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सुलतानपुर में स्वच्छता अभियान की समीक्षा, 50 से अधिक गांव बनेंगे जीरो वेस्ट
सुलतानपुर। जिले में स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वच्छता समिति, उत्सव भवन एवं डिजिटल लाइब्रेरी और ऑडिट से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की और जिन कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिली, उनमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास एवं स्वच्छता से जुड़े कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करना होगा।

लंबित ऑडिट आपत्तियों पर डीएम सख्त

समीक्षा की शुरुआत ऑडिट से संबंधित मामलों से हुई। इस दौरान छह ऑडिट प्रस्तर लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि लंबित ऑडिट प्रस्तरों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

10,124 के लक्ष्य के मुकाबले 3,722 शौचालय पूरे

जिला स्वच्छता समिति की समीक्षा में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की स्थिति भी सामने आई। जिले में 10,124 व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सापेक्ष अब तक 3,722 शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जा चुका है।

जिलाधिकारी ने शेष कार्यों को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करते हुए शौचालय निर्माण का काम समय से पूरा कराया जाए।

441 आरआरसी संचालित, 213 अभी निर्माणाधीन

रिसोर्स रिकवरी सेंटर यानी आरआरसी की समीक्षा में बताया गया कि जनपद में 441 आरआरसी वर्तमान में संचालित हैं, जबकि 213 आरआरसी का निर्माण कार्य चल रहा है।

जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन आरआरसी को जल्द पूरा कराने के साथ ही उनके प्रभावी संचालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल भवन का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाना जरूरी है।

ग्रामीणों को कूड़ा गाड़ी में कचरा देने के लिए करें जागरूक

गांवों में कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने ग्रामीणों के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को समझाया जाए कि वे कचरा इधर-उधर न फेंकें और कचरा संग्रहण के लिए आने वाली गाड़ियों को ही अपना कचरा दें।

डीएम ने गांवों को चरणबद्ध तरीके से जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीणों की नियमित आदत और सामुदायिक जिम्मेदारी बनाया जाए।

50 से अधिक गांवों को जीरो वेस्ट बनाने की तैयारी

बैठक में बताया गया कि पिछली बैठक में जिलाधिकारी ने प्रथम चरण में प्रत्येक विकासखंड से एक-एक गांव का चयन कर कुल 14 गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे।

चयनित गांवों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और जनजागरूकता से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह गांवों को जीरो वेस्ट प्रोड्यूस गांव के रूप में विकसित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य गांवों में कार्य प्रगति पर है।

प्रशासन की योजना जल्द ही ऐसे गांवों की संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक करने की है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इस लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर भी जोर

जिलाधिकारी ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रहण, निस्तारण और प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

इसके साथ ही गोबरधन योजना के तहत स्थापित दो बायोगैस प्लांट की स्थिति की जानकारी भी ली गई। संबंधित अधिकारियों को योजना के तहत आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।

स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालयों की होगी मरम्मत

रेट्रोफिटिंग कार्य के तहत पुराने या खराब शौचालयों की मरम्मत की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालयों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं से जुड़े संस्थानों में स्वच्छता सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाना चाहिए।

100 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार

‘मेरा तालाब, मेरी जिम्मेदारी’ अभियान की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि जिले में 100 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। इन तालाबों को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त करने की दिशा में भी काम किया गया है।

जिलाधिकारी ने तालाबों की सफाई और संरक्षण को लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तालाबों का जीर्णोद्धार करने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी है, ताकि दोबारा गंदगी और अतिक्रमण की स्थिति पैदा न हो।

ठोस और तरल कचरा प्रबंधन पर जताई नाराजगी

सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने और निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रभावी ढंग से काम कराने के निर्देश दिए।

कंसल्टिंग इंजीनियरों के कामकाज की भी समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का बिंदुवार विवरण अलग से प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने डीसी स्वच्छ भारत मिशन को फील्ड में जाकर विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक कार्मिक की जिम्मेदारी निर्धारित कर उसके अनुरूप स्पष्ट लक्ष्य तय करने को कहा।

मॉडल गांव विकसित करने पर जोर

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक-एक गांव का चयन कर उसे सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि गांवों में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से ग्रामीणों के साथ अच्छा व्यवहार करने, उन्हें सरकारी योजनाओं और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा अपने कार्यों के माध्यम से गांवों में सकारात्मक वातावरण तैयार करने की अपील की।

दो फिकल स्लज मैनेजमेंट इकाइयों पर काम

फिकल स्लज मैनेजमेंट की समीक्षा में बताया गया कि शासन की ओर से जिले के लिए दो फिकल स्लज मैनेजमेंट इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों इकाइयों के लिए स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं और आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में है।

जिलाधिकारी ने इस कार्य को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

139 गांवों में चल रही डिजिटल लाइब्रेरी

बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जनपद के 139 ग्रामों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित की जा रही हैं।

कुछ डिजिटल लाइब्रेरी में अभी कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं। जिलाधिकारी ने ऐसी सभी लाइब्रेरी में जल्द कंप्यूटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी में नवीनतम कंप्यूटर और जरूरी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

इसके साथ ही विद्यार्थियों की जरूरत को देखते हुए ऑनलाइन कोर्स भी डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़े जाने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षिक संसाधनों का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सके।

समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश

बैठक के अंत में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, शौचालय निर्माण, ग्रामीण विकास और डिजिटल शिक्षा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की प्रगति केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक लाभ गांवों और आम लोगों तक दिखाई देना चाहिए। डीएम ने नियमित निगरानी, स्थलीय निरीक्षण और जिम्मेदारियों की स्पष्ट व्यवस्था के साथ सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश को आपदा-रोधी राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने के लिए राज्यव्यापी अभ्यास आयोजित
- *भूकंप, रासायनिक एवं अग्नि आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए सिम्पोजियम सम्पन्न*

- *18 सितम्बर को प्रदेश की 157 तहसीलों में होगी राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज*

- *विभिन्न विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों ने साझा किए अनुभव; समन्वित एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ करने पर जोर*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भूकंप, औद्योगिक (रासायनिक) एवं अग्नि जैसी बहु-जोखिम वाली आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों, प्रतिक्रिया क्षमता एवं अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित दो दिवसीय Symposium-cum-Table Top Exercise (TTEx) – State Mock Exercise on Earthquake, Chemical and Fire Hazards आज यूपी एसडीएमए भवन, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में UP SDMA  के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, PVSM, AVSM, VSM  (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इस प्रकार की अभ्यासों का उद्देश्य राज्य, मण्डल एवं जनपद स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक समय में कार्यक्षमता को परखना, संभावित कमियों की पहचान करना तथा उन्हें समयबद्ध रूप से दूर करना है। उन्होंने कहा कि अभ्यास केवल तैयारियों के आकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एकीकृत, त्वरित एवं प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश की आपदा-रोधी क्षमता एवं Resilience को और मजबूत करना है।
प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, श्रीमती अपर्णा यू., IASus ने कहा कि प्रदेश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा से पूर्व जोखिम को कम करना, समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना तथा आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के माध्यम से जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है।
अपर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, पद्मजा चौहान, IPSus ने कहा कि आपदा प्रबंधन में प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों की क्षमताओं को एकीकृत करते हुए Whole of Government एवं Whole of Society  दृष्टिकोण को और मजबूत किए जाने पर बल दिया।
पुलिस महानिदेशक, पी.ए.सी. उत्तर प्रदेश, डॉ. आलोक सिंह, IPSus ने बताया कि आपदा के समय प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होती है। प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए संबंधित विभागों एवं एजेंसियों की भूमिका, कमांड एवं कंट्रोल व्यवस्था तथा संसाधनों की उपलब्धता पहले से स्पष्ट और समन्वित होना आवश्यक है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की सदस्या सुश्री रीता मिसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि आपदाएं केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया की चुनौती नहीं हैं, बल्कि वेपूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, संस्थागत क्षमता तथा समन्वित नेतृत्व की भी कसौटी हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, PVSM, UYSM, AVSM, YSM, आर्मी कमांडर, सेंट्रल कमांड, भारतीय सेनाने आधुनिक तकनीक, अर्ली वार्निंग, त्वरित संचार, विशेषज्ञ संसाधनों एवं फील्ड स्तर की क्षमताओं को आपदा तैयारी की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए मिलिट्री - सिविल कोऑर्डिनेशन पर बल दिया और इस्के निरंतर सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
अभ्यास में उत्तर प्रदेश के भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील 34 जनपदोंको केंद्रित किया गया। इन जनपदों केअपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उप जिलाधिकारी एवं आपदा विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त 11 मण्डलों से पुलिस, स्वास्थ्य तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियोंने भी सहभागिता की। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं, आपदा प्रतिक्रिया बलों एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से विभिन्न आपदा परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, सूचना के निर्बाध आदान-प्रदान तथा समन्वित प्रतिक्रियाकी व्यवस्थाओं को परखा गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित सिम्पोजियम में भूकंप, औद्योगिक (रासायनिक) एवं अग्नि आपदाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर NDMA, DRDE-DRDO, NCS, UP SDMA, उत्तर प्रदेश फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेज, भारतीय रेल, NDRF, स्वास्थ्य विभाग तथा भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने अनुभव, तकनीकी जानकारी एवं सर्वाेत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं। सिम्पोजियम के दौरान अग्नि एवं औद्योगिक आपदाओं से संबंधित केस स्टडीज भी प्रस्तुत की गईं। प्रथम दिन एक्सरसाइज का संचालन प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी श्री मान्धाता प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन आज टेबल टॉप एक्सरसाइज में आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था परखी गयी। TTEx के माध्यम से भूकंप, रासायनिक एवं अग्नि आपदाओं से संबंधित विभिन्न परिदृश्यों में जनपदों, विभागों एवं आपदा प्रतिक्रिया बलों की तैयारी, निर्णय लेने की क्षमता, कमांड एवं कंट्रोल तथा अंतर-विभागीय समन्वय का परीक्षण किया गया। अभ्यास के दौरान भूकंप के तत्काल बाद की कार्रवाई, विद्यालयों, अस्पतालों एवं प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति, रासायनिक गैस रिसाव एवं तरल रसायन के फैलाव तथा अस्पतालों, विद्यालयों एवं बहुमंजिला भवनों में अग्नि आपात स्थिति जैसे परिदृश्यों पर प्रतिभागियों द्वारा प्रतिक्रिया रणनीतियों पर चर्चा की गयी। टेबल टॉप एक्सरसाइज का संचालन प्राधिकरण के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर- प्रशिक्षण प्रवीन किशोर द्वारा किया गया।
अभ्यास के अगले चरण में 18 सितम्बर 2026 को राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। 34 जनपदों की 157 तहसीलों में विभिन्न चिन्हित स्थलों पर एक साथ भौतिक रूप से आयोजित होने वाला यह अभ्यास प्रदेश की भूकंप संबंधी तैयारियों एवं बहु-स्तरीय आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक परिस्थितियों में व्यापक परख करेगा। इस दौरान सभी संबंधित जनपदों में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) एवं Incident Response Teams (IRT) को सक्रिय किया जाएगा। इसके माध्यम से कमांड, नियंत्रण, सूचना संप्रेषण एवं अंतर-विभागीय समन्वय की व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक जनपद मेंफील्ड हॉस्पिटल स्थापित कर बड़े पैमाने पर घायलों के त्वरित उपचार, ट्रायेज, रेफरल एवं चिकित्सा सेवाओं की तैयारियों को भी परखा जाएगा। मॉक एक्सरसाइज के दौरान भूकंप के पश्चात भवनों से सुरक्षित निकासी, ध्वस्त संरचनाओं में खोज एवं बचाव, अग्निकांड, गैस/रासायनिक रिसाव एवं अन्य संभावित द्वितीयक आपदा परिस्थितियों का सजीव अभ्यास किया जाएगा। इन परिदृश्यों को विद्यालयों, मॉल, कार्यालयों, बहुमंजिला भवनों तथा औद्योगिक इकाइयों-विशेषकर MAH एवं Non-MAH  इकाइयों में व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित एवं अभ्यासित किया जाएगा। अभ्यास को और अधिक व्यापक एवं यथार्थपरक बनाने के लिए भारतीय रेल द्वारा भूकंप के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने (Derailment) की विशेष आपदा परिस्थिति का भी सिमुलेशन किया जाएगा। इसमें खोज एवं बचाव, घायलों की निकासी, चिकित्सा सहायता, राहत तथा विभिन्न संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। पूरे मेगा मॉक एक्सरसाइज की UP SDMA  द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तर से लाइव मॉनिटरिंग एवं कमांड-एंड-कंट्रोल किया जाएगा।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए शिक्षा जगत में जनभागीदारी और विकसित भारत की संकल्पना को मिलेगा विस्तार

- *उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग मिलकर विद्यार्थियों और युवाओं को अभियान से जोड़ेंगे*
- *कक्षा 5 से 8 तक ड्राइंग तथा कक्षा 9 से 12 तक भाषण प्रतियोगिताएं, जिला एवं राज्य स्तर पर होगी प्रदर्शनी*
- *उच्च शिक्षण संस्थानों में युवाओं से संवाद और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर प्रतियोगिताओं का आयोजन*

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में  लखनऊ स्थित आवास पर उच्च शिक्षा मंत्री  योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री  रजनी तिवारी ने अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा  पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी सहित अन्य अधिकारीगण के साथ अभियान की तैयारियों एवं आयोजन के संबंध में बैठक कर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभागों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा युवाओं को ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जोड़ने की कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया गया। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल में हुए जनकल्याणकारी कार्यों, नीतिगत सुधारों और देश में आए बदलावों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना है।
अभियान के अंतर्गत ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ कार्यक्रम 17 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की कल्पनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से 25 वर्षों के सेवा कार्यों तथा विकसित भारत की संकल्पना को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाना है। इस कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेंगे, जबकि स्थानीय जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी।
इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक शासकीय एवं निजी विद्यालय में कक्षा 5 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए ड्राइंग तथा कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यालय एवं ब्लॉक स्तर से आगे जिला स्तर तक किया जाएगा। उत्कृष्ट ड्राइंग का चयन कर जिला स्तरीय प्रदर्शनी आयोजित होगी, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद राज्य स्तरीय भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मंत्रीगण भी उपस्थित रहेंगे।
अभियान में उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे तथा ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर ड्राइंग, भाषण एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को देश के विकास की यात्रा से जोड़ते हुए उन्हें विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति जागरूक एवं सहभागी बनाना है। अभियान की कार्ययोजना में उच्च शिक्षा संस्थानों में युवाओं के साथ संवाद और प्रतियोगिताओं के आयोजन का उल्लेख किया गया है।
कार्यक्रम को केवल विद्यालयों तक सीमित न रखते हुए इसमें अभिभावकों, ग्रामीणों और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रकार बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से अभियान का संदेश परिवार और समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचेगा। विद्यालय, ब्लॉक और जिला स्तर पर प्राप्त उत्कृष्ट प्रविष्टियों को आगे बढ़ाते हुए राज्य स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और उनके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा कार्य तथा ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग अपनी-अपनी संस्थागत पहुंच का उपयोग करते हुए अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ें। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सहभागिता, प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनियों का संचालन करेंगे, जबकि उच्च शिक्षा विभाग उच्च शिक्षण संस्थानों के युवाओं को संवाद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अभियान से जोड़ेगा। इससे एक ओर प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक प्रतिभा को मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और युवा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी भूमिका और विचारों को साझा कर सकेंगे।
बैठक में अभियान की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और अधिक से अधिक विद्यार्थियों एवं युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 12 प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जनसेवा काल की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
सेवा संकल्प अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से करें कार्य : एके शर्मा
- *प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित कर मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश*

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा की अध्यक्षता में आज संगम भवन, लखनऊ में आगामी सेवा संकल्प अभियान एवं पब्लिक सर्विस पर्व की तैयारियों को लेकर विभिन्न विभागों की अंतरविभागीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में नगर विकास, ऊर्जा, अतिरिक्त ऊर्जा, वन, पंचायती राज, कृषि, जल, स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नगर विकास मंत्री ने कहा कि यह एक बहुजनपदीय एवं बहुविभागीय कार्यक्रम है, जिसमें सभी विभागों की प्रभावी सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित करें तथा उसका मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, जिससे कार्यक्रमों के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।
सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए कि उनके पास उपलब्ध छोटे-बड़े सभागार एवं अन्य संसाधनों को एक माह तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए यथासंभव उपलब्ध कराया जाए। 15 सितंबर से पहले सभी पार्षदों की बैठक आयोजित कर उन्हें अभियान की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि वार्ड स्तर तक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- *डिजिटल बोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी और ‘सेवा सेतु’ कैंप के माध्यम से योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार*
मंत्री श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में उपलब्ध डिजिटल बोर्डों पर संस्कृति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो चलाए जाएं, जिनके माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए।जहां नगर निकायों अथवा ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं, वहां भी विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। सभी नगर निकायों में ‘सेवा सेतु’ के अंतर्गत कैंप लगाकर पात्र नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें अभियान से जोड़ा जाए तथा दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए।
- *17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन, घाटों की सजावट एवं प्रमुख भवनों को रोशनी से सजाने के निर्देश*
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामनाएं एवं अपना आशीर्वाद देने के लिए प्रेरित किया जाए। नगरों में स्थित स्कूल, कॉलेज, बड़े अस्पताल एवं प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों को प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ एवं सुंदर रखा जाए तथा कार्यालय की स्वच्छता की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुनिश्चित की जाए।
- *वाराणसी से वडनगर यात्रा मार्ग पर विशेष स्वच्छता अभियान, 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक*
बैठक में निर्देश दिए गए कि वाराणसी से वडनगर, गुजरात तक प्रस्तावित यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी जिलों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की जाए। यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जाए। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अनवरत विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। सभी विभागों एवं स्थानीय निकायों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की डिजिटल रिकॉर्डिंग कर अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा मिले। मंत्री जी ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंताओं एवं अधीक्षण अभियंताओं को अन्य विभागों के साथ समन्वय कर विद्युत संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन की नियमित निगरानी करने तथा दिन के समय अनावश्यक रूप से स्ट्रीट लाइटें चालू न रहने देने के निर्देश दिए।
बैठक में डीजी विजिलेंस डॉ रामकृष्ण स्वर्णकार, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल, एम डी मयूर माहेश्वरी, प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरु प्रसाद,सचिव अनुज कुमार झा, रविंद्र कुमार, श्रीमती ऋतु सुहास, ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक, नोएडा प्राधिकरण, यूपीपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जिलों के संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।
लखनऊ में आरईवी एक्सपो-2026 का भव्य शुभारंभ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया उद्घाटन
- स्वच्छ ऊर्जा और ई-मोबिलिटी के नवाचारों का मंच बना आरईवी एक्सपो-2026
- हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा आरईवी एक्सपो-2026

लखनऊ। वृन्दावन ग्राउंड, लखनऊ में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं इलेक्ट्रिक वाहन प्रदर्शनी-2026 (आरईवी एक्सपो-2026) के तृतीय संस्करण का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य एवं विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने संयुक्त रूप से किया।
उद्घाटन के अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं विधान परिषद सदस्य राम चंद्र प्रधान ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में विकसित नवीन तकनीकों, उत्पादों एवं समाधानों की जानकारी प्राप्त की तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संघ के अध्यक्ष सौरभ शर्मा एवं उमंगोट सोलर के संस्थापक गोपाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं प्रदर्शनी के आयोजक अंचल दीक्षित एवं  विपिन लोहिया ने आयोजन के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरईवी एक्सपो-2026 स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी एवं विद्युत वाहनों के क्षेत्र को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। प्रदर्शनी में नवीकरणीय ऊर्जा एवं विद्युत वाहन क्षेत्र से जुड़ी नवीन तकनीकों और उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है।
आयोजन का उद्देश्य स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता के क्षेत्र में नवाचार, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं को प्रोत्साहित करना है। आरईवी एक्सपो-2026 भारत को स्वच्छ, हरित, आत्मनिर्भर एवं सतत भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के संकल्प को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास है।
यूपी रेरा ने छह जिलों की 13 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी मंजूरी

₹2,380 करोड़ के निवेश से बनेंगी 4,724 आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां, निवेश में बाराबंकी और इकाइयों में लखनऊ सबसे आगे

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने राज्य के छह जिलों में 13 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में करीब ₹2,380.04 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और इनके जरिए 4,724 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

इन परियोजनाओं से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। परियोजनाओं को मंजूरी यूपी रेरा मुख्यालय में हुई प्राधिकरण की 212वीं और 213वीं अथॉरिटी बैठकों में दी गई। बैठकों की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने की। विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार करने के बाद प्राधिकरण ने इन्हें मंजूरी प्रदान की।

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत परियोजनाओं का विकास रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी और तय समय-सीमा में कराने पर जोर रहेगा। इससे घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका भरोसा और मजबूत होगा।

- बाराबंकी में सबसे ज्यादा निवेश

स्वीकृत परियोजनाओं में अनुमानित निवेश के मामले में बाराबंकी सबसे आगे रहा। जिले में ₹751.42 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में कुल 591 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- इकाइयों के मामले में लखनऊ आगे

वहीं, नई बनने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से लखनऊ सबसे आगे है। जिले में एक आवासीय परियोजना को मंजूरी मिली है। इसमें करीब ₹385.76 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और परियोजना के तहत 1,392 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- वाराणसी में तीन परियोजनाओं को मंजूरी

वाराणसी में तीन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में कुल ₹750.24 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा। इनके माध्यम से 1,189 आवासीय इकाइयों का विकास किया जाएगा।

- गाजियाबाद में 864 इकाइयां बनेंगी

गाजियाबाद में ₹286.27 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है जिसमें दो व्यावसायिक व एक आवासीय परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं के तहत कुल 864 इकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है।

- गौतमबुद्ध नगर में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं

गौतमबुद्ध नगर में एक आवासीय और एक व्यावसायिक परियोजना को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में करीब ₹186 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और कुल 564 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- आगरा में दो आवासीय परियोजनाएं

आगरा में ₹20.35 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से 124 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- प्रदेश सरकार की नीतियों से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिल रहा प्रोत्साहन

प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ रही गतिविधियों के पीछे राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और सरल प्रक्रियाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा आवास, शहरी विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में नई रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है। 13 परियोजनाओं में प्रस्तावित ₹2,380.04 करोड़ के निवेश से निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ेंगी। इसका लाभ निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग और इससे जुड़े अन्य कारोबारों को भी मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

- पारदर्शिता और समयबद्ध विकास पर जोर

यूपी रेरा का कहना है कि पंजीकृत परियोजनाओं का विकास निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अनुसार हो, यह सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। परियोजनाओं की निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया और नियमों के पालन के जरिए घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा रही है। प्राधिकरण का प्रयास है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रमोटरों के लिए भी बेहतर और स्पष्ट व्यवस्था बने तथा घर खरीदारों का भरोसा लगातार मजबूत हो।

- यूपी रेरा अध्यक्ष ने कहा :

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी देने के साथ उनकी प्रभावी निगरानी से घर खरीदारों और प्रमोटरों दोनों के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी रेरा आगे भी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करेगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ प्रदेश में संतुलित, व्यवस्थित और भरोसेमंद रियल एस्टेट विकास को आगे बढ़ाएगा।

यूपी के कानून-व्यवस्था मॉडल को समझे केरल के पत्रकार, शिक्षा व्यवस्था पर हुई चर्चा
- ‘मीडिया संवाद’ में दोनों राज्यों के पत्रकारों ने साझा किए अनुभव, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मिला बढ़ावा

लखनऊ। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ और उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में केरल के मीडिया प्रतिनिधियों के साथ ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद का केंद्र दोनों राज्यों की शासन व्यवस्था, विकास, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया की कार्यप्रणाली से जुड़े अनुभवों को साझा करना रहा। कार्यक्रम के जरिए उत्तर प्रदेश और केरल के पत्रकारों को एक-दूसरे के प्रदेशों की व्यवस्थाओं और चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का आयोजन सूचना निदेशक विशाल सिंह और पीआईबी लखनऊ के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ल के दिशा-निर्देशन में किया गया। इस पहल का उद्देश्य दोनों राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवों के आदान-प्रदान के जरिए आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करना था। चर्चा में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
- यूपी की कानून- व्यवस्था में केरल के पत्रकारों की दिलचस्पी
पीआईबी लखनऊ के नेतृत्व में केरल के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल इन दिनों लखनऊ दौरे पर है। मीडिया संवाद के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश की संस्कृति, विकास यात्रा और शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में रुचि दिखाई।केरल के पत्रकारों ने खासतौर पर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं और किए गए प्रयासों की जानकारी ली। इस दौरान सरकार और आम जनता के बीच संवाद, शिकायतों के समाधान तथा फीडबैक लेने की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने यह जानने का प्रयास किया कि प्रदेश में कानून- व्यवस्था से जुड़े विषयों पर प्रशासनिक स्तर पर किस प्रकार काम किया जाता है।
- केरल की शिक्षा व्यवस्था जानना चाहते हैं यूपी के पत्रकार
संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने केरल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में केरल के प्रदर्शन, इसके पीछे काम करने वाली व्यवस्थाओं और बेहतर परिणाम हासिल करने के प्रमुख कारणों को समझने को लेकर सवाल किए।
दोनों राज्यों के पत्रकारों ने अपने-अपने प्रदेशों में मीडिया के कामकाज, स्थानीय मुद्दों की कवरेज और जनसरोकार से जुड़े विषयों को समाचारों में स्थान देने के तरीकों पर भी विचार साझा किए। चर्चा में यह बात सामने आई कि अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मीडिया दोनों राज्यों में जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सिनेमा के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी चर्चा
मीडिया संवाद में पत्रकारिता के अलावा सिनेमा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बीच बढ़ते संबंधों, दोनों क्षेत्रों की फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा के माध्यम से उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में पीआईबी केरल की निदेशक वी. पार्वती और उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के अपर निदेशक सूचना अरविंद कुमार मिश्रा सहित दोनों राज्यों के विभिन्न प्रमुख मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। इस संवाद को दोनों राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों के बीच सीधे संपर्क, अनुभव साझा करने और एक-दूसरे के सामाजिक-सांस्कृतिक एवं विकासात्मक पहलुओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।
बिजली कटौती की समस्या को लेकर नील मणि ने अधिशासी अभियंता को सौंपा पत्र

रमेश दूबे

धनघटा। नगर पंचायत हैसर बाजार धनघटा क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर भाजपा नेता नील मणि ने अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग संत कबीर नगर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण एवं विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए मांग पत्र प्रस्तुत किया।

नील मणि ने विभिन्न वार्डों में 11,000 वोल्ट की विद्युत व्यवस्था को LT 440 वोल्ट में परिवर्तित किए जाने की मांग रखी, ताकि बिजली आपूर्ति को सुचारु एवं बेहतर बनाया जा सके। इसके साथ ही विभिन्न वार्डों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि से संबंधित समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करना और आम नागरिकों को निर्बाध एवं सुचारु बिजली उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों से समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए जल्द समाधान कराने का आग्रह किया।
गोवध जैसी गंभीर घटना पर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर का कड़ा रुख कर्तव्य में घोर लापरवाही पर उपनिरीक्षक एवं आरक्षी निलम्बित
रमेश दूबे

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना द्वारा अपराध नियंत्रण, अपराधियों की सतत निगरानी, प्रभावी बीट पुलिसिंग तथा संवेदनशील प्रकृति के अपराधों की रोकथाम के संबंध में अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लगातार स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद थाना धनघटा क्षेत्र के संबंधित चौकी क्षेत्र में गोवध जैसी गंभीर घटना घटित होने के मामले में कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई की गई है। उक्त प्रकरण में उ0नि0 श्री वीर बहादुर यादव तथा का0 प्रवीण कुमार थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है। निलम्बन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासन एवं उच्चाधिकारियों द्वारा अपराध नियंत्रण, अपराधियों की सतत निगरानी, बीट व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने तथा संवेदनशील प्रकृति के अपराधों की रोकथाम हेतु समय-समय पर स्पष्ट एवं कड़े निर्देश निर्गत किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित चौकी क्षेत्र में गोवध जैसी गंभीर घटना घटित होना उनके कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता को परिलक्षित करता है। पुलिस अधीक्षक महोदय ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के संबंध में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी अपने क्षेत्र में अपराधियों की निगरानी, बीट व्यवस्था को प्रभावी रखने तथा संवेदनशील घटनाओं की रोकथाम के लिए पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ कार्य करें। कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निलम्बन अवधि में दोनों पुलिसकर्मी पुलिस लाइन, संतकबीरनगर से सम्बद्ध रहेंगे तथा सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। दोनों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही नियमानुसार प्रचलित की जाएगी।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए : केशव प्रसाद मौर्य

पीएम आवास योजना-ग्रामीण के 6.18 लाख आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत कर पूर्ण कराने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जनपदों में अभियान चलाकर मानव दिवस सृजन में बढ़ोतरी के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के कार्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, जिससे योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करते हुए विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित जनपद और विकसित ग्राम पंचायत के संकल्प को साकार करने में प्रभावी भूमिका निभा सके। उन्होंने  कहा कि यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी योजना के कार्यों की नियमित समीक्षा करें
श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण मे प्रदेश को 6.18 लाख आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सभी जनपद इन आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत करते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत बेसहारा पात्र महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा अन्य प्राथमिकता श्रेणी के पात्र परिवारों, जिन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें विशेष अभियान चलाकर चिन्हित किया जाए और पात्रता के अनुसार योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम चौपालों में योजना की पात्रता एवं अन्य शर्तों की विस्तार से जानकारी देते हुए पात्र व्यक्तियों को चिन्हित करने तथा उन्हें आवास उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि विकसित भारत-जी राम जी योजना की महिला श्रमिकों तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
उन्होंने  निर्देश दिए हैं कि जिन स्वयं सहायता समूहों  को अभी तक सीसीएल अथवा बैंक क्रेडिट की सुविधा नहीं मिली है, ऐसे सभी पात्र समूहों को शत-प्रतिशत सीसीएल उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।  यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करें। प्रदेश में नए स्वयं सहायता समूहों के गठन के कार्य में भी तेजी लाई जाए। समूह सखियों के मानदेय में वृद्धि के लिए अन्य राज्यों में लागू बेहतर मॉडलों का अध्ययन कर अपेक्षित कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत कैडर के मानदेय का भुगतान भी अनिवार्य रूप से समय से सुनिश्चित किया जाए।
श्री मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि टीएचआर प्लांट्स  को सोलर एवं खाद्य संस्करण सब्सिडी का पूरा-पूरा लाभ उठाते हुए प्लांट्स को और अधिक प्रभावी एवं ऊर्जा दक्ष बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
उप मुख्यमंत्री ने ग्राम चौपालों को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा है कि ग्राम चौपालों का त्रैमासिक रोस्टर तैयार कर माननीय सांसद एवं विधायकगण के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित लोगों को भी उपलब्ध कराया जाए। ग्राम चौपालों की नियमित समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि इनमें ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी प्रभावी ढंग से हो।
उन्होंने प्रदेश में निर्मित सभी अमृत सरोवरों की साफ-सफाई एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अमृत सरोवरों को स्वच्छ, उपयोगी एवं बेहतर स्वरूप में रखा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में इनके निर्माण का उद्देश्य पूर्ण हो सके।
श्री मौर्य ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में दृष्टि की बैठक अभी तक नहीं हुई है, वहां तत्काल बैठक आयोजित कर उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर कार्य करने वाले जनपदों एवं विकासखंडों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले जनपदों और विकासखंडों को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे अन्य क्षेत्र भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने कार्यों में सुधार कर सकें।