदालतों की मिश्रित प्रकृति यानी समाधान एवं न्यायनिर्णयन और उनके क्षेत्राधिकार से संबंधित विधिक प्राविधानों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, सुलह की कार्यवाही के दौरान अपनाई जाने वाली प्रभावी प्रक्रियाओं, उपयुक्त वादों के चिन्हांकन तथा पक्षकारों के साथ सार्थक व सकारात्मक वार्ता को बढ़ावा देने के व्यवहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया और फील्ड स्तर पर आने वाली विभिन्न प्रशासनिक व प्रक्रियात्मक चुनौतियों के त्वरित समाधान की रूपरेखा तैयार की गई।
दिव्यांगजनों के राज्य स्तरीय पुरस्कारों के लिए आवेदनों की जांच जल्द पूरी करें : नरेंद्र कश्यप
- 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांगता दिवस पर आयोजित होगा पुरस्कार वितरण समारोह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी होंगे शामिल
- पुरस्कार राशि 5 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये की गई, सभी 12 श्रेणियों और 30 उपश्रेणियों में पात्रों का चयन करने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांगजनों को दिए जाने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी 12 श्रेणियों और 30 उपश्रेणियों में प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटिनी का काम शीघ्र पूरा किया जाए। जिन श्रेणियों में आवेदन नहीं मिले हैं, उनमें जिला दिव्यांगजन अधिकारियों और जिलाधिकारियों के माध्यम से पात्र लोगों के आवेदन मंगाए जाएं, ताकि कोई भी श्रेणी खाली न रह जाए। समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। राज्य स्तरीय पुरस्कार भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य दिव्यांगजनों का मनोबल बढ़ाना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने दिव्यांगजन पुरस्कार की राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है। इसके लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्धारित धनराशि का सदुपयोग करते हुए सभी पात्र लोगों का चयन सुनिश्चित किया जाए।
राज्य स्तरीय पुरस्कारों के तहत सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग कर्मचारी एवं स्वनियोजित दिव्यांगजन, दिव्यांगजनों के लिए उत्कृष्ट नियोक्ता और प्लेसमेंट अधिकारी या एजेंसी, दिव्यांगजन के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति एवं संस्थान, प्रेरणास्रोत, नवीन अनुसंधान एवं उत्पाद विकास, बाधामुक्त वातावरण तैयार करने, पुनर्वास सेवाएं देने वाले सर्वश्रेष्ठ जिले, सृजनशील दिव्यांग वयस्क एवं बालक-बालिका, ब्रेल प्रेस, दिव्यांग खिलाड़ी तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण के लिए कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी को सम्मानित किया जाएगा। इन सभी वर्गों में कुल 12 श्रेणियों और 30 उपश्रेणियों के अंतर्गत पुरस्कार निर्धारित हैं।
बैठक में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांगता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों की भी समीक्षा की। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की सभी औपचारिकताएं समय से पूरी कर ली जाएं। आयोजन में किसी भी तरह की लापरवाही या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अभी से कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निदेशक अस्मिता लाल, संयुक्त निदेशक अमित सिंह, उप निदेशक अमित राय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
एफएसडीए ने 6 महानगरों में चलाया विशेष अभियान, 9 खाद्य प्रतिष्ठानों का कारोबार कराया बंद
- 'शुद्ध ही शुभ है' अभियान के तहत मिठाई निर्माण में गंदगी और प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल पर लिया गया एक्शन
- 69 टीमों ने 116 खाद्य प्रतिष्ठानों का किया निरीक्षण, 149 नमूने संग्रहित और 96 सुधार नोटिस जारी
- 655 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त, 537 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई

लखनऊ, 31 अक्टूबर। त्योहारों के दौरान आमजन को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने प्रदेशव्यापी निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। 'शुद्ध ही शुभ है' अभियान के तहत विभाग की 69 टीमों ने 6 महानगरों (कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या और प्रयागराज) में मिठाई एवं अन्य खाद्य निर्माण प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों में स्वच्छता मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई। कहीं तैयार मिठाइयां सीधे गंदे फर्श पर रखी मिलीं तो कहीं निर्माण स्थलों पर कॉकरोच, मक्खियां, चूहों की गंदगी और मकड़ी के जाले पाए गए। कुछ प्रतिष्ठानों में प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल और बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार संचालित किए जाने के मामले भी सामने आए। गंभीर अनियमितताओं पर विभाग ने नौ खाद्य प्रतिष्ठानों का कारोबार बंद कराया।
अभियान के तहत कुल 116 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 149 खाद्य नमूने संग्रहित किए गए। अनियमितताएं पाए जाने पर 96 सुधार नोटिस जारी किए गए। कार्रवाई के दौरान 655 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसका मूल्य 4,07,176 रुपये है, जबकि 537 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई, जिसका अनुमानित मूल्य 1,98,230 रुपए है।
- कानपुर में फर्श पर रखी मिलीं मिठाइयों की ट्रे, निर्माण स्थल पर गंदगी
कानपुर नगर में न्यू तिवारी स्वीट्स के निर्माण स्थल पर अत्यधिक गंदगी और दुर्गंध मिली। खाद्य पदार्थों का भंडारण भी अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था। तैयार मिठाइयों की ट्रे सीधे फर्श पर रखी मिलीं। वहीं, लाला दयाराम स्वीट्स के परिसर में मकड़ी के जाले और कालिख पाई गई। कारखाने में समुचित सफाई के बिना मिठाइयों का निर्माण किया जा रहा था। ड्रेनेज व्यवस्था भी जाम मिली, जिससे खाद्य पदार्थों में बाहरी तत्वों से संदूषण की आशंका थी। यहां 12 टीमों ने 20 में से 19 इकाइयों का निरीक्षण कर 26 नमूने लिए और 16 सुधार नोटिस जारी किए।
- गोरखपुर में बिना लाइसेंस संचालित हो रहा था मिठाई कारखाना
गोरखपुर के धर्मशाला बाजार स्थित कामधेनु स्वीट्स के कारखाने में अत्यधिक गंदगी पाई गई। निर्माण स्थल की दीवारें टूटी हुई थीं और परिसर में मकड़ी के जालों के साथ कूड़े का ढेर मिला। जांच में प्रतिष्ठान के पास खाद्य कारोबार का लाइसेंस भी नहीं पाया गया। गोरखपुर में 15 टीमों ने 27 में से 23 इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान 17 नमूने लिए गए और 20 सुधार नोटिस जारी किए गए।
- मेरठ में प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल का मामला आया सामने
मेरठ स्थित सम्राट स्वीट्स के निरीक्षण में प्रतिबंधित सैकरिन, कॉस्टिक सोडा और रंग के साथ गैर-खाद्य श्रेणी के सोडियम बाइकार्बोनेट के इस्तेमाल का मामला सामने आया। इसके अलावा प्रतिष्ठान की ड्रेनेज व्यवस्था खराब मिली और कीट नियंत्रण के लिए भी समुचित इंतजाम नहीं पाए गए।
- गाजियाबाद में कच्चा माल और तैयार मिठाइयां गंदे फर्श पर मिलीं
गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र स्थित तिरुपति फूड्स में कच्चा माल सीधे गंदे फर्श पर रखा मिला। साहिबाबाद स्थित अग्रवाल फूड्स में भंडारण स्थल पर कॉकरोच और कीड़े पाए गए। निर्माण स्थल की दीवारें भी टूटी हुई थीं और उनसे सीमेंट झड़ रहा था। तैयार खाद्य पदार्थ भी सीधे फर्श पर रखे मिले। वहीं, नेहरू नगर स्थित शगुन स्वीट्स में पूरे परिसर में गंदगी, टूटा फर्श, अव्यवस्थित कच्चा माल और खराब ड्रेनेज सिस्टम पाया गया। गाजियाबाद में 18 टीमों ने 25 इकाइयों का निरीक्षण कर 49 नमूने लिए और 20 सुधार नोटिस जारी किए। यहां तीन प्रतिष्ठानों का कारोबार बंद कराया गया।
- अयोध्या में गंदगी और दूषित पानी के बीच हो रहा था मिठाइयों का भंडारण
अयोध्या के भेलसर चौराहा स्थित राम नरेश स्वीट्स में अत्यधिक गंदी परिस्थितियों में मिठाइयों का निर्माण किया जा रहा था। परिसर में मक्खियां मौजूद थीं और खाद्य पदार्थों के भंडारण की स्थिति भी खराब मिली। मोहम्मदपुर स्थित संजय यादव स्वीट हाउस में भी अत्यधिक गंदगी, कीड़े-मकोड़े और चूहों की गंदगी पाई गई। फर्श पर गंदा पानी जमा था और उसी स्थान पर खाद्य सामग्री रखी हुई थी। डीप फ्रीजर से निकलने वाला गंदा पानी भी परिसर में मौजूद था। इसी गंदे पानी वाले डीप फ्रीजर में मिठाइयों का भंडारण किया जा रहा था। पूरे परिसर में दुर्गंध फैली हुई थी। अयोध्या में आठ टीमों ने 18 इकाइयों का निरीक्षण कर 14 नमूने लिए और 13 सुधार नोटिस जारी किए।
- प्रयागराज में 18 खाद्य इकाइयों का निरीक्षण
प्रयागराज में एफएसडीए की आठ टीमों ने 18 खाद्य कारोबार इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान 14 खाद्य नमूने संग्रहित किए गए और अनियमितताओं पर 15 सुधार नोटिस जारी किए गए। यहां किसी भी इकाई का लाइसेंस निलंबित नहीं किया गया।
- खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई जारी
'शुद्ध ही शुभ है' अभियान के माध्यम से एफएसडीए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ-साथ उनके निर्माण, भंडारण और बिक्री की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करा रहा है। विभागीय टीमें निर्माण स्थलों की साफ-सफाई, कच्चे माल के सुरक्षित भंडारण, तैयार खाद्य पदार्थों को फर्श से दूर रखने, कीट नियंत्रण, जल निकासी और खाद्य श्रेणी के अनुमोदित पदार्थों के इस्तेमाल की जांच कर रही हैं।
विभाग की ओर से कमियां पाए जाने पर कारोबारियों को सुधार नोटिस जारी कर निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं, गंभीर अनियमितताओं और खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कारोबार बंद कराने जैसी कठोर प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है। त्योहारों के दौरान आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सपा सरकार में ध्वस्त थी कानून-व्यवस्था, आज माफिया मिट्टी में मिल रहे: मंत्री असीम अरुण

SIR से बोगस वोटिंग का रास्ता हुआ बंद, इसलिए अखिलेश यादव परेशान : असीम अरुण

'27 में सपा का सफाया करेगी जनता, विपक्ष में बैठने लायक नहीं बचेंगे अखिलेश यादव : भाजपा प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी

'राम मंदिर पर सवाल उठाने से पहले अपने अतीत में झांके सपा', भाजपा का अखिलेश पर तीखा हमला 

लखनऊ, 31 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को प्रदेश की कानून व्यवस्था पर टिप्पणी करने से पहले अपने शासनकाल के लिए लोगों से माफी मांगनी चाहिए। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि सपा का पूरा इतिहास ही राम मंदिर के विरोध का रहा है। आज जब अखिलेश यादव सनातन की बात करते हैं तो यूपी की जनता उनकी मंशा को अच्छे से समझती है।  

सपा शासन में कानून-व्यवस्था बदहाल थी : असीम अरुण

मंत्री असीम अरुण ने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में देश और प्रदेश की कानून व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आज सपा कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। लेकिन वो अपना दौर भूल गई जब प्रदेश में माफियाओं का राज था। अपराधियों के आगे सरकार बेबस दिखती थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में यूपी में कानून का राज है। जनता का योगी सरकार पर लगातार विश्वास बढ़ रहा है। अखिलेश यादव के चुनाव आयोग पर आरोपों को बेतुका और आधारहीन बताते हुए असीम अरुण ने कहा कि देश में करीब 22 साल बाद एसआईआर हो रहा है। इससे बोगस वोटिंग रुकेगी। 

अखिलेश यादव अपने शासनकाल का हिसाब क्यों नहीं देते

भाजपा प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव को 2012 से 2017 के सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर श्वेतपत्र जारी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश में करीब एक हजार दंगे हुए, माफियाओं का खुला प्रभाव था और कानून-व्यवस्था बद से बदतर थी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव चुनाव आयोग पर इसलिए सवाल उठा रहे हैं क्योंकि अब वोटर लिस्ट से घुसपैठियों का नाम कट रहा है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता सपा और अखिलेश यादव को हराने के लिए तैयार बैठी है।

अखिलेश यादव के बयानों में झलक रही हताशा, चुनाव से पहले ही हार मान चुकी है सपा: बीजेपी

‘चुनाव आयोग को बदनाम करने का ठेका लेकर बैठे हैं अखिलेश यादव’, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह का तीखा हमला

अमित शाह के यूपी दौरे से सपा का बचा-खुचा उत्साह भी खत्म हुआः दिनेश प्रताप सिंह

'जनता ने सपा के लिए हर दरवाजे बंद किए', बीजेपी प्रवक्ता ने अखिलेश पर साधा निशाना

लखनऊ, 31 अक्टूबर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विधानसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सपा प्रमुख का मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उनकी बौखलाहट साफ बता रही है कि वो हार स्वीकार कर चुके हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एनडीए की प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी।

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव लगातार जनता का भरोसा खो रहे हैं और इसी हताशा में अब वो संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग के खिलाफ झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को खुद नहीं पता कि वे क्या बोल रहे हैं। उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग केवल बीजेपी कार्यकर्ताओं को ही भारत का नागरिक मानता है। इस पर पलटवार करते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने सवाल किया कि क्या समाजवादी पार्टी को वोट देने वाले लोग भी बीजेपी के कार्यकर्ता हैं?

'अमित शाह के आने से सपा की बेचैनी बढ़ी'

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूपी दौरे से सपा का बचा-खुचा उत्साह भी खत्म हो गया है। जबकि बीजेपी कार्यकर्ताओं का उत्साह अब दोगुना हो गया है। यूपी की जनता इस बार फिर सपा को सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि अखिलेश को भ्रम में नहीं रहना चाहिए और मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखना बंद कर देना चाहिए।

'बीमारू से उत्तम प्रदेश बना यूपी'

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि 10 साल पहले यूपी की जो स्थिति थी और आज प्रदेश में जो बदलाव हुए हैं उसमें जमीन-आसमान का अंतर है। यूपी अब उत्तम प्रदेश बनकर उभरा है। भारतीय जनता पार्टी जनता से जो वादा करती है वो पूरा करती है। यही कारण है कि देश और प्रदेश की सम्मानित जनता बार-बार बीजेपी को मौका दे रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग केवल झूठ फैलाते हैं, अपने परिवार की ही चिंता करते हैं, उनके लिए जनता ने हर दरवाजे बंद कर दिए हैं।

यंग वर्कफोर्स को सपा-कांग्रेस ने माना बोझ, हमने प्रदेश की शक्ति मानकर दिया रोजगार: मुख्यमंत्री

- सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित

- पहले चरण में गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, झांसी और गौतम बुद्ध नगर में स्थापित होंगे 'स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन'

- टाटा, अशोक लीलैंड जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ हुए एमओयू, रोजगार के साथ विदेश जाने के लिए भाषा का भी मिलेगा ज्ञान

- साढ़े नौ वर्ष में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, 3 करोड़ 25 लाख को मिला ओडीओपी से रोजगार: मुख्यमंत्री

लखनऊ, 31 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है जिसे पूर्ववर्ती सपा और कांग्रेस की सरकारें केवल एक बोझ मानती थीं। डबल इंजन सरकार ने इस विशाल 'यंग वर्कफोर्स' को प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति मानते हुए युवाओं को रोजगार की पुख्ता गारंटी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 1,725 करोड़ रुपये की लागत वाली 'सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना' का शुभारंभ करते हुए यह बातें कहीं। योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्लोबल मैनपावर हब के रूप में विकसित करना है।

स्केल और स्किल से यूपी बनेगा ग्लोबल मैनपावर हब 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन वर्षों में प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ स्किल ट्रेनिंग एवं रोजगार जोन से जोड़ा जाएगा। पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतम बुद्ध नगर और झांसी में बड़े केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर युवाओं को विदेशों में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए भारतीय और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर डेडिकेटेड प्लेसमेंट सेल बनाने के साथ ही दूरदराज से आने वाले युवाओं के लिए परिसर में हॉस्टल की सुविधा भी मिलेगी।

बिना कटमनी पहुंच रहा पैसा, ओडीओपी से मिला रोजगार 

विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास और गरीब का पैसा बिचौलिए निगल जाते थे, लेकिन आज डिजिटल क्रांति के जरिए बिना किसी 'कटमनी' के पूरा पैसा सीधे बैंक खातों में पहुंच रहा है। पहले प्रदेश में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया' पलता था, जबकि आज सरकार ने माफियाओं को मिट्टी में मिलाकर युवाओं को 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) का मंच दिया है। पिछले साढ़े नौ वर्ष में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सीधे सरकारी नौकरी मिली है और ओडीओपी के माध्यम से सवा तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। युवाओं से अपनी नियमित पढ़ाई के साथ 'डुअल डिग्री' के तहत कौशल विकास कोर्स करने का भी आह्वान किया गया।

नकल और शिक्षा माफियाओं पर प्रहार 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर प्रहार करते हुए कहा कि 2017 से पहले ठेके पर नकल होती थी और अयोग्य लोगों का चयन होता था। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में युवाओं की प्रतिभाओं से खिलवाड़ करने वाले लोगों को जेल भेजकर एक स्वच्छ परीक्षा प्रणाली विकसित की गई है। वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में गुंडाराज और माफियाराज था। पैसे लेकर पढ़ाई, डिग्री और नौकरी दी जाती थी। आज डबल इंजन की सरकार बिना भेदभाव के उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ा रही है और प्रतिभा के आधार पर सभी को रोजगार के समान अवसर मिल रहे हैं।

नौ जोन और चार लेन सड़क से जुड़ेंगे केंद्र

सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि स्किल गैप को खत्म करने के लिए प्रदेश को नौ विशेष जोन में बांटा गया है। यह केवल ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं बल्कि रोजगार का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। हर सेंटर को चार लेन सड़क के जरिए सीधे हाईवे से जोड़ा जाएगा और केंद्रों के भीतर प्लेसमेंट सेल और सेवा योजन कार्यालय का विस्तार होगा।

- रोजगार मित्र पोर्टल और दिग्गज कंपनियों संग एमओयू

कार्यक्रम में 'रोजगार मित्र पोर्टल' और 'ब्लू डॉट साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर' का भी शुभारंभ किया गया। यह डिजिटल मंच युवाओं, उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों को स्थानीय और गिग वर्क के अवसरों से जोड़ेगा। प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स, अशोक लीलैंड, बीबीजी ग्रुप, पीटीसी इंडस्ट्रीज, सीआईपैट, एशियन डेवलपमेंट बैंक, अवाडा ग्रुप और सीएसआर मिंडा के साथ एमओयू का आदान प्रदान किया गया। इस दौरान टाटा के प्रतिनिधि वी रामास्वामी ने मुख्यमंत्री को सरदार पटेल की थ्री डायमेंशनल प्रतिमा भेंट की।

चेक, टूलकिट और ऑफर लेटर का हुआ वितरण

समारोह में एमएसएमई और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को ऋण के चेक वितरित किए गए। अमन अग्रवाल, अंजना धवन, कुणाल बत्रा, नेहा कुमारी, बलवीर यादव, अंजली गुप्ता और वासुदेव बाजपेयी को पांच पांच लाख रुपये, विजय लक्ष्मी श्रीवास्तव को चार लाख रुपये, अजीत साहू को 20 लाख रुपये और प्रभजोत सिंह को 63 लाख रुपये के चेक दिए गए। ओडीओपी और विश्वकर्मा योजना के तहत कमलेश गुप्ता, दिलीप कुमार, नीलम, कुमारी संगीता और सुधाकर शर्मा को टूलकिट बांटे गए। वहीं नेहा यादव, आकांक्षा तिवारी, विनय कुमार, रुचि पाल और आलोक सिंह को जॉब ऑफर लेटर सौंपे गए।

मुख्यमंत्री ने दिलाई राष्ट्रीय एकता की शपथ

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील और उद्योग आयुक्त के विजयेंद्र पांडियन ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। इस अवसर पर मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मंत्री अनिल राजभर, विधायक नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी और अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

मिलकर करना होगा जातिवाद और जिन्नावाद का मुकाबला : मुख्यमंत्री योगी

- लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंती पर लखनऊ के जीपीओ स्थित पटेल पार्क में मुख्यमंत्री योगी ने दी श्रद्धांजलि

- मुख्यमंत्री योगी ने दिलाई राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ, 'पटेल स्मारिका 2026' का किया विमोचन

- भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने का हो रहा है कुत्सित प्रयास: योगी आदित्यनाथ

- ‘हर जनपद में सरदार पटेल 'एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन' गठन, कोई युवा नहीं रहेगा बेरोजगार’

- धारा 370 दफन कर प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने पूरा किया सरदार पटेल का सपना

लखनऊ, 31 अक्टूबर। जो लोग जिन्ना को अपना आदर्श मानते हैं, वे कभी लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के अनुयायी नहीं हो सकते। सरदार पटेल का सच्चा अनुयायी वही हो सकता है जिसके मन में राष्ट्रवाद का भाव हो और जो भारत की एकता, सुरक्षा व संप्रभुता को सर्वोपरि रखता हो। समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने का प्रयास करने वाले विभाजनकारी तत्व देश की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर आक्रांताओं को आमंत्रित करते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ के जीपीओ स्थित पटेल पार्क में 'लौह पुरुष', 'भारत रत्न' सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए यह ओजस्वी विचार व्यक्त किए। इस दौरान उन्होंने पटेल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2014 के बाद से पूरा देश 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मना रहा है। इस वर्ष सरदार पटेल की 151वीं जयंती विशेष है, क्योंकि डबल इंजन की सरकार उनके 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हर जनपद में एक 'एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन' का गठन करने जा रही है। इसका शुभारंभ आज ही होने जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश का कोई भी युवा बेरोजगार नहीं रहेगा और उसकी स्किलिंग व रोजगार की व्यवस्थित व्यवस्था होगी।

- सरदार पटेल की विराट प्रतिमा उनके विराट व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करती है

सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जन्म गुजरात के एक छोटे से गांव करमसद, नडियाद में हुआ था। आज प्रधानमंत्री मोदी दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के रूप में गुजरात के केवड़िया में सरदार सरोवर के तट पर उनकी स्मृतियों को जीवंत कर रहे हैं। यह विशाल प्रतिमा उनके उस विराट व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्होंने 563 से अधिक रियासतों को भारतीय गणराज्य का अभिन्न हिस्सा बनाया था।

- नेहरू ने अपने पास रखा कश्मीर और वहां हुआ कत्लेआम

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता के समय जूनागढ़ और हैदराबाद रियासतों की आनाकानी का जिक्र करते हुए बताया कि जब सरदार पटेल ने सख्त चेतावनी दी कि 'बातों से नहीं मानोगे तो हमें दूसरा तरीका भी अपनाना आता है', तो जूनागढ़ का नवाब अपने बच्चों तक को छोड़कर पाकिस्तान भाग गया। इसी तरह, हैदराबाद का निजाम जो हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों का कत्लेआम और धर्मांतरण कराता था, उसे भी लौह पुरुष की चेतावनी के बाद भागने पर मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कश्मीर मुद्दे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि नेहरू ने कश्मीर का मामला अपने पास रखा, जिसके परिणामस्वरूप कबाइलियों के हमले में पाक अधिकृत कश्मीर आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है और वहां हिंदुओं व सिखों का व्यापक कत्लेआम हुआ।

- धारा 370 दफन कर मोदी-शाह ने साकार किया पटेल का सपना

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के कड़े विरोध के बावजूद पंडित नेहरू ने कश्मीर में धारा 370 लागू करने का पाप किया। लेकिन 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के शिल्पी प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्री अमित शाह ने धारा 370 को सदैव के लिए दफन कर दिया और कश्मीर को लखनऊ व उत्तर प्रदेश की तरह ही भारत का पूर्ण हिस्सा बना दिया। अब भारत में दो कानून नहीं चलेंगे, बल्कि एक देश में एक प्रधान, एक विधान और एक निशान ही चलेगा। यही सरदार पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का भारत है।

- जातिवाद व क्षेत्रवाद समाज की प्रतिरोधक क्षमता करते हैं कमजोर

राष्ट्रीय एकता को मिल रही चुनौतियों पर आगाह करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम जाति, क्षेत्र या भाषा के नाम पर बंटते हैं, तो समाज की स्टेमिना और प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है। ठीक उसी तरह जैसे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बीमारियां घेर लेती हैं। यही कमजोरियां आक्रांताओं को हमला करने के लिए आमंत्रित करती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने और देश की एकता व अखंडता को चुनौती देने वाले कुत्सित प्रयासों का मिलकर मुकाबला करना ही

सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

- गणमान्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने विधायक शशांक वर्मा और उनके स्वर्गीय पिता पटेल रामकुमार वर्मा के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान विधायक शशांक वर्मा ने प्रसिद्ध चित्रकार शैलेंद्र उत्तम द्वारा गेहूं के दाने से निर्मित सरदार पटेल का एक अद्भुत चित्र मुख्यमंत्री को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने अन्य अतिथियों के साथ 'पटेल स्मारिका 2026' का विमोचन भी किया। समारोह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, गिरीश यादव, सरदार बलदेव सिंह औलख, कैलाश राजपूत, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल और राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल सहित अनेक गणमान्य लोगों ने लौह पुरुष की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

यूपी में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर, तीसरे दिन भी बारिश से बेहाल जनजीवन; तापमान 8 डिग्री तक लुढ़का

- राजधानी लखनऊ समेत 10 शहरों में सुबह से बारिश, पश्चिमी यूपी के कई जिलों में घना कोहरा

- पूर्वी यूपी के 23 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट, कल से मौसम में सुधार के आसार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर लगातार तीसरे दिन भी देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। शनिवार सुबह से लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई, गोंडा और सीतापुर समेत करीब 10 शहरों में बारिश हो रही है। राजधानी लखनऊ में पिछले 40 घंटे से लगातार रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी है।

लगातार बारिश और ठंडी हवाओं के चलते लोगों को नवंबर जैसी सर्दी का एहसास होने लगा है। मौसम में आए इस बदलाव का असर तापमान पर भी पड़ा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। अचानक बढ़ी ठंड के कारण लोगों ने गर्म कपड़े निकालने शुरू कर दिए हैं। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश के साथ घने कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। सहारनपुर, शामली, संभल, बिजनौर और मुजफ्फरनगर समेत करीब 10 जिलों में सुबह के समय कोहरे की चादर छाई रही। इससे दृश्यता प्रभावित होने के साथ ही सड़कों पर आवागमन भी प्रभावित होने की आशंका है।

बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. रवि शंकर सिंह के मुताबिक, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में शनिवार को भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं। हालांकि, रविवार से मौसम में बदलाव आने की संभावना है। बारिश का दौर थमने के साथ आसमान साफ होगा और तेज धूप निकलने लगेगी। इसके बाद तापमान में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।फिलहाल प्रदेशवासियों को बारिश और ठंडी हवाओं से राहत मिलने के लिए एक दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।

जाति के नाम पर बांटने वालों से सावधान रहें, बटेंगे नहीं तो कटेंगे भी नहीं: सीएम योगी

- बोले मुख्यमंत्री- सरकार की उपलब्धियों को बूथ स्तर तक पहुंचाएं, सोशल मीडिया पर नकारात्मक नैरेटिव का तथ्यों से दें जवाब

- मुख्यमंत्री बोले- जिस सपा ने रामभक्तों पर चलवाई थीं गोलियां, आज वही लोग अयोध्या के विकास की बात करते हैं 

- एसआईआर में छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए बूथ स्तर पर अभियान चलाएं कार्यकर्ता: योगी

- 1.63 लाख सक्रिय बूथों से प्रतिदिन सोशल मीडिया पर साझा हों विकास की सकारात्मक कहानियां: मुख्यमंत्री

- दीपावली पर गरीब और वंचित परिवारों तक पहुंचाएं दीप और मिठाई, त्योहारों को बनाएं सामाजिक सहभागिता का माध्यम: सीएम

लखनऊ, 30 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कार्यकर्ताओं से आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर पूरी सक्रियता के साथ जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों से सतर्क रहना होगा। विखंडन करने वाले लोग बांटने में विश्वास करते हैं और बांटने के कारण ही काटने में सफल होते हैं। इसलिए हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि बटेंगे नहीं तो कटेंगे भी नहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से सरकार की उपलब्धियों को बूथ स्तर तक पहुंचाने, सोशल मीडिया पर सकारात्मक नैरेटिव बनाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में छूटे मतदाताओं के नाम जुड़वाने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। पार्टी की विशिष्ट पहचान उसकी विचारधारा, मूल्य और आदर्श हैं। श्रद्धेय लालकृष्ण आडवाणी जी अक्सर कहते थे कि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन पार्टी के मूल्य, आदर्श और विचारधारा कभी नहीं बदल सकती। इसी विचारधारा के लिए भाजपा का कार्यकर्ता मान-अपमान की चिंता किए बिना पूरी निष्ठा से काम करता है।

- रामभक्तों पर गोली चलाने वालों को अयोध्या के विकास की बात करने का अधिकार नहीं

मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तारीख भाजपा कार्यकर्ताओं और रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उस समय समाजवादी पार्टी सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। अयोध्या की गलियों को लहूलुहान किया गया और सरयू का जल रक्तरंजित हुआ। तब कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया था कि लाठी-गोली खाएंगे, लेकिन मंदिर वहीं बनाएंगे। अगर उस समय कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया होता और वे आलोचनाओं से विचलित हो गए होते तो क्या आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो पाता? 22 जनवरी 2024 को करोड़ों सनातनियों ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक अवसर देखा। राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी आज अयोध्या के विकास की बात करती है, जबकि अयोध्या के विकास में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हमेशा बाधा बनी रहीं।

सीएम ने कहा कि पहले अयोध्या में बिजली, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। आज वहां फोरलेन कनेक्टिविटी, डबल रेलवे ट्रैक और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुविधा है। अयोध्या का एयरपोर्ट महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है, क्योंकि रामकथा को जन-जन तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

- कांग्रेस-सपा ने गरीबों को केवल वोट बैंक समझा

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2014 से पहले देश में गरीबी, भ्रष्टाचार, असुरक्षा, अव्यवस्था और पहचान का संकट था। गरीब कांग्रेस के लिए केवल वोट बैंक था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस कथन का उल्लेख किया कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही गरीब तक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार की यही वास्तविकता थी। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की तस्वीर बदली है। देश फ्रेजाइल फाइव से दुनिया की टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। गरीबों को आवास, शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाते और मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं मिली हैं। गरीब भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि उसे सम्मानजनक जीवन देने का संकल्प है।

- इंसेफेलाइटिस से लेकर माफिया तक सपा सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले 35 जनपद इंसेफेलाइटिस से प्रभावित थे। गंदगी और दूषित पेयजल के कारण हर साल हजारों बच्चे इसकी चपेट में आते थे। गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज खुद बदहाल था। उस समय की सरकारों ने इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद कार्ययोजना बनाकर महज दो वर्षों में इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर माफिया को संरक्षण देने और भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले भर्तियों में सैफई सिंडिकेट और चाचा-भतीजे की वसूली व्यवस्था हावी रहती थी। योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलती थी और हर भर्ती पर न्यायालय की रोक लग जाती थी। इसके विपरीत वर्तमान सरकार में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। अब भर्ती में सिफारिश नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत को महत्व मिलता है।

- नौ साल में तीन गुना हुई यूपी की अर्थव्यवस्था

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को पहले बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा से समृद्ध रहा है। बीमारू मानसिकता वाले नेतृत्व ने प्रदेश की छवि खराब की थी। डबल इंजन सरकार ने इस धारणा को बदला है। आज देश के कुल एक्सप्रेसवे का लगभग 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है। 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट क्रियाशील थे, जबकि अब 17 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें पांच अंतरराष्ट्रीय और 12 घरेलू हैं। प्रदेश की जीएसडीपी नौ वर्षों में 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये हो गई है। बजट तीन लाख करोड़ से बढ़कर 9.70 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय 45 हजार रुपये से बढ़कर 1.24 लाख रुपये हुई है। महिला कार्यबल की भागीदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हुई है। गन्ना किसानों को नौ वर्षों में 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

- सरकार की उपलब्धियों का बूथ स्तर तक करें प्रचार

मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से कहा कि सरकार के कामकाज और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की तुलना जनता के सामने रखनी होगी। उन्होंने इसके लिए बैठक में कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराई गई पुस्तिकाओं का अध्ययन कर उन्हें बूथ स्तर तक पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों और विधायकों से प्रत्येक बूथ तक इन पुस्तिकाओं और तुलनात्मक जानकारी को पहुंचाने की योजना बनाने को कहा।

- संवाद के अभाव में होती हैं गलतफहमियां

सीएम ने काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास का उदाहरण देते हुए बताया कि शुरुआत में संतों व पुजारियों के बीच भ्रम फैल गया था कि कॉरिडोर निर्माण के नाम पर मंदिर तोड़ा जाएगा। तब उन्होंने स्वयं संतों से संवाद कर उन्हें परियोजना की जानकारी दी और उनकी शंकाओं का समाधान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संवाद के अभाव में गलतफहमियां पैदा होती हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर संवाद करना होगा। नकारात्मक नैरेटिव का जवाब तथ्यों और सकारात्मक कार्यों से देना होगा।

- सोशल मीडिया पर हर बूथ से उठाएं सकारात्मक आवाज

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया को विपक्ष के नकारात्मक नैरेटिव का सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ पर सोशल मीडिया की सक्रिय टीम होनी चाहिए। प्रदेश के 1.77 लाख बूथों में से 1.63 लाख बूथ सक्रिय हैं। इन सभी बूथों से प्रतिदिन गांव और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की सकारात्मक कहानियां सोशल मीडिया पर साझा की जाएं। यदि 1.63 लाख बूथ एक साथ किसी सकारात्मक खबर को साझा करें तो उसका व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। उन्होंने दीपोत्सव और दीपावली को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि कार्यकर्ता अपने गांव और बूथ में गरीब, वंचित तथा निराश्रित परिवारों तक दीप और मिठाई पहुंचाएं। छठ पर्व के अवसर पर भी स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और सुविधाओं की व्यवस्था में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता जनार्दन है। उसकी बात सुनना और समस्या का समाधान करना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।

- एसआईआर में छूटे नाम जुड़वाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है। एसआईआर से पहले की मतदाता सूची के विश्लेषण में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए हैं, जो विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिनके नाम पंचायत की मतदाता सूची में हैं, लेकिन विधानसभा की सूची में नहीं हैं। कई सारे नाम ऐसे हैं, जो सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जबकि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। इसके अतिरिक्त 18-19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 4.5 लाख युवाओं के नाम भी सूची में शामिल होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को कमल साथी ऐप पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने के लिए अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने सांसदों, विधायकों, विधानसभा प्रभारियों और जिला प्रभारियों को इसकी नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम जुड़वाना संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

- महापुरुषों के सम्मान और सामाजिक संवाद पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, राजा महेंद्र प्रताप सिंह, महाराजा बिजली पासी, वीरांगना ऊदा देवी, अवंतीबाई लोधी और झलकारी बाई जैसी विभूतियों को सम्मान देने का कार्य किया है। कार्यकर्ताओं को इन महापुरुषों और वीरांगनाओं के योगदान को समाज के बीच पहुंचाना चाहिए। जातीय सम्मेलनों के माध्यम से समाज को बांटने की राजनीति के बजाय सभी वर्गों को जोड़ने वाले सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यज्ञ अभी अधूरा है और उसमें कार्यकर्ताओं की आहुति बाकी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन, समाज और सरकार के बीच मजबूत संवाद स्थापित करते हुए प्रदेश की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, प्रो. एसपी सिंह बघेल, कीर्तिवर्धन सिंह, बीएल वर्मा, कमलेश पासवान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सहित प्रदेश के सह-प्रभारी, मंत्री और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य उपस्थित रहे।

डिवीजन बेंच ग्रेटर नोएडा के पुनर्गठन तक नई गठित पीठ करेगी लंबित मामलों का निस्तारण

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त पीठ के समक्ष लंबित शिकायतों और मामलों की सुनवाई सुचारु रूप से जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। क्षेत्रीय कार्यालय में सदस्य का पद रिक्त होने के कारण डिवीजन बेंच (संयुक्त पीठ) का गठन नहीं हो पा रहा था। इससे वहां लंबित शिकायतों और प्रकरणों की सुनवाई प्रभावित हो रही थी। इस समस्या को देखते हुए प्राधिकरण ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है। इसके तहत डिवीजन बेंच के पुनर्गठन तक संयुक्त पीठ ग्रेटर नोएडा के समक्ष लंबित सभी शिकायतों और मामलों की सुनवाई प्राधिकरण के दो पीठासीन अधिकारी करेंगे।

प्राधिकरण की ओर से सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से जारी कार्यालय आदेश के अनुसार उक्त संयुक्त पीठ प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी व दीपक स्वरुप सक्सेना द्वारा संचालित की जाएगी और इस प्रकार लंबित शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जायेगा। यह अंतरिम व्यवस्था तब तक लागू रहेगी,जब तक क्षेत्रीय कार्यालय में डिवीजन बेंच का पुनर्गठन नहीं हो जाता।

- सदस्य का पद रिक्त होने से आ रही थी परेशानी

यूपी रेरा के ग्रेटर नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय में मामलों की सुनवाई के लिए गठित डिवीजन बेंच में सदस्य का पद रिक्त होने के कारण नियमित रूप से संयुक्त पीठ का गठन संभव नहीं हो पा रहा था। इसके परिणामस्वरूप संयुक्त पीठ के समक्ष लंबित शिकायतों और प्रकरणों की सुनवाई में बाधा आने की स्थिति बन रही थी। समय पर सुनवाई नहीं होने से संबंधित पक्षकारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। इससे रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े पक्षकारों के हित भी प्रभावित हो सकते थे।

प्राधिकरण ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया है कि संयुक्त पीठ के अभाव में विभिन्न मामलों में न्यायालयों द्वारा पारित निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन भी प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से आवंटियों और अन्य संबंधित पक्षकारों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सुनवाई की वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है।

- लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया रहेगी जारी

इस अंतरिम व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य संयुक्त पीठ ग्रेटर नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय में लंबित शिकायतों और मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से बाधित होने से बचाना है। संयुक्त पीठ के माध्यम से मामलों की सुनवाई होने से प्राधिकरण के समक्ष लंबित प्रकरणों पर सुनवाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इससे संबंधित पक्षकारों को अपनी शिकायतों पर सुनवाई के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार करने की स्थिति से बचाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सभी लंबित मामलों का निस्तारण तत्काल हो जाएगा। मामलों की सुनवाई और निर्णय संबंधित प्रकरणों की परिस्थितियों व निर्धारित विधिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

- डिवीजन बेंच के पुनर्गठन तक लागू रहेगा आदेश

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं,बल्कि अंतरिम है। क्षेत्रीय कार्यालय,ग्रेटर नोएडा में डिवीजन बेंच के पुनर्गठन तक लंबित शिकायतों और प्रकरणों की सुनवाई निर्धारित संयुक्त पीठ द्वारा की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि इस विषय पर पहले जारी किए गए आदेश और निर्देश अब अवक्रमित माने जाएंगे।

प्राधिकरण की इस पहल से संयुक्त पीठ ग्रेटर नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय में लंबित मामलों की सुनवाई जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है। इस सकारात्मक पहल का उद्देश्य शिकायतों की सुनवाई में आने वाली प्रशासनिक बाधा को दूर करना,न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखना और संबंधित पक्षकारों के हितों की रक्षा करना है।