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सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट
- युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री
- मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल
- योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को
- प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।
- मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वच्छता समिति, उत्सव भवन एवं डिजिटल लाइब्रेरी/ऑडिट की समीक्षा बैठक हुई आयोजित

सुलतानपुर,जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिला स्वच्छता समिति, उत्सव भवन एवं डिजिटल लाइब्रेरी/ऑडिट की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
      
जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम ऑडिट की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान 06 ऑडिट प्रस्तर लंबित पाए गए। जिलाधिकारी महोदय ने सभी लंबित प्रस्तरों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित प्रस्तरों का समयबद्ध निस्तारण न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए डीपीआरओ को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिला स्वच्छता समिति की समीक्षा के दौरान पाया गया कि व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के निर्धारित 10,124 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 3722 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। जिलाधिकारी महोदय ने कार्य में तेजी लाते हुए लंबित प्रकरणों को जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

आरआरसी निर्माण एवं संचालन की समीक्षा में अवगत कराया गया कि जनपद में 441 आरआरसी संचालित हैं, जबकि 213 आरआरसी निर्माणाधीन हैं। जिलाधिकारी महोदय ने निर्माणाधीन आरआरसी को शीघ्र पूर्ण कराते हुए उनके प्रभावी संचालन के निर्देश दिए। गांवों में कूड़ा संग्रहण की स्थिति की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि ग्रामीणों को जागरूक एवं प्रेरित किया जाए, ताकि वे कूड़ा इधर-उधर फेंकने के बजाय कचरा गाड़ी को दें। उन्होंने गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
      
जिलाधिकारी ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने गोबरधन योजना के अंतर्गत स्थापित 02 बायोगैस प्लांट के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रेट्रोफिटिंग कार्य के तहत निर्मित शौचालयों की मरम्मत की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी महोदय ने विशेष रूप से विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालयों की आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिए। ‘मेरा तालाब, मेरी जिम्मेदारी’ अभियान के अंतर्गत जनपद में 100 से अधिक तालाबों का जीर्णाेद्धार कर उन्हें प्लास्टिक एवं कचरा मुक्त किए जाने की जानकारी जिलाधिकारी महोदय को दी गई। उन्होंने तालाबों की स्वच्छता एवं संरक्षण को निरंतर बनाए रखने पर जोर दिया।
      
जिलाधिकारी द्वारा पिछली बैठक में निर्देशित किया गया था कि प्रथम चरण में सभी खंड प्रेरक अपने-अपने विकासखंड से एक-एक गांव का चयन करें  कुल 14 गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित किया जाए। चयनित गांवों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन एवं जनजागरूकता से संबंधित कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करे। 6 गाँव को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव बनाया गया अभी बहुत गाँव प्रगति पर है जल्द ही जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव की संख्या को 50 से अधिक किया जाएगा।
      
सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान कार्य की प्रगति असंतोषजनक पाए जाने पर जिलाधिकारी महोदय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्य को नियमानुसार एवं प्रभावी ढंग से कराने के निर्देश दिए। कंसल्टिंग इंजीनियरों के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को बिंदुवार अलग से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने डीसी स्वच्छ भारत मिशन को निर्देशित किया कि फील्ड में जाकर विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें और प्रत्येक कार्मिक के कार्य निर्धारित करते हुए उन्हें स्पष्ट लक्ष्य दिया जाए।
     
जिलाधिकारी ने कहा कि एक-एक गांव का चयन कर उसे सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आम जनता के साथ अच्छा व्यवहार करने, ग्रामीणों को जागरूक करने तथा अपने कार्यों के माध्यम से समाज एवं गांव में सकारात्मक परिवर्तन लाने के निर्देश दिए।
     
फिकल स्लज मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान अवगत कराया गया कि शासन द्वारा 02 फिकल स्लज मैनेजमेंट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों के लिए स्थान चिन्हित कर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। डिजिटल लाइब्रेरी की समीक्षा में अवगत कराया गया कि जनपद के 139 ग्रामों में डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन किया जा रहा है। कुछ लाइब्रेरी में कंप्यूटर नहीं है जल्दी ही वहां कंप्युटर लगा दिया जाएगा। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि डिजिटल लाइब्रेरी में नवीनतम कंप्यूटर एवं आवश्यक डिजिटल सुविधाओं के साथ ऑनलाइन कोर्स भी जोड़े जाएं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
     
बैठक के अंत में जिलाधिकारी महोदय ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, शौचालय निर्माण, डिजिटल शिक्षा एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
कला उत्सव में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा, उत्साह, कला, खेल और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ें विद्यार्थी

अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप बनाएं भविष्य:- जिलाधिकारी


सुलतानपुर पीएम श्री केश कुमारी राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज द्वारा आयोजित जनपद स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता का भव्य आयोजन पं0 राम नरेश त्रिपाठी सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह द्वारा माँ सरस्वती जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य, पीएम श्री केश कुमारी राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज पल्लवी सिंह द्वारा जिलाधिकारी का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।
        
जनपद स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता के अन्तर्गत छात्राओं की रचनात्मकता, प्रतिभा एवं कलात्मक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न विधाओं में कुल 12 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें नाटक, कहानी, गायन, वादन, पेंटिंग, मूर्तिकला, शास्त्रीय वादन सहित विभिन्न कलात्मक विधाएं शामिल रहीं। प्रतियोगिता में जनपद के विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
      
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य द्वारा उपस्थित अतिथियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्राओं को कला उत्सव के उद्देश्य एवं महत्व की जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मक क्षमता को निखारने के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
       
इस अवसर पर जिलाधिकारी महोदय ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कला एवं खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सभी बच्चे खेलों में अवश्य प्रतिभाग करें और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ें। जिला प्रशासन द्वारा प्रतिभावान विद्यार्थियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप देश की अगली पीढ़ी हैं और आपको स्वयं तय करना है कि भविष्य में क्या करना है। अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र का चयन करें तथा अपनी गुणवत्ता, मेहनत और लगन के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ें।
       
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के लिए उनकी रुचि, गुणवत्ता और हार्डवर्क सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभाओं के लिए अपार अवसर उपलब्ध हैं तथा उत्तर प्रदेश भी तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को पहचानते हुए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
      
उन्होंने छात्राओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि किसी विद्यार्थी को किसी प्रकार की समस्या अथवा कठिनाई हो तो वह उनसे सीधे मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई के लिए वह प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक कलेक्ट्रेट में उपलब्ध रहते हैं।
      
जिलाधिकारी  ने विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी एवं नवाचार आधारित सुविधाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को आधुनिक डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया जाए तथा शिक्षक उसका प्रभावी अनुश्रवण करें। उन्होंने स्मार्ट क्लास के साथ-साथ रोबोटिक्स लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता बतायी, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए उनकी रचनात्मक एवं वैज्ञानिक सोच को विकसित किया जा सके।
      
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी  द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं का निरीक्षण किया गया तथा छात्राओं द्वारा प्रस्तुत कलात्मक प्रतिभाओं का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। उन्होंने छात्राओं द्वारा प्रस्तुत विभिन्न कलाकृतियों एवं प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
     
कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित अतिथियों एवं आयोजकों द्वारा कला, संस्कृति, खेल एवं नवाचार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को निरंतर प्रोत्साहित करने तथा उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया गया।
स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की स्मृति में मनाया दिग्विजय दिवस

सुलतानपुर। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वामी विवेकानंद जी के 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन की स्मृति में शुक्रवार को विवेकानंद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर ‘दिग्विजय दिवस’ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता आशीष तिवारी ने की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत सह प्रचार प्रमुख धर्मेंद्र द्विवेदी ने *सर्वेशा राज* को संगठन की सदस्यता दिलाई। सदस्यता ग्रहण करने के बाद *सर्वेशा राज* ने स्वदेशी जागरण मंच एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन की राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र निर्माण की भावना समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़कर वे स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति हमें एक परिवार की भावना से जोड़ती है और राष्ट्र निर्माण के लिए भी हमें इसी भाव से मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वावलंबी नागरिक और स्वदेशी अर्थव्यवस्था ही भारत को आर्थिक रूप से शक्तिशाली एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का आधार है।
*प्रांत महिला समन्वयक श्रीमती नीलम त्रिपाठी* ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच द्वारा घोषित दिग्विजय दिवस के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि इस दिवस को व्यापक स्वरूप देते हुए प्रतिवर्ष समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मनाया जाए, ताकि नई पीढ़ी स्वामी विवेकानंद के विचारों और भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सके।
*विभाग महिला प्रमुख शालिनी त्रिपाठी* ने कहा कि 11 सितंबर 1893 भारतीय इतिहास में गौरव और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया। शिकागो में विश्व धर्म महासभा के मंच से स्वामी विवेकानंद ने भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन, सहिष्णुता और विश्वबंधुत्व का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया। उनके उद्बोधन ने भारत की संस्कृति और दर्शन के प्रति विश्व समुदाय में सम्मान और जिज्ञासा का नया भाव पैदा किया।
*जिला महिला प्रमुख श्रीमती रश्मि* ने स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में शिकागो तक पहुंचकर उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया, वह आज भी प्रेरणादायी है। उनके संबोधन ने विश्व में भारत के प्रति बनी धारणा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारत को ज्ञान, दर्शन, अध्यात्म, सहिष्णुता और मानवता की भूमि के रूप में विश्व के सामने प्रस्तुत किया।
*विभाग विचार प्रमुख डॉ. अशोक मिश्रा* ने कहा कि शिकागो का संदेश केवल एक संन्यासी का भाषण नहीं था, बल्कि सोई हुई भारतीय आत्मचेतना को जगाने वाला शंखनाद था। इसने भारतीयों में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव का भाव जगाया तथा राष्ट्रीय चेतना और आत्मविश्वास के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए *प्रांत सह प्रचार प्रमुख धर्मेंद्र द्विवेदी* ने कहा कि शिकागो से उठी स्वामी विवेकानंद की आवाज आज भी भारत को अपनी संस्कृति पर गर्व करने, अपनी शक्ति पहचानने और विश्व कल्याण में अपनी भूमिका को सशक्त बनाने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित रखने के बजाय स्वदेशी, स्वावलंबन, आत्मविश्वास और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ भारत को आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, कारीगरों, किसानों, लघु उद्यमियों और युवाओं को प्रोत्साहन देकर रोजगार के नए अवसर पैदा करना तथा स्वावलंबी भारत का निर्माण करना ही आज के समय में स्वामी विवेकानंद के विचारों को व्यवहार में उतारने का सार्थक मार्ग है।
*युवा प्रमुख ऋषभ पांडे* ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विश्व पटल पर भारत की वास्तविक पहचान स्थापित करने का कार्य किया। उन्होंने भारत के प्रति प्रचलित मिथ्या धारणाओं को चुनौती देते हुए भारतीय संस्कृति और सामर्थ्य का परिचय विश्व को कराया। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए स्वामी विवेकानंद के प्रेरक मंत्र को दोहराया— “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
*विभाग संयोजन राजीव* कार्यक्रम ने उपस्थित कार्यकर्ताओं से स्वदेशी, स्वावलंबन, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ दिग्विजय दिवस को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर नवरंग सिंह, सुधा सिंह, विजय प्रधान, जनार्दन यादव, शशि द्विवेदी, नंदलाल प्रजापति, किरण पांडे, दीपक मिश्रा, इरफान, पंकज भार्गव, कुंदन पांडे, हेमलता, पूजा यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं लोग मौजूद रहे।
सुलतानपुर में स्वच्छता अभियान की समीक्षा, 50 से अधिक गांव बनेंगे जीरो वेस्ट
सुलतानपुर। जिले में स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वच्छता समिति, उत्सव भवन एवं डिजिटल लाइब्रेरी और ऑडिट से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की और जिन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिली, उनमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास एवं स्वच्छता से जुड़े कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करना होगा।

लंबित ऑडिट आपत्तियों पर डीएम सख्त

समीक्षा की शुरुआत ऑडिट से संबंधित मामलों से हुई। इस दौरान छह ऑडिट प्रस्तर लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि लंबित ऑडिट प्रस्तरों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

10,124 के लक्ष्य के मुकाबले 3,722 शौचालय पूरे

जिला स्वच्छता समिति की समीक्षा में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की स्थिति भी सामने आई। जिले में 10,124 व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सापेक्ष अब तक 3,722 शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जा चुका है।

जिलाधिकारी ने शेष कार्यों को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करते हुए शौचालय निर्माण का काम समय से पूरा कराया जाए।

441 आरआरसी संचालित, 213 अभी निर्माणाधीन

रिसोर्स रिकवरी सेंटर यानी आरआरसी की समीक्षा में बताया गया कि जनपद में 441 आरआरसी वर्तमान में संचालित हैं, जबकि 213 आरआरसी का निर्माण कार्य चल रहा है।

जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन आरआरसी को जल्द पूरा कराने के साथ ही उनके प्रभावी संचालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल भवन का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाना जरूरी है।

ग्रामीणों को कूड़ा गाड़ी में कचरा देने के लिए करें जागरूक

गांवों में कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने ग्रामीणों के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को समझाया जाए कि वे कचरा इधर-उधर न फेंकें और कचरा संग्रहण के लिए आने वाली गाड़ियों को ही अपना कचरा दें।

डीएम ने गांवों को चरणबद्ध तरीके से जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीणों की नियमित आदत और सामुदायिक जिम्मेदारी बनाया जाए।

50 से अधिक गांवों को जीरो वेस्ट बनाने की तैयारी

बैठक में बताया गया कि पिछली बैठक में जिलाधिकारी ने प्रथम चरण में प्रत्येक विकासखंड से एक-एक गांव का चयन कर कुल 14 गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे।

चयनित गांवों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और जनजागरूकता से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य गांवों में कार्य प्रगति पर है।

प्रशासन की योजना जल्द ही ऐसे गांवों की संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक करने की है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इस लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर भी जोर

जिलाधिकारी ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रहण, निस्तारण और प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

इसके साथ ही गोबरधन योजना के तहत स्थापित दो बायोगैस प्लांट की स्थिति की जानकारी भी ली गई। संबंधित अधिकारियों को योजना के तहत आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।

स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालयों की होगी मरम्मत

रेट्रोफिटिंग कार्य के तहत पुराने या खराब शौचालयों की मरम्मत की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालयों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं से जुड़े संस्थानों में स्वच्छता सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाना चाहिए।

100 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार

‘मेरा तालाब, मेरी जिम्मेदारी’ अभियान की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि जिले में 100 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। इन तालाबों को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त करने की दिशा में भी काम किया गया है।

जिलाधिकारी ने तालाबों की सफाई और संरक्षण को लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तालाबों का जीर्णोद्धार करने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी है, ताकि दोबारा गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति पैदा न हो।

ठोस और तरल कचरा प्रबंधन पर जताई नाराजगी

सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने और निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रभावी ढंग से काम कराने के निर्देश दिए।

कंसल्टिंग इंजीनियरों के कामकाज की भी समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का बिंदुवार विवरण अलग से प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने डीसी स्वच्छ भारत मिशन को फील्ड में जाकर विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक कार्मिक की जिम्मेदारी निर्धारित कर उसके अनुरूप स्पष्ट लक्ष्य तय करने को कहा।

मॉडल गांव विकसित करने पर जोर

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक-एक गांव का चयन कर उसे सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि गांवों में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से ग्रामीणों के साथ अच्छा व्यवहार करने, उन्हें सरकारी योजनाओं और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा अपने कार्यों के माध्यम से गांवों में सकारात्मक वातावरण तैयार करने की अपील की।

दो फिकल स्लज मैनेजमेंट इकाइयों पर काम

फिकल स्लज मैनेजमेंट की समीक्षा में बताया गया कि शासन की ओर से जिले के लिए दो फिकल स्लज मैनेजमेंट इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों इकाइयों के लिए स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में है।

जिलाधिकारी ने इस कार्य को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

139 गांवों में चल रही डिजिटल लाइब्रेरी

बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जनपद के 139 ग्रामों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित की जा रही हैं।

कुछ डिजिटल लाइब्रेरी में अभी कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं। जिलाधिकारी ने ऐसी सभी लाइब्रेरी में जल्द कंप्यूटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी में नवीनतम कंप्यूटर और जरूरी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

इसके साथ ही विद्यार्थियों की जरूरत को देखते हुए ऑनलाइन कोर्स भी डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़े जाने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षिक संसाधनों का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सके।

समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश

बैठक के अंत में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, शौचालय निर्माण, ग्रामीण विकास और डिजिटल शिक्षा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की प्रगति केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक लाभ गांवों और आम लोगों तक दिखाई देना चाहिए। डीएम ने नियमित निगरानी, स्थलीय निरीक्षण और जिम्मेदारियों की स्पष्ट व्यवस्था के साथ सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश को आपदा-रोधी राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने के लिए राज्यव्यापी अभ्यास आयोजित
- *भूकंप, रासायनिक एवं अग्नि आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए सिम्पोजियम सम्पन्न*

- *18 सितम्बर को प्रदेश की 157 तहसीलों में होगी राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज*

- *विभिन्न विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों ने साझा किए अनुभव; समन्वित एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ करने पर जोर*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भूकंप, औद्योगिक (रासायनिक) एवं अग्नि जैसी बहु-जोखिम वाली आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों, प्रतिक्रिया क्षमता एवं अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित दो दिवसीय Symposium-cum-Table Top Exercise (TTEx) – State Mock Exercise on Earthquake, Chemical and Fire Hazards आज यूपी एसडीएमए भवन, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में UP SDMA  के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, PVSM, AVSM, VSM  (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इस प्रकार की अभ्यासों का उद्देश्य राज्य, मण्डल एवं जनपद स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक समय में कार्यक्षमता को परखना, संभावित कमियों की पहचान करना तथा उन्हें समयबद्ध रूप से दूर करना है। उन्होंने कहा कि अभ्यास केवल तैयारियों के आकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एकीकृत, त्वरित एवं प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश की आपदा-रोधी क्षमता एवं Resilience को और मजबूत करना है।
प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, श्रीमती अपर्णा यू., IASus ने कहा कि प्रदेश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा से पूर्व जोखिम को कम करना, समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के माध्यम से जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है।
अपर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, पद्मजा चौहान, IPSus ने कहा कि आपदा प्रबंधन में प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों की क्षमताओं को एकीकृत करते हुए Whole of Government एवं Whole of Society  दृष्टिकोण को और मजबूत किए जाने पर बल दिया।
पुलिस महानिदेशक, पी.ए.सी. उत्तर प्रदेश, डॉ. आलोक सिंह, IPSus ने बताया कि आपदा के समय प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होती है। प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए संबंधित विभागों एवं एजेंसियों की भूमिका, कमांड एवं कंट्रोल व्यवस्था तथा संसाधनों की उपलब्धता पहले से स्पष्ट और समन्वित होना आवश्यक है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की सदस्या सुश्री रीता मिसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि आपदाएं केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया की चुनौती नहीं हैं, बल्कि वेपूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, संस्थागत क्षमता तथा समन्वित नेतृत्व की भी कसौटी हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, PVSM, UYSM, AVSM, YSM, आर्मी कमांडर, सेंट्रल कमांड, भारतीय सेनाने आधुनिक तकनीक, अर्ली वार्निंग, त्वरित संचार, विशेषज्ञ संसाधनों एवं फील्ड स्तर की क्षमताओं को आपदा तैयारी की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए मिलिट्री - सिविल कोऑर्डिनेशन पर बल दिया और इस्के निरंतर सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
अभ्यास में उत्तर प्रदेश के भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील 34 जनपदोंको केंद्रित किया गया। इन जनपदों केअपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उप जिलाधिकारी एवं आपदा विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त 11 मण्डलों से पुलिस, स्वास्थ्य तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियोंने भी सहभागिता की। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं, आपदा प्रतिक्रिया बलों एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से विभिन्न आपदा परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, सूचना के निर्बाध आदान-प्रदान तथा समन्वित प्रतिक्रियाकी व्यवस्थाओं को परखा गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित सिम्पोजियम में भूकंप, औद्योगिक (रासायनिक) एवं अग्नि आपदाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर NDMA, DRDE-DRDO, NCS, UP SDMA, उत्तर प्रदेश फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेज, भारतीय रेल, NDRF, स्वास्थ्य विभाग तथा भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने अनुभव, तकनीकी जानकारी एवं सर्वाेत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं। सिम्पोजियम के दौरान अग्नि एवं औद्योगिक आपदाओं से संबंधित केस स्टडीज भी प्रस्तुत की गईं। प्रथम दिन एक्सरसाइज का संचालन प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी श्री मान्धाता प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन आज टेबल टॉप एक्सरसाइज में आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था परखी गयी। TTEx के माध्यम से भूकंप, रासायनिक एवं अग्नि आपदाओं से संबंधित विभिन्न परिदृश्यों में जनपदों, विभागों एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों की तैयारी, निर्णय लेने की क्षमता, कमांड एवं कंट्रोल तथा अंतर-विभागीय समन्वय का परीक्षण किया गया। अभ्यास के दौरान भूकंप के तत्काल बाद की कार्रवाई, विद्यालयों, अस्पतालों एवं प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति, रासायनिक गैस रिसाव एवं तरल रसायन के फैलाव तथा अस्पतालों, विद्यालयों एवं बहुमंजिला भवनों में अग्नि आपात स्थिति जैसे परिदृश्यों पर प्रतिभागियों द्वारा प्रतिक्रिया रणनीतियों पर चर्चा की गयी। टेबल टॉप एक्सरसाइज का संचालन प्राधिकरण के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर- प्रशिक्षण प्रवीन किशोर द्वारा किया गया।
अभ्यास के अगले चरण में 18 सितम्बर 2026 को राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। 34 जनपदों की 157 तहसीलों में विभिन्न चिन्हित स्थलों पर एक साथ भौतिक रूप से आयोजित होने वाला यह अभ्यास प्रदेश की भूकंप संबंधी तैयारियों एवं बहु-स्तरीय आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक परिस्थितियों में व्यापक परख करेगा। इस दौरान सभी संबंधित जनपदों में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) एवं Incident Response Teams (IRT) को सक्रिय किया जाएगा। इसके माध्यम से कमांड, नियंत्रण, सूचना संप्रेषण एवं अंतर-विभागीय समन्वय की व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक जनपद मेंफील्ड हॉस्पिटल स्थापित कर बड़े पैमाने पर घायलों के त्वरित उपचार, ट्रायेज, रेफरल एवं चिकित्सा सेवाओं की तैयारियों को भी परखा जाएगा। मॉक एक्सरसाइज के दौरान भूकंप के पश्चात भवनों से सुरक्षित निकासी, ध्वस्त संरचनाओं में खोज एवं बचाव, अग्निकांड, गैस/रासायनिक रिसाव एवं अन्य संभावित द्वितीयक आपदा परिस्थितियों का सजीव अभ्यास किया जाएगा। इन परिदृश्यों को विद्यालयों, मॉल, कार्यालयों, बहुमंजिला भवनों तथा औद्योगिक इकाइयों-विशेषकर MAH एवं Non-MAH  इकाइयों में व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित एवं अभ्यासित किया जाएगा। अभ्यास को और अधिक व्यापक एवं यथार्थपरक बनाने के लिए भारतीय रेल द्वारा भूकंप के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने (Derailment) की विशेष आपदा परिस्थिति का भी सिमुलेशन किया जाएगा। इसमें खोज एवं बचाव, घायलों की निकासी, चिकित्सा सहायता, राहत तथा विभिन्न संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। पूरे मेगा मॉक एक्सरसाइज की UP SDMA  द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तर से लाइव मॉनिटरिंग एवं कमांड-एंड-कंट्रोल किया जाएगा।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए शिक्षा जगत में जनभागीदारी और विकसित भारत की संकल्पना को मिलेगा विस्तार

- *उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग मिलकर विद्यार्थियों और युवाओं को अभियान से जोड़ेंगे*
- *कक्षा 5 से 8 तक ड्राइंग तथा कक्षा 9 से 12 तक भाषण प्रतियोगिताएं, जिला एवं राज्य स्तर पर होगी प्रदर्शनी*
- *उच्च शिक्षण संस्थानों में युवाओं से संवाद और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर प्रतियोगिताओं का आयोजन*

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में  लखनऊ स्थित आवास पर उच्च शिक्षा मंत्री  योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री  रजनी तिवारी ने अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा  पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी सहित अन्य अधिकारीगण के साथ अभियान की तैयारियों एवं आयोजन के संबंध में बैठक कर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभागों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा युवाओं को ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जोड़ने की कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया गया। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल में हुए जनकल्याणकारी कार्यों, नीतिगत सुधारों और देश में आए बदलावों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना है।
अभियान के अंतर्गत ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ कार्यक्रम 17 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की कल्पनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से 25 वर्षों के सेवा कार्यों तथा विकसित भारत की संकल्पना को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाना है। इस कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेंगे, जबकि स्थानीय जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी।
इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक शासकीय एवं निजी विद्यालय में कक्षा 5 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए ड्राइंग तथा कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यालय एवं ब्लॉक स्तर से आगे जिला स्तर तक किया जाएगा। उत्कृष्ट ड्राइंग का चयन कर जिला स्तरीय प्रदर्शनी आयोजित होगी, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद राज्य स्तरीय भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मंत्रीगण भी उपस्थित रहेंगे।
अभियान में उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे तथा ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर ड्राइंग, भाषण एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को देश के विकास की यात्रा से जोड़ते हुए उन्हें विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति जागरूक एवं सहभागी बनाना है। अभियान की कार्ययोजना में उच्च शिक्षा संस्थानों में युवाओं के साथ संवाद और प्रतियोगिताओं के आयोजन का उल्लेख किया गया है।
कार्यक्रम को केवल विद्यालयों तक सीमित न रखते हुए इसमें अभिभावकों, ग्रामीणों और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रकार बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से अभियान का संदेश परिवार और समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचेगा। विद्यालय, ब्लॉक और जिला स्तर पर प्राप्त उत्कृष्ट प्रविष्टियों को आगे बढ़ाते हुए राज्य स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और उनके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा कार्य तथा ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग अपनी-अपनी संस्थागत पहुंच का उपयोग करते हुए अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ें। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सहभागिता, प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनियों का संचालन करेंगे, जबकि उच्च शिक्षा विभाग उच्च शिक्षण संस्थानों के युवाओं को संवाद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अभियान से जोड़ेगा। इससे एक ओर प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक प्रतिभा को मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और युवा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी भूमिका और विचारों को साझा कर सकेंगे।
बैठक में अभियान की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और अधिक से अधिक विद्यार्थियों एवं युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 12 प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जनसेवा काल की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
सेवा संकल्प अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से करें कार्य : एके शर्मा
- *प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित कर मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश*

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा की अध्यक्षता में आज संगम भवन, लखनऊ में आगामी सेवा संकल्प अभियान एवं पब्लिक सर्विस पर्व की तैयारियों को लेकर विभिन्न विभागों की अंतरविभागीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में नगर विकास, ऊर्जा, अतिरिक्त ऊर्जा, वन, पंचायती राज, कृषि, जल, स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नगर विकास मंत्री ने कहा कि यह एक बहुजनपदीय एवं बहुविभागीय कार्यक्रम है, जिसमें सभी विभागों की प्रभावी सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित करें तथा उसका मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, जिससे कार्यक्रमों के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।
सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए कि उनके पास उपलब्ध छोटे-बड़े सभागार एवं अन्य संसाधनों को एक माह तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए यथासंभव उपलब्ध कराया जाए। 15 सितंबर से पहले सभी पार्षदों की बैठक आयोजित कर उन्हें अभियान की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि वार्ड स्तर तक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- *डिजिटल बोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी और ‘सेवा सेतु’ कैंप के माध्यम से योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार*
मंत्री श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में उपलब्ध डिजिटल बोर्डों पर संस्कृति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो चलाए जाएं, जिनके माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए।जहां नगर निकायों अथवा ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं, वहां भी विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। सभी नगर निकायों में ‘सेवा सेतु’ के अंतर्गत कैंप लगाकर पात्र नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें अभियान से जोड़ा जाए तथा दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए।
- *17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन, घाटों की सजावट एवं प्रमुख भवनों को रोशनी से सजाने के निर्देश*
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामनाएं एवं अपना आशीर्वाद देने के लिए प्रेरित किया जाए। नगरों में स्थित स्कूल, कॉलेज, बड़े अस्पताल एवं प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों को प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ एवं सुंदर रखा जाए तथा कार्यालय की स्वच्छता की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुनिश्चित की जाए।
- *वाराणसी से वडनगर यात्रा मार्ग पर विशेष स्वच्छता अभियान, 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक*
बैठक में निर्देश दिए गए कि वाराणसी से वडनगर, गुजरात तक प्रस्तावित यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी जिलों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की जाए। यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जाए। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अनवरत विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। सभी विभागों एवं स्थानीय निकायों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की डिजिटल रिकॉर्डिंग कर अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा मिले। मंत्री जी ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंताओं एवं अधीक्षण अभियंताओं को अन्य विभागों के साथ समन्वय कर विद्युत संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन की नियमित निगरानी करने तथा दिन के समय अनावश्यक रूप से स्ट्रीट लाइटें चालू न रहने देने के निर्देश दिए।
बैठक में डीजी विजिलेंस डॉ रामकृष्ण स्वर्णकार, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल, एम डी मयूर माहेश्वरी, प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरु प्रसाद,सचिव अनुज कुमार झा, रविंद्र कुमार, श्रीमती ऋतु सुहास, ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक, नोएडा प्राधिकरण, यूपीपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जिलों के संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।
लखनऊ में आरईवी एक्सपो-2026 का भव्य शुभारंभ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया उद्घाटन
- स्वच्छ ऊर्जा और ई-मोबिलिटी के नवाचारों का मंच बना आरईवी एक्सपो-2026
- हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा आरईवी एक्सपो-2026

लखनऊ। वृन्दावन ग्राउंड, लखनऊ में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं इलेक्ट्रिक वाहन प्रदर्शनी-2026 (आरईवी एक्सपो-2026) के तृतीय संस्करण का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य एवं विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने संयुक्त रूप से किया।
उद्घाटन के अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में विकसित नवीन तकनीकों, उत्पादों एवं समाधानों की जानकारी प्राप्त की तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संघ के अध्यक्ष सौरभ शर्मा एवं उमंगोट सोलर के संस्थापक गोपाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं प्रदर्शनी के आयोजक अंचल दीक्षित एवं  विपिन लोहिया ने आयोजन के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरईवी एक्सपो-2026 स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी एवं विद्युत वाहनों के क्षेत्र को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। प्रदर्शनी में नवीकरणीय ऊर्जा एवं विद्युत वाहन क्षेत्र से जुड़ी नवीन तकनीकों और उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है।
आयोजन का उद्देश्य स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता के क्षेत्र में नवाचार, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं को प्रोत्साहित करना है। आरईवी एक्सपो-2026 भारत को स्वच्छ, हरित, आत्मनिर्भर एवं सतत भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के संकल्प को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास है।
यूपी रेरा ने छह जिलों की 13 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी मंजूरी

₹2,380 करोड़ के निवेश से बनेंगी 4,724 आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां, निवेश में बाराबंकी और इकाइयों में लखनऊ सबसे आगे

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने राज्य के छह जिलों में 13 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में करीब ₹2,380.04 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और इनके जरिए 4,724 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

इन परियोजनाओं से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। परियोजनाओं को मंजूरी यूपी रेरा मुख्यालय में हुई प्राधिकरण की 212वीं और 213वीं अथॉरिटी बैठकों में दी गई। बैठकों की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने की। विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार करने के बाद प्राधिकरण ने इन्हें मंजूरी प्रदान की।

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत परियोजनाओं का विकास रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी और तय समय-सीमा में कराने पर जोर रहेगा। इससे घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका भरोसा और मजबूत होगा।

- बाराबंकी में सबसे ज्यादा निवेश

स्वीकृत परियोजनाओं में अनुमानित निवेश के मामले में बाराबंकी सबसे आगे रहा। जिले में ₹751.42 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में कुल 591 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- इकाइयों के मामले में लखनऊ आगे

वहीं, नई बनने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से लखनऊ सबसे आगे है। जिले में एक आवासीय परियोजना को मंजूरी मिली है। इसमें करीब ₹385.76 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और परियोजना के तहत 1,392 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- वाराणसी में तीन परियोजनाओं को मंजूरी

वाराणसी में तीन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में कुल ₹750.24 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा। इनके माध्यम से 1,189 आवासीय इकाइयों का विकास किया जाएगा।

- गाजियाबाद में 864 इकाइयां बनेंगी

गाजियाबाद में ₹286.27 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है जिसमें दो व्यावसायिक व एक आवासीय परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं के तहत कुल 864 इकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है।

- गौतमबुद्ध नगर में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं

गौतमबुद्ध नगर में एक आवासीय और एक व्यावसायिक परियोजना को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में करीब ₹186 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और कुल 564 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- आगरा में दो आवासीय परियोजनाएं

आगरा में ₹20.35 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से 124 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- प्रदेश सरकार की नीतियों से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिल रहा प्रोत्साहन

प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ रही गतिविधियों के पीछे राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और सरल प्रक्रियाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा आवास, शहरी विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में नई रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है। 13 परियोजनाओं में प्रस्तावित ₹2,380.04 करोड़ के निवेश से निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ेंगी। इसका लाभ निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग और इससे जुड़े अन्य कारोबारों को भी मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

- पारदर्शिता और समयबद्ध विकास पर जोर

यूपी रेरा का कहना है कि पंजीकृत परियोजनाओं का विकास निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अनुसार हो, यह सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। परियोजनाओं की निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया और नियमों के पालन के जरिए घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा रही है। प्राधिकरण का प्रयास है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रमोटरों के लिए भी बेहतर और स्पष्ट व्यवस्था बने तथा घर खरीदारों का भरोसा लगातार मजबूत हो।

- यूपी रेरा अध्यक्ष ने कहा :

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी देने के साथ उनकी प्रभावी निगरानी से घर खरीदारों और प्रमोटरों दोनों के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी रेरा आगे भी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करेगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ प्रदेश में संतुलित, व्यवस्थित और भरोसेमंद रियल एस्टेट विकास को आगे बढ़ाएगा।