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विकासखंड स्तर पर विशेष शिविर लगाकर किसानों को दिलाएं KCC: कृषि मंत्री
- पात्र KCC धारकों को फसल बीमा से जोड़ने के निर्देश, खरीफ में ग्राम पंचायत स्तर तक चलेगा जागरूकता अभियान

लखनऊ। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विकासखंड स्तर पर विशेष अभियान और शिविर लगाकर पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र KCC धारकों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाने और किसानों को फसल क्षति की स्थिति में समय पर आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
विधान भवन स्थित समिति कक्ष-8 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और KCC योजना की समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 83.90 लाख KCC के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

- 56.31 लाख KCC धारकों को बीमा से जोड़ने का लक्ष्य
समीक्षा में सामने आया कि प्रदेश में करीब 1.10 करोड़ KCC खातों के मुकाबले अभी 17.07 लाख किसानों को बीमा कवर मिला है। 39 लाख खाते अपात्र श्रेणी में हैं, जबकि 56.31 लाख खातों को बीमा योजना से जोड़ा जाना बाकी है।
कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि बैंक, बीमा कंपनियां और कृषि विभाग आपसी समन्वय से विकासखंड स्तर पर विशेष शिविर लगाएं। ‘ऑप्ट आउट’ करने वाले किसानों को छोड़कर पात्र KCC धारकों को फसल बीमा का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाए।

- प्रीमियम जमा होने के 48 घंटे में बीमा कंपनियों को भेजें राशि
शाही ने बैंकों को निर्देश दिया कि किसानों के KCC खातों से बीमा प्रीमियम की राशि काटे जाने के दो दिन के भीतर संबंधित बीमा कंपनियों को भेज दी जाए, ताकि किसानों के बीमा कवरेज में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने खरीफ-2026 के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर फसल बीमा योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने और किसानों को योजना की शर्तों एवं लाभों की जानकारी देने के भी निर्देश दिए।

- फसल नुकसान का तुरंत आकलन करने पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रतिकूल मौसम के कारण फसलों को नुकसान होने की स्थिति में उसका आकलन जल्द कराया जाए और पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 83.90 लाख KCC जारी या नवीनीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 28.43 लाख KCC ही बनाए या नवीनीकृत किए जा सके हैं। लक्ष्य की धीमी प्रगति पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

- पिछले सीजन में भी किसानों को मिली क्षतिपूर्ति
बैठक में बताया गया कि खरीफ-2025 में बीमित 20.63 लाख किसानों में से अब तक 7.26 लाख किसानों को 806.98 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। वहीं रबी 2025-26 में बीमित 18.57 लाख किसानों में से 1.66 लाख किसानों को 134.12 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र, कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी, निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह सहित उद्यान विभाग, संस्थागत वित्त विभाग, बैंकों, नाबार्ड, सीएससी और बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समान पक्षी विहार के पास पर्यटन विकास को मिलेगी रफ्तार, 6 हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को

- कैबिनेट ने ग्रामसभा की भूमि पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी, पक्षी संरक्षण के साथ पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मैनपुरी के प्रसिद्ध समान पक्षी विहार के निकट पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 6 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रस्तावित भूमि मैनपुरी की किशनी तहसील के ग्राम समान में पक्षी विहार के निकट स्थित है। ग्राम समाज की यह भूमि ऊसर श्रेणी की है। पर्यटन विकास और पक्षी विहार के आसपास आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए इसे पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा।

- रामसर साइट है समान पक्षी विहार
जयवीर सिंह ने बताया कि समान पक्षी विहार उत्तर प्रदेश के प्रमुख आर्द्रभूमि क्षेत्रों में शामिल है और इसे 2019 में रामसर साइट के रूप में मान्यता मिली थी। यहां सारस क्रेन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।
गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित मौसमी झील के आसपास फैला यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। समान गांव में स्थित यह पक्षी विहार आगरा-मैनपुरी-फर्रुखाबाद मार्ग से जुड़ा है। मैनपुरी शहर से इसकी दूरी करीब 30 किलोमीटर है। सड़क के साथ रेल मार्ग से भी यहां पहुंचा जा सकता है।

- बर्ड वॉचिंग और फोटोग्राफी के लिए खास जगह
मंत्री के अनुसार संरक्षित रामसर क्षेत्र करीब 5.25 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह विशेष रूप से क्रेन और अन्य प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पक्षी दर्शन और फोटोग्राफी के साथ नाव की सवारी के जरिए जलाशय में मौजूद पक्षियों को करीब से देखने का अवसर भी मिलता है।

- पर्यटकों के लिए विकसित होंगी सुविधाएं
भूमि पर्यटन विभाग को मिलने के बाद समान पक्षी विहार के आसपास पर्यटन अवस्थापना से जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा। इसके साथ पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सकेगा।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि बेहतर सुविधाओं के विकास से स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि की संभावना है। ग्रामसभा की भूमि निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने से राज्य सरकार पर इस मद में कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

- प्रदेश के कई पक्षी विहार आकर्षण का केंद्र
जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में समान के अलावा चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार, सैंडी, बखीरा, विजय सागर, लाख बहोसी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, सुरहा ताल, ओखला, सूर सरोवर और पटना पक्षी विहार समेत कई महत्वपूर्ण पक्षी विहार हैं। शरद ऋतु में इन क्षेत्रों में देश-विदेश से विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है।
सरकार का प्रयास है कि इन प्राकृतिक स्थलों पर संरक्षण के साथ पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए, जिससे प्रदेश में इको-टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग को भी बढ़ावा मिल सके।
सरस्वती-सिंधु सभ्यता ने ज्ञान और तकनीकी विकास की प्राचीन परंपरा को दिखाया

- पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के छठवें दिन भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विशेषज्ञ ने दिया व्याख्यान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से आयोजित ‘पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम-2026’ के छठवें दिन मंगलवार को सरस्वती-सिंधु सभ्यता और प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर तथा चंडीगढ़ के संग्रहालय एवं पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने ‘सरस्वती-सिंधु सभ्यता: भारतीय ज्ञान परंपरा के नए आयाम’ और ‘प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषयों पर प्रतिभागियों से संवाद किया।
व्याख्यान के दौरान डॉ. परमार ने पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन भारत में ज्ञान परंपरा के विकास को समझाया। उन्होंने बताया कि उस दौर में विकसित ज्ञान केवल सैद्धांतिक नहीं था, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, कृषि, उत्पादन, तकनीक और सामाजिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों पर भी आधारित था।

- नगर नियोजन से जल प्रबंधन तक पर चर्चा
डॉ. परमार ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता से जुड़े पुरातात्त्विक प्रमाणों के माध्यम से नगर नियोजन, वास्तुकला, जल प्रबंधन, जल निकासी, मापन-पद्धति, कृषि, शिल्प, धातुकर्म और व्यापार जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने धोलावीरा की जल-संग्रह और जल प्रबंधन व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की सुव्यवस्थित नगरीय संरचना, जल निकासी प्रणाली और मानकीकृत बाट-माप तत्कालीन समाज की तकनीकी दक्षता और पर्यावरण के अनुरूप जीवन जीने की क्षमता को दर्शाते हैं।

- प्रायोगिक प्रदर्शन से समझीं प्राचीन तकनीकें
व्याख्यान की खास बात विषय से जुड़े पुरातात्त्विक साक्ष्यों और ज्ञान प्रणालियों का प्रायोगिक प्रदर्शन रहा। इसके जरिए प्रतिभागियों को प्राचीन ज्ञान, तकनीकी कौशल और पुरातात्त्विक प्रमाणों के बीच संबंधों को व्यावहारिक तरीके से समझने का अवसर मिला। प्रदर्शन ने कार्यक्रम को संवादात्मक और अधिक रोचक बनाया।

- 150 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
पुरातत्व निदेशालय की निदेशक रेनू द्विवेदी ने मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र परमार का पौधा और स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता और प्रारंभिक भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन देश के वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय विकास के ऐतिहासिक पक्षों को समझने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ के शोधपरक व्याख्यान और प्रायोगिक प्रदर्शन से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और पुरातात्त्विक विरासत को समग्र दृष्टि से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और 50 से अधिक ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में श्री राम विनय ने मुख्य वक्ता, निदेशक, अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया। मंच संचालन डॉ. मनोज कुमार यादव ने किया।
बस हादसों के पीड़ितों के लिए आर्थिक सहारा बनी ‘यात्री राहत योजना’
- योगी सरकार ने नौ वर्षों में 342 मामलों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी, गैर-यात्रियों को भी योजना में किया शामिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में प्रभावित यात्रियों और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली ‘यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना’ पीड़ित परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच 342 मृत्यु और घायल होने के मामलों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले के दो वित्तीय वर्षों 2015-16 और 2016-17 में आठ मृत्यु प्रकरणों में 40 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। वहीं 2017-18 से 2025-26 के बीच नौ वर्षों में 322 मृत्यु मामलों में करीब 17.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा घायल यात्रियों के 20 मामलों में 24.37 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई।

- 2017 के बाद बढ़ा सहायता का दायरा
योजना के तहत बीते वर्षों में दुर्घटना पीड़ितों को दी गई सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 78 मृत्यु मामलों में करीब 3.68 करोड़ रुपये, 2021-22 में 48 मामलों में लगभग 2.37 करोड़ रुपये, 2017-18 में 42 मामलों में करीब 2.10 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
इसी तरह 2023-24 में 32 मृत्यु प्रकरणों में 1.85 करोड़ रुपये और 2025-26 में 27 मामलों में करीब 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक राहत उपलब्ध कराना योजना का प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए चालकों-कर्मचारियों की निगरानी और बसों की नियमित जांच पर भी जोर दिया जा रहा है।

- मौत पर 7.50 लाख रुपये तक की सहायता
योजना के संशोधित प्रावधानों के तहत दुर्घटना में वयस्क यात्री की मृत्यु होने पर 7.50 लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है। आधा टिकट लेकर यात्रा करने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपये और नियमानुसार निःशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर करीब 1.87 लाख रुपये की राहत राशि का प्रावधान है।
इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रितों को तत्काल आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

- घायलों के इलाज के लिए भी आर्थिक मदद
दुर्घटना में घायल यात्रियों को भी योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है। सामान्य चोट की स्थिति में उपचार के लिए 10 हजार रुपये तक और गंभीर चोट में 25 हजार रुपये तक की प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
यदि प्रारंभिक सहायता से अधिक इलाज का खर्च आता है तो प्रमाणित चिकित्सा बिल और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी का स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के बाद आगे की सहायता की प्रक्रिया की जाती है।
योजना में चोट की गंभीरता के आधार पर अधिकतम सहायता की सीमा भी तय है। सामान्य चोट में 25 हजार रुपये, गंभीर चोट में एक लाख रुपये और अति गंभीर चोट अथवा शरीर के 50 प्रतिशत से अधिक जलने जैसी स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान है।

- राहगीरों को भी योजना में मिली जगह
योजना का दायरा बढ़ाते हुए अप्रैल 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया। अब ऐसे राहगीर या अन्य व्यक्ति भी इसके दायरे में हैं, जो बस में सवार नहीं थे, लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम या अनुबंधित बस की दुर्घटना में घायल या मृत हो जाते हैं।
ऐसे गैर-यात्री की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, पुलिस जांच और परिवहन निगम की जांच रिपोर्ट में यदि दुर्घटना के लिए संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो योजना के तहत आर्थिक सहायता देय नहीं होगी।
सरकार और परिवहन निगम का जोर दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ बस संचालन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी है, ताकि सड़क हादसों की संख्या में कमी लाई जा सके।
रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार ने बुजुर्ग महिलाओं को दी बड़ी सौगात
- यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा

- 27 में से 24 प्रस्तावों को मंजूरी, लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना को भी मिली स्वीकृति

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 27 में से 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ को मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में जीवनभर मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।

- एक करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ
सरकार के इस फैसले से प्रदेश की एक करोड़ से अधिक बुजुर्ग महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। यात्रा के दौरान पात्र महिलाओं को अपनी आयु और पहचान प्रमाणित करने के लिए आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र दिखाना होगा।
कैबिनेट का यह फैसला महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ वरिष्ठ नागरिक महिलाओं की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रक्षाबंधन से पहले योगी सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले को महिलाओं के लिए बड़ी सौगात के तौर पर देखा जा रहा है।
छह महीने में एक लाख युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी: सीएम योगी

- 3446 प्राविधिक सहायकों और 126 मंडी सचिवों को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को मिल रहा अवसर


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश सरकार अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। भर्ती परीक्षाओं और परिणाम की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी और बिना भेदभाव के सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन रोजगार के तहत आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित कृषि विभाग के 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) और 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद युवाओं को संबोधित कर रहे थे।

- नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने आयोगों और भर्ती बोर्डों की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन करते हुए योग्यता और मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि किसी विभाग से अधियाचन मिलने के बाद छह महीने के भीतर परिणाम जारी करने का प्रयास होना चाहिए। एक महीने के भीतर विज्ञापन और अगले दो महीने में परीक्षा कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि युवाओं को लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े।

-  9 साल में 9.30 लाख से ज्यादा सरकारी नियुक्तियां
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर युवाओं के सामने तमाम समस्याएं थीं। उनके मुताबिक भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, नकल और भ्रष्टाचार के कारण युवाओं का समय और अवसर दोनों प्रभावित होते थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने नकल माफिया पर कार्रवाई की और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का काम किया।
मुख्यमंत्री ने यूपी बोर्ड परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि अब करीब 56 लाख विद्यार्थियों की परीक्षाएं 14 दिन में पूरी कराई जा रही हैं और इसके बाद जल्द परिणाम जारी किए जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से भी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों की स्किलिंग, करियर और रोजगार पर ध्यान देने की अपील की।

-  दुनिया में बढ़ी यूपी के युवाओं की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। जापान, जर्मनी और इजराइल जैसे देशों में यूपी के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने हाल में जापान के बड़े प्रतिनिधिमंडल के यूपी दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के उद्योग और कारोबारी यूपी के युवाओं को रोजगार देने में रुचि दिखा रहे हैं।

-  किसानों के लिए बिजली और सिंचाई व्यवस्था में सुधार का दावा
किसानों से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निजी नलकूपों के बिजली बिल से जुड़े करीब 3000 करोड़ रुपये के भुगतान का भार सरकार उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और कृषि क्षेत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बाणसागर, अर्जुन सहायक और सरयू नहर परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े कृषि क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिली है।

-  कृषि विकास दर को 30 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को और आगे ले जाने की क्षमता प्रदेश में मौजूद है। इसके लिए किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, आधुनिक सिंचाई तकनीक और नई कृषि तकनीकों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का कार्य शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार किसानों के खातों में अब तक करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।

-  मंडी सचिवों को दिए निर्देश
नवनियुक्त मंडी सचिवों से मुख्यमंत्री ने मंडियों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंडियां स्वच्छ और व्यवस्थित हों, किसानों को बुनियादी सुविधाएं मिलें और उनकी उपज की खरीद तथा एमएसपी से जुड़ी व्यवस्था प्रभावी रहे। उन्होंने मंडियों को ई-नाम से जोड़ने, किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों के अच्छे कार्यों से किसानों के बीच सरकार और प्रशासन के प्रति भरोसा मजबूत होगा।

-  यूपी में चीनी का पर्याप्त भंडार
चीनी की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 28 लाख टन चीनी का भंडार उपलब्ध है, जबकि मासिक खपत लगभग चार लाख टन है। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर से चीनी मिलों का नया पेराई सत्र शुरू होने के बाद उत्पादन में और वृद्धि होगी।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
हरिहरनाथ मंदिर जल चढ़ाने जा रहे गणेश चौथ समिति पदाधिकारियों को पुलिस ने रोक दिया

लखनऊ। जनपद बिजनौर से सम्भल के हरिहर नाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए जा रहे गणेश चौथ समिति धामपुर के पदाधिकारियों को पुलिस ने धामपुर शुगर मिल तिराहा पर बैरीकेडिंग कर रोक दिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। समिति पदाधिकारियों ने शांतिपूर्वक मंदिर जाने और जलाभिषेक करने की अनुमति देने की मांग की।

बताया गया कि गणेश चौथ समिति धामपुर के पदाधिकारी करीब छह सात वाहनों के काफिले के साथ धामपुर से स्योहारा काठ मुरादाबाद होते हुए संभल स्थित हरिहर नाथ मंदिर के लिए रवाना हुए थे। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि वे काफी वर्षों से लगातार हरिहर नाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए जाते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें पुलिस द्वारा रास्ते में रोक दिया जाता है। इस बार भी पदाधिकारी धार्मिक आस्था के अनुसार शांतिपूर्वक जल चढ़ाने के उद्देश्य से मंदिर के लिए रवाना हुए थे।

समिति पदाधिकारियों के अनुसार प्रशासन को उनके कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी। उनका आरोप है कि साेमवार सुबह करीब छह बजे से ही पुलिस द्वारा पदाधिकारियों के घरों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। जैसे ही समिति के पदाधिकारी अपने वाहनों के साथ धामपुर से स्योहारा की ओर रवाना हुए और आगे संभल स्थित हरिहर नाथ मंदिर जाने लगे, पुलिस ने स्योहारा मार्ग में बैरीकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद समिति पदाधिकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई। पदाधिकारियों ने पुलिस से कहा कि वे किसी प्रकार का विवाद या अशांति नहीं चाहते हैं। उनका उद्देश्य केवल शांतिपूर्वक हरिहर नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना है।

आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर समिति के पदाधिकारी सड़क पर ही बैठ गए और “हरिहर मंदिर जाएंगे, जल वहीं चढ़ाएंगे” जैसे नारे लगाने लगे। मौके पर काफी देर तक समझाने-बुझाने और बातचीत का दौर चलता रहा। समिति पदाधिकारियों ने प्रशासन से शांतिपूर्ण तरीके से मंदिर पहुंचने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

गणेश चौथ समिति के संयोजक विजय जैन ने कहा कि समिति के पदाधिकारी वर्षों से धार्मिक आस्था के अनुसार हरिहर नाथ मंदिर में जल चढ़ाने जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी सभी लोग शांतिपूर्वक यात्रा कर रहे थे और किसी तरह का विवाद पैदा करना उनका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने प्रशासन से धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से जल चढ़ाने की अनुमति देने की मांग की।

उधर समिति के सहसयोजक संयम जैन ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब नमाज पढ़ी जा सकती है तो जल क्यों नहीं चढ़ाया जा सकता?” उन्होंने प्रशासन से सभी धार्मिक गतिविधियों में समान व्यवहार किए जाने और श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का अवसर देने की मांग की।

काफी देर तक चली बहस और बातचीत के बाद समिति पदाधिकारियों ने पास के शिव मंदिर में जल चढ़ाया। इसके बाद पुलिस ने पदाधिकारियों को मुचलकों पर छोड़ दिया। घटना के दौरान मौके पर धामपुर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखा।

समिति पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं था।

पुलिस-प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत पदाधिकारियों को रोके जाने की कार्रवाई की गई। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। समिति पदाधिकारियों ने प्रशासन से भविष्य में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकालने की अपील की है, जिससे शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो सकें। कार्यक्रम में सत्येंद्र कुमार प्रीतम कुमार मयंक चौहान अभिषेक ठाकुर अभिषेक शर्मा गौरव कुमार उदय प्रभूषित नीरज संजय सैनी राहुल कुमार वीरेंद्र कारीगर मयंक चौहान अजय राजपूत शोभित अग्रवाल अनु वर्मा यश शर्मा आदर्श चौहान एवं दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लखनऊ में आरएडब्ल्यू ग्रुप ऑफ कंपनीज के भवन में लगी आग, 8 दमकल वाहनों ने पाया काबू
भवन में भर गया था धुआं, दमकल कर्मियों ने चलाया सर्च अभियान; आग की घटना में कोई जनहानि नहीं

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार देर रात आरएडब्ल्यू ग्रुप ऑफ कंपनीज के भवन में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। भवन में अत्यधिक धुआं भर जाने के कारण दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के साथ ही धुआं निकासी की प्रक्रिया भी शुरू की।

अग्निशमन विभाग के अनुसार, मंगलवार रात करीब 1:39 बजे हजरतगंज कंट्रोल रूम को एआरओ आईपी के माध्यम से सूचना मिली कि आरएडब्ल्यू ग्रुप ऑफ कंपनीज के भवन में आग लग गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए गोमतीनगर अग्निशमन केंद्र से तत्काल दो अग्निशमन वाहन और अग्निशमन अधिकारी को आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

भवन में भरा था अत्यधिक धुआं

मौके पर पहुंची दमकल टीम ने देखा कि भवन के अंदर काफी अधिक धुआं भरा हुआ था। स्थिति को देखते हुए अग्निशमन कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। इसके साथ ही भवन से धुआं बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू की गई, ताकि अंदर की स्थिति स्पष्ट हो सके और राहत कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।

आग की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ भी तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए। उनके कुशल निर्देशन में दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ ही भवन के अंदर सर्च अभियान चलाया।

यह सुनिश्चित किया कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न हो

दमकल टीम ने भवन के अलग-अलग हिस्सों में सर्च अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया कि आग या धुएं के बीच कोई व्यक्ति अंदर फंसा तो नहीं है। अग्निशमन कर्मियों के अथक प्रयास और कड़ी मेहनत के बाद आग पर शीघ्र ही नियंत्रण पा लिया गया।

अग्निशमन विभाग के मुताबिक, आग की घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। आग पर पूरी तरह काबू पाने और स्थिति सामान्य होने के बाद दमकल टीम ने राहत की सांस ली।

घटना के दौरान कुल आठ फायर टेंडर घटनास्थल पर पहुंचे और आग बुझाने की कार्रवाई में जुटे रहे। फिलहाल आग लगने के कारणों और इससे हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
UPSSSC परीक्षा में ब्लूटूथ से नकल कराने का खेल, मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार

अभ्यर्थी को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से उत्तर बताने की थी तैयारी, 50 हजार नकद और 13 मार्कशीट समेत बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा में अनुचित साधनों के जरिए अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने वाले गिरोह का थाना महानगर पुलिस और यूपी एसटीएफ ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में कथित मास्टरमाइंड रमेश चंद्र पटेल और उसके सहयोगी सत्यप्रकाश यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के माध्यम से परीक्षा में बैठे अभ्यर्थी को प्रश्नों के उत्तर बताने की योजना पर काम कर रहा था।

मामले की शुरुआत 23 अगस्त 2026 को हुई, जब यूपी एसटीएफ को सूचना मिली कि थाना महानगर क्षेत्र के सेक्टर-सी स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज में UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी ब्लूटूथ के माध्यम से नकल करने की कोशिश कर रहा है। सूचना पर एसटीएफ और महानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने परीक्षा केंद्र पर कार्रवाई की और बृजेश कुमार यादव उर्फ बब्लू को गिरफ्तार किया।

बृजेश की गिरफ्तारी के बाद खुली नेटवर्क की परत

बृजेश कुमार यादव जौनपुर का रहने वाला है और वर्तमान में प्रयागराज में रह रहा था। उसके खिलाफ कार्रवाई के बाद पुलिस ने पूछताछ और विवेचना के दौरान उसके संपर्कों की पड़ताल की। इसी क्रम में रमेश चंद्र पटेल और सत्यप्रकाश यादव की भूमिका सामने आई।

पुलिस को सूचना मिली कि बृजेश अपने एक साथी के साथ निशातगंज चौराहे स्थित एक होटल में रुका था। टीम ने होटल का रजिस्टर चेक किया तो सीरियल नंबर 2098 पर बृजेश कुमार यादव और सत्यप्रकाश यादव के ठहरने की जानकारी मिली। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज के जरिए सत्यप्रकाश का हुलिया और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई।

पुलिस के मुताबिक, सत्यप्रकाश दयानंद इंटर कॉलेज से कुछ दूरी पर अपने साथी का इंतजार करता मिला। पूछताछ में उसने बताया कि वह और बृजेश परीक्षा देने आए थे और उसकी रमेश चंद्र पटेल से परीक्षा में नकल कराने को लेकर बातचीत हुई थी।

प्रयागराज से पकड़ा गया रमेश चंद्र पटेल

सत्यप्रकाश को साथ लेकर पुलिस टीम प्रयागराज पहुंची और संगम रेलवे स्टेशन के सामने रमेश चंद्र पटेल को बुलाया गया। पूछताछ में उसकी भूमिका सामने आने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, सत्यप्रकाश यादव के कब्जे से एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लैपटॉप सर्विस की रसीद बरामद हुई। वहीं रमेश चंद्र पटेल के पास से पैन कार्ड, एक्सिस बैंक का एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्ड, अलग-अलग व्यक्तियों के नाम की 13 मार्कशीट एवं शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पैंट की जेब से 50 हजार रुपये नकद बरामद हुए।

नौकरी के नाम पर पांच लाख रुपये की बातचीत का दावा

पुलिस की पूछताछ के अनुसार, सत्यप्रकाश ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा लेकर उसने रमेश चंद्र पटेल को दिया था। वहीं रमेश चंद्र पटेल ने कथित तौर पर बताया कि बृजेश कुमार यादव की नौकरी के लिए उसने अनूप कुमार पटेल और पंकज श्रीवास्तव से बातचीत की थी और वह इनके साथ मिलकर काम करता था।

पुलिस के मुताबिक, बृजेश की नौकरी के लिए पांच लाख रुपये में बातचीत हुई थी। इसमें रमेश चंद्र को एक लाख रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, बरामद 50 हजार रुपये इसी रकम में से सत्यप्रकाश को देने के लिए रखे गए थे।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।

चार मोबाइल और चार सिम समेत यह सामान बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्न सामान बरामद किया है—

चार मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड
13 मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र
पांच ब्लैंक चेक और दो चेकबुक
लैपटॉप सर्विस की एक रसीद
एडमिट कार्ड की एक छायाप्रति
आधार कार्ड की एक छायाप्रति
बैंक ऑफ बड़ौदा की दो जमा पर्चियां
दो पैन कार्ड
दो एटीएम कार्ड
दो ड्राइविंग लाइसेंस
दो आधार कार्ड
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्ड
माध्यमिक शिक्षा परिषद का एक परिचय पत्र
एक पॉकेट डायरी
दो चाभी गुच्छे
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का रैपर
50,000 रुपये नकद
प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पुलिस की नजर

पुलिस के अनुसार, प्रदेश में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ लोग इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और ब्लूटूथ जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाकर धन अर्जित करने का प्रयास कर रहे हैं। UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा को लेकर भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही थी।

इसी क्रम में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर 23 अगस्त को दयानंद कन्या इंटर कॉलेज में कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ऐसे मामलों में उनकी संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

दो अन्य वांछितों की तलाश जारी

मामले में दो अन्य वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयास कर रही है। थाना महानगर में दर्ज मु0अ0सं0 157/2026 में विवेचना के दौरान धाराओं में भी बढ़ोतरी की गई है। मामले में बीएनएस की धारा 61(2)/318(4) और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 13(5) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार दोनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास इसी मामले से संबंधित दर्ज है। बरामद मोबाइल, सिम, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और रकम को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और परीक्षा में अनुचित साधनों के जरिए अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तारी करने वाली टीम

कार्रवाई में थाना महानगर कमिश्नरेट लखनऊ के उपनिरीक्षक राजू कृष्ण सिंह, राजेंद्र प्रसाद, दीपक कुमार बिंद और कांस्टेबल अमन कुमार शामिल रहे। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
बारावफात पर लखनऊ में बदलेगा ट्रैफिक प्लान, 26 अगस्त को 18 मार्गों पर डायवर्जन



अमीनाबाद के झंडे वाले पार्क से सुबह 10 बजे निकलेगा मदहे-सहाबा जुलूस, कार्यक्रम खत्म होने तक लागू रहेगी यातायात व्यवस्था



लखनऊ। बारावफात/ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर राजधानी लखनऊ में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। चंद्र दर्शन के अनुसार 26 अगस्त 2026 को 12वीं रबी-उल-अव्वल का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर मदहे-सहाबा का जुलूस सुबह 10 बजे झंडे वाले पार्क, अमीनाबाद से शुरू होकर बाजारखाला थाना क्षेत्र में समाप्त होगा।

जुलूस को देखते हुए सुबह 7 बजे से कार्यक्रम समाप्ति तक आवश्यकतानुसार विभिन्न मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू रहेगा। लखनऊ यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित मार्गों के बजाय निर्धारित वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करें।

इन मार्गों पर रहेगा डायवर्जन
कमला नेहरू क्रॉसिंग (चरक चौराहा) से आने वाला यातायात मेफेयर तिराहा-विक्टोरिया स्ट्रीट होते हुए नक्खास तिराहा नहीं जा सकेगा। यह यातायात चौक/मेडिकल कॉलेज होकर गंतव्य की ओर जाएगा।
नक्खास तिराहा से नादान महल रोड/टुड़ियागंज की ओर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहन अकबरी गेट, चरक चौराहा (कमला नेहरू) होकर जा सकेंगे।
टुड़ियागंज तिराहा से नक्खास तिराहा की ओर सामान्य यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज और मंसूर नगर होकर निकलेंगे।
टुड़ियागंज तिराहा से हैदरगंज (लाल माधव) तिराहा की ओर यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन वापस मुड़कर गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज और मंसूर नगर होकर जाएंगे।
हैदरगंज तिराहा (लाल माधव) से नक्खास तिराहा/ऐशबाग ईदगाह की ओर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहनों को बुलाकी अड्डा और मिल एरिया होकर भेजा जाएगा।
वाटर वर्क्स तिराहा से ऐशबाग ईदगाह तिराहा की ओर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा।
मेडिकल कॉलेज चौराहा से सुभाष मार्ग होते हुए रकाबगंज पुल की ओर यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन सिटी स्टेशन तिराहा/शाहमीना होकर अपने गंतव्य तक जा सकेंगे।
पोस्ट ऑफिस अमीनाबाद तिराहा से मौलवीगंज होकर रकाबगंज पुल की ओर यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन छतरी वाले चौराहे से अमीनाबाद/नजीराबाद होकर जाएंगे।
रकाबगंज पुल से अमीनाबाद की तरफ सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहन नाका/मेडिकल कॉलेज होकर गंतव्य की ओर जाएंगे।
कैसरबाग बस स्टैंड, गुईन रोड तिराहा, नजीराबाद तिराहा और अमीनाबाद चौराहा से झंडे वाले पार्क की तरफ किसी भी प्रकार का यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन कैसरबाग, अशोक लाट, श्रीराम रोड अमीनाबाद/सिटी स्टेशन होकर जा सकेंगे।
ऐशबाग पुल की तरफ से कोई वाहन ऐशबाग ईदगाह की ओर नहीं जा सकेगा। वाहनों को पुल के नीचे से मोतीनगर, भूसामंडी/राजेंद्र नगर होकर भेजा जाएगा।
बुलाकी अड्डा से हैदरगंज (लाल माधव) तिराहा की ओर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहन टिकैतराय तालाब/मिल एरिया और एवररेडी की ओर से जा सकेंगे।
मिल एरिया तिराहा से हैदरगंज की ओर जाने वाला यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहन मिल एरिया, मीना बेकरी और राजाजीपुरम होकर अपने गंतव्य तक जा सकेंगे।
राजेंद्र नगर चौराहा से ऐशबाग ईदगाह की ओर कोई वाहन नहीं जा सकेगा। वाहन मोतीनगर/राजेंद्र नगर होकर निकलेंगे।
नाका चौराहा से राजेंद्र नगर होते हुए ऐशबाग पुल/ईदगाह की ओर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। वाहन नत्था/मवैया होकर जा सकेंगे।
नाका चौराहा से पांडेयगंज चौकी होकर रकाबगंज पुल की ओर यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन बांसमंडी चौराहा/राजेंद्र नगर होकर गंतव्य तक जाएंगे।
फूलमंडी फ्लाईओवर से हैदरगंज तिराहा की ओर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा। वाहन विक्टोरिया स्ट्रीट (कमला नेहरू) चौराहा और मेडिकल चौराहा होकर जा सकेंगे।
मिल एरिया तिराहा से हैदरगंज फ्लाईओवर की ओर सामान्य यातायात नहीं जा सकेगा। वाहन मीना बेकरी चौराहा होकर अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे।
एंबुलेंस और फायर सर्विस को मिलेगी अनुमति

यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जुलूस के दौरान सामान्य यातायात के लिए निर्धारित डायवर्जन मार्गों के अतिरिक्त चिकित्सकीय आपात स्थिति में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस, फायर सर्विस, स्कूली वाहन और शव वाहन को प्रतिबंधित मार्ग से भी आवश्यकतानुसार गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस/नागरिक पुलिस की सहायता ली जा सकेगी।

लखनऊ यातायात पुलिस ने लोगों से जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था में सहयोग करने और अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित मार्गों पर वाहन लेकर न जाने की अपील की है।

ट्रैफिक कंट्रोल नंबर: 9454405155