यूपी रेरा ने छह जिलों की 13 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी मंजूरी

₹2,380 करोड़ के निवेश से बनेंगी 4,724 आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां, निवेश में बाराबंकी और इकाइयों में लखनऊ सबसे आगे

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को नई गति मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने राज्य के छह जिलों में 13 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में करीब ₹2,380.04 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और इनके जरिए 4,724 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

इन परियोजनाओं से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। परियोजनाओं को मंजूरी यूपी रेरा मुख्यालय में हुई प्राधिकरण की 212वीं और 213वीं अथॉरिटी बैठकों में दी गई। बैठकों की अध्यक्षता यूपी रेरा के अध्यक्ष श्री संजय भूसरेड्डी ने की। विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार करने के बाद प्राधिकरण ने इन्हें मंजूरी प्रदान की।

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत परियोजनाओं का विकास रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी और तय समय-सीमा में कराने पर जोर रहेगा। इससे घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका भरोसा और मजबूत होगा।

- बाराबंकी में सबसे ज्यादा निवेश

स्वीकृत परियोजनाओं में अनुमानित निवेश के मामले में बाराबंकी सबसे आगे रहा। जिले में ₹751.42 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में कुल 591 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- इकाइयों के मामले में लखनऊ आगे

वहीं, नई बनने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से लखनऊ सबसे आगे है। जिले में एक आवासीय परियोजना को मंजूरी मिली है। इसमें करीब ₹385.76 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और परियोजना के तहत 1,392 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- वाराणसी में तीन परियोजनाओं को मंजूरी

वाराणसी में तीन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में कुल ₹750.24 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा। इनके माध्यम से 1,189 आवासीय इकाइयों का विकास किया जाएगा।

- गाजियाबाद में 864 इकाइयां बनेंगी

गाजियाबाद में ₹286.27 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है जिसमें दो व्यावसायिक व एक आवासीय परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं के तहत कुल 864 इकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है।

- गौतमबुद्ध नगर में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं

गौतमबुद्ध नगर में एक आवासीय और एक व्यावसायिक परियोजना को मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं में करीब ₹186 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा और कुल 564 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- आगरा में दो आवासीय परियोजनाएं

आगरा में ₹20.35 करोड़ के अनुमानित निवेश वाली दो आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से 124 इकाइयों का निर्माण किया जाएगा।

- प्रदेश सरकार की नीतियों से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिल रहा प्रोत्साहन

प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ रही गतिविधियों के पीछे राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और सरल प्रक्रियाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा आवास, शहरी विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में नई रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है। 13 परियोजनाओं में प्रस्तावित ₹2,380.04 करोड़ के निवेश से निर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ेंगी। इसका लाभ निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग और इससे जुड़े अन्य कारोबारों को भी मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

- पारदर्शिता और समयबद्ध विकास पर जोर

यूपी रेरा का कहना है कि पंजीकृत परियोजनाओं का विकास निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अनुसार हो, यह सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। परियोजनाओं की निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया और नियमों के पालन के जरिए घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जा रही है। प्राधिकरण का प्रयास है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रमोटरों के लिए भी बेहतर और स्पष्ट व्यवस्था बने तथा घर खरीदारों का भरोसा लगातार मजबूत हो।

- यूपी रेरा अध्यक्ष ने कहा :

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी देने के साथ उनकी प्रभावी निगरानी से घर खरीदारों और प्रमोटरों दोनों के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी रेरा आगे भी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करेगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ प्रदेश में संतुलित, व्यवस्थित और भरोसेमंद रियल एस्टेट विकास को आगे बढ़ाएगा।

यूपी के कानून-व्यवस्था मॉडल को समझे केरल के पत्रकार, शिक्षा व्यवस्था पर हुई चर्चा
- ‘मीडिया संवाद’ में दोनों राज्यों के पत्रकारों ने साझा किए अनुभव, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मिला बढ़ावा

लखनऊ। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ और उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में केरल के मीडिया प्रतिनिधियों के साथ ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद का केंद्र दोनों राज्यों की शासन व्यवस्था, विकास, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया की कार्यप्रणाली से जुड़े अनुभवों को साझा करना रहा। कार्यक्रम के जरिए उत्तर प्रदेश और केरल के पत्रकारों को एक-दूसरे के प्रदेशों की व्यवस्थाओं और चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का आयोजन सूचना निदेशक विशाल सिंह और पीआईबी लखनऊ के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ल के दिशा-निर्देशन में किया गया। इस पहल का उद्देश्य दोनों राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवों के आदान-प्रदान के जरिए आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करना था। चर्चा में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
- यूपी की कानून- व्यवस्था में केरल के पत्रकारों की दिलचस्पी
पीआईबी लखनऊ के नेतृत्व में केरल के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल इन दिनों लखनऊ दौरे पर है। मीडिया संवाद के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश की संस्कृति, विकास यात्रा और शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में रुचि दिखाई।केरल के पत्रकारों ने खासतौर पर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं और किए गए प्रयासों की जानकारी ली। इस दौरान सरकार और आम जनता के बीच संवाद, शिकायतों के समाधान तथा फीडबैक लेने की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने यह जानने का प्रयास किया कि प्रदेश में कानून- व्यवस्था से जुड़े विषयों पर प्रशासनिक स्तर पर किस प्रकार काम किया जाता है।
- केरल की शिक्षा व्यवस्था जानना चाहते हैं यूपी के पत्रकार
संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने केरल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में केरल के प्रदर्शन, इसके पीछे काम करने वाली व्यवस्थाओं और बेहतर परिणाम हासिल करने के प्रमुख कारणों को समझने को लेकर सवाल किए।
दोनों राज्यों के पत्रकारों ने अपने-अपने प्रदेशों में मीडिया के कामकाज, स्थानीय मुद्दों की कवरेज और जनसरोकार से जुड़े विषयों को समाचारों में स्थान देने के तरीकों पर भी विचार साझा किए। चर्चा में यह बात सामने आई कि अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मीडिया दोनों राज्यों में जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सिनेमा के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी चर्चा
मीडिया संवाद में पत्रकारिता के अलावा सिनेमा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बीच बढ़ते संबंधों, दोनों क्षेत्रों की फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा के माध्यम से उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में पीआईबी केरल की निदेशक वी. पार्वती और उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के अपर निदेशक सूचना अरविंद कुमार मिश्रा सहित दोनों राज्यों के विभिन्न प्रमुख मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। इस संवाद को दोनों राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों के बीच सीधे संपर्क, अनुभव साझा करने और एक-दूसरे के सामाजिक-सांस्कृतिक एवं विकासात्मक पहलुओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।
बिजली कटौती की समस्या को लेकर नील मणि ने अधिशासी अभियंता को सौंपा पत्र

रमेश दूबे

धनघटा। नगर पंचायत हैसर बाजार धनघटा क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर भाजपा नेता नील मणि ने अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग संत कबीर नगर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण एवं विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए मांग पत्र प्रस्तुत किया।

नील मणि ने विभिन्न वार्डों में 11,000 वोल्ट की विद्युत व्यवस्था को LT 440 वोल्ट में परिवर्तित किए जाने की मांग रखी, ताकि बिजली आपूर्ति को सुचारु एवं बेहतर बनाया जा सके। इसके साथ ही विभिन्न वार्डों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि से संबंधित समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करना और आम नागरिकों को निर्बाध एवं सुचारु बिजली उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों से समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए जल्द समाधान कराने का आग्रह किया।
गोवध जैसी गंभीर घटना पर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर का कड़ा रुख कर्तव्य में घोर लापरवाही पर उपनिरीक्षक एवं आरक्षी निलम्बित
रमेश दूबे

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना द्वारा अपराध नियंत्रण, अपराधियों की सतत निगरानी, प्रभावी बीट पुलिसिंग तथा संवेदनशील प्रकृति के अपराधों की रोकथाम के संबंध में अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लगातार स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद थाना धनघटा क्षेत्र के संबंधित चौकी क्षेत्र में गोवध जैसी गंभीर घटना घटित होने के मामले में कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई की गई है। उक्त प्रकरण में उ0नि0 श्री वीर बहादुर यादव तथा का0 प्रवीण कुमार थाना धनघटा जनपद संतकबीरनगर को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है। निलम्बन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासन एवं उच्चाधिकारियों द्वारा अपराध नियंत्रण, अपराधियों की सतत निगरानी, बीट व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने तथा संवेदनशील प्रकृति के अपराधों की रोकथाम हेतु समय-समय पर स्पष्ट एवं कड़े निर्देश निर्गत किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित चौकी क्षेत्र में गोवध जैसी गंभीर घटना घटित होना उनके कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता को परिलक्षित करता है। पुलिस अधीक्षक महोदय ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के संबंध में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी अपने क्षेत्र में अपराधियों की निगरानी, बीट व्यवस्था को प्रभावी रखने तथा संवेदनशील घटनाओं की रोकथाम के लिए पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ कार्य करें। कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निलम्बन अवधि में दोनों पुलिसकर्मी पुलिस लाइन, संतकबीरनगर से सम्बद्ध रहेंगे तथा सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। दोनों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही नियमानुसार प्रचलित की जाएगी।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए : केशव प्रसाद मौर्य

पीएम आवास योजना-ग्रामीण के 6.18 लाख आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत कर पूर्ण कराने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जनपदों में अभियान चलाकर मानव दिवस सृजन में बढ़ोतरी के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के कार्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, जिससे योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करते हुए विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित जनपद और विकसित ग्राम पंचायत के संकल्प को साकार करने में प्रभावी भूमिका निभा सके। उन्होंने  कहा कि यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी योजना के कार्यों की नियमित समीक्षा करें
श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण मे प्रदेश को 6.18 लाख आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सभी जनपद इन आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत करते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत बेसहारा पात्र महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा अन्य प्राथमिकता श्रेणी के पात्र परिवारों, जिन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें विशेष अभियान चलाकर चिन्हित किया जाए और पात्रता के अनुसार योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम चौपालों में योजना की पात्रता एवं अन्य शर्तों की विस्तार से जानकारी देते हुए पात्र व्यक्तियों को चिन्हित करने तथा उन्हें आवास उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि विकसित भारत-जी राम जी योजना की महिला श्रमिकों तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
उन्होंने  निर्देश दिए हैं कि जिन स्वयं सहायता समूहों  को अभी तक सीसीएल अथवा बैंक क्रेडिट की सुविधा नहीं मिली है, ऐसे सभी पात्र समूहों को शत-प्रतिशत सीसीएल उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।  यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करें। प्रदेश में नए स्वयं सहायता समूहों के गठन के कार्य में भी तेजी लाई जाए। समूह सखियों के मानदेय में वृद्धि के लिए अन्य राज्यों में लागू बेहतर मॉडलों का अध्ययन कर अपेक्षित कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत कैडर के मानदेय का भुगतान भी अनिवार्य रूप से समय से सुनिश्चित किया जाए।
श्री मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि टीएचआर प्लांट्स  को सोलर एवं खाद्य संस्करण सब्सिडी का पूरा-पूरा लाभ उठाते हुए प्लांट्स को और अधिक प्रभावी एवं ऊर्जा दक्ष बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
उप मुख्यमंत्री ने ग्राम चौपालों को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा है कि ग्राम चौपालों का त्रैमासिक रोस्टर तैयार कर माननीय सांसद एवं विधायकगण के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित लोगों को भी उपलब्ध कराया जाए। ग्राम चौपालों की नियमित समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि इनमें ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी प्रभावी ढंग से हो।
उन्होंने प्रदेश में निर्मित सभी अमृत सरोवरों की साफ-सफाई एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अमृत सरोवरों को स्वच्छ, उपयोगी एवं बेहतर स्वरूप में रखा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में इनके निर्माण का उद्देश्य पूर्ण हो सके।
श्री मौर्य ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में दृष्टि की बैठक अभी तक नहीं हुई है, वहां तत्काल बैठक आयोजित कर उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर कार्य करने वाले जनपदों एवं विकासखंडों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले जनपदों और विकासखंडों को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे अन्य क्षेत्र भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने कार्यों में सुधार कर सकें।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की नई विदेश नीति
-अमरेश द्विवेदी-

आज की वैश्विक राजनीति में किसी एक बड़े देश के साथ मजबूत संबंध होना पर्याप्त नहीं रह गया है। व्यापार युद्ध, टैरिफ, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, चीन की बढ़ती ताकत और ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता ने दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को अपनी विदेश नीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत भी इस बदलाव से अछूता नहीं है।
गत दिनाें न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच तुलना करते हुए एक लेख छापा है। जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी जब-जब विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उनका किस तरह से सम्मान होता है और उस देश का सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप हैं जो नोबेल पुरस्कार पाने के लिए क्या कुछ कर रहे हैं लेकिन फिर भी नहीं मिल पा रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में पिछले कुछ समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। भारत अब केवल अमेरिका या किसी एक बड़े शक्ति-केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, नॉर्वे और अन्य देशों के साथ समानांतर रूप से आर्थिक एवं रणनीतिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पिछले एक वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं की गति इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दिखाती है। अलग-अलग देशों के साथ बैठकें केवल पारंपरिक कूटनीतिक मुलाकातें नहीं रह गई हैं बल्कि उनमें व्यापार, निवेश, रक्षा तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और रोजगार जैसे ठोस मुद्दों पर समझौते किए जा रहे हैं। इस रणनीति के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता है।
अमेरिका की व्यापार नीति में बदलाव, भारत पर लगाए गए भारी भरकम टैरिफ और रूसी तेल खरीदने को लेकर पैदा हुआ विवाद नई दिल्ली के लिए एक चेतावनी की तरह सामने आया। जिस अमेरिका को भारत लंबे समय से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता रहा है, उसी के साथ व्यापारिक तनाव ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या भारत को अपनी आर्थिक निर्भरता को और अधिक विविध बनाना चाहिए? उत्तर काफी हद तक ‘हां’ में दिखाई देता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात बाजार रहा है। ऐसे में अमेरिकी बाजार में किसी भी बड़े व्यापारिक व्यवधान का भारतीय उद्योग, निर्यातकों और रोजगार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए यूरोप, ब्रिटेन, एशिया और अन्य क्षेत्रों में नए बाजार तलाशना भारत के लिए केवल कूटनीतिक विकल्प नहीं बल्कि आर्थिक आवश्यकता भी बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की हालिया विदेश नीति को एक तरह की डील-मेकिंग डिप्लोमेसी कहा जा सकता है। विदेश यात्राओं में अब केवल साझा बयान या राजनीतिक दोस्ती महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि ठोस लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत केवल विदेशी निवेश आकर्षित करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि तकनीक, उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार तक पहुंच भी चाहता है। जर्मनी से पनडुब्बी तकनीक, फ्रांस के साथ एआई और गवर्नेंस, दक्षिण कोरिया के साथ जहाज निर्माण और निवेश तथा यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते जैसे प्रयास इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
- यूरोप : भारत के लिए नया आर्थिक स्तंभ
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है। लगभग दो दशकों से चल रही व्यापार वार्ता बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ी। भारत ने यूरोपीय उत्पादों के लिए कुछ टैरिफ कम करने पर सहमति जताई, जबकि बदले में भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच की संभावना बनी। यूरोप भारत के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं है। वह तकनीक, पूंजी, उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण, हरित तकनीक और रक्षा सहयोग का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। फ्रांस के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी इसका उदाहरण है। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध पहले से मजबूत हैं लेकिन अब एआई, डिजिटल तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ रही है। भारत के लिए यूरोप के साथ संबंधों का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है।
यूरोप के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इससे ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। इसके अलावा यूरोपीय कंपनियां भारत में निवेश करती हैं तो इससे पूंजी और तकनीक के साथ रोजगार भी बढ़ सकता है। लेकिन मुक्त व्यापार समझौते का दूसरा पहलू भी है। विदेशी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार अधिक खुलने से घरेलू कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ेगा। विशेष रूप से छोटी और मध्यम भारतीय कंपनियां यदि उत्पादकता और तकनीक में पीछे हैं तो उनके लिए यूरोपीय कंपनियों से मुकाबला करना कठिन हो सकता है। इसलिए केवल बाजार खोलना पर्याप्त नहीं है। भारत को अपने घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ानी होगी।
- अमेरिका से दूरी नहीं, बल्कि जोखिम का प्रबंधन
भारत की नई रणनीति को अमेरिका से दूरी बनाने के रूप में देखना सही नहीं होगा। वास्तविकता यह है कि भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, तकनीक, शिक्षा, निवेश और इंडो-पैसिफिक रणनीति के कारण बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देश चीन की बढ़ती ताकत को लेकर भी कई समान चिंताएं रखते हैं। लेकिन व्यापार और रूस के मुद्दे पर मतभेदों ने भारत को यह एहसास कराया है कि किसी भी एक साझेदार पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा कर सकती है। यही कारण है कि भारत एक ओर अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है तो दूसरी ओर जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों के साथ अपने विकल्प मजबूत कर रहा है। यह रणनीति ‘बैलेंसिंग’ से अधिक ‘विविधता’ की रणनीति दिखाई देती है। भारत का संदेश साफ है कि किसी एक देश के साथ संबंध खराब होने की स्थिति में भी उसकी अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हित पूरी तरह प्रभावित न हों।
- रूस के साथ संबंध: पुरानी दोस्ती की नई परीक्षा
रूस भारत की विदेश नीति का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के दशकों पुराने संबंध हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में भी रूस भारत के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद भारत के सामने कठिन कूटनीतिक संतुलन पैदा हुआ। पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करते हुए भारत रूस से भी रक्षा और ऊर्जा संबंध बनाए रखना चाहता है। शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर रूस के साथ संवाद जारी रखना इसी रणनीति का हिस्सा है। रूस के साथ संबंध भारत को ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराते हैं। इससे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ती है। लेकिन रूस पर अत्यधिक निर्भरता भी जोखिम पैदा कर सकती है। युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक व्यापारिक भूमिका बदल रही है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी रक्षा आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा किसी एक स्रोत पर निर्भर न हो।
- ऊर्जा सुरक्षा : भारत की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संकट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य इसका सटीक उदाहरण है। यदि इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान पैदा होता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत के आयात पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं होगा। महंगा तेल परिवहन लागत बढ़ाएगा, जिससे खाद्य पदार्थों और औद्योगिक वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। इसीलिए भारत को ऊर्जा स्रोतों और परिवहन मार्गों दोनों में विविधता लानी होगी। सऊदी अरब, यूएई, रूस, अमेरिका और अन्य उत्पादकों के साथ संबंध बनाए रखना तथा वैकल्पिक ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे पर निवेश करना लंबे समय में भारत के लिए जरूरी है।
महत्वपूर्ण खनिज और मैन्युफैक्चरिंग
भारत की अगली बड़ी चुनौती मैन्युफैक्चरिंग है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी तकनीकों के लिए लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज जरूरी हैं। यदि भारत इन खनिजों के लिए सीमित देशों पर निर्भर रहता है तो भविष्य में सप्लाई चेन संकट उसकी औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित कर सकता है। इसलिए भारत का अलग-अलग देशों के साथ खनिज और औद्योगिक साझेदारी विकसित करना आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा है। यहां विदेश नीति सीधे ‘मेक इन इंडिया’ और रोजगार से जुड़ जाती है। यदि विदेशी तकनीक भारत में आती है, लेकिन उत्पादन विदेश में ही होता रहता है, तो भारत को सीमित लाभ मिलेगा। असली फायदा तब होगा जब तकनीक के साथ भारत में उत्पादन, अनुसंधान और रोजगार भी पैदा हों।
भारत की इस बहु-दिशात्मक विदेश नीति के कई स्पष्ट फायदे हैं। पहला फायदा जोखिम में कमी। यदि एक बाजार में समस्या आती है तो दूसरे बाजार भारतीय निर्यात को सहारा दे सकते हैं। दूसरा तकनीक का हस्तांतरण। रक्षा, एआई, जहाज निर्माण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विदेशी तकनीक भारत की औद्योगिक क्षमता बढ़ा सकती है। तीसरा निवेश, अलग-अलग देशों के साथ आर्थिक समझौते विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद कर सकते हैं। चौथा—रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और नए औद्योगिक कॉरिडोर रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। पांचवां रणनीतिक स्वायत्तता, भारत किसी एक शक्ति के दबाव में आने से बच सकता है। छठा वैश्विक प्रभाव, जब दुनिया के कई महत्वपूर्ण देश भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहते हैं, तो भारत की वैश्विक सौदेबाजी की शक्ति बढ़ती है।
इस रणनीति की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि बहुत अधिक साझेदारियों को एक साथ संभालना आसान नहीं है। भारत को अमेरिका के साथ संबंध भी मजबूत रखने हैं, रूस से रक्षा और ऊर्जा सहयोग भी जारी रखना है, यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाना है और चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग भी करना है। इन सभी हितों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। दूसरी चुनौती है समझौतों को लागू करना। किसी समझौते पर हस्ताक्षर करना आसान है लेकिन उससे वास्तविक निवेश, रोजगार और तकनीक भारत में लाना कठिन प्रक्रिया है। नौकरशाही, भूमि, लॉजिस्टिक्स, टैक्स व्यवस्था, कुशल श्रम और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याएं निवेश की गति को प्रभावित कर सकती हैं। तीसरी चुनौती घरेलू उद्योग की है। व्यापार समझौतों से बाजार खुलेंगे लेकिन भारतीय कंपनियों को भी वैश्विक स्तर की गुणवत्ता और उत्पादकता हासिल करनी होगी। चौथी चुनौती यह है कि विदेश नीति की सफलता को केवल विदेश यात्राओं और समझौतों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। वास्तविक सवाल यह है कि इन समझौतों से भारत के नागरिकों और उद्योगों को कितना लाभ मिला।
- व्यक्तिगत कूटनीति की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का एक दिलचस्प पहलू उनकी व्यक्तिगत कूटनीति भी है। दुनिया के नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने और सार्वजनिक रूप से दोस्ताना माहौल दिखाने की उनकी शैली भारतीय विदेश नीति की पहचान बन चुकी है। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ ‘मेलोडी’ टॉफी वाला प्रसंग सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुआ। इसी तरह अलग-अलग वैश्विक नेताओं के साथ मोदी की तस्वीरें और व्यक्तिगत केमिस्ट्री अक्सर भारतीय राजनीति और मीडिया में चर्चा का विषय बनती हैं। इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि व्यक्तिगत संबंध कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में संवाद का रास्ता खोल सकते हैं। लेकिन इसकी सीमा भी है। अंतरराष्ट्रीय संबंध अंततः राष्ट्रीय हितों, संस्थानों और दीर्घकालिक रणनीतिक गणनाओं पर आधारित होते हैं। व्यक्तिगत दोस्ती हमेशा व्यापारिक विवाद या रणनीतिक मतभेदों को समाप्त नहीं कर सकती। अमेरिका के साथ भारत का अनुभव इसका उदाहरण है। नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध मजबूत होने के बावजूद नीतिगत मतभेद पैदा हो सकते हैं।
भारत की वर्तमान विदेश नीति को सबसे अच्छी तरह ‘विविधीकरण के माध्यम से रणनीतिक स्वायत्तता’ के रूप में समझा जा सकता है। भारत न तो अमेरिका से पूरी तरह दूर जा सकता है और न ही रूस को छोड़ सकता है। वह यूरोप को नजरअंदाज नहीं कर सकता और चीन की चुनौती के सामने जापान तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सहयोग भी जरूरी है। इसलिए मोदी सरकार का रास्ता एक ही शक्ति-केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय कई साझेदारों के साथ समानांतर संबंध बनाना है। यह रणनीति मौजूदा वैश्विक अस्थिरता में व्यावहारिक दिखाई देती है। लेकिन इसकी सफलता विदेश यात्राओं की संख्या या समझौतों की सुर्खियों से तय नहीं होगी।
यह सफलता तब मानी जाएगी जब इन साझेदारियों से भारत में नौकरियां पैदा हों, तकनीक आए, मैन्युफैक्चरिंग बढ़े, निर्यात बढ़े, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो और भारतीय कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनें। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपनी कूटनीतिक सक्रियता को आर्थिक परिणामों में बदल सके।
यदि भारत यह करने में सफल रहता है तो वैश्विक अस्थिरता उसके लिए केवल खतरा नहीं बल्कि अवसर भी बन सकती है। दुनिया जब नए साझेदार खोज रही है, तब भारत के पास अपनी विशाल अर्थव्यवस्था, बाजार, युवा आबादी और बढ़ती तकनीकी क्षमता के बल पर खुद को एक आवश्यक वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करने का मौका है। लेकिन इसके लिए विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू अर्थव्यवस्था को भी उतना ही मजबूत करना होगा। आखिरकार, मजबूत विदेश नीति की असली ताकत मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था होती है।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
बारिश से टूटी सड़कों पर CM योगी सख्त, तत्काल मरम्मत के निर्देश; त्योहारों से पहले 681 प्रमुख मार्ग होंगे गड्ढामुक्त

- शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर मरम्मत कराने का निर्देश

- 09 विभागों के करीब 4.36 लाख किमी मार्गों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, 50 हजार किमी के गड्ढामुक्ति लक्ष्य पर चल रहा काम

लखनऊ। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की हालत बारिश के कारण खराब हुई है, उन्हें तत्काल दुरुस्त कर आवागमन के योग्य बनाया जाए। वहीं, बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के मुताबिक ऐसी सड़कों का स्थायी नवीनीकरण भी कराया जाए।

शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का दौर अभी जारी है, इसलिए सड़क की स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने बारिश के दौरान नए सिरे से क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों का भी सर्वे कराने को कहा, ताकि मरम्मत कार्य में देरी न हो।

- त्योहारों से पहले 681 अहम मार्गों पर विशेष फोकस

आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान अधिक भीड़ और आवागमन वाले रास्ते शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इन मार्गों को त्योहारों से पहले बेहतर स्थिति में लाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, प्रमुख बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों तक पहुंचने वाली सड़कों की मरम्मत को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

- सिर्फ पैचवर्क से काम नहीं चलेगा

मुख्यमंत्री योगी ने गड्ढामुक्ति अभियान की गुणवत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क की खराब स्थिति को केवल पैचवर्क करके खत्म करने की औपचारिकता न की जाए। जहां तत्काल मरम्मत जरूरी है, वहां पहले सड़क को मोटरेबल बनाया जाए और बारिश खत्म होने के बाद उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मरम्मत और नवीनीकरण के काम में तेजी के साथ गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

- 4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा, 50 हजार किमी गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य

बैठक में प्रदेश के नौ विभागों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया कि इन विभागों के पास करीब 4.36 लाख किलोमीटर मार्ग हैं। मौजूदा अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक लगभग 5,751 किलोमीटर मार्गों पर काम पूरा होने की जानकारी दी गई। अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे समेत विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई। ऐसे मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों के आधार पर विभागवार गड्ढामुक्ति का लक्ष्य तय किया जाएगा।

30 हजार किमी सड़क के नवीनीकरण का लक्ष्य

सड़क नवीनीकरण और विशेष मरम्मत की प्रगति भी बैठक में रखी गई। अधिकारियों के अनुसार करीब 30 हजार किलोमीटर मार्गों के नवीनीकरण तथा 5 हजार किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का लक्ष्य निर्धारित है। अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा किया जा चुका है, जबकि विशेष मरम्मत के तहत लगभग 700 किलोमीटर मार्गों पर काम होने की जानकारी दी गई।

- कई विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों से भी सड़क सुधार की कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।

योगी ने सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें सीधे आम लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए जहां जनता की आवाजाही अधिक है, वहां काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।

बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री ब्रजेश सिंह, औद्योगिक विकास विभाग के राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद और ग्राम्य विकास राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

लखनऊ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आज भाजपा के सोशल मीडिया के राष्ट्रीय संयोजक दीपक महस्के ने शिष्टाचार भेंट की।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के क्रियान्वयन के लिए जिलों में अभियान चलाकर बढ़ाएं मानव दिवस सृजन : केशव प्रसाद मौर्य

उप मुख्यमंत्री ने पीएम आवास योजना-ग्रामीण के 6.18 लाख आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत कर पूर्ण कराने के दिए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जनपदों में अभियान चलाकर मानव दिवस सृजन में बढ़ोतरी के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के कार्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, जिससे योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करते हुए विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित जनपद और विकसित ग्राम पंचायत के संकल्प को साकार करने में प्रभावी भूमिका निभा सके। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी योजना के कार्यों की नियमित समीक्षा करें 

श्री मौर्य ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश को 6.18 लाख आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। सभी जनपद इन आवासों को समयबद्ध ढंग से स्वीकृत करते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत बेसहारा पात्र महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा अन्य प्राथमिकता श्रेणी के पात्र परिवारों, जिन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें विशेष अभियान चलाकर चिन्हित किया जाए और पात्रता के अनुसार योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम चौपालों में योजना की पात्रता एवं अन्य शर्तों की विस्तार से जानकारी देते हुए पात्र व्यक्तियों को चिन्हित करने तथा उन्हें आवास उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था की जाए।

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकसित भारत-जी राम जी योजना की महिला श्रमिकों तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन समूहों को अभी तक सीसीएल अथवा बैंक क्रेडिट की सुविधा नहीं मिली है, ऐसे सभी पात्र समूहों को शत-प्रतिशत सीसीएल उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। यह सुनिश्चित कराया जाय कि सभी खंड विकास अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करें। प्रदेश में नए स्वयं सहायता समूहों के गठन के कार्य में भी तेजी लाई जाए। समूह सखियों के मानदेय में वृद्धि के लिए अन्य राज्यों में लागू बेहतर मॉडलों का अध्ययन कर अपेक्षित कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत कैडर के मानदेय का भुगतान भी अनिवार्य रूप से समय से सुनिश्चित किया जाए।

श्री मौर्य ने टीएचआर प्लांट्स की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सोलर एवं खाद्य संस्करण सब्सिडी का पूरा-पूरा लाभ उठाते हुए प्लांट्स को और अधिक प्रभावी एवं ऊर्जा दक्ष बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम चौपालों को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम चौपालों का त्रैमासिक रोस्टर तैयार कर माननीय सांसद एवं विधायकगण के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित लोगों को भी उपलब्ध कराया जाए। ग्राम चौपालों की नियमित समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि इनमें ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी प्रभावी ढंग से हो।

उन्होंने प्रदेश में निर्मित सभी अमृत सरोवरों की साफ-सफाई एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अमृत सरोवरों को स्वच्छ, उपयोगी एवं बेहतर स्वरूप में रखा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में इनके निर्माण का उद्देश्य पूर्ण हो सके।

श्री मौर्य ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में दृष्टि की बैठक अभी तक नहीं हुई है, वहां तत्काल बैठक आयोजित कर उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर कार्य करने वाले जनपदों एवं विकासखंडों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले जनपदों और विकासखंडों को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे अन्य क्षेत्र भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने कार्यों में सुधार कर सकें।

संत कबीर अकादमी की कार्यकारणी की बैठक सम्पन्न

अकादमी द्वारा संचालित समस्त सांस्कृतिक कार्यक्रम शिक्षण संस्थाओं के सहयोग से कराये जाए : जयवीर सिंह

लखनऊ। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में संत कबीर अकादमी की कार्यकारणी की बैठक पर्यटन भवन के सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में अध्यक्ष द्वारा निर्देशित किया गया कि अकादमी द्वारा कराए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं गतिविधियां प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों विश्वविद्यालय में महाविद्यालय में सहयोग से आयोजित की जाएं, इसके साथ ही अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा पंचामृत योजना के अंतर्गत शोध, सर्वेक्षण प्रकाशन आदि कार्यों तथा कबीर पर आधारित सांस्कृतिक गतिविधियां छमाही पत्रिका का प्रकाशन आदि पर विस्तृत चर्चा की गईं एवं आगामी कार्यक्रम की कार्ययोजना पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। 

बैठक में मुख्य रूप से जयवीर सिंह माननीय मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश, अमृत अभिजात अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश शासन, प्रोफेसर हिमांशु शुक्ला डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या, संजय कुमार सिंह निदेशक संस्कृति निदेशालय उत्तर प्रदेश, अनिल कुमार सिंह विशेष सचिव नियोजन विभाग उत्तर प्रदेश शासन, हृदय राम तिवारी उप जिला अधिकारी खलीलाबाद, महंत विचार दास कबीर मठ संत कबीर नगर मगहर के प्रतिनिधि सदस्य हरि शरण दास के साथ ही ऑनलाइन के माध्यम से हरि प्रसाद जी गोरखपुर एवं गोपाल सिंह चौहान राजस्थान एवं अतुल द्विवेदी निदेशक संत कबीर अकादमी उपस्थित रहे बैठक के अंत में निदेशक द्वारा अध्यक्ष एवं बैठक में उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही बैठक संपन्न हुई।