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अमरपाल मौर्य के प्रथम आगमन पर भव्य स्वागत, जानें 2027 के चुनाव को लेकर क्या कहा ?
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य के पहली बार लखनऊ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। चारबाग रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच उनका अभिनंदन किया। इस दौरान पार्टी के समर्थन में नारे भी लगाए गए।
स्वागत कार्यक्रम के बाद अमरपाल मौर्य ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित अभिनंदन समारोह में प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
समारोह को संबोधित करते हुए अमरपाल मौर्य ने कहा कि भाजपा का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछड़े वर्ग, गरीब, वंचित और युवा वर्ग के सशक्तीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
मौर्य ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा गरीब परिवारों को आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, नल से जल और जनधन जैसी योजनाओं से जोड़ना सामाजिक न्याय की दिशा में अहम पहल है। उनके मुताबिक, पिछड़े वर्ग को विकास और शासन की मुख्यधारा में भागीदारी दिलाने का काम भाजपा सरकारों ने किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछड़े वर्गों के कल्याण और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक बिना भेदभाव पहुंचे।
अमरपाल मौर्य ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद इन दलों ने पिछड़े वर्ग के हित में स्थायी और प्रभावी काम नहीं किया तथा इस वर्ग को मुख्य रूप से वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछड़े वर्ग को सम्मान, अवसर और राजनीतिक भागीदारी देने का प्रयास किया है।
उन्होंने पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं से केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और भाजपा की जीत के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछड़े वर्ग के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण की दिशा में लगातार काम हुआ है। उन्होंने कहा कि मोर्चा प्रदेश के प्रत्येक बूथ तक संगठन को मजबूत करने के साथ पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भूमिका निभाएगा।
प्रदेश महामंत्री संजय राय ने कहा कि भाजपा की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। पिछड़ा वर्ग मोर्चा गांव से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटा है। उन्होंने कहा कि अमरपाल मौर्य के मार्गदर्शन में मोर्चा की गतिविधियों को और गति मिलेगी तथा आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कार्यकर्ताओं को अभी से पूरी ऊर्जा के साथ जुटना होगा।
कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और ब्रज बहादुर, पूर्व प्रदेश महामंत्री अनूप गुप्ता, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रामचन्द्र प्रधान व संजय पटेल, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, जिला अध्यक्ष विजय मौर्य समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सामान्य वर्ग की बहन बेटियो के सम्मान और सुरक्षा के साथ किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं :नम्रता तिवारी राष्ट्रीय प्रवक्ता सवर्ण आर्मी भारत
लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता सवर्ण समाज के महिलाओं के बीच  कहा हमारी आवाज उन लोगों तक पहुंचे जो महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ खड़े है हमारी बहन बेटियो के सम्मान   और सुरक्षा के साथ किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं होना चाहिए चुप्पी नहींन-न्याय कि आवाज बुलंद करनी होगी कानून सबके लिए समान हो और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो। अब सवाल सीधे होगे कड़वा सवाल ,सीधी मांग यूजीसी रेगुलेशन 2026 वापस होना चाहिए यह एक वर्ग सामान्य  को जन्म जाती अपराधी घोषित कर रहा है शोषण करता बता रहा है सामान्य वर्ग की बेटियों को उच्च शिक्षा से बंचित कर रहा है।

अगर दलित वर्ग का लड़का सामान्य वर्ग को बेटी के साथ जबर्दस्ती करने का प्रयास करे उसकी लज्जा को भंग करने का प्रयास करें उसका विरोध सामान्य वर्ग की लड़की करती है तो इसकी शिकायत की जाय कि तो यूजीसी के तहत जातीय भेदभाव मान कर सामान्य वर्ग की बेटी का कैरियर समाप्त हो जायेगा लेकिन सामान्य वर्ग की बेटी के साथ जो हुआ वह जातीय भेद भाव नहीं माना जाएगा यह कैसा समानता है कानून की तागत निर्दोष को डराने के लिए नहीं है दोषी को सजा देने के लिए होनी चाहिए न्याय के नाम पर अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है सरकार को वोट बैंक नहीं न्याय और संविधान के मूल सिध्दांतों के आधार पर व्यवस्था चलानी चाहिए SCSTACT का खुल कर दुरुप्रयोग किया जा रहा है एससीएसटी एक्ट सुरक्षा के लिए बना था इसकी आड़ में निर्दोष को फंसा कर धन उगाही का जरिए बनाया गया है ।

क्या यही न्याय है जिसे किसी भी परिस्थिति में सवर्ण समाज स्वीकार नहीं करेगा गा ,गरीबी जाति देख कर नहीं आती है हर वर्ग हर जाती में गरीब होते हैं आरक्षण जाती के आधार पर नहीं होना चाहिए सवर्ण ब्राह्मण ठाकुर लाला वैश्य टाटिल लग जाने से अरबपति हो गया क्या यही न्याय है क्या यही समानता है,आरक्षण में सुधार हो यूजीसी काला कानून वापस हो के लिए जंतर मंतर दिल्ली पर प्रदर्शन करने गए सवर्ण समाज के लोगों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरता पूर्वक कार्यवाही किया महिलाओं बच्चों तक को घसीटा गया क्या सवर्ण अपनी हक के लिए आवाज नहीं उठा सकता है सुरक्षा के नाम पर अधिकारी का हनन स्वीकार नहीं, और न्याय के नाम पर पक्षपात भी नहीं न्याय जाती देख कर नहीं हम डरेंगे नहीं नफ़रत भी नहीं फैलाएंगे संवैधानिक तरीके अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ कर आरक्षण में सुधार यूजीसी काला कानून वापस कराएगी साथ ही SCSTACT को समाप्त कराया जाएगा न्याय चाहिए सुरक्षा चाहिए सम्मान चाहिए आखिर कार सवर्ण भी इस देश का नागरिक है जाती के आधार पर भेद भाव बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
योगी सरकार की सौगात, 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शुरू
- अक्टूबर-नवंबर में 50 हजार स्नातक छात्राओं को स्कूटी देने का भी ऐलान

लखनऊ। रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि स्नातक स्तर पर पढ़ने वाली 50 हजार छात्राओं को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना की शुरुआत की, जिसके तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाओं की भूमिका अब घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। महिलाएं आर्थिक गतिविधियों, कारोबार, तकनीक और नेतृत्व के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने इसे “चूल्हे से चेक, चेक से कारोबार और कारोबार से टेक्नोलॉजी तक” पहुंचने वाली महिला सशक्तीकरण की यात्रा बताया।

- 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को आजीवन मुफ्त यात्रा
मुख्यमंत्री ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की प्रदेश की महिलाएं परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर 27 से 29 अगस्त तक महिलाओं और उनके एक सहयोगी को भी निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा दी जा रही है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और महिला स्वावलंबन का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी भावना के अनुरूप प्रदेश के कई जिलों में कामकाजी महिलाओं के लिए अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर छात्रावास बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक छात्रावास में 500 कामकाजी महिलाओं के निःशुल्क रहने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

- महिला कार्यबल में भागीदारी 36 प्रतिशत पहुंची
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की बेटियां सुरक्षित माहौल में काम कर रही हैं और नाइट शिफ्ट में भी रोजगार के अवसरों का लाभ उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति केंद्र, एआई आधारित सेफ सिटी नेटवर्क, 1090 और 112 जैसे तंत्र काम कर रहे हैं। महिला बीट पुलिस, हेल्पडेस्क, पिंक बूथ और वन स्टॉप सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

- पुलिस बल में 50 हजार महिला कर्मियों का लक्ष्य
योगी ने बताया कि 2017 में प्रदेश पुलिस में करीब 10 हजार महिला कर्मी थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 45 हजार हो गई है। पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या करीब 50 हजार तक पहुंच जाएगी।उन्होंने महिला पीएसी की तीन बटालियनों का भी उल्लेख किया, जो लखनऊ में उदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई और बदायूं में अवंती बाई के नाम से स्थापित की गई हैं।

- योजनाओं से लेकर संपत्ति के अधिकार तक महिलाओं को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों को योजनाओं से जोड़ा है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, सामूहिक विवाह योजना, पेंशन योजनाएं, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं को उनके घर का मालिकाना अधिकार भी मिला है। सरकार के अनुसार करीब 65 लाख परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री ने उज्ज्वला योजना, हर घर शौचालय, बिजली, नल से जल और डीबीटी जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे महिलाओं के जीवन में सुविधा, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा बढ़ी है।

- 8 हजार न्याय पंचायतों में महिला डिजिटल उद्यमी
योगी ने कहा कि 8 हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल उद्यमियों की संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी आधी रखने का लक्ष्य है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और खुदरा कारोबार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बीसी सखी और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं अब गांवों में बैंकिंग सेवाओं से लेकर कृषि तकनीक तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

- चार लाख से अधिक महिलाएं दुग्ध क्षेत्र में सक्रिय
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश के 31 जिलों में बलिनी, काशी, सामर्थ्य, सृजिनी और बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी जैसी संस्थाओं से चार लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, प्रदर्शनियों और डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शी-मार्ट जैसे मॉडल के जरिए स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है।

- फैसले लेने की प्रक्रिया में भी बढ़े महिलाओं का प्रतिनिधित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना किसी प्रकार की कृपा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का जरूरी हिस्सा है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन, सेना, शिक्षा, खेल और स्टार्टअप तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीत रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व और अवसर मिले।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, अवनीश सिंह और उमेश द्विवेदी, विधायक नीरज बोरा, अमरेश कुमार और ओपी श्रीवास्तव समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी, 20 हजार से अधिक एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न को मिलेगा लाभ; स्टाइपेंड में 108 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों में रोटेटिंग इंटर्नशिप कर रहे एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड को 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश में रोटेटिंग इंटर्नशिप कर रहे 20 हजार से अधिक इंटर्न डॉक्टरों को सीधा लाभ मिलेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक इंटर्न को हर महीने 13 हजार रुपये अतिरिक्त स्टाइपेंड मिलेगा।

12 हजार से बढ़कर 25 हजार हुआ स्टाइपेंड

सरकार के मुताबिक इंटर्न डॉक्टरों को पहले 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता था। वर्ष 2021 में इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया था। अब एक बार फिर इसमें बड़ा इजाफा करते हुए स्टाइपेंड 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।इस तरह मौजूदा 12 हजार रुपये के स्टाइपेंड की तुलना में 108 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में तय राशि के मुकाबले अब इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 13 हजार रुपये अधिक मिलेंगे।

अस्पतालों में निभाते हैं अहम जिम्मेदारी

रोटेटिंग इंटर्नशिप के दौरान एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे ओपीडी, वार्ड, आपातकालीन सेवाओं और रात्रिकालीन ड्यूटी में मरीजों की देखभाल में योगदान देते हैं।ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से इंटर्न डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर तरीके से निभा सकेंगे।

स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी

इंटर्न डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सकीय सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम रहती है। सरकार के इस फैसले को इंटर्न डॉक्टरों के लिए आर्थिक राहत के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 25 लाख युवाओं को मुफ्त टैबलेट, बुजुर्गों से दुर्व्यवहार पर संपत्ति से बेदखली का प्रावधान

स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के लिए 2,374.60 करोड़ का बजट, वरिष्ठ नागरिकों की शिकायत पर 30 दिन में सुनवाई का प्रावधान



लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े दो अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वहीं, बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा या दुर्व्यवहार करने वाली संतान और आश्रित रिश्तेदारों के खिलाफ संपत्ति से बेदखली की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है।

25 लाख युवाओं को मिलेंगे मुफ्त टैबलेट

कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाएंगे और पात्र युवाओं को टैबलेट निशुल्क दिए जाएंगे।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और आईटीआई सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को लाभ मिलेगा।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि टैबलेट मिलने से युवाओं को ऑनलाइन पढ़ाई, कौशल प्रशिक्षण, सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं की डिजिटल क्षमता और रोजगारपरक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

बुजुर्गों से दुर्व्यवहार पर संपत्ति से बेदखली का रास्ता साफ

कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़े जाएंगे।

नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई संतान या आश्रित रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिक का भरण-पोषण नहीं करता या उसके साथ दुर्व्यवहार करता है, तो बुजुर्ग संबंधित व्यक्ति को अपनी संपत्ति से बेदखल कराने की कार्रवाई कर सकेंगे।

30 दिन में होगी शिकायत की सुनवाई

बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है। वरिष्ठ नागरिक ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत कर सकेंगे। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के भीतर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों की मासिक रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी।सरकार जल्द ही वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी करेगी। इसका उद्देश्य उन बुजुर्गों को मदद उपलब्ध कराना है, जो स्वयं अपनी शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में नहीं हैं।

सरकार के अनुसार, नियमों में यह बदलाव वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने, उनके संपत्ति संबंधी अधिकारों की रक्षा करने और उपेक्षा व दुर्व्यवहार की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विकासखंड स्तर पर विशेष शिविर लगाकर किसानों को दिलाएं KCC: कृषि मंत्री
- पात्र KCC धारकों को फसल बीमा से जोड़ने के निर्देश, खरीफ में ग्राम पंचायत स्तर तक चलेगा जागरूकता अभियान

लखनऊ। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विकासखंड स्तर पर विशेष अभियान और शिविर लगाकर पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र KCC धारकों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाने और किसानों को फसल क्षति की स्थिति में समय पर आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
विधान भवन स्थित समिति कक्ष-8 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और KCC योजना की समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 83.90 लाख KCC के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

- 56.31 लाख KCC धारकों को बीमा से जोड़ने का लक्ष्य
समीक्षा में सामने आया कि प्रदेश में करीब 1.10 करोड़ KCC खातों के मुकाबले अभी 17.07 लाख किसानों को बीमा कवर मिला है। 39 लाख खाते अपात्र श्रेणी में हैं, जबकि 56.31 लाख खातों को बीमा योजना से जोड़ा जाना बाकी है।
कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि बैंक, बीमा कंपनियां और कृषि विभाग आपसी समन्वय से विकासखंड स्तर पर विशेष शिविर लगाएं। ‘ऑप्ट आउट’ करने वाले किसानों को छोड़कर पात्र KCC धारकों को फसल बीमा का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाए।

- प्रीमियम जमा होने के 48 घंटे में बीमा कंपनियों को भेजें राशि
शाही ने बैंकों को निर्देश दिया कि किसानों के KCC खातों से बीमा प्रीमियम की राशि काटे जाने के दो दिन के भीतर संबंधित बीमा कंपनियों को भेज दी जाए, ताकि किसानों के बीमा कवरेज में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने खरीफ-2026 के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर फसल बीमा योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने और किसानों को योजना की शर्तों एवं लाभों की जानकारी देने के भी निर्देश दिए।

- फसल नुकसान का तुरंत आकलन करने पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रतिकूल मौसम के कारण फसलों को नुकसान होने की स्थिति में उसका आकलन जल्द कराया जाए और पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 83.90 लाख KCC जारी या नवीनीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 28.43 लाख KCC ही बनाए या नवीनीकृत किए जा सके हैं। लक्ष्य की धीमी प्रगति पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

- पिछले सीजन में भी किसानों को मिली क्षतिपूर्ति
बैठक में बताया गया कि खरीफ-2025 में बीमित 20.63 लाख किसानों में से अब तक 7.26 लाख किसानों को 806.98 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। वहीं रबी 2025-26 में बीमित 18.57 लाख किसानों में से 1.66 लाख किसानों को 134.12 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी, निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह सहित उद्यान विभाग, संस्थागत वित्त विभाग, बैंकों, नाबार्ड, सीएससी और बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समान पक्षी विहार के पास पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 6 हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को

- कैबिनेट ने ग्रामसभा की भूमि पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी, पक्षी संरक्षण के साथ पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मैनपुरी के प्रसिद्ध समान पक्षी विहार के निकट पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 6 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रस्तावित भूमि मैनपुरी की किशनी तहसील के ग्राम समान में पक्षी विहार के निकट स्थित है। ग्राम समाज की यह भूमि ऊसर श्रेणी की है। पर्यटन विकास और पक्षी विहार के आसपास आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए इसे पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा।

- रामसर साइट है समान पक्षी विहार
जयवीर सिंह ने बताया कि समान पक्षी विहार उत्तर प्रदेश के प्रमुख आर्द्रभूमि क्षेत्रों में शामिल है और इसे 2019 में रामसर साइट के रूप में मान्यता मिली थी। यहां सारस क्रेन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।
गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित मौसमी झील के आसपास फैला यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। समान गांव में स्थित यह पक्षी विहार आगरा-मैनपुरी-फर्रुखाबाद मार्ग से जुड़ा है। मैनपुरी शहर से इसकी दूरी करीब 30 किलोमीटर है। सड़क के साथ रेल मार्ग से भी यहां पहुंचा जा सकता है।

- बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी के लिए खास जगह
मंत्री के अनुसार संरक्षित रामसर क्षेत्र करीब 5.25 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह विशेष रूप से क्रेन और अन्य प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पक्षी दर्शन और फोटोग्राफी के साथ नाव की सवारी के जरिए जलाशय में मौजूद पक्षियों को करीब से देखने का अवसर भी मिलता है।

- पर्यटकों के लिए विकसित होंगी सुविधाएं
भूमि पर्यटन विभाग को मिलने के बाद समान पक्षी विहार के आसपास पर्यटन अवस्थापना से जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा। इसके साथ पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सकेगा।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि बेहतर सुविधाओं के विकास से स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि की संभावना है। ग्रामसभा की भूमि निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने से राज्य सरकार पर इस मद में कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

- प्रदेश के कई पक्षी विहार आकर्षण का केंद्र
जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में समान के अलावा चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार, सैंडी, बखीरा, विजय सागर, लाख बहोसी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, सुरहा ताल, ओखला, सूर सरोवर और पटना पक्षी विहार समेत कई महत्वपूर्ण पक्षी विहार हैं। शरद ऋतु में इन क्षेत्रों में देश-विदेश से विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।
सरकार का प्रयास है कि इन प्राकृतिक स्थलों पर संरक्षण के साथ पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए, जिससे प्रदेश में इको-टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग को भी बढ़ावा मिल सके।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता ने ज्ञान और तकनीकी विकास की प्राचीन परंपरा को दिखाया

- पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के छठवें दिन भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विशेषज्ञ ने दिया व्याख्यान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से आयोजित ‘पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम-2026’ के छठवें दिन मंगलवार को सरस्वती-सिंधु सभ्यता और प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर तथा चंडीगढ़ के संग्रहालय एवं पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने ‘सरस्वती-सिंधु सभ्यता: भारतीय ज्ञान परंपरा के नए आयाम’ और ‘प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषयों पर प्रतिभागियों से संवाद किया।
व्याख्यान के दौरान डॉ. परमार ने पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन भारत में ज्ञान परंपरा के विकास को समझाया। उन्होंने बताया कि उस दौर में विकसित ज्ञान केवल सैद्धांतिक नहीं था, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, कृषि, उत्पादन, तकनीक और सामाजिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों पर भी आधारित था।

- नगर नियोजन से जल प्रबंधन तक पर चर्चा
डॉ. परमार ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता से जुड़े पुरातात्त्विक प्रमाणों के माध्यम से नगर नियोजन, वास्तुकला, जल प्रबंधन, जल निकासी, मापन-पद्धति, कृषि, शिल्प, धातुकर्म और व्यापार जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने धोलावीरा की जल-संग्रह और जल प्रबंधन व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की सुव्यवस्थित नगरीय संरचना, जल निकासी प्रणाली और मानकीकृत बाट-माप तत्कालीन समाज की तकनीकी दक्षता और पर्यावरण के अनुरूप जीवन जीने की क्षमता को दर्शाते हैं।

- प्रायोगिक प्रदर्शन से समझीं प्राचीन तकनीकें
व्याख्यान की खास बात विषय से जुड़े पुरातात्त्विक साक्ष्यों और ज्ञान प्रणालियों का प्रायोगिक प्रदर्शन रहा। इसके जरिए प्रतिभागियों को प्राचीन ज्ञान, तकनीकी कौशल और पुरातात्त्विक प्रमाणों के बीच संबंधों को व्यावहारिक तरीके से समझने का अवसर मिला। प्रदर्शन ने कार्यक्रम को संवादात्मक और अधिक रोचक बनाया।

- 150 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र परमार का पौधा और स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता और प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन देश के वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय विकास के ऐतिहासिक पक्षों को समझने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ के शोधपरक व्याख्यान और प्रायोगिक प्रदर्शन से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और पुरातात्त्विक विरासत को समग्र दृष्टि से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और 50 से अधिक ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में श्री राम विनय ने मुख्य वक्ता, निदेशक, अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया। मंच संचालन डॉ. मनोज कुमार यादव ने किया।
बस हादसों के पीड़ितों के लिए आर्थिक सहारा बनी ‘यात्री राहत योजना’
- योगी सरकार ने नौ वर्षों में 342 मामलों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी, गैर-यात्रियों को भी योजना में किया शामिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में प्रभावित यात्रियों और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली ‘यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना’ पीड़ित परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच 342 मृत्यु और घायल होने के मामलों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले के दो वित्तीय वर्षों 2015-16 और 2016-17 में आठ मृत्यु प्रकरणों में 40 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। वहीं 2017-18 से 2025-26 के बीच नौ वर्षों में 322 मृत्यु मामलों में करीब 17.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा घायल यात्रियों के 20 मामलों में 24.37 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई।

- 2017 के बाद बढ़ा सहायता का दायरा
योजना के तहत बीते वर्षों में दुर्घटना पीड़ितों को दी गई सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 78 मृत्यु मामलों में करीब 3.68 करोड़ रुपये, 2021-22 में 48 मामलों में लगभग 2.37 करोड़ रुपये, 2017-18 में 42 मामलों में करीब 2.10 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
इसी तरह 2023-24 में 32 मृत्यु प्रकरणों में 1.85 करोड़ रुपये और 2025-26 में 27 मामलों में करीब 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक राहत उपलब्ध कराना योजना का प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए चालकों-कर्मचारियों की निगरानी और बसों की नियमित जांच पर भी जोर दिया जा रहा है।

- मौत पर 7.50 लाख रुपये तक की सहायता
योजना के संशोधित प्रावधानों के तहत दुर्घटना में वयस्क यात्री की मृत्यु होने पर 7.50 लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है। आधा टिकट लेकर यात्रा करने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपये और नियमानुसार निःशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर करीब 1.87 लाख रुपये की राहत राशि का प्रावधान है।
इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रितों को तत्काल आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

- घायलों के इलाज के लिए भी आर्थिक मदद
दुर्घटना में घायल यात्रियों को भी योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है। सामान्य चोट की स्थिति में उपचार के लिए 10 हजार रुपये तक और गंभीर चोट में 25 हजार रुपये तक की प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
यदि प्रारंभिक सहायता से अधिक इलाज का खर्च आता है तो प्रमाणित चिकित्सा बिल और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी का स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के बाद आगे की सहायता की प्रक्रिया की जाती है।
योजना में चोट की गंभीरता के आधार पर अधिकतम सहायता की सीमा भी तय है। सामान्य चोट में 25 हजार रुपये, गंभीर चोट में एक लाख रुपये और अति गंभीर चोट अथवा शरीर के 50 प्रतिशत से अधिक जलने जैसी स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान है।

- राहगीरों को भी योजना में मिली जगह
योजना का दायरा बढ़ाते हुए अप्रैल 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया। अब ऐसे राहगीर या अन्य व्यक्ति भी इसके दायरे में हैं, जो बस में सवार नहीं थे, लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम या अनुबंधित बस की दुर्घटना में घायल या मृत हो जाते हैं।
ऐसे गैर-यात्री की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, पुलिस जांच और परिवहन निगम की जांच रिपोर्ट में यदि दुर्घटना के लिए संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो योजना के तहत आर्थिक सहायता देय नहीं होगी।
सरकार और परिवहन निगम का जोर दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ बस संचालन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी है, ताकि सड़क हादसों की संख्या में कमी लाई जा सके।
रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार ने बुजुर्ग महिलाओं को दी बड़ी सौगात
- यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा

- 27 में से 24 प्रस्तावों को मंजूरी, लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना को भी मिली स्वीकृति

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 27 में से 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ को मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में जीवनभर मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।

- एक करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ
सरकार के इस फैसले से प्रदेश की एक करोड़ से अधिक बुजुर्ग महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। यात्रा के दौरान पात्र महिलाओं को अपनी आयु और पहचान प्रमाणित करने के लिए आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र दिखाना होगा।
कैबिनेट का यह फैसला महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ वरिष्ठ नागरिक महिलाओं की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले को महिलाओं के लिए बड़ी सौगात के तौर पर देखा जा रहा है।