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अतिक्रमण के खिलाफ काउंसिल ऑफ उद्योग व्यापार मंच ने कसी कमर

*नगर भ्रमण कर व्यापारियों की सुनी समस्याएं*
सुल्तानपुर:-नगर के प्रमुख बाजारों में बढ़ते अतिक्रमण से परेशान स्थायी व्यापारियों की समस्याओं को लेकर काउंसिल ऑफ उद्योग व्यापार मंच ने पहल तेज कर दी है। नगर अध्यक्ष रवि सोनी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने नगर भ्रमण कर व्यापारियों से मुलाकात की और अतिक्रमण के कारण हो रही समस्याओं को जाना ।
चौक क्षेत्र के व्यापारियों ने दुकानों के सामने फुटपाथ व सड़क पर लगने वाले ठेले और अस्थाई दुकानों से व्यापार प्रभावित होने की बात कही। नगर अध्यक्ष रवि सोनी ने बताया कि समस्या को लेकर नगर पालिका एवं प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता हो चुकी है। जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
शुक्रवार देर शाम मंच के पदाधिकारियों व व्यापारियों के साथ उपस्थित वरिष्ठ भाजपा नेता व सभासद दिनेश चौरसिया ने समस्या को गंभीर बताते हुये कहा की फुटपाथ व्यापारियों को व्यवस्थित रूप से वेंडिंग जोन में पुनर्स्थापित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश प्रवक्ता रमेश माहेश्वरी, मण्डल अध्यक्ष अशोक कसौधन,जिलाध्यक्ष कुलदीप गुप्ता,जिला महामंत्री राजेश महेश्वरी,सुरेश सोनी,रवि सोनी,अरविन्द द्विवेदी, हरीशंकर,मानिक लाल,विजय टंडन आदि मौजूद रहे।
मऊ में एसपी की जनसुनवाई, फरियादियों की समस्याएं सुन कमलेश बहादुर ने दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश
मऊ। पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर ने पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई कर फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान विभिन्न मामलों को लेकर पहुंचे लोगों ने अपनी शिकायतें एसपी के समक्ष रखीं।

एसपी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता और समयबद्ध तरीके से प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और पीड़ितों को न्याय दिलाना पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है।
मऊ -: पुलिस अधीक्षक मऊ द्वारा परेड में प्रतिभाग कर दिये गए आवश्यक दिशा-निर्देश


पुलिस अधीक्षक मऊ  कमलेश बहादुर द्वारा पुलिस लाइन मऊ में साप्ताहिक परेड के अवसर पर परेड की सलामी लेकर परेड का निरीक्षण किया गया तथा सम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ।

इस दौरान महोदय द्वारा उच्च कोटि का अनुशासन, वर्दी का टर्नआउट, शांति/सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ बनाए रखने के दृष्टिगत फोर्स को ब्रीफ करते हुए बताया कि सदैव मानसिक एवं शारीरिक रूप से तत्पर रहें। दंगा निंयत्रण के समस्त उपकरण सक्रिय दशा में सदैव अपने साथ रखे। जिससे किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटा जा सके

इस दौरान ड्रोन कैमरा, फॉरेन्सिक वैन, चारपहिया/दोपहिया पीआरवी वाहनों के साफ-सफाई, हूटर, लाइट, एमडीटी, मेडिकल किट, फायर एक्सटिंग्विशर, एंटी राइट इक्विपमेंट आदि को चेक किया गया तथा पीआरवी कर्मियों को गंभीर व महिला संबंधित घटनाओं की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचकर की जाने वाली प्राथमिक कार्यवाही, घटनास्थल को सुरक्षित करने हेतु क्राइम सीन किट का सही तरीके से प्रयोग करने व रिस्पॉन्स टाइम, जीपीएस परसेंटेज आदि में सुधार हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

तत्पश्चात महोदय द्वारा पुलिस लाइन का भ्रमण कर विभिन्न शाखाओं एवं परिसर की साफ सफाई इत्यादि का गहन निरीक्षण किया गया । महोदय ने परिसर की समग्र व्यवस्था, बैरक और मेस में भोजन व अन्य सुविधाओं का निरीक्षण का जायजा लिया । 

साथ ही कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ पुलिस सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान क्षेत्राधिकारी लाइन श्री सोम प्रकाश बर्मा, प्रतिसार निरीक्षक अरूण कुमार सिंह व भारी संख्या में पुलिस अधि0/कर्मचारीगण उपस्थित रहें ।
मऊ में गैंगस्टर पर बड़ी कार्रवाई! 53.89 लाख का मकान कुर्क, पुलिस ने चलाया ‘अपराध से अर्जित संपत्ति पर प्रहार’ अभियान
मऊ से बड़ी खबर सामने आई है। गैंगस्टर एक्ट के आरोपी मो. खालिद अंसार के खिलाफ मऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 53 लाख 89 हजार 372 रुपये कीमत का एक मंजिला मकान कुर्क कर लिया।

पुलिस के मुताबिक यह संपत्ति अपराध से अर्जित अवैध धन से बनाई गई थी। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत की गई इस कार्रवाई में तहसील प्रशासन के अधिकारी और पुलिस टीम मौजूद रही।

मऊ पुलिस ने साफ किया है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
जनपद मऊ पुलिस द्वारा अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही
पुलिस अधीक्षक मऊ  कमलेश बहादुर के निर्देशन पर जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में विभिन्न थानो द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए अलग- अलग स्थानों से अभियुक्तों की गिरफ्तारी /बरामदगी व विभिन्न मामलों में वारंटी अभियुक्त को भी गिरफ्तार कर आवश्यक विधिक कार्यवाही की गई ।

थानावार कार्यवाही का विवरण

1.थाना दोहरीघाट पुलिस द्वारा वारंटी अभियुक्त गजानन्द पंडित पुत्र सुभाष निवासी ग्राम उसरी खुर्द थाना दोहरीघाट जनपद मऊ । अभियुक्तगण उपरोक्त को गिरफ्तार कर चालान माननीय न्यायालय किया गया ।
मऊ -: धूस गांव में बाढ़ पीड़ितों की बदहाली, आप ने सरकार को घेरा
सर्वेश मिश्रा ने बाढ़ पीड़ितों से की मुलाकात, बोले- राशन, दवा और इलाज के बिना कैसे कट रही जिंदगी?

मऊ। जिले में बाढ़ का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। मधुबन विधानसभा क्षेत्र के दुबारी ग्राम पंचायत अंतर्गत धूस गांव में बाढ़ पीड़ितों की स्थिति बेहद दयनीय बताई जा रही है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि बाढ़ प्रभावित परिवार राशन, पशुओं के चारे, दवा और समुचित इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।

शुक्रवार को बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संजय सिंह के प्रतिनिधि सर्वेश मिश्रा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धूस गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके की स्थिति का जायजा लिया।

सर्वेश मिश्रा ने आरोप लगाया कि कई लोगों के घर बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं और प्रभावित परिवार बदहाली में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के सामने भोजन, पशुओं के चारे और इलाज का संकट खड़ा है। पार्टी का यह भी आरोप है कि जहरीले जीव-जंतुओं के काटने का खतरा बना हुआ है और पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों में दहशत है।

आम आदमी पार्टी ने सरकार और प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल बाढ़ चौकी स्थापित कर देने से राहत व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती। पार्टी ने मांग की कि बाढ़ चौकियों पर तत्काल पर्याप्त मात्रा में राशन, दवाएं, एंबुलेंस और प्रभावित परिवारों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और आवश्यक राहत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो आम आदमी पार्टी जनता के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगी।

इस दौरान आप नेता विजय, जयराम यादव, मनोज कुमार, अविनाश, राजकुमार जायसवाल, अनिल प्रजापति सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट
- युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री
- मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल
- योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को
- प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।
- मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
‘अखिलेश के अंदर बैठा है औरंगजेब’, संगीत सोम का सीधा हमला
-  कहा - ‘पिता को कैद किया, चाचा पर सर्विलांस, पत्नी के सम्मान पर चुप्पी
- ‘पत्नी का अपमान भी नहीं दिखता, मुस्लिम वोट के आगे’, संगीत सोम का अखिलेश पर प्रहार

लखनऊ। बीजेपी नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव के पत्रकारों के सवालों पर भड़कने से लेकर परिवार के भीतर उनके रिश्तों और डिंपल यादव के अपमान के मुद्दे तक, संगीत सोम ने अखिलेश यादव पर ‘औरंगजेबी मानसिकता’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के विचारों में औरंगजेब घुस चुके हैं और वह इस मानसिकता से बाहर नहीं आना चाहते।
- ‘जिसने अपने पिता को कैद कर लिया हो...’
संगीत सोम ने कहा, 'अखिलेश जी के अंदर जो विचार है वो औरंगजेब के है। उनके विचारों में औरंगजेब घुस चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अखिलेश यादव ने औरंगजेब की तरह ही अपने पिता को घर में कैद कर लिया था जब उन्हें ये पता चला था कि उनके पिताजी उन्हें हटाना चाहते हैं।
- ‘रामगोपाल यादव पर 24 घंटे सर्विलांस रखते हैं अखिलेश’
संगीत सोम ने दावा किया कि अखिलेश यादव अपने चाचा रामगोपाल यादव पर सर्विलांस रखते हैं। संगीत सोम ने कहा कि रामगोपाल यादव अखिलेश के चाचा हैं लेकिन अखिलेश यादव 24 घंटे उनके घर पर सर्विलांस रखते हैं। वो किससे मिलते हैं, कहां जाते हैं, क्या करते हैं अखिलेश यादव एक एक जानकारी अपने पास रखते हैं। क्योंकि उन्हें अपने चाचा पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
- जिस चाचा शिवपाल ने गोदी में खिलाया उसे भी नहीं बख्शा
शिवपाल यादव का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा, 'और तो और शिवपाल चाचा के बारे में तो सभी जानते हैं। जिस चाचा ने उन्हें गोदी में खिलाया हो, चलना सिखाया हो, जिस चाचा ने उन्हें पढ़ने भेजा हो, जिस चाचा ने उनकी शादी कराई हो। उनके साथ अखिलेश यादव ने किस औरंगजेब जैसा बर्ताव किया है।'
उन्होंने कहा कि यही मानसिकता अखिलेश यादव की पत्रकारों के साथ व्यवहार में भी दिखाई देती है। संगीत सोम ने कहा कि इसी औरंगजेबी मानसिकता के कारण जब उनसे कोई पत्रकार सवाल पूछता है तो वो भड़क जाते हैं। क्योंकि वो औरंगजेबी मानसिकता से बाहर ही निकल पा रहे हैं।
- ‘जिस इंसान को अपनी पत्नी के सम्मान की चिंता न हो’
संगीत सोम ने अखिलेश यादव की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा, 'अखिलेश तुष्टिकरण की राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। यही कारण है कि वो ये विचार ही नहीं कर पा रहे हैं कि मेरी पत्नी की बेइज्जती हो रही है कि क्या। उन्हें सिर्फ वोट से मतलब है।' उन्होंने कहा, 'जिस इंसान को अपनी पत्नी के मान-सम्मान की चिंता न हो तो आप समझ जाइए कि उनकी क्या मानसिकता है।'
डिंपल यादव के अपमान से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा, 'जब मौलाना ने डिंपल यादव का अपमान किया था तब बीजेपी ने बोला था कि हम डिंपल यादव का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्योंकि डिंपल जी प्रदेश की बहू हैं और बेटी भी हैं।'
उन्होंने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा 'डिंपल यादव तो छोड़िए अखिलेश यादव प्रदेश की किसी भी बहू बेटी के साथ हो रहे अपमान पर कुछ नहीं बोलते हैं। किसी बेटी के साथ कोई बेइज्जती करे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें केवल मुस्लिम वोट बैंक से मतलब है।'
संगीत सोम ने कहा, 'क्योंकि अखिलेश यादव के अंदर औरंगजेब की मानसिकता है। औरंगजेब के विचार हैं। और अखिलेश यादव इस औरंगजेबी मानसिकता से बाहर आना नहीं चाहते हैं।'
मोदी के साथ न वंश परंपरा थी, न विरासत, तप-साधना और संघर्ष से बनाई पहचान: सीएम योगी
- भारतीय जनता के प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पत्रकार वार्ता

- 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक प्रदेशभर में चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’
- प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’
- बड़नगर और काशी के बीच निकलेंगी 20 यात्राएं, उत्तर प्रदेश की 10 नदियों का जल जाएगा गुजरात
- 826 विकासखंडों और 762 नगर निकायों में ‘सेवा सेतु’ के जरिये वंचित पात्रों को योजनाओं से जोड़ेंगे
- चित्रकला, निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे स्कूल से विश्वविद्यालय तक के विद्यार्थी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ न कोई वंश परंपरा थी और न ही उन्हें कोई विरासत वंशानुगत रूप से मिली थी। उनके पास तप, साधना, संघर्ष और देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत थी। आज उनकी साधना और तप का लाभ पूरे देश को योग्य नेतृत्व के रूप में मिल रहा है। सात अक्तूबर को गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री के रूप में शासन प्रमुख के तौर पर नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस यात्रा के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन मिलकर 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक प्रदेशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाएंगे।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने अभियान की कार्ययोजना साझा करते हुए कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन प्रदेशभर में ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन हर ग्राम पंचायत, नगर निकाय और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाया जाएगा। इसके जरिये प्रदेश की जनता प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करेगी। अस्पतालों में फल वितरण के साथ रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। भाजपा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भी सेवा कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की बड़नगर से काशी तक की यात्रा को भी अभियान से जोड़ा गया है। बड़नगर से काशी के लिए 10 और काशी से बड़नगर के लिए 10 यात्राएं निकाली जाएंगी। बड़नगर का जल लेकर यात्राएं काशी आएंगी, जबकि उत्तर प्रदेश की 10 नदियों का पवित्र जल लेकर यात्राएं बड़नगर जाएंगी। सभी यात्राएं 17 सितंबर को शुरू होंगी और सात अक्तूबर को अपने गंतव्य तक पहुंचेंगी। यात्रा मार्ग पर हर दिन चार स्थानों पर चौपाल और जनसंवाद के कार्यक्रम होंगे।
- वंचित पात्रों तक योजनाएं पहुंचाएगा ‘सेवा सेतु’
अभियान के तहत सरकारी योजनाओं से अब तक वंचित पात्र लोगों को लाभ दिलाने के लिए ‘सेवा सेतु’ शिविर लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 29-30 सितंबर से 10 अक्तूबर के बीच प्रत्येक विकासखंड और जिला मुख्यालय के नगर निकाय में छह से सात दिन तक शिविर लगाने की योजना है। इनमें स्वास्थ्य योजनाओं के साथ पेंशन, आवास, शौचालय, राशन कार्ड समेत विभिन्न योजनाओं के लिए पात्र लोगों का पंजीकरण कराया जाएगा।
योगी ने कहा कि पंजीकरण के बाद दो-तीन दिन के भीतर सत्यापन कर संबंधित कार्ड अथवा योजना का लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश में 826 विकासखंड और 762 नगर निकाय हैं। जरूरत पड़ी तो अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा। प्रयास यह रहेगा कि पात्र व्यक्ति केवल आवेदन देकर वापस न जाए, बल्कि शिविर के दौरान ही उसे संबंधित योजना से जोड़ दिया जाए। जनप्रतिनिधि भी इन शिविरों में मौजूद रहेंगे।
- बच्चों और युवाओं के बीच होंगी तीन प्रतियोगिताएं
सेवा संकल्प अभियान में बच्चों और युवाओं की भागीदारी के लिए तीन स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। कक्षा पांच से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला और नौवीं से 12वीं तक के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता होगी। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
इन प्रतियोगिताओं की थीम ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश’ होगी। गांव, विकासखंड और जिला स्तर पर चयनित विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। सात अक्तूबर को प्रदेश स्तर पर होने वाले आयोजन में चयनित बच्चों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल होकर विद्यार्थियों को सम्मानित करेंगे।
- मलिन बस्ती से देवालय तक ‘सेवा मेरा योगदान’
मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्तूबर के बीच ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम भी चलेगा। मलिन बस्तियों, घाटों, देवालयों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता एवं सेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी और आम लोग इनमें भाग लेंगे।
अभियान के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम’, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, मतदाता जागरूकता, वोकल फॉर लोकल, गोसेवा और युवाओं की करियर काउंसलिंग जैसे कार्यक्रम भी जोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर लोग इन कार्यक्रमों में अपना सेवा योगदान देंगे।
- स्टार्टअप और तकनीकी छात्रों के लिए इनोवेशन चैलेंज
आईटीआई, पॉलिटेक्निक, तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप को जोड़कर ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ भी आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप कार्यरत थे, जबकि अब इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है। अटल टिंकरिंग लैब, इनक्यूबेटर सेंटर के साथ ड्रोन, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े विद्यार्थियों और युवाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
प्रदेश में ‘राष्ट्र के रंग, सेवा के रंग और राष्ट्र के संग’ थीम पर रंगोली प्रतियोगिताएं भी होंगी। अलग-अलग स्थानों पर रंगोली के माध्यम से देश की प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। पंचायत और नगर निकाय के जनप्रतिनिधियों के साथ ‘सुशासन सेवा संवाद’ का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
- राजीव गांधी के बयान का जिक्र कर कांग्रेस पर हमला
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें दिल्ली से भेजे गए सौ रुपये में केवल 15 रुपये गरीब तक पहुंचने की बात कही गई थी। योगी ने कहा कि यह उस समय की व्यवस्था की लाचारी और बेचारगी को प्रदर्शित करता था। जनधन खातों और डीबीटी के बाद अब दिल्ली से सौ रुपये भेजे जाते हैं तो पूरे सौ रुपये लाभार्थी के खाते में पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकलकर दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचा। हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और वाटरवे के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें नए भारत की पहचान बनी हैं। एम्स की संख्या बढ़ने के साथ आईआईटी, आईआईएम और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों का भी विस्तार हुआ है।
- ‘2014 के बाद गुलामी की मानसिकता से बाहर निकला भारत’
योगी ने देश की विरासत के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध किया था। लंबे समय तक भारत की विरासत को अपमानित करने और देशवासियों के मन में गुलामी की मानसिकता बनाए रखने का प्रयास किया गया। वर्ष 2014 के बाद भारत इस मानसिकता से बाहर निकला।
उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण और भव्य-दिव्य कुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत और विकास को एक साथ आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण देश में 26 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं, जिनमें छह करोड़ से अधिक उत्तर प्रदेश के हैं। प्रदेश में करीब 16 करोड़ गरीब विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं। आवास, शौचालय, उज्ज्वला, बिजली, राशन और पेयजल जैसी योजनाओं ने गरीबों को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का आधार दिया है।
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्ष की सेवा यात्रा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय और महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज भी समाहित है। इसलिए 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती और दो अक्तूबर को गांधी जयंती को भी अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा जाएगा। अभियान गांव और बूथ से लेकर शक्ति केंद्र, विकासखंड, जिला और प्रदेश स्तर तक 17 अक्तूबर तक चलेगा।
कार्यक्रम में सीएम योगी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय व कई पत्रकारकण उपस्थित रहे।
सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट
- युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री
- मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल
- योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को
- प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।
- मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।