‘यूपी डायलॉग’ में जुटे 100 से ज्यादा युवा, उत्तर प्रदेश के एक दशक के बदलाव पर हुई चर्चा
- प्रदेश की अर्थव्यवस्था और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर हुई चर्चा
- विशेषज्ञों ने कहा, ‘2017 में ₹52 हजार थी प्रति व्यक्ति आय, अब ₹1.20 लाख’
- जनजातीय समाज और युवाओं के लिए चल रही योजनाओं पर भी चर्चा
लखनऊ। लखनऊ के हजरतगंज स्थित एसेंस बैंक्वेट में फ्रेंड्स ऑफ यूपी की ओर से यूपी डायलॉग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम 'उत्तर प्रदेश का एक दशक' रही। इसमें ‘फ्रेंड्स ऑफ योगी’ के 100 से ज्यादा युवा वॉलंटियर्स शामिल हुए। इस दौरान पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव और आने वाले समय में प्रदेश के विकास को लेकर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल, प्रोफेसर अमित कुशवाह और पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान युवाओं ने वक्ताओं से कई मुद्दों पर सवाल पूछे और उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर अपने सुझाव भी दिए।
आर्थिक बदलाव और एक्सप्रेसवे पर हुई चर्चा
प्रोफेसर एम.के. अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश की जीडीपी में लगातार दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश से होने वाले निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने प्रदेश में लिंगानुपात बेहतर होने की बात भी कही। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में केवल एक एक्सप्रेसवे था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर दस हो गई है। उन्होंने दावा किया कि देश के करीब 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं।
‘₹52 हजार से बढ़कर ₹1.20 लाख हुई प्रति व्यक्ति आय’
पॉलिटिकल एनालिस्ट शशांक शेखर सिंह ने कहा कि 2017 के मुकाबले उत्तर प्रदेश की आर्थिक और वित्तीय स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस की स्थिति में है। उनके मुताबिक वर्ष 2017 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 52 हजार रुपये थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपये हो गई है।
उन्होंने जनजातीय समाज के लिए किए जा रहे कामों का भी जिक्र किया। सिंह ने बताया कि 65 गांवों में लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिया गया है। मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए जरूरतमंद परिवारों तक घर, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं, अभ्युदय योजना के जरिए युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास में युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। युवाओं से प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने और अपने सुझाव सामने रखने की अपील भी की गई।








- दो दिवसीय यूपी दौरे पर हैं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री
- अपर परिवहन आयुक्त ने आवेदकों से लिया फीडबैक, सेवा प्रदाता कंपनी के कर्मचारियों को आईडी कार्ड पहनने के निर्देश
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शनिवार को अवैध निर्माण और प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर प्रवर्तन टीम ने बीबीडी थाना क्षेत्र में करीब 140 बीघा क्षेत्रफल में की जा रही 11 अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान निजी विकासकर्ताओं द्वारा किए गए अवैध निर्माण भी बुलडोजर से ढहा दिए गए। इसके साथ ही चौक, बाजारखाला, सआदतगंज, दुबग्गा और बीबीडी क्षेत्र में आठ अवैध व्यावसायिक निर्माणों को सील किया गया। प्रवर्तन जोन-1 के जोनल अधिकारी रवि नंदन सिंह ने बताया कि बीबीडी थाना क्षेत्र के बगुलहा और सिकन्दरपुर खुर्द में इंदिरा नहर तथा किसान पथ के आसपास अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही थी। जांच के बाद कार्रवाई करते हुए करीब 140 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की जा रही 11 अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया गया। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बीबीडी थाना क्षेत्र के लौलाई, हासेमऊ और भरवारा में अवैध रो-हाउस समेत तीन अवैध निर्माणों को सील किया गया। वहीं, प्रवर्तन जोन-7 के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार के नेतृत्व में चौक, बाजारखाला, सआदतगंज और दुबग्गा क्षेत्र में भी अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न लोगों द्वारा किए जा रहे पांच अवैध व्यावसायिक निर्माणों को सील किया गया। एलडीए अधिकारियों के मुताबिक, प्राधिकरण की ओर से अवैध प्लाटिंग और बिना मानचित्र स्वीकृति के किए जा रहे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
लखनऊ। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आज धरने का आठवां दिन था जिसमें चंदौली, सोनभद्र से सवर्ण समाज के लोगों बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हुए सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि समाज में जहर फैलाने वाले काला कानून यूजीसी, एससीएसटी एक्ट आरक्षण सामाजिक समरसता सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहा है, सामान्य वर्ग के बच्चे जैसे ही डिग्री कॉलेज, यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने जायेगे उन्हें अपराधी,शोषण करता यूजीसी रेगुलेशन 2026 घोषित कर दे रहा है यूजीसी रेगुलेशन में यदि सवर्ण के साथ किसी तरह का अत्याचार उत्पीड़न होता है तो वह जातीय भेद भाव नहीं माना जाएगा लेकिन दूसरी तरफ दलित, ओबीसी का बच्चा सामान्य वर्ग की बेटी के साथ अभद्रा करता है वह उसका विरोध करती है तो यूजीसी रेगुलेशन में के तहत दलीय ओबीसी का बच्चा शिकायत करता है तो यह जातिय भेद भाव माना जाएगा लेकिन सामान्य वर्ग का बच्चा के साथ शोषण हुआ वह जातीय भेद भाव नहीं माना जाएगा, गरीबी जाति देख कर नहीं आती है हर वर्ग हर जाती में गरीब होते हैं तो आरक्षण जाती के नाम पर क्यों,आरक्षण वास्तव में जिसको चाहिए उन्हें न मिलकर उसी वर्ग के पीढ़ी डर पीढ़ी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं गरीब दलित का हक अमीर दलित खा रहा है जबकि दोष सवर्ण पर दिया जा रहा है, एससीएसटी एक्ट का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है अलीगढ़ में एक दलित महिला ने फर्जी मुकदमा एससीएसटी एक्ट में सवर्ण ओबीसी पर लगाकर 10 साल में 41 लाख रुपए सरकार से एव समझौते के नाम पर ली स्वर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि न्याय समानता सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं यह हमारा हक है जिसे लेकर कर रहेगी सरकार सामान्य वर्ग को कमजोर समझने की भूल न करे दलित मुस्लिम तुष्टिकरण बंद करे सवर्ण समाज सरकार बनवा सकती है तो सरकार गिरा भी सजाती है यदि समय रहते सरकार यूजीसी रेगुलेशन वापस नहीं लेती रिजर्वेशन रिफॉर्म नहीं करती है तो 2027,2029 बीजेपी को वही भेज दिया जाएगा जहां 2014 के पहले थी
- 15 सितंबर तक फिटनेस प्रमाण-पत्र, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करना होगा अनिवार्य
- उप मुख्यमंत्री ने कहा, विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम



Sep 06 2026, 15:08
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
10.0k